Category: Economy

  • बाजार नियामक में बदलाव, K. V. Ramana Murthy को Securities and Exchange Board of India का फुल-टाइम मेंबर नियुक्त किया गया

    बाजार नियामक में बदलाव, K. V. Ramana Murthy को Securities and Exchange Board of India का फुल-टाइम मेंबर नियुक्त किया गया

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) में अहम नियुक्ति करते हुए सीनियर अधिकारी कोम्पेला वेंकट रमना मूर्ति को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स ने आधिकारिक बयान में बताया कि 1991 बैच के इंडियन डिफेंस अकाउंट्स सर्विस (IDAS) अधिकारी रहे रमना मूर्ति को तीन साल की अवधि के लिए सेबी का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है। उनकी नियुक्ति सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंजूरी के बाद की गई है और यह उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी।

    मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने दी मंजूरी
    सरकार के बयान के अनुसार, अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट ने के.वी. रमना मूर्ति की नियुक्ति को तीन साल की अवधि या अगले आदेश तक के लिए स्वीकृत दी है। सेबी में पूर्णकालिक सदस्य के रूप में उनकी भूमिका, पूंजी बाजार से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत सुझावों, नियामक निगरानी और जांच दिशानिर्देशों में अहम होगी। इससे पहले मूर्ति रक्षा लेखा तंत्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और वे प्रोडक्शनल कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स जैसे प्रमुख पद पर भी कार्य कर चुके हैं।

    पहले भी सेबी बोर्ड से जुड़े रहे हैं मूर्ति
    के.वी. रमना मूर्ति का सेबी से कार्य पहले से रहा है। इससे पहले वे मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के प्रतिनिधि के रूप में सेबी बोर्ड में अंशकालिक सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके पास सरकारी वित्तीय प्रबंधन और नियामक उद्देश्यों का लंबा अनुभव है, जिसे अब पूंजी बाजार के नियमन और विकास में उपयोग किया जाएगा।

    सेबी बोर्ड में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या हुई चार
    रमना मूर्ति की नियुक्ति के साथ सेबी बोर्ड में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। पिछले वर्ष कुछ पद खाली होने के बाद बोर्ड में यह महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। सेबी के अन्य पूर्णकालिक सदस्यों में कमलेश चंद्र वार्ष्णेय और संदीप प्रधान शामिल हैं, जो भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) कैडर से आते हैं। इसके अलावा अमरजीत सिंह भी पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यरत हैं, जिन्होंने सेबी में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

    सेबी बोर्ड की संरचना
    सेबी के बोर्ड की संरचना में एक अध्यक्ष, चार पूर्णकालिक सदस्य और चार पूर्णकालिक सदस्य होते हैं। वर्तमान में सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे हैं, जिन्होंने 1 मार्च 2025 को यह पदभार संभाला था। अंशकालिक सदस्यों में दीप्ति गौड़ मुखर्जी, अनुराधा ठाकुर, शिरीष चंद्र मुर्मू और एन. वेंकटराम शामिल हैं। ये सदस्य विभिन्न मंत्रालयों और स्वयंसेवकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे नियामक प्रक्रिया में व्यापक दृष्टिकोण सुनिश्चित होता है।

    कैपिटल बाजार के विकास में अहम भूमिका
    सेबी के पूर्णकालिक सदस्य देश केकैपिटल बाजार के विकास, निकायों के हितों की रक्षा और वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे नीतिगत आशाजनक, बाजार निगरानी और जांच से जुड़े मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।

    इस बीच सेबी अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने हाल ही में कहा कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) भारत के कैपिटल बाजार के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फंड डीटीएच ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देकर भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • बुलियन मार्केट अपडेट: मुनाफावसूली के चलते Gold के दाम 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे

    बुलियन मार्केट अपडेट: मुनाफावसूली के चलते Gold के दाम 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे


    नई दिल्ली। अनमोल के बाजार में शुक्रवार को गिरावट का रुख देखने को मिला। सोने और चांदी की खदानों में वसुले के कारण दबाव बनाया जा रहा है, जिससे दोनों किशोरों के दाम नीचे आ गए। अंतर्राष्ट्रीय आंतरायिक से मिले फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा और रेस्टॉरेंट द्वारा मान्यता प्राप्त क्रांति के कारण घरेलू बाज़ार में भी गिरावट का माहौल बना हुआ है। इसी के साथ सोने की कीमत एक बार फिर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गयी है, जबकि चांदी की कीमत भी 2.60 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे हो गयी है।

    24 कैरेट सोने की कीमत में 1,700 रुपये से ज्यादा की गिरावट
    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (सीएए) की ओर से दोपहर 12 बजे जारी ताजा गिरावट के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सोना 1,748 रुपये सस्ता 1,58,555 रुपये प्रति 10 ग्राम। इससे पहले इसकी कीमत 1,60,303 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। सोने के समुद्र तट में यह विविधता के बीच सार्वभौम का संकेत जा रहा है। विशेषज्ञ का कहना है कि हाल के दिनों में सोने में तेज गति से देखने को मिला था, बाद में जिज्ञासा ने लाभ बुक करना शुरू कर दिया।

    22 और 18 कैरेट सोना भी हुआ सस्ता
    सोने के अन्य कैरेट में भी गिरावट दर्ज की गई। 22 कैरेट सोने का दाम 1,46,838 रुपये प्रति 10 ग्राम, प्रति 10 ग्राम कीमत 1,45,236 रुपये। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत भी 1,20,227 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम कीमत 1,18,916 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।कोल्डजे की ओर से सोने-अलावेरिया के शोरूम में दो बार रिलीज की जाती है-एक बार दोपहर 12 बजे और दूसरी बार शाम 5 बजे। इन कोटा के आधार पर देश के विभिन्न शहरों, बाजारों में दम तय हो जाता है।

    चांदी की कीमत में 8,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट
    सोने के साथ-साथ चांदी में भी तेजी से गिरावट का आकलन किया गया। चांदी का दाम 8,350 रुपये प्रति यूनिट 2,59,951 रुपये प्रति किलो रह गया। इससे पहले इसकी कीमत 2,68,301 रुपये प्रति किलो थी। सिल्वर की इंडस्ट्रीज़ में यह औद्योगिक गिरावट की मांग है, औद्योगिक और वैश्विक उद्यमों में वित्तीय रुझान के कारण मनी जा रही है। विशेषज्ञ के अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय कंपनी दबाव बना रही है तो चांदी के बाजार में भी आगे बढ़ सकती है।

    बाज़ार में भी बेचारे
    घरेलू बाज़ार बाज़ार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (MCX) पर भी सोने और चाँदी की कमी देखने को मिली। दोपहर करीब 12:30 बजे सोने का 2 अप्रैल 2026 का बायोडाटा कॉन्ट्रैक्ट 0.40 प्रतिशत प्रतिशत 1,59,632 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार हो रहा था। वहीं चांदी का 5 मई 2026 को नरसंहार अनुबंध 1.81 प्रतिशत जनसंख्या 2,63,099 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया। इसका मतलब यह है कि इंटर्नशिप का रुख सख्त हो गया है।

    अंतरराष्ट्रीय में भी दबाव
    वैश्विक बाजार में भी अनमोल साॅस्टेट्स की मंदी का रुख बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 0.64 प्रतिशत शेयर बाजार 5,092 डॉलर प्रति शेयर की बढ़त पर पहुंच गई, जबकि चांदी करीब 3 प्रतिशत शेयर बाजार में 82 डॉलर प्रति शेयर की बढ़ोतरी पर कारोबार कर रही थी।
    विशेषज्ञ का कहना है कि वैश्विक आर्थिक पर्वतमाला और वैज्ञानिकों के रुख का सीधा असर सोने-असारिया की सीमा पर है।

    डॉलर और बांड उपज बढ़ने से दबाव
    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी स्टॉक मानव मोदी के अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक स्थिति के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादकता और उत्पादन को लेकर चिंता भी बढ़ रही है।

    इंडोनेशिया में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी से देखने को मिल रही है, जिससे सोने की कीमत पर दबाव पड़ रहा है। निवेशकों का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक विकास और डॉलर की चाल के आधार पर सोने-रेसा के बांध में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
  • शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, BSE Sensex और Nifty 50 लाल निशान में

    शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, BSE Sensex और Nifty 50 लाल निशान में


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स के बीच चिंता का माहौल बन गया। कमजोर वैश्विक सेंसेक्स, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना रहा। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली हावी रही और दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार के जानकारों का मानना ​​है कि अंतरराष्ट्रीय सेंसेक्स और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।

    सेंसेक्स और निफ्टी में करीब एक प्रतिशत की गिरावट
    शुक्रवार सुबह करीब 11:40 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 निफ्टी वाला सेंसेक्स 706 अंक यानी 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,334 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 240 अंक यानी 1.02 प्रतिशत टूटकर 23,398 पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट का दायरा व्यापक रहा और कई प्रमुख सेक्टरों में तेजी से बिकवाली देखी गई। मेटल, डिफेंस, ऑटो और पीएसयू बैंक से जुड़े सप्लाई में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का समग्र सेंटिमेंट कमजोर हो गया।

    कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ा कारण
    विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति टमाटर के करीब पहुंच गई हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मज में संभावित बाधाओं के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस वजह से डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति टमाटर और ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति टमाटर के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी से आर्थिक दृष्टि से चिंता का विषय मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।

    वैश्विक सेंसेक्स की कमजोरी का भी पड़ा असर
    भारतीय बाजार पर वैश्विक सेंसेक्स का भी नेगेटिव असर देखने को मिला। एशियाई सेंसेक्स में भी शुक्रवार को कमजोरी का माहौल रहा। सियोल, टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और जकार्ता के प्रमुख शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे। वैश्विक सेंसेक्स में इस कमजोरी ने सेंसेक्स के मान्य को प्रभावित किया, जिसका असर भारतीय सेंसेक्स पर भी साफ दिखाई दिया।

    विदेशी सेंसेक्स की बिकवाली से बढ़ा दबाव
    भारतीय बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी सेंसेक्स की लगातार बिकवाली भी है। एक्सचेंज के आंकड़ों के हिसाब से विदेशी सेंसेक्स ने गुरुवार को ही 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए थे। मार्च महीने में अब तक एफआईआई भारतीय बाजार से 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं। लगातार हो रही इस बिकवाली से बाजार में तरलता पर असर पड़ रहा है और सेंसेक्स का भरोसा भी कमजोर हो रहा है।

    रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंता
    डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर बढ़ता दबाव भी बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। शुक्रवार के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 92.60 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। कमजोर होता रुपया विदेशी फर्मों के लिए जोखिम बढ़ता है, जिससे वे भारतीय बाजार से पैसा निकालने लगते हैं। उद्यमियों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें घट स्तर पर बनी रहती हैं और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता जारी रहती है, तो निकट भविष्य में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है।

  • सोने-चांदी के दामों में गिरावट, महंगाई और युद्ध ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई

    सोने-चांदी के दामों में गिरावट, महंगाई और युद्ध ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने भारत में सोना और चांदी के बाजार को प्रभावित किया है। आज सुबह 9:15 बजे के आसपास एमसीएक्स पर अप्रैल वायदा सोना 0.10% गिरकर ₹1,61,660 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी मई वायदा 0.57% की गिरावट के साथ ₹2,66,969 प्रति किलोग्राम पर थी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और सोने पर दबाव बढ़ गया। ब्लूमबर्ग के अनुसार सिंगापुर में सुबह 8:05 बजे सोने की कीमत 0.9% गिरकर $5,132.76 प्रति औंस और चांदी 1.5% गिरकर $84.44 प्रति औंस पर आ गई। इसी दौरान प्लैटिनम में 1% और पैलेडियम में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई।

    विशेषज्ञ हेबे चेन के मुताबिक, सोने की गिरावट को “हार मानने” की तरह नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह एक “अस्थायी ठहराव” है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और मजबूत डॉलर ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को टाल दिया है, जिसके चलते निवेशक फिलहाल सोने से किनारा कर रहे हैं।

    सोने का यह गिरना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह अभी भी सुरक्षित निवेश के रूप में लोकप्रिय है। हालांकि, ब्याज दरों की बढ़ोतरी और वैश्विक तनाव के कारण सोने में तत्काल लाभ की संभावना कम हो गई है। एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भी युद्ध के बाद सोने की मात्रा में गिरावट आई है, हालांकि पिछले सप्ताह इसमें कुछ निवेश दर्ज किए गए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने का सुरक्षित निवेश का दौर खत्म नहीं हुआ है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में लगभग 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय यह निवेशकों को भरोसा देता रहा है। चेन का कहना है कि फिलहाल सोने की रफ्तार थमी हुई है, लेकिन यह सिर्फ एक “सांस लेने” का दौर है, और लंबी अवधि में इसका महत्व बरकरार रहेगा।

    कीवर्ड्स: सोना, चांदी, महंगाई, डॉलर मजबूती, युद्ध

  • देश की खुदरा महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 3.2 फीसदी के स्तर पर आई

    देश की खुदरा महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 3.2 फीसदी के स्तर पर आई


    नई दिल्ली।
    फरवरी महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि जनवरी महीने में यह 2.74 फीसदी के स्तर पर रही थी। महंगाई के यह आंकड़े आधार वर्ष 2024 वाली नई श्रृंखला पर आधारित हैं।फरवरी महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि जनवरी महीने में यह 2.74 फीसदी के स्तर पर रही थी। महंगाई के यह आंकड़े आधार वर्ष 2024 वाली नई श्रृंखला पर आधारित हैं।

    सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों में बताया कि खुदरा महंगाई दर में यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य, पेय पदार्थ, और ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण आई है, जो 2024 आधार वर्ष वाली नई श्रृंखला के तहत दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार फरवरी में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 3.37 फीसदी रही है, जो कि जनवरी महीने में 2.73 फीसदी थी। शहरी इलाकों में फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.02 फीसदी रही, जो कि शहरी इलाकों में 2.75 फीसदी रही थी।

    एनएसओ के मुताबिक खाद्य महंगाई दर फरवरी में 3.47 फीसदी रही है। इस दौरान ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई दर 3.46 फीसदी और शहरी इलाकों में 3.48 फीसदी रही है। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों (सब्जियों, मांस, मछली, अंडे) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई में यह उछाल आया है। यह दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की 2-6 फीसदी की लक्षित सीमा के भीतर है।

  • ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया

    ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया

    Anil Ambani group

    नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की दो कंपनियों आरएचएफएल और आरसीएफएल की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में की गई है।

    ईडी ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि उसने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी की दो कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में की है, जिसमें देश के कई राज्यों में जमीन के टुकड़ों के रूप में 31 अचल प्रॉपर्टीज को अटैच किया गया है।

    केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि ईडी ने 11 मार्च, 2026 को रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के मामले में गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में जमीन के टुकड़ों के रूप में 31 अचल संपत्ति को प्रोविजनल तौर पर अटैच किया गया है, जिनकी कीमत 581.65 करोड़ रुपये है।

    ईडी के मुताबिक यह अटैचमेंट विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड (आर-पावर) के मामले में 6 मार्च, 2026 को किए गए सर्च ऑपरेशन के बाद किया गया है। इस ताजा कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कुल कुर्क संपत्ति 16,310 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

  • एमपी में गैस संकट गहराया: रीवा में 2000 रुपए का सिलेंडर, भोपाल-इंदौर में लंबी कतारें, होटल-रेस्टोरेंट डीजल भट्ठी पर खाना बना रहे

    एमपी में गैस संकट गहराया: रीवा में 2000 रुपए का सिलेंडर, भोपाल-इंदौर में लंबी कतारें, होटल-रेस्टोरेंट डीजल भट्ठी पर खाना बना रहे


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में LPG संकट गंभीर रूप ले चुका है। रीवा में घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी का मामला सामने आया है, जहां 900 रुपए का सिलेंडर दलालों द्वारा 1700 से 2000 रुपए तक बेचा जा रहा है। राज्यभर में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं।

    प्रदेश में पिछले तीन दिनों से कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप है। घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी में 5 से 7 दिन की देरी हो रही है। तेल कंपनियों का कहना है कि फिलहाल केवल 15% गैस ही उपलब्ध कराई जा रही है, जो मुख्य रूप से इमरजेंसी सेवाओं और घरों के लिए है।

    रीवा में उमेश शुक्ला जैसे उपभोक्ताओं ने बताया कि सुबह से कतार में लगे रहने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पाया। दलाल महंगे दामों पर सिलेंडर बेच रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता मजबूरी में अधिक पैसे खर्च कर रहे हैं।

    कमर्शियल सिलेंडर अब केवल अस्पताल, सेना-पुलिस कैंटीन, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट स्थित कैंटीन, बस स्टैंड के भोजनालय को ही मिलेगा। वहीं, होटल, मैरिज गार्डन और सराफा कारीगरों को सप्लाई नहीं हो पा रही। छिंदवाड़ा में शादियों के आयोजन के लिए रसोई गैस की कमी के कारण डीजल भट्ठियों पर खाना बनाना पड़ रहा है।

    भोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली ने बताया कि राजधानी के डेढ़ हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट हर रोज 2 से 2.5 हजार सिलेंडर उपयोग करते हैं। वर्तमान स्टॉक केवल 48 घंटे का ही काम चला पाएगा।

    सिर्फ सप्लाई की कमी ही नहीं, बल्कि घरेलू सिलेंडर के लिए भी लंबी वेटिंग है। भोपाल के कई इलाकों में सिलेंडर के लिए भाग-दौड़ और भीड़ देखी गई। इंदौर में कमर्शियल सिलेंडर के संकट के कारण होटल और रेस्टोरेंट लकड़ी, कंडा और कोयला जैसे पारंपरिक ईंधन पर खाना बना रहे हैं।

    मार्च में प्रदेश भर में 20,000 से अधिक शादियां आयोजित होने वाली हैं, जिनमें कमर्शियल सिलेंडर का भारी उपयोग होता है। सिलेंडर की कमी के कारण खाने की तैयारी में बाधा आ रही है। इसके अलावा, किराना और खाद्य सामग्री की कीमतों में भी तेजी आई है। हरी मूंग, मसूर, चना और ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में 100 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। पिस्ता, अंजीर, केसर और अन्य महंगे ड्राई फ्रूट्स की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

    सरकार का कहना है कि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई सामान्य है और पेट्रोलियम उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार ने देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर गैस कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए हैं।

    संकट से निपटने के लिए सरकार ने पांच अहम कदम उठाए हैं:

    हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।

    एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत गैस की जमाखोरी पर रोक।

    घरेलू सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन बाद ही होगी।

    डिलीवरी एजेंटों द्वारा OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य।

    LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश, अतिरिक्त उत्पादन केवल घरेलू गैस के लिए।

    इधर, ऑयल कंपनियों की सप्लाई के बाद भी होटल और रेस्टोरेंट 48 घंटे के स्टॉक पर निर्भर हैं। सरकार की तरफ से लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद आम उपभोक्ताओं और व्यवसायियों में चिंता बरकरार है।

  • देशभर में LPG की किल्लत, सिलेंडर की कालाबाजारी और इंडक्शन की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

    देशभर में LPG की किल्लत, सिलेंडर की कालाबाजारी और इंडक्शन की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। देशभर में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच एलपीजी (LPG) की किल्लत ने आम जनता और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं, वहीं घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडरों की कालाबाजारी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।

    बिहार के कई शहरों में 1000 रुपए वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत अब1800 तक पहुँच गई है। मध्य प्रदेश में स्थिति और गंभीर है, यहाँ 1900 रुपए वाले कॉमर्शियल सिलेंडर को4000 में बेचा जा रहा है। इस बढ़ती कीमत और आपूर्ति संकट के कारण लोगों को गैस सिलेंडर पाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    सप्लाई की कमी के चलते कई होटलों और रेस्टोरेंट्स ने इंडक्शन पर खाना बनाने की ओर रुख किया है। इसके परिणामस्वरूप बाजार में इंडक्शन की मांग में करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है। गैस की कमी और कालाबाजारी ने ऊर्जा सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों पर गंभीर प्रभाव डाला है।

    सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि वे एलपीजी के सही उपयोग और अनुचित मूल्य वृद्धि से बचने के लिए सतर्क रहें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और संघर्ष की वजह से एलपीजी की उपलब्धता अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है, लेकिन सरकार उत्पादन बढ़ाकर और आपूर्ति चैन को सुचारू बनाए रखकर समस्या का समाधान कर रही है।

    इस संकट के बीच जनता और व्यवसायिक प्रतिष्ठान ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जैसे कि इंडक्शन, पीएनजी, और अन्य वैकल्पिक ईंधन, ताकि खाना बनाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी की जा सकें।
    घरेलू सिलेंडर के दाम 1000 से 1800 तक बढ़े, कॉमर्शियल सिलेंडर1900 से4000 पर।इंडक्शन की मांग 50% बढ़ी।सरकार ने कालाबाजारी रोकने और आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए।ऊर्जा संकट के बीच वैकल्पिक ईंधनों पर ध्यान केंद्रित।

  • एविएशन क्षेत्र का आंकड़ा, भारत में 11,000 से अधिक पायलट, महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 1,900

    एविएशन क्षेत्र का आंकड़ा, भारत में 11,000 से अधिक पायलट, महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 1,900


    नई दिल्ली। भारत में 11,000 से अधिक पायलट देश की बड़ी घरेलू एयरलाइंस में काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग 1,900 महिला पायलट शामिल हैं। यह जानकारी सरकार ने गुरुवार को संसद में दी। भारतीय विमानन कंपनियों में कुल 11,394 पायलट कार्यरत हैं, जिनमें 1,871 महिला पायलट शामिल हैं।

    एयरलाइनवार पायलट आंकड़े
    देश की प्रमुख एयरलाइनों में पायलटों की संख्या इस प्रकार है:

    इंडिगो: सबसे बड़ी एयरलाइन, 5,200 पायलट, जिनमें 970 महिला पायलट शामिल।

    एयर इंडिया: 3,123 पायलट, जिनमें 508 महिला पायलट।

    एयर इंडिया एक्सप्रेस: 1,820 पायलट, 234 महिलाएं।

    अकासा एयर: 761 पायलट, 76 महिलाएं।

    स्पाइसजेट: 375 पायलट, 58 महिलाएं।

    एलायंस एयर: 115 पायलट, 25 महिलाएं।

    सरकार ने यह भी बताया कि विदेशी पायलटों की तादाद कुछ एयरलाइनों में है। एलायंस एयर में 15, एयर इंडिया एक्सप्रेस में 48 और इंडिगो में 29 विदेशी पायलट कार्यरत हैं।

    पायलट-से-विमान अनुपात
    विभिन्न एयरलाइनों में पायलट-से-विमान अनुपात अलग है:

    स्पाइसजेट: 9.4 पायलट प्रति विमान

    अकासा एयर: 9.33

    एयर इंडिया: 9.1

    एयर इंडिया एक्सप्रेस: 8.8

    इंडिगो: 7.6

    एलायंस एयर: सबसे कम, 6 पायलट प्रति विमान

    इससे एयरलाइनों में फ्लाइट ऑपरेशन के लिए पायलट उपलब्धता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    महिला पायलटों का बढ़ता योगदान
    महिला पायलटों की संख्या भारतीय विमानन क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइनों में महिला पायलट अब टीम की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बन चुकी हैं। यह न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

    भारतीय विमानन क्षेत्र में विदेशी पायलट
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ एयरलाइनों ने विदेशी पायलटों को काम पर रखा है। यह कदम तकनीकी विशेषज्ञता, अंतरराष्ट्रीय मानकों और वैश्विक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

    नियमों में कड़ाई का प्रस्ताव
    इस बीच, डीजीसीए ने भारत से आने-जाने वाली विदेशी एयरलाइनों के लिए नियमों को कड़ा करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण, स्थानीय प्रतिनिधियों के लिए कानूनी जवाबदेही, और औपचारिक यात्री शिकायत निवारण प्रणाली की स्थापना शामिल है। इसका उद्देश्य एयरलाइन संचालन में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाना है।

    संसद में दिए गए आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत की प्रमुख एयरलाइंस में पायलटों की संख्या और उनका वितरण संतुलित है। महिला पायलटों की बढ़ती संख्या और पायलट-से-विमान अनुपात की जानकारी एयरलाइनों के सुरक्षित और सतत संचालन के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं। साथ ही, डीजीसीए के नए नियमों से यात्रियों और पायलट दोनों के लिए सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

  • भारत में खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.21% रही, अरहर, लहसुन और आलू के दाम में गिरावट

    भारत में खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.21% रही, अरहर, लहसुन और आलू के दाम में गिरावट


    नई दिल्ली। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि फरवरी 2026 में भारत में खुदरा महंगाई दर (CPI) 3.21 प्रतिशत रही, जो जनवरी की 2.74 प्रतिशत के मुकाबले 0.47 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में महंगाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बावजूद कई मुख्य खाद्य वस्तुओं के दामों में गिरावट ने आम लोगों को कुछ राहत दी है।
    ग्रामीण और शहरी इलाकों में महंगाई का हाल
    मंत्रालय के डेटा के अनुसार, फरवरी में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह 2.73 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी इलाकों में महंगाई दर फरवरी में 3.02 प्रतिशत रही, जो जनवरी की 2.75 प्रतिशत से बढ़ी है। यह अंतर दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में महंगाई शहरी क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा अधिक रही।

    खाद्य महंगाई दर में बदलाव
    फरवरी में खाद्य महंगाई दर 3.47 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में यह 3.46 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 3.48 प्रतिशत रही। खासकर, लहसुन (-31.09 प्रतिशत), प्याज (-28.20 प्रतिशत), आलू (-18.46 प्रतिशत), अरहर (-16 प्रतिशत) और लीची (-11.52 प्रतिशत) के दाम सालाना आधार पर सबसे अधिक कम हुए। इससे आम घरेलू बजट पर सकारात्मक असर पड़ा।

    वहीं, जिन वस्तुओं के दाम सबसे अधिक बढ़े, उनमें सिल्वर ज्वेलरी (160.84 प्रतिशत), गोल्ड/डायमंड/प्लेटिनम ज्वेलरी (48.16 प्रतिशत), कोपरा (46.16 प्रतिशत), टमाटर (45.29 प्रतिशत) और फूलगोभी (43.77 प्रतिशत) शामिल हैं। ज्वेलरी और कुछ सब्जियों की कीमतों में तेज वृद्धि ने महंगाई के आंकड़ों में अलग रुझान दिखाया।

    अन्य सेक्टरों में महंगाई
    फरवरी में विभिन्न सेक्टरों में महंगाई दर इस प्रकार रही:

    फूड एंड बेवरेज: 3.35 प्रतिशत

    पान और तंबाकू: 3.49 प्रतिशत

    कपड़े और जूते: 2.81 प्रतिशत

    हाउसिंग, पानी, बिजली, गैस और अन्य फ्यूल: 1.52 प्रतिशत

    एजुकेशन सर्विसेज: 3.33 प्रतिशत

    राज्यों में महंगाई की स्थिति
    50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में सबसे अधिक महंगाई वाले पांच राज्य हैं:

    तेलंगाना: 5.02 प्रतिशत

    राजस्थान: 3.53 प्रतिशत

    केरल: 3.50 प्रतिशत

    आंध्र प्रदेश: 3.45 प्रतिशत

    पश्चिम बंगाल: 3.44 प्रतिशत

    डेटा संग्रह और विश्वसनीयता
    मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा संगठन (NSO) के फील्ड स्टाफ ने 1407 शहरी बाजारों (ऑनलाइन बाजार सहित) और 1465 गांवों से वास्तविक समय मूल्य डेटा एकत्र किया। फरवरी 2026 के दौरान, 100 प्रतिशत ग्रामीण और शहरी बाजारों से मूल्य एकत्र किए गए, जबकि बाजारवार रिपोर्ट किए गए मूल्य ग्रामीण बाजारों के लिए 99.89 प्रतिशत और शहरी बाजारों के लिए 99.78 प्रतिशत थे।

    फरवरी 2026 में महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन लहसुन, आलू, प्याज और अरहर जैसे प्रमुख खाद्य पदार्थों के दामों में गिरावट ने आम जनता को राहत दी। वहीं, ज्वेलरी और कुछ सब्जियों की कीमतों में तेज वृद्धि ने महंगाई में मिश्रित रुझान दिखाया। सरकारी आंकड़ों की व्यापक निगरानी और वास्तविक समय मूल्य डेटा संग्रह से यह सुनिश्चित होता है कि महंगाई की सही स्थिति आम जनता तक पहुंच सके।