Author: bharati

  • रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ

    रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 10 मई 2026 से शुरू हुआ रोग पंचक 14 मई की रात 10 बजकर 34 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है। रविवार से शुरू होने के कारण इसे ‘रोग पंचक’ कहा जाता है, जिसे स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इन पांच दिनों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि छोटी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पंचक के दौरान नए मकान का निर्माण, नींव भरना, छत डालना या किसी स्थायी निर्माण कार्य की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है। लकड़ी से जुड़े काम जैसे पलंग, मेज, कुर्सी या फर्नीचर बनवाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पंचक में शुरू किए गए कामों में रुकावट, नुकसान या मानसिक तनाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि शुभ और स्थायी कार्यों को इन दिनों टालने की परंपरा चली आ रही है।

    ज्योतिष शास्त्र में पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को भी अशुभ बताया गया है। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए इन पांच दिनों तक इस ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर रोग पंचक में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका मानी जाती है। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो तो पूजा-पाठ और शुभ उपाय करने के बाद ही निकलना बेहतर माना जाता है।

    पंचक के प्रकारों की बात करें तो रविवार का पंचक रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक कहलाता है। इनमें राज पंचक को छोड़कर बाकी पंचकों को विशेष सावधानी वाला समय माना गया है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो अंतिम संस्कार रोका नहीं जाता। अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुश से बने पुतले का भी दाह संस्कार किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर आने वाले संकट और पंचक दोष का प्रभाव कम हो जाता है।

  • हरित ऊर्जा से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहा अदाणी ग्रुप: गौतम अदाणी

    हरित ऊर्जा से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहा अदाणी ग्रुप: गौतम अदाणी

    नई दिल्ली । एक बड़े उद्योग सम्मेलन के दौरान अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत के भविष्य को लेकर अपनी रणनीति और विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि समूह ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहा है जो आने वाले वर्षों में देश के डिजिटल और स्वच्छ विकास की मजबूत नींव साबित होगा। उनके मुताबिक, हरित ऊर्जा, डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीकी ढांचे में किया जा रहा निवेश भारत को नई दिशा देने वाला है।

    उन्होंने बताया कि गुजरात के खावड़ा क्षेत्र में विकसित हो रहा विशाल नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। इस परियोजना का बड़ा हिस्सा पहले ही शुरू किया जा चुका है और इसे भारत की ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है। उनका कहना था कि आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा देश की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल होगी और भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    गौतम अदाणी ने कहा कि समूह ने ऊर्जा परिवर्तन और हरित ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश की योजना बनाई है। उनका मानना है कि भविष्य में वही देश सबसे मजबूत होंगे जो ऊर्जा और तकनीक दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन पाएंगे। इसी सोच के साथ समूह लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।

    उन्होंने डेटा सेंटर को भी भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर को देखते हुए मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इसी दिशा में देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े डेटा सेंटर कैंपस तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे डिजिटल क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का भविष्य केवल मशीनों और सर्वर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें लाखों युवाओं की भागीदारी होगी। इंजीनियर, तकनीशियन, ऑपरेटर और स्किल्ड प्रोफेशनल्स इस बदलाव की असली ताकत बनेंगे। इसी वजह से समूह कौशल विकास और नई तकनीकों से जुड़ी ट्रेनिंग पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

    सामाजिक विकास को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम करने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि देश का भविष्य तभी मजबूत होगा जब तकनीकी विकास के साथ समाज का हर वर्ग आगे बढ़े।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा ऐसी जगहों पर निर्माण किया जहां पहले संभावनाएं बेहद कम थीं। उनका मानना है कि चुनौतियों के बीच ही सबसे बड़े अवसर छिपे होते हैं और भविष्य उन्हीं का होता है जो नई सोच और बड़े विजन के साथ आगे बढ़ते हैं।

  • ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ निकली फतह-3! खाड़ी देशों को चीनी मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान

    ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ निकली फतह-3! खाड़ी देशों को चीनी मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान




    नई दिल्ली। पाकिस्तान अब चीन में बनी फतह-3 मिसाइल को खाड़ी देशों में बेचने की तैयारी में जुट गया है। पाकिस्तान इसे भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल का जवाब बताकर सऊदी अरब, कतर और दूसरे अरब देशों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फतह मिसाइल भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम के सामने पूरी तरह विफल साबित हुई थी। इसके बावजूद पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी सैन्य ताकत के तौर पर पेश कर रहा है।

    ईरान-अमेरिका तनाव के बाद पाकिस्तान खुद को खाड़ी देशों का सुरक्षा साझेदार दिखाने में लगा है। इसी रणनीति के तहत वह चीनी हथियारों को अरब बाजार में उतारना चाहता है। इससे पहले पाकिस्तान JF-17 फाइटर जेट को लेकर भी बड़े दावे कर चुका है और अब फतह-3 मिसाइल को ब्रह्मोस की टक्कर की मिसाइल बताकर प्रचार किया जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक फतह-3 असल में चीन की HD-1 सुपरसोनिक मिसाइल का मॉडिफाइड वर्जन मानी जा रही है, जिसे चीन की कंपनी Guangdong Hongda ने विकसित किया है। पाकिस्तान का दावा है कि यह मिसाइल 2.5 से 4 मैक की स्पीड से उड़ सकती है और 450 किलो तक वारहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी रेंज करीब 290 से 450 किलोमीटर बताई जा रही है।

    पाकिस्तानी मीडिया इसे जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने वाली आधुनिक मिसाइल बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी क्षमता ब्रह्मोस के मुकाबले काफी सीमित है। ब्रह्मोस जहां लंबी दूरी, सटीक निशाने और भारी विनाशक क्षमता के लिए जानी जाती है, वहीं फतह-3 अभी तक खुद को युद्धक्षेत्र में साबित नहीं कर पाई है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार नूर खान एयरबेस के आसपास हुए हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल ताकत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना शुरू किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पाकिस्तान के जरिए खाड़ी देशों के हथियार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जहां अब तक अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है। माना जा रहा है कि सऊदी अरब भविष्य में फतह-3 मिसाइल या JF-17 लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर सकता है, क्योंकि वह ईरान के खतरे को देखते हुए अपनी सैन्य क्षमता लगातार बढ़ा रहा है

  • नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी! भारतीयों के लिए ID कार्ड जरूरी, रोहिंग्या घुसपैठ के डर से हाई अलर्ट

    नेपाल बॉर्डर पर सख्ती बढ़ी! भारतीयों के लिए ID कार्ड जरूरी, रोहिंग्या घुसपैठ के डर से हाई अलर्ट




    नई दिल्ली। नेपाल ने भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोरंग जिले की जोगबनी सीमा चौकी पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है। नेपाल प्रशासन का कहना है कि बढ़ती अवैध घुसपैठ, संदिग्ध गतिविधियों और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए जांच अभियान तेज किया गया है।

    मोरंग जिला सुरक्षा समिति के फैसले के बाद सीमा पर आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। सहायक मुख्य जिला अधिकारी सरोज कोइराला ने साफ किया कि यह फैसला किसी द्विपक्षीय समझौते के तहत नहीं बल्कि नेपाल की आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि खुली सीमा का फायदा उठाकर अवैध घुसपैठिए और अपराधी नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए सतर्कता बढ़ाना जरूरी हो गया है।

    रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल प्रशासन को आशंका है कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों के बाद रोहिंग्या मुसलमान नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते सीमा पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है। नेपाली मीडिया ने भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि सीमा से लगे इलाकों में लोगों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर अलर्ट मोड में हैं।

    नेपाल प्रशासन ने खासतौर पर ट्रेनों के आने के समय अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं, क्योंकि उस दौरान बड़ी संख्या में लोग सीमा पार करते हैं। जानकारी के मुताबिक एक साथ 500 से 1000 लोगों की आवाजाही होने पर पहचान पत्रों की जांच की जा रही है। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड भी तैनात किए गए हैं ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा एजेंसियों का यह भी कहना है कि सीमा पार फरार अपराधियों की आवाजाही रोकना भी इस अभियान का बड़ा उद्देश्य है। रिपोर्ट्स के अनुसार नेपाल के कई फरार कैदियों के भारत में छिपे होने की आशंका है, जिन्हें पकड़ने के लिए सीमा निगरानी मजबूत की गई है। फिलहाल यह फैसला जिला स्तरीय सुरक्षा समिति द्वारा लागू किया गया है और इसे नेपाल की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

  • किशोर कुमार से लेकर लता मंगेशकर तक, जानिए उन गीतों के बारे में जिन्हें गाकर खामोश हो गईं सुरों की लहरें।

    किशोर कुमार से लेकर लता मंगेशकर तक, जानिए उन गीतों के बारे में जिन्हें गाकर खामोश हो गईं सुरों की लहरें।


    नई दिल्ली ।भारतीय संगीत जगत के इतिहास में कुछ ऐसी आवाजें रही हैं जिन्होंने न केवल दशकों तक राज किया, बल्कि उनके जाने के बाद भी उनका जादू कम नहीं हुआ। मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोसले और मुकेश—ये वो पांच स्तंभ हैं जिनके बिना हिंदी सिनेमा का संगीत अधूरा है। नियति का खेल देखिए कि इनमें से कई दिग्गजों ने अपनी मृत्यु से ठीक कुछ समय पहले ही ऐसे गीतों को अपनी आवाज दी, जो आज भी सुनने वालों के दिलों को झकझोर देते हैं। इन महान कलाकारों का अंतिम रिकॉर्ड किया हुआ काम केवल एक गीत नहीं, बल्कि उनके प्रशंसकों के लिए एक भावनात्मक विरासत है, जिसे सुनकर आज भी लोग भावुक हो जाते हैं।

    महान गायक मोहम्मद रफी ने अपनी मृत्यु से मात्र एक दिन पहले, 30 जुलाई 1980 को संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के लिए अपना आखिरी गाना रिकॉर्ड किया था। फिल्म ‘आस पास’ का वह गीत था—’तू कहीं आसपास है दोस्त’। विडंबना देखिए कि इस गाने के बोल उनकी अपनी विदाई की आहट जैसे लग रहे थे। इसके अगले ही दिन 31 जुलाई को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। वहीं, हरफनमौला किशोर कुमार ने 12 अक्टूबर 1987 को फिल्म ‘वक्त की आवाज’ के लिए ‘गुरु गुरु आ जाओ गुरु’ गाना रिकॉर्ड किया और नियति का क्रूर मजाक देखिए कि ठीक अगले दिन 13 अक्टूबर को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मिथुन चक्रवर्ती और श्रीदेवी पर फिल्माया गया यह गाना उनकी बहुमुखी प्रतिभा का अंतिम प्रमाण बना।

    सुरों की मलिका लता मंगेशकर ने साल 2022 में अंतिम सांस ली, लेकिन उनकी जादुई आवाज का आखिरी स्पर्श साल 2018 और 2019 में महसूस किया गया। उन्होंने एक विशेष अवसर के लिए ‘गायत्री मंत्र’ को अपनी दिव्य आवाज दी थी, जबकि फिल्मी गीतों की बात करें तो 2019 में ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की’ उनका आखिरी रिकॉर्डेड गाना माना जाता है। इसी कड़ी में आशा भोसले ने भी अपने अंतिम समय तक संगीत से नाता नहीं तोड़ा। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय बैंड के साथ मिलकर ‘द शैडोई लाइट’ जैसे अनूठे प्रोजेक्ट पर काम किया, जो उनकी वैश्विक संगीत समझ को दर्शाता है। अप्रैल 2026 में उनके निधन से संगीत के एक और युग का अंत हो गया, लेकिन उनकी आवाज की ऊर्जा आज भी मौजूद है।

    दर्दभरी और रूहानी आवाज के मालिक मुकेश का जाना भी संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ा सदमा था। 27 अगस्त 1976 को अमेरिका में एक कॉन्सर्ट के दौरान अचानक उनका निधन हो गया। जाने से पहले उन्होंने फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के लिए बेहद खूबसूरत और शुद्ध हिंदी शब्दों से सजा गीत ‘चंचल, शीतल, निर्मल, कोमल’ रिकॉर्ड किया था। आज जब ये गाने बजते हैं, तो ऐसा लगता है मानो ये कलाकार आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। इन गीतों की रिकॉर्डिंग और उनके रिलीज होने के बीच की कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि कलाकार भले ही चला जाए, लेकिन उसकी कला और उसकी अंतिम स्मृतियां समय की सीमा को पार कर हमेशा के लिए अमर हो जाती हैं।

  • ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ रही फतह-3! चीन की मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान, खाड़ी देशों को साधने की कोशिश

    ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ रही फतह-3! चीन की मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान, खाड़ी देशों को साधने की कोशिश




    नई दिल्ली। भारत के खिलाफ सैन्य संतुलन बनाने की कोशिश में पाकिस्तान अब चीन निर्मित हथियारों को खाड़ी देशों तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है। पाकिस्तानी सेना अपनी ‘फतह-3’ मिसाइल को भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का जवाब बताकर सऊदी अरब और कतर जैसे देशों को आकर्षित करने में जुटी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह मिसाइल भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम के सामने प्रभावी साबित नहीं हो सकी थी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान खुद को खाड़ी देशों का सुरक्षा साझेदार दिखाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बाद इस्लामाबाद ने रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए चीन के हथियारों को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। पहले जेएफ-17 फाइटर जेट और अब फतह-3 मिसाइल को लेकर पाकिस्तान बड़े दावे कर रहा है।

    पाकिस्तानी मीडिया फतह-3 को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बताते हुए इसे ब्रह्मोस की टक्कर का हथियार बता रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह जमीन और समुद्री दोनों लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है और कम ऊंचाई पर तेज रफ्तार से उड़ान भरने के कारण इसे रोकना मुश्किल है। लेकिन रक्षा जानकारों का कहना है कि इसकी तकनीक काफी हद तक चीन की HD-1 मिसाइल पर आधारित है, जिसे Guangdong Hongda कंपनी ने विकसित किया था।

    बताया जा रहा है कि फतह-3 की रेंज करीब 290 से 450 किलोमीटर तक है और यह 240 से 450 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकती है। इसकी गति 2.5 से 4 मैक तक बताई जाती है। वहीं दूसरी ओर भारत की ब्रह्मोस मिसाइल लंबी रेंज, अधिक सटीकता और भारी मारक क्षमता के लिए जानी जाती है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों के जरिए पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार नूर खान एयरबेस के पास हुए हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को झटका दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल क्षमता को बढ़ाने और नए खरीदार तलाशने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पाकिस्तान के जरिए खाड़ी देशों के हथियार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जहां अब तक अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान खुद को रक्षा साझेदार के रूप में पेश कर रहा है और चीनी तकनीक वाले हथियारों को “कम लागत वाला विकल्प” बताकर प्रचारित कर रहा है।

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि सऊदी अरब भविष्य में फतह-3 मिसाइल या जेएफ-17 फाइटर जेट में रुचि दिखा सकता है, क्योंकि वह क्षेत्रीय खतरों को देखते हुए अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है। हालांकि रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणाली की बराबरी करना पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए अभी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • फिल्म जगत में वेतन के अंतर पर अभिनेत्री का बेबाक नज़रिया, बताया क्यों मेकर्स को देनी पड़ी थी उन्हें बड़ी रकम।

    फिल्म जगत में वेतन के अंतर पर अभिनेत्री का बेबाक नज़रिया, बताया क्यों मेकर्स को देनी पड़ी थी उन्हें बड़ी रकम।


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1989 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ एक मील का पत्थर मानी जाती है। इस फिल्म ने न केवल प्रेम कहानियों की परिभाषा बदली, बल्कि सलमान खान और भाग्यश्री के रूप में दो ऐसे सितारों को जन्म दिया जिनकी केमिस्ट्री आज भी मिसाल दी जाती है। इस फिल्म से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाला तथ्य यह है कि उस दौर में भी फिल्म की मुख्य अभिनेत्री को नायक की तुलना में कहीं अधिक भुगतान किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जहां सलमान खान को इस सुपरहिट फिल्म के लिए केवल 25 हजार रुपये मिले थे, वहीं भाग्यश्री को 1 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस दी गई थी। सालों बाद अब अभिनेत्री ने इस आर्थिक अंतर के पीछे की छिपी हुई वजहों और फिल्म उद्योग के व्यापारिक ढांचे पर खुलकर बात की है।

    भाग्यश्री ने हाल ही में साझा किया कि फिल्म इंडस्ट्री में किसी कलाकार की फीस का निर्धारण केवल उसकी कला पर नहीं, बल्कि ‘सप्लाई और डिमांड’ यानी मांग और आपूर्ति के नियम पर आधारित होता है। उनके अनुसार, फिल्म निर्माण अंततः एक व्यवसाय है। जब वह इस फिल्म का हिस्सा बनीं, तब उनकी बाजार में स्थिति और निर्माता की जरूरतों ने उन्हें एक मजबूत मोलभाव करने की शक्ति दी थी। अभिनेत्री का तर्क है कि यदि किसी निर्माता को लगता है कि कोई विशिष्ट कलाकार ही उस भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ है और उसका कोई विकल्प मौजूद नहीं है, तो उसे उस कलाकार की शर्तों को मानना ही पड़ता है। यह पूरी तरह से एक बिजनेस स्ट्रैटेजी है जहां आपकी उपयोगिता ही आपकी कीमत तय करती है।

    सिनेमा जगत में वेतन समानता यानी पे-पैरिटी के गंभीर मुद्दे पर बात करते हुए भाग्यश्री ने काफी यथार्थवादी रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को इंडस्ट्री में तब तक उचित पारिश्रमिक नहीं मिल सकता जब तक वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट नहीं होतीं। उन्होंने बाजार की अस्थिरता का जिक्र करते हुए कहा कि हमेशा कोई न कोई ऐसा कलाकार मौजूद रहता है जो कम कीमत पर काम करने या अपने काम की गुणवत्ता से समझौता करने को तैयार हो जाता है। ऐसे में जो कलाकार अपनी शर्तों पर अड़े रहते हैं, उन्हें कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, काम केवल धन के लिए नहीं बल्कि रचनात्मक संतुष्टि के लिए भी किया जाता है, लेकिन पेशेवर जगत में अपनी वैल्यू पहचानना अनिवार्य है।

    भाग्यश्री द्वारा साझा किया गया यह अनुभव आज के दौर में भी प्रासंगिक है, जहां अक्सर पुरुष और महिला कलाकारों के बीच बढ़ते वेतन अंतर पर बहस होती रहती है। उस समय सलमान खान अपनी शुरुआती पारी खेल रहे थे और भाग्यश्री की यह पहली फिल्म थी, फिर भी एक अभिनेत्री का अभिनेता से चार गुना ज्यादा पैसा लेना उस दौर की स्थापित परंपराओं को तोड़ने जैसा था। फिल्म में ‘सुमन’ के उनके किरदार ने उन्हें रातों-रात लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा दिया था। उनके द्वारा किया गया यह खुलासा यह समझने में मदद करता है कि फिल्म उद्योग में सितारों की चमक के पीछे जटिल व्यावसायिक निर्णय और मोलभाव की बड़ी भूमिका होती है।

  • चंदौली में ‘मौत की ट्रेन’ का खौफ: 24 घंटे में दूसरी गोलीकांड से रेलवे में मचा हड़कंप

    चंदौली में ‘मौत की ट्रेन’ का खौफ: 24 घंटे में दूसरी गोलीकांड से रेलवे में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के चंदौली में रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महज 24 घंटे के भीतर दूसरी ट्रेन में हत्या की वारदात सामने आने से यात्रियों में दहशत फैल गई है। ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में युवक की हत्या के बाद अब कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस में एक यात्री को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। लगातार दो घटनाओं ने जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

    जानकारी के अनुसार, रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात करीब 1:30 बजे कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस डीडीयू जंक्शन से लखनऊ की ओर रवाना हुई थी। ट्रेन जैसे ही सिकटिया इलाके के पास पहुंची, तभी अज्ञात हमलावर ने बाथरूम के पास बैठे एक युवक के सिर में गोली मार दी। गोली चलते ही कोच में अफरा-तफरी मच गई और यात्री डर के मारे सहम गए। घटना की सूचना मिलते ही जीआरपी और आरपीएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    इससे पहले ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में भी एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और शव को ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया था। लगातार दूसरी वारदात के बाद रेलवे रूट पर सक्रिय आपराधिक गिरोहों और शराब तस्करी नेटवर्क की भूमिका को लेकर भी जांच तेज हो गई है। हालांकि पुलिस ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी एंगल की पुष्टि नहीं की है।

    एसपी जीआरपी प्रयागराज प्रशांत कुमार वर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम को एक्टिव कर दिया गया था और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। संदिग्धों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और यात्रियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि दोनों मामलों का जल्द खुलासा किया जाएगा।

    लगातार हो रही इन घटनाओं ने रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर रात में लंबी दूरी की ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों का कहना है कि ट्रेनों में पर्याप्त निगरानी और सुरक्षा जांच नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

  • छिंदवाड़ा में बड़ा हादसा टला: टायर फटते ही पुलिस वाहन से भिड़ी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, TI समेत 4 घायल

    छिंदवाड़ा में बड़ा हादसा टला: टायर फटते ही पुलिस वाहन से भिड़ी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, TI समेत 4 घायल


    नई दिल्ली। छिंदवाड़ा जिले के सिहोरामाल के पास सोमवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। चौरई थाना पुलिस एक आरोपी को लेकर चौरई से छिंदवाड़ा आ रही थी, तभी सामने से तेज रफ्तार में आ रही स्कॉर्पियो का अचानक टायर फट गया। टायर फटते ही वाहन चालक नियंत्रण खो बैठा और स्कॉर्पियो सीधे पुलिस वाहन से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    TI समेत चार पुलिसकर्मी घायल
    हादसे में चौरई थाना प्रभारी मोहन मस्कोले सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, आरक्षक राजकुमारी बघेल के सिर में चोट आई है, जबकि एक सब इंस्पेक्टर के कंधे और पसली में गंभीर चोट बताई जा रही है। थाना प्रभारी मोहन मस्कोले के पैर और चेहरे पर भी चोटें आई हैं। सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    एयरबैग खुलने से टला बड़ा हादसा
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के दौरान पुलिस वाहन के एयरबैग समय रहते खुल गए, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। यदि एयरबैग सक्रिय नहीं होते तो हादसा और भी भयावह हो सकता था।

    स्थानीय लोगों ने दिखाई तत्परता
    घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत डायल-100 और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने घायलों को वाहन से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद सड़क पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    घायलों से मिलने पहुंचे एसपी और एएसपी
    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक अजय पाण्डेय और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष खरे जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने घायल पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए।

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और वाहन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत की बात यह रही कि एयरबैग खुलने से पुलिसकर्मियों की जान बच गई, वरना हादसा और भी गंभीर हो सकता था।

  • सुरों के सफर में अचानक खामोश हुई धड़कनें: बॉलीवुड के वो 8 दिग्गज गायक जिन्हें दिल का दौरा देकर छीन ले गई मौत

    सुरों के सफर में अचानक खामोश हुई धड़कनें: बॉलीवुड के वो 8 दिग्गज गायक जिन्हें दिल का दौरा देकर छीन ले गई मौत


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की स्वर्णिम यात्रा में संगीत वह रूह है जिसने फिल्मों को अमर बनाया है। लेकिन इस रूह को अपनी आवाज देने वाले कई ऐसे फनकार रहे हैं, जिनका अंतिम सफर बेहद अप्रत्याशित और दुखद रहा। हिंदी फिल्म जगत के इतिहास पर नजर डालें तो एक विचलित करने वाला तथ्य सामने आता है कि हमारे कई सबसे चहेते गायकों का निधन अचानक दिल का दौरा पड़ने से हुआ। इन कलाकारों ने अपनी गायकी से करोड़ों लोगों के दिलों को धड़कना सिखाया, लेकिन अफसोस कि नियति ने उनके अपने ही दिल पर ऐसा प्रहार किया कि संगीत की महफिलें हमेशा के लिए सूनी हो गईं। यह लेख उन 8 महान विभूतियों को समर्पित है जिनकी दुनिया एक झटके में खत्म हो गई, मगर उनके गीत आज भी अमरता की श्रेणी में गिने जाते हैं।

    आधुनिक दौर के सबसे लोकप्रिय गायकों में शुमार केके का जाना संगीत प्रेमियों के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। वह अपनी ऊर्जा और मंच पर अपनी जीवंत प्रस्तुति के लिए जाने जाते थे। एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान जब वे अपने प्रशंसकों को झूमने पर मजबूर कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ी। किसी को अंदाजा नहीं था कि मंच से उतरने के बाद वे वापस कभी नहीं लौटेंगे। अस्पताल ले जाने के दौरान हुई उनकी मृत्यु ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। इसी तरह, संगीतकार और गायक वाजिद खान के मामले में भी दिल का दौरा ही मौत की अंतिम वजह बना। हालांकि वे पहले से अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन अंततः उनके दिल ने साथ छोड़ दिया। उनके चले जाने से संगीत की एक प्रसिद्ध जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई, जिसने बॉलीवुड को अनगिनत हिट गाने दिए थे।

    पुराने दौर की बात करें तो किशोर कुमार और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों का जाना भारतीय संस्कृति की एक अपूरणीय क्षति थी। किशोर कुमार, जो अपनी हरफनमौला शख्सियत के लिए मशहूर थे, ने अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से ठीक एक दिन पहले उन्होंने एक भविष्य के प्रोजेक्ट के लिए गाना रिकॉर्ड किया था, जो बताता है कि वे अंत तक अपने काम के प्रति समर्पित थे। वहीं, मोहम्मद रफी साहब का जाना तो जैसे संगीत के एक युग का सूर्यास्त था। उन्हें जब दिल का दौरा पड़ा, तो वे अपने परिवार के बीच थे। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। इसी कड़ी में गायक मुकेश का नाम आता है, जिन्हें ‘राज कपूर की आवाज’ कहा जाता था। अमेरिका के एक दौरे पर जब वे पूरी दुनिया को भारतीय संगीत का जादू दिखा रहे थे, तभी हार्ट अटैक ने उनकी जीवनलीला समाप्त कर दी।

    मन्ना डे, महेंद्र कपूर और हेमंत कुमार जैसे शास्त्रीय और गंभीर गायकी के स्तंभों का अंत भी हृदय गति रुकने से हुआ। मन्ना डे ने दशकों तक अपनी आवाज से संगीत के विभिन्न रंगों को संवारा, लेकिन लंबी उम्र के पड़ाव पर दिल के दौरे ने उन्हें मौन कर दिया। महेंद्र कपूर, जिन्होंने अपनी दमदार आवाज से देशभक्ति के गीतों को नई ऊंचाई दी, वे भी किडनी और हृदय संबंधी समस्याओं के चलते शांत हो गए। हेमंत कुमार, जो अपनी जादुई और रूहानी आवाज के लिए जाने जाते थे, उनका सफर भी 69 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से थम गया। इन सभी कलाकारों में एक बात समान थी कि भले ही मौत ने उनके शारीरिक अस्तित्व को मिटा दिया हो, लेकिन जब तक दुनिया में संगीत रहेगा, इन 8 गायकों की आवाज हवाओं में गूंजती रहेगी। इनकी मौत ने हमें यह सिखाया कि जीवन क्षणभंगुर है, लेकिन कला अमर होती है।