Author: bharati

  • बायो मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार और सुनियोजित प्रबंधन सुनिश्चित करें: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल

    बायो मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार और सुनियोजित प्रबंधन सुनिश्चित करें: उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल


    नई दिल्ली। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, चिकित्सा अधोसंरचना के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा कर उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने रीवा, सिंगरौली, ग्वालियर, सागर एवं बुधनी मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, मानव संसाधन की नियुक्ति और शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय गतिविधियों के सुचारु संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बायो मेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक एवं सुनियोजित प्रबंधन सुनिश्चित के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाये, पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन एवं निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने और पर्यावरण संरक्षण के मानकों का पालन करने के निर्देश दिए।

    बैठक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीएचसी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी और जिला चिकित्सालयों के उन्नयन से संबंधित प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और गुणवत्ता में सुधार शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने उन्नयन प्रस्तावों को व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने ऐसे सभी विषयों एवं प्रस्तावों, जिनके लिए सक्षम समिति अथवा मंत्रि-परिषद की स्वीकृति अपेक्षित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अग्रेषित करने के निर्देश दिए, जिससे निर्णय प्रक्रिया में विलंब न हो और योजनाओं का लाभ आमजन तक समय पर पहुंच सके। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री तरुण राठी उपस्थित थे।

  • सुबह खाली पेट पिएं ये 5 देसी ड्रिंक्स तेजी से घटेगा वजन

    सुबह खाली पेट पिएं ये 5 देसी ड्रिंक्स तेजी से घटेगा वजन


    नई दिल्ली । वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद रिजल्ट नहीं मिल रहा? तो आपकी सुबह की शुरुआत को बदलने का वक्त आ गया है। कई बार हम अपनी दिनचर्या पर ज्यादा ध्यान नहीं देते लेकिन सही तरीके से शुरुआत करना वजन घटाने में अहम भूमिका निभाता है। सुबह खाली पेट कुछ विशेष ड्रिंक्स से न केवल आपका मेटाबॉलिज्म तेज हो सकता है बल्कि ये शरीर को अंदर से साफ और स्वस्थ भी बनाए रखती हैं। आइए जानते हैं उन 5 देसी ड्रिंक्स के बारे में जिन्हें सुबह खाली पेट पीने से वजन घटाने में मदद मिल सकती है।
    गुनगुना नींबू पानी
    सुबह उठते ही गुनगुना नींबू पानी पीना वजन घटाने का एक बेहद आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है। नींबू में मौजूद विटामिन C मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इसके अलावा नींबू पानी शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। आप चाहें तो इसमें एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं जो इसकी प्रभावशीलता को और बढ़ा सकता है।
    नारियल पानी
    नारियल पानी कम कैलोरी और भरपूर पोषक तत्वों से भरपूर होता है। सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है जिससे ओवरईटिंग से बचाव होता है। यह शरीर को ठंडा रखता है और शरीर की इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है।
    ग्रीन टी
    ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और कैटेचिन्स शरीर में फैट बर्न करने में मदद करते हैं। सुबह खाली पेट ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वजन घटाने की प्रक्रिया को सपोर्ट मिलता है। अगर आप वजन घटाने में रुचि रखते हैं तो ग्रीन टी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
    जीरा पानी
    रातभर पानी में भिगोकर रखे हुए जीरे को सुबह उबालकर पीने से पाचन बेहतर होता है। जीरा पानी शरीर में जमा चर्बी को कम करने और गैस ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पेट को हल्का और साफ रखता है जिससे वजन कम करने में सहारा मिलता है।
    सेब का सिरका एप्पल साइडर विनेगर
    एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर पीने से फैट बर्निंग तेज होती है। यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने और भूख को कम करने में भी मदद करता है। एप्पल साइडर विनेगर शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया तेज होती है।

    ध्यान रखें ये बातें
    इन ड्रिंक्स को पीने के बाद कम से कम 20-30 मिनट तक कुछ न खाएं। यदि आपको एसिडिटी लो ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो इन ड्रिंक्स को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है। इन ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप वजन घटाने की दिशा में एक कदम और बढ़ा सकते हैं। याद रखें ये ड्रिंक्स न केवल फैट बर्न करने में मदद करती हैं बल्कि आपके शरीर को अंदर से भी स्वस्थ बनाती हैं।

  • विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ी हों शहरी विकास परियोजनाएं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ी हों शहरी विकास परियोजनाएं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वित किया जाए। नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को सुधारने, नगरीय क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ाने, नागरिक सेवा में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के अधिकाधिक उपयोग, अर्बन मोबिलिटी तथा ई-वाहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। ‘नमामि गंगा अभियान’ के समान ही ‘नमामि नर्मदे परियोजना’ पर कार्य आरंभ कर नर्मदा नदी तट की नगरीय बसाहटों के ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय सुधार और उपचारित जल के पुन:
    उपयोग के लिए कार्य योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी नगरीय निकायों में जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्थाओं के प्रति विशेष रूप से सजगता और सतर्कता बरती जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के संचालक मंडल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन तथा संचालक मंडल के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कंपनी के प्रबंधकीय, वित्तीय और लेखा परीक्षा तथा अंकेक्षण संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश में शहरी विकास के लिए म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी में 4 स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभागों के गठन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गई। इसमें परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी मोड, सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी गतिशीलता और नमामि नर्मदे तथा हरित एवं नदी संरक्षण के लिए प्रभागों का गठन प्रस्तावित है। परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी प्रभाग के अंतर्गत नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने, जन हित कार्यों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, वित्तीय अनुशासन, नीति आयोग तथा अन्य संबद्ध विभागों से समन्वय तथा मेट्रोपोलिटन एरिया डेवलपमेंट प्लानिंग को प्राथमिकता से लिया जाएगा। इसमें सोलर प्रोजेक्ट्स, हरित बांड, अप्रयुक्त परिसंपत्तियों के वैकल्पिक उपयोग जैसे नवाचार भी प्रस्तावित हैं। सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग के अंतर्गत ई-नगर पालिका प्रणाली, सीसीटीवी-जीआईएस आधारित निगरानी व्यवस्था, नागरिक सेवा प्लेटफार्म के उन्नयन, टोल संग्रह ई-पोर्टल एवं ऑनलाइन राजस्व संग्रहण जैसी स्मार्ट सिटी प्रणालियां संचालित की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नगरीय निकायों के आस-पास के क्षेत्रों के नियोजित विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नर्मदा और तापी नदी के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए नदियों के समग्र और सर्वांगीण विकास के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ‘नमामि गंगे’ के समान ‘नमामि नर्मदे परियोजना’ का क्रियान्वयन सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से करें। इसमें नगरीय विकास एवं आवास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विभाग, उद्योग विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    बैठक में बताया गया कि शहरी गतिशीलता प्रभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश ईवी पॉलिसी क्रियान्वयन, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, रोपवे, मल्टी लेवल पार्किंग, सार्वजनिक साइकिल सेवा, सिटी मोबिलिटी प्लान तथा ई-वाहन चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा।बैठक में अपर मुख्‍य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री संजय दुबे, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्री सुखबीर सिंह, श्री पी. नरहरि, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं आवास श्री संकेत भोंडवे तथा कंपनी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

  • IPL में खेलने से इनकार करना पड़ सकता है भारी, नीलामी की रकम भी जा सकती है, दो साल का बैन भी संभव

    IPL में खेलने से इनकार करना पड़ सकता है भारी, नीलामी की रकम भी जा सकती है, दो साल का बैन भी संभव


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) नीलामी किसी भी क्रिकेटर के करियर का बड़ा मोड़ होती है। करोड़ों की बोली लगना और रातों-रात स्टार बनना जितना आकर्षक है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर कोई खिलाड़ी नीलामी में बिकने के बाद अपनी मर्जी से IPL खेलने से इनकार कर दे, तो क्या उसे पूरी रकम मिलती है? IPL के नियम इस मामले में बेहद स्पष्ट हैं और काफी सख्त भी।

    IPL पूरी तरह BCCI द्वारा संचालित टूर्नामेंट है। नीलामी में भाग लेने वाला हर खिलाड़ी पहले से तय नियम और शर्तों को स्वीकार करता है।

    नीलामी में बिकने के बाद खिलाड़ी और फ्रेंचाइजी के बीच एक पेशेवर अनुबंध बन जाता है, जिसमें खिलाड़ी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह टूर्नामेंट में उपलब्ध रहे और टीम के लिए खेले।

    अगर कोई खिलाड़ी बिना वैध और ठोस कारण के खेलने से इनकार करता है, तो उसे नीलामी में मिली पूरी रकम नहीं दी जाती। IPL में लागू नियम ‘नो प्ले, नो पे’ के तहत स्पष्ट करते हैं कि यदि खिलाड़ी मैदान पर नहीं उतरता, तो उसे भुगतान का पूरा हक नहीं मिलता। इसका मकसद यह भी है कि फ्रेंचाइजी पर किए गए खर्च का नुकसान न हो।

    नीलामी में बिकने के बाद अचानक नाम वापस लेना BCCI के नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में खिलाड़ी पर अगले दो IPL सीजन और नीलामी से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यह प्रतिबंध केवल सजा नहीं है, बल्कि संदेश भी देता है कि खिलाड़ी नीलामी में शामिल होने से पहले पूरी गंभीरता से निर्णय लें।

    हालांकि, हर स्थिति में सजा तय नहीं होती। अगर खिलाड़ी किसी गंभीर चोट से जूझ रहा हो या राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जरूरी हो, तो उसे छूट दी जा सकती है। इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट या संबंधित बोर्ड की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होती है। बिना पुख्ता कारण या सबूत के इनकार मान्य नहीं होगा।

    फ्रेंचाइजी के लिए भी यह नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। नीलामी के दौरान टीम अपनी रणनीति खिलाड़ियों पर तैयार करती है। किसी खिलाड़ी पर बड़ी रकम खर्च करने के बाद यदि वह आखिरी वक्त पर खेलने से मना कर दे, तो टीम का संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए BCCI ने सख्त नियम बनाए हैं ताकि लीग की विश्वसनीयता और फ्रेंचाइजी के हित सुरक्षित रह सकें।

    विदेशी खिलाड़ियों के मामले में यह नियम और भी जरूरी हो जाता है। कई विदेशी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल या निजी कारणों से IPL से हटना चाहते हैं। BCCI यह सुनिश्चित करता है कि कोई खिलाड़ी बिना ठोस वजह के लीग को हल्के में न ले।
    यदि कोई खिलाड़ी पूरे टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेता, तो आम तौर पर उसे पूरी रकम नहीं मिलती। हालांकि कुछ विशेष मामलों में फ्रेंचाइजी और खिलाड़ी के बीच आपसी सहमति से आंशिक भुगतान या अलग व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन यह पूरी तरह अनुबंध और नियमों पर निर्भर करता है।

    कुल मिलाकर, IPL नीलामी में बिकना केवल फायदे की बात नहीं है, बल्कि इसके साथ अनुशासन और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। बिना ठोस कारण IPL खेलने से इनकार करना खिलाड़ी के करियर और छविदोनों के लिए भारी पड़ सकता है। नियमों का पालन करना और टीम के प्रति प्रतिबद्ध रहना हर खिलाड़ी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

  • BCCL IPO: 9 जनवरी से खुलेगा सरकारी कंपनी का पब्लिक इशू, निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और जोखिम

    BCCL IPO: 9 जनवरी से खुलेगा सरकारी कंपनी का पब्लिक इशू, निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और जोखिम


    नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेडBCCL पहली बार शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है। कोल इंडिया लिमिटेड की इस सहायक कंपनी का इनिशियल पब्लिक ऑफरIPO 9 जनवरी 2026 को खुलेगा और 13 जनवरी तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। कंपनी ने इस पब्लिक इशू के लिए ₹21 से ₹23 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट में निवेश करने के लिए निवेशकों को कम से कम ₹13,800 लगाने होंगे। इस IPO को लेकर बाजार में काफी चर्चा है, क्योंकि यह एक बड़ी सरकारी कंपनी की लिस्टिंग मानी जा रही है।

    BCCL देश में कोकिंग कोल उत्पादन की अग्रणी कंपनी है। कोकिंग कोल का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टील निर्माण में किया जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। कंपनी को वर्ष 2014 में मिनी रत्नका दर्जा मिला था। इस IPO के जरिए कोल इंडिया लिमिटेड अपनी हिस्सेदारी घटा रही है, जिससे सरकार को विनिवेश के तहत पूंजी प्राप्त होगी।इस इशू के तहत निवेशकों को 600 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 8 जनवरी को खुलेगी, जबकि आम निवेशक 9 जनवरी से आवेदन कर सकेंगे। पात्र कर्मचारियों के लिए प्रति शेयर ₹1 का डिस्काउंट भी रखा गया है, जो सरकारी कंपनियों के IPO में आम तौर पर देखने को मिलता है। इशू बंद होने के बाद तय समय-सीमा के भीतर शेयरों का आवंटन और लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल(OFS आधारित है। इसके तहत कुल 46.57 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। चूंकि यह OFS है, इसलिए IPO से जुटाई गई पूरी रकम प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड को जाएगी, न कि BCCL को। इसका मतलब यह है कि इस इशू से कंपनी को सीधे तौर पर विस्तार, नई खदानों या प्रोजेक्ट्स के लिए कोई ताजा पूंजी नहीं मिलेगी। निवेशकों के लिए यह पहलू समझना बेहद जरूरी है।कंपनी की परिचालन स्थिति की बात करें तो वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, देश के घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में BCCL की हिस्सेदारी करीब 58.50% है। 1 अप्रैल 2024 तक कंपनी के पास लगभग 7,910 मिलियन टन कोयले का भंडार मौजूद था। BCCL झरिया और रानीगंज कोलफील्ड में फैली 34 खदानों का संचालन कर रही है, जो कुल 288.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हैं। कंपनी का प्रमुख ग्राहक आधार स्टील और पावर सेक्टर से जुड़ा हुआ है।

    उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए BCCL ने वर्ष 2021 से हैवी अर्थ मूविंग मशीनरीHEMM के इस्तेमाल को बढ़ाया है। इससे खनन कार्य की रफ्तार में सुधार हुआ है और परिचालन दक्षता भी बेहतर हुई है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का प्रदर्शन काफी हद तक सरकारी नीतियों, स्टील उद्योग की मांग और वैश्विक कोयला कीमतों पर निर्भर करता है। इन कारकों में उतार-चढ़ाव से मुनाफे पर असर पड़ सकता है।कोकिंग कोल को स्टील उद्योग की रीढ़ माना जाता है और भारत आज भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाली BCCL की भूमिका रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आने वाले वर्षों में स्टील सेक्टर की मांग मजबूत बनी रहती है, तो इसका सकारात्मक असर BCCL के कारोबार और निवेशकों की उम्मीदों पर भी दिख सकता है।

  • घर की खिड़कियों में वास्तु की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानिए संतुलन बनाए रखने के आसान उपाय

    घर की खिड़कियों में वास्तु की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानिए संतुलन बनाए रखने के आसान उपाय


    नई दिल्ली। घर बनाते समय या रिनोवेशन के दौरान अक्सर लोग खिड़कियों को सिर्फ रोशनी, हवा और डिजाइन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन वास्तुशास्त्र में इनका महत्व कहीं अधिक गहरा बताया गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार खिड़कियां घर के भीतर ऊर्जा के प्रवेश का मुख्य माध्यम होती हैं और उनकी दिशा, बनावट व संख्या का सीधा असर घर के वातावरण के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और पारिवारिक संतुलन पर पड़ता है। यदि इस दौरान थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो उसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है।

    वास्तु सिद्धांतों के अनुसार किसी भी घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का संतुलन बेहद जरूरी है। उत्तर और पूर्व दिशा से आने वाली रोशनी को विशेष रूप से शुभ माना गया है। इन दिशाओं में बनी खिड़कियां सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और घर में स्थिरता, शांति व सक्रियता बनाए रखने में मदद करती हैं। सुबह की धूप यदि पूर्व दिशा की खिड़की से घर में प्रवेश करे, तो यह मानसिक स्पष्टता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है।इसके विपरीत, कुछ दिशाओं में खिड़कियों की अधिकता वास्तु असंतुलन का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण दिशा की खिड़कियों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि इस दिशा में खिड़की हो, तो उसे हमेशा साफ-सुथरा और नियंत्रित रखना जरूरी माना जाता है। टूटी, गंदी या लंबे समय तक खुली रहने वाली खिड़कियां नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं, जिससे घर के सदस्यों के बीच तनाव और असहजता बढ़ सकती है।

    खिड़कियों के खुलने की दिशा भी वास्तु में महत्वपूर्ण मानी गई है। भीतर की ओर खुलने वाली खिड़कियां घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का संकेत देती हैं, जबकि बाहर की ओर खुलने वाली खिड़कियां ऊर्जा के प्रवाह में बाधा पैदा कर सकती हैं। इसी तरह, खिड़कियों से आने वाली तेज हवा, शोर या असंतुलित प्रकाश भी घर के वातावरण को प्रभावित करता है। इसलिए खिड़कियों पर हल्के परदे या ब्लाइंड्स का उपयोग संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

    मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास खिड़कियों की स्थिति को लेकर भी वास्तु में खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है। दरवाजे के दोनों ओर यदि समान आकार और समान ऊंचाई की खिड़कियां हों, तो इससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित बना रहता है। इसके अलावा, खिड़कियों की संख्या भी वास्तु संतुलन से जुड़ी होती है। मान्यताओं के अनुसार सम संख्या में खिड़कियां घर में स्थिरता और सामंजस्य को दर्शाती हैं।वास्तु विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और फ्लैट संस्कृति में हर नियम का शत-प्रतिशत पालन संभव नहीं होता। ऐसे में सबसे जरूरी है संतुलन और साफ-सफाई। खिड़कियों की नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी और सही दिशा में खुलने वाली संरचना घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। छोटे-छोटे सुधार भी लंबे समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

  • 16 से 24 जनवरी भोपाल में महाभारत समागम: शांति और संवाद का वैश्विक संदेश

    16 से 24 जनवरी भोपाल में महाभारत समागम: शांति और संवाद का वैश्विक संदेश


    भोपाल । भोपाल का भारत भवन 16 से 24 जनवरी तक एक ऐतिहासिक महाभारत समागम का आयोजन करने जा रहा है जो न केवल भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़ा होगा बल्कि शांति और संवाद का संदेश भी देगा। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर बढ़ती हिंसा और युद्ध की समस्याओं के बीच एक महत्वपूर्ण पहल है जहां विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित रंग समूह एकत्र होंगे। इस नौ दिवसीय महोत्सव में भारत के साथ-साथ इंडोनेशिया श्रीलंका और जापान जैसे देशों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।

    इस महाभारत समागम के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में नाटक नृत्य-नाट्य कठपुतली कार्यशालाएं लोक और शास्त्रीय प्रस्तुतियां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और इमर्सिव डोम थिएटर जैसे विविध रूपों में महाभारत के संदेशों को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य उद्देश्य होगा युद्ध के विरुद्ध शांति और संवाद का प्रबल संदेश देना। वीर भारत न्यास के आयोजन में देश और विदेश से कलाकार शांति के प्रयासों को सांस्कृतिक रूप में प्रस्तुत करेंगे।

    वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी के अनुसार यह आयोजन वैश्विक संघर्षों और सभ्यताओं के टकराव के वर्तमान दौर में एक मंच प्रदान करेगा जहां शांति और संवाद के जरिए एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। भारत भवन को इस आयोजन के लिए एक आदर्श स्थल माना गया है क्योंकि यहां से शांति का संदेश दुनिया तक पहुंचाने की विशेष क्षमता है।

    महाभारत जिसे आम तौर पर एक युद्ध कथा के रूप में जाना जाता है इस आयोजन के जरिए केवल युद्ध की कथा नहीं बल्कि मानवता विवेक और करुणा की महागाथा के रूप में प्रस्तुत की जाएगी। श्री कृष्ण के संवाद आधारित प्रयासों को आज के समय की वैश्विक परिस्थितियों में प्रासंगिक माना गया है। यह आयोजन दर्शकों को यह समझाएगा कि युद्ध कभी समाधान नहीं हो सकता और संवाद और समझौते से ही समस्याओं का समाधान संभव है।

    आयोजन में महाभारत के महत्वपूर्ण पहलुओं को जीवन्त रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। नेपथ्य कला अस्त्र-शस्त्र चक्रव्यूह और पताकाओं की प्रदर्शनी महाभारत के दृश्य संसार को दर्शकों तक पहुंचाएगी। इसके अलावा महाभारत पर आधारित चित्र प्रदर्शनी और भारतीय कठपुतली कला भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेंगी।

    इस समागम में सभ्यताओं की सांस और भूली बिसरी सभ्यताएं जैसी पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा जो सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे। यह आयोजन न केवल भारतीय दर्शकों के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर होगा ताकि वे भारतीय महाकाव्य महाभारत के गहरे संदेशों को समझ सकें और शांति की दिशा में योगदान दे सकें।

  • भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर

    भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर


    भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत के बाद मध्य प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी कड़ी में राजधानी भोपाल में भी कई इलाकों से गंदे पानी की सप्लाई की शिकायतें सामने आने लगी हैं। हालात को देखते हुए नगर निगम का अमला पानी के सैंपल लेने और वाल्व सुधारने में जुटा है। वहीं, मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने खुद मैदान में उतरकर शहर की पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया, जहां कई चौंकाने वाली लापरवाहियां सामने आईं।
    कांग्रेस नेताओं ने सबसे पहले गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के बरखेड़ा पठानी इलाके में स्थित पानी की टंकी का निरीक्षण किया। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला टंकी पर चढ़े और पूरे निरीक्षण का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। इस दौरान टंकी के अंदर और आसपास गंदगी पाई गई। झूमरवाला ने कहा कि इसी टंकी से रोजाना हजारों लोगों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है और यदि यहां साफ-सफाई नहीं होगी, तो लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

    झूमरवाला ने कहा कि दूषित पानी से संक्रमण और गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।

    उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भोपाल में भी इंदौर जैसी दुखद घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि टंकी के आसपास गंदगी फैली हुई है और शराबियों का जमावड़ा भी रहता है, जो हालात को और खराब करता है। झूमरवाला ने कहा कि यह वक्त सिर्फ चेतावनी देने का नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करने का है। पानी जीवन है और इसके साथ किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इसके बाद नगर निगम के कांग्रेसी पार्षद श्यामला हिल्स स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पहुंचे। इस निरीक्षण में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान और मो. जहीर सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद रहे।

    निरीक्षण के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि श्यामला हिल्स के फिल्टर प्लांट का रॉ वॉटर सीधे बड़े तालाब में मिल रहा है, जबकि इसी बड़े तालाब से शहर के कई इलाकों में पीने का पानी सप्लाई किया जाता है।

    नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि रॉ वॉटर का बड़े तालाब में मिलना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने दावा किया कि निरीक्षण के समय वाटर ट्रीटमेंट प्लांट चालू हालत में नहीं था और सिर्फ कागजी कार्रवाई ही दिखाई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पानी का नियमित सैंपल लिया जाता है या नहीं, इसकी कोई रिपोर्ट मौके पर उपलब्ध नहीं कराई गई।

    जकी ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट में नियुक्त केमिस्ट के पास रसायन शास्त्र में ग्रेजुएशन की अनिवार्य योग्यता होनी चाहिए, लेकिन इस संबंध में भी संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पानी की गुणवत्ता जांच में भी खामियां सामने आईं और फिल्ट्रेशन के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन होता नहीं दिखा।

    कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की कि भोपाल की सभी पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट की तुरंत जांच कराई जाए, नियमित सैंपलिंग सुनिश्चित की जाए और जहां भी लापरवाही पाई जाए, वहां सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने साफ कहा कि इंदौर की घटना से सबक लेते हुए राजधानी में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • ग्रीनलैंड पर बयानबाज़ी से बढ़ा वैश्विक तनाव, डेनमार्क ने नाटो की एकता पर जताई गहरी चिंता

    ग्रीनलैंड पर बयानबाज़ी से बढ़ा वैश्विक तनाव, डेनमार्क ने नाटो की एकता पर जताई गहरी चिंता


    नई दिल्ली।ग्रीनलैंड को लेकर हालिया बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए तनाव को जन्म दे दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए नाटो की एकता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने की आशंका जताई है। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी सहयोगी देश ने ग्रीनलैंड पर दबाव बनाने या बल प्रयोग करने की कोशिश की, तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होगी, बल्कि नाटो जैसे सामूहिक सुरक्षा गठबंधन की नींव भी कमजोर पड़ सकती है।

    प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सार्वजनिक टिप्पणी में ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताते हुए उस पर नियंत्रण की इच्छा जाहिर की थी। हालांकि यह बयान किसी आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं है लेकिन इसके बाद यूरोप और नाटो से जुड़े देशों में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई देशों ने इसे सहयोगी देशों के बीच भरोसे के सिद्धांत के खिलाफ बताया है।ग्रीनलैंड भले ही जनसंख्या के लिहाज़ से छोटा इलाका हो, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक राजनीति में बेहद अहम बनाती है। यह डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो का हिस्सा भी है। आर्कटिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण ग्रीनलैंड से सैन्य निगरानी, मिसाइल चेतावनी प्रणाली और समुद्री मार्गों पर नजर रखना अपेक्षाकृत आसान होता है। जलवायु परिवर्तन के चलते आर्कटिक में नए समुद्री रास्तों के खुलने की संभावना ने इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ा दी है।

    डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने नाटो के मूल सिद्धांतों की याद दिलाते हुए कहा कि यह संगठन आपसी भरोसे, सामूहिक सुरक्षा और संप्रभुता के सम्मान पर आधारित है। यदि किसी सदस्य या सहयोगी देश की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती दी जाती है, तो इससे नाटो की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हालात में नाटो केवल एक औपचारिक संगठन बनकर रह जाएगा, जिसकी वैश्विक भूमिका सीमित हो सकती है।इस पूरे विवाद पर ग्रीनलैंड की ओर से भी स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि उनके देश का भविष्य किसी बाहरी दबाव या अंतरराष्ट्रीय बयानबाज़ी से तय नहीं होगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड के लोग अपने राजनीतिक और आर्थिक फैसले खुद लेने में सक्षम हैं और किसी भी तरह की अटकलों से डरने की जरूरत नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियां, दुर्लभ खनिज संसाधनों की उपलब्धता और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुलने वाले नए समुद्री मार्ग इस इलाके को वैश्विक शक्तियों के लिए अहम बनाते हैं। इसके अलावा, ग्रीनलैंड में पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचा भी इसकी रणनीतिक उपयोगिता को बढ़ाता है।फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानों और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं तक सीमित है, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में बढ़ता तनाव साफ नजर आ रहा है। डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में नाटो और उसके सहयोगी देशों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर

    मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षक चयन परीक्षाओं में घोषित किए गए पदों की संख्या पर बढ़ते विरोध के चलते मंगलवार को भोपाल में एक बड़ा आंदोलन हुआ। प्रदेशभर से लगभग 2000 भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे और लोक शिक्षण संचालनालय DPI तथा जनजातीय कार्य विभाग का घेराव करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हजारों खाली पदों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या बहुत कम घोषित की गई है जिससे न सिर्फ योग्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिल रहा बल्कि इससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

    आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो वे अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे कठोर चरणों में बदल देंगे। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की दिशा में किया जा रहा है।

    प्रदेश में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षक के लिए लगभग 99197 और प्राथमिक शिक्षक के लिए 131152 पद रिक्त हैं लेकिन भर्ती प्रक्रिया में केवल 10800 और 13089 पदों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं जो खाली पदों के मुकाबले बेहद कम हैं।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि इन कम पदों के कारण लाखों योग्य उम्मीदवार अपनी योग्यताएं साबित नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए कई विषयों में शून्य पद घोषित करने का भी आरोप लगाया है जिससे इन वर्गों के युवाओं में गहरी निराशा और आक्रोश है। उनका कहना है कि यह स्थिति सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है और इससे आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

    शिक्षक संगठनों ने भी इस समस्या को गंभीरता से उठाया है क्योंकि यह स्थिति छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डाल रही है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं जिससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि परीक्षा परिणामों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात को सुधारने की बात की गई है लेकिन पर्याप्त नियुक्तियां किए बिना इसे लागू करना संभव नहीं है।

    अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शिक्षक भर्ती के सभी विषयों में कम से कम 3000 पदों की वृद्धि प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 25000 करना और द्वितीय काउंसलिंग जल्द शुरू करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक शिक्षक भर्ती 2025 पदों के साथ पूरी नहीं हो जाती तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए।

    यह आंदोलन केवल पदों की संख्या बढ़ाने का सवाल नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और हजारों युवा उम्मीदवारों को रोजगार देने का एक संघर्ष बन चुका है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या यह आंदोलन अपने उद्देश्य में सफल हो पाता है