Author: bharati

  • शादी से ठीक एक दिन पहले प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या, खुशियों वाले घर में मची चीख-पुकार।

    शादी से ठीक एक दिन पहले प्रेमी जोड़े ने की आत्महत्या, खुशियों वाले घर में मची चीख-पुकार।

    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के थाना परौर क्षेत्र से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ एक प्रेमी युगल ने शादी की रस्मों के बीच मौत को गले लगा लिया। गांव कुबेरपुर में हुई इस घटना ने न केवल परिजनों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। 19 वर्षीय सर्वेंद्र और 18 वर्षीय नन्ही के शव बुधवार सुबह गांव से कुछ दूरी पर स्थित एक खेत में आम के पेड़ से लटके हुए पाए गए। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने यह आत्मघाती रास्ता चुना।

    इस घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि युवती की शादी तय हो चुकी थी और 7 मई को बदायूं जिले के थाना अलापुर क्षेत्र से बारात आने वाली थी। घर में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं और मंगल गीत गाए जा रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 6 मई की सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों की ओर निकले, तब उन्होंने पेड़ से लटके हुए दो शव देखे। यह खौफनाक मंजर देखते ही गांव में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचित किया गया। युवती अपने छह भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थी और उसकी मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

    पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, क्योंकि दोनों के बीच प्रेम संबंधों की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस हर उस पहलू की बारीकी से जांच कर रही है जिसने इन युवाओं को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया। इस घटना ने एक बार फिर सामाजिक ढाँचे और युवाओं के मानसिक दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत के सटीक कारणों का स्पष्ट रूप से पता चल सके।

  • राजनीतिक बदलाव का असर: केंद्र की योजनाएं अब तेजी से लागू होने की संभावना, विकास कार्यों में आएगी रफ्तार

    राजनीतिक बदलाव का असर: केंद्र की योजनाएं अब तेजी से लागू होने की संभावना, विकास कार्यों में आएगी रफ्तार

    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए राजनीतिक परिवर्तन के बाद राज्य के विकास मॉडल में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से जिन केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में रुकावट देखी जा रही थी, अब उनके तेजी से लागू होने की संभावना बन रही है। इस बदलाव को राज्य में विकास की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां प्रशासनिक सहयोग बढ़ने से योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचने की उम्मीद है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं राज्य में पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थीं या फिर उनकी गति काफी धीमी रही थी। इनमें स्वास्थ्य, आवास, जल आपूर्ति, रोजगार और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं प्रमुख थीं। अब राजनीतिक स्थिति बदलने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जाएगा और लाभार्थियों तक उनका सीधा फायदा पहुंचेगा।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में लागू होने वाली योजनाओं से गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ा लाभ मिल सकता है। बीमा और इलाज से जुड़ी सुविधाएं अगर सही तरीके से लागू होती हैं तो लाखों लोगों को आर्थिक राहत मिल सकती है। इसी तरह आवास योजनाओं के विस्तार से उन परिवारों को घर मिलने की संभावना बढ़ेगी, जो अब तक इस सुविधा से वंचित रहे हैं।

    जल आपूर्ति से जुड़ी योजनाएं भी अब तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का लक्ष्य लंबे समय से चुनौती बना हुआ था, लेकिन अब इसके क्रियान्वयन में सुधार की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या को देखते हुए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    रोजगार और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं पर भी अब अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती हैं। इसी तरह महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजनाएं उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। छात्र-छात्राओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं के साथ यदि नई योजनाएं जुड़ती हैं तो शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बेहतर होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक परिवर्तन के बाद जब प्रशासनिक सहयोग बढ़ता है, तो योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आना स्वाभाविक है। इससे न केवल विकास कार्यों में गति आती है, बल्कि जनता को भी सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलने लगता है।

    कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में हुए इस बदलाव ने विकास योजनाओं के लिए नई उम्मीदें पैदा की हैं। यदि सभी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं तो राज्य में सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

  • होर्मुज में टेंशन हाई: फ्रांसीसी जहाज पर हमला, ट्रम्प ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोका; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

    होर्मुज में टेंशन हाई: फ्रांसीसी जहाज पर हमला, ट्रम्प ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोका; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में एक फ्रांसीसी कार्गो जहाज पर हमले ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। CMA CGM ने पुष्टि की है कि उसके ‘सैन एंटोनियो’ जहाज को पार करते समय मिसाइल या ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसमें कई क्रू मेंबर घायल हो गए और जहाज को नुकसान पहुंचा।

    दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक 
    कंपनी के अनुसार, घायल कर्मचारियों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर इलाज शुरू कर दिया गया है। इस घटना ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह इलाका दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है।
    ईरान ने इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे अपनी रणनीतिक बढ़त बताया है।
    इसी बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन को रोक दिया है। यह ऑपरेशन अमेरिका ने होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया था, लेकिन इसे अचानक बंद करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान ने इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे अपनी रणनीतिक बढ़त बताया है।

    पिछले 24 घंटों में हालात तेजी से बदले हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने नया प्रस्ताव पेश कर ईरान से हमले रोकने, माइंस हटाने और जहाजों से टोल वसूली बंद करने की मांग की है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात पर लगातार दूसरे दिन मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, हालांकि वहां के डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया।

    अमेरिका ने हालात को संभालने के लिए USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश वॉरशिप को भी होर्मुज भेजा था, लेकिन ऑपरेशन रुकने के बाद इसकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, फुजैराह हमले में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है।

    तनाव के बीच चीन ने साफ कहा है कि अब युद्ध को रोकना बेहद जरूरी है। चीन के अनुसार, इस संघर्ष का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है। साथ ही उसने ईरान के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी दोहराया है।दूसरी ओर, शहबाज शरीफ ने ट्रम्प के फैसले की तारीफ करते हुए इसे क्षेत्र में शांति की दिशा में सही कदम बताया है।

    कुल मिलाकर होर्मुज में बढ़ता तनाव अब वैश्विक संकट का रूप लेता दिख रहा है। एक तरफ सैन्य गतिविधियां तेज हो रही हैं, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक बयानबाजी भी चरम पर है। आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

  • बंगाल में सुनामी’ बयान से चर्चा में आईं अग्निमित्रा पॉल, अब मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ी अटकलें

    बंगाल में सुनामी’ बयान से चर्चा में आईं अग्निमित्रा पॉल, अब मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ी अटकलें

    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों बड़े बदलाव के संकेत दे रही है, जहां सत्ता समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। चुनावी परिणामों के बाद राज्य में नेतृत्व को लेकर जो बहस शुरू हुई है, उसमें एक नाम लगातार सबसे आगे आता दिख रहा है, और वह है अग्निमित्रा पॉल।

    राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि अग्निमित्रा पॉल को आने वाले समय में मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में देखा जा सकता है। उनकी हालिया राजनीतिक सक्रियता, संगठन में मजबूत पकड़ और लगातार बढ़ता प्रभाव उन्हें इस रेस में खास बनाता है। बताया जा रहा है कि शीर्ष स्तर पर उनके नाम पर विचार-विमर्श भी हो रहा है, जिसके बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।

    चुनावी प्रचार के दौरान अग्निमित्रा पॉल अपने आक्रामक बयानों के कारण लगातार सुर्खियों में रहीं। उन्होंने कई मंचों से राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर बड़े दावे किए थे, जिसमें उन्होंने सत्ता परिवर्तन की संभावना तक का संकेत दिया था। चुनाव परिणामों ने उनके राजनीतिक आत्मविश्वास और प्रभाव को और मजबूत कर दिया है।

    अग्निमित्रा पॉल का राजनीतिक सफर अपेक्षाकृत छोटा लेकिन तेज माना जाता है। राजनीति में आने से पहले उनका जुड़ाव फैशन डिजाइनिंग की दुनिया से रहा है, जहां उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी। फिल्मों और फैशन इंडस्ट्री से जुड़े अनुभव ने उनके व्यक्तित्व को एक अलग पहचान दी, जिसे बाद में उन्होंने राजनीति में भी इस्तेमाल किया।

    समय के साथ उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और विभिन्न जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपना राजनीतिक कद बढ़ाया। उनकी छवि एक बेबाक और स्पष्ट वक्ता नेता की बनी, जिसने उन्हें पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा में रखा।

    चुनावी राजनीति में उनकी जीत ने उन्हें और मजबूत स्थिति में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता उन्हें आने वाले समय में बड़ी भूमिका में ला सकती है।

    हालांकि उनके राजनीतिक सफर में विवाद और कानूनी मामलों की चर्चाएं भी जुड़ी रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका प्रभाव लगातार बढ़ता रहा है।

    फिलहाल राज्य की राजनीति एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है, जहां नेतृत्व को लेकर कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन अग्निमित्रा पॉल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बना हुआ है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि क्या वह वास्तव में राज्य की राजनीति में शीर्ष भूमिका तक पहुंच पाती हैं या नहीं।

  • केरल में CM फेस पर सस्पेंस: राहुल का फॉर्मूला लागू, विधायक तय करेंगे मुख्यमंत्री; सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्नीथला रेस में आगे

    केरल में CM फेस पर सस्पेंस: राहुल का फॉर्मूला लागू, विधायक तय करेंगे मुख्यमंत्री; सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्नीथला रेस में आगे


    नई दिल्ली। केरल में चुनावी जीत के बाद सत्ता की तस्वीर तो साफ हो गई है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार बनने जा रही है, लेकिन कांग्रेस के भीतर सीएम फेस को लेकर मंथन तेज हो गया है। इस बीच राहुल गांधी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार फैसला हाईकमान नहीं, बल्कि विधायक करेंगे।

    सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी चाहते हैं कि विधायक दल की बैठक में आम सहमति से नेता चुना जाए और वही मुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपने इस रुख की जानकारी पार्टी पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को भी दे दी है, जो तिरुअनंतपुरम जाकर विधायकों की राय जानेंगे।

    सीएम पद की रेस में फिलहाल तीन बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं। पहला नाम है केसी वेणुगोपाल का, जो कांग्रेस संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि उन्हें दिल्ली की राजनीति में बनाए रखना ज्यादा जरूरी है, जिससे उनकी दावेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    दूसरा बड़ा नाम वी. डी. सतीशन का है, जो युवा चेहरा हैं और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनकी लोकप्रियता और आक्रामक राजनीतिक शैली उनके पक्ष में जाती है, लेकिन हाल के कुछ विवाद उनकी राह में बाधा बन सकते हैं।

    तीसरे दावेदार रमेश चेन्नीथला हैं, जिन्हें अनुभव और वरिष्ठता का बड़ा फायदा मिल सकता है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि लंबे समय से संगठन और सरकार में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें मौका मिलना चाहिए।

    इसके अलावा शशि थरूर का नाम भी चर्चा में है, लेकिन सांसद होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि इससे उपचुनाव का जोखिम खड़ा हो सकता है।

    राजनीतिक समीकरणों के बीच यह भी साफ है कि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान के शीर्ष नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी की राय से प्रभावित होगा, लेकिन राहुल गांधी का रुख इस बार निर्णायक माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर केरल में मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने की जिम्मेदारी अब विधायकों के कंधों पर है। कांग्रेस इस बार किसी तरह का विवाद या असंतोष नहीं चाहती, इसलिए आम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि विधायक किस नेता पर भरोसा जताते हैं और किसके सिर पर केरल का ताज सजता है।

  • पहलगाम हमले पर भारत के साथ खड़ा वियतनाम, पीएम मोदी ने जताया आभार..

    पहलगाम हमले पर भारत के साथ खड़ा वियतनाम, पीएम मोदी ने जताया आभार..

    नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बातचीत के दौरान भारत और वियतनाम के बीच संबंधों को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करने और कठिन समय में भारत के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए वियतनाम का धन्यवाद किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुटता बेहद आवश्यक है और इस चुनौतीपूर्ण समय में वियतनाम का समर्थन भारत के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप को स्वीकार नहीं करता और इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है।

    बातचीत के दौरान दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और वियतनाम के रिश्ते केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि यह साझा सभ्यताओं और आध्यात्मिक परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं। बोधगया जैसे स्थानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंधों में लगातार मजबूती आई है। व्यापार, तकनीक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है और अब यह साझेदारी एक नए स्तर पर पहुंच रही है। दोनों देश अब अपने संबंधों को और व्यापक और रणनीतिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इस दौरान यह भी सहमति बनी कि भारत और वियतनाम आने वाले समय में सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगे। दोनों देशों का लक्ष्य है कि वे एक-दूसरे की विकास यात्रा में मजबूत साझेदार बनें और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करें।

    प्रधानमंत्री ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भारत और वियतनाम दोनों तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में आपसी सहयोग न केवल दोनों देशों के विकास को गति देगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सकारात्मक संदेश देगा।

    उन्होंने बुद्ध के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति दूसरों के लिए प्रकाश फैलाता है, तो उसका लाभ स्वयं को भी मिलता है। इसी भावना के साथ दोनों देश एक-दूसरे के विकास और लक्ष्यों का समर्थन करते हुए आगे बढ़ेंगे।

    इस पूरे संवाद से यह स्पष्ट संकेत मिला कि भारत और वियतनाम के बीच संबंध अब एक नए और मजबूत चरण में प्रवेश कर चुके हैं, जहां सहयोग केवल औपचारिकता नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • केपटाउन में दीपिका पादुकोण की 'किंग' साइज शूटिंग, तो मुंबई में नन्ही दुआ के साथ 'सुपर डैड' की भूमिका निभा रहे रणवीर सिंह।

    केपटाउन में दीपिका पादुकोण की 'किंग' साइज शूटिंग, तो मुंबई में नन्ही दुआ के साथ 'सुपर डैड' की भूमिका निभा रहे रणवीर सिंह।

    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के सबसे ऊर्जावान और बहुमुखी अभिनेताओं में शुमार रणवीर सिंह इन दिनों पर्दे के पीछे एक बिल्कुल अलग और सराहनीय भूमिका में नजर आ रहे हैं। ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर-2’ जैसी लगातार दो ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद रणवीर ने अपनी पेशेवर प्राथमिकताओं को पूरी तरह से बदल लिया है। जहाँ पहले वह अपनी फिल्मों के प्रचार और कार्यक्रमों की चकाचौंध में डूबे रहते थे, वहीं अब वह एक समर्पित पिता और सहायक पति की जिम्मेदारी निभाने को सर्वोच्च महत्व दे रहे हैं। वर्तमान में दीपिका पादुकोण दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में शाहरुख खान के साथ अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। ऐसी स्थिति में रणवीर सिंह ने घर पर रहकर अपनी नन्ही बेटी दुआ पादुकोण का पूरा ख्याल रखने का फैसला किया है, ताकि दीपिका बिना किसी चिंता के अपना काम पूरा कर सकें।

    फिल्म जगत के जानकारों के अनुसार, रणवीर और दीपिका का एक-दूसरे के प्रति यह सहयोग और समझदारी वाकई मिसाल पेश करने वाली है। रणवीर ने ‘धुरंधर-2’ की अपार सफलता के बाद अपनी अगली बड़ी फिल्म ‘प्रलय’ पर काम शुरू करने से पहले परिवार के साथ समय बिताने का निर्णय लिया। उनकी बेटी दुआ के जन्म के बाद से ही रणवीर सिंह ने लाइमलाइट और सार्वजनिक कार्यक्रमों से थोड़ी दूरी बना ली है। उनके करीबी लोगों का कहना है कि पिता बनने के बाद रणवीर के व्यक्तित्व में काफी ठहराव और सकारात्मक बदलाव आए हैं। वे अब अपनी शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल के बीच भी समय निकालकर अपने परिवार के पास लौटने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते। उनके लिए उनकी बेटी दुआ एक ‘लकी चार्म’ की तरह है, जिसके आने के बाद से उनकी फिल्मों ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

    अगर उनके वर्क फ्रंट की बात करें, तो रणवीर सिंह अब किसी अन्य बड़े प्रोजेक्ट के बजाय अपना पूरा ध्यान फिल्म ‘प्रलय’ की तैयारी पर लगा रहे हैं। उन्होंने रचनात्मक मतभेदों के चलते कुछ पुराने प्रोजेक्ट्स से दूरी बना ली है और अब वह एक धमाकेदार अवतार में पर्दे पर लौटने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर, दीपिका पादुकोण केपटाउन के खूबसूरत लोकेशन्स पर ‘किंग’ के जरिए एक बार फिर दर्शकों को रोमांचित करने के लिए तैयार हैं। इन दोनों सितारों का आपसी तालमेल यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वे न केवल बड़े पर्दे पर एक सफल जोड़ी हैं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी में भी एक-दूसरे के करियर और सपनों का पूरा सम्मान करते हैं। रणवीर का यह ‘सुपर डैड’ अवतार उनके प्रशंसकों के बीच काफी चर्चा और प्रशंसा बटोर रहा है।

  • तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां विजय ने चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय का यह कदम राज्य की सियासत को नए मोड़ पर ले गया है।

    इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने टीवीके प्रमुख से मुलाकात कर औपचारिक रूप से समर्थन पत्र भी सौंपा, जिसके बाद पार्टी मुख्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला।

    कांग्रेस के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में गेमचेंजर माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि विजय के समर्थन मांगने के बाद यह निर्णय लिया गया और शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल विजय को जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

    हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 5 सीट कम है। ऐसे में विजय को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

    तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाते हैं या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।

  • उज्जैन में पप्पू यादव का बड़ा हमला: “बंगाल में BJP जीती नहीं, जिताई गई”, चुनाव नतीजों पर उठाए गंभीर सवाल

    उज्जैन में पप्पू यादव का बड़ा हमला: “बंगाल में BJP जीती नहीं, जिताई गई”, चुनाव नतीजों पर उठाए गंभीर सवाल



    नई दिल्ली। उज्जैन में दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव “जीता नहीं, जिताया गया है”। उनके मुताबिक करीब 100 सीटों पर गड़बड़ी कर जीत हासिल की गई और अब भाजपा कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं।

    पप्पू यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और राष्ट्रीय जांच एजेंसी जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया गया। साथ ही उन्होंने भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि हालात ऐसे थे जैसे युद्ध जैसी स्थिति बना दी गई हो।

    वोटिंग प्रतिशत को लेकर भी उन्होंने गंभीर शंका जताई। उनका कहना था कि एक बूथ पर सीमित समय में जितने वोट पड़ सकते हैं, उससे कहीं ज्यादा प्रतिशत दर्ज किया गया, जो जांच का विषय है। उन्होंने मांग की कि दोपहर 2 बजे के बाद की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए और सभी सीटों की गिनती सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दोबारा कराई जाए। उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी हारती हैं तो वे जनादेश स्वीकार करेंगे।

    उज्जैन प्रवास के दौरान पप्पू यादव ने महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर देश में शांति और मानवता की रक्षा के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि दुनिया युद्ध की ओर बढ़ रही है और ऐसे समय में नफरत नहीं, बल्कि प्रेम और एकता की जरूरत है। उन्होंने नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच पप्पू यादव ने विपक्षी दलों को एकजुट होने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि छोटी पार्टियों को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर नहीं लड़ना चाहिए, बल्कि 2027 और 2029 के चुनावों के लिए एक मजबूत गठबंधन बनाना जरूरी है। उनका मानना है कि बिखरा हुआ विपक्ष भाजपा के सामने कमजोर पड़ता है।

    अपने बयान में उन्होंने कई क्षेत्रीय नेताओं और दलों के कमजोर पड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि अब विपक्ष को नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई जगहों पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।

    पप्पू यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर उनके आरोपों ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर सियासी बयानबाजी का दौर भी तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

  • ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

    ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

    नई दिल्ली।
    बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मजबूत रुख के साथ हुई और पूरे सत्र में सकारात्मक माहौल बना रहा। वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला, जिससे निवेशकों के बीच खरीदारी का रुझान बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई और बाजार ने मजबूती के साथ अपनी दिशा तय की।

    बाजार में सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर का देखने को मिला, जहां लगातार खरीदारी ने पूरे बाजार को सहारा दिया। बैंकिंग शेयरों में आई इस तेजी ने न केवल प्रमुख सूचकांकों को ऊपर उठाया, बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत किया। वित्तीय सेक्टर की मजबूती के कारण बाजार में स्थिरता बनी रही और तेजी का रुझान दिनभर कायम रहा।

    इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। छोटे और मध्यम कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशक केवल बड़े स्टॉक्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक बाजार में भी अवसर तलाश रहे हैं। ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर्स में भी सकारात्मक रुझान बना रहा, जिससे बाजार की गति और मजबूत हुई।

    हालांकि कुछ सेक्टर्स में हल्का दबाव भी देखने को मिला, जहां एफएमसीजी और एनर्जी सेक्टर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन इन कमजोरियों का असर पूरे बाजार पर ज्यादा नहीं पड़ा और कुल मिलाकर बाजार हरे निशान में ही बना रहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी का दबाव मजबूत बना हुआ है।

    वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में सकारात्मक माहौल रहा, जिसका लाभ भारतीय बाजार को मिला। अंतरराष्ट्रीय संकेतों में सुधार और कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के चलते निवेशकों के बीच जोखिम लेने की भावना बढ़ी, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख रहा, जिससे घरेलू निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ।

    निवेश प्रवाह के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली देखने को मिली, जबकि घरेलू निवेशकों ने बाजार में खरीदारी जारी रखी। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को संतुलन और मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से विदेशी बिकवाली के बावजूद बाजार में गिरावट नहीं आई और तेजी का रुख बना रहा।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय शेयर बाजार इस समय सकारात्मक चरण में दिखाई दे रहा है, जहां वैश्विक संकेत, मजबूत सेक्टोरल प्रदर्शन और घरेलू निवेशकों की सक्रियता मिलकर बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी, लेकिन फिलहाल रुझान मजबूत और स्थिर बना हुआ है।