Author: bharati

  • बिहार में सम्राट कैबिनेट का विस्तार: 32 मंत्रियों ने ली शपथ, नीतीश के बेटे निशांत भी शामिल, PM मोदी और शाह रहे मौजूद

    बिहार में सम्राट कैबिनेट का विस्तार: 32 मंत्रियों ने ली शपथ, नीतीश के बेटे निशांत भी शामिल, PM मोदी और शाह रहे मौजूद


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में आज बड़ा दिन देखने को मिला जब सम्राट चौधरी सरकार के कैबिनेट विस्तार में 32 नए मंत्रियों ने गांधी मैदान में शपथ ली। इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    32 मंत्रियों ने ली शपथ, कई नए चेहरे शामिल
    सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के 22 दिन बाद हुए इस कैबिनेट विस्तार में बीजेपी, जेडीयू और सहयोगी दलों से कुल 32 विधायकों को मंत्री बनाया गया।

    बीजेपी से 15 मंत्री

    जेडीयू से 13 मंत्री

    LJP(R) से 2 मंत्री

    HAM और RLM से 1-1 मंत्री

    इस दौरान कई मंत्रियों ने एक साथ शपथ ली, जिससे समारोह बेहद तेज और व्यवस्थित रहा।

    नीतीश के बेटे निशांत कुमार बने मंत्री
    इस विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की रही, जिन्होंने मंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा श्रवण कुमार, विजय सिन्हा, लेसी सिंह और दिलीप जायसवाल जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी शपथ ली।

    पीएम मोदी का भव्य स्वागत, रोड शो भी हुआ
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना एयरपोर्ट से सीधे रोड शो करते हुए गांधी मैदान पहुंचे। पूरे रास्ते समर्थकों ने फूलों की बारिश की और “मोदी-मोदी” के नारे लगाए।पीएम मोदी ने गाड़ी से ही लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।

    मंच पर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी
    शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर कई बड़े नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं

    अमित शाह

    राजनाथ सिंह

    नीतीश कुमार

    बीजेपी अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेता
    नीतीश कुमार ने मंच पर पहुंचकर कई नेताओं से मुलाकात की और अपने बेटे निशांत को आशीर्वाद भी दिया।

    राष्ट्रगीत की जगह सीधे राष्ट्रगान
    कार्यक्रम में एक खास बात यह रही कि शुरुआत में सीधे राष्ट्रगान बजाया गया, जबकि सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार पहले “वंदे मातरम” बजाया जाना था।

    कैबिनेट में जातीय और सामाजिक संतुलन
    नए मंत्रिमंडल में जातीय समीकरण पर भी खास ध्यान दिया गया है

    ईबीसी: 10 ओबीसी: 6 दलित: 7

    सवर्ण: 9

    मुस्लिम: 1

    महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व देते हुए 5 महिला मंत्रियों को शामिल किया गया है।

    किस दल से कितने मंत्री
    बीजेपी:
    EBC-5, OBC-2, दलित-2, सवर्ण-6

    जेडीयू:
    EBC-4, OBC-3, दलित-3, सवर्ण-1, मुस्लिम-1

    एलजेपी (आर): 1 दलित, 1 दलित एचएएम: 1 दलित आरएलएम: 1 OBC

    राजनीतिक हलचल तेज
    शपथ से पहले ही अमित शाह पटना पहुंचकर देर रात तक बैठकों में शामिल रहे, जहां कैबिनेट के चेहरों को अंतिम रूप दिया गया।बिहार का यह कैबिनेट विस्तार राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, जिसमें नए और पुराने चेहरों के साथ-साथ जातीय संतुलन और गठबंधन राजनीति की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

  • बंगाल में चुनाव बाद हिंसा तेज, गोलीबारी और हत्या की घटनाओं से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    बंगाल में चुनाव बाद हिंसा तेज, गोलीबारी और हत्या की घटनाओं से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है। उत्तर 24 परगना जिले के कई हिस्सों में हाल ही में हुई घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बसीरहाट और मध्यमग्राम क्षेत्रों में सामने आए गोलीकांड और हत्या की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल देखा जा रहा है, जबकि राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।

    बसीरहाट इलाके में उस समय स्थिति बिगड़ गई जब एक भाजपा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में पार्टी गतिविधियों में शामिल था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक कुछ लोगों का समूह वहां पहुंचा और माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान गोली चलने की घटना सामने आई, जिसमें कार्यकर्ता घायल हो गया। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।

    इसी बीच मध्यमग्राम क्षेत्र से एक और गंभीर घटना सामने आई, जहां एक राजनीतिक दल से जुड़े करीबी सहयोगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि वह अपने वाहन से जा रहा था, तभी कुछ हमलावरों ने रास्ता रोककर नजदीक से फायरिंग की और मौके से फरार हो गए। इस वारदात के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।

    लगातार हो रही इन घटनाओं ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं और सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। कई जगहों पर लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं।

    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

    राजनीतिक स्तर पर भी इन घटनाओं को लेकर तनाव बढ़ गया है। विभिन्न पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता शांति बनाए रखना और हालात को सामान्य करना है।

    फिलहाल उत्तर 24 परगना जिले के कई हिस्सों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद हालात को नियंत्रित करने की कोशिशें जारी हैं। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।

  • बंगाल में लगातार हिंसा से हालात गरम, हत्या के बाद BJP कार्यकर्ताओं पर हमला, पुलिस अलर्ट

    बंगाल में लगातार हिंसा से हालात गरम, हत्या के बाद BJP कार्यकर्ताओं पर हमला, पुलिस अलर्ट

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। पहले चंद्रनाथ रथ की हत्या और उसके कुछ ही घंटों बाद BJP कार्यकर्ताओं पर हुए बम हमले ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। पनिहाटी क्षेत्र में हुई इस घटना में पांच लोग घायल हो गए, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। लगातार हुई इन घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है और लोगों के बीच डर का माहौल बना हुआ है।

    जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब BJP कार्यकर्ताओं का एक समूह इलाके में स्थानीय लोगों से बातचीत कर रहा था। इसी दौरान अचानक मोटरसाइकिल पर सवार कुछ अज्ञात लोग वहां पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के उन पर देसी बम फेंक दिए। धमाके के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हमले के तुरंत बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायल लोगों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि यह हमला सुनियोजित था और इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग शामिल हो सकते हैं। वहीं दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बयान बताया है। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है और आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

    पुलिस ने घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है। आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। साथ ही इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और लगातार गश्त बढ़ा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ स्थिति को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

    जिस स्थान पर यह हमला हुआ, वह पहले से ही संवेदनशील माना जाता है। हाल के दिनों में यहां राजनीतिक गतिविधियों और तनावपूर्ण माहौल के चलते सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी। इस ताजा घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं के कारण वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और इलाके में शांति बहाल करना अब सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।

    लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने प्रशासन की चुनौती भी बढ़ा दी है। पहले हत्या और उसके बाद बम हमला, इन दोनों घटनाओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की कोशिश है कि जल्द से जल्द स्थिति को नियंत्रण में लाया जाए और दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए, ताकि इलाके में फिर से शांति स्थापित हो सके।

  • वायुसेना से राजनीति तक का सफर: चंद्रनाथ रथ की हत्या से बंगाल में मचा राजनीतिक हड़कंप

    वायुसेना से राजनीति तक का सफर: चंद्रनाथ रथ की हत्या से बंगाल में मचा राजनीतिक हड़कंप

    नई दिल्ली। रात का समय था और सड़क पर हल्की हलचल जारी थी, जब एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे इलाके को दहशत और सन्नाटे में बदल दिया। पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम क्षेत्र में पूर्व भारतीय वायु सेना अधिकारी और राजनीतिक रूप से सक्रिय चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हमला अचानक हुआ और इतनी तेजी से अंजाम दिया गया कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही पलों में सामान्य सा लगने वाला रास्ता एक दर्दनाक वारदात का गवाह बन गया।

    चंद्रनाथ रथ अपने वाहन से यात्रा कर रहे थे, तभी बाइक पर सवार कुछ अज्ञात हमलावर उनके करीब पहुंचे। बिना किसी चेतावनी के उन पर गोलियां चला दी गईं। हमला इतना सटीक और तेज था कि वाहन के भीतर मौजूद लोग भी कुछ समझ नहीं पाए। गंभीर रूप से घायल रथ को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनके शरीर पर लगी चोटें बहुत गहरी थीं और उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    रथ का जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका एक लंबा सैन्य इतिहास भी रहा है। उन्होंने भारतीय वायु सेना में लगभग बीस साल तक सेवा दी थी और अनुशासन तथा समर्पण के लिए जाने जाते थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कुछ समय कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी काम किया, लेकिन धीरे-धीरे वे राजनीति और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ते चले गए। वे एक प्रमुख राजनीतिक नेता के करीबी सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे थे और संगठनात्मक कामकाज में उनकी भूमिका अहम मानी जाती थी।

    उनकी पहचान हमेशा एक शांत और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में रही, जो पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते थे। राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भूमिका रणनीतिक और प्रबंधन से जुड़ी होती थी, जहां वे चुनावी तैयारियों से लेकर संगठनात्मक समन्वय तक कई महत्वपूर्ण कार्य संभालते थे। उनकी कार्यशैली में सादगी और गंभीरता साफ झलकती थी।

    इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल फैल गया है। स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा की भावना गहरी हो गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की पहचान के लिए आसपास के इलाकों में छानबीन तेज कर दी गई है। शुरुआती संकेतों में यह बात सामने आई है कि हमलावर पहले से ही लक्ष्य पर नजर रखे हुए थे और पूरी योजना के साथ वारदात को अंजाम दिया गया।

    घटना ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। चुनाव के बाद पहले से ही तनावपूर्ण माहौल में इस हत्या ने नई चिंता पैदा कर दी है। विभिन्न स्तरों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि उस बढ़ते राजनीतिक तनाव का संकेत भी मानी जा रही है, जो पिछले कुछ समय से क्षेत्र में महसूस किया जा रहा था।

    चंद्रनाथ रथ की अचानक और हिंसक मृत्यु ने उनके परिचितों, समर्थकों और पूरे राजनीतिक वातावरण को झकझोर कर रख दिया है। एक ऐसा व्यक्ति, जिसने जीवन का बड़ा हिस्सा अनुशासन और सेवा में बिताया, आज एक हिंसक घटना का शिकार होकर चर्चा में है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल यह मामला पूरे राज्य में चिंता और सवालों का केंद्र बना हुआ है।

  • कप्तान श्रेयस अय्यर का अपनी ही टीम पर फूटा गुस्सा, अनुशासनहीन फील्डिंग को बताया बड़ी वजह

    कप्तान श्रेयस अय्यर का अपनी ही टीम पर फूटा गुस्सा, अनुशासनहीन फील्डिंग को बताया बड़ी वजह


    नई दिल्ली। 
    इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन में पंजाब किंग्स का सफर फिलहाल एक बुरे सपने में तब्दील होता नजर आ रहा है। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मिली 33 रनों की हार ने न केवल टीम के अंक तालिका में स्थान को प्रभावित किया है, बल्कि टीम के भीतर चल रहे असंतोष को भी उजागर कर दिया है। मैच खत्म होने के तुरंत बाद कप्तान श्रेयस अय्यर का चेहरा उनकी निराशा को साफ बयां कर रहा था। हार की हैट्रिक पूरी होने के बाद कप्तान ने अपनी टीम के खिलाड़ियों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि इस स्तर की क्रिकेट में ऐसी गलतियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने सरेआम टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और विशेष रूप से फील्डिंग के गिरते स्तर पर सवाल उठाए, जो किसी भी पेशेवर टीम के लिए आत्ममंथन का विषय है।

    मैच के घटनाक्रम पर नजर डालें तो सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए रनों का एक ऐसा पहाड़ खड़ा कर दिया, जिसके नीचे पंजाब की टीम दबती चली गई। हैदराबाद के बल्लेबाजों ने पंजाब के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाते हुए चार विकेट पर 235 रनों का विशाल स्कोर बनाया। हेनरिच क्लासेन और ईशान किशन की अर्धशतकीय पारियों ने पंजाब के खेमे में खलबली मचा दी थी। श्रेयस अय्यर ने हार के मुख्य कारणों का विश्लेषण करते हुए कहा कि जब विपक्षी टीम इतना बड़ा स्कोर बनाती है, तो आपकी फील्डिंग का चुस्त होना अनिवार्य होता है। कप्तान ने विशेष रूप से युजवेंद्र चहल के ओवर में छूटे हुए एक महत्वपूर्ण कैच का जिक्र किया और उसे पूरे मुकाबले का सबसे बड़ा निर्णायक मोड़ करार दिया। अय्यर के अनुसार, उस एक चूक ने हैदराबाद को वह गति दे दी जिसे बाद में रोकना असंभव हो गया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब की टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही, जहां शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने दबाव में घुटने टेक दिए। हालांकि, इस अंधकार के बीच कूपर कोनोली एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे। कोनोली ने अपनी बल्लेबाजी से मैदान के हर कोने में शॉट लगाए और मात्र 59 गेंदों में नाबाद 107 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली। एक समय ऐसा लग रहा था कि कोनोली अकेले दम पर चमत्कार कर देंगे, लेकिन दूसरे छोर से किसी भी अनुभवी बल्लेबाज ने जिम्मेदारी नहीं निभाई। पूरी टीम बीस ओवरों में सात विकेट खोकर 202 रन ही बना सकी। अय्यर ने बल्लेबाजी विभाग पर हमला बोलते हुए कहा कि बड़े लक्ष्यों का पीछा करते समय व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज्यादा टीम वर्क की जरूरत होती है, जिसका इस मैच में पूर्ण अभाव दिखा।

    लगातार मिल रही असफलताओं ने अब टीम प्रबंधन की रणनीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कप्तान ने यह संकेत दिया है कि टीम के प्रदर्शन में निरंतरता की भारी कमी है और आगामी मैचों में प्लेइंग इलेवन में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। श्रेयस अय्यर का मानना है कि गेंदबाजी में अनुशासन की कमी और फील्डिंग में की गई बचकानी गलतियां ही हार का असली कारण हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को चेतावनी दी है कि अगर समय रहते अपनी गलतियों में सुधार नहीं किया गया, तो टूर्नामेंट में वापसी के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे। यह हार पंजाब किंग्स के लिए केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह टीम के मनोबल पर एक गहरी चोट है जिसे भरने के लिए उन्हें अगले मुकाबलों में असाधारण खेल दिखाना होगा।

    अंततः, यह मुकाबला पंजाब किंग्स के लिए एक कड़ा सबक साबित हुआ है। कप्तान की नाराजगी यह दर्शाती है कि ड्रेसिंग रूम में अब बदलाव की बयार चलने वाली है। कोनोली जैसे युवा खिलाड़ी का शतक भले ही टीम को जीत न दिला सका हो, लेकिन इसने अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सवालिया निशान जरूर लगा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि श्रेयस अय्यर अपनी टीम को इस मानसिक दबाव से कैसे बाहर निकालते हैं और क्या पंजाब की टीम हार के इस भंवर से निकलकर जीत की पटरी पर लौट पाएगी। फिलहाल, हैदराबाद की जीत ने टूर्नामेंट के समीकरणों को और भी दिलचस्प बना दिया है, जबकि पंजाब को अपनी साख बचाने के लिए नए सिरे से युद्धस्तर पर तैयारी करनी होगी।

  • पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, सोना-चांदी में जोरदार उछाल से बाजार में हलचल

    पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, सोना-चांदी में जोरदार उछाल से बाजार में हलचल


    नई दिल्ली। देश में 7 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तेल विपणन कंपनियों IOC, BPCL और HPCL ने आज भी ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। एक्साइज ड्यूटी में पहले हुई कटौती का असर अब भी दिखाई दे रहा है, जिसके चलते पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है।

    देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग स्तर पर बनी हुई हैं। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, पटना, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतें पिछले दिनों की तरह ही बनी हुई हैं। खास बात यह है कि कई बड़े शहरों में पेट्रोल अभी भी ₹100 के पार बना हुआ है, जबकि डीजल अधिकतर जगहों पर ₹100 से नीचे है।

    वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार से निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। स्पॉट गोल्ड करीब 3 प्रतिशत से अधिक उछलकर 4700 डॉलर प्रति औंस के स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं चांदी में भी तेज उछाल देखने को मिला है, जहां यह 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 77 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करती दिखी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में नरमी और संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। इसके साथ ही डॉलर के कमजोर होने से सोने की मांग बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आई है। जब डॉलर कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता हो जाता है और निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार में एक अलग प्रभाव डाला है। इससे महंगाई के दबाव में थोड़ी कमी आई है और निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोने और चांदी की ओर बढ़ा है।

    फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियां बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी राजनीतिक या आर्थिक बदलाव का सीधा असर सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

  • थलापति विजय की राजनीति में बड़ी हलचल: सुपरस्टार से सीएम तक का सफर और तृषा कृष्णन की एंट्री की चर्चा तेज

    थलापति विजय की राजनीति में बड़ी हलचल: सुपरस्टार से सीएम तक का सफर और तृषा कृष्णन की एंट्री की चर्चा तेज


    नई दिल्ली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में शुमार थलापति विजय ने राजनीति में कदम रखकर सबको चौंका दिया है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं।

    234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, ऐसे में पार्टी बहुमत से थोड़ी दूर रह गई है, लेकिन विपक्षी और सत्ता दोनों खेमों में इस नतीजे ने हलचल मचा दी है।

    दो सीटों पर जीत, अब एक छोड़ना तय

    विजय ने इस चुनाव में दो सीटों चेन्नई की पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से जीत हासिल की है। लेकिन नियम के अनुसार कोई भी उम्मीदवार एक ही सीट रख सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि विजय पेरंबूर सीट अपने पास रखेंगे, जबकि तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से इस्तीफा दिया जा सकता है। इसी सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

    क्या तृषा कृष्णन राजनीति में आएंगी?

    इसी राजनीतिक हलचल के बीच सबसे बड़ा नाम सामने आया है अभिनेत्री तृषा कृष्णन का। चर्चा है कि TVK उन्हें उपचुनाव में तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से उम्मीदवार बनाना चाहती है। पार्टी का मानना है कि उनकी लोकप्रियता वोट बैंक को मजबूत कर सकती है।

    हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक तृषा अभी राजनीति में आने को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं हैं और इस प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं। उनका अब तक किसी राजनीतिक दल से सीधा जुड़ाव नहीं रहा है।

     गठबंधन की तलाश में TVK
    सरकार बनाने के लिए TVK को किसी बड़ी पार्टी का समर्थन चाहिए। इसी वजह से तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी का झुकाव या तो DMK या AIADMK की ओर हो सकता है, हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    क्या विजय बनेंगे मुख्यमंत्री?
    सूत्रों के मुताबिक विजय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का अवसर देने की मांग की है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़
    थलापति विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह रोमांचक बना दिया है। एक तरफ गठबंधन की सियासत, दूसरी तरफ उपचुनाव की तैयारी और तीसरी तरफ तृषा कृष्णन की संभावित एंट्री—इन सबने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

    अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में विजय किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं और क्या वाकई सिनेमा की एक और बड़ी स्टार राजनीति में उतरती हैं।

  • बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता

    बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में भाजपा (BJP) की शानदार जीत के बाद अब नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है। शपथ ग्रहण नौ मई को कोलकाता (Kolkata.) के ब्रिगेड परेड ग्राउंड (Brigade Parade Ground) में सुबह दस बजे होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगते ही तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो आठ मई को भाजपा विधायकों की बैठक होगी। इस सबमें सबसे अहम बात है पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का बंगाल जाना।

    अमित शाह (Amit Shah) के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद शायद यह पहला मौका होगा कि जब वह किसी राज्य के नतीजे सामने आने के बाद बतौर पर्यवेक्षक उस राज्य का दौरा करेंगे। भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो यह कोई सामान्य घटना नहीं है। ऐसे में कयासों का दौर शुरू हो चुका है।


    कौन बनेगा बंगाल का मुख्यमंत्री?

    भाजपा ने असम और बंगाल में शानदार जीत दर्ज की है। असम में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) का नाम तय माना जा रहा है। पूरे देश की निगाहें बंगाल पर टिकी हुई हैं। राज्य में सरकार बनाने की कवायद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर जा सकते हैं। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शपथ ग्रहण से पहले गृह मंत्री का दौरा कई मायनों में अहम है। पर्यवेक्षक के रूप में गृह मंत्री दौरे के दौरान कई अहम फैसले कर सकते हैं। इसमें मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्रियों के नाम पर रणनीति बनेगी। बैठक में पश्चिम बंगाल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

    बंगाल के भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने की रेस में शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वह ममता बनर्जी के कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें पार्टी ने दो दो सीटों से उतारा था। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर टीएमसी को मात दी है। पिछली बार उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इस चुनाव में उन्होंने भवानीपुर में भी ममता को ही मात दी है। इससे उनका कद भाजपा में और बड़ा हो गया है। हालांकि अमित शाह के पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद से यह चर्चा जरूर होने लगी है कि अगर सबकुछ सामान्य तरीके से होना होता तो गृह मंत्री खुद बतौर पर्यवेक्षक बंगाल का दौरा नहीं करते।


    शुभेंदु नहीं तो कौन बनेगा बंगाल का CM?

    भारतीय जनता पार्टी ने राज्यों में मुख्यमंत्री चुनने में हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली इसका ताजा उदाहरण हैं। तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए भाजपा ने ऐसे नाम को आगे बढ़ाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अब अमित शाह के दौरे के बाद से सवाल उठ रहा है कि बंगाल में भी भाजपा ऐसा ही कुछ तो नहीं करने जा रही है। हालांकि, बाकी राज्यों की तुलना में बंगाल की स्थिति काफी अलग है। यहां भाजपा को ऐसे नेतृत्व की जरूरत होगी जो पार्टी के भविष्य के हित में हो।

  • भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप

    भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में धार (Dhar ) की ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala) को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) में चल रही सुनवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब इस बहुचर्चित विवाद में जैन समाज की एंट्री ने कानूनी और धार्मिक बहस को और तेज कर दिया है। जैन समाज की ओर से दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि भोजशाला मूल रूप से जैन धरोहर रही है, जहां प्राचीन काल में जैन गुरुकुल और मंदिर संचालित होते थे।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जैन समाज की जनहित याचिका को मुख्य याचिका के साथ टैग कर लिया। इसके बाद अब भोजशाला विवाद में जैन पक्ष की कानूनी मौजूदगी भी मजबूत से दर्ज हो गई है। इस मामले में बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जैन समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा।

    राजभर ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्राचीन संदर्भों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि राजा भोज ने यह भूमि जैन आचार्य मानतुंग को दान में दी थी। मानतुंग वही आचार्य हैं जिन्होंने जैन धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक सूत्र ‘भक्तामर स्तोत्र’ की रचना की थी। उन्होंने दावा किया कि भोजशाला परिसर में कभी जैन मंदिर और गुरुकुल हुआ करता था, साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर जोर देते हुए कहा, ‘देश के संविधान के तहत जैन धर्म के अनुयायियों को भोजशाला परिसर में पूजा का अधिकार है।’


    भोजशाला की संरचना में जैन वास्तुकला का स्पष्ट उल्लेख

    राजभर ने तर्क दिया कि धार के राजा भोज हिंदू और जैन, दोनों धर्मों के विद्वानों के संरक्षक थे। उनके अनुसार भोजशाला में संचालित शिक्षण केंद्र में जैन विद्वान भी मौजूद थे। राजभर ने ऐतिहासिक लेखों और पुरातात्विक सामग्री के हवाले से दावा किया कि भोजशाला की संरचना के कुछ हिस्सों में जैन वास्तुकला का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।


    कुछ-कुछ देलवाड़ा के जैन मंदिरों जैसी है स्थापत्य कला

    उन्होंने शिमला की ‘गवर्नमेंट सेंट्रल प्रेस’ द्वारा 1882 में प्रकाशित रिपोर्ट और अन्य प्रकाशनों का जिक्र भी किया जिसमें विवादित परिसर की मस्जिद के कुछ हिस्सों को जैन समुदाय से जुड़ी इमारतों के अवशेषों से निर्मित बताया गया था और इसके कुछ गुंबदों तथा खंभों की तुलना माउंट आबू स्थित प्रसिद्ध देलवाड़ा जैन मंदिरों से की गई थी।


    ‘लंदन में रखी मूर्ति जैन यक्षिणी अम्बिका देवी की’

    राजभर ने कुछ चित्रों और संग्रहालय के विवरणों का हवाला देते हुए कहा कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहा है, वह असल में जैन यक्षिणी अम्बिका की मूर्ति है। उन्होंने तर्क दिया कि इस मूर्ति में जैन तीर्थंकरों के प्रतीक चिन्ह हैं और यह विशिष्ट खूबी इसे देवी सरस्वती की हिंदू शैली की प्रतिमाओं से अलग करती है।


    राजभर बोले- सरकार का रवैया संदेह पैदा कर रहा

    राजभर ने यह भी कहा कि एएसआई ने भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इस स्मारक से जैन समुदाय के ऐतिहासिक संबंधों को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार विवादित स्मारक को लेकर एक वर्ग के दावों का सीधे तौर पर समर्थन कर रही है और उसका यह रवैया संदेह उत्पन्न करता है।


    ASI पर लगाया जैन सबूतों को अनदेखा करने का आरोप

    उधर जैन समाज की तरफ से अधिवक्ता प्रिया जैन ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस मामले की जानकारी दी और दावा किया कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की हालिया सर्वे रिपोर्ट में भोजशाला में मिले जैन सबूतों को अनदेखा किया गया। प्रिया के अनुसार ASI की खुदाई व सर्वे में भोजशाला से जैन तीर्थंकरों और यक्ष-यक्षणियों की कई खंडित मूर्तियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में इन अवशेषों को स्पष्ट रूप से जैन धर्म से जुड़ा नहीं बताया।


    जैन तीर्थकरों और यक्ष-यक्षणियों की खंडित मूर्तियां मिलीं

    प्रिया जैन के मुताबिक सर्वे के दौरान सात फणों वाली ‘सप्त फणी कैनोपी’ संरचना भी सामने आई है, जो जैन प्रतीकों से मेल खाती है। उन्होंने कहा कि जैन समाज की यह लड़ाई किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर है। जैन समाज ने यह भी दावा किया कि लंदन में संरक्षित वाग्देवी प्रतिमा और उससे जुड़े शिलालेख भोजशाला के जैन इतिहास की पुष्टि करते हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर समाज ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना के समान अधिकार की मांग हाईकोर्ट से की है।

    हिंदू समाज जिसे देवी सरस्वती की मूर्ति बताता है, वह असल में जैन धर्म की यक्षिणी अम्बिका देवी की मूर्ति है। फोटो में लंदन म्यूजियम में रखी मूर्ति व उसके साथ लिखा उसका परिचय दिख रहा है।


    खुर्शीद ने लंदन में रखी मूर्ति को लेकर भी किया था अलग दावा

    इससे पहले कुछ दिनों पहले हुई मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि धार में स्थित भोजशाला पर पहला हमला मुस्लिमों ने नहीं, बल्कि गुजरात के सोलंकी शासकों ने किया था, साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लंदन के म्यूजियम में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू समाज वाग्देवी की बता रहा है वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। अपने दावे के समर्थन में खुर्शीद ने लेखक रामसेवक गर्ग की लिखी पुस्तक और 2003 में लिखे गए ब्रिटिश म्यूजियम के पत्र का हवाला भी दिया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि ‘धार को पहले गुजरात के सोलंकी शासकों ने तहस-नहस किया था, जबकि मुस्लिम शासकों ने उजड़े ढांचे को फिर से व्यवस्थित किया था।’

    इसके साथ ही खुर्शीद ने साल 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भेजे पत्र का हवाला दिया था और यह दावा भी किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। बता दें कि भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।

  • Rajasthan: 900 करोड़ के जल जीवv मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार

    Rajasthan: 900 करोड़ के जल जीवv मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission- JJM) घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी (Mahesh Joshi) को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 900 करोड़ रुपए के कथित घोटाले में यह कार्रवाई की गई है। आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार कर रिश्वत ली थी।

    इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी महेश जोशी को इसी मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की और न ही कोई पैसा लिया। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें 3 दिसंबर 2025 को जमानत मिली थी।


    22 अधिकारियों समेत दर्ज हुई थी FIR

    ACB ने इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इनमें जल जीवन मिशन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर टेंडर जारी कर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया गया।


    ईमेल आईडी से मिला बड़ा सुराग

    ACB को जांच के दौरान कुछ संदिग्ध ईमेल आईडी से महत्वपूर्ण लीड मिली थी। इन्हीं के आधार पर अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत का खुलासा हुआ। अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।


    सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के बाद कार्रवाई

    इससे पहले 9 अप्रैल को जलदाय विभाग के पूर्व ACS सुबोध अग्रवाल को भी ACB ने गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान महेश जोशी की भूमिका को लेकर उनसे पूछताछ की गई थी। अब ACB ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए पूर्व मंत्री तक पहुंच बनाई है।