Author: bharati

  • झांसी सड़क हादसा: कार ने बाइक को मारी टक्कर, युवती की मौत, दोस्त घायल; शादी तय होने से पहले टूटा परिवार

    झांसी सड़क हादसा: कार ने बाइक को मारी टक्कर, युवती की मौत, दोस्त घायल; शादी तय होने से पहले टूटा परिवार


    झांसी। सदर थाना क्षेत्र के मून सिटी के पास गुरुवार को हुए भीषण सड़क हादसे में एक युवती की मौत हो गई, जबकि उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा उस समय हुआ जब एक तेज रफ्तार ईको कार ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

    हादसे में फरहा उर्फ फरबा (21) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक चला रहा विनोद तिवारी (24) घायल हो गया, जिसका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

    घर से निकली थी ट्रेन पकड़ने, बाइक पर कैसे पहुंची परिजन हैरान
    मृतका की मां ने बताया कि फरहा घर से अपनी बहन के यहां झांसी जाने के लिए निकली थी और उसे ट्रेन पकड़नी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने बेटी को ऑटो से भेजा था, लेकिन वह युवक की बाइक पर कैसे पहुंची, इसकी जानकारी परिवार को नहीं है।हादसे की सूचना पुलिस द्वारा मिलने के बाद जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो वहां बेटी का शव देखकर कोहराम मच गया।

    शादी तय थी, परिवार में चल रही थी तैयारियां
    परिजनों के अनुसार फरहा की शादी तय हो चुकी थी और जल्द ही शादी की तारीख भी फाइनल होनी थी। वह पांच बहनों में चौथे नंबर की थी। परिवार में पिता की चिकन शॉप है और घर में शादी की खुशियां मनाई जा रही थीं, लेकिन हादसे ने सबकुछ बदल दिया।

    कार की टक्कर से हुआ हादसा
    पुलिस के अनुसार फरहा और विनोद बाइक से जा रहे थे, तभी मून सिटी के पास तेज रफ्तार ईको कार ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में युवती की मौत हो गई और युवक घायल हो गया।

    पुलिस जांच में जुटी
    सदर थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, कैसरबाग कोर्ट परिसर के अतिक्रमण हटाने पर सख्ती, पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के निर्देश

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, कैसरबाग कोर्ट परिसर के अतिक्रमण हटाने पर सख्ती, पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के निर्देश


    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय परिसर के आसपास वकीलों और दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण को लेकर बड़ा और सख्त आदेश जारी किया है। अदालत ने साफ कहा है कि अवैध कब्जों को हटाने के लिए नगर निगम को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि कार्रवाई में कोई बाधा न आए।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अनुराधा सिंह और अन्य की याचिका पर की।

    कोर्ट ने नगर निगम से अतिक्रमण हटाने की पूरी कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है और अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है।

    नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में करीब 72 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें अधिकांश वकीलों के चैंबर और अवैध दुकानें शामिल हैं। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि इन अतिक्रमणों को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह हटाया जाए और जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता तुरंत दी जाए।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने पुलिस बल उपलब्ध न कराए जाने के कारणों से जुड़े डीसीपी स्तर के पत्र भी अदालत में प्रस्तुत किए।

    नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के लिए 12 मई की नई तारीख तय करने की जानकारी दी, जिस पर कोर्ट ने कहा कि प्रशासन सुनिश्चित करे कि उस दिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध रहे।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि अतिक्रमण से आम जनता, मरीजों और यातायात व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। पहले भी अदालत ने इस क्षेत्र में एंबुलेंस फंसने और मरीज की मौत जैसी गंभीर घटना का संज्ञान लिया था।

    अब हाईकोर्ट ने प्रशासन को 15 दिन के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

  • लू और तेज धूप से बचने का देसी तरीका, सत्तू शरबत देगा शरीर को तुरंत ठंडक और ताकत

    लू और तेज धूप से बचने का देसी तरीका, सत्तू शरबत देगा शरीर को तुरंत ठंडक और ताकत

    नई दिल्ली।
    गर्मी के मौसम में जब तेज धूप और लू शरीर को थका देती है, तब शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाले पेय की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में सत्तू का नमकीन शरबत एक बेहद सरल और प्रभावी देसी विकल्प बनकर सामने आता है। यह न सिर्फ शरीर को तुरंत राहत देता है बल्कि लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में भी मदद करता है।

    सत्तू, जिसे भुने हुए चने से तैयार किया जाता है, भारतीय घरों में एक पारंपरिक और पौष्टिक सामग्री के रूप में जाना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। गर्मियों में इसका सेवन पाचन को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर की गर्मी को भी संतुलित करता है। यही कारण है कि इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है।

    इस शरबत को तैयार करना बेहद आसान है। सबसे पहले सत्तू को ठंडे पानी में अच्छी तरह घोलकर स्मूद मिश्रण बनाया जाता है ताकि कोई गांठ न रहे। इसके बाद इसमें भुना जीरा, काला नमक और साधारण नमक मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। चाहें तो इसमें नींबू का रस, बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च भी मिलाई जा सकती है, जिससे इसका स्वाद चटपटा और ताजगी भरा हो जाता है।

    तैयार मिश्रण को कुछ देर ठंडा करने के बाद इसे परोसा जाता है। ऊपर से हरा धनिया डालकर इसका स्वाद और भी बढ़ाया जा सकता है। बर्फ मिलाकर इसे और अधिक ठंडा बनाया जा सकता है, जिससे गर्मी में तुरंत राहत महसूस होती है।

    सत्तू का नमकीन शरबत न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है। इससे अनावश्यक भूख कम लगती है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। यही वजह है कि यह ड्रिंक खासकर गर्मियों में बहुत उपयोगी माना जाता है।

    देसी और प्राकृतिक होने के कारण यह बाजार के ठंडे पेयों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। इसे रोजाना की डाइट में शामिल करके गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर को तरोताजा रखा जा सकता है।

  • गर्मी में घड़े का पानी क्यों है सबसे बेहतर? एक्सपर्ट्स ने बताए सेहत से जुड़े बड़े फायदे

    गर्मी में घड़े का पानी क्यों है सबसे बेहतर? एक्सपर्ट्स ने बताए सेहत से जुड़े बड़े फायदे


    नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच शरीर को हाइड्रेट और संतुलित रखने के लिए सही पानी का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। आमतौर पर लोग ठंडक पाने के लिए फ्रिज का पानी पीते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी के घड़े यानी मटके का पानी ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है।
    हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, फ्रिज का बहुत ठंडा पानी गले और पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है। इससे कई बार गले में खराश, सर्दी-जुकाम और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके विपरीत, मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है।
    मिट्टी के घड़े में रखा पानी न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि इसमें हल्की प्राकृतिक सुगंध भी होती है, जो इसे और अधिक ताजगी भरा बनाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी पानी में मौजूद अशुद्धियों को अपने अंदर सोख लेती है और कुछ हद तक उसे शुद्ध करने में मदद करती है।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मटके का पानी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है और इम्युनिटी को मजबूत करता है। इसके अलावा यह शरीर के पीएच लेवल को संतुलित रखने में भी मदद करता है, जिससे कई मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
    आयुर्वेद में भी मिट्टी के घड़े के पानी को बेहद लाभकारी माना गया है। इसे प्राकृतिक और शुद्ध जल का स्रोत माना जाता है, जो शरीर को भीतर से ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है। आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मटके का पानी फ्रिज के पानी की तुलना में अधिक सुरक्षित विकल्प है, खासकर गर्मियों के मौसम में।
    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मटके का पानी पूरी तरह केमिकल-फ्री होता है और इसमें प्राकृतिक मिनरल्स मौजूद रहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। यह बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है।
    गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए मटके का पानी एक सस्ता, प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि घर में मिट्टी का घड़ा जरूर रखा जाए और नियमित रूप से इसका पानी पिया जाए, ताकि शरीर को प्राकृतिक ठंडक मिलती रहे और स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
  • असम-बंगाल चुनाव परिणाम पर कांग्रेस असमंजस में, शर्मनाक हार के बाद नेतृत्व पर उठे सवाल

    असम-बंगाल चुनाव परिणाम पर कांग्रेस असमंजस में, शर्मनाक हार के बाद नेतृत्व पर उठे सवाल


    नई दिल्ली।  हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केरल को छोड़कर असम और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद अब संगठन के भीतर गंभीर मंथन शुरू हो गया है।
    असम और पश्चिम बंगाल में मिली हार के बाद पार्टी ने समीक्षा बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन हारों की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी। संगठन के भीतर अभी तक किसी भी स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं हो पाई है, जिससे असंतोष और बढ़ता जा रहा है।
    असम में हार के बाद प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन पार्टी हाईकमान ने अभी तक उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हार की विस्तृत समीक्षा के बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा।
    पिछले कुछ वर्षों में लगातार चुनावी असफलताओं के बावजूद संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारी तय न किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई, तो जमीनी स्तर पर सुधार मुश्किल होगा।
    इसी संदर्भ में पार्टी के अंदर चल रहे संगठन सृजन कार्यक्रम पर भी चर्चा हो रही है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में अहमदाबाद अधिवेशन के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करना और जवाबदेही तय करना था, लेकिन अब तक इसका प्रभाव सीमित ही दिखाई दिया है।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पहले भी कहा था कि जिला अध्यक्षों और स्थानीय नेतृत्व को स्थायी पद नहीं माना जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर ही उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था का प्रभाव अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो सका है।
    इसी बीच, आगामी 2027 के चुनावों को देखते हुए पार्टी पर प्रदर्शन सुधारने का दबाव बढ़ रहा है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन को पुनर्गठित किए बिना चुनावी स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
    वहीं दूसरी ओर, केरल में पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिली सफलता के बाद वहां सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल प्रमुख बताए जा रहे हैं।
    हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अभी अंतिम फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि संगठन में निर्णय प्रक्रिया अब भी केंद्रीकृत बनी हुई है।
    कुल मिलाकर, असम और बंगाल में हार के बाद कांग्रेस एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां समीक्षा तो शुरू हो चुकी है, लेकिन जवाबदेही तय करने और संगठन में वास्तविक सुधार की दिशा अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
  • 15 मई के बाद अचानक क्यों तेज हो जाती है गर्मी, वृषभ गोचर और रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है खास कारण

    15 मई के बाद अचानक क्यों तेज हो जाती है गर्मी, वृषभ गोचर और रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है खास कारण

    नई दिल्ली।
    मई महीने के मध्य के बाद उत्तर भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में गर्मी अचानक तेज महसूस होने लगती है। दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, सूरज की तपिश और अधिक तीखी हो जाती है और वातावरण शुष्क होता जाता है। इसी समय को वृषभ संक्रांति से जोड़कर देखा जाता है, जब सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करता है। माना जाता है कि इस परिवर्तन के बाद गर्मी अपने अगले और अधिक तीव्र चरण में पहुंच जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश धरती के तापमान और वातावरण पर गहरा प्रभाव डालता है। इस राशि का संबंध स्थिरता और तीव्र ऊर्जा से माना जाता है, और जब सूर्य इसमें प्रवेश करता है तो उसकी उष्मा का प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है। इसी समय दिन लंबे होने लगते हैं और सूर्य की किरणें धरती पर अधिक सीधी पड़ती हैं, जिससे गर्मी का स्तर तेजी से बढ़ता है।

    इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव भी इस अवधि को और महत्वपूर्ण बनाता है। परंपरागत मान्यताओं में इसे अत्यधिक गर्मी का संकेत माना गया है, जहां सूर्य की किरणें धरती को अधिक तीव्रता से प्रभावित करती हैं। ग्रामीण मान्यताओं में इस समय को ‘नौतपा’ से भी जोड़ा जाता है, जो भीषण गर्मी के चरम समय का संकेत देता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस समय पृथ्वी का उत्तरी हिस्सा सूर्य की ओर अधिक झुका होता है, जिसके कारण सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। सीधी किरणें जमीन और वातावरण को तेजी से गर्म करती हैं और पहले से जमा गर्मी भी इसमें शामिल हो जाती है। यही कारण है कि मई के मध्य के बाद तापमान में तेजी से वृद्धि देखने को मिलती है।

    इस अवधि में हवा में नमी कम हो जाती है और वातावरण अधिक शुष्क हो जाता है, जिससे दिन के समय तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है। रात के समय भी गर्मी का असर कम नहीं होता और वातावरण में ठंडक का अभाव महसूस होता है। मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को गर्मी के लगातार जमा होने का प्रभाव मानते हैं, जो धीरे-धीरे चरम पर पहुंच जाता है।

  • साउथ इंडिया की इन हसीन जगहों पर बिताएं गर्मियों की छुट्टी, ठंडा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता कर देगी मंत्रमुग्ध

    साउथ इंडिया की इन हसीन जगहों पर बिताएं गर्मियों की छुट्टी, ठंडा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता कर देगी मंत्रमुग्ध

    नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही लोग ऐसी जगहों की तलाश करने लगते हैं जहां तेज धूप और गर्म हवाओं से राहत मिल सके। शहरों की भागदौड़ और बढ़ते तापमान के बीच सुकून भरी छुट्टियां बिताने का सबसे अच्छा विकल्प साउथ इंडिया के हिल स्टेशन और प्राकृतिक डेस्टिनेशन माने जाते हैं। यहां की ठंडी हवा, हरियाली से भरे पहाड़, चाय और कॉफी के बागान तथा शांत वातावरण यात्रियों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराते हैं।

    साउथ इंडिया में मुन्नार और वायनाड जैसी जगहें गर्मियों की छुट्टियों के लिए बेहद लोकप्रिय हैं। मुन्नार अपनी खूबसूरत चाय की बगानों की घाटियों और बादलों से ढकी पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। यहां का मौसम इतना सुहावना होता है कि हर सुबह एक नई ताजगी का एहसास कराती है। वहीं वायनाड घने जंगलों, झीलों और एडवेंचर ट्रेकिंग स्पॉट्स के कारण यात्रियों के बीच खास पहचान रखता है। यहां प्रकृति के बीच बिताए गए पल लंबे समय तक याद रहते हैं।

    कर्नाटक की बात करें तो कूर्ग और चिकमगलूर उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं जो शांति और प्राकृतिक सुंदरता के बीच समय बिताना चाहते हैं। कूर्ग को अक्सर “भारत का स्कॉटलैंड” कहा जाता है, जहां कॉफी के बागान और पहाड़ियों की हरियाली मन को सुकून देती है। हल्की बारिश और ठंडी हवा यहां के वातावरण को और भी आकर्षक बना देती है। दूसरी ओर चिकमगलूर अपने शानदार ट्रेकिंग रूट्स, झरनों और खूबसूरत सूर्यास्त दृश्यों के लिए जाना जाता है, जो हर ट्रैवलर को आकर्षित करता है।

    अगर कोई पहाड़ों से अलग समुद्र किनारे का अनुभव लेना चाहता है तो केरल की एलेप्पी और वर्कला जैसी जगहें बेहतरीन विकल्प हैं। एलेप्पी अपने हाउसबोट और शांत बैकवॉटर के लिए मशहूर है, जहां पानी के बीच तैरती नावों में यात्रा करना एक अलग ही अनुभव देता है। वहीं वर्कला बीच, योग और आयुर्वेदिक अनुभवों के लिए जाना जाता है। यहां समुद्र की लहरों के साथ बैठकर ठंडी हवा का आनंद लेना यात्रियों को मानसिक सुकून देता है।

    साउथ इंडिया के ये सभी डेस्टिनेशन गर्मियों में न सिर्फ ठंडा मौसम देते हैं बल्कि प्रकृति के बेहद करीब ले जाते हैं। यहां की हर जगह अपनी अलग पहचान रखती है और हर ट्रिप को यादगार बना देती है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में लोग गर्मियों में इन खूबसूरत स्थानों की ओर रुख करते हैं।

  • ‘धुरंधर 3’ की तैयारी के संकेत? मेकर्स ने साल के अंत में बड़े सरप्राइज की दी झलक, बढ़ी अटकलें

    ‘धुरंधर 3’ की तैयारी के संकेत? मेकर्स ने साल के अंत में बड़े सरप्राइज की दी झलक, बढ़ी अटकलें


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म फ्रेंचाइज़ ‘धुरंधर’ एक बार फिर सुर्खियों में है। इसके पहले दो हिस्सों की जबरदस्त सफलता के बाद अब तीसरे पार्ट को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर ‘धुरंधर 3’ की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मेकर्स की हालिया टिप्पणी ने फैंस की उम्मीदों को जरूर बढ़ा दिया है।
    फिल्म की प्रोड्यूसर ज्योति देशपांडे ने एक इंटरव्यू में संकेत दिया है कि इस साल के अंत तक दर्शकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “धुरंधर पर अभी हमारा काम खत्म नहीं हुआ है, साल के अंत में कुछ खास आने वाला है।
    इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अटकलें तेज हो गई हैं कि यह सरप्राइज कहीं ‘धुरंधर 3’ की आधिकारिक घोषणा तो नहीं है। फैंस लंबे समय से इस फ्रेंचाइज़ के अगले भाग का इंतजार कर रहे हैं, खासकर तब जब इसके पिछले दोनों हिस्सों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया था।
    फिल्म के दोनों भागों में मुख्य भूमिका निभाने वाले रणवीर सिंह के किरदार को दर्शकों से काफी सराहना मिली है, और यही वजह है कि तीसरे भाग को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया है।
    फिलहाल फिल्म के निर्देशक आदित्य धर की ओर से भी तीसरे भाग को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पहले यह माना जा रहा था कि फ्रेंचाइज़ का विस्तार पूरी तरह से उनकी योजना पर निर्भर करेगा।
    ‘धुरंधर’ के पहले दो भागों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की थी। पहला भाग 2025 में रिलीज हुआ था और इसने भारत सहित दुनियाभर में शानदार कमाई की थी। वहीं दूसरा भाग और भी बड़े पैमाने पर सफल रहा और इसे पैन इंडिया हिट माना गया।
    इसी सफलता के चलते फैंस लगातार तीसरे भाग की मांग कर रहे हैं। हालांकि मेकर्स ने अभी इसे लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं की है, लेकिन “सरप्राइज” शब्द ने चर्चा को और तेज कर दिया है।
    फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यदि ‘धुरंधर 3’ बनती है तो यह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ में से एक बन सकती है। बड़े बजट, स्टार कास्ट और विजुअल स्पेक्ट्रम के कारण इस फ्रेंचाइज़ ने पहले ही एक अलग पहचान बना ली है।
    फिलहाल सभी की नजरें साल के अंत में आने वाले उस “सरप्राइज” पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि ‘धुरंधर’ का तीसरा अध्याय वाकई शुरू होने वाला है या नहीं।
  • कड़वा खीरा घर लाने से बचना है तो जान लें ये सीक्रेट तरीका, मीठे खीरे की पहचान मिनटों में

    कड़वा खीरा घर लाने से बचना है तो जान लें ये सीक्रेट तरीका, मीठे खीरे की पहचान मिनटों में


    नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में खीरा एक ऐसी सब्जी है जो हर घर में लगभग रोज इस्तेमाल होती है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाता है बल्कि पानी की कमी को भी पूरा करने में मदद करता है। लेकिन कई बार लोगों को बाजार से खीरा खरीदते समय यह समस्या हो जाती है कि वह कड़वा निकल आता है, जिससे पूरा स्वाद खराब हो जाता है। ऐसे में सही खीरे की पहचान करना बहुत जरूरी हो जाता है ताकि घर लाकर किसी तरह की परेशानी न हो।

    खीरे की पहचान करने का पहला तरीका उसके रंग और छिलके से जुड़ा होता है। अगर खीरे का रंग हल्का हरा हो और उसका छिलका समान रूप से साफ दिखे तो ऐसे खीरे अक्सर मीठे और ताजे होते हैं। वहीं जिन खीरों का रंग ज्यादा गहरा या बीच-बीच में पीला दिखाई देता है, उनमें कड़वाहट आने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा खुरदुरे या दानेदार छिलके वाले खीरे भी स्वाद में बेहतर माने जाते हैं।

    खीरे का आकार भी उसकी गुणवत्ता को दर्शाता है। बहुत बड़े या असामान्य रूप से छोटे खीरे अक्सर स्वाद में अच्छे नहीं होते। मध्यम आकार के सीधे और संतुलित खीरे आमतौर पर ज्यादा ताजे और मीठे होते हैं। टेढ़े-मेढ़े या असमान आकार वाले खीरों में कड़वाहट की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए इन्हें चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

    खीरे की कठोरता भी उसकी ताजगी का एक महत्वपूर्ण संकेत होती है। ताजा खीरा हल्का सख्त और मजबूत महसूस होता है। अगर खीरा बहुत ज्यादा नरम या दबाने पर पिचका हुआ लगे तो वह पुराना हो सकता है और उसका स्वाद खराब होने की संभावना रहती है। इसलिए हमेशा ऐसे खीरे चुनने चाहिए जो संतुलित रूप से कड़े हों।

    खीरे के सिरों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। अगर खीरे का डंठल वाला हिस्सा ज्यादा सूखा हुआ या गहरे रंग का दिखे तो उसमें कड़वाहट आने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं ताजा और हल्के रंग वाले सिरे वाले खीरे आमतौर पर ज्यादा मीठे और खाने में बेहतर होते हैं।

    अगर कभी गलती से कड़वा खीरा घर आ भी जाए तो उसे फेंकने की जरूरत नहीं होती। उसका छिलका उतारकर और सिरों को काटकर कड़वाहट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कई लोग पारंपरिक तरीके से खीरे के सिरे को हल्का रगड़कर भी उसकी कड़वाहट कम करने की कोशिश करते हैं, जिससे उसका स्वाद बेहतर हो जाता है।

    इन आसान तरीकों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति बाजार से अच्छे और स्वादिष्ट खीरे की पहचान आसानी से कर सकता है और गर्मियों में अपने भोजन को और भी हेल्दी और ताजा बना सकता है।

  • कमजोर और सूखे नाखूनों की समस्या: जानिए कैसे वापस पा सकते हैं मजबूत और चमकदार नाखून

    कमजोर और सूखे नाखूनों की समस्या: जानिए कैसे वापस पा सकते हैं मजबूत और चमकदार नाखून


    नई दिल्ली। नाखून हमारी पर्सनैलिटी का एक अहम हिस्सा होते हैं। साफ, मजबूत और चमकदार नाखून जहां हाथों की खूबसूरती बढ़ाते हैं, वहीं टूटते और सूखे नाखून अक्सर स्वास्थ्य से जुड़ी कमियों की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नाखून मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं, और जब शरीर में पोषण या नमी की कमी होती है, तो ये कमजोर होने लगते हैं।
    डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार साबुन, डिटर्जेंट और केमिकल के संपर्क में आने से नाखूनों की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। इससे वे सूखे, भुरभुरे और जल्दी टूटने लगते हैं। इसके अलावा पानी की कमी भी नाखूनों की सेहत पर सीधा असर डालती है।
    नाखूनों को मजबूत बनाने के आसान उपाय
    विशेषज्ञों के अनुसार, नाखूनों की सही देखभाल से उनकी सेहत को दोबारा बेहतर किया जा सकता है। सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना। पर्याप्त पानी पीने से नाखूनों की बनावट बेहतर होती है और वे मजबूत बने रहते हैं। हाथ धोने के बाद मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है। इससे नाखूनों के आसपास की त्वचा में नमी बनी रहती है और सूखापन कम होता है।
    रात के समय नाखूनों की देखभाल और भी ज्यादा असरदार मानी जाती है। सोने से पहले नारियल तेल, पेट्रोलियम जेली या मॉइस्चराइजिंग क्रीम लगाने से नाखूनों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे टूटने की समस्या कम होती है।
    विटामिन और तेलों का महत्व
    विशेषज्ञ विटामिन ई को नाखूनों के लिए बेहद फायदेमंद मानते हैं। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो नाखूनों को अंदर से मजबूत बनाता है। विटामिन ई ऑयल से हल्की मालिश करने पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और नाखूनों को पर्याप्त पोषण मिलता है। जैतून का तेल भी नाखूनों की देखभाल में कारगर माना जाता है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट्स नाखूनों की सूखी परत को मुलायम बनाते हैं और उनकी टूटने की संभावना को कम करते हैं।
    सही डाइट भी है जरूरी
    डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि अंदरूनी पोषण भी बेहद जरूरी है। प्रोटीन, बायोटिन, आयरन, जिंक और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व नाखूनों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हरी सब्जियां, अंडे, दालें, मेवे और फल नाखूनों की सेहत को बेहतर बनाते हैं। साथ ही, जरूरत से ज्यादा नेल पॉलिश रिमूवर या नकली नाखूनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये नाखूनों को कमजोर कर सकते हैं।