Author: bharati

  • ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका

    ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) के साथ जारी शांति वार्ता (Peace talks) के बीच डील को लेकर बड़ी धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान (Iran) के साथ या तो बड़ी और बेहतर परिणामों वाली डील होगी या फिर कोई भी डील नहीं होगी। इतना ही नहीं ट्रंप ने डील न होने की स्थिति में फिर से युद्ध शुरू करने की भी धमकी दी।

    उन्होंने कहा कि अब अगर डील नहीं होती है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा। इसके साथ ही ट्रंप ने अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की अपील की, जिसमें कुछ देश पहले से शामिल हैं। बता दें, ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में सामने आई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हो रही शांति वार्ता लगातार लंबी खिंचती जा रही है। ईरान और अमेरिका दोनों ही तरफ से अच्छे संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

    ईरान के साथ लंबी खिंचती बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि पश्चिम एशिया का युद्ध फिर से शुरू हो। इसलिए बेहतर है कि डील हो जाए। सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने शनिवार को मध्य-पूर्व के राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई अपनी बातचीतों का ब्यौरा भी साझा किया। उन्होंने बताया खाड़ी देशों के नेताओं, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगान के साथ मिलकर इस संकट को सुलझाने के लिए बातचीत की है। उम्मीद है कि यह जल्दी ही सुलझ जाएगा, लेकिन इसके साथ ही ट्रंप ने अपील की यह सभी देश अब्राहम अकॉर्ड पर भी हस्ताक्षर करें। इतना ही नहीं ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा होता है, तो ईरान भी अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर कर सकता है।


    एक-दो देशों को छोड़कर बाकी देशों को समस्या नहीं होनी चाहिए: ट्रंप

    सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने इस्लामिक देशों के अब्राहम अकॉर्ड को स्वीकार न करने के डर को भी महत्व दिया। उन्होंने कहा, “संभव है कि एक या दो देशों के बाद ऐसा न करने का कारण हो, हम उसे स्वीकार भी करेंगे। लेकिन अधिकांश देशों को इसके लिए तैयार होना होगा। इससे ईरान के साथ होने वाला समझौता और भी ज्यादा ऐतिहासिक हो जाएगा। यह समझौता संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकस्तान के लिए वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक बूम साबित हुआ है। इस संघर्ष के दौर में भी इन देशों को इसका फायदा मिला है।”


    क्या हैं अब्राहम अकॉर्ड्स?

    अब्राहम अकॉर्ड्स अमेरिका द्वारा बनाए गए समझौतों की एक लिस्ट है। इसका प्रमुख उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच के राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुए इस समझौते पर सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को ने हस्ताक्षर किए थे। सूडान ने भी इसको सहमति दी है, लेकिन अभी तक उसकी संसद ने इस पर हामी नहीं भरी है। वहीं, अमेरिका का करीबी माने जाने वाला सऊदी अरब भी अभी तक इस समझौते से दूरी बनाए हुए है। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस ने इस समझौते में शामिल होने के लिए एक शर्त रखी थी। उन्होंने कहा था कि वह इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं, बशर्ते इसमें दो-राष्ट्र समाधान को लेकर स्पष्टता हो।

    दरअसल, अरब देशों और इस्लामिक देशों की दुनिया में अब्राहम अकॉर्ड्स को फिलिस्तीन के साथ धोखे के तौर पर देखा जाता है। इसलिए ज्यादातर देश इससे कन्नी काटते हुए नजर आते हैं। इस समझौते के बाद देशों को इजरायल के साथ सामान्य संबंधों पर राजी होना पड़ता है, जिससे उनकी जनता इस पर नाराज हो सकती है। पाकिस्तान जैसे देश के लिए तो यह समझौता और भी ज्यादा परेशानी पैदा करने वाला है, क्योंकि वह तो इजरायल को देश के रूप में मान्यता ही नहीं देते हैं।

  • सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

    सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

    नई दिल्ली । बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के दौर में हृदय संबंधी बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। पहले जहां दिल की बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ जुड़ी मानी जाती थीं, वहीं अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हार्ट अटैक एक ऐसी गंभीर स्थिति है जो कई बार अचानक सामने आती है और मरीज तथा परिवार दोनों को संभलने का मौका तक नहीं देती। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर कई बार पहले ही कुछ संकेत देने लगता है, जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में यह संकेत सामान्य शारीरिक परेशानी की तरह लगते हैं, जिसके कारण लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। सबसे सामान्य और गंभीर संकेत सीने में दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना माना जाता है। कई बार यह दर्द धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है। दर्द बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, कोहनी और पीठ तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति को सामान्य दर्द समझकर टालना खतरनाक साबित हो सकता है।

    इसके अलावा अचानक सांस लेने में कठिनाई होना या बिना ज्यादा मेहनत के सांस फूलना भी दिल से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। कई लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं या शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। कुछ मामलों में मतली, उल्टी या पेट में असहजता भी देखने को मिलती है, जिसके कारण लोग इसे गैस या पाचन से जुड़ी समस्या मान लेते हैं। अचानक ठंडा पसीना आना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाना भी ऐसे संकेत हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं और बुजुर्गों में कई बार हार्ट अटैक के लक्षण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते। यही कारण है कि इन वर्गों में अधिक सतर्कता की आवश्यकता होती है। अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण लगातार कुछ मिनटों तक बने रहें या तेजी से बढ़ने लगें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी हो जाता है। देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।

    हृदय रोगों से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम कदम माना जाता है। रोजाना नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव से दूरी हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज और पौष्टिक भोजन को दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। तला-भुना और अत्यधिक नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखना फायदेमंद हो सकता है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन हृदय के लिए गंभीर जोखिम बढ़ाते हैं, इसलिए इन आदतों से बचना जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच कराना अब आवश्यकता बन चुका है। समय पर जांच और सतर्कता न केवल बीमारियों की पहचान आसान बनाती है, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की दिशा भी तय करती है।

  • नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में नौतपा की शुरुआत के साथ भीषण गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और तेज धूप लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य लोगों की तुलना में पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में लापरवाही कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा के दौरान शरीर पर हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। इसका सीधा असर शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। खासतौर पर डायबिटीज, हार्ट, किडनी, अस्थमा और मोटापे से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर इन मरीजों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    डायबिटीज के मरीजों में गर्मी का असर कई तरह से दिखाई देता है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है। कई बार डिहाइड्रेशन के कारण शुगर अचानक बढ़ या घट सकती है, जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा इंसुलिन की कार्यक्षमता पर भी अधिक तापमान असर डाल सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को समय-समय पर पानी पीने और शुगर की नियमित जांच करते रहने की सलाह दी जा रही है।

    किडनी रोगियों के लिए भी नौतपा का समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पहले से मौजूद समस्या गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना ऐसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।

    हार्ट मरीजों के लिए भी बढ़ती गर्मी चिंता का विषय है। अत्यधिक तापमान शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र पर दबाव डालता है। कई मामलों में हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन की स्थिति बन सकती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसी तरह अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों में गर्म हवा और वातावरणीय बदलाव सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकते हैं।

    डॉक्टरों की सलाह है कि नौतपा के दौरान दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के और सूती कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने, तला-भुना भोजन कम खाने और शरीर को ठंडा रखने जैसे छोटे उपाय बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही सावधानी और संतुलित दिनचर्या अपनाकर भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • किसानों के लिए राहत की खबर: उर्वरकों की कमी का संकट टला, सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े

    किसानों के लिए राहत की खबर: उर्वरकों की कमी का संकट टला, सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े

    नई दिल्ली। खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में खाद की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा समय में उर्वरकों का भंडार सामान्य जरूरत से काफी अधिक है, जिससे आने वाले महीनों में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार देश में इस वर्ष उर्वरकों की कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले मौजूदा समय में 200 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह मात्रा सामान्य मानकों से काफी ज्यादा मानी जा रही है। इससे संकेत मिलते हैं कि खेती के महत्वपूर्ण सीजन में मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई चेन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं पड़ेगा।

    अधिकारियों ने बताया कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनावों के बावजूद भारत ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति बनाए रखी है। हाल के समय में कई देशों में आपूर्ति संबंधी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन भारत ने पहले से रणनीतिक तैयारी करके संभावित संकट को काफी हद तक नियंत्रित रखा। इसी का परिणाम है कि उर्वरकों की उपलब्धता लगातार बनी हुई है।

    देश में यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य मिश्रित उर्वरकों का उत्पादन भी संतोषजनक स्तर पर रहा है। साथ ही आयात के जरिए भी आपूर्ति को मजबूत किया गया है। सरकार ने आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए बड़ी मात्रा में आवश्यक उर्वरकों का स्टॉक पहले ही सुरक्षित कर लिया है। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में आसानी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खेती के मौसम में उर्वरकों की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होती है। यदि समय पर खाद नहीं मिले तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक का होना कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    सरकार का यह भी कहना है कि उर्वरक उत्पादन में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जा रही है। इससे भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति बाधा से बचा जा सकेगा। आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की संभावना के बीच प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश में खाद संकट जैसी स्थिति बनने की आशंका बेहद कम है और किसानों को इस बार पर्याप्त आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।

  • आज शेयर बाजार में दिख सकती है उतार-चढ़ाव भरी चाल, आईटी और बैंकिंग शेयरों पर रहेगी नजर

    आज शेयर बाजार में दिख सकती है उतार-चढ़ाव भरी चाल, आईटी और बैंकिंग शेयरों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत सतर्क माहौल के साथ होने के संकेत हैं। घरेलू आर्थिक गतिविधियों, विदेशी बाजारों के रुझान और निवेशकों की रणनीति के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के कारोबार में बैंकिंग, आईटी, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने मिश्रित प्रदर्शन किया था। निवेशकों की नजर अब वैश्विक बाजारों से आने वाले संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले कमजोर और मजबूत संकेतों के मिश्रित प्रभाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में फिलहाल “स्टॉक स्पेसिफिक” गतिविधियां ज्यादा देखने को मिल रही हैं। यानी जिन कंपनियों के अच्छे नतीजे या सकारात्मक खबरें सामने आ रही हैं, उनके शेयरों में खरीदारी का रुझान बना हुआ है। वहीं कमजोर प्रदर्शन वाली कंपनियों में दबाव देखने को मिल सकता है।

    बैंकिंग सेक्टर पर आज खास नजर रहेगी। निजी और सरकारी बैंकों के शेयरों में हलचल बनी रह सकती है। इसके अलावा आईटी कंपनियों के शेयर भी निवेशकों के फोकस में रहेंगे, क्योंकि डॉलर की चाल और वैश्विक टेक बाजार का असर इस सेक्टर पर सीधे तौर पर पड़ता है।

    ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर में भी निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है। बाजार जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए और जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    विश्लेषकों के मुताबिक, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार के दौरान हल्की तेजी या मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी बनी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है, जबकि वैश्विक दबाव बढ़ने पर गिरावट भी संभव है।

    कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी की कीमतों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। वहीं कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर तेल एवं गैस कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दे सकता है।

    मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को सतर्क और संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। छोटे निवेशकों को अफवाहों के आधार पर निवेश करने से बचने और विशेषज्ञ सलाह के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।

  • एमपी में भीषण गर्मी का कहर जारी, कई जिलों में लू का रेड अलर्ट; कहीं राहत की बारिश के संकेत

    एमपी में भीषण गर्मी का कहर जारी, कई जिलों में लू का रेड अलर्ट; कहीं राहत की बारिश के संकेत


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नौतपा के दौरान गर्मी ने अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आने लगी हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, रीवा, सागर और उज्जैन संभाग के कई जिलों में लू का असर सबसे ज्यादा रहेगा। इन इलाकों में तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। गर्म हवाओं के थपेड़ों और उमस ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।

    भोपाल, इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम जैसे शहरों में भी दिनभर तेज गर्मी बनी रहेगी, हालांकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्के बादल, तेज हवाएं और बूंदाबांदी होने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय गतिविधियों के कारण कुछ इलाकों में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिल सकती है।

    भीषण गर्मी का असर बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर के समय प्रमुख बाजारों और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम भीड़ नजर आ रही है। कई जिलों में दोपहर के दौरान अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने भी गर्मी और लू को लेकर एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, ओआरएस, नींबू पानी और छाछ जैसे तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना, तेज बुखार, उल्टी या सिरदर्द जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि कुछ जिलों में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने से तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है।

  • आपकी चाल में छिपा है लंबी जिंदगी का राज: रिसर्च में सामने आया तेज और धीमी चाल का चौंकाने वाला असर

    आपकी चाल में छिपा है लंबी जिंदगी का राज: रिसर्च में सामने आया तेज और धीमी चाल का चौंकाने वाला असर

    नई दिल्ली। स्वस्थ और लंबी जिंदगी जीना लगभग हर व्यक्ति की इच्छा होती है। बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली को लंबे जीवन का आधार माना जाता है, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस विषय में एक दिलचस्प पहलू सामने रखा है। अध्ययन के अनुसार केवल पैदल चलना ही नहीं, बल्कि चलने की गति भी व्यक्ति की संभावित उम्र और स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है। यह दावा लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि रोजमर्रा की आदत से जुड़ा यह पहलू जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा माना जा रहा है।

    शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में बड़ी संख्या में लोगों की जीवनशैली और चलने की आदतों का विश्लेषण किया। अध्ययन के दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि तेज गति से चलने और धीमी गति से चलने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन अवधि में क्या अंतर दिखाई देता है। शोध में पाया गया कि नियमित रूप से तेज चाल में चलने वाले लोगों की संभावित उम्र अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। वहीं धीमी गति से चलने वाले कुछ समूहों में जीवन अवधि अपेक्षाकृत कम देखी गई।

    अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया कि केवल शरीर का वजन या बाहरी शारीरिक स्थिति ही बेहतर स्वास्थ्य का पैमाना नहीं हो सकती। इसके बजाय व्यक्ति की सक्रिय जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियां ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग अधिक सक्रिय रहते हैं और नियमित रूप से तेज गति से चलते हैं, उनमें स्वास्थ्य संबंधी कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे शरीर की कार्यक्षमता और फिटनेस स्तर बेहतर होने की संभावना भी बढ़ती है।

    एक अन्य अध्ययन में इस विषय से जुड़ा जैविक कारण भी समझने की कोशिश की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर की कोशिकाओं और उम्र बढ़ने के बीच संबंध रखने वाले कुछ जैविक तत्वों का संबंध चलने की गति से भी हो सकता है। अध्ययन में यह संकेत मिला कि तेज चाल से चलने वाले लोगों में शरीर के कुछ ऐसे संकेतक बेहतर स्थिति में पाए गए, जिन्हें उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये संकेतक व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य और भविष्य की शारीरिक स्थिति को समझने में मदद कर सकते हैं।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल तेज चलना ही लंबी उम्र की गारंटी नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण जैसे कई कारक एक स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। फिर भी यह अध्ययन संकेत देता है कि रोजमर्रा की एक साधारण आदत, जैसे चलने की गति, भी व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर सकारात्मक असर डाल सकती है। ऐसे में सक्रिय जीवनशैली अपनाना और नियमित रूप से पैदल चलना स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

  • मंगलवार की पूजा विधि: ऐसे करें हनुमान जी की आराधना, मिलेगी संकटों से मुक्ति

    मंगलवार की पूजा विधि: ऐसे करें हनुमान जी की आराधना, मिलेगी संकटों से मुक्ति


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और साहस, शक्ति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यही वजह है कि मंगलवार को देशभर के हनुमान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

    धर्माचार्यों के अनुसार मंगलवार की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। इस दिन लाल या केसरिया रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान श्रीराम और माता सीता का स्मरण किया जाता है, क्योंकि हनुमान जी श्रीराम के परम भक्त माने जाते हैं। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू की जाती है।

    पूजा में सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन पाठों से भय, शत्रु बाधा और मानसिक तनाव दूर होता है।

    ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मंगलवार का व्रत करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और कुंडली के दोषों में कमी आती है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है या जिन्हें बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें मंगलवार का व्रत और हनुमान पूजा करने की सलाह दी जाती है।

    धार्मिक परंपराओं में इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को गुड़, मसूर दाल, लाल वस्त्र या भोजन का दान शुभ माना गया है। इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।

    मंगलवार को कई लोग व्रत रखते हैं और केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि संयम और श्रद्धा के साथ किया गया व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करता है।

    धर्म विशेषज्ञों का कहना है कि मंगलवार केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सेवा भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। बजरंगबली की भक्ति व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

  • बेली फैट कम करने के लिए कौन ज्यादा असरदार? जीरा पानी और मेथी पानी को लेकर एक्सपर्ट ने दूर किया बड़ा कन्फ्यूजन

    बेली फैट कम करने के लिए कौन ज्यादा असरदार? जीरा पानी और मेथी पानी को लेकर एक्सपर्ट ने दूर किया बड़ा कन्फ्यूजन

    नई दिल्ली। आजकल वजन कम करने के लिए लोग केवल जिम और डाइटिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरेलू उपायों और डिटॉक्स ड्रिंक्स की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है। खासकर सुबह खाली पेट पी जाने वाली कुछ पारंपरिक ड्रिंक्स लोगों के बीच काफी चर्चा में रहती हैं। इनमें जीरा पानी और मेथी पानी का नाम सबसे ऊपर आता है। सोशल मीडिया और हेल्थ ट्रेंड्स के दौर में इन दोनों ड्रिंक्स को लेकर कई दावे किए जाते हैं कि ये तेजी से वजन कम करने, पेट की चर्बी घटाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों को लेकर लोगों के बीच कई गलतफहमियां भी मौजूद हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जीरा पानी और मेथी पानी दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है। इसलिए यह कहना कि इनमें से कोई एक सभी लोगों के लिए सबसे बेहतर है, पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, खानपान, पाचन क्षमता और लाइफस्टाइल के आधार पर इनके प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं।

    जीरा पानी को लंबे समय से पाचन सुधारने वाले घरेलू उपाय के रूप में देखा जाता रहा है। माना जाता है कि यह पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, ब्लोटिंग और अपच में राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। जब पाचन बेहतर होता है तो शरीर भोजन को सही तरीके से प्रोसेस कर पाता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में अप्रत्यक्ष सहायता मिल सकती है। इसके अलावा शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और भारीपन की समस्या कम होने से हल्कापन महसूस हो सकता है।

    दूसरी तरफ मेथी पानी का प्रभाव भूख नियंत्रण से जोड़कर देखा जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करा सकता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है। जिन लोगों को अनावश्यक स्नैकिंग या ओवरईटिंग की आदत होती है, उनके लिए यह उपयोगी साबित हो सकता है। इसके अलावा ब्लड शुगर संतुलन में मदद मिलने से भी अचानक लगने वाली भूख कम हो सकती है।

    हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इन ड्रिंक्स को वजन घटाने का जादुई उपाय मानना सही नहीं होगा। केवल जीरा या मेथी पानी पीने से तेजी से फैट लॉस होने की उम्मीद करना वास्तविकता से दूर हो सकता है। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, पानी का सही सेवन और तनाव नियंत्रण जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन ड्रिंक्स का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट संबंधी दिक्कतें या अन्य परेशानियां हो सकती हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं, मधुमेह की दवा लेने वालों और किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को ऐसे घरेलू उपाय अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली की जगह कोई एक ड्रिंक नहीं ले सकती, बल्कि यह केवल अच्छी आदतों को सपोर्ट करने का काम करती है।

  • ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम क्या है? जानिए कैसे बिगड़ सकती है आपकी स्किन

    ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम क्या है? जानिए कैसे बिगड़ सकती है आपकी स्किन


    नई दिल्ली। आज के दौर में ग्लोइंग और बेदाग त्वचा पाने की चाहत में लोग कई तरह के स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया, ब्यूटी इन्फ्लुएंसर्स और वायरल ट्रेंड्स के प्रभाव में आकर लोग एक साथ कई सीरम, क्रीम, एक्सफोलिएटर और एक्टिव इंग्रीडिएंट्स को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बना लेते हैं। लेकिन त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार जरूरत से ज्यादा स्किन केयर करना अब एक नई समस्या बनकर सामने आ रहा है, जिसे “ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम” कहा जा रहा है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि स्किन की भी एक प्राकृतिक सुरक्षा परत होती है, जिसे बार-बार फेसवॉश, स्क्रब, एसिड बेस्ड प्रोडक्ट्स और केमिकल युक्त कॉस्मेटिक्स से नुकसान पहुंच सकता है। जब लोग बिना जरूरत कई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो त्वचा की नैचुरल बैरियर कमजोर होने लगती है। इसका असर जलन, लालपन, ड्रायनेस, पिंपल्स और एलर्जी के रूप में दिखाई देता है।

    त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक, ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम के सबसे सामान्य लक्षणों में त्वचा का अत्यधिक संवेदनशील हो जाना, बार-बार दाने निकलना, चेहरे पर खुजली, स्किन का छिलना और लगातार रूखापन शामिल हैं। कई बार लोग इन समस्याओं को ठीक करने के लिए और ज्यादा प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है।

    डॉक्टरों का कहना है कि हर चमकदार या वायरल प्रोडक्ट हर स्किन टाइप के लिए सही नहीं होता। बिना विशेषज्ञ की सलाह के एक्टिव इंग्रीडिएंट्स जैसे रेटिनॉल, सैलिसिलिक एसिड, विटामिन-सी और केमिकल पील्स का अधिक उपयोग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्किनकेयर रूटीन हमेशा सरल और संतुलित होना चाहिए। एक अच्छे फेसवॉश, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल ज्यादातर लोगों के लिए पर्याप्त होता है। इसके अलावा त्वचा को पर्याप्त आराम देना, पानी ज्यादा पीना और संतुलित आहार लेना भी जरूरी है।

    यदि किसी व्यक्ति को लगातार स्किन संबंधी समस्याएं हो रही हैं, तो घरेलू प्रयोग या सोशल मीडिया ट्रेंड्स अपनाने की बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

    ब्यूटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्वस्थ त्वचा पाने का मतलब केवल ज्यादा प्रोडक्ट्स लगाना नहीं, बल्कि त्वचा की जरूरत को समझकर सही देखभाल करना है।