Author: bharati

  • अक्षय खन्ना ने खाने पर टोकने वालों को लताड़ा, बोले-दुआओं से बनती है फिल्म..

    अक्षय खन्ना ने खाने पर टोकने वालों को लताड़ा, बोले-दुआओं से बनती है फिल्म..


    नई दिल्ली । सिनेमा की दुनिया में अक्षय खन्ना को एक ऐसे मंझे हुए कलाकार के रूप में जाना जाता है जो अपनी निजी जिंदगी और सेट पर अपने व्यवहार को लेकर बेहद अनुशासित रहते हैं। अक्सर खामोश रहने वाले अक्षय के बारे में कहा जाता है कि वह अपने काम से काम रखते हैं और फालतू की चर्चाओं से दूर रहते हैं। लेकिन हाल ही में उनके एक पुराने साथी कलाकार ने उस घटना का विवरण दिया है, जिसने अक्षय के एक अलग ही पहलू को दुनिया के सामने रखा है। यह वाकया उस समय का है जब एक फिल्म की शूटिंग चल रही थी और वहां एक ऐसा विवाद खड़ा हुआ जिसने शांत रहने वाले अक्षय को ‘ज्वालामुखी’ की तरह फटने पर मजबूर कर दिया। दरअसल, पूरा मामला एक सह-कलाकार के सम्मान और उसकी भूख से जुड़ा था, जिसे प्रोडक्शन टीम के कुछ लोगों ने बेहद तुच्छ समझा था।

    सेट पर मौजूद गवाहों के अनुसार, एक कैरेक्टर एक्टर जो उस फिल्म का हिस्सा थे, लंच के समय अक्षय के होटल में भोजन करने पहुंचे थे। वे किसी दूसरे होटल में ठहरे हुए थे, इसलिए तकनीकी नियमों का हवाला देकर वहां मौजूद प्रोड्यूसर के करीबियों या परिवार के सदस्यों ने उन पर आपत्ति जता दी। जैसे ही वह कलाकार भोजन का पहला निवाला लेने वाले थे, उन्हें टोक दिया गया और कहा गया कि वे वहां का खाना नहीं खा सकते। उस कलाकार को यह बात इतनी चुभ गई कि उन्होंने चुपचाप अपनी प्लेट किनारे रख दी और वहां से हटकर अकेले बैठ गए। अक्षय खन्ना दूर से यह सब देख रहे थे और उनसे एक कलाकार का यह सार्वजनिक अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ। जो अक्षय कभी किसी के विवाद में नहीं पड़ते, उस दिन उन्होंने अपनी गरिमा और शांति को किनारे रखकर मोर्चा संभाल लिया।

    अक्षय खन्ना का गुस्सा उस दिन सातवें आसमान पर था। उन्होंने न केवल उस कलाकार का पक्ष लिया बल्कि पूरी यूनिट और प्रोड्यूसर के सामने अपना विरोध दर्ज कराया। बताया जाता है कि अक्षय इस कदर आक्रोशित थे कि उन्होंने प्रोड्यूसर और संबंधित क्रू मेंबर्स को जमकर लताड़ा और शब्दों की मर्यादा भी टूट गई। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा कि कोई भी फिल्म इस बात से सफल नहीं होती कि आपने सेट पर कितनी प्लेटें बचाईं या कितना राशन कम खर्च किया। अक्षय ने दहाड़ते हुए कहा कि फिल्में लोगों की दुआओं और उनके आशीर्वाद से बनती हैं, किसी भूखे का अपमान करके नहीं। उन्होंने साफ कर दिया कि अगर एक कलाकार के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो काम की गुणवत्ता का कोई मोल नहीं रह जाएगा।

    इस घटना ने सेट पर मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया था क्योंकि किसी ने भी अक्षय का ऐसा ‘रौद्र रूप’ पहले कभी नहीं देखा था। अक्षय ने उस दिन यह साबित कर दिया कि वे भले ही कम बोलते हों, लेकिन जब बात किसी के स्वाभिमान और मानवता की आती है, तो वे पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। उनके इस कड़े रुख के बाद सेट का माहौल पूरी तरह बदल गया और प्रोडक्शन को अपनी गलती का अहसास हुआ। यह किस्सा आज भी फिल्म जगत के गलियारों में चर्चा का विषय रहता है क्योंकि यह दिखाता है कि पर्दे पर विलेन की भूमिका निभाने वाला यह कलाकार असल जिंदगी में कमजोरों और अपने साथियों के लिए किसी नायक से कम नहीं है। अक्षय की इस बेबाकी ने यह संदेश दिया कि फिल्म निर्माण केवल कैमरे और लाइट्स का खेल नहीं है, बल्कि यह एक परिवार की तरह है जहां हर सदस्य का सम्मान सर्वोपरि है।

  • आईपीएल 2026 में इन 5 भारतीय सितारों को नहीं मिला मैदान पर उतरने का मौका..

    आईपीएल 2026 में इन 5 भारतीय सितारों को नहीं मिला मैदान पर उतरने का मौका..

    नई दिल्ली । क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर जहाँ एक ओर युवाओं की नई पौध अपनी चमक बिखेर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे नामी खिलाड़ी भी हैं जिनका पूरा सीजन केवल डगआउट की सफेद कुर्सियों पर बैठकर बीत गया। इस सूची में सबसे ऊपर पृथ्वी शॉ का नाम आता है, जो कभी भारतीय बल्लेबाजी की अगली पीढ़ी के ध्वजवाहक माने जाते थे। दिल्ली की टीम ने उन्हें नीलामी में दोबारा अपने साथ जोड़ा तो था, लेकिन पूरे टूर्नामेंट के दौरान कप्तान और प्रबंधन ने उन्हें एक भी मैच की प्लेइंग इलेवन में जगह देना मुनासिब नहीं समझा। 75 लाख रुपये में बिकने वाले शॉ के लिए यह साल उनके करियर की सबसे बड़ी गिरावट के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि कभी उनकी गिनती टीम के सबसे महंगे और अनिवार्य खिलाड़ियों में होती थी। अब उनका पूरा सीजन बिना एक भी गेंद खेले खत्म होने की कगार पर है।

    अनुभवी तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा की स्थिति भी कुछ इसी तरह की रही। गुजरात की टीम ने उन्हें रिटेन कर उन पर भरोसा तो जताया, लेकिन मैदान की हकीकत कुछ और ही रही। युवा तेज गेंदबाजों की बढ़ती रफ्तार और टी-20 क्रिकेट की बदलती मांग के बीच ईशांत की अनुभव वाली रणनीति टीम के समीकरणों में फिट नहीं बैठ सकी। पिछले सीजन के महंगे इकोनॉमी रेट ने उनकी राह और मुश्किल कर दी, जिसके चलते वह पूरे सीजन केवल नेट प्रैक्टिस और ड्रेसिंग रूम तक ही सीमित रह गए। उनके साथ ही अर्जुन तेंदुलकर की चर्चा भी काफी रही, जो मुंबई से ट्रेड होकर लखनऊ की टीम में पहुंचे थे। सचिन तेंदुलकर के पुत्र होने के नाते उन पर हमेशा कैमरे की नजर रही, लेकिन मैदान पर वह अपनी गेंदबाजी का जौहर दिखाने को तरसते रहे। पिछले दो वर्षों से लगातार मौकों का इंतजार कर रहे अर्जुन के लिए यह सीजन पेशेवर तौर पर बेहद निराशाजनक साबित हुआ है।

    वहीं घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा करने वाले युवा मुशीर खान के लिए भी पंजाब की टीम का सफर केवल सीखने तक ही सीमित रहा। अपने भाई सरफराज खान की तरह आक्रामक बल्लेबाजी और स्पिन गेंदबाजी के लिए मशहूर मुशीर को इस साल एक भी मुकाबले में खुद को साबित करने की चुनौती नहीं मिली। टीम के पास मौजूद विदेशी विकल्पों और सीनियर ऑलराउंडर्स की मौजूदगी ने उन्हें बाउंड्री के बाहर ही रोके रखा। इसी फेहरिस्त में अनुभवी बल्लेबाज राहुल त्रिपाठी का नाम भी जुड़ गया है, जिनकी कोलकाता की टीम में वापसी तो हुई लेकिन वापसी का यह जश्न मैदान तक नहीं पहुंच सका। पिछले साल के खराब प्रदर्शन का असर उनके चयन पर साफ दिखा, जहाँ मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा जताने के बजाय नए चेहरों के साथ जाना बेहतर समझा।

    इन पांचों खिलाड़ियों का भाग्य यह स्पष्ट करता है कि इस खेल के सबसे छोटे और ग्लैमरस प्रारूप में आपका नाम चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, तात्कालिक प्रदर्शन और टीम का संतुलन ही आपकी जगह तय करता है। करोड़ों के अनुबंध और प्रशंसकों की भारी उम्मीदों के बीच शुरू हुआ इन खिलाड़ियों का सफर अब प्लेऑफ के करीब आते-आते केवल डगआउट की यादों तक सीमित रह गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले सीजन की नीलामी से पहले ये खिलाड़ी खुद को मानसिक रूप से कैसे तैयार करते हैं, क्योंकि मैदान से दूर रहकर अपनी लय बनाए रखना किसी भी पेशेवर खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। फिलहाल, इनके लिए यह सीजन केवल एक लंबा इंतजार बनकर रह गया है।

  • भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन: मासिक शिवरात्रि पर व्रत और पूजा का महत्व

    भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन: मासिक शिवरात्रि पर व्रत और पूजा का महत्व


    नई दिल्ली । मई महीने की मासिक शिवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का अत्यंत शुभ दिन माना जाता है।

    पंचांग के अनुसार मई 2026 की मासिक शिवरात्रि 14 मई 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 13 मई की रात से होगी और इसका समापन अगले दिन तक रहेगा। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे और मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की उपासना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से जो श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और पूरी श्रद्धा से शिवजी की पूजा करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

    इस दिन पूजा का विशेष महत्व निशिता काल में माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मध्य रात्रि का समय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ होता है। इसी समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने की परंपरा है।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान कर संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाती है।

    मंदिरों में इस दिन विशेष सजावट की जाती है और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। कई स्थानों पर रात्रि जागरण और भजन संध्या का भी आयोजन किया जाता है।

  • गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम

    गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम


    नई दिल्ली । राजगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और स्वास्थ्य केंद्रों की खराब स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत दो सीबीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कई कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नरसिंहगढ़ ब्लॉक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में खराब प्रदर्शन पर सीबीएमओ डॉ. राजेंद्र अहिरवार को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा खिलचीपुर और राजगढ़ ब्लॉक के सीबीएमओ को बैठक में अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के वेतन काटने की कार्रवाई की जाएगी।

    स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर गर्भवती महिलाओं का पंजीयन समय पर नहीं हो रहा है और उनकी नियमित जांच में लापरवाही बरती जा रही है। इस पर प्रशासन ने सख्त नाराजगी जताते हुए प्रत्येक ब्लॉक से सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले पांच सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एएनएम को भी नोटिस जारी किए हैं।

    इसके अलावा ओपीडी सेवाओं और स्वास्थ्य शिविरों में तय लक्ष्य के अनुसार एक्स-रे जांच नहीं होने पर भी संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई है। प्रशासन ने इसे गंभीर सेवा लापरवाही मानते हुए सुधार के निर्देश दिए हैं।

    पोषण पुनर्वास केंद्रों की स्थिति भी समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाई गई। यहां बच्चों की कम संख्या और समय से पहले डिस्चार्ज किए जाने के मामलों पर भी कार्रवाई की गई है। इस पर जिले के सभी छह फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. इच्छित गढ़पाले ने स्पष्ट कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखता है तो और भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • मुख्यमंत्री बनते ही विजय का भावुक और दमदार जननायक’ रूप, परिवार की आंखें नम..

    मुख्यमंत्री बनते ही विजय का भावुक और दमदार जननायक’ रूप, परिवार की आंखें नम..

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय उस समय शुरू हुआ जब अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजधानी में आयोजित इस भव्य समारोह ने न केवल राजनीतिक हलकों में बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी चर्चा पैदा कर दी। यह अवसर उनके जीवन का सबसे निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, जहां एक फिल्मी करियर से निकलकर उन्होंने सीधे राज्य के शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली।

    शपथ ग्रहण के बाद विजय का व्यक्तित्व पूरी तरह बदला हुआ और आत्मविश्वास से भरा नजर आया। मंच पर आते ही उन्होंने जनता को संबोधित किया और अपने विचारों को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उनका संदेश पूरी तरह जनसेवा और जिम्मेदारी पर केंद्रित था, जिसमें उन्होंने जनता के कल्याण को अपनी प्राथमिक प्राथमिकता बताया। इस दौरान उनके अंदाज में एक अलग ही गंभीरता और नेतृत्व क्षमता झलक रही थी, जिसे कई लोगों ने उनके ‘जननायक’ रूप से जोड़कर देखा।

    इस पूरे आयोजन का सबसे भावनात्मक पक्ष उनके परिवार की मौजूदगी रही। जैसे ही विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उनके पिता और माता भावुक हो उठे। उनके चेहरे पर गर्व के साथ-साथ भावनाओं की गहराई भी साफ दिखाई दे रही थी। यह दृश्य केवल एक राजनीतिक क्षण नहीं बल्कि एक पारिवारिक उपलब्धि का प्रतीक बन गया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।

    इसी समारोह में विजय के करीबी लोगों की मौजूदगी ने भी इस पल को और खास बना दिया। अभिनेत्री तृषा कृष्णन इस आयोजन में विशेष रूप से शामिल हुईं और पूरे कार्यक्रम के दौरान बेहद भावनात्मक नजर आईं। बताया जाता है कि इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान उनकी आंखों में नमी थी और वे इस उपलब्धि को बेहद करीब से महसूस कर रही थीं। उनकी उपस्थिति ने भी इस पूरे माहौल को और अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक बना दिया।

    कार्यक्रम के दौरान कई अन्य प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं, जिससे यह आयोजन एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मिलन के रूप में सामने आया। मंच पर और उसके बाद विजय का कई लोगों के साथ संवाद भी देखने को मिला, जिसमें एक नई शुरुआत और सहयोग की झलक स्पष्ट दिखाई दी।

    शपथ ग्रहण के बाद विजय सीधे सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला। यह क्षण उनके राजनीतिक सफर में एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत का प्रतीक बना। इस दौरान उनके समर्थकों में उत्साह और जोश का माहौल देखा गया, जो लगातार उनके नेतृत्व को लेकर आशान्वित नजर आ रहे थे।

    इस पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि विजय का राजनीतिक प्रवेश केवल एक व्यक्तिगत यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक बड़े जन समर्थन और उम्मीदों से जुड़ा हुआ अध्याय है। भावनाओं, जिम्मेदारियों और नई उम्मीदों से भरा यह दिन तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

  • रायसेन में बड़ा हादसा: बाइक सवार को बचाने में टैंकर पुलिया पर लटका

    रायसेन में बड़ा हादसा: बाइक सवार को बचाने में टैंकर पुलिया पर लटका


    नई दिल्ली। सलामतपुर क्षेत्र में भोपाल-विदिशा नेशनल हाईवे 146 पर शुक्रवार रात एक बड़ा सड़क हादसा टल गया। आमखेड़ा और काछी कानाखेड़ा गांव के बीच एक ऑयल टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर पुलिया की रेलिंग पर अटक गया और आधा वाहन हवा में लटक गया। यह घटना उस समय हुई जब टैंकर चालक ने सामने से आ रही बाइक को बचाने के प्रयास में अचानक वाहन मोड़ दिया।

    जानकारी के अनुसार, टैंकर (एमपी04 एचई 7333) विदिशा की ओर जा रहा था, तभी अचानक सामने से बाइक सवार आ गया। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने तेजी से स्टेयरिंग घुमा दिया, जिससे टैंकर नियंत्रण खो बैठा और पुलिया की रेलिंग पर जाकर फंस गया। गनीमत रही कि टैंकर पूरी तरह नीचे नहीं गिरा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

    इस टक्कर में बाइक को भी नुकसान पहुंचा, जिसका अगला पहिया टूट गया। हालांकि बाइक सवार को गंभीर चोट नहीं आई और वह सुरक्षित बच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना इतनी अचानक हुई कि कुछ समय के लिए मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग घबरा गए।

    घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 पुलिस टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद क्रेन की मदद से टैंकर को सुरक्षित रूप से हटाया गया और हाईवे पर यातायात को फिर से बहाल किया गया। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि टैंकर पूरी तरह पुलिया से नीचे गिर जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था, क्योंकि नीचे काफी गहराई है और वाहन में भारी मात्रा में तेल भी भरा हुआ था।

  • सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई

    सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई


    नई दिल्ली । विदिशा वन मंडल में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। ग्राम पंचायत बीजूखेड़ी, जनपद पंचायत लटेरी के पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई वन भूमि पर कब्जे के गंभीर आरोपों और जांच में दोष सिद्ध होने के बाद की गई है।
    मामले की शुरुआत उस समय हुई जब वन परिक्षेत्र उत्तर लटेरी की देहरीपामा बीट के कक्ष क्रमांक पी-410 में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत सामने आई। इस पर वन विभाग ने 21 जुलाई 2024 को वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर पर ही इस अतिक्रमण का आरोप था।
    वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 80 ‘अ’ के तहत संबंधित सचिव को दो बार कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन आरोपी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे मामला और गंभीर हो गया।
    जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद वनमंडलाधिकारी विदिशा ने अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद भूमि से कब्जा नहीं हटाया गया। आदेश की अवहेलना के बाद विभाग ने जिला पंचायत को कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।
    इसके बाद जिला पंचायत ने कार्रवाई करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देश पर 8 मई 2026 को पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया।
    वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हों।
    इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर एक सख्त संदेश दिया गया है।

  • काम का बोझ या आपसी झगड़ा? आमला में देर रात घर लौटने को लेकर विवाद के बाद महिला का सुसाइड, उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार

    काम का बोझ या आपसी झगड़ा? आमला में देर रात घर लौटने को लेकर विवाद के बाद महिला का सुसाइड, उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार


    नई दिल्ली । बैतूल जिले के आमला से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ गृहक्लेश और तंगहाली ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। वार्ड नंबर-1 में रहने वाली 30 वर्षीय महिला नीलू नागले ने शनिवार रात जहरीला पदार्थ (सल्फास) खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

    विवाद और तंगहाली: दो मासूमों के सिर से उठा मां का साया
    घटना की जानकारी मिलते ही आमला थाना पुलिस मौके पर पहुंची, जहाँ मृतका के सिरहाने से सल्फास की खाली डिब्बी बरामद हुई है। प्रारंभिक जांच में इस आत्मघाती कदम के पीछे पारिवारिक कलह और आर्थिक तंगी को मुख्य कारण माना जा रहा है।

    देर रात घर लौटने पर होता था झगड़ा
    थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर के अनुसार, नीलू बर्तन मांजने का काम करती थी। काम की अधिकता के कारण उसे अक्सर घर लौटने में देर हो जाती थी। इसी बात को लेकर पति विजय नागले, जो कि एक होटल में काम करता है, के साथ उसका अक्सर विवाद होता था। अंतिम मुलाकात: शनिवार रात करीब 12:30 बजे नीलू अपने पति के पास से बच्चों को लेने गई थी।

    संदिग्ध स्थिति: उसके कुछ ही समय बाद नीलू की तबीयत बिगड़ी और जहर के असर के कारण उसकी मौत हो गई। आर्थिक दबाव: पति-पत्नी दोनों मजदूरी कर परिवार चला रहे थे, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते घर में मानसिक तनाव बना रहता था।

    पुलिस जांच और पोस्टमार्टम
    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया है। मृतका अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गई है, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम किया है और मामले के हर पहलू की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि आत्महत्या की असल वजह स्पष्ट हो सके।

  • खुद चला रहा था ट्रैक्टर, लौटते समय हादसा: हरदा में नदी पार करते वक्त अनहोनी

    खुद चला रहा था ट्रैक्टर, लौटते समय हादसा: हरदा में नदी पार करते वक्त अनहोनी


    नई दिल्ली ।  हरदा जिले के झाड़पा गांव में रविवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। अजनाल नदी पर बने पुल पर ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे 15 वर्षीय किशोर की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब किशोर खेत से मक्का लेकर ट्रॉली में भरकर गांव लौट रहा था और स्वयं ट्रैक्टर चला रहा था।

    जानकारी के अनुसार, झाड़पा गांव निवासी सूरज विश्नोई का बेटा दर्शन विश्नोई (15) रविवार सुबह नीमगांव स्थित अपने खेत से मक्का भरकर ट्रॉली में गांव लौट रहा था। लौटते समय जब वह अजनाल नदी के रपटे पर पहुंचा, तो ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित हो गया और सीधे नदी में पलट गया। हादसे में किशोर ट्रैक्टर के नीचे दब गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीन की मदद से ट्रैक्टर के नीचे दबे किशोर को बाहर निकाला। गंभीर हालत में उसे तत्काल हरदा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। हादसे के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

    बताया जा रहा है कि मृतक दर्शन विश्नोई अपने दो भाइयों में सबसे छोटा था। उसका बड़ा भाई लुधियाना में पढ़ाई कर रहा है। दर्शन हरदा के सरस्वती शिशु मंदिर में दसवीं कक्षा का छात्र था और पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की मदद के लिए खेत का काम भी करता था।

    ग्रामीणों के अनुसार, नदी का रपटा कई बार हादसों का कारण बन चुका है, लेकिन सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में खतरनाक रास्तों और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के जोखिम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • पड़ोस बना काल: नर्मदापुरम में मासूम बच्ची से पड़ोसी ने पार की मर्यादा, FIR दर्ज होते ही आरोपी फरार

    पड़ोस बना काल: नर्मदापुरम में मासूम बच्ची से पड़ोसी ने पार की मर्यादा, FIR दर्ज होते ही आरोपी फरार



    नई दिल्ली । नर्मदापुरम जिले के केसला थाना क्षेत्र में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है, जहाँ एक 50 वर्षीय व्यक्ति ने मानवता को ताक पर रखकर 11 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की कोशिश की। यह घटना 8 मई की शाम की है, जिसने पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है।

    पड़ोसी की शर्मनाक करतूत: घर में अकेला पाकर की छेड़छाड़
    घटना उस वक्त हुई जब बच्ची की मां किसी जरूरी काम से सुखतवा गई हुई थी। घर में 11 साल की मासूम अपनी 5 साल की छोटी बहन के साथ अकेली थी। सूने घर और बच्चियों को अकेला देख पड़ोस में रहने वाले बुद्धू चाचा उर्फ नर्मदा प्रसाद की नीयत डोल गई।

    आरोपी चुपके से घर में दाखिल हुआ और मासूम बच्ची को बुरी नीयत से दबोच लिया। आरोपी ने बच्ची के साथ ‘बैड टच’ और छेड़छाड़ शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से बच्ची बुरी तरह घबरा गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और शोर मचाना शुरू कर दिया। मासूम की चीखें सुनकर आरोपी पकड़े जाने के डर से मौके से फरार हो गया।

    मां के लौटते ही खुला राज, पुलिस ने कसा शिकंजा
    शाम करीब 6 बजे जब मां घर लौटी, तो उसने अपनी बेटी को डरा-सहमा और रोता हुआ पाया। पूछने पर मासूम ने ‘बुद्धू चाचा’ की सारी सच्चाई बयां कर दी। अपनी कलेजे के टुकड़े के साथ हुई इस हरकत को सुनकर मां तुरंत उसे लेकर केसला थाने पहुंची।

    पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति:
    केस दर्ज: पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और छेड़छाड़ की अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

    आरोपी की पहचान: आरोपी नर्मदा प्रसाद सीपीई (CPE) में एक प्राइवेट कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। फरार आरोपी: वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी फरार है। पुलिस की टीमें लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। केसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने आश्वासन दिया है कि आरोपी की तलाश के लिए टीमें पिछले दो दिनों से सक्रिय हैं और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।