Author: bharati

  • ऋतुराज गायकवाड़ का शतक, इंडिया ए ने श्रीलंका ए को दिया 278 का लक्ष्य

    ऋतुराज गायकवाड़ का शतक, इंडिया ए ने श्रीलंका ए को दिया 278 का लक्ष्य


    नई दिल्ली । श्रीलंका के दांबुला में खेले जा रहे ट्राई-नेशन ए सीरीज के पहले मुकाबले में India A ने मजबूत बल्लेबाजी करते हुए Sri Lanka A को 278 रनों का लक्ष्य दिया है। इस पारी का मुख्य आकर्षण रहे Ruturaj Gaikwad, जिन्होंने शानदार शतक लगाया।

    शुरुआत में लड़खड़ाई इंडिया ए
    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंडिया ए की शुरुआत खराब रही। सलामी बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह सिर्फ 2 रन और वैभव सूर्यवंशी 14 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। टीम 16 रन पर दो विकेट खोकर दबाव में आ गई थी। इसके बाद प्रियांश आर्य और ऋतुराज गायकवाड़ ने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन आर्य 32 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।

    गायकवाड़–तिलक की बड़ी साझेदारी
    इसके बाद कप्तान Tilak Varma और गायकवाड़ ने पारी को स्थिर किया। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 150 रनों की शानदार साझेदारी की, जिसने मैच का रुख बदल दिया। गायकवाड़ ने 114 गेंदों में 101 रन की पारी खेली, जिसमें 6 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। यह पारी खास इसलिए भी रही क्योंकि आईपीएल फॉर्म को लेकर चल रही आलोचनाओं के बीच उन्होंने बड़े मैच में शानदार वापसी की। तिलक वर्मा ने भी 97 गेंदों पर 60 रन बनाकर अहम योगदान दिया।

    मध्यक्रम का सहयोग और मजबूत स्कोर
    आयुष बडोनी ने 24 और सूर्यांश शेड्गे ने 26 रन जोड़कर स्कोर को आगे बढ़ाया। पूरी टीम ने 50 ओवर में 6 विकेट पर 277 रन बनाए।

    श्रीलंका ए की गेंदबाजी
    श्रीलंका की तरफ से मोहम्मद शिराज सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 2 विकेट लिए। उनके अलावा चमिका करुणारत्ने, गारुका संकेथ और वानुजा सहान को 1-1 सफलता मिली।

    अब गेंदबाजों पर नजर
    अब मैच का पूरा दारोमदार भारतीय गेंदबाजों पर होगा, जिसमें अंशुल कंबोज, अरशद खान, विपराज निगम और अनुकूल रॉय जैसे गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। अगर गेंदबाज लय में रहे तो इंडिया ए इस मुकाबले में जीत के साथ शुरुआत कर सकता है।

  • वैश्विक सीफूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, अगले पांच वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप

    वैश्विक सीफूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, अगले पांच वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप

    नई दिल्ली । भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और अब देश इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की तैयारी में जुट गया है। केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में समुद्री उत्पादों के निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में निर्यात क्षमता बढ़ाने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच मजबूत करने और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री उत्पाद निर्यात कार्यशाला के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात पिछले दस वर्षों में लगभग 70 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वैश्विक सीफूड व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब चार प्रतिशत है, जिसे आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार, उद्योग, निर्यातक और किसानों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना समय की मांग है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऐसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इसके साथ ही हाल के वर्षों में विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से खुले नए बाजारों का लाभ उठाने की रणनीति पर भी बल दिया गया।

    मत्स्य पालन क्षेत्र के आंकड़े भी इस विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। देश में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के लगभग 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में करीब 198 लाख टन तक पहुंच चुका है। उत्पादन में यह वृद्धि न केवल घरेलू मांग को पूरा करने में सहायक रही है बल्कि निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग 8.46 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

    समुद्री निर्यात में फ्रोजन झींगा अब भी सबसे प्रमुख उत्पाद बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिल रही है। सरकार इस क्षेत्र में ट्रेसबिलिटी, गुणवत्ता नियंत्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निवेश और सहायता उपलब्ध करा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात वृद्धि के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कोल्ड चेन नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, रोग प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों का पालन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से कार्यशाला में उद्योग प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और किसानों ने विभिन्न चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की।

    समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में परिवहन और एयर कार्गो अवसंरचना की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उच्च मूल्य वाले उत्पादों को तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और आधुनिक कार्गो सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचा, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियां भारत को वैश्विक सीफूड व्यापार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती हैं।

    आने वाले वर्षों में यदि उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार विस्तार की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत न केवल अपने निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है बल्कि वैश्विक समुद्री उत्पाद व्यापार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में भी उभर सकता है।

  • प्रकाश पादुकोण: भारतीय बैडमिंटन के पहले वैश्विक नायक, कॉमनवेल्थ में दिलाया ऐतिहासिक स्वर्ण

    प्रकाश पादुकोण: भारतीय बैडमिंटन के पहले वैश्विक नायक, कॉमनवेल्थ में दिलाया ऐतिहासिक स्वर्ण


    मध्यप्रदेश । भारत में बैडमिंटन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले सबसे बड़े नामों में Prakash Padukone का स्थान शीर्ष पर माना जाता है। उन्होंने न सिर्फ देश में इस खेल को लोकप्रिय बनाया, बल्कि भारत को पहली बार वैश्विक मंच पर स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया।

    कॉमनवेल्थ में ऐतिहासिक स्वर्ण
    1978 के कॉमनवेल्थ गेम्स (एडमोंटन, कनाडा) में प्रकाश पादुकोण ने पुरुष एकल वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास बनाया। यह भारत के लिए बैडमिंटन में पहला कॉमनवेल्थ गोल्ड था, जिसने देश को इस खेल में एक नई पहचान दी। उनकी इस उपलब्धि ने आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए रास्ता खोला और भारत को विश्व बैडमिंटन में गंभीर दावेदार के रूप में स्थापित किया।

    दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बनने तक का सफर
    पादुकोण का खेल करियर लगातार उपलब्धियों से भरा रहा। 1980 में वह दुनिया के नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी बने, जो उस दौर में किसी भी भारतीय खिलाड़ी के लिए बेहद बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने 1980 के दशक में डेनिश ओपन, स्वीडिश ओपन और कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। 1980 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीतकर वे इस प्रतिष्ठित खिताब को जीतने वाले पहले भारतीय बने।

    शुरुआती जीवन और करियर
    प्रकाश पादुकोण का जन्म 10 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उनके पिता रमेश पादुकोण ने उन्हें बैडमिंटन की ओर प्रेरित किया। उन्होंने 1962 में अपना पहला जूनियर टूर्नामेंट खेला और बाद में राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल की। 1972 में उन्होंने जूनियर और सीनियर दोनों राष्ट्रीय खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

    अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां
    उनके करियर में कई बड़े पदक शामिल रहे-
    1974 एशियन गेम्स: कांस्य
    1981 वर्ल्ड कप: स्वर्ण
    1983 वर्ल्ड चैंपियनशिप: कांस्य
    1986 एशियन गेम्स: कांस्य
    इन उपलब्धियों ने उन्हें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।

    कोच और योगदानकर्ता के रूप में भूमिका
    1991 में संन्यास के बाद उन्होंने बैडमिंटन प्रशासन और कोचिंग में भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय टीम को कोचिंग दी और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में योगदान दिया। Olympic Gold Quest की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जो भारतीय ओलंपिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।

    सम्मान और विरासत
    भारत सरकार ने उन्हें 1972 में अर्जुन पुरस्कार और 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया। आज भी उनकी बनाई हुई Prakash Padukone Badminton Academy कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। बॉलीवुड अभिनेत्री Deepika Padukone उनकी पुत्री हैं, जिन्होंने मनोरंजन जगत में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।

  • शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

    शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

    नई दिल्ली । लगातार दो सत्रों तक दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को शानदार वापसी की। कारोबार के अंत में BSE Sensex 394.50 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,918.76 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 119.10 अंक यानी 0.52 प्रतिशत मजबूत होकर 23,424.10 के स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में तेजी की अगुवाई बैंकिंग सेक्टर ने की। Nifty Bank 2.09 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। इसके अलावा डिफेंस, रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, मैन्युफैक्चरिंग, एफएमसीजी और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं आईटी और मीडिया इंडेक्स दबाव में रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60,715.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.69 प्रतिशत उछलकर 18,063.60 के स्तर पर पहुंच गया।

    सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में State Bank of India, ICICI Bank, Axis Bank, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, Asian Paints और Adani Ports and Special Economic Zone शामिल रहे।

    दूसरी ओर Infosys, Tech Mahindra, HCL Technologies, NTPC और Power Grid Corporation of India के शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी की। साथ ही ईरान-इजरायल तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और ऊंची बॉन्ड यील्ड अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, Federal Reserve System की मौद्रिक नीति और वैश्विक लिक्विडिटी संकेतों पर रहेगी।

    मंगलवार को बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही थी और शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स तथा निफ्टी में करीब आधा प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, जो पूरे सत्र के दौरान कायम रही।

  • अमेलिया केर बनीं नंबर-1 ऑलराउंडर, ICC महिला टी20 रैंकिंग में बड़ा बदलाव

    अमेलिया केर बनीं नंबर-1 ऑलराउंडर, ICC महिला टी20 रैंकिंग में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली । दुबई में मंगलवार को जारी ताजा आईसीसी महिला टी20 रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। न्यूजीलैंड की स्टार खिलाड़ी Amelia Kerr एक बार फिर दुनिया की नंबर-1 टी20 ऑलराउंडर बन गई हैं। केर ने टी20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले यह उपलब्धि हासिल की है। हालांकि टॉप पोजीशन पर उनकी बढ़त बेहद मामूली है, क्योंकि वेस्टइंडीज की कप्तान Hayley Matthews उनसे सिर्फ कुछ रेटिंग अंकों से पीछे हैं। दोनों खिलाड़ियों के बीच टॉप स्थान की रेस अब और रोमांचक हो गई है।

    हरमनप्रीत कौर की टॉप-10 में वापसी
    भारतीय महिला टीम की कप्तान Harmanpreet Kaur ने भी रैंकिंग में सुधार किया है और वह एक बार फिर टॉप-10 बल्लेबाजों में शामिल हो गई हैं। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के निर्णायक मुकाबले में नाबाद अर्धशतक लगाने के बाद उन्हें यह फायदा मिला। उनकी वापसी को भारत के लिए टी20 वर्ल्ड कप से पहले एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    बल्लेबाजी और गेंदबाजी रैंकिंग में भी बदलाव
    बल्लेबाजों की सूची में ऑस्ट्रेलिया की जॉर्जिया वोल और बेथ मूनी शीर्ष स्थानों पर बनी हुई हैं। वहीं इंग्लैंड की युवा बल्लेबाज एलिस कैप्सी ने शानदार छलांग लगाई है।

    गेंदबाजी रैंकिंग में इंग्लैंड की Linsey Smith ने नंबर-1 स्थान बनाए रखा है, जबकि पाकिस्तान की Sadia Iqbal उनसे पीछे हैं। टॉप-10 में लॉरेन बेल और चार्ली डीन को भी फायदा मिला है, जिससे इंग्लैंड का दबदबा बढ़ा है।

    ऑलराउंडर्स में कड़ा मुकाबला
    ऑलराउंडर्स की रैंकिंग में अमेलिया केर और हेली मैथ्यूज के बीच टक्कर सबसे दिलचस्प बनी हुई है। स्कॉटलैंड की कप्तान कैथरीन ब्राइस ने भी ट्राई-सीरीज में अच्छे प्रदर्शन के बाद लंबी छलांग लगाई है और टॉप-20 के करीब पहुंच गई हैं।

  • जीईएम ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर, 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार: सीईओ मिहिर कुमार

    जीईएम ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर, 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार: सीईओ मिहिर कुमार

    नई दिल्ली । सरकारी खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) आज देश की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों में से एक बन चुका है। पिछले एक दशक में इस प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद की पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए कारोबार, प्रतिस्पर्धा और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए हैं। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार के अनुसार, जिस प्लेटफॉर्म का कारोबार शुरुआती वर्ष में केवल 400 से 422 करोड़ रुपये के आसपास था, वह आज बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है।

    जीईएम की स्थापना वर्ष 2016 में सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके माध्यम से विक्रेताओं का पंजीकरण, उत्पाद सूचीकरण, निविदा प्रक्रिया, ऑर्डर प्रबंधन, आपूर्ति और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित की जाती हैं। इससे सरकारी विभागों और आपूर्तिकर्ताओं दोनों के लिए प्रक्रियाएं अधिक सरल और तेज हुई हैं।

    प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक सूक्ष्म और लघु उद्यमों की बढ़ती भागीदारी रही है। सरकारी नीति के अनुसार सार्वजनिक खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा एमएसई क्षेत्र से किया जाना चाहिए, लेकिन जीईएम पर यह हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे हजारों छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को सीधे सरकारी बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है।

    जीईएम के माध्यम से केवल कारोबार का विस्तार ही नहीं हुआ, बल्कि विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों की भागीदारी भी बढ़ी है। महिला उद्यमियों ने इस मंच का व्यापक लाभ उठाया है। शुरुआती वर्षों में जहां महिला स्वामित्व वाले उद्यमों से होने वाला कारोबार सीमित स्तर पर था, वहीं अब यह कई हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इससे महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है।

    स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को भी जीईएम से बड़ा लाभ मिला है। एक दशक पहले जहां बहुत कम स्टार्टअप इस प्लेटफॉर्म से जुड़े थे, वहीं अब हजारों स्टार्टअप्स सरकारी खरीद प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं। इनके माध्यम से होने वाला कारोबार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इससे नवाचार आधारित कंपनियों को सरकारी संस्थानों तक अपनी सेवाएं और उत्पाद पहुंचाने का अवसर प्राप्त हुआ है।

    अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े उद्यमों की भागीदारी में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार की समावेशी विकास नीति के अनुरूप जीईएम ने उन वर्गों को भी बाजार उपलब्ध कराया है जिन्हें पहले सरकारी खरीद प्रणाली में अपेक्षाकृत कम अवसर मिलते थे। इससे आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा मिला है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में भी जीईएम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के लिए बड़ी मात्रा में वैक्सीन, सिरिंज, चिकित्सा उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद इसी मंच के माध्यम से की गई। इसके अलावा रेलवे, शिक्षा, प्रशासन और अन्य सरकारी क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति में भी प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ती गई है।

    तकनीकी दृष्टि से भी जीईएम लगातार विकसित हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण, डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन नीलामी और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया ने खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। इससे मानव हस्तक्षेप में कमी आई है और खरीद प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जीईएम ने केवल सरकारी खरीद को डिजिटल नहीं बनाया, बल्कि कारोबार करने में आसानी को भी नई मजबूती प्रदान की है। ऑनलाइन पंजीकरण, पारदर्शी बोली प्रणाली और डिजिटल अनुबंध प्रबंधन ने छोटे और बड़े सभी व्यवसायों के लिए सरकारी बाजार तक पहुंच को सरल बनाया है। विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में यह मंच अब देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक खरीद प्रणाली का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रहा है।

  • श्रीलंका में ट्राई-नेशन ए सीरीज की शुरुआत, इंडिया ए ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी

    श्रीलंका में ट्राई-नेशन ए सीरीज की शुरुआत, इंडिया ए ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी


    नई दिल्ली । श्रीलंका के दांबुला अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में मंगलवार से ट्राई-नेशन ए सीरीज की शुरुआत हो गई। इस मुकाबले में पहले मैच में India A और Sri Lanka A आमने-सामने हैं। टॉस जीतकर इंडिया ए ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया।

    कप्तान तिलक वर्मा ने टॉस के बाद कहा कि पिच सूखी है और शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजी करना बेहतर विकल्प रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम 270 के आसपास का स्कोर खड़ा कर सकती है। वहीं श्रीलंका ए के कप्तान सहान अराछिगे ने कहा कि उनकी टीम की कोशिश विपक्ष को 250–260 के भीतर रोकने की होगी।

    वैभव सूर्यवंशी की शुरुआत, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सक
    आईपीएल 2026 के चर्चित युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को इस मैच में प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। ओपनिंग करने उतरे सूर्यवंशी ने आक्रामक शुरुआत की और 12 गेंदों में 14 रन बनाए, जिसमें 3 चौके शामिल रहे। लेकिन वह लंबी पारी नहीं खेल सके और मोहम्मद शिराज की गेंद पर आउट होकर पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने से इंडिया ए की शुरुआत थोड़ी लड़खड़ा गई, लेकिन मिडिल ऑर्डर से टीम को संभालने की उम्मीद है।

    पिच और मौसम का असर
    दांबुला की पिच को सूखा और हल्की दरारों वाला बताया गया है। शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजों को मदद मिलने की संभावना है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। मौसम साफ है और धूप खिली हुई है, जिससे पूरे मैच में बिना रुकावट के खेल होने की उम्मीद है।

    मजबूत मिडिल ऑर्डर पर नजर
    इंडिया ए की टीम में ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा, आयुष बडोनी जैसे बल्लेबाज शामिल हैं, जिनसे बड़ी साझेदारियों की उम्मीद है। टीम का लक्ष्य एक मजबूत स्कोर खड़ा कर श्रीलंका ए पर दबाव बनाना रहेगा। श्रीलंका ए की गेंदबाजी यूनिट में स्पिन और पेस दोनों का मिश्रण है, जिससे मिडिल ओवरों में मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

    सीरीज में तीन टीमें शामिल
    इस ट्राई-नेशन सीरीज में इंडिया ए और श्रीलंका ए के अलावा Afghanistan A भी हिस्सा ले रही है। यह सीरीज युवा खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का बड़ा मौका मानी जा रही है।

  • समीक्षा बैठक में देर से पहुंचे अधिकारी पर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन, डीडीपीओ तत्काल निलंबित

    समीक्षा बैठक में देर से पहुंचे अधिकारी पर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन, डीडीपीओ तत्काल निलंबित


    नई दिल्ली ।
    हरियाणा सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन पर जोर देने की नीति के बीच नारनौल में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। जिले के विकास कार्यों और विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) प्रमोद कुमार के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री के इस निर्णय के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

    नारनौल स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में जिले के विकास कार्यों, पंचायत योजनाओं और विभिन्न विभागों की प्रगति का आकलन किया जा रहा था। बैठक में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी दौरान कुछ विभागों के कार्यों को लेकर शिकायतें और अनियमितताओं से जुड़ी बातें भी सामने आईं, जिन पर मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की।

    जानकारी के अनुसार, समीक्षा बैठक के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि इसमें विकास परियोजनाओं की प्रगति और जनहित से जुड़े कार्यों की समीक्षा की जानी थी। इसके बावजूद जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी प्रमोद कुमार समय पर बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। इस स्थिति को मंत्री ने गंभीरता से लिया और इसे प्रशासनिक अनुशासन के उल्लंघन के रूप में देखा।

    बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकारी योजनाओं और जनहित के कार्यों के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध कार्यप्रणाली अपनाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इसी क्रम में डीडीपीओ के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई के आदेश जारी किए गए।

    प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य केवल किसी एक अधिकारी के खिलाफ कदम उठाना नहीं होता, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेही और अनुशासन का संदेश देना भी होता है। सरकारें अक्सर विकास योजनाओं की प्रभावी निगरानी और समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान देती हैं।

    बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ उपायुक्त और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान सड़क, पंचायत, स्वास्थ्य और अन्य विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने और जनता से जुड़े मामलों में तत्परता दिखाने के निर्देश दिए गए।

    स्वास्थ्य मंत्री की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती और कार्यसंस्कृति में सुधार के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में कई राज्य सरकारें अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और विकास परियोजनाओं की निगरानी को लेकर अधिक सक्रिय हुई हैं। ऐसे में नारनौल में हुई यह कार्रवाई भी उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समय की पाबंदी, कार्य निष्पादन और विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई का प्रभाव भविष्य में अधिकारियों की कार्यशैली और सरकारी बैठकों में अनुशासन के पालन पर भी दिखाई दे सकता है।

  • टीएमसी संकट के बीच शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी चर्चा में, बंगाल की सियासत में बढ़े नए कयास..

    टीएमसी संकट के बीच शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी चर्चा में, बंगाल की सियासत में बढ़े नए कयास..

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभर रहे मतभेदों और सांसदों के रुख को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी राजनीतिक गलियारों में विशेष चर्चा का विषय बन गई है। जहां विभिन्न नेताओं की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं, वहीं अनुभवी नेता और अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने अब तक किसी भी पक्ष में सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। उनकी यही खामोशी राजनीतिक विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।

    तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित असंतोष और सांसदों के अलग-अलग रुख की चर्चाओं के बीच कई नेताओं ने खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। इसके विपरीत शत्रुघ्न सिन्हा ने न तो किसी संभावित बागी समूह के समर्थन में कोई बयान दिया है और न ही सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के पक्ष में कोई विशेष प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस कारण राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शत्रुघ्न सिन्हा का लंबा राजनीतिक अनुभव उन्हें जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने से रोक सकता है। राष्ट्रीय राजनीति में कई दशक सक्रिय रहने और विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों का अनुभव रखने वाले सिन्हा अक्सर महत्वपूर्ण मुद्दों पर सोच-समझकर प्रतिक्रिया देने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम पर उनकी चुप्पी को कुछ लोग रणनीतिक प्रतीक्षा की स्थिति के रूप में देख रहे हैं।

    शत्रुघ्न सिन्हा ने वर्ष 2022 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। इसके बाद उन्हें आसनसोल लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की। बाद में आम चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका को स्थापित करने में पार्टी नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि उनके रुख को लेकर राजनीतिक हलकों में विशेष रुचि बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान वरिष्ठ नेता अक्सर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय परिस्थितियों का आकलन करना पसंद करते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा का नाम उन नेताओं में शामिल रहा है जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न दलों के नेताओं के साथ लंबे समय तक काम किया है। उनके राजनीतिक संबंध और अनुभव उन्हें परिस्थितियों को गहराई से समझने का अवसर देते हैं।

    राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि बंगाल की मौजूदा परिस्थितियों पर राष्ट्रीय दलों की भी नजर बनी हुई है। ऐसे माहौल में किसी भी वरिष्ठ नेता का सार्वजनिक रुख महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा सकता है। हालांकि अभी तक शत्रुघ्न सिन्हा की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, इसलिए उनके बारे में लगाए जा रहे अधिकांश अनुमान केवल राजनीतिक चर्चाओं तक ही सीमित हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच पार्टी के कुछ सांसद नेतृत्व के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं, जबकि कुछ अन्य नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इसी श्रेणी में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी लिया जा रहा है। फिलहाल उनकी चुप्पी को लेकर कई तरह के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति तभी स्पष्ट होगी जब वह स्वयं इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।

    बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। ऐसे समय में शत्रुघ्न सिन्हा जैसे वरिष्ठ नेता का रुख न केवल पार्टी के भीतर बल्कि व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। फिलहाल उनकी खामोशी ही सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • झाबुआ के कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिला, एक दिन पहले शादी में जाने निकली थीं

    झाबुआ के कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिला, एक दिन पहले शादी में जाने निकली थीं


    मध्यप्रदेश । झाबुआ जिले के मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर खरडू छोटी गांव के माल फालिया इलाके में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एक बिना मुंडेर के कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना का पता तब चला जब कुछ बच्चे कुएं के पास नीम के पेड़ पर खेल रहे थे।

    खेल के दौरान बच्चों की नजर अचानक कुएं के अंदर पड़ी, जहां उन्हें एक शव पानी में तैरता हुआ दिखाई दिया। घबराए बच्चों ने तुरंत गांव की ओर दौड़ लगाई और लोगों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे गांव में हड़कंप मच गया।

    ग्रामीणों ने तत्काल मामले की सूचना गांव के तड़वी (ग्राम प्रमुख) को दी, जिन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही झाबुआ कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शव को कुएं से बाहर निकाला। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की गई।

    पुलिस ने मृतका की पहचान झकेला गांव निवासी 70 वर्षीय तितली बाई (पति दूला बामनिया) के रूप में की है। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि बुजुर्ग महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं, जिससे मामले को लेकर कई पहलुओं पर जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, तितली बाई रविवार शाम करीब 5 बजे एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए खरडू बड़ी गांव जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में अनसिग नामक व्यक्ति के खेत में बने बिना मुंडेर के कुएं के पास उनका संतुलन बिगड़ गया, जिससे उनके गिरने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि कुआं बिना मुंडेर का था, जिससे हादसे की संभावना और बढ़ जाती है। वहीं, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है कि यह दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है।

    झाबुआ कोतवाली थाना प्रभारी आरसी भास्करे ने बताया कि शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।

    इस घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीण प्रशासन से ऐसे खुले कुओं पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    फिलहाल पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और सभी संभावित कारणों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।