Author: bharati

  • अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों की मौत पर घिरी सरकार, उधर ट्रंप से पीएम मोदी की होनी है मुलाकात, क्या-क्या होगा?

    अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों की मौत पर घिरी सरकार, उधर ट्रंप से पीएम मोदी की होनी है मुलाकात, क्या-क्या होगा?

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 17 जून को होने वाली प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक ऐसे समय में आयोजित होने जा रही है, जब ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत का मामला राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा के केंद्र में है। इस घटना के बाद देश के भीतर सरकार पर दबाव बढ़ा है और विपक्ष लगातार अमेरिका से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की यह मुलाकात सामान्य राजनयिक बैठक से कहीं अधिक महत्व रखती है।

    फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर नजरें टिकी हुई हैं। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने द्विपक्षीय संबंधों के सामने एक संवेदनशील चुनौती भी खड़ी कर दी है।

    ओमान की खाड़ी में हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से अधिक सक्रिय और स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। राजनीतिक दलों का कहना है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में सरकार को ठोस जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। विपक्ष का तर्क है कि यह केवल विदेश नीति का नहीं बल्कि भारतीय नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा का भी प्रश्न है।

    इस बीच भारत की ओर से राजनयिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अमेरिकी पक्ष की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक खेद या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी वजह से मोदी-ट्रंप वार्ता में इस विषय के शामिल होने की संभावना को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नेतृत्व इस मामले को संवेदनशीलता और संतुलन के साथ उठाने का प्रयास कर सकता है।

    बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों से जुड़ा हुआ है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है। उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेता वार्ता की प्रगति की समीक्षा करेंगे और भविष्य के आर्थिक सहयोग की दिशा पर चर्चा करेंगे। हालांकि तत्काल किसी अंतिम समझौते की संभावना कम मानी जा रही है, फिर भी यह बैठक आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी संभावित एजेंडे का हिस्सा मानी जा रही हैं। पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे भी दोनों देशों के बीच चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। विशेष रूप से ओमान की खाड़ी और उससे जुड़े समुद्री मार्गों का महत्व वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल विदेश नीति का विषय नहीं है, बल्कि इसका घरेलू राजनीतिक प्रभाव भी पड़ सकता है। विपक्ष पहले से ही सरकार के रुख पर सवाल उठा रहा है और वह इस बैठक के परिणामों को बारीकी से देखेगा। यदि भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता है, तो यह सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण संदेश माना जाएगा।

    आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों देशों के बीच वार्ता किन ठोस निष्कर्षों तक पहुंचती है। फिलहाल इतना तय है कि जी-7 सम्मेलन के दौरान होने वाली मोदी-ट्रंप बैठक भारत-अमेरिका संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और भारतीय नागरिकों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के कारण विशेष महत्व रखती है।

  • एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन: ढाई साल में 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव, अब अगले ढाई साल में 4500 करोड़ देने का लक्ष्य

    एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन: ढाई साल में 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव, अब अगले ढाई साल में 4500 करोड़ देने का लक्ष्य


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में 900 उद्योग इकाइयों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 360 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। इसके साथ ही 31 मार्च 2026 तक लंबित सभी पात्र देनदारियों का भी निराकरण कर दिया गया। कुछ उद्योगों को विशेष सहायता के तहत मंडी शुल्क और बिजली अनुदान का लाभ भी दिया गया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले ढाई वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र को 4500 करोड़ रुपए का इंसेंटिव उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है और सरकार इसकी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं, जिनके माध्यम से सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 4 लाख 41 हजार से ज्यादा इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं, जो प्रदेश में महिला उद्यमिता की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और अवसर उपलब्ध करा रही है।

    कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले ढाई वर्षों के दौरान राज्य में 30 नए औद्योगिक क्षेत्रों और 14 औद्योगिक क्लस्टरों को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 1063 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी किया जा चुका है। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 7400 से अधिक स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें से 3400 से अधिक का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह संख्या कुल स्टार्टअप्स का लगभग 50 प्रतिशत है, जो महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है।

    एमएसएमई मंत्री Chaitanya Kashyap और प्रमुख सचिव Raghvendra Singh ने बताया कि वर्तमान सरकार के पिछले ढाई वर्षों में उद्योगों को 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया गया है। इसके मुकाबले इससे पहले के ढाई वर्षों में यह राशि केवल 1245 करोड़ रुपए थी। यानी प्रोत्साहन राशि में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 तक प्रदेश में एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों के लक्ष्य की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर जिले में उद्योग और हर परिवार में रोजगार सुनिश्चित करना है। इस दिशा में अगले ढाई से तीन वर्षों में 5000 नए औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार अब तक 76 विधानसभा क्षेत्रों में एमएसएमई सेंटर स्थापित करने के लिए स्थानों का चयन भी किया जा चुका है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सागर जिले के केसली में आयोजित लाडली बहना सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जहां उन्होंने लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त के रूप में 1.25 करोड़ हितग्राहियों के खातों में 1835 करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित की। साथ ही 190.85 करोड़ रुपए लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया गया।

  • मानपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रिश्तेदार पर जानलेवा हमले का आरोप, लाठी-तलवार से मारपीट के बाद थाने का घेराव

    मानपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रिश्तेदार पर जानलेवा हमले का आरोप, लाठी-तलवार से मारपीट के बाद थाने का घेराव


    मध्यप्रदेश । महू के मानपुर थाना क्षेत्र में रविवार को एक विवादित घटना के बाद तनाव की स्थिति बन गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari के रिश्तेदार बताए जा रहे संजय पटेल पर कथित रूप से जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले उनकी बाइक को कार से टक्कर मारी गई और उसके बाद उन पर लाठी तथा धारदार हथियारों से हमला किया गया। घटना में गंभीर रूप से घायल संजय पटेल को उपचार के लिए इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार विष्णुप्रसाद पटेल ने आरोप लगाया है कि रविवार सुबह संजय पटेल बाइक से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान पंजाबी ढाबे के पास एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टक्कर के बाद कार से उन्हें कुचलने का प्रयास किया गया। इसके बाद कार में सवार कुछ लोगों ने कथित रूप से उन्हें घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी।

    शिकायतकर्ताओं के अनुसार मिथुन ठाकुर, धनसिंह ठाकुर, विरेन ठाकुर और उनके अन्य साथियों ने लाठी तथा तलवार जैसे हथियारों से हमला किया। घटना में संजय पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और समर्थक बड़ी संख्या में मानपुर थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर थाने का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने लोगों को कार्रवाई का आश्वासन देकर स्थिति को शांत कराया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस घटना की पृष्ठभूमि में दो पक्षों के बीच पहले से चला आ रहा विवाद भी सामने आया है। मानपुर पुलिस के मुताबिक 12 जून को नाली निर्माण को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। उस समय संजय पटेल की ओर से कुछ लोगों के खिलाफ घर में घुसकर तोड़फोड़ और मारपीट का मामला दर्ज कराया गया था। वहीं दूसरे पक्ष ने भी पत्थरबाजी और मारपीट के आरोप लगाते हुए प्रतिपक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

    पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है और पुराने विवाद तथा ताजा घटना के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विशेष टीमें गठित की हैं।

    इस संबंध में एसडीओपी Lalit Singh Sikarwar और टीआई Mahendra Makashre ने बताया कि आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोप सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कुछ आरोपियों को गुंडा सूची में शामिल करने और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

    फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • BRICS कृषि एजेंडे में ब्राजील सबसे आगे, 88% वादों पर अमल; भारत 85% के साथ दूसरे स्थान पर

    BRICS कृषि एजेंडे में ब्राजील सबसे आगे, 88% वादों पर अमल; भारत 85% के साथ दूसरे स्थान पर


    मध्यप्रदेश । इंदौर में संपन्न हुई BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक के बाद जारी इंदौर घोषणा-पत्र और विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्टों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि कृषि क्षेत्र में किए गए वादों और संकल्पों को लागू करने की गति सभी सदस्य देशों में समान नहीं रही। खाद्य सुरक्षा, डिजिटल कृषि, महिला सशक्तिकरण, भूमि पुनरुद्धार और कृषि व्यापार जैसे प्रमुख मुद्दों पर बीते पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, लेकिन उनके क्रियान्वयन में देशों के बीच उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला।

    विश्लेषण के अनुसार कृषि प्रतिबद्धताओं को लागू करने के मामले में Brazil सबसे आगे रहा। रिपोर्ट में ब्राजील का अमल स्तर 88 प्रतिशत बताया गया है। ब्राजील ने भूमि पुनरुद्धार साझेदारी, पारिवारिक खेती को बढ़ावा देने और नए कृषि एक्शन प्लान को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई। कृषि सुधारों और सतत विकास आधारित योजनाओं को लागू करने में उसकी सक्रियता अन्य सदस्य देशों की तुलना में अधिक रही।

    दूसरे स्थान पर India रहा, जहां कृषि क्षेत्र में 85 प्रतिशत प्रतिबद्धताओं पर अमल का दावा किया गया है। भारत में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, ड्रोन तकनीक का उपयोग, जलवायु अनुकूल गांवों का विकास, कृषि डिजिटलीकरण और महिला आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को BRICS एजेंडे के अनुरूप माना गया। “लखपति दीदी” जैसी पहल और तकनीक आधारित खेती के प्रयासों ने भारत की स्थिति को मजबूत किया, हालांकि कुछ क्षेत्रों में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बताई गई है।

    तीसरे स्थान पर China रहा, जिसने खाद्य सुरक्षा, कृषि अनुसंधान और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खाद्य सुरक्षा सहयोग रणनीति और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने में चीन की भूमिका प्रमुख रही। वहीं Russia 80 प्रतिशत अमल के साथ चौथे स्थान पर रहा। रूस ने BRICS ग्रेन एक्सचेंज और राष्ट्रीय मुद्राओं में कृषि व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की, हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कुछ सहयोगी कार्यक्रम प्रभावित हुए।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि South Africa और BRICS के नए सदस्य देशों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही। दक्षिण अफ्रीका का अमल स्तर 65 प्रतिशत आंका गया, जबकि नए सदस्य देशों का औसत प्रदर्शन 45 प्रतिशत के आसपास रहा। नए सदस्य देशों में United Arab Emirates, Egypt, Iran, Ethiopia, Saudi Arabia और Indonesia शामिल हैं। इनके लिए वर्ष 2024 और 2025 की कृषि प्रतिबद्धताओं को आधार बनाकर आकलन किया गया।

    पिछले पांच वर्षों के दौरान BRICS देशों ने कई महत्वपूर्ण कृषि निर्णय लिए। वर्ष 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर केंद्रित एक्शन प्लान को मंजूरी दी गई। 2022 में चीन की मेजबानी में खाद्य सुरक्षा सहयोग रणनीति और “डेक्कन प्रिंसिपल्स ऑन फूड सिक्योरिटी” को अपनाया गया। 2023 में दक्षिण अफ्रीका ने ग्रामीण विकास और जलवायु अनुकूल कृषि को प्राथमिकता दी। 2024 में रूस ने ग्रेन एक्सचेंज और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का प्रस्ताव रखा, जबकि 2025 में ब्राजील ने भूमि पुनरुद्धार साझेदारी और डिजिटल प्रमाणन जैसे नए प्रस्तावों को आगे बढ़ाया।

    हालांकि रिपोर्ट में BRICS की एक प्रमुख कमजोरी भी उजागर हुई है। संगठन का ढांचा पूरी तरह स्वैच्छिक है और सदस्य देशों के लिए किसी भी निर्णय को लागू करना कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसके अलावा प्रगति की निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र भी मौजूद नहीं है। अधिकांश मूल्यांकन सदस्य देशों की स्वयं प्रस्तुत रिपोर्टों, संयुक्त घोषणाओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किए जाते हैं। यही कारण है कि कई बार घोषित लक्ष्यों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर देखने को मिलता है।

  • आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

    आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन अपने सामाजिक और वैचारिक संपर्क को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका और ब्रिटेन के प्रस्तावित दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगले दो महीनों के भीतर होने वाली इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भारतीय मूल के लोगों से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

    संघ इस समय अपने 100वें वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। संगठन देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने कार्य, विचार और सामाजिक अभियानों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में संघ प्रमुख की संभावित विदेश यात्रा को संगठन की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार अमेरिका और ब्रिटेन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है। इन आयोजनों में भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों, सामुदायिक सहयोग और प्रवासी भारतीयों की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। यात्रा का उद्देश्य विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना बताया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार अमेरिका के प्रमुख शहरों में कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। विशेष रूप से न्यूयॉर्क में एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम की संभावना व्यक्त की जा रही है, जहां भारतीय समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति हो सकती है। हालांकि कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा और आधिकारिक कार्यक्रम सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    इस प्रस्तावित यात्रा में हिंदू स्वयंसेवक संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है। यह संगठन विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति, योग, सेवा कार्यों और पारिवारिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करता है। विदेशों में भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने के लिए यह संगठन लंबे समय से सक्रिय है।

    मोहन भागवत इससे पहले भी विदेश यात्राएं कर चुके हैं। पूर्व में ब्रिटेन में आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही है, जहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया था। ऐसे अनुभवों के आधार पर इस बार के प्रस्तावित दौरे को भी व्यापक जनसंपर्क और सांस्कृतिक संवाद के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विभिन्न देशों में बसे भारतीय मूल के लोग आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान दे रहे हैं। ऐसे में भारत से जुड़े संगठनों द्वारा उनके साथ नियमित संवाद स्थापित करना रणनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित हो रहे कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन के कार्यों, सेवा गतिविधियों और सामाजिक योगदान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना भी है। इसी कारण विदेशों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करने के एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    यदि यह यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है तो इससे प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद को नई गति मिल सकती है। साथ ही भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बीच भारतीय नाविकों का मुद्दा उठा, एफएसयूआई बोली- मृतकों के परिवारों को मिले उचित मुआवजा

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बीच भारतीय नाविकों का मुद्दा उठा, एफएसयूआई बोली- मृतकों के परिवारों को मिले उचित मुआवजा

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने होर्मुज क्षेत्र में जान गंवाने वाले चार भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि क्षेत्र में हुई सैन्य घटनाओं और सुरक्षा संकट के कारण भारतीय नागरिकों की जान गई, इसलिए प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।

    यूनियन ने अमेरिकी प्रशासन से अपील करते हुए कहा है कि मृतक भारतीय नाविकों के परिजनों को कम से कम 50 लाख डॉलर का मुआवजा दिया जाए। संगठन का तर्क है कि यह केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं बल्कि उन परिवारों के प्रति नैतिक और मानवीय दायित्व का मामला भी है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया।

    एफएसयूआई ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी नई समझ क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम है। हालांकि संगठन का मानना है कि स्थायी शांति तभी सार्थक होगी जब संघर्ष और सैन्य कार्रवाई से प्रभावित निर्दोष नागरिकों तथा समुद्री कर्मियों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए। इसी संदर्भ में भारतीय नाविकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया है।

    यूनियन के अनुसार, चीफ इंजीनियर पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरेसिया की मौत मिसाइल हमले से जुड़ी घटना में हुई थी। वहीं दूसरे अधिकारी निशांत उर्थनाथन की मृत्यु के लिए संगठन ने समय पर चिकित्सीय सहायता नहीं मिल पाने और क्षेत्रीय नाकेबंदी से उत्पन्न परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है। संगठन का कहना है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

    घटना जून माह में ओमान तट के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हुई थी। उस समय एमटी सेटेबेलो नामक तेल टैंकर क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच प्रभावित हुआ था। जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। हादसे में चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि अन्य सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया था।

    इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वाणिज्यिक नौवहन पर भी देखा गया था। भारतीय समुद्री समुदाय ने उस समय चालक दल की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

    घटना के बाद भारत सरकार ने भी संबंधित पक्षों के समक्ष अपनी चिंता दर्ज कराई थी और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया था। भारत का मानना रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम करने वाले नागरिक कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    एफएसयूआई का कहना है कि मृतक नाविक किसी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे पेशेवर दायित्व निभाते हुए अपने परिवारों के लिए काम कर रहे थे। ऐसे में उनकी मृत्यु को केवल एक आकस्मिक घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। संगठन ने मांग की है कि जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक सहायता और न्याय उपलब्ध कराया जाए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा व्यवस्था, संघर्ष क्षेत्रों में नागरिक जहाजों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में इस विषय पर होने वाली कूटनीतिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

  • Vastu Tips: घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के 5 आसान उपाय, बढ़ेगी सुख-शांति और सकारात्मकता

    Vastu Tips: घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के 5 आसान उपाय, बढ़ेगी सुख-शांति और सकारात्मकता


    नई दिल्ली । हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में सुख, शांति और सकारात्मकता का माहौल बना रहे। वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर का वातावरण हमारे मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है। जब घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है तो परिवार के सदस्यों के बीच तनाव, अनावश्यक विवाद, मानसिक अशांति और कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं। ऐसी स्थिति में कुछ सरल और पारंपरिक उपाय अपनाकर घर के वातावरण को अधिक सकारात्मक और ऊर्जावान बनाया जा सकता है।

    समुद्री नमक से करें वातावरण शुद्ध
    वास्तु मान्यताओं के अनुसार समुद्री नमक में नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता होती है। कई वास्तु विशेषज्ञ घर के कोनों, बाथरूम या ऐसे स्थानों पर एक कटोरी में समुद्री नमक रखने की सलाह देते हैं, जहां ऊर्जा का प्रवाह कम महसूस होता हो। मान्यता है कि इससे आसपास की नकारात्मकता कम होती है और वातावरण अधिक संतुलित महसूस होता है। बेहतर परिणाम के लिए नमक को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए।

    नियमित करें हनुमान चालीसा का पाठ
    धार्मिक मान्यताओं में Hanuman Chalisa का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, चिंता और नकारात्मक विचारों में कमी आती है। भगवान Hanuman को शक्ति, साहस और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि उनके स्मरण और आराधना से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    टूटी-फूटी वस्तुओं को घर से हटाएं
    वास्तु शास्त्र में टूटी हुई घड़ियां, क्षतिग्रस्त शीशे और अनुपयोगी वस्तुओं को नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। ऐसी चीजें घर में अव्यवस्था और मानसिक बोझ बढ़ाने का कारण बन सकती हैं। इसलिए घर की नियमित सफाई करें और लंबे समय से बेकार पड़ी वस्तुओं को हटाने की आदत डालें। स्वच्छ और व्यवस्थित घर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है।

    घर में पर्याप्त प्रकाश बनाए रखें
    वास्तु में प्रकाश को ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। जिन स्थानों पर हमेशा अंधेरा रहता है, वहां उदासी और नकारात्मकता का अनुभव अधिक हो सकता है। इसलिए घर में प्राकृतिक सूर्य प्रकाश आने दें और आवश्यकता अनुसार उचित रोशनी की व्यवस्था करें। उजाला न केवल वातावरण को बेहतर बनाता है बल्कि मानसिक प्रसन्नता और सक्रियता को भी बढ़ावा देता है।

    कपूर का धुआं करें
    भारतीय परंपरा में कपूर को शुद्धिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शाम के समय कपूर जलाकर उसका धुआं पूरे घर में फैलाने से वातावरण शुद्ध और सुगंधित बनता है। कई लोग इसे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का प्रभावी उपाय मानते हैं। कपूर की सुगंध घर के वातावरण को शांत और आध्यात्मिक बनाने में सहायक मानी जाती है।

    सकारात्मकता का आधार है नियमितता
    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों का प्रभाव तभी अधिक महसूस होता है जब इन्हें नियमित रूप से अपनाया जाए। घर की साफ-सफाई, धार्मिक वातावरण, पर्याप्त प्रकाश और सकारात्मक सोच मिलकर जीवन में संतुलन और शांति लाने में मदद कर सकते हैं।

  • सोमवार की भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, वैष्णव तिलक और दिव्य आभूषणों से हुआ राजाधिराज श्रृंगार

    सोमवार की भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, वैष्णव तिलक और दिव्य आभूषणों से हुआ राजाधिराज श्रृंगार


    मध्यप्रदेश । धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से निर्मित पंचामृत अर्पित कर विशेष अभिषेक संपन्न हुआ।

    भस्म आरती की शुरुआत मंदिर परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाने के साथ हुई। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर उन्हें हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई और बाबा महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन तथा त्रिपुंड अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार आरंभ हुआ।

    सोमवार के विशेष अवसर पर भगवान महाकाल को जटाधारी स्वरूप में सजाया गया। उनके मस्तक पर चंदन और वैष्णव तिलक लगाया गया तथा उन्हें राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव का यह स्वरूप वैराग्य, शक्ति और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। श्रृंगार के दौरान विविध आभूषणों और पूजन सामग्रियों का उपयोग कर बाबा महाकाल की अलौकिक छवि प्रस्तुत की गई।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। Maha Nirvani Akhada की ओर से परंपरानुसार भगवान महाकाल को भस्म समर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और यही भस्म आरती की सबसे विशेष और दिव्य परंपरा मानी जाती है।

    भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल को शेषनाग स्वरूप रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष हार अर्पित किए गए। मोगरा और गुलाब के पुष्पों से सुसज्जित बाबा महाकाल का मनोहारी स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया तथा आरती के माध्यम से समस्त श्रद्धालुओं ने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

    भस्म आरती में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए। मंदिर परिसर पूरे समय हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजता रहा। धार्मिक मान्यता है कि भोर बेला में बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

  • ‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

    ‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

    नई दिल्ली । भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और रचनात्मकता का प्रतिबिंब भी होती है। यही संदेश वरिष्ठ अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने हालिया ब्लॉग के माध्यम से साझा किया है। उन्होंने आम लोगों की बोलचाल में दिखाई देने वाली भाषाई सृजनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि लोग अक्सर विदेशी शब्दों को अपनी सुविधा, समझ और स्थानीय प्रभाव के अनुरूप नया रूप दे देते हैं, जिससे वे शब्द और भी आत्मीय तथा रोचक बन जाते हैं।

    अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए ब्लॉग की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लॉग लिखने में हुई देरी का कारण आलस्य नहीं, बल्कि कार्य व्यस्तता थी। उन्होंने कहा कि दिनभर के कार्यों के बाद अपने प्रशंसकों से संवाद करना उनके लिए एक विशेष अनुभव होता है और यही उनके दैनिक कार्यों की पूर्णता का एहसास भी कराता है।

    अपने विचारों को समझाने के लिए उन्होंने अपने आवास ‘जलसा’ से जुड़ा एक रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले एक माली को अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण करने में कठिनाई होती थी। विशेष रूप से एक शब्द को वह सही ढंग से नहीं बोल पाता था, इसलिए उसने उसे अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर नया रूप दे दिया। अभिनेता के अनुसार, यह नया उच्चारण इतना सहज और आत्मीय लगा कि कई बार वह मूल शब्द की तुलना में अधिक प्रभावशाली प्रतीत हुआ।

    उन्होंने एक अन्य उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ लोग ‘रेडिएटर’ शब्द को अपने तरीके से ‘रेडी वॉटर’ कहने लगे। इसके पीछे उनका अपना तर्क भी था कि जिस उपकरण में पानी भरा जाता है, उसके लिए ऐसा नाम अधिक उपयुक्त लगता है। अमिताभ बच्चन ने कहा कि यद्यपि यह तकनीकी रूप से सही शब्द नहीं है, लेकिन यह लोगों की सोचने और भाषा को अपने अनुरूप ढालने की क्षमता को दर्शाता है।

    अभिनेता का मानना है कि भाषा का वास्तविक सौंदर्य उसकी लचीलापन और स्वीकार्यता में निहित होता है। समाज के विभिन्न वर्ग, क्षेत्र और भाषाई पृष्ठभूमि वाले लोग जब किसी शब्द को अपनाते हैं, तो उसमें अपनी संस्कृति और अनुभवों का रंग भी जोड़ देते हैं। यही प्रक्रिया भाषा को स्थिर नहीं रहने देती, बल्कि उसे समय के साथ विकसित और समृद्ध बनाती है।

    उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए किसी विदेशी भाषा या उसके जटिल शब्दों का शुद्ध उच्चारण करना आसान नहीं होता। ऐसे में लोग अपनी समझ और सुविधा के अनुसार नए शब्द गढ़ लेते हैं। यह केवल उच्चारण की त्रुटि नहीं, बल्कि भाषा के प्रति मानवीय अनुकूलन क्षमता का उदाहरण है। इसी वजह से ऐसे शब्द लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों और दैनिक जीवन का हिस्सा बने रहते हैं।

    अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि भाषा की यही सहजता उसे आम लोगों से जोड़ती है। जब कोई शब्द स्थानीय संदर्भों और बोलचाल में ढल जाता है तो वह केवल शब्द नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक अनुभव का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से मिलने वाला उनका स्नेह और समर्थन उनके जीवन को निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।

    भाषा और समाज के संबंध पर व्यक्त किए गए उनके विचार यह संकेत देते हैं कि रचनात्मकता केवल साहित्य या कला तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य बातचीत और दैनिक जीवन में भी उतनी ही प्रभावशाली रूप से दिखाई देती है। यही विशेषता भाषा को जीवंत, प्रासंगिक और समय के साथ विकसित होने योग्य बनाती है।

  • महू में सैन्य भूमि पर चला बुलडोजर, अवैध पशु बाड़े और अतिक्रमण हटाने की संयुक्त कार्रवाई

    महू में सैन्य भूमि पर चला बुलडोजर, अवैध पशु बाड़े और अतिक्रमण हटाने की संयुक्त कार्रवाई


    मध्यप्रदेश । महू के बंडा बस्ती क्षेत्र में सोमवार को सैन्य भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमणों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। सेना, रक्षा संपदा विभाग, कैंटोनमेंट बोर्ड, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह करीब 11:30 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार संबंधित लोगों को दो दिन पहले नोटिस जारी किए गए थे और निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई।

    कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में बुलडोजर की मदद से पशु बाड़ों, टीन शेड और अन्य अस्थायी निर्माणों को हटाने का काम किया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी गई।

    यह मामला पिछले महीने सामने आए एक विवाद के बाद चर्चा में आया था। पुलिस के अनुसार बंडा बस्ती क्षेत्र स्थित एक पशु बाड़े से गोवंश के अवशेष और कथित रूप से गोमांस बरामद किया गया था। उस दौरान कार्रवाई के समय पथराव की घटना भी सामने आई थी, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी। पुलिस ने इस मामले में Imran Khatkhat समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार मामले की विवेचना की गई और संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकरण में दर्ज आरोपों की जांच जारी है और कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। कुछ आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की जानकारी अधिकारियों द्वारा दी गई थी। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाना है।

    घटना के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सैन्य भूमि पर बने कथित अवैध बाड़ों और निर्माणों को हटाने की मांग उठाई थी। इसके बाद संबंधित विभागों ने भूमि अभिलेखों और सीमांकन की जांच की। अधिकारियों के अनुसार जांच में यह पाया गया कि संबंधित क्षेत्र में सैन्य भूमि पर कई स्थानों पर अतिक्रमण किया गया था। इसी आधार पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक लगभग एक एकड़ सैन्य भूमि पर 10 से अधिक लोगों द्वारा कब्जा किया गया था। इस भूमि पर बने 10 से ज्यादा पशु बाड़ों, शेड और अन्य अस्थायी ढांचों को हटाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सैन्य क्षेत्र की अन्य भूमि पर भी संभावित अतिक्रमणों की पहचान की जा रही है और आवश्यकतानुसार आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।

    अधिकारियों का कहना है कि सरकारी और सैन्य भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए अभियान जारी रहेगा। वहीं स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न करें और नियमों का पालन करें। फिलहाल बंडा बस्ती क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से जारी है तथा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।