Author: bharati

  • अमेरिकी अदालत से ट्रंप को फिर बड़ा झटका…. कोर्ट ने 10% टैरिफ को बताया अवैध

    अमेरिकी अदालत से ट्रंप को फिर बड़ा झटका…. कोर्ट ने 10% टैरिफ को बताया अवैध


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अमेरिकी अदालत (American Court) में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी व्यापार अदालत (American Trade Court) ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून का हवाला देकर लगाए गए ये शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं। आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इसके खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था।

    राज्यों का तर्क था कि ट्रंप ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से बचने के लिए उठाया है, जिसने 2025 में लगाए गए उनके पिछले भारी-भरकम टैरिफ को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है।


    क्या है धारा 122?

    यह कानून राष्ट्रपति को केवल तब शुल्क लगाने की अनुमति देता है जब देश गंभीर भुगतान संतुलन घाटे का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत में भारी गिरावट रोकने की जरूरत हो। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह 5 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करे और उन आयातकों को पैसे वापस करे जिन्होंने यह टैक्स भरा था।


    इन क्षेत्रों पर असर नहीं

    ध्यान देने वाली बात यह है कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के दायरे में नहीं आते हैं।


    सरकार की दलील?

    ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन ड़लर तक पहुंच गया है और चालू खाता घाटा जीडीपी का 4% है। हालांकि अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं जूझ रहा है, इसलिए इन शुल्कों का कोई कानूनी आधार नहीं था।


    आगे क्या होगा?

    अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है। वर्तमान में लगाए गए ये 10% वैश्विक टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाले थे, लेकिन इस अदालती फैसले ने प्रशासन की व्यापारिक रणनीति को समय से पहले ही संकट में डाल दिया है।

  • MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस

    MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस


    इंदौर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में इंदौर (Indore) के सांवेर-उज्जैन रोड (Sanwer-Ujjain Road) पर गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सड़क किनारे पड़े तीन लावारिस बैगों (Unclaimed bags) से करोड़ों रुपये की संदिग्ध नकदी बरामद हुई. बैगों में 500 रुपये के नोटों की सैकड़ों गड्डियां मिलीं, लेकिन जांच में सामने आया कि कई गड्डियों में असली नोटों के साथ नकली नोट और रंगीन कागज भी रखे गए थे।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. दरअसल इंदौर जिले के सांवेर-उज्जैन रोड स्थित भुट्टा चौराहे के पास गुरुवार सुबह एक संदिग्ध मामला सामने आया. सड़क किनारे पेड़ के नीचे रखे तीन लावारिस बैगों को देखकर स्थानीय किसान को शक हुआ, जिसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बैगों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. जब बैग खोले गए तो उनके अंदर 500 रुपये के नोटों की बड़ी संख्या में गड्डियां मिलीं. शुरुआती अनुमान के मुताबिक कुल रकम करीब 2 करोड़ 83 लाख रुपये बताई जा रही है. हालांकि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गड्डियों के ऊपर रखे कुछ नोट असली दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर नकली नोटों के साथ रंगीन सादे कागज भरे गए थे।

    आशंका जताई जा रही है कि किसी बड़ी ठगी या अवैध लेनदेन के लिए इन बैगों को तैयार किया गया होगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है. हाईवे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैग वहां कौन छोड़कर गया और इसके पीछे क्या मकसद था. फिलहाल पुलिस ने संदिग्ध नोटों को जब्त कर लिया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • MP: बड़वानी में सरकारी डॉक्टर मरीजों को प्राइवेट लेब भेजने के बदले लेते थे मोटा कमीशन… रंगेहाथों धराए

    MP: बड़वानी में सरकारी डॉक्टर मरीजों को प्राइवेट लेब भेजने के बदले लेते थे मोटा कमीशन… रंगेहाथों धराए


    बड़वानी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बड़वानी जिले (Barwani district) में लोकायुक्त पुलिस (Lokayukta Police) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 सरकारी डॉक्टरों (3 Government Doctors) को मरीजों से जुड़ी जांच के बदले निजी लैब से कमीशन लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है. यह कार्रवाई राजपुर कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात डॉक्टरों के खिलाफ की गई है, जो सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब (Private Pathology Lab) में भेजने के बदले मोटा कमीशन वसूल रहे थे।

    DSP सुनील तालन ने राजपुर कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात इन तीनों अधिकारियों की पहचान डॉ. अमित शाक्य, डॉ. दिव्या साई और डॉ. मनोहर गोदारा के रूप में की. उन्होंने बताया कि इन तीनों को उनके घरों पर ही कमीशन की रकम लेते हुए पकड़ा गया। पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह कार्रवाई राजपुर स्थित एक निजी पैथोलॉजी लैब के मैनेजर अदनान अली की शिकायत पर बिछाए गए एक जाल के बाद की गई।

    शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि ये तीनों डॉक्टर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को जांच के लिए उसकी लैब में भेजने के बदले उससे 20 प्रतिशत कमीशन लेते थे। डीएसपी ने बताया कि शाक्य ने पिछले महीने के कमीशन के तौर पर 18 हजार रुपये, साई ने 8 हजार रुपये और गोदारा ने 21 हजार 800 रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में वे कम रकम लेने पर राजी हो गए. उन्होंने आगे बताया कि शाक्य को 8000 रुपये, साई को 5000 रुपये और गोदारा को 12000 रुपये लेते हुए पकड़ा गया।

    उन्होंने बताया कि लोकायुक्त पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर लिया है, हालांकि अभी तक इनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

  • ऋषि कपूर-नीतू कपूर के बयान से चर्चा में परिवार, रिद्धिमा के करियर को लेकर पुरानी सोच फिर आई सामने

    ऋषि कपूर-नीतू कपूर के बयान से चर्चा में परिवार, रिद्धिमा के करियर को लेकर पुरानी सोच फिर आई सामने


    नई दिल्ली। कपूर परिवार लंबे समय से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम रहा है। इस परिवार ने कई पीढ़ियों तक बॉलीवुड को सुपरस्टार्स दिए हैं, लेकिन इसी परिवार की रिद्धिमा कपूर साहनी ने लंबे समय तक फिल्मी दुनिया से दूरी बनाए रखी। अब 45 वर्ष की उम्र में वह अभिनय की दुनिया में कदम रखने जा रही हैं।

    रिद्धिमा कपूर साहनी अपनी मां नीतू कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘दादी की शादी’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही हैं। इससे पहले वह नेटफ्लिक्स शो Fabulous Lives vs Bollywood Wives में नजर आ चुकी हैं, जहां उन्हें दर्शकों से काफी सराहना मिली थी।

    हाल ही में नीतू कपूर ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि रिद्धिमा के पिता और दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर कभी नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी फिल्मों में आए। उन्होंने कहा कि ऋषि कपूर स्टारडम के “डार्क साइड” को लेकर बहुत चिंतित रहते थे और नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी इस दुनिया में फंसे।

    नीतू कपूर के अनुसार, रिद्धिमा बचपन से ही इस बात को समझती थीं कि अगर वह एक्ट्रेस बनने की इच्छा जतातीं, तो उनके पिता इस फैसले से बहुत परेशान हो जाते। इसलिए उन्होंने खुद ही अभिनय की राह न चुनने का निर्णय लिया। नीतू ने यह भी कहा कि ऋषि कपूर फिल्मों और ग्लैमर के प्रति नकारात्मक नहीं थे, लेकिन वे अपने परिवार को लेकर अत्यधिक प्रोटेक्टिव थे।

    रिद्धिमा कपूर साहनी दिल्ली में एक सफल फैशन और ज्वेलरी डिजाइनर और एंटरप्रेन्योर के रूप में काम कर रही हैं। वह अपने ब्रांड “R Jewellery” के जरिए ज्वेलरी डिजाइनिंग की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी हैं। सोशल मीडिया पर भी वह काफी सक्रिय रहती हैं और अपने डिजाइन और लाइफस्टाइल से जुड़े अपडेट साझा करती रहती हैं।

    फिल्म ‘दादी की शादी’ एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें नीतू कपूर के साथ कपिल शर्मा, आर. सरथकुमार और सादिया खतीब जैसे कलाकार नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन आशीष आर. मोहन ने किया है और यह 8 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

    इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि इसमें कपूर परिवार की अगली पीढ़ी से भी एंट्री हो रही है, क्योंकि रिद्धिमा की बेटी समायरा साहनी भी एक कैमियो रोल के जरिए पर्दे पर नजर आएंगी।

    रिद्धिमा का यह कदम कपूर परिवार की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसने भारतीय सिनेमा को कई यादगार कलाकार दिए हैं। हालांकि, उनका यह डेब्यू काफी देर से हुआ है, लेकिन दर्शकों में उन्हें पर्दे पर देखने को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

  • जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर छह ब्लैक स्पॉट…. हल्की बारिश में भूस्खलन, अमरनाथ यात्रा को लेकर बढ़ी चिंता

    जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर छह ब्लैक स्पॉट…. हल्की बारिश में भूस्खलन, अमरनाथ यात्रा को लेकर बढ़ी चिंता


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर हाईवे (Jammu Kashmir Highway) पर लगातार भूस्खलन (Frequent Landslides) ने अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) से पहले चिंता बढ़ा दी है। जम्मू से श्रीनगर के बीच करीब छह जगह ब्लैक स्पॉट (Black spot) चिह्नित किए गए हैं। हल्की बारिश के बाद यहां भारी भूस्खलन हो रहा है, जिससे हाल ही में कई बार हाईवे बाधित हो चुका है।

    अप्रैल में हुई बारिश के बाद रामबन-बनिहाल सेक्शन में बन रही लगभग तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का काम भी फंस गया है। पहले मई में काम पूरा होने की संभावना थी, लेकिन अब कार्य आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे यात्रा के दौरान जाम से मुक्ति मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है।

    जम्मू से श्रीनगर के बीच यात्रा के दौरान सबसे संवेदनशील हिस्सा उधमपुर से बनिहाल तक है। पिछले साल अप्रैल में रामबन में बादल फटने के बाद आई बाढ़ ने हाईवे का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त कर दिया था। सितंबर में उधमपुर-रामबन के बीच करीब 200 मीटर हिस्सा दलदल में बदल गया, जिससे कश्मीर की सप्लाई चेन बाधित हुई।

    इस साल अप्रैल में हल्की बारिश के बाद सात अप्रैल को डिगडोल और खूनी नाला के बीच भारी भूस्खलन से तीन दिन तक यातायात बाधित रहा। अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी और बारिश होने पर भूस्खलन की संभावना बनी रहेगी। हालांकि एनएचएआई ने संभावित जगहों पर विशेषज्ञों की मदद से सुरक्षा इंतजाम किए हैं और हाईवे की समीक्षा पूरी की है।


    हाईवे पर खतरे के ब्लैक स्पॉट

    रामबन, बनिहाल, नाशरी–चिनैनी, पंथियाल मेहर-कैफेटेरिया मोड़ और खूनी नाला शामिल हैं। अमरनाथ यात्रा के दौरान 2023 में रामबन के पास हाईवे पर भूस्खलन हुआ था। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।


    विशेषज्ञों की मदद से पूरे हो रहे सुधार कार्य

    हाईवे पर अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। संभावित क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मदद से सुधार कार्य पूरे किए जा रहे हैं। टनल निर्माण का कार्य जारी है। यात्रा प्रभावित न हो इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
    -आरएस यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई


    जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर कब-कब भूस्खलन

    – रामबन में 6 अप्रैल, 2026 को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर भूस्खलन से आवाजाही प्रभावित हुई।
    – रामबन में 20 अप्रैल 2025 को बादल फटा। जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने से सैकड़ों वाहन फंस गए। कश्मीर की सप्लाई चेन टूट गई।
    – 30 अगस्त 2025 को रामबन में फिर बादल फटसे भारी भूस्खलन हुआ। हाईवे बाधित होने से कश्मीर जा रहे सैकड़ों ट्रक हाईवे पर फंस गए।
    – सितंबर 2025 में उधमपुर-रामबन के बीच हाईवे का करीब 200 मीटर हिस्सा दलदल में बदल गया। यह हादसा सेब सीजन के दौरान हुआ और इससे कश्मीर की आर्थिकी पर असर पड़ा।
    – चिनैनी-नाशनी टनल के बाहर और उधमपुर क्षेत्र में अगस्त-सितंबर में भूस्खलन की छोटी-बड़ी कई घटनाएं हुईं। इससे आवाजाही प्रभावित हुई।

  • डीके शिवकुमार ने राज्यपाल के फैसले पर जताई आपत्ति, बोले- ‘TVK को बहुमत साबित करने का मौका न मिलना गलत’

    डीके शिवकुमार ने राज्यपाल के फैसले पर जताई आपत्ति, बोले- ‘TVK को बहुमत साबित करने का मौका न मिलना गलत’

    बंगलूरू। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के उस कथित फैसले की आलोचना की है, जिसमें अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर नहीं दिए जाने की बात कही गई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।

    विधान सौधा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डीके शिवकुमार ने कहा कि यदि किसी दल के पास बहुमत का दावा है तो राज्यपाल उसे सरकार गठन से नहीं रोक सकते। उनके अनुसार, राज्यपाल को विजय के नेतृत्व वाली पार्टी को सदन में बहुमत साबित करने का अवसर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का यह रवैया उचित नहीं माना जा सकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी संख्या साबित करने का मौका मिलना चाहिए।

    शिवकुमार ने अपने तर्क के समर्थन में कर्नाटक और राष्ट्रीय राजनीति के कई पुराने उदाहरण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि पहले भी राज्यपालों और राष्ट्रपतियों ने सबसे बड़े दलों या गठबंधनों को सरकार बनाने का अवसर दिया है, ताकि वे सदन में विश्वास मत हासिल कर सकें।

    उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक में भी उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया गया था। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन और एपीजे अब्दुल कलाम के कार्यकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भी संवैधानिक परंपराओं का पालन करते हुए बहुमत परीक्षण को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण भी दिया, जिन्हें सदन में बहुमत साबित करने का अवसर मिला था।

    डीके शिवकुमार ने कहा कि TVK को भी इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपना बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में एक वोट भी बहुमत और अल्पमत तय कर सकता है। यदि कोई दल बहुमत साबित नहीं कर पाता, तब अगला संवैधानिक विकल्प अपनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता के जनादेश और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र जनता की इच्छा से ही चलता है।

  • पंजाब में धमाकों से बढ़ी चिंता: सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती, सीमापार साजिश और आतंकी नेटवर्क की आशंका

    पंजाब में धमाकों से बढ़ी चिंता: सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती, सीमापार साजिश और आतंकी नेटवर्क की आशंका


    नई दिल्ली। पंजाब में मंगलवार रात सैन्य परिसरों के बाहर हुए दो धमाकों ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ घंटों के अंतराल में दो अलग-अलग शहरों में हुई इन घटनाओं ने न केवल प्रशासन की चिंता बढ़ाई है, बल्कि सीमावर्ती राज्य में पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी नेटवर्क की सक्रियता की आशंकाओं को भी मजबूत किया है।

    हालांकि इन धमाकों में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल में जुटी हैं, लेकिन घटनाओं ने सुरक्षा तंत्र की सतर्कता पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। ऑपरेशन सिंदूर की बरसी की पूर्व संध्या पर सैन्य ठिकानों के आसपास हुए विस्फोट राज्य पुलिस की खुफिया व्यवस्था की कमजोरी की ओर इशारा करते हैं।

    पंजाब पुलिस के महानिदेशक ने इन घटनाओं के पीछे आईएसआई समर्थित साजिश की आशंका जताई है। इस दावे को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जालंधर धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है। यह संगठन पहले भी आईएसआई और कनाडा से समर्थन मिलने के आरोपों में चर्चा में रहा है तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है।

    बीते कुछ महीनों में पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली कई घटनाएं सामने आई हैं। अप्रैल में पटियाला-राजपुरा रेलवे ट्रैक पर आईईडी विस्फोट हुआ था। इससे पहले चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला किया गया। जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस से पहले सरहिंद रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ, जबकि नवंबर 2025 में मोगा के सीआईए कार्यालय पर ग्रेनेड फेंका गया था। मार्च 2025 में अमृतसर के खंदवाला इलाके में धार्मिक स्थल के बाहर भी विस्फोट की घटना सामने आई थी।

    लगातार हो रही इन घटनाओं से संकेत मिलते हैं कि सीमापार बैठे तत्व पंजाब में अस्थिरता फैलाने की कोशिशों में जुटे हैं। यदि समय रहते इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आम लोगों के बीच भय का माहौल गहरा सकता है और राज्य एक बार फिर पुराने दौर की दर्दनाक यादों की ओर बढ़ सकता है।

    ऐसे संवेदनशील समय में सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। साथ ही राजनीतिक दलों और नेताओं को भी इस तरह के मामलों में बयानबाजी से बचते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। मौजूदा हालात पंजाब में कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं, जिससे निपटने के लिए सीमाओं के साथ-साथ राज्य के भीतर भी चौकसी बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।

  • वट पूर्णिमा 2026: इस बार 60 दिन के ज्येष्ठ मास के कारण बदली तारीख, जानें व्रत कब और कैसे होगा

    वट पूर्णिमा 2026: इस बार 60 दिन के ज्येष्ठ मास के कारण बदली तारीख, जानें व्रत कब और कैसे होगा


    नई दिल्ली। वट पूर्णिमा का व्रत इस बार 2026 में खास परिस्थितियों में मनाया जाएगा क्योंकि ज्येष्ठ मास इस वर्ष अधिक मास के कारण लंबा यानी लगभग 60 दिन का हो गया है। इसी वजह से व्रत की तिथि को लेकर महिलाओं में उत्सुकता बनी हुई है।

    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून 2026 को रखा जाएगा। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को सुबह 3 बजकर 7 मिनट पर होगी और यह 30 जून की सुबह 5 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत 29 जून को ही मान्य रहेगा।

    वट पूर्णिमा का महत्व
    यह व्रत मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन वट वृक्ष (बरगद का पेड़) की पूजा करने से दांपत्य जीवन में मजबूती आती है और वैवाहिक सुख बढ़ता है।

    महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर पूजा करती हैं और वट वृक्ष को देवी-देवताओं का प्रतीक मानकर उसकी परिक्रमा करती हैं।

    पूजा विधि
    व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और लाल या पीले वस्त्र पहनती हैं। इसके बाद 16 श्रृंगार करने का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के लिए एक टोकरी में सात प्रकार के अनाज, फल, फूल, रोली, कुमकुम, कच्चा सूत और अन्य सामग्री रखी जाती है। वट वृक्ष के पास पहुंचकर दीपक जलाया जाता है और कच्चे सूत से वृक्ष की परिक्रमा की जाती है। इसके बाद वृक्ष पर कुमकुम और हल्दी से तिलक किया जाता है तथा चने और गुड़ का भोग लगाया जाता है।

    धार्मिक मान्यता
    मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर पति की आयु लंबी होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत भारतीय संस्कृति में स्त्री शक्ति, समर्पण और आस्था का प्रतीक माना जाता है। कुल मिलाकर वट पूर्णिमा 2026 में विशेष खगोलीय स्थिति के कारण अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, जिससे इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता और भी गहरी हो जाती है।
  • MP में आंधी-बारिश से बदला मौसम, कई शहरों में लुढ़का पारा, आज भी 21 जिलों में चेतावनी जारी

    MP में आंधी-बारिश से बदला मौसम, कई शहरों में लुढ़का पारा, आज भी 21 जिलों में चेतावनी जारी

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम ने मिजाज बदला हुआ है। आंधी और बारिश के चलते प्रदेश के कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को रीवा का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया, जबकि ग्वालियर, नौगांव, सीधी और सतना में भी मौसम अपेाकृत ठंडा बना रहा। कई जिलों में हल्की बारिश भी हुई।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को भी प्रदेश के 21 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना बनी हुई है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। दूसरी ओर भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत प्रदेश के 34 जिलों में गर्मी का असर जारी रहेगा। इन इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उसके आसपास बने रहने का अनुमान है।

    इन जिलों में हुई बारिश
    गुरुवार को नर्मदापुरम, टीकमगढ़ और श्योपुर में बारिश दर्ज की गई। वहीं ग्वालियर-चंबल, रीवा और शहडोल संभाग के कई हिस्सों में बादल छाने और आंधी चलने का सिलसिला जारी रहा। प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 40 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम बदलने की वजह
    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मध्य प्रदेश में फिलहाल दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इनमें एक प्रदेश के मध्य भाग में और दूसरा ऊपरी हिस्से में बना हुआ है। साथ ही एक ट्रफ लाइन पूर्वी हिस्से से गुजर रही है। इसके प्रभाव से अगले दो दिनों तक कई जिलों में बारिश और आंधी की स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि 10 और 11 मई से प्रदेश में फिर गर्मी बढ़ने के आसार हैं और तापमान में इजाफा देखने को मिल सकता है।

  • अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें

    अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों को टिकट बुकिंग और यात्रा से जुड़ी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देने जा रहा है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि अगस्त 2026 से ट्रेनों को नई उन्नत यात्री आरक्षण प्रणाली में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह बदलाव पूरी तरह सुचारु तरीके से किया जाए और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
    रेल भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान रेलवे की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था और नई तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म की तैयारियों का जायजा लिया गया। मौजूदा यात्री आरक्षण प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। पिछले चार दशकों में इसमें कई छोटे बदलाव किए गए, लेकिन अब रेलवे इसे पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है।
    रेल मंत्रालय के मुताबिक नई प्रणाली की क्षमता को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए काफी बढ़ाया गया है, ताकि भविष्य में बढ़ती यात्री संख्या और टिकट बुकिंग के दबाव को आसानी से संभाला जा सके। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रेलवे लगातार डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में काम कर रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम है।
    वर्तमान में करीब 88 प्रतिशत रेलवे टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। इसमें RailOne मोबाइल एप की अहम भूमिका रही है, जिसे पिछले साल जुलाई में लॉन्च किया गया था। यह ऐप अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन, रिफंड और लाइव ट्रेन स्टेटस जैसी कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं।
    नई आरक्षण प्रणाली की सबसे खास बात इसमें शामिल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम है। यह फीचर वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है। रेलवे के अनुसार, इस सुविधा की सटीकता पहले 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है।
    इसके अलावा RailOne ऐप के जरिए यात्रियों को लाइव ट्रेन ट्रैकिंग, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी, रेल मदद शिकायत निवारण सेवा और सीट तक भोजन पहुंचाने जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं, जिनमें आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट शामिल हैं।
    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा बनी हुई है। वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री सब्सिडी पर 60,239 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे यात्रियों को औसतन 43 प्रतिशत तक किराए में राहत मिली। नई तकनीक आधारित आरक्षण प्रणाली से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में रेलवे यात्रा पहले से ज्यादा स्मार्ट, आसान और तेज हो जाएगी।