Author: bharati
-

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’: सिगरेट फॉयल पर लिखा गया गीत जिसने नेहरू की आंखें भी नम कर दीं
नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा और देशभक्ति गीतों के इतिहास में Aye Mere Watan Ke Logon का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देश के शहीदों को दी गई एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है, जिसने करोड़ों लोगों की आंखें नम कर दीं और तत्कालीन प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru को भी भावुक कर दिया था।यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए जवानों की स्मृति में लिखा गया था। इसके गीतकार Kavi Pradeep ने इसे बेहद कम समय में तैयार किया था। कहा जाता है कि जब यह रचना उनके मन में आई, तब उनके पास कागज नहीं था। उन्होंने मुंबई के माहीम बीच पर चलते-चलते एक अनोखे तरीके से इसे लिखा किसी राहगीर से पेन मांगकर सिगरेट की डिब्बी के एल्यूमिनियम फॉयल पर इसके बोल उतारे।शुरुआत में इस गीत के लिए 100 से ज्यादा पंक्तियां लिखी गई थीं, लेकिन अंतिम संस्करण में सिर्फ चुनिंदा पंक्तियों को ही शामिल किया गया। यही वजह है कि इसके हर शब्द में गहरी भावनाएं और देशभक्ति का जज्बा महसूस होता है।इस गीत को स्वर दिया था महान गायिका Lata Mangeshkar ने, जिनकी आवाज ने इसे अमर बना दिया। इस गीत की पहली पसंद वास्तव में Asha Bhosle थीं और उन्होंने इसकी रिहर्सल भी की थी, लेकिन बाद में लता मंगेशकर ने इसे गाने की इच्छा जताई, जिसे स्वीकार कर लिया गया।जब यह गीत पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया, तो इसका प्रभाव अविस्मरणीय था। पंडित नेहरू मंच पर मौजूद थे और गीत सुनते ही उनकी आंखें नम हो गईं। वहां मौजूद हर व्यक्ति भावनाओं से भर उठा और पूरा माहौल देशभक्ति की भावना से सराबोर हो गया।आज भी यह गीत हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर गूंजता है और शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। इसकी लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि सच्ची भावनाओं से लिखा गया गीत समय की सीमाओं से परे जाकर इतिहास बन जाता है। -

AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता से जुड़ी कंपनी पर पंजाब में बड़ी कार्रवाई हुई है। उनकी कंपनी ट्राइडेंट ग्रुप की धौला स्थित फैक्ट्री पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने छापेमारी की।जानकारी के अनुसार, दोपहर में प्रदूषण विभाग की टीम नौ वाहनों के काफिले के साथ फैक्ट्री परिसर में पहुंची। टीम में लगभग 10 अधिकारी शामिल थे, जो फैक्ट्री के अंदर मौजूद रहकर प्लांट और जरूरी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं। यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई, जिससे फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रूटीन निरीक्षण है या किसी विशेष शिकायत के आधार पर की गई जांच। इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। इसे राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
उधर, राजिंदर गुप्ता के भाजपा में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। चंडीगढ़ में उनके आवास की दीवारों पर “गद्दार” तक लिखा गया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर सुरक्षा बढ़ा दी थी। राजिंदर गुप्ता पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों में गिने जाते हैं और पद्मश्री से सम्मानित भी रह चुके हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।
-

GT vs RCB: “स्कोर कम रह गया”, हार के बाद बोले रजत पाटीदार-मिडिल ऑर्डर की नाकामी बनी वजह
नई दिल्ली। Indian Premier League 2026 में अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए मुकाबले में Gujarat Titans ने Royal Challengers Bengaluru को 4 विकेट से हराकर एक और महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस हार के बाद RCB कप्तान Rajat Patidar ने साफ तौर पर माना कि उनकी टीम 20-25 रन कम बना पाई, जिसका खामियाजा उन्हें हार के रूप में भुगतना पड़ा।मैच के बाद रजत पाटीदार ने कहा कि शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बाद टीम दबाव में आ गई और मिडिल ऑर्डर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सका। उन्होंने स्वीकार किया कि पिच पर हालात सामान्य थे, लेकिन साझेदारियों की कमी ने टीम की स्थिति कमजोर कर दी।
गुजरात टाइटंस की ओर से गेंदबाजी में शानदार अनुशासन देखने को मिला। शुरुआती ओवरों में ही दबाव बनाकर उन्होंने RCB के टॉप ऑर्डर को झकझोर दिया। दूसरी ओर, RCB की बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी साफ दिखाई दी, जिससे बड़ा स्कोर खड़ा नहीं हो सका।
रजत पाटीदार ने यह भी कहा कि इस तरह के मैचों में मिडिल ओवर सबसे अहम होते हैं, लेकिन उनकी टीम उन ओवरों में रन गति को बढ़ाने में असफल रही। उन्होंने माना कि अगर 15-20 रन अतिरिक्त जुड़ जाते, तो परिणाम अलग हो सकता था।
गुजरात टाइटंस की ओर से कप्तान Shubman Gill ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और रणनीतिक रूप से पारी को संभाला। उनकी कप्तानी और बल्लेबाजों के संतुलित प्रदर्शन ने टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
RCB के लिए यह हार अंकतालिका के लिहाज से बड़ी चिंता का विषय नहीं बनी, लेकिन टीम प्रबंधन के लिए यह एक चेतावनी जरूर है कि मिडिल ऑर्डर को जल्द सुधार की जरूरत है।
रजत पाटीदार ने आगे कहा कि टीम में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन दबाव की स्थिति में सही निर्णय और साझेदारी बनाना जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले मुकाबलों में टीम वापसी करेगी और गलतियों से सीख लेगी।
कुल मिलाकर यह मुकाबला RCB के लिए एक सीख की तरह रहा, जहां छोटे अंतर ने बड़े परिणाम को बदल दिया। वहीं गुजरात टाइटंस ने एक बार फिर साबित किया कि घरेलू परिस्थितियों में वे किसी भी टीम को कड़ी टक्कर देने में सक्षम हैं।
-

लू और थकान से बचने के लिए आयुर्वेद ने सुझाया गर्मियों का सबसे बेहतर डाइट प्लान।
नई दिल्ली । भीषण गर्मी के मौसम में अक्सर हमारे खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव आता है। चूंकि बाहरी तापमान बढ़ने से शरीर के भीतर पित्त दोष का स्तर भी बढ़ने लगता है, इसलिए आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा गर्म तासीर वाली चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। इसी संदर्भ में अक्सर शहद के सेवन को लेकर एक दुविधा बनी रहती है। आमतौर पर शहद को गर्म और आर्द्र प्रवृत्ति का माना जाता है, जिससे कई लोग गर्मियों में इसके इस्तेमाल से कतराते हैं। हालांकि, आयुर्वेद का गहरा विज्ञान यह स्पष्ट करता है कि शहद का प्रभाव इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह क्या है, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि उसे किसके साथ लिया जा रहा है।आयुर्वेद में शहद को ‘योगवाही’ द्रव्य की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है एक ऐसा तत्व जो स्वयं के गुणों से अधिक उस पदार्थ के गुणों को अपना लेता है जिसके साथ इसे मिश्रित किया जाता है। यदि गर्मियों के दौरान शहद का सेवन सीधे तौर पर किया जाए, तो यह निश्चित रूप से शरीर में गर्मी और पित्त को बढ़ा सकता है। परंतु, यदि इसे बुद्धिमानी से ठंडी तासीर वाले खाद्यों के साथ मिलाया जाए, तो यह शरीर के लिए एक उत्कृष्ट शीतल पेय और ऊर्जा स्रोत बन जाता है। सुबह के समय मिट्टी के घड़े के ताजे पानी में नींबू और शहद का मिश्रण शरीर के आंतरिक तापमान को संतुलित करने और वजन घटाने में जादुई भूमिका निभाता है।
गर्मियों के पारंपरिक आहार जैसे सत्तू और दही में भी शहद का समावेश स्वास्थ्य के लिए क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। सत्तू के शरबत में चीनी के विकल्प के रूप में शहद का उपयोग न केवल शरीर को हाइड्रेटेड रखता है, बल्कि मांसपेशियों की थकान को भी तुरंत मिटाता है। इसी तरह, दोपहर के भोजन में दही के साथ शहद का मेल एक शक्तिशाली प्राकृतिक प्रोबायोटिक तैयार करता है। यह मिश्रण पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ शरीर को लू के थपेड़ों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है। आयुर्वेद के अनुसार, ये तरीके शहद की उष्णता को शीतलता में बदलने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।
शहद के औषधीय लाभों के बीच आयुर्वेद में कुछ कड़े प्रतिबंध भी लगाए गए हैं जिन्हें नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। शहद को कभी भी गर्म पानी में उबालकर या बहुत तेज तापमान वाली चीजों के साथ नहीं लेना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक ताप इसे विषैला बना सकता है। इसके अतिरिक्त, घी और शहद का समान मात्रा में सेवन ‘विरुद्ध आहार’ माना जाता है, जो वात और पित्त के संतुलन को बिगाड़कर त्वचा और पाचन संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। यदि इन बुनियादी नियमों का पालन किया जाए, तो शहद गर्मियों में भी आपकी जीवनशैली का एक अनिवार्य और गुणकारी हिस्सा बना रह सकता है।
-

पसीना और असहजता से राहत: गर्मी में कूल रहने के 7 स्मार्ट फैशन नियम..
नई दिल्ली । गर्मियों की सुबह अक्सर एक आम उलझन के साथ शुरू होती है कि आखिर आज क्या पहना जाए। कपड़ों से भरी अलमारी होने के बावजूद सही आउटफिट चुनना मुश्किल लगने लगता है। तेज धूप, उमस और पसीना दिनभर की थकान को और बढ़ा देते हैं, जिससे सही कपड़ों का चुनाव और भी जरूरी हो जाता है।लेकिन अगर कुछ सरल और व्यावहारिक फैशन नियमों को समझ लिया जाए, तो यह रोज की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। सही कपड़े न केवल शरीर को आराम देते हैं, बल्कि पूरे दिन आत्मविश्वास और ताजगी भी बनाए रखते हैं।
गर्मियों में सबसे पहला ध्यान कपड़े के फैब्रिक पर देना चाहिए। हल्के और हवा को गुजरने देने वाले कपड़े जैसे कॉटन, लिनन और खादी शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। ये पसीना जल्दी सोखते हैं और त्वचा को सांस लेने का मौका देते हैं, जिससे असहजता कम होती है। इसके विपरीत भारी और सिंथेटिक कपड़े गर्मी को बढ़ा देते हैं, जिससे शरीर जल्दी थक जाता है।
इसके बाद रंगों का चुनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम और हल्के पेस्टल शेड्स गर्मी को कम आकर्षित करते हैं, जिससे शरीर अपेक्षाकृत ठंडा महसूस करता है। वहीं गहरे रंग गर्मी को अधिक सोखते हैं, जिससे असहजता बढ़ सकती है।
गर्मियों में ढीले कपड़े पहनना एक और महत्वपूर्ण नियम है। टाइट कपड़े शरीर से चिपककर हवा के प्रवाह को रोकते हैं, जिससे पसीना और जलन बढ़ सकती है। ढीले और आरामदायक कपड़े न केवल शरीर को राहत देते हैं, बल्कि एक सहज और स्टाइलिश लुक भी देते हैं।
एक और जरूरी बात यह है कि गर्मियों में लेयरिंग से बचना चाहिए। कई परतों वाले कपड़े शरीर के तापमान को बढ़ा देते हैं, जिससे गर्मी और ज्यादा महसूस होती है। सिंगल और हल्के आउटफिट इस मौसम में सबसे बेहतर विकल्प होते हैं।
फुटवियर का सही चयन भी उतना ही जरूरी है। बंद जूते लंबे समय तक पहनने से पैरों में पसीना और बदबू की समस्या हो सकती है। ऐसे में खुले सैंडल, चप्पल या हल्के और सांस लेने वाले शूज बेहतर विकल्प साबित होते हैं।
इसके अलावा एक्सेसरीज को भी हल्का रखना चाहिए। भारी गहने या ज्यादा सजावट गर्मी में असुविधा पैदा कर सकती है। मिनिमल एक्सेसरीज न केवल आराम देती हैं बल्कि पूरे लुक को संतुलित और स्टाइलिश बनाए रखती हैं।
अंत में, कपड़ों का चुनाव हमेशा दिनचर्या और जरूरत के अनुसार होना चाहिए। अगर दिनभर बाहर रहना है तो हल्के और प्रोटेक्टिव कपड़े पहनना बेहतर होता है, जबकि ऑफिस या घर के लिए आरामदायक और स्मार्ट कैजुअल आउटफिट अधिक उपयुक्त रहते हैं।
गर्मियों में सही कपड़े चुनना कोई मुश्किल काम नहीं है। बस थोड़ी समझदारी और सही विकल्पों के साथ न केवल आराम पाया जा सकता है, बल्कि हर दिन एक स्टाइलिश और आत्मविश्वास भरा लुक भी हासिल किया जा सकता है।
-

इमरान खान ने मांगी मानवीय आधार पर रिहाई, एकांत कारावास और आंखों की गंभीर समस्या को बताई वजह
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में मानवीय आधार पर रिहाई की अपील की है। उन्होंने अपने वकील के जरिए अदालत को बताया कि उन्हें लंबे समय से एकांत कारावास में रखा गया है और उनकी आंखों में गंभीर संक्रमण की समस्या बनी हुई है।यह याचिका इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की ओर से 190 मिलियन पाउंड भ्रष्टाचार मामले में दी गई सजा के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई के दौरान पेश की गई। इस मामले में पिछले वर्ष जनवरी में जवाबदेही अदालत ने इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की कैद की सजा सुनाई थी। यह मामला नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) द्वारा दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान इमरान खान के वकील सलमान सफदर ने सजा निलंबित करने की मांग की। उन्होंने अदालत में कहा कि मामला 16 महीनों से लंबित है और अब तक 17 से अधिक सुनवाई हो चुकी हैं। वकील ने दावा किया कि इमरान खान की आंखों की स्थिति गंभीर है और उनकी दृष्टि काफी कमजोर हो गई है। उनके अनुसार, “उनकी आंखों की रोशनी लगभग 15% रह गई है और 85% तक नुकसान हो चुका है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह नुकसान स्थायी हो सकता है।
सफदर ने अदालत को बताया कि इमरान खान को एकांत कारावास में रखा गया है, जिस पर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जेल में उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं और कई बार उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा है। वकील ने यह भी आग्रह किया कि जेल अधिकारियों और संबंधित चिकित्सा रिकॉर्ड को अदालत में पेश किया जाए, ताकि उनकी स्थिति की सही जांच हो सके। साथ ही उन्होंने आईजी जेल और अन्य अधिकारियों को तलब करने की मांग भी दोहराई।
सुनवाई के दौरान इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सरफराज डोगर ने सुझाव दिया कि अपील की मुख्य सुनवाई पर ध्यान केंद्रित किया जाए ताकि मामले का शीघ्र निपटारा हो सके। हालांकि, बचाव पक्ष ने पहले सजा निलंबन पर निर्णय लेने पर जोर दिया। इसके बाद अदालत ने सुनवाई को आगे के लिए स्थगित कर दिया।
-

Vastu Tips: घर में धन-समृद्धि बढ़ाने के आसान उपाय, जानिए किन बातों का रखें ध्यान
नई दिल्ली। घर में सुख-समृद्धि और धन की स्थिरता बनाए रखने के लिए Vastu Shastra में कई सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं। मान्यता है कि यदि इन नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है।वास्तु के अनुसार सबसे पहला और महत्वपूर्ण नियम घर की साफ-सफाई को बनाए रखना है। कहा जाता है कि स्वच्छ घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। गंदगी और अव्यवस्था नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जिससे बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।मुख्य द्वार को वास्तु शास्त्र में बेहद महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसे घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य दरवाजे पर मोर पंख लगाने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और घर में शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
इसके अलावा बेडरूम से जुड़े कुछ उपाय भी बताए गए हैं। वास्तु के अनुसार कमरे में चांदी की वस्तु या हाथी की मूर्ति रखने से सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और राहु से जुड़े दोषों में कमी आती है। इससे मानसिक शांति और स्थिरता बनी रहती है।धन और समृद्धि की देवी Lakshmi को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय भी बताए जाते हैं। कहा जाता है कि शुक्रवार के दिन घर में लक्ष्मी यंत्र स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इसे मुख्य द्वार के आसपास रखने की सलाह दी जाती है ताकि घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश न कर सके।वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों का पालन पूरी श्रद्धा और नियमितता के साथ करना चाहिए। हालांकि, इसे जीवन में सकारात्मक सोच और मेहनत के साथ जोड़ना भी जरूरी है, तभी वास्तविक परिवर्तन देखने को मिलता है। mकुल मिलाकर, वास्तु शास्त्र के ये सरल उपाय घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। -

क्रिस वुड का 200वां गोल: नॉटिंघम फॉरेस्ट ने एस्टन विला पर 1-0 से बढ़त बनाई
नई दिल्ली। UEFA Europa League 2026 के सेमीफाइनल में रोमांचक मुकाबले के दौरान Nottingham Forest ने Aston Villa को 1-0 से हराकर बढ़त हासिल कर ली है। यह जीत टीम के लिए बेहद अहम रही, क्योंकि अब फाइनल की राह और भी करीब नजर आने लगी है।मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल स्टार स्ट्राइकर Chris Wood ने पेनल्टी पर दागा, जो उनके करियर का 200वां गोल भी साबित हुआ। यह उपलब्धि उनके शानदार करियर में एक और बड़ा मील का पत्थर बन गई है।
मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पहले हाफ में दोनों ओर से मौके बने, लेकिन गोलकीपरों ने बेहतरीन बचाव करते हुए स्कोरलाइन को बराबर रखा। नॉटिंघम फॉरेस्ट की ओर से मॉर्गन गिब्स-व्हाइट और इलियट एंडरसन ने आक्रामक खेल दिखाया, जबकि एस्टन विला की ओर से मॉर्गन रोजर्स और ओली वॉटकिंस ने भी खतरा पैदा किया।
दूसरे हाफ में मुकाबला और भी तेज हो गया। एस्टन विला के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने कई शानदार बचाव किए, लेकिन अंततः अंतिम मिनटों में मैच का रुख बदल गया। ओमारी हचिंसन की कोशिश के दौरान लुकास डिग्ने के हैंडबॉल के कारण नॉटिंघम फॉरेस्ट को पेनल्टी मिली।
इस मौके को क्रिस वुड ने पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ गोल में बदल दिया, जिससे टीम को निर्णायक बढ़त मिल गई।
मैच के बाद क्रिस वुड ने कहा कि यह सिर्फ पहला चरण है और असली चुनौती अब बर्मिंघम में होने वाले दूसरे लेग में होगी। उन्होंने माना कि Aston Villa अपने घरेलू मैदान पर वापसी करने की पूरी कोशिश करेगी।
वहीं टीम के कोच Vitor Pereira ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जमकर सराहना की और कहा कि टीम ने दबाव में भी शानदार खेल दिखाया है।
अब सभी की नजर दूसरे लेग पर है, जहां यह तय होगा कि कौन सी टीम फाइनल में जगह बनाएगी और यूरोपा लीग ट्रॉफी की ओर एक कदम और आगे बढ़ेगी।
-

कमर्शियल LPG महंगी: 993 रुपये की बढ़ोतरी, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत जारी
नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तेल विपणन कंपनियों की ओर से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के बाद कारोबारियों और व्यावसायिक संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। हालांकि, आम घरेलू उपभोक्ताओं को इस बार राहत दी गई है और उनके सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।राजधानी New Delhi में अब 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 3,071.5 रुपये में उपलब्ध होगा। यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में आई तेजी के कारण की गई है।
तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं, जिनकी संख्या देश में करीब 33 करोड़ है, उनके लिए एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। इसका सीधा फायदा आम परिवारों को मिलेगा, जिन पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे गैस और ईंधन बाजार पर पड़ रहा है। इससे पहले भी कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की लागत लगातार बढ़ रही है।
सरकारी तेल कंपनियों ने यह भी बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम जनता को राहत मिली है। इसके अलावा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें भी स्थिर रखी गई हैं ताकि हवाई यात्रा की लागत में अचानक बढ़ोतरी न हो।
वहीं सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए शुल्कों में भी संशोधन किया है, ताकि घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके। डीजल और एविएशन फ्यूल पर अलग-अलग दरों पर शुल्क लागू किया गया है, जबकि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य रखा गया है।
कुल मिलाकर, यह बदलाव एक तरफ व्यापारिक क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, तो दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में स्थिरता आने तक ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
