Author: bharati

  • ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत

    ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत


    नई दिल्ली। एक साल पहले शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर आज भी देश के साहस, जवाबी कार्रवाई और मजबूत इरादों की याद दिलाता है। इस ऑपरेशन ने जहां दुश्मन को कड़ा संदेश दिया, वहीं सीमा पर बसे लोगों के जीवन को गहरे जख्म भी दिए। अब एक साल बाद तस्वीर बदलती जरूर दिख रही है घाव अभी भरे नहीं हैं, लेकिन उम्मीद की नई सुबह जरूर दिखाई दे रही है।

    एलओसी से सटे उड़ी सेक्टर के गांवों में जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। चुरुंडा, सिलिकोट, सलामाबाद, गिंगल और लगामा जैसे गांव, जो कभी गोलाबारी से थम गए थे, आज फिर खेतों की हरियाली और बच्चों की स्कूल वापसी से जिंदा नजर आने लगे हैं। छोटे कारोबार फिर शुरू हो चुके हैं, लेकिन हर चेहरे पर सतर्कता अब भी साफ झलकती है।

    बीते संघर्ष के निशान अभी मिटे नहीं हैं। कई गांवों में घरों की दीवारों पर गोलियों और मोर्टार के निशान आज भी उस भयावह दौर की कहानी कहते हैं। चुरुंडा और सिलिकोट में दर्जनों घर क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि कई परिवारों ने अपने अपनों को खोया। लोगों की आंखों में आज भी वो खौफ जिंदा है, जब हर पल जान बचाने की जद्दोजहद थी।

    स्थानीय लोग बताते हैं कि हालात अब शांत जरूर हैं, लेकिन यह शांति स्थायी नहीं बल्कि उम्मीद और डर के बीच सांस ले रही है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग आज भी सुरक्षा से जुड़ी है—कई गांवों में अब तक पर्याप्त बंकर नहीं हैं, जबकि सीमावर्ती इलाकों में खतरा कब बढ़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

    पुंछ और आसपास के इलाकों में भी हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। गोलाबारी में तबाह हुए सैकड़ों घर अब फिर से खड़े हो गए हैं। सरकार की मदद और लोगों की मेहनत से दीवारें तो दोबारा बन गईं, लेकिन अपनों को खोने का दर्द आज भी उतना ही गहरा है। कई परिवार ऐसे हैं, जो उस दर्दनाक घटना के बाद आज तक अपने घर लौट नहीं पाए।

    सीमावर्ती इलाकों में अब सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि बंकरों की संख्या बढ़ाई जाए, आधुनिक तकनीक से सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

    हालांकि, इस पूरे दौर में भारतीय सेना की भूमिका को लोग सबसे बड़ा सहारा मानते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सेना की चौकसी ही उनका आत्मविश्वास बनाए रखती है। खेतों में काम करते किसान और आंगन में खेलते बच्चे इस बात के गवाह हैं कि जिंदगी आगे बढ़ रही है—डर के साथ, लेकिन हौसले के दम पर।

    एक साल बाद तस्वीर साफ है ऑपरेशन सिंदूर ने दुश्मन को करारा जवाब दिया और सीमा पर बड़ी घटनाओं पर रोक लगी। पाकिस्तान की ओर से बड़े हमलों में कमी आई है, जिससे लोगों में भरोसा बढ़ा है।

    फिर भी, सीमावर्ती गांवों की असली कहानी यही है जख्म अभी भी ताजा हैं, यादें अब भी दर्द देती हैं, लेकिन इन सबके बीच उम्मीद जिंदा है। लोग कहते हैं “डटे थे, डटे हैं और डटे रहेंगे।” यही जज्बा इन इलाकों को आगे बढ़ा रहा है और यही विश्वास है कि आने वाले समय में यह शांति स्थायी रूप लेगी।

  • आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

    आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

    नई दिल्ली।
    भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक नया वैश्विक आकलन सामने आया है, जिसमें देश को उभरते बाजारों में सबसे मजबूत स्थिति में रखा गया है। यह आकलन इस आधार पर किया गया है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक आर्थिक झटकों के बावजूद अपनी स्थिरता और विकास क्षमता को बनाए रखा है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे तीन प्रमुख आधार हैं। इनमें विशाल विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर और संतुलित आर्थिक नीतियां तथा मजबूत घरेलू पूंजी बाजार शामिल हैं। ये तीनों तत्व मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार कई चुनौतियों से गुजरती रही है। महामारी का प्रभाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी और बैंकिंग क्षेत्र में आए संकट जैसी परिस्थितियों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इन कठिन हालातों के बीच भारत ने अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया है।

    इस मूल्यांकन में यह भी सामने आया है कि भारत ने फंडिंग लागत में अचानक वृद्धि या अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक पहुंच में किसी बड़ी बाधा का सामना नहीं किया, जो कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई।

    देश की मौद्रिक नीति को भी स्पष्ट और स्थिर बताया गया है, जिससे महंगाई की उम्मीदें नियंत्रित रहती हैं और निवेशकों का भरोसा बना रहता है। साथ ही जरूरत के अनुसार मुद्रा विनिमय दर में लचीलापन बनाए रखना भी भारत की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू माना गया है।

    आकलन में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहेगा। इसका कारण यह है कि देश के पास पहले से मौजूद आर्थिक सुरक्षा ढांचा किसी भी बाहरी झटके को संभालने में सक्षम है।

    भारत की तुलना कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से की गई, जहां यह पाया गया कि विभिन्न देशों ने महामारी के बाद आर्थिक दबावों को अलग-अलग स्तर पर झेला है, लेकिन भारत ने अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता दिखाई है।

  • वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

    वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

    नई दिल्ली।
    वैश्विक वित्तीय बाजार में बुधवार को एक अहम बदलाव देखने को मिला, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की गतिविधियों में भी तेजी आ गई है। शुरुआती कारोबार से ही दोनों धातुएं मजबूत रुख के साथ आगे बढ़ती नजर आईं और दिन चढ़ने के साथ इनमें लगातार तेजी बनी रही।

    बाजार में सोने की कीमतों ने मजबूत शुरुआत की और कुछ ही समय में इसमें उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने अपने पिछले स्तर को पार करते हुए नया उच्च स्तर भी छुआ। कीमतों में यह बढ़त निवेशकों की बढ़ती खरीदारी और वैश्विक संकेतों में बदलाव का परिणाम मानी जा रही है।

    इसी तरह चांदी के बाजार में भी तेजी का रुख देखा गया। चांदी ने भी शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई और कुछ ही समय में इसमें तेज उछाल दर्ज हुआ। कारोबार के दौरान चांदी ने अपने पिछले रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर मजबूत स्थिति बनाई, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोना और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली, जिससे घरेलू बाजार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता और मुद्रा बाजार में बदलाव के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा लाभ कीमती धातुओं को मिल रहा है।

    इस पूरी स्थिति के पीछे मुख्य कारण डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट को माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने पर आमतौर पर कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी जैसी धातुओं की मांग बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि निवेशक डॉलर से हटकर उन संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं, जो आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित मानी जाती हैं।

    घरेलू बाजार में भी इसका असर साफ तौर पर देखा गया है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन कुल मिलाकर रुझान मजबूती की ओर ही बना रहा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक डॉलर इंडेक्स पर दबाव बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी में मजबूती का माहौल बना रह सकता है। हालांकि बाजार की प्रकृति को देखते हुए इसमें अचानक बदलाव की संभावना भी बनी रहती है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार का रुख यह संकेत दे रहा है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर आने वाले दिनों में भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, और सोना-चांदी में तेजी या मंदी पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर रहेगी।

  • MP Weather Alert: डबल सिस्टम का असर, 28 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; कहीं तूफान तो कहीं झुलसाती गर्मी

    MP Weather Alert: डबल सिस्टम का असर, 28 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट; कहीं तूफान तो कहीं झुलसाती गर्मी



    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और इस बार वजह बने हैं एक साथ एक्टिव हुए दो मजबूत वेदर सिस्टम। इनके असर से प्रदेश के बड़े हिस्से में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार करीब 28 जिलों में तेज हवाओं, बारिश और अचानक बदलते मौसम की संभावना है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

    ग्वालियर-चंबल, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के जिलों में हालात ज्यादा गंभीर रह सकते हैं। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और बारिश होने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने खासतौर पर शाम और रात के समय सतर्क रहने को कहा है, क्योंकि इस दौरान सिस्टम ज्यादा सक्रिय हो सकता है।

    दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश में मौसम का डबल रूप देखने को मिल रहा है। एक तरफ कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ भोपाल, इंदौर, उज्जैन, विदिशा, सीहोर, धार, खंडवा, खरगोन और आसपास के इलाकों में दिन के समय तेज गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है। हालांकि शाम होते-होते यहां भी मौसम बदल रहा है और तेज हवाओं के साथ बादल छाने लगते हैं।

    बीते कुछ दिनों से प्रदेश में लगातार मौसम का उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कई जिलों में आंधी-बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि कुछ इलाकों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। खरगोन में पारा 42 डिग्री तक दर्ज किया गया, जबकि खंडवा और नरसिंहपुर में भी तापमान 41 डिग्री से ऊपर रहा। वहीं कुछ जगहों पर तापमान में गिरावट भी देखने को मिली है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बदलाव दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक ट्रफ लाइन के सक्रिय होने के कारण हो रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में मौसम अस्थिर बना हुआ है और अगले कुछ दिनों तक इसी तरह के हालात बने रहने की संभावना है। इतना ही नहीं, 10 मई के आसपास एक और नया सिस्टम एक्टिव हो सकता है, जिससे आंधी-बारिश का दौर और तेज होने के संकेत हैं।

    कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में फिलहाल मौसम पूरी तरह से अनिश्चित बना हुआ है—कहीं तेज आंधी, कहीं बारिश और कहीं भीषण गर्मी एक साथ देखने को मिल रही है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने, खुले स्थानों से दूर रहने और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

  • 'डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा': धुरंधर-2 के इस वायरल संवाद के पीछे का सच आया सामने, अभिनेता ने साझा किए निर्देशक के अतरंगी विकल्प।

    'डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा': धुरंधर-2 के इस वायरल संवाद के पीछे का सच आया सामने, अभिनेता ने साझा किए निर्देशक के अतरंगी विकल्प।

    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में ‘धुरंधर’ फ्रैंचाइजी एक ऐसी मिसाल बन चुकी है, जिसने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के साथ-साथ लोकप्रियता के भी सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। रणवीर सिंह अभिनीत ‘धुरंधर-2: द रिवेंज’ अब विश्व स्तर पर 1800 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच गई है। इस फिल्म की अपार सफलता में जहाँ मुख्य कलाकारों के अभिनय की सराहना हो रही है, वहीं ‘आलम भाई’ जैसे छोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली किरदारों ने भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह पक्की कर ली है। आलम भाई का किरदार निभाने वाले अभिनेता गौरव गेरा ने हाल ही में फिल्म से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने प्रशंसकों को हैरान और लोटपोट कर दिया है।

    गौरव गेरा ने बताया कि फिल्म में उनके किरदार का एक संवाद ‘डार्लिंग-डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा’ सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हुआ है। यह संवाद फिल्म के उस दृश्य का हिस्सा है जहाँ रणवीर सिंह का किरदार (हमजा) अपनी मायूसी के बीच आलम भाई की जूस की दुकान पर बैठता है। गौरव ने खुलासा किया कि यह मशहूर संवाद दरअसल निर्देशक आदित्य धर की रचनात्मक उपज थी। उन्होंने बताया कि शूटिंग से पहले निर्देशक ने उन्हें कई अतरंगी और मजेदार तुकबंदियां विकल्पों के तौर पर भेजी थीं, ताकि दृश्य के मूड के हिसाब से सबसे सटीक जुमला चुना जा सके। गौरव ने सोशल मीडिया पर उन विकल्पों की सूची साझा की है, जिन्हें पढ़कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस फिल्म के हर सीन पर कितनी बारीकी और रचनात्मकता के साथ काम किया गया है।

    निर्देशक आदित्य धर द्वारा दिए गए विकल्पों में कुछ बेहद अजीबोगरीब और मजेदार जुमले शामिल थे। इनमें ‘महफिल में घुस गया बहन का घोड़ा, पीलो पीलो आलम दूध सोडा’ और ‘अंडे से निकला चूजा खा लो खा लो क्रीम खरबूजा’ जैसे विकल्प थे। यही नहीं, इश्क में नाकामी पर ‘पिस्टल अनानास’ पिलाने और खूबसूरती के लिए ‘आंवला का मामला’ समझाने जैसी तुकबंदियां भी गौरव को सीखने के लिए दी गई थीं। गौरव ने बताया कि ‘लोहे पर हथौड़ा’ और ‘आलम दूध सोडा’ जैसे विकल्पों के बावजूद अंततः सेट पर ‘डार्लिंग-डार्लिंग’ वाले संवाद को ही फाइनल किया गया, क्योंकि इसमें एक अलग तरह का आकर्षण और मनोरंजन था जो दर्शकों को तुरंत पसंद आया।

    बता दें कि फिल्म के इस दूसरे भाग में आलम भाई का किरदार भावनात्मक मोड़ पर शहीद हो जाता है, जिससे कहानी में एक गहरा प्रभाव पड़ता है। पहले भाग में वह हमजा के लिए ल्यारी के मुश्किल माहौल में इकलौता सहारा था और उसे फिल्म के मुख्य विलेन रहमान डकैत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां देता था। गौरव गेरा के इस ताजा खुलासे के बाद फिल्म प्रेमी अब उन अन्य विकल्पों पर भी मजेदार चर्चा कर रहे हैं और यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या अन्य अतरंगी डायलॉग्स भी इतने ही प्रभावी साबित होते। फिलहाल, फिल्म की टीम अपनी इस ऐतिहासिक वैश्विक जीत का आनंद ले रही है और ‘धुरंधर-2’ की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है।

  • भारत-वियतनाम रिश्तों को नई रफ्तार: पीएम मोदी-तो लाम की बैठक में 13 बड़े समझौते, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत

    भारत-वियतनाम रिश्तों को नई रफ्तार: पीएम मोदी-तो लाम की बैठक में 13 बड़े समझौते, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत



    नई दिल्ली । नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में बुधवार को भारत और वियतनाम के रिश्तों ने एक नई ऊंचाई छू ली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई अहम द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों देशों ने 13 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत-वियतनाम संबंध अब “आधुनिक व्यापक रणनीतिक साझेदारी” के नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले साल भारत से भेजे गए बौद्ध अवशेषों के दर्शन वियतनाम में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों ने किए। उन्होंने चंपा सभ्यता की पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की घोषणा करते हुए कहा कि यह साझेदारी सिर्फ विकास नहीं, बल्कि विरासत को भी सहेजने का प्रयास है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि तकनीक, पर्यटन, व्यापार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं और अब इन्हें और विस्तार देने का समय है।

    इस दौरान हुए 13 समझौते कई अहम क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिनमें डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा और तकनीक शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक और वियतनाम के स्टेट बैंक के बीच डिजिटल पेमेंट सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र में दवा नियमन, और आईटी सेक्टर में साझेदारी जैसे समझौते भविष्य की आर्थिक मजबूती की दिशा तय करते हैं।

    वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम का यह भारत का पहला राजकीय दौरा है, जिसकी शुरुआत उन्होंने बिहार के बोधगया में महाबोधि मंदिर में पूजा के साथ की। इसके बाद दिल्ली पहुंचकर उनका औपचारिक स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने किया।

    बैठक से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति लाम से मुलाकात कर रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि भारत और वियतनाम अपनी रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे कर रहे हैं।

    कुल मिलाकर, हैदराबाद हाउस में हुई यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की मजबूत साझेदारी का रोडमैप साबित हुई है, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देगी।

  • सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?

    सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?



    नई दिल्ली। 6 मई को सर्राफा बाजार में फिर तेज उछाल देखने को मिला और सोना-चांदी के दाम नई ऊंचाई की ओर बढ़ गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹3000 की जोरदार बढ़त के साथ ₹1.51 लाख तक पहुंच गया। इससे पहले यह ₹1.48 लाख पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी ने भी बड़ी छलांग लगाते हुए ₹6000 की तेजी के साथ ₹2.46 लाख प्रति किलो का स्तर छू लिया, जो निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    अगर पूरे साल के ट्रेंड पर नजर डालें तो 2026 में सोना अब तक ₹18 हजार महंगा हो चुका है। साल की शुरुआत में 31 दिसंबर 2025 को जहां सोना ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, वहीं अब यह ₹1.51 लाख तक पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी ने भी निवेशकों को चौंकाते हुए ₹16 हजार की बढ़त दर्ज की है। साल की शुरुआत में ₹2.30 लाख प्रति किलो रही चांदी अब ₹2.46 लाख के स्तर पर कारोबार कर रही है। हालांकि, इससे पहले जनवरी में सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख का ऑलटाइम हाई भी छू चुकी है, जो बाजार की जबरदस्त अस्थिरता को दर्शाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक सोने-चांदी में यह तेजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग की वजह से आ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी जितनी तेज होती है, जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।

    अगर आप इस समय सोना खरीदने की सोच रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद अहम है। सबसे पहले, हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें, जिससे उसकी शुद्धता की गारंटी मिलती है। इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने की कीमत को अलग-अलग स्रोतों से जरूर जांच लें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के हिसाब से कीमतें अलग होती हैं।

    वहीं चांदी खरीदते समय भी सावधानी जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, स्मेल टेस्ट और क्लॉथ टेस्ट जैसे आसान तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती और उस पर बर्फ जल्दी पिघलती है।

    कुल मिलाकर, सोना-चांदी की कीमतों में आई यह तेजी जहां निवेशकों के लिए अवसर लेकर आई है, वहीं आम खरीदारों के लिए चिंता भी बढ़ा रही है। ऐसे में बाजार की चाल समझकर ही निवेश या खरीदारी करना समझदारी होगी।

  • शिक्षक भर्ती संकट गहराया: हजारों चयनित उम्मीदवार सड़क पर, सरकार को आंदोलन की चेतावनी

    शिक्षक भर्ती संकट गहराया: हजारों चयनित उम्मीदवार सड़क पर, सरकार को आंदोलन की चेतावनी

    मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हो रही लगातार देरी अब गंभीर विवाद का रूप ले चुकी है। चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों ने राजधानी भोपाल में पहुंचकर लोक शिक्षण संचालनालय के सामने प्रदर्शन किया और अपनी नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी के खिलाफ आवाज उठाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन सूची जारी हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे उनका भविष्य अनिश्चितता में फंसा हुआ है।

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने बताया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और कई चरण पूरे होने के बाद भी अंतिम नियुक्ति तक मामला नहीं पहुंच पाया है। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार चयन सूची जारी होने के बाद निर्धारित समय में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि अब तक न तो पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी की गई है और न ही चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। इस वजह से पूरी भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है और चयनित उम्मीदवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि वे लगातार संबंधित विभागों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

    प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि नियुक्ति में हो रही देरी का असर उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़ रहा है। कई उम्मीदवार वर्षों से इस नौकरी की तैयारी कर रहे थे और चयन के बाद भी नियुक्ति न मिलने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है। कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और स्थिर रोजगार का इंतजार अब लंबा खिंचता जा रहा है।

    स्थिति और गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बताई जा रही है। कई विद्यालय ऐसे हैं जहां पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब स्कूलों में पहले से ही पद खाली हैं, तो नियुक्ति प्रक्रिया में देरी क्यों की जा रही है।

    प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि अब और इंतजार संभव नहीं है और वे अपने अधिकार के लिए लगातार संघर्ष करते रहेंगे। कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि वे कई बार प्रशासनिक स्तर पर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है।

    कुल मिलाकर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी ने हजारों चयनित उम्मीदवारों को अनिश्चितता में डाल दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित विभाग कब इस मामले में ठोस निर्णय लेता है और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर चयनित अभ्यर्थियों को राहत देता है।

  • 66 दिन पहले हुई थी शादी, अब तिरंगे में लौटा पति: जालौन में शहीद सिपाही के शव से लिपटकर रोती रही पत्नी, चारों जवानों को दी गई अंतिम सलामी

    66 दिन पहले हुई थी शादी, अब तिरंगे में लौटा पति: जालौन में शहीद सिपाही के शव से लिपटकर रोती रही पत्नी, चारों जवानों को दी गई अंतिम सलामी

    नई दिल्ली। हरियाणा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने जालौन पुलिस महकमे को गहरे सदमे में डाल दिया। ड्यूटी से लौट रहे चार पुलिसकर्मियों की मौत के बाद जब उनके पार्थिव शरीर जालौन पहुंचे, तो पूरा पुलिस लाइन शोक और सन्नाटे में डूब गया। बुधवार सुबह जैसे ही ताबूत पहुंचे, हर आंख नम हो गई। गार्ड ऑफ ऑनर के बीच जब अंतिम सलामी दी जा रही थी, तभी सबसे भावुक दृश्य सामने आया। सिपाही प्रदीप कुमार की पत्नी मयूरी वर्मा अपने पति के शव से लिपटकर बिलख-बिलख कर रो पड़ीं।

    मयूरी को महिला पुलिसकर्मियों ने संभालने की कोशिश की, लेकिन उनका दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा था। रोते-रोते वह बेहोश हो गईं। महज 66 दिन पहले ही दोनों ने सात फेरे लिए थे, और अब वही रिश्ता अचानक इस तरह टूट गया कि हर देखने वाले की आंखें भर आईं। वहां मौजूद हर शख्स इस मंजर को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रहा था।

    चारों शहीद पुलिसकर्मियों दरोगा मोहित यादव, दरोगा सत्यभान, कॉन्स्टेबल अशोक कुमार और सिपाही प्रदीप कुमार को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पुलिस लाइन में डीजी आलोक सिंह, आईजी आकाश कुलहरी और डीएम राजेश पांडेय समेत कई अधिकारियों ने कंधा देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद स्मारक पर गूंजती सलामी की आवाजें हर दिल को झकझोर रही थीं।

    बताया जा रहा है कि ये सभी पुलिसकर्मी हरियाणा में एक केस में दबिश देने गए थे। मंगलवार सुबह जब वे स्कॉर्पियो से लौट रहे थे, तभी कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे पर ओवरटेक के दौरान वाहन अनियंत्रित हो गया और सामने चल रही गाड़ी से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही चारों पुलिसकर्मियों और एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई।

    श्रद्धांजलि के बाद सभी पार्थिव शरीर उनके गृह जिलों के लिए रवाना कर दिए गए—कासगंज, कन्नौज, बांदा और रायबरेली। हर गांव और हर घर में मातम पसरा हुआ है, जहां इन जवानों का इंतजार अब कभी पूरा नहीं होगा।

    इस दुखद घटना के बीच राज्य सरकार ने परिजनों के लिए बड़ी घोषणा की है। डीजी आलोक सिंह ने प्रत्येक शहीद के परिवार को 1 करोड़ 90 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। यह मदद भले ही कुछ सहारा दे, लेकिन जो खालीपन इन परिवारों में आया है, उसे कोई भर नहीं सकता।

    यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि ड्यूटी पर निकले जवान हर दिन खतरे के साए में जीते हैं। उनके बलिदान के पीछे सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि टूटते हुए कई परिवारों की कहानी छिपी होती है।

  • PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार

    PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार



    नई दिल्ली। यूपी की चर्चित PCS अफसर ज्योति मौर्य और उनके सफाईकर्मी पति आलोक मौर्य का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ पारिवारिक नहीं बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है। प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात के बाद आलोक मौर्य ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे जल्द ही राजनीति में कदम रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि वे आगे आएं और समाज की सेवा करें, खासकर युवाओं के मुद्दों को लेकर।

    5 मई को जब डिप्टी सीएम का हेलिकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरा, तो आलोक मौर्य अपने समर्थकों के साथ स्वागत के लिए पहले से मौजूद थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करते हैं और वे भी उसी राह पर आगे बढ़ने की सोच रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला पार्टी और जनता की इच्छा पर निर्भर करेगा।

    इस बीच, ज्योति और आलोक के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मामला फिलहाल मीडिएशन सेंटर में है, जहां सुलह की कोशिशें जारी हैं। आलोक मौर्य का कहना है कि वे परिवार को टूटने से बचाना चाहते हैं और उम्मीद है कि जल्द कोई सकारात्मक नतीजा सामने आएगा। लेकिन दूसरी तरफ PCS अफसर ज्योति मौर्य ने साफ कर दिया है कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर अब कुछ नहीं कहना चाहतीं और पहले ही अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी हैं।

    गाजियाबाद में एडीएम प्रशासन के पद पर तैनात ज्योति मौर्य पहले भी कह चुकी हैं कि तलाक की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अब यह रिश्ता बच पाना मुश्किल है। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ चुका है कि मामला जिला कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जहां एक ओर आलोक ने गुजारा भत्ता की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है, वहीं ज्योति ने तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    आलोक मौर्य ने इस पूरे विवाद को एक बड़े सामाजिक मुद्दे से भी जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने पुरुषों के अधिकारों की बात करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ‘पुरुष आयोग’ बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुरुषों को अपनी बात रखने का मंच नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से कई लोग मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या तक कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इस विवाद ने पहले भी देशभर में बहस छेड़ दी थी, जब आलोक ने ज्योति पर अफेयर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में वे इन आरोपों को साबित नहीं कर पाए और वापस लेना पड़ा। दूसरी ओर, ज्योति मौर्य ने आलोक के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है, जो फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है।

    एक साधारण परिवार से निकलकर PCS अफसर बनने तक का ज्योति मौर्य का सफर जितना प्रेरणादायक रहा, उतना ही उनका निजी जीवन विवादों में घिर गया। अब इस पूरे मामले में राजनीति की एंट्री ने इसे और ज्यादा चर्चित बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि आलोक मौर्य सच में राजनीति में कदम रखते हैं या नहीं, और कोर्ट में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल विवाद किस दिशा में जाता है।