Author: bharati

  • हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश

    हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को दिल्ली में एक हाई लेवल मीटिंग (High Level Meeting.) में देश में संभावित बाढ़ और हीट वेव (Floods and Heat Waves) से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमें ‘जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट’ के लिए काम करना होगा.

    मीटिंग में देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (FCMT) के गठन, हीटवेव से कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान को न्यूनतम रखने और मौसम संबंधी योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर फोकस किया गया।

    इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और सेंट्रल वाटर कमीशन के मौसम और बाढ़ संबंधी पूर्वानुमान के समय को 3 दिन से बढ़ाकर 7 दिन करने की बात भी कही गई।


    एनडीएमए के दिशानिर्देशों का पालन

    गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि आपदाओं को लेकर नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के पालन की राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।

    जल संचय और चेक डैम परियोजनाओं के जरिए जलस्तर सुधारने और जल संरक्षण की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसके अलावा कैम्पा फंड का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है.

    साथ ही, कम से कम 60 जोखिम वाली झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं. सभी राज्यों में स्टेट-लेवल इंटीग्रेटेड रिज़र्वॉयर ऑपरेशंस लागू करने पर भी जोर दिया गया. मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार की बात भी कही गई.

  • तमिलनाडु नए सीएम के शपथ समारोह में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के बजा राज्य गीत, मचा सियासी संग्राम

    तमिलनाडु नए सीएम के शपथ समारोह में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के बजा राज्य गीत, मचा सियासी संग्राम


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) के नए मुख्यमंत्री (New Chief Minister) और टीवीके चीफ जोसेफ विजय (TVK Chief Joseph Vijay) के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तमिलनाडु के राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ (Tamil Thai Vazhthu) को देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बाद तीसरे स्थान पर गाए जाने को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं, ऐसे में इस घटनाक्रम ने राज्य के सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में रविवार को आयोजित भव्य समारोह में टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह के शुरुआत में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया गया, जबकि परंपरागत रूप से राज्य के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में गाए जाने वाले ‘तमिल थाई वजथु’ को वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया।

    इसी बात को लेकर विपक्षी दलों और टीवीके को समर्थन देने वाले सहयोगी दलों ने कड़ी नाराजगी जताई है. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के तमिलनाडु राज्य सचिव एम वीरपांडियन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ‘तमिल थाई वजथु’ को हमेशा सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में सम्मानपूर्वक गाया जाता रहा है और उसे उसका उचित स्थान मिलना चाहिए. उन्होंने टीवीके प्रमुख विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए।


    TVK के सहयोगी दलों ने जताई नाराजगी

    सीपीआई के साथ-साथ सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल जैसी पार्टियों ने भी टीवीके सरकार को समर्थन दिया है, इसलिए सहयोगी दलों की ओर से उठी यह नाराजगी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है. पीएमके संस्थापक एस रामदास ने भी बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार को सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वजथु’ को उचित सम्मान और प्राथमिकता सुनिश्चित करनी चाहिए. वहीं वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि तमिल पहचान और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।

    विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा. टीवीके विधायक एम वी करुप्पैया के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ग्रहण समारोह में भी ‘तमिल थाई वजथु’ को वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया था. इसके बाद यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ने लगा है. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा लंबे समय से बेहद संवेदनशील रहा है. द्रविड़ राजनीति की पूरी विचारधारा ही तमिल भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता के इर्द-गिर्द विकसित हुई है. ऐसे में मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ को प्राथमिकता नहीं दिए जाने को विपक्ष और सहयोगी दल तमिल पहचान की उपेक्षा के तौर पर पेश कर रहे हैं।


    विवाद पर टीवीके सरकार ने दी सफाई

    हालांकि, विवाद बढ़ने पर टीवीके सरकार में मंत्री आधव अर्जुन स्पष्टीकरण जारी किया. उन्होंने कहा, ‘नीरारुम कदलुथुदा… से शुरू होने वाला तमिल वंदना गीत तमिल समाज की 100 साल से अधिक पुरानी सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक है. तमिलनाडु सरकार ने इसे राज्य गीत का दर्जा दिया है और परंपरा के अनुसार राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत इसी गीत से होती है, जबकि अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है. हालांकि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह में पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम्, फिर राष्ट्रगान जन मन गण और उसके बाद तमिल थाई वजथु प्रस्तुत किया गया।

    आधव अर्जुन ने आगे कहा, ‘टीवीके सरकार इस नई व्यवस्था से सहमत नहीं है. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की ओर से बताया गया कि केंद्र सरकार के नए सर्कुलर के कारण ऐसा करना पड़ा. टीवीके सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में पुरानी परंपरा ही लागू रहेगी, यानी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वजथु’ से होगी और अंत राष्ट्रगान से किया जाएगा. पार्टी ने यह भी कहा कि देश के सभी राज्यों में राज्य भाषा के वंदना गीत को कार्यक्रम की शुरुआत में सम्मानपूर्वक स्थान मिलना चाहिए।

  • फैमिली ट्रिप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन, अहमदाबाद की ये 6 जगहें बना देंगी सफर यादगार

    फैमिली ट्रिप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन, अहमदाबाद की ये 6 जगहें बना देंगी सफर यादगार


    नई दिल्ली ।
    अहमदाबाद, गुजरात का एक प्रमुख और ऐतिहासिक शहर, अपनी समृद्ध संस्कृति, विरासत और आधुनिक जीवनशैली के कारण देशभर के यात्रियों के बीच खास पहचान रखता है। यह शहर केवल व्यापार और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि घूमने-फिरने और फैमिली ट्रिप के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। यहां की हर जगह अपने आप में एक अलग कहानी और अनुभव समेटे हुए है, जो किसी भी यात्रा को यादगार बना देती है।

    परिवार के साथ घूमने के लिए अहमदाबाद में कई ऐसी जगहें हैं, जहां इतिहास, अध्यात्म और मनोरंजन का शानदार मिश्रण देखने को मिलता है। यह शहर हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ खास लेकर आता है, जिससे यात्रा का अनुभव और भी समृद्ध हो जाता है।

    साबरमती नदी के किनारे स्थित साबरमती आश्रम शहर की सबसे शांत और ऐतिहासिक जगहों में से एक है। यह स्थान महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। यहां का वातावरण बेहद शांत और प्रेरणादायक होता है, जो यात्रियों को एक अलग ही अनुभव देता है। परिवार के साथ यहां समय बिताना न केवल सुकून देता है बल्कि इतिहास से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

    इसके बाद कांकड़िया लेक एक ऐसा स्थान है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है जहां बोटिंग, टॉय ट्रेन और मनोरंजन की कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। शाम के समय यहां का दृश्य बेहद खूबसूरत हो जाता है और यह जगह परिवार के साथ समय बिताने के लिए आदर्श मानी जाती है।

    अहमदाबाद का अक्षरधाम मंदिर अपनी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला देखने योग्य है और यहां का शांत माहौल मन को सुकून प्रदान करता है। लाइट और साउंड शो इस स्थान को और भी आकर्षक बना देता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

    इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अडालज बावड़ी एक अनोखी जगह है। यह बावड़ी अपनी जटिल नक्काशी और वास्तुकला के लिए जानी जाती है। यह स्थान पुराने समय की कला और निर्माण शैली को बेहद सुंदर तरीके से प्रस्तुत करता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह काफी खास मानी जाती है।

    विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वाले लोगों के लिए साइंस सिटी एक शानदार विकल्प है। यहां विज्ञान से जुड़ी कई रोचक प्रदर्शनी और गतिविधियां देखने को मिलती हैं, जो बच्चों और युवाओं के लिए ज्ञानवर्धक और मनोरंजक दोनों होती हैं। यह जगह सीखने और समझने का एक बेहतरीन माध्यम बन जाती है।

    इसके अलावा लॉ गार्डन नाइट मार्केट शॉपिंग और खाने-पीने के शौकीनों के लिए एक खास स्थान है। यहां गुजराती हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्तुएं और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड का आनंद लिया जा सकता है। रात के समय यहां की रौनक और भी बढ़ जाती है, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है।

    कुल मिलाकर अहमदाबाद एक ऐसा शहर है जहां हर कोना कुछ नया अनुभव कराता है। यह शहर इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का ऐसा संगम है, जो इसे फैमिली ट्रिप के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाता है। यहां की यात्रा न केवल मनोरंजक होती है बल्कि यादों में हमेशा के लिए बस जाने वाली भी बन जाती है।

  • योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट

    योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) के तीसरे और आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) के साथ ही बीजेपी (BJP) ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए पॉलिटिकल टोन सेट कर दिया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को लखनऊ के लोक भवन में 6 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई और दो मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन किया. जिन 6 नए मंत्रियों ने शपथ ली उनमें से 5 दलित और ओबीसी समुदाय से हैं, जबकि एक मंत्री ब्राह्मण बिरादरी से.

    यह मंत्रिमंडल विस्तार किसी नए प्रयोग के बजाय स्पष्ट तौर पर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की रणनीति के तहत तैयार किया गया है. बीजेपी ने जातीय संतुलन साधने के लिए बेहद संतुलित और सोच-समझकर नए मंत्रियों के चुनाव किए हैं. पार्टी का फोकस ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोध और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाली अन्य जाति समुदायों पर रहा है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक और सामाजिक पकड़ को और मजबूत किया जा सके. यही कारण रहा कि मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में देर रात तक बीजेपी नेताओं का मंथन और बैठकों का दौर चला।

    इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पिछड़े और दलित वर्गों के प्रमुख समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया गया. भाजपा ने 2027 चुनाव से पहले इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सामाजिक और जातीय समीकरण साधने और अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की काट खोजने की कोशिश की है. मार्च 2022 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योगी 2.0 सरकार बनी थी, तब कुल 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी।


    कैबिनेट में 22 सवर्ण, 25 OBC और 10 दलित मंत्री

    उस समय मंत्रिमंडल में 21 सवर्ण, 20 ओबीसी और 8 दलित नेताओं को जगह दी गई थी. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य संख्या के लिहाज से राज्य के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 60 मंत्री हो सकते हैं. अब तीसरे और अंतिम मंत्रिमंडल विस्तार के बाद योगी सरकार के सभी 60 मंत्री पद भर चुके हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल में 22 सवर्ण, 25 ओबीसी और 10 दलित मंत्री हैं. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख मंत्री भी शामिल हैं।


    सवर्ण समीकरण में ब्राह्मण और ठाकुर चेहरे अहम

    यूपी कैबिनेट में 2022 में सवर्ण वर्ग से बनाए गए मंत्रियों में 7 ब्राह्मण, 8 ठाकुर, 3 वैश्य, 2 भूमिहार और 1 कायस्थ नेता शामिल थे. बीजेपी ने उस समय ब्राह्मण संतुलन साधने के लिए ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया था, जबकि जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाकर पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. साल 2024 में योगी मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार किया गया था, जिसमें 4 नए मंत्रियों को शामिल किया गया. इनमें 2 ओबीसी, 1 दलित और 1 ब्राह्मण नेता को जगह मिली थी।

    उस दौरान समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ आए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, सपा से बीजेपी में वासपी करने वाले दारा सिंह चौहान, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से अनिल कुमार और साहिबाबाद से बीजेपी विधायक सुनील कुमार शर्मा को मंत्री बनाया गया था. उस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई थी।


    विधायकों के सांसद चुने जाने के बाद खाली हुईं सीटें

    लोकसभा चुनाव 2024 के बाद योगी सरकार के दो मंत्री जितिन प्रसाद और अनूप वाल्मीकि संसद पहुंच गए. दोनों ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. जितिन प्रसाद शाहजहांपुर से सांसद बनने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए, जबकि दलित चेहरा अनूप वाल्मीकि हाथरस से सांसद चुने गए. इन इस्तीफों के बाद योगी मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 56 से घटकर 54 हो गई थी।

    कैबिनेट में जितिन प्रसाद का रिप्लेसमेंट मनोज पांडे
    जितिन प्रसाद के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद योगी मंत्रिमंडल में ब्राह्मण मंत्रियों की संख्या 8 से घटकर 7 रह गई थी. अब हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में रायबरेली जिले के ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर बीजेपी ने एक बार फिर ब्राह्मण संतुलन साधने की कोशिश की है. मनोज पांडेय के बागी होने के बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था और वर्तमान में वह निर्दलीय विधायक के रूप में विधानसभा के सदस्य हैं. मनोज पांडे को योगी कैबिनेट में काफी हद तक जितिन प्रसाद के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी ने दो साल बाद ही सही, लेकिन योगी कैबिनेट में फिर एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा शामिल कर सामाजिक और जातीय समीकरणों को संतुलित करने का संदेश दिया है।


    मंत्रिमंडल विस्तार के केंद्र में है जातिगत समीकरण

    मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए सदस्यों में कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक कैलाश राजपूत और अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर शामिल हैं. वाल्मीकि समुदाय से आने वाले सुरेंद्र दिलेर को भाजपा द्वारा दलित मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कैलाश राजपूत को मंत्री बनाकर पार्टी ने लोध मतदाताओं के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की है. शपथ लेने वाले अन्य मंत्रियों में पासी समुदाय से आने वाले फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान और वाराणसी के एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं, जिन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माना जाता है।

    हंसराज विश्वकर्मा को शामिल कर बीजेपी ने पूर्वांचल में गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने का स्पष्ट संदेश दिया है. हंसराज 34 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं. उन्होंने 1989 में बूथ स्तर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था और राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी. वहीं, कृष्णा पासवान के जरिए पार्टी ने गैर-जाटव दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. कृष्णा पासवान ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी. वह चार बार की विधायक हैं और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं. वह भाजपा की प्रमुख दलित महिला चेहरा मानी जाती हैं।


    भूपेंद्र चौधरी करेंगे वेस्ट यूपी व जाटों का प्रतिनिधित्व

    इसके अलावा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट में वापसी पश्चिमी यूपी में जाट प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है. उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में शामिल भूपेंद्र चौधरी मुरादाबाद के रहने वाले हैं और लंबे समय तक संघ और भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं. चौधरी वर्ष 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने. 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया और 2019 में कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज की जिम्मेदारी मिली. उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे की वजह सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य बनाए रखना है।


    दो मंत्रियों को प्रमोशन देने में छिपा है सियासी संदेश

    सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को मिली जिम्मेदारियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार बदलाव के साथ निरंतरता बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है. सोमेंद्र तोमर मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक और ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत राज्य मंत्री ​थे, सरकार में उनका कद बढ़ाकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कर दिया गया है. इसी तरह कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से विधायक अजीत पाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री थे. उनका भी प्रमोशन करके राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • आज का धार्मिक योग: 11 मई को भगवान शिव की आराधना का खास महत्व

    आज का धार्मिक योग: 11 मई को भगवान शिव की आराधना का खास महत्व


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन शिव आराधना का विशेष महत्व होता है। 11 मई, सोमवार को ऐसा ही एक अत्यंत शुभ और पावन संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद फलदायी बताया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा की जाने वाली शिव पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली मानी जा रही है।

    मान्यता है कि भगवान शिव अत्यंत भोले और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। सोमवार के दिन यदि सच्चे मन से उनकी आराधना की जाए तो सभी प्रकार के दुख, रोग और बाधाओं का नाश होता है। 11 मई का यह विशेष दिन भक्तों के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी शिव भक्ति के अनुकूल मानी जा रही है, जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ सकता है।

    शिव मंदिरों में इस दिन सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है। लोग जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भस्म और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करेंगे। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप इस दिन विशेष रूप से लाभकारी बताया जा रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही विवाह, नौकरी, व्यापार और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलने के योग बनते हैं।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सोमवार और शिव आराधना का यह संयोग मानसिक शांति और आत्मिक बल को बढ़ाने वाला होता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो लंबे समय से किसी परेशानी या बाधा से जूझ रहे हैं।

    भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिवलिंग पर जल, दूध एवं पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद ध्यान और मंत्र जाप के माध्यम से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करें।

    कुल मिलाकर 11 मई का यह सोमवार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ अवसर लेकर आ रहा है, जो भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला माना जा रहा है।

  • चीता माताओं के संघर्ष कहानी…. विदेशी धरती से आकर कूनो में बढाया वंश…. मदर्स डे पर शॉर्ट फिल्म रिलीज

    चीता माताओं के संघर्ष कहानी…. विदेशी धरती से आकर कूनो में बढाया वंश…. मदर्स डे पर शॉर्ट फिल्म रिलीज


    श्योपुर।
    मदर्स-डे (Mother’s Day) के मौके पर कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन (Kuno National Park Management) ने चीता माताओं (Cheetah Mothers) के संघर्ष और मातृत्व को समर्पित एक शॉर्ट फिल्म जारी की, जो भारतीय जंगलों में चीतों की नई पीढ़ी को बसाने में उनकी भूमिका को दर्शाती है. इसमें बताया गया कि प्रोजेक्ट चीता के तहत पिछले साढ़े तीन सालों में भारत में चीतों का कुनबा बढ़कर अब 57 हो गया है. इस प्रोजेक्ट की सफलता में मादा चीतों का योगदान सबसे अहम रहा है।

    नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आईं 6 मादा चीतों में से 5 ने शावकों को जन्म दिया है. भारत में जन्मी 2 मादा चीतों ने भी सफलतापूर्वक प्रजनन कर शावकों को जन्म दिया है. पिछले साढ़े तीन वर्षों में कुल 49 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 37 पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं।

    कूनो पार्क की इन माताओं ने न सिर्फ खुद को भारत के माहौल में ढाला, बल्कि अपने शावकों को भी शिकार और सुरक्षा के उपाय सिखाए. वर्तमान में चीते कूनो और उसके आसपास के करीब 5 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।


    फिल्म में चीता मदर्स और उनके शावकों के संघर्ष की दिखी झलक.

    अलग-अलग देशों से लाए गए चीतों के कारण आनुवंशिक विविधता मजबूत हुई है, जिससे इनब्रीडिंग का खतरा टल गया है. दूसरी पीढ़ी (एफ-2 जेनरेशन) के शावकों का आना इस बात का सबूत है कि भारत में चीतों की आबादी अब धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रही है।

    कूनो प्रबंधन अब नए क्षेत्रों में भी चीतों को बसाने की तैयारी कर रहा है,जहां दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और भारत में जन्मे चीतों का एक मिला-जुला समूह रखा जाएगा. इस विशेष मौके पर कूनो के फील्ड स्टाफ, डॉक्टरों और वन अधिकारियों की मेहनत को भी सराहा गया, जिनकी दिन-रात की निगरानी की वजह से यह अभियान आज इस मुकाम पर पहुंचा है।

    प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि कूनो पार्क में चीता प्रोजेक्ट सफलता के नए आयाम गढ़ रहा है. विदेशी धरती से चीते लाकर बसाए गए जिन्होंने यहां नई पीढ़ी को जन्म देकर चीता प्रोजेक्ट को सफल बनाया है. 10 मई को मदर्स-डे है, लिहाजा हमने मां के रूप में मादा चीताओं और उनके शावकों की ममत्वमयी तस्वीर पेश करने का प्रयास किया है।

  • PM मोदी की देशवासियों से अपील… बोले- एक साल तक सोना खरीदने से बचें….

    PM मोदी की देशवासियों से अपील… बोले- एक साल तक सोना खरीदने से बचें….


    नई दिल्ली।
    पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को देशवासियों से 1 साल तक सोना ना खरीदने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने लोगों से विदेश यात्रा (Foreign travel) को आगे बढ़ाने की भी बात कही। प्रधानमंत्री ने यह अपील ऐसे समय में की है जब युद्ध की वजह से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पीएम मोदी की इस अपील के पीछे की वजह फॉरेन एक्सचेंज (foreign exchange) की बचत को माना जा रहा है।

    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) की वजह से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें सातवें आसमान पर हैं। साथ पूरी सप्लाई चेन तहस-नहस हो गई है। जिससे भारत जैसे आयात करने वाले देश अधिक प्रभावित हुए हैं। बता दें, पीएम मोदी अपनी अपील के जरिए फॉरेन एक्सचेंज आउटफ्लो को कम करना चाहते हैं।

    पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी अपील को देशभक्ति के साथ जोड़ा है। उन्होंने तेल की बचत करने का भी आग्रह किया है। पीएम ने लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम सिस्टम, नेचुरल फार्मिंग और स्वदेशी प्रोडक्ट्स का उपयोग करने की सलाह दी है।


    क्यों है गोल्ड का आयात इतना महत्वपूर्ण? (Why Gold matters)

    भारत दुनिया का सबसे अधिक गोल्ड आयात करने वाले देशों में से एक है। भारत का घरेलू मांग विदेशी आयात पर निर्भर करता है। क्योंकि भारत से खरीदे गए गोल्ड के लिए डॉलर में भुगतान करना होता है इसलिए यह भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त दबाव बनाता है। इससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है। फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व लगातार घटता है।

    यह चिंता मौजूदा परिस्थितियों में और बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल इंपोर्ट करता है। ऐसे में कच्चे तेल का बढ़ता रेट भी अतिरिक्त दबाव बना रहा है। बता दें, तेल और खाद के खर्च की वजह से डॉलर की निकासी पर दबाव बढ़ रहा है।

    ऐसे में अगर देश कम सोना खरीदता है तो वह रुपये की सेहत के लिए भी अच्छा रहेगा। वहीं, इससे ट्रेड बैलेंस भी बेहतर होगा।


    भारत का फॉरेक्स रिजर्व मजबूत (India forex reserves)

    फॉरेक्स रिजर्व के मोर्चे पर अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत का फॉरेक्स रिजर्व 691.11 अरब डॉलर है। जोकि 11 महीने के इंपोर्ट के लिए काफी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड का शेयर मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गया है। सितंबर 2025 तक यह 13.92 प्रतिशत था।

  • ईरान के यूरेनियम भंडार पर US की नजर…. ट्रंप बोले- उसके पास गए तो उड़ा दिए जाओगे

    ईरान के यूरेनियम भंडार पर US की नजर…. ट्रंप बोले- उसके पास गए तो उड़ा दिए जाओगे


    वाशिंगटन।
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने रविवार को कहा कि अमेरिका (America) ईरान (Iran) के संवर्धित यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium Reserves) पर सख्त नजर रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी उस स्थान के पास पहुंचने की कोशिश करता है तो वाशिंगटन को तुरंत पता चल जाएगा और उसे उड़ा दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की एक संस्था बनाई है और वे उस पर नजर रख रहे हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा, तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे।

    शैरिल एटकिंसन के साथ बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की संस्था बनाई है और वे उस पर पूरी नजर रखे हुए हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे। उन्होंने आगे कहा कि स्पेस फोर्स इतना सक्षम है कि अगर कोई अंदर घुसा भी तो उसका नाम, पता और बैज नंबर तक बता सकता है।

    वहीं, ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष पर बोलते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पूरी तरह से सैन्य रूप से पराजित हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, न विमानरोधी हथियार और न ही कोई नेता। ट्रंप ने कहा कि ईरान लगातार समझौते करता और तोड़ता रहा, लेकिन अब सैन्य दृष्टि से वह पूरी तरह कमजोर हो गया है। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका आज ईरान को अकेला छोड़ दे तो उसे अपने ढांचे को दोबारा खड़ा करने में करीब 20 साल लग जाएंगे।

    ईरान में जारी अमेरिकी सैन्य अभियान के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने बताया कि अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हम दो हफ्ते और अभियान जारी रख सकते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने 70 प्रतिशत लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह तो बस अंतिम काम होगा… लेकिन अगर हम वह भी नहीं करते तो भी उन्हें पुनर्निर्माण में 20 साल लग जाएंगे।

    इस दौरान ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की कभी अनुमति नहीं देंगे और इसे ‘पागलपन’ करार दिया। उन्होंने ओबामा प्रशासन द्वारा 2015 में हस्ताक्षरित संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उन्होंने उस समझौते को समाप्त नहीं किया होता तो ईरान अब तक इजराइल और पूरे मध्य पूर्व पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुका होता।

  • सप्ताह में 4 दिन काम…. 3 दिन आराम का रास्ता साफ… सरकार ने नोटिफाई किया नया लेबर कोड

    सप्ताह में 4 दिन काम…. 3 दिन आराम का रास्ता साफ… सरकार ने नोटिफाई किया नया लेबर कोड


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने चारों लेबर कोड (All four Labor Codes) के तहत नियमों को नोटिफाई कर दिया है। इन नए नियमों से कुछ चुनिंदा सेक्टरों में सप्ताह में चार दिन काम और 3 दिन की छुट्टी लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। नए केंद्रीय कोड ऑन वेज के अनुसार, किसी भी कर्मचारी के लिए साप्ताहिक काम के घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होंगे। यानी अब कंपनी और कर्मचारी चाहें तो इन 48 घंटों को केवल 4 दिनों में बांट सकते हैं यानी प्रतिदिन 12 घंटे काम करके। बदले में उन्हें 3 दिन की छुट्टी यानी सप्ताह में तीन रेस्ट डे मिल सकती है।

    हालांकि, यह सुविधा सभी के लिए समान नहीं है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए एक सामान्य कार्य दिवस 8 घंटे का ही रहेगा, इससे अधिक काम पर ओवरटाइम मिलेगा। साथ ही, ओवरटाइम की दर अब सामान्य दर की दोगुनी कर दी गई है।

    नए श्रम कानून कर्मचारियों को अधिक लचीलापन और बेहतर सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। हालांकि यह चार-दिवसीय कार्य सप्ताह अभी शुरुआती चरण में है और केवल चुनिंदा सेक्टरों में ही संभव है, फिर भी यह भारत में कामकाज के भविष्य का एक नया मॉडल पेश करता है।


    किन क्षेत्रों में 4 डे वर्क वीक की संभावना?

    बिजनेस स्टैंडर्ड की खबरे के अनुसार, जिन क्षेत्रों में शिफ्ट-बेस्ड या प्रोजेक्ट-ड्रिवन काम होता है, वहां इसे आसानी से लागू किया जा सकता है। जैसे, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, IT और शेयर्ड सर्विसेज।

    हालांकि, जिन सेक्टरों में ग्राहकों की तत्काल जरूरतें और रियल-टाइम डिलीवरी की उम्मीद होती है, जैसे कुछ बैंकिंग, रिटेल या कस्टमर सपोर्ट, उनके लिए यह व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


    अंतिम नियमों में बड़े बदलाव

    गौरतलब है कि सरकार ने शुक्रवार (10 मई, 2026) को सभी चार लेबर कोड के अंतिम नियम जारी किए। इनमें शामिल हैं। इनमें इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, कोड ऑन वेज 2019, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और ऑक्यूपेशन सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 शामिल हैं।

    संसद द्वारा ये कानून पारित किए लगभग 6 साल बाद, 30 से अधिक गजेट नोटिफिकेशन के जरिए इन नियमों को अंतिम रूप दिया गया। दिसंबर 2025 में जो ड्राफ्ट जारी किया गया था, उसमें न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कैलोरी इनटेक, कपड़े, किराया, ईंधन खर्च आदि के मानदंड थे। लेकिन अंतिम नियमों में इन्हें हटा दिया गया है। अब सरकार बाद में अलग से आदेश जारी करेगी।


    कर्मचारियों पर क्या क्या होगा असर?

    कंपनी या संस्थान को अनिवार्य नियुक्ति पत्र हर कर्मचारी को देना होगा। ओवरटाइम भुगतान के स्पष्ट प्रावधान होगा। वर्कर रिस्किलिंग फंड में योगदान करना होगा। एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी देनी होगी। इस नए कोड में आश्रित माता-पिता के लिए मासिक आय सीमा ₹9,000 से बढ़ाकर ₹14,000 कर दी गई है।


    कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां

    कंपनियों को अब ओवरटाइम भुगतान और रिस्किलिंग योगदान के कारण लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, उन्हें एचआर प्रथाओं को औपचारिक रूप देना होगा, काम के घंटे ट्रैक करने होंगे और अनिवार्य स्वास्थ्य लाभ देने होंगे।

  • हंगरी में 16 साल बाद बदली सत्ता… नया PM के शपथ समारोह में सहयोगी सांसदों ने जमकर किया डांस

    हंगरी में 16 साल बाद बदली सत्ता… नया PM के शपथ समारोह में सहयोगी सांसदों ने जमकर किया डांस


    बुडापेस्ट।
    हंगरी (Hungary) के नए प्रधानमंत्री पीटर माग्यार (New Prime Minister Peter Magyar) ने शनिवार को पद की शपथ ली। नई संसद के उद्घाटन सत्र में हुए मतदान के बाद उन्होंने देश की व्यवस्था बदलने का संकल्प लिया। शपथ ग्रहण समारोह (Swearing Ceremony) के दौरान उनके सहयोगी सांसद और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ ज्सोल्ट हेगेदुस ने अलग अंदाज में डांस कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, 45 वर्षीय पीटर माग्यार ने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद संभाल लिया, जिसके साथ ही विक्टर ओर्बन (Viktor Orban) का 16 साल लंबा शासन समाप्त हो गया। माग्यार की तिस्जा पार्टी ने 12 अप्रैल को हुए संसदीय चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी और 199 सीटों वाली संसद में 141 सीटें हासिल की है।

    शपथ ग्रहण के बाद माग्यार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि हंगरी की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह। हंगेरियन होना इतना सुखद कभी नहीं रहा। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं हंगरी पर शासन नहीं करूंगा, बल्कि अपने देश की सेवा करूंगा। उन्होंने हंगरी के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू करने और ऐसी सरकार बनाने का वादा किया जो न सिर्फ सत्ता बल्कि पूरी व्यवस्था को बदल दे।

    इस दौरान मग्यार ने कहा कि मैं यहां इसलिए नहीं खड़ा हूं क्योंकि मैं देश में किसी और से अलग हूं। मैं यहां इसलिए खड़ा हूं क्योंकि लाखों हंगरीवासियों ने बदलाव लाने का फैसला किया है। हमें जो विश्वास मिला है, वह हमारे लिए सम्मान और नैतिक दायित्व दोनों है, लेकिन साथ ही एक अद्भुत एहसास भी है।

    हालांकि माग्यार का भाषण पूरी तरह राजनीतिक था, लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री पद की दावेदारी रखने वाले ज्सोल्ट हेगेदुस के डांस की हो रही है। अप्रैल में तिस्जा पार्टी की चुनावी रैली में उनके जोशीले नृत्य का वीडियो पहले ही वायरल हो चुका था। शनिवार को उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर और डेन्यूब नदी किनारे जमा हजारों समर्थकों के सामने फिर से अपना डांस दोहराया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में माग्यार अन्य सांसदों के साथ तालियां बजाते नजर आ रहे हैं।

    दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि हंगरी में मग्यार की सरकार आने से हंगरी के यूरोपीय संघ के साथ राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आएगा। दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्णयों पर बार-बार वीटो किया है, जिनमें हाल में पड़ोसी यूक्रेन को समर्थन देने से संबंधित निर्णय को वीटो करना शामिल है।