Author: bharati

  • मार्च में महंगाई बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंची, वैश्विक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव

    मार्च में महंगाई बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंची, वैश्विक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली:देश में खुदरा महंगाई दर मार्च 2026 में बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं के बजट पर हल्का लेकिन स्पष्ट दबाव देखने को मिला है। यह आंकड़ा फरवरी के 3.21 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा अधिक है, लेकिन अभी भी यह स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर जारी भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने भारत की कीमतों पर असर डाला है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बदलाव के कारण परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसका प्रभाव धीरे धीरे अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है। इसका सीधा असर घरेलू खर्चों पर पड़ रहा है और उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर दबाव बन रहा है।

    खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी मिला जुला रुझान देखा गया है। कुछ सब्जियों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुछ खाद्य पदार्थों जैसे प्याज, आलू और दालों के दामों में गिरावट भी देखने को मिली है। इसके बावजूद खाद्य महंगाई दर मार्च में बढ़कर 3.87 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो फरवरी की तुलना में अधिक है।

    ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई वृद्धि भी महंगाई के आंकड़ों को ऊपर ले जाने में एक महत्वपूर्ण कारण रही है। एलपीजी सिलेंडर और अन्य ईंधन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। ऊर्जा लागत में वृद्धि का असर सीधे तौर पर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे अन्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं।

    सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को प्रभावित किया है। निवेश और बाजार में अनिश्चितता के कारण इनकी मांग बढ़ी है, जिससे कीमतों में रिकॉर्ड स्तर की वृद्धि दर्ज की गई है।

    हालांकि राहत की बात यह है कि मौजूदा महंगाई दर अभी भी केंद्रीय बैंक के मध्यम लक्ष्य चार प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर स्थिति में बनी हुई है, लेकिन बाहरी झटकों का असर लगातार महसूस किया जा रहा है।

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से सप्लाई साइड दबाव का परिणाम है, जिसमें वैश्विक तनाव, तेल बाजार की अस्थिरता और मौसम आधारित प्रभाव शामिल हैं। नीति निर्धारक फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

    आने वाले समय में महंगाई की दिशा काफी हद तक मानसून, वैश्विक बाजार और भू राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है तो इसका असर घरेलू कीमतों पर और अधिक स्पष्ट हो सकता है।

  • सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा

    सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा


    पीथमपुर । मध्यप्रदेश के धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में श्रमिक असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में दिल्ली एनसीआर में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अब इसका असर मध्यप्रदेश के औद्योगिक इलाकों में भी दिखने लगा है। पीथमपुर स्थित सेक्टर 3 में मदरसन कंपनी की यूनिट 1 के बाहर लगभग 500 महिला और पुरुष कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी है जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हलचल मच गई है।

    कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन लंबे समय से आर्थिक शोषण कर रहा है और काम के निर्धारित घंटे लागू नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि उनसे आठ घंटे से अधिक काम कराया जाता है लेकिन इसके बदले में उचित वेतन नहीं दिया जाता जिससे बढ़ती महंगाई के दौर में जीवनयापन मुश्किल होता जा रहा है।

    हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ कर्मचारियों को हाल ही में नौकरी से निकाल दिया गया है। इस कार्रवाई को कर्मचारियों ने दबाव बनाने और डराने की रणनीति बताया है। इससे अन्य कर्मचारियों में भी आक्रोश बढ़ गया है और वे सामूहिक रूप से विरोध में उतर आए हैं।

    प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में शामिल रश्मि नामक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी में न तो काम के घंटे तय हैं और न ही महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को छुट्टी नहीं दी जाती और किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी सुविधा या डॉक्टर की व्यवस्था भी कंपनी परिसर में मौजूद नहीं है।

    कर्मचारियों की मुख्य मांगों में निकाले गए साथियों की तत्काल बहाली वेतन में वृद्धि और काम के घंटे तय करना शामिल है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस आंदोलन का असर अब अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी देखने को मिल रहा है जहां कर्मचारी एकजुट होकर समर्थन जता रहे हैं। कंपनी गेट पर लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन जारी है जिससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासनिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं ताकि मामला शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सके। यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक अधिकारों और कार्यस्थल की स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • गर्मी में गन्ने का रस है अमृत समान, शरीर को रखे ठंडा और मजबूत

    गर्मी में गन्ने का रस है अमृत समान, शरीर को रखे ठंडा और मजबूत


    नई दिल्ली। मौसम में बदलाव हो रहा है और गर्मी अब धीरे-धीरे बढ़ रही है गर्मी जैसे ही बढ़ने लगती है। कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होने लगती है। आपकी इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ जाती है सही खान-पान गर्मी में करना बहुत जरूरी होता है वरना कई प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गर्मी में गाने का रस पीना बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह आपको सेहतमंद रखने में मदद करता है चलिए जानते हैं कैसे।

    गन्ने के रस के फायदे

    गर्मियों के मौसम में जब तेज धूप और गर्मी से शरीर थकान महसूस करता है, तब गन्ने का रस सबसे अच्छा प्राकृतिक पेय साबित होता है।औषधीय गुणों से भरपूर ये ठंडा रस शरीर को न केवल तुरंत एनर्जी देता है, बल्कि सेहत का भी ध्यान रखता है।गन्ने का रस शरीर को तरोताजा करने के साथ-साथ आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है, पाचन तंत्र को सुधारता है और पीलिया जैसी बीमारी में राहत पहुंचाता है।

    कई बीमारियों के लिए है रामबाण

    गन्ने के रस से सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि गुड़, शीरा जैसे कई उपयोगी उत्पाद भी बनते हैं।आयुर्वेद में गन्ने के रस को मूत्रवर्धक, शीतलक, रेचक और टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।यह पेशाब में जलन, पेशाब न आने की समस्या और रक्तस्राव में भी राहत देता है। यूनानी चिकित्सा में इसे पीलिया के मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है।

    इस लिए आपको गर्मी में गन्ने का रस जरूर पीना चाहिए।गर्मियों में गन्ने का रस पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और गर्मी से होने वाली थकान दूर होती है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स तनाव कम करने में मददगार है
  • मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू

    मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू


    नई दिल्ली। नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन और तनाव के बीच Yogi Adityanath सरकार ने मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 1000 रुपये से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगा।

    नए वेतन दर क्या हैं?
    सरकार द्वारा तय किए गए नए वेतन के अनुसार Gautam Buddh Nagar और Ghaziabad में अकुशल मजदूरी ₹11,313 से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। अर्धकुशल मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल मजदूरी 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये कर दी गई है। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी 13,006, रुपये अर्धकुशल 14,306 रुपये और कुशल रुपये 16,025 तय की गई है। अन्य जिलों में अकुशल मजदूरी रुपये 12,356, अर्धकुशल 13,591 रुपये और कुशल रुपये 15,224 निर्धारित की गई है।

    मजदूरों को मिली अंतरिम राहत
    सरकार का कहना है कि यह फैसला श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाकर लिया गया है और इससे मजदूरों को फिलहाल अंतरिम राहत मिलेगी। आगे वेज बोर्ड के माध्यम से मजदूरी की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम वेतन ₹20,000 किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। सरकार ने बताया कि केंद्र स्तर पर नए लेबर कोड के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम ‘फ्लोर वेज’ तय करने की प्रक्रिया जारी है।

    20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबरें गलत
    मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। साथ ही नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे श्रमिकों को समय पर वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा के सभी अधिकार सुनिश्चित करें, साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।

  • दिल्ली से देहरादून अब मात्र ढाई घंटे में, आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुभारंभ से बदली उत्तर भारत की सड़क यात्रा की तस्वीर

    दिल्ली से देहरादून अब मात्र ढाई घंटे में, आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुभारंभ से बदली उत्तर भारत की सड़क यात्रा की तस्वीर


    नई दिल्ली:देश के सड़क नेटवर्क को नई दिशा देते हुए दिल्ली और देहरादून को जोड़ने वाले आधुनिक एक्सप्रेसवे का शुभारंभ किया गया है। लगभग 210 किलोमीटर लंबी यह ग्रीनफील्ड परियोजना राजधानी दिल्ली को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जोड़ने वाली सबसे तेज और आधुनिक सड़क सुविधाओं में से एक बन गई है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच का सफर, जो पहले छह से सात घंटे में पूरा होता था, अब घटकर लगभग ढाई से तीन घंटे का रह गया है। इससे यात्रियों को समय की बड़ी बचत के साथ-साथ आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।

    इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्याधुनिक एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जो राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है। लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीव जैसे हाथी, बाघ और तेंदुए बिना किसी बाधा के सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें। यह संरचना आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है और इसे देश की सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का प्रभाव केवल इन दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आर्थिक और पर्यटन विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। इस मार्ग से हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी। इससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को जोड़ता है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो गई है।

    सुरक्षा और तकनीक के स्तर पर इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और यातायात नियंत्रण के लिए स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। रात के समय बेहतर दृश्यता के लिए सौर ऊर्जा आधारित लाइटिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। इसके अलावा तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी के लिए विशेष तकनीक लागू की गई है ताकि सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस परियोजना को ग्रीन कॉरिडोर मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से दूर डिजाइन किया गया है ताकि यात्रा निर्बाध और तेज बनी रहे। लगभग बारह हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

    यात्रियों की सुविधा के लिए मार्ग पर आधुनिक रेस्ट एरिया, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग पॉइंट और हरियाली से भरपूर विश्राम स्थल बनाए गए हैं। यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के विकास और पर्यटन को भी नई दिशा देगा।

  • मध्य प्रदेश में पूरे उत्साह से मनाई जा रही अंबेडकर जयंती, गूंजा 'जय भीम' का नारा, महू में मुख्य आयोजन

    मध्य प्रदेश में पूरे उत्साह से मनाई जा रही अंबेडकर जयंती, गूंजा 'जय भीम' का नारा, महू में मुख्य आयोजन


    भोपाल। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मंगलवार को मध्यप्रदेश में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इंदौर जिले के डॉ. अंबेडकर नगर (महू), जो उनकी जन्मस्थली है, वहां मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां देशभर से श्रद्धालु, सामाजिक संगठन और बौद्ध भिक्षु बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान ‘जय भीम’ के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा और डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राज्यभर में माल्यार्पण, रैलियों और सभाओं का आयोजन किया गया।

    संविधान ने मजबूत की लोकतंत्र की नींव- मुख्यमंत्री यादव


    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान निर्माण के जरिए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत आधार दिया और उनका सामाजिक समरसता व समानता का संदेश आज भी प्रासंगिक है।

    महू में मुख्य आयोजन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे
    महू में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में देशभर से आए लोगों ने बाबा साहेब को नमन किया। यहां बौद्ध भिक्षुओं की मौजूदगी भी रही और पूरा क्षेत्र श्रद्धा और उत्साह के माहौल में नजर आया।

    प्रदेश के अन्य शहरों में भी आयोजन
    भोपाल में अंबेडकर चौक पर माल्यार्पण के साथ सभा आयोजित की गई। ग्वालियर के फूलबाग अंबेडकर पार्क में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और रैलियों का समापन वहीं हुआ। जबलपुर में विभिन्न संगठनों ने माल्यार्पण कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। रतलाम में कैबिनेट मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी और लोगों को छाछ वितरित की गई।

    बैतूल में अंबेडकर चौक पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने अंबेडकर के योगदान को महान बताते हुए उनके विचारों को प्रेरक बताया। नरसिंहपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर पंचायत एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बेलहाई अंबेडकर पार्क में प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

    उज्जैन में अखिल भारतीय बैरवा महासंघ ने अंबेडकर जयंती पर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और प्रभात फेरी निकाली, जिसमें बाबा साहब के योगदान को याद किया गया। नर्मदापुरम में भाजपा कार्यालय के सामने स्थित प्रतिमा स्थल कार्यक्रम आयोजित हुआ अधिकारियों ने माल्यार्पण किया और भीम आर्मी ने बाइक रैली निकाली। बैतूल, नरसिंहपुर, उज्जैन और नर्मदापुरम में भी विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए बाबा साहेब को याद किया गया। कई स्थानों पर प्रभात फेरी, बाइक रैली और सामूहिक माल्यार्पण का आयोजन हुआ।

    बता दें कि पूरे मध्य प्रदेश में अंबेडकर जयंती के अवसर पर सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के मूल्यों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

  • राहत भरी खबर: सस्ता हुआ सोना और चांदी, ईंधन कीमतों में क्या बदलाव?

    राहत भरी खबर: सस्ता हुआ सोना और चांदी, ईंधन कीमतों में क्या बदलाव?


    नई दिल्ली। आज देशभर में सोना-चांदी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा अपडेट देखने को मिला है। जहां लगातार दूसरे दिन सोने की चमक फीकी पड़ी है, वहीं चांदी भी सस्ती हो गई है। दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल के दामों में शहरों के हिसाब से हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है।

    सोने की कीमतों में गिरावट का दबाव जारी
    वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली है। हालांकि कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी भी दर्ज की गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में गिरावट का रुझान बना हुआ है।

    दिल्ली में आज 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दाम में हल्की बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन पिछले दो दिनों में कुल मिलाकर सोना सस्ता हुआ है। चांदी के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार दो दिनों में चांदी करीब ₹5100 प्रति किलो तक सस्ती हुई है। दिल्ली में आज चांदी ₹2,54,900 प्रति किलो के भाव पर बिक रही है।

    प्रमुख शहरों में सोने के ताजा दाम (10 ग्राम)
    दिल्ली: ₹1,52,600 (24K), ₹1,39,890 (22K), ₹1,14,480 (18K)
    मुंबई: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330
    कोलकाता: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330
    चेन्नई: ₹1,53,370, ₹1,40,590, ₹1,17,290
    बेंगलुरु: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330
    हैदराबाद: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330
    पटना: ₹1,52,500, ₹1,39,790, ₹1,14,380

    पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी
    सुबह 6 बजे तेल कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें जारी कीं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर देखा गया है।

    प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल रेट

    नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72, डीजल ₹87.62
    मुंबई: पेट्रोल ₹104.21, डीजल ₹92.15
    कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94, डीजल ₹90.76
    चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75, डीजल ₹92.34
    हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46, डीजल ₹95.70
    पटना: पेट्रोल ₹105.58, डीजल ₹93.80
    लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.80
    जयपुर: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21

    कीमतें क्यों बदलती हैं?
    विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों का टैक्स रिफाइनिंग लागत और मांग-आपूर्ति का संतुलन ग्राहक अपने मोबाइल से भी आसानी से अपने शहर का ईंधन रेट जान सकते हैं। Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें, आज के बाजार अपडेट में साफ दिख रहा है कि सोना और चांदी पर दबाव बना हुआ है, जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता के साथ हल्का बदलाव देखा गया है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल ही इन कीमतों की दिशा तय करेगी।

  • हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी

    हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी


    नई दिल्ली। मंगलवाल का दिन हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन व्रत रहने से आपके ऊपर उनकी कृपा बानी रहती है। कहा जाता हैं कि, बचपन से ही हनुमान जी को कई सिद्धियां और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त थीं। उनके पास असीम शक्तियां थीं। वे पहाड़ उठा सकते थे, समुद्र लांघ सकते थे और सूरज को निगल सकते थे।लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि वो अपनी शक्तियां को ही भूल गए तो चलिए इससे जुड़ी कथा जानते हैं।

    हनुमान जी को मिला था ऐसा श्राप
    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली, तेजस्वी और चंचल स्वभाव के थे। वे अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग खेल-खेल में ही करने लगते थे। कभी वे ऋषि-मुनियों के आश्रमों में पहुंच जाते, तो कभी उनकी साधना में बाधा डालते।

    एक बार कई महान ऋषि-मुनि वन में तपस्या कर रहे थे। तभी बाल स्वरूप हनुमान जी वहां पहुंचे और अपनी चंचलता के कारण उन्होंने ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया।ऋषियों ने पहले तो उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने, तब उन्हें क्रोध आ गया।तब ऋषियों ने हनुमान जी को श्राप दिया कि वे अपनी सारी दिव्य शक्तियों को भूल जाएंगे।

    श्राप का ये था तोड़
    यह श्राप पूर्ण रूप से दंड देने के लिए नहीं था, बल्कि उनके हित में ही था। ऋषियों ने यह भी कहा कि जब कोई उन्हें उनकी शक्तियों की याद दिलाएगा, तब वे पुनः अपनी शक्ति को पहचान लेंगे और उसका उपयोग धर्म के कार्यों में करेंगे।

    नारद मुनि और जामवंत ने याद दिलाई थी शक्तियां
    जब भगवान राम की सेवा का समय आया और सीता माता की खोज के लिए समुद्र पार करना था, तब हनुमान जी अपनी शक्ति को भूल चुके थे। उस समय नारद मुनि और जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। तभी हनुमान जी को अपनी अपार शक्ति का बोध हुआ और उन्होंने विशाल रूप धारण कर समुद्र लांघ लिया। इसके बाद उन्होंने राम भगवान की।

  • देवदूत बने जवान मैहर में ट्रेन हादसा टला, महिला को प्लेटफॉर्म के नीचे जाने से बचाया गया

    देवदूत बने जवान मैहर में ट्रेन हादसा टला, महिला को प्लेटफॉर्म के नीचे जाने से बचाया गया


    मैहर । मध्यप्रदेश के मैहर रेलवे स्टेशन पर उस समय बड़ा हादसा टल गया जब चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही एक महिला अचानक संतुलन खो बैठी और प्लेटफॉर्म के किनारे से नीचे गिरने लगी। यह पूरा घटनाक्रम कुछ ही सेकेंड में हुआ लेकिन मौके पर मौजूद GRP और RPF जवानों की तत्परता ने एक बड़ी दुर्घटना को होने से रोक दिया। उनकी सूझबूझ और तेजी से लिए गए निर्णय ने महिला की जान बचा ली।

    यह घटना ट्रेन संख्या 11754 रीवा–इतवारी एक्सप्रेस के जनरल कोच के पास हुई। जानकारी के अनुसार योगिता श्रीवास उम्र 38 वर्ष अपने पति के साथ यात्रा कर रही थीं और ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह असंतुलित होकर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक स्थिति में पहुंच गईं। कुछ ही पल में स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।

    इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात GRP आरक्षक 104 दिनेश कुमार पटेल और RPF आरक्षक प्रमोद मिश्रा ने स्थिति को देखते ही बिना देरी किए कार्रवाई की। दोनों जवानों ने तेजी से दौड़कर महिला को पकड़ लिया और खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। अगर कुछ सेकेंड की भी देरी होती तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी। लेकिन उनकी तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह घटना बेहद डरावनी थी और आसपास मौजूद यात्री भी कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गए थे। लेकिन जवानों की बहादुरी के बाद सभी ने राहत की सांस ली और उनकी सराहना की।

    यह घटना एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की लापरवाही की ओर ध्यान खींचती है। अक्सर देखा जाता है कि यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश करते हैं जो बेहद खतरनाक होता है और कई बार जानलेवा साबित हो सकता है।

    रेलवे प्रशासन लगातार यात्रियों से अपील करता है कि ट्रेन पूरी तरह रुकने के बाद ही उसमें चढ़ें या उतरें। थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। मैहर की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से जान बचाई जा सकती है।

  • दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द

    दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द


    भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट ने पार्टी के अंदर नई खींचतान को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि यह विवाद अब केवल राजनीतिक नहीं रहा बल्कि जातीय समीकरणों के इर्दगिर्द घूमता नजर आ रहा है जहां अलग अलग वर्ग अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।

    शुरुआत में अनुसूचित जाति वर्ग की ओर से मांग उठी थी कि इस बार राज्यसभा में दलित नेता को मौका दिया जाए। इस मांग को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रमुखता से उठाया और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं का भी समर्थन मिला। इसके बाद विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं ने भी सक्रियता दिखाई और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी रखी।

    हाल ही में विंध्य क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार से मुलाकात कर यह तर्क दिया कि क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का प्रभाव काफी अधिक है और उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के भीतर जातीय संतुलन का मुद्दा अब और गहराता जा रहा है।

    इसी बीच अब सिंधी समाज की एंट्री ने इस पूरी प्रक्रिया को और दिलचस्प बना दिया है। रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से प्रतिनिधि भेजने की मांग की है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को संबोधित पत्र में अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए खुद को एक योग्य दावेदार बताया है।

    ठारवानी का कहना है कि सिंधी समाज का कांग्रेस के प्रति वर्षों से जुड़ाव रहा है और पार्टी को इस वर्ग को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि उन्हें मौका मिलता है तो वे संसद में पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और प्रदेशभर में संगठन को और मजबूत करेंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर जातीय समीकरणों को त्रिकोणीय बना दिया है जहां दलित ब्राह्मण और सिंधी समाज तीनों अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की होगी ताकि किसी भी वर्ग की नाराजगी सामने न आए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जैसी अहम सीट पर उम्मीदवार का चयन केवल योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान किस वर्ग को प्राथमिकता देता है और किस तरह इस आंतरिक दबाव को संतुलित करता है।

    फिलहाल यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की यह एक सीट कांग्रेस के लिए केवल एक राजनीतिक अवसर नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन की परीक्षा भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस पर फैसला पार्टी की रणनीति और भविष्य की राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।