निचली अदालत के फैसले को दी गई चुनौती
सियासत में तेज हुआ टकराव
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सियासत में तेज हुआ टकराव

गांव में मचा हड़कंप
मनीष द्वारा जहर खाने की खबर जैसे ही गांव में फैली, पूरे रौंधा में हड़कंप मच गया। परिजन और गांव वाले तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसलिए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने भी उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन देर रात उसकी मौत हो गई।
परिवार में सबसे छोटा था मनीष
मनीष जाटव अपने परिवार के तीन भाइयों में सबसे छोटा था। उसकी मौत के बाद परिवार में गहरा सदमा है और घर का माहौल गमगीन बना हुआ है। परिजनों के अनुसार, मनीष के पिता प्रहलाद जाटव की लगभग छह साल पहले कैंसर से मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद से परिवार पहले ही कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा था।
स्वभाव और वजह पर परिवार का बयान
परिजनों ने बताया कि मनीष का स्वभाव थोड़ा चिड़चिड़ा था। वह अक्सर गुस्से में आ जाता था और एक बार अपने गुस्से में अपना मोबाइल भी तोड़ चुका था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मनीष ने यह कदम क्यों उठाया।
पुलिस ने मर्ग कायम किया, पोस्टमार्टम कराया गया
मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम किया है। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया और उसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
मेडिकल चौकी प्रभारी नंद किशोर गर्ग ने बताया कि युवक की मौत जहर खाने के कारण हुई है। मामले की आगे की जांच सिरसौद थाना पुलिस द्वारा की जा रही है और हर पहलू से जानकारी जुटाई जा रही है।
शिवपुरी के रौंधा गांव में 23 वर्षीय मनीष जाटव ने जहर खा लिया। गंभीर हालत में उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन देर रात उसकी मौत हो गई। परिवार में गहरा सदमा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया है और मामले की जांच जारी है।

पहली बार भस्म आरती में शामिल हुईं अंकिता
मंदिर व्यवस्था की सराहना

जानकारी के मुताबिक मैहर निवासी रतन कोरी अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था लेकिन युवती के परिजन इसके खिलाफ थे। मंगलवार को वह सिहोरा के गंजताल गांव पहुंचा और एक बार फिर शादी की बात रखी। मना किए जाने पर वह नाराज होकर पास ही लगे हाईटेंशन टावर पर चढ़ गया। ऊपर से वह लगातार चिल्लाता रहा कि जब तक उसकी प्रेमिका खुद आकर शादी के लिए सहमति नहीं देगी वह नीचे नहीं उतरेगा।
गांव में हड़कंप पुलिस ने संभाला मोर्चा

सरकार ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए बाजारों और शॉपिंग मॉल्स के समय में कटौती कर दी है। नए आदेश के मुताबिक ज्यादातर इलाकों में बाजार और मॉल अब रात 8 बजे तक ही खुले रहेंगे।
ऊर्जा संकट से उठाया बड़ा कदम
दरअसल, ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल महंगा होने से आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए ऊर्जा बचत अभियान शुरू किया है। इसके तहत सिर्फ बाजार ही नहीं, बल्कि रेस्टोरेंट, शादी हॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के समय पर भी पाबंदी लगाई गई है। कई जगहों पर शादी समारोह भी रात 10 बजे तक खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।
Iran-Israel War के बीच आम लोगों और कारोबार पर असर
इन फैसलों का सीधा असर आम लोगों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। बाजार जल्दी बंद होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है, वहीं लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी बदल गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार का मकसद बिजली और ईंधन की खपत कम करना है ताकि आर्थिक संकट को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो पाकिस्तान को और सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के हिसाब से नए फैसले ले सकती है।

इस ऐतिहासिक कदम से दिल्ली के करीब 45 लाख लोगों को फायदा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जताया आभार
मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री Manohar Lal का दिल्ली की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा,
“आज का दिन दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकार का नया अध्याय लेकर आया है। प्रधानमंत्री ने वर्षों से अनदेखी इस पीड़ा को समझा और उन परिवारों के सपनों को महसूस किया, जो अपने ही घरों में रहते हुए भी अधिकार से वंचित थे।”
आवेदन प्रक्रिया और समयसीमा
मुख्यमंत्री ने बताया कि 24 अप्रैल से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई समयसीमाएं तय की गई हैं:
7 दिन में जाआईएस सर्वे
15 दिन में आवेदन की कमी दूर करने की प्रक्रिया
45 दिन में हस्तांतरण डीड जारी
इसके अलावा, दिल्ली सरकार और केंद्र ने मिलकर इस प्रक्रिया की 22 बड़ी बाधाओं को दूर किया ताकि लाखों परिवार बिना अटके, लटके या भटके अपना हक प्राप्त कर सकें।
छोटे व्यापारियों को भी राहत
इस योजना में 20 वर्गमीटर तक की छोटी दुकानों को भी शर्तों के साथ नियमित किया जाएगा। इससे छोटे व्यापारियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और उनके व्यवसाय में स्थिरता आएगी।
भविष्य की योजना: TOD नीति से मजबूत दिल्ली
रेखा गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के विजनरी सोच के अनुरूप दिल्ली के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति लागू की जा रही है। इस नीति के तहत मेट्रो और आरआरटीएस कॉरिडोर के 500 मीटर के दायरे में 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्लांड, हाई-डेंसिटी और मिक्स्ड यूज डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सस्ती आवास व्यवस्था, बेहतर कनेक्टिविटी और आसान जीवन सुनिश्चित करना है, खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए।
पीएम उदय योजना का नया रूप
दरअसल, 2019 में अवैध कॉलोनियों के लिए PM Uday योजना लागू की गई थी। उस समय केवल 40 हजार मकानों को नियमित किया गया था और प्रक्रिया धीमी रही। अब इसे काफी आसान और तेज बना दिया गया है।
दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग कन्वेंस डीड जारी करेगा, जिससे लोगों को अपने घर पर कानूनी अधिकार तुरंत मिलेंगे।
दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय करीब 45 लाख लोगों के जीवन में राहत और सुरक्षा लेकर आएगा। आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी, छोटे दुकानदारों और गरीब परिवारों को भी योजना का लाभ मिलेगा। TOD नीति से शहर का भविष्य भी मजबूत होगा।

हालाँकि, वे तब तक अपनी जिम्मेदारियाँ मलेशिया गए, जब तक नए सीईओ की पेशकश नहीं हुई। इस कदम को लेकर एयर इंडिया के अगले विकास चरण की तैयारी आधिकारिक तौर पर देखी जा रही है।
पहले ही कर दी थी पद छोड़ने की घोषणा
कंपनी के मुताबिक, कैंपबेल विल्सन ने साल 2024 में ही एन. चंद्रशेखरन को 2026 में पद छोड़े की अपनी योजना के बारे में बताया था। इसके बाद वे संगठन को मजबूत बनाने और नेतृत्व टीम को स्थिर बनाने पर लगातार काम कर रहे थे, ताकि बदलाव की प्रक्रिया सहज और प्रभावशाली हो सके।
चार साल में बदली एयर इंडिया की तस्वीर
अपने फैसले को याद करते हुए कैंपबेल विल्सन ने कहा कि बोली के बाद पिछले चार वर्षों में एयर इंडिया में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिले हैं। इस दौरान कंपनी ने चार एयरलाइंस का अधिग्रहण और विलय किया, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र की कार्यशैली में भी महत्वपूर्ण बदलाव किये गये।
ज़ोर से आधुनिक सिस्टम और बेहतर सेवाएँ
विल्सन के नेतृत्व में एयर इंडिया ने अपने ऑपरेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण किया और नई शुरुआत की। यूनिवर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए ग्राउंड सर्विस से लेकर इन-फ्लाइट होटल तक कई सुधार किए गए। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने बेड़े में 100 नए विमान शामिल किए और पुराने मॉडलों के उद्यमों को भी शामिल किया।
बड़ा निवेश पर दस्तावेज़ और प्रशिक्षण
एयर इंडिया ने अपने विस्तार के तहत कई बड़े आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट भी शुरू किए हैं।इनमें दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी ट्रेनिंग अकादमी, फ़्लाइट सिम्युलेटर किड्स, फ़्लाइंग स्कूल और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (एमआरओ) बेस शामिल हैं।
ये सभी फर्स्ट फ्यूचर में एयरलाइंस की जगहें और विस्तार को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।
आस्था ने की नेतृत्व की अभिनेत्री
एयर इंडिया के सानिध्य एन. चन्द्रशेखरन ने विल्सन के योगदान की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद क्रिस्टोफर चेन की तस्वीरें सामने आईं, डॉक्यूमेंट्री में देरी हुई और ग्लोबल मिरर के सामने टीम ने शानदार काम किया।
नए सीईओ की तलाश शुरू
कंपनी के बोर्ड ने नए सीईओ के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति आने वाले समय में उपयुक्त अभ्यर्थी का चयन करेगी।
एयर इंडिया के अगले विकास चरण के लिए इस बदलाव पर बेहद अहम विचार किया जा रहा है, खासकर तब जब 2027 से बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट के दस्तावेज शुरू होने वाले हैं।
‘नया एयर इंडिया’ का भविष्य
कैंपबेल विल्सन ने कहा कि कंपनी अब एक मजबूत प्रतिष्ठान है और आगे की यात्रा के लिए तैयार है। उनके अनुसार, यह सही समय है जब कंपनी के नए नेतृत्व को छोड़ दिया जाए, ताकि विकास की गति को और तेज किया जा सके।
एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने पद छोड़ दिया है, लेकिन नए सीईओ की नियुक्ति तक पद पर बने रहे-चार साल में उन्होंने विमान को मजबूत आधार देकर अगले विकास चरण के लिए तैयार किया है।

कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। अनुमान है कि तेल की औसत कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जिससे ऊर्जा आयात पर खर्च बढ़ेगा और इसका सीधा असर उद्योगों की लागत पर पड़ेगा।इसके चलते उत्पादन महंगा होगा और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
अल्पकाल में ग्रोथ पर दिख सकता है असर
Morgan Stanley की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निकट भविष्य में आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। जून 2026 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसकी वजह औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती, वित्तीय स्थितियों में सख्ती और कंपनियों के मुनाफे में कमी को माना गया है।
महंगाई और रुपए पर बढ़ेगा दबाव
ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह महंगाई और मुद्रा पर भी असर डालेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई दर औसतन 5.1 प्रतिशत रह सकती है। इसके अलावा, बढ़ते आयात बिल और कमजोर पूंजी प्रवाह के चलते भारतीय रुपए पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।
चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका
बढ़ती तेल कीमतों का असर भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर भी पड़ सकता है।रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि यह घाटा जीडीपी के 1 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति देश के बाहरी आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है और भुगतान संतुलन पर भी दबाव डाल सकती है।
सरकार के उपायों से मिलेगी राहत
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि सरकारी नीतियों और आपूर्ति में सुधार से हालात धीरे-धीरे बेहतर हो सकते हैं। सरकार शुरुआती चरण में सब्सिडी और लागत नियंत्रण जैसे उपायों का सहारा ले सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
लंबी अवधि में भारत की ग्रोथ बरकरार
वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगे तेल के दबाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, जहां 6.2% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है, हालांकि अल्पकाल में महंगाई और रुपए पर दबाव बढ़ सकता है।

दादी-नानी के जमाने से खसखस का शरबत और दूध गर्मियों में खासतौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसे आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना गया है।
आयुर्वेद में खास स्थान, पित्त दोष को करता है शांत
खसखस को आयुर्वेद में पित्त दोष को शांत करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। इसकी ठंडी तासीर शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करती है और अंदर से राहत पहुंचाती है। गर्मियों में पेट की जलन, पैरों में जलन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में खसखस का सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है।
पोषक तत्वों का भंडार
खसखस छोटे दानों में बड़ा पोषण छुपाए हुए है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ इम्युनिटी बढ़ाने और मौसमी बीमारियों से बचाव में भी मदद करते हैं।
ठंडक के साथ बेहतर पाचन
गर्मियों में डिहाइड्रेशन और एसिडिटी आम समस्या बन जाती है। ऐसे में खसखस का सेवन शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखता है और पेट के एसिड को नियंत्रित करता है। फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या से भी राहत दिलाता है।
अच्छी नींद और मानसिक शांति
खसखस का सेवन मानसिक शांति के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को रिलैक्स करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है। आज के तनाव भरे जीवन में यह एक प्राकृतिक उपाय के रूप में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
त्वचा और जोड़ों के लिए भी लाभकारी
खसखस का तेल जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरह से फायदा पहुंचाते हैं। इसके अलावा, खसखस को दूध के साथ पीसकर लगाने से त्वचा की जलन, मुंहासे और सनबर्न में भी राहत मिलती है।
सीमित मात्रा में करें सेवन
हालांकि खसखस बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अगर किसी को एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या हो, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
देसी नुस्खा, बड़ा फायदा
गर्मियों में रोजाना खसखस का शरबत या दूध लेने से शरीर ठंडा, स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। यह एक आसान और प्राकृतिक तरीका है, जिससे आप खुद को गर्मी के असर से बचा सकते हैं।
खसखस गर्मियों में शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने, नींद बेहतर करने और त्वचा व जोड़ों की समस्याओं से राहत दिलाने वाला एक प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर देसी उपाय है।

आमवातारि वटी: जोड़ों के दर्द में कारगर उपाय
आयुर्वेद के अनुसार जोड़ों के दर्द, सूजन और अकड़न का मुख्य कारण “वात” का बढ़ना और पाचन तंत्र का कमजोर होना है। इसी समस्या से राहत पाने के लिए आमवातारि वटी के सेवन की सलाह दी जाती है। यह आयुर्वेदिक औषधि शरीर में जमा “आम” (टॉक्सिन) को कम करने में मदद करती है और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाती है। हालांकि, इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
‘आम’ बढ़ने से बढ़ती हैं बीमारियां
जब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में “आम” यानी विषैले तत्व जमा होने लगते हैं।
यह आम आंतों में संक्रमण पैदा करता है और धीरे-धीरे जोड़ों में सूजन, दर्द और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी समस्याओं को जन्म देता है। इस स्थिति में व्यक्ति के लिए चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं।
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का शक्तिशाली मिश्रण
आमवातारि वटी कई प्रभावी जड़ी-बूटियों से मिलकर बनी होती है। इसमें शुद्ध गुग्गुलु, चित्रक मूल, त्रिफला (आंवला, हरड़, बहेड़ा), शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये सभी मिलकर न सिर्फ जोड़ों के दर्द को कम करते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करते हैं।
जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी
केवल दवा लेने से ही पूरी राहत नहीं मिलती, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी बेहद जरूरी है। सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी से करें। इसके साथ मेथी के दाने या लहसुन का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। लहसुन में मौजूद गुण जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करते हैं।
नियमित व्यायाम से मिलेगा फायदा
लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से मांसपेशियों में खिंचाव और सूजन बढ़ सकती है। इसलिए बीच-बीच में उठकर हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक करना जरूरी है। नियमित व्यायाम न सिर्फ जोड़ों को मजबूत बनाता है, बल्कि शरीर को लचीला भी बनाए रखता है।
सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी
अगर जोड़ों का दर्द लगातार बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते सही इलाज और दिनचर्या में बदलाव से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लंबे समय तक बैठने से जोड़ों में दर्द और अकड़न बढ़ रही है। आयुर्वेदिक औषधि आमवातारि वटी और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।