Category: Economy

  • शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में, बैंकिंग और रियल्टी शेयर लीड..

    शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में, बैंकिंग और रियल्टी शेयर लीड..


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में कमजोर दिखा और दोपहर तक लाल निशान में रहा। दोपहर 1 बजे तक सेंसेक्स 588 अंक यानी 0.72 प्रतिशत फिसलकर 79,427 पर और निफ्टी 154 अंक यानी 0.62 प्रतिशत कमजोरी के साथ 24,612 पर कारोबार कर रहा था।

    इस गिरावट की अगुवाई बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने की। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.85 प्रतिशत और निफ्टी बैंक इंडेक्स 1.31 प्रतिशत कमजोर हुए। इसके अलावा ऑटो, सर्विसेज और कंज्यूमर सेक्टर पर भी दबाव देखा गया। हालांकि, डिफेंस, एनर्जी, पीएसई, ऑयल एंड गैस, कमोडिटी और मेटल इंडेक्स हरे निशान में बने रहे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध है। युद्ध के लंबा चलने से वैश्विक एनर्जी सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट नकारात्मक हो गया है।

    युद्ध के प्रभाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है। डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 80.39 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 84.84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से हटकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोने की कीमत 0.81 प्रतिशत बढ़कर 5,120 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.96 प्रतिशत मजबूत होकर 84.61 डॉलर प्रति औंस पर थी।

    अमेरिकी बाजार में भी गिरावट ने भारतीय बाजार की कमजोरी को बढ़ावा दिया। गुरुवार को डाओ इंडेक्स 1.61 प्रतिशत और नैस्डैक 0.26 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। इससे एफआईआई और घरेलू निवेशकों के बीच बिकवाली का दबाव बढ़ा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। गुरुवार को एफआईआई ने 3,752.52 करोड़ रुपए के इक्विटी शेयर बेचे। इस बिकवाली ने भारतीय बाजार में लगातार कमजोरी का माहौल बनाया और निवेशकों में सतर्कता बढ़ा दी।

    विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की बेचैनी का असर अभी कुछ समय तक जारी रह सकता है, खासकर जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में स्थिरता नहीं आती। ऐसे समय में बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहेगा, जबकि सोना, चांदी और एनर्जी सेक्टर निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बने

  • PNB ने ATM कैश लिमिट आधी की: 1 अप्रैल से सिर्फ 50,000 रुपये निकाल सकेंगे कुछ कार्ड्स से..

    PNB ने ATM कैश लिमिट आधी की: 1 अप्रैल से सिर्फ 50,000 रुपये निकाल सकेंगे कुछ कार्ड्स से..


    नई दिल्ली । पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने ग्राहकों की सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। बैंक ने 1 अप्रैल, 2026 से चुनिंदा डेबिट कार्ड्स से ATM कैश निकालने की लिमिट आधी कर दी है। इसका मकसद फ्रॉड और हैकिंग के जोखिम को कम करना है, साथ ही ग्राहकों को कैश के बजाय सुरक्षित डिजिटल और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहित करना है।

    नई ATM लिमिट के तहत जिन कार्ड्स की पहले डेली लिमिट 1 लाख रुपये थी, उन्हें अब 50,000 रुपये तक सीमित कर दिया गया है। वहीं प्रीमियम कार्ड्स की लिमिट 1.5 लाख से घटाकर 75,000 रुपये कर दी गई है। अन्य सभी कार्ड्स पर कैश और ऑनलाइन/पॉइंट ऑफ सेल ट्रांजैक्शन लिमिट पहले जैसी ही रहेगी।

    बैंक का मानना है कि कैश निकालने की सीमा कम होने से ग्राहकों के पैसे सुरक्षित रहेंगे और फ्रॉड या हैकिंग जैसी घटनाओं में संभावित नुकसान भी घटेगा। इसके अलावा यह कदम डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने में मदद करेगा। PNB के अधिकारी बताते हैं कि ग्राहक अब अपनी नई लिमिट के अनुसार मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, वॉट्सएप बैंकिंग या IVR के माध्यम से लिमिट को बदल या रिसेट कर सकते हैं।

    मोबाइल एप के जरिए लिमिट बदलने का तरीका काफी सरल है। सबसे पहले PNBOne एप में लॉगिन करें और Services ऑप्शन चुनें। इसके बाद Debit Cards सेक्शन खोलें और Update ATM Limit पर क्लिक करें। अब अपना अकाउंट नंबर और कार्ड सिलेक्ट करें, नई लिमिट भरें और ट्रांजैक्शन पासवर्ड डालकर कन्फर्म करें। इस तरह आपकी ATM लिमिट तुरंत अपडेट हो जाएगी।

    ATM विड्रॉल लिमिट वह अधिकतम राशि होती है, जिसे आप 24 घंटे में ATM से निकाल सकते हैं। बैंक सुरक्षा कारणों से अलग-अलग कार्ड्स पर अलग-अलग लिमिट निर्धारित करता है। PNB का यह नया बदलाव विशेष रूप से उन ग्राहकों को प्रभावित करेगा जो बड़े पैमाने पर कैश ट्रांजैक्शन करते हैं। हालांकि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की बढ़ती स्वीकार्यता के चलते यह बदलाव समयानुकूल माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कैश लिमिट में यह कटौती केवल सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी की गई है। इससे ग्राहक सुरक्षित तरीके से अपने पैसे का प्रबंधन कर सकेंगे और डिजिटल बैंकिंग के उपयोग में वृद्धि होगी। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक अपनी आवश्यकता के अनुसार लिमिट को बढ़ा या घटा सकते हैं, जिससे सुविधा और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।

    PNB का यह कदम देश के अन्य बैंकों के लिए भी एक संकेत है कि कैश निकालने की सीमा नियंत्रित करने से न केवल फ्रॉड की घटनाओं को रोका जा सकता है बल्कि डिजिटल और सुरक्षित बैंकिंग को भी बढ़ावा मिलता है। इस बदलाव के साथ, बैंकिंग ग्राहक अधिक सतर्क और तकनीकी रूप से सशक्त बनेंगे।

  • नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

    नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

    नई दिल्ली /मुंबई की एक विशेष अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक के ₹23,780 करोड़ के काले घोटाले में नीरव मोदी के दो भाइयों, निहाल और नीशाल मोदी, को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि उन्हेंभगोड़ा आर्थिक अपराधीFugitive Economic Offender घोषित क्यों न किया जाए। नोटिस के तहत दोनों को 7 मई तक अपना जवाब पेश करना होगा।

    प्रवर्तन निदेशालयED ने अदालत में अर्जी लगाकर दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी। विशेष जज एवी गुजराती ने यह नोटिस जारी किया, और न सिर्फ निहाल और नीशाल, बल्कि नीरव मोदी की कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों आदित्य नानावती और संदीप मिस्त्री को भी इसी प्रकार का नोटिस भेजा गया।

    PNB घोटाला भारत के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जाता है। हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंगLoUs और फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिटFLCs के जरिए ₹23,780 करोड़ से अधिक की हेराफेरी की। इस मामले में नीरव मोदी फिलहाल लंदन की जेल में हैं, जबकि मेहुल चोकसी बेल्जियम में प्रत्यर्पण प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।

    नीरव मोदी के भाइयों पर भी गंभीर आरोप हैं। निहाल मोदी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों और विदेशी लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपए छिपाने में भूमिका निभाई। वे अमेरिका में गिरफ्तार हैं और प्रत्यर्पण प्रक्रिया में हैं। वहीं, नीशाल मोदी दुबई स्थित फर्जी कंपनियों में डमी पार्टनर्स की नियुक्ति और 2011-2013 के दौरान कई फर्जी कंपनियों में सिग्नेटरी या लाभार्थी बने रहने में शामिल थे।

    अगर अदालत 7 मई तक उनके संतोषजनक जवाब नहीं पाती है, तो दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित किया जाएगा। भगोड़ा घोषित होने के बाद भारत सरकार उनकी देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को कुर्क या जब्त कर सकेगी।

    नीरव मोदी को 2019 में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। मेहुल चोकसी के खिलाफ कार्रवाई अभी लंबित है। इस नए नोटिस के साथ मोदी परिवार के लिए कानूनी जाल और सख्त हो गया है। कोर्ट के इस कदम से न केवल संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि उनकी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों पर भी कड़ी नजर रखी जा सकेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भारत में बड़े वित्तीय घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। इसके साथ ही यह संकेत देता है कि प्रवर्तन एजेंसियां भगोड़ा घोषित करने और अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने में तेजी ला रही हैं।

    नीरव मोदी और उनके परिवार के खिलाफ यह मामला अब कानूनी रूप से निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है, और आगामी महीनों में इस घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर नई कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

  • एजेंट अर्थव्यवस्था का भविष्य: भारत में एआई और क्रिप्टो का सामंजस्य और नीति की भूमिका

    एजेंट अर्थव्यवस्था का भविष्य: भारत में एआई और क्रिप्टो का सामंजस्य और नीति की भूमिका

    नई दिल्ली । जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ रहा है, भारत में एआई और क्रिप्टो का संगम एक नई तकनीकी संरचना को जन्म दे रहा है। शुरुआती दौर में जब जनरेटिव एआई ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, तब क्रिप्टो क्षेत्र में प्रतिक्रियाएं सतही और ट्रेंड आधारित थीं। “एआई टोकन” तेजी से फैल रहे थे, लेकिन उनका वास्तविक उपयोग सीमित नजर आता था। 2026 की शुरुआत तक यह दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा और अब एक अधिक गंभीर दिशा उभर रही है।

    मूल सवाल केवल बड़े भाषा मॉडलों को ब्लॉकचेन पर रखने का नहीं है। असली चुनौती यह है कि ब्लॉकचेन नेटवर्क को भरोसेमंद आधारभूत ढांचे के रूप में इस्तेमाल किया जाए-ऐसा ढांचा जो एआई आधारित गतिविधियों को प्रमाणित कर सके, प्रोत्साहनों को संतुलित करे, डिजिटल संसाधनों का मूल्य तय कर सके और उन प्रतिभागियों के बीच ऑडिट योग्य रिकॉर्ड बनाए रख सके, जो एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते।

    एआई और ब्लॉकचेन अलग-अलग समस्याओं के समाधान के लिए बनाए गए हैं। एआई स्वचालन, सामग्री निर्माण और बड़े पैमाने पर निर्णय लेने की क्षमता देता है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौतियों को नहीं हल करता। इसके विपरीत, सार्वजनिक ब्लॉकचेन धीमे और सीमित होते हुए भी सत्यापन, नियमों का अनुपालन और अविश्वास की स्थिति में साझा डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखते हैं। इस कारण, दोनों तकनीकों का संयोजन व्यावहारिक जरूरत बनकर सामने आ रहा है-एआई बुद्धिमत्ता और क्रिप्टो भरोसे का आधार प्रदान करता है।

    वैश्विक उदाहरण इस दिशा को दर्शाते हैं। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स का प्रोजेक्ट एटलस यूरोपीय केंद्रीय बैंकों के सहयोग से क्रिप्टो प्रवाह का विश्लेषण करता है और नियामकीय निगरानी को अधिक स्पष्ट बनाता है। सिंगापुर में TokenAIse जैसे जनरेटिव एआई उपकरण क्रिप्टो टोकनाइजेशन को समझने और अपनाने में मदद कर रहे हैं। वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसी परियोजनाएं ब्लॉकचेन का उपयोग औद्योगिक अनुपालन, डिजिटल सत्यापन और उत्पाद जीवनचक्र की पारदर्शिता के लिए कर रही हैं।

    भारत के लिए यह महत्वपूर्ण नीतिगत मोड़ है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 और फ्रंटियर एआई एजेंडा ने साफ संदेश दिया कि एआई उपयोगी, समावेशी और जवाबदेह होना चाहिए। वहीं क्रिप्टो नीति अभी भी अनुपालन-केंद्रित है-कड़े एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियम और रिपोर्टिंग बाध्यताएं हैं। इस स्थिति में अवसर है कि क्रिप्टो को केवल ट्रेडिंग गतिविधि के बजाय एआई शासन और भरोसेमंद डिजिटल ढांचे के लिए इस्तेमाल किया जाए।

    क्यों जरूरी है? क्योंकि डीपफेक, स्वचालित फ़िशिंग और बॉट आधारित ठगी जैसी धोखाधड़ी तेजी से फैल रही है। पारदर्शी लेजर लेनदेन, ऑन-चेन निगरानी और गोपनीयता-संवेदनशील पहचान प्रणालियां इस चुनौती का समाधान दे सकती हैं। एफएटीएफ का ध्यान स्थिर मुद्राओं और ट्रैवल रूल अनुपालन पर भी इसी दिशा में संकेत देता है।

    भारत में एआई और क्रिप्टो का भविष्य केवल नए टोकनों या विकेंद्रीकरण से तय नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि डिजिटल प्रणालियों पर कितना भरोसा किया जा सकता है। एक जिम्मेदार एजेंट अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए ब्लॉकचेन भरोसे की परत बन सकता है और एआई को सुरक्षित, उत्तरदायी और ऑडिट योग्य ढांचे में जोड़ सकता है। यही भारत को नई तकनीकी संरचना में नेतृत्व देने का वास्तविक अवसर है।

  • भारत को वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में लाने की तैयारी : पीएम मोदी ने निर्यात, तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर दिया

    भारत को वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में लाने की तैयारी : पीएम मोदी ने निर्यात, तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर दिया


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में निर्यात आधारित कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाए और इसे वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ा जाए। इससे न केवल नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि किसानों को सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने यह बात ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कही।

    प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार और रणनीतिक स्तंभ है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की दूसरी तिमाही की शुरुआत हो चुकी है और कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना समय की मांग है। वैश्विक बाजार में मांग तेजी से बदल रही है और इसलिए अब चर्चा निर्यात आधारित खेती, फसल विविधीकरण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर केंद्रित होनी चाहिए।

    पीएम मोदी ने केंद्रीय बजट 2026-27 में किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई अहम सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों, उद्योग जगत और किसानों से मिलकर काम करने की अपील की ताकि उच्च मूल्य वाली खेती को बढ़ावा दिया जा सके और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्ता और ब्रांडिंग मानकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    प्रधानमंत्री ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही। उनका कहना था कि इससे समग्र स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने मत्स्य पालन को भविष्य का बड़ा निर्यात आधारित क्षेत्र बताते हुए कहा कि इसमें नए बिजनेस मॉडल और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ानी होगी।

    पीएम मोदी ने उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे काजू, नारियल, चंदन, अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पशुपालन और तटीय मत्स्य क्षेत्र में निजी निवेश और उद्यमियों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एसएचई-मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की भी बात कही।

    प्रधानमंत्री ने डिजिटल कृषि के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में अब तक 7.63 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 23.5 करोड़ फसल प्लॉट का सर्वे किया गया है।

    केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च मूल्य वाली खेती, तकनीक आधारित खेती और कृषि से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और कृषि के आधुनिकीकरण के लिए कई लक्षित कदमों की घोषणा की। बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 1,62,671 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से लगभग 7 प्रतिशत अधिक है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की खेती को समर्थन मिलेगा। इन कदमों से किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत की कृषि को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

  • डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    नई दिल्ली में जारी रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। कुल ऑनलाइन लेनदेन में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सरकारी बैंकों का आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि निजी बैंकों की वृद्धि केवल 2.7 प्रतिशत रही।

    केयरएज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जनवरी में क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इसी अवधि में सरकारी बैंकों ने बकाया कार्डों में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो निजी बैंकों की तुलना में काफी अधिक है।

    डिजिटल भुगतान में तेजी का सबसे बड़ा योगदान ई-कॉमर्स का रहा है, जो कुल लेनदेन का 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बना। इस बीच, एसबीआई ग्रुप का कार्ड बेस भी मजबूत हुआ और सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 2.19 करोड़ कार्ड धारकों तक पहुँच गया।

    इसके विपरीत विदेशी बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट में इसका कारण उनकी प्रीमियम ग्राहक रणनीतियों से जोड़ा गया है।

    हालांकि, विवेकाधीन खरीदारी में साल के अंत में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे समग्र वृद्धि में कुछ नरमी के संकेत मिले। महीने-दर-महीने आधार पर खर्च में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष जनवरी में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि के उच्च आधार प्रभाव के कारण कम रही।

    कुल बकाया क्रेडिट कार्डों की संख्या जनवरी 2025 में 10.9 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 11.7 करोड़ हो गई। यह सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बैलेंस 2.95 लाख करोड़ रुपए रहा।

    निजी क्षेत्र के बैंकों ने कार्ड जारी करने में अग्रणी भूमिका निभाई और सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका श्रेय उनके मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स तथा फिनटेक प्लेटफॉर्म के साथ सह-ब्रांडेड साझेदारियों को दिया गया है।

    वित्त वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रेडिट कार्ड पर खर्च में लगभग 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई और कुल खर्च 19.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। यह संकेत देता है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और सरकारी बैंकों ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।
  • वियतनाम और जापान के लिए सीधी नई उड़ानें शुरू करेगी एयर इंडिया

    वियतनाम और जापान के लिए सीधी नई उड़ानें शुरू करेगी एयर इंडिया


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह की अगुवाई वाली विमानन कंपनी एयर इंडिया ने वियतनाम और जापान के लिए अपनी नई उड़ानें शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत कंपनी अपने नेटवर्क विस्तार के तहत वियतनाम के हनोई और टोक्यो के हनेडा के लिए नॉन स्टॉप सर्विस को जोड़ेगी।

    कंपनी ने बताया कि एयर इंडिया 01 मई से दिल्ली से वियतनाम के हनोई के लिए और 15 जून से मुंबई से टोक्यो के हानेडा के लिए अपनी सीधी उड़ानें शुरू करने वाली है। एयर इंडिया ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, मरीन ड्राइव के सनसेट से लेकर शिबुया की रौनक भरी रातों तक जापान अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है। हम 15 जून से मुंबई और टोक्यो हानेडा के बीच हफ़्ते में 4x नॉन-स्टॉप फ्लाइट की शुरुआत कर रहे हैं, जिससे यात्रियों के लिए जापान के कल्चर, एनर्जी और हमेशा रहने वाले आकर्षण का अनुभव करना आसान हो जाएगा। एयरलाइन ने कहा कि बुकिंग अभी शुरू है।

  • तीन दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में आयी तेजी, सेंसेक्स 414 अंक उछला

    तीन दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में आयी तेजी, सेंसेक्स 414 अंक उछला


    मुंबई । लगातार तीन दिन की गिरावट के बाद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में तेजी देखने को मिली। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 414.29 अंक बढ़कर 79,530.48 अंक पर खुला।

    निफ्टी में भी मजबूती
    इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 135.45 अंक चढ़कर 24,615.95 अंक पर खुला। खबर लिखे जाने तक यह 123.95 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,604.45 अंक पर रहा।

    रुपया भी मजबूती के साथ खुला
    विदेशी मुद्रा बाजार में भी सुधार देखने को मिला। बुधवार के ऐतिहासिक निचले स्तर से उबरते हुए रुपया 45 पैसे की मजबूती के साथ 91.62 रुपये प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा है।

    अधिकांश सेक्टरों में तेजी
    आईटी और एफएमसीजी को छोड़कर सभी प्रमुख समूहों के सूचकांक हरे निशान में हैं। ऑटो, धातु, फार्मा, रियल्टी, स्वास्थ्य, मीडिया, बैंकिंग और रसायन सेक्टरों में बढ़त दर्ज की गई।

    सेंसेक्स की बढ़त में शामिल प्रमुख शेयर
    सेंसेक्स में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी, सनफार्मा, एयरटेल, एनटीपीसी और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। वहीं आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, इन्फोसिस और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर फिलहाल नीचे चल रहे हैं।

  • आज पेट्रोल-डीजल के दाम: दिल्ली मुंबई कोलकाता से लेकर हैदराबाद तक लेटेस्ट रेट्स

    आज पेट्रोल-डीजल के दाम: दिल्ली मुंबई कोलकाता से लेकर हैदराबाद तक लेटेस्ट रेट्स


    नई दिल्ली :सूरज की पहली किरणों के साथ ही न केवल दिन की शुरुआत होती है बल्कि आम आदमी की जेब पर असर डालने वाले पेट्रोल और डीजल के नए रेट भी सुबह 6 बजे अपडेट होते हैं देश की प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यानी इंडियन ऑयल बीपीसीएल और एचपीसीएल इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये के एक्सचेंज रेट के आधार पर रोजाना लेटेस्ट रेट जारी करती हैं यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराती है ताकि कोई गुमराह न हो

    आज आपके शहर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं नई दिल्ली में पेट्रोल 94.72 और डीजल 87.62 मुंबई में पेट्रोल 104.21 और डीजल 92.15 कोलकाता में पेट्रोल 103.94 और डीजल 90.76 चेन्नई में पेट्रोल 100.75 और डीजल 92.34 अहमदाबाद में पेट्रोल 94.49 और डीजल 90.17 बेंगलुरु में पेट्रोल 102.92 और डीजल 89.02 हैदराबाद में पेट्रोल 107.46 और डीजल 95.70 जयपुर में पेट्रोल 104.72 और डीजल 90.21 लखनऊ में पेट्रोल 94.69 और डीजल 87.80 पुणे में पेट्रोल 104.04 और डीजल 90.57 चंडीगढ़ में पेट्रोल 94.30 और डीजल 82.45 इंदौर में पेट्रोल 106.48 और डीजल 91.88 पटना में पेट्रोल 105.58 और डीजल 93.80 सूरत में पेट्रोल 95.00 और डीजल 89.00 नासिक में पेट्रोल 95.50 और डीजल 89.50

    पिछले दो साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है इसके पीछे केंद्र और कई राज्यों द्वारा लागू की गई टैक्स में कटौती एक मुख्य कारण है मई 2022 के बाद से यह स्थिरता बनी हुई है जबकि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी है स्थिरता उपभोक्ताओं के लिए राहत का कारण बनी हुई है

    फ्यूल की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं सबसे पहला और बड़ा कारण है क्रूड ऑयल की कीमतें पेट्रोल और डीजल मुख्य रूप से क्रूड ऑयल से बनते हैं जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं इसका असर भारतीय मार्केट पर भी पड़ता है दूसरा कारण डॉलर के मुकाबले रुपये की ताकत है क्योंकि भारत ज्यादातर क्रूड आयात डॉलर में करता है अगर रुपया कमजोर होता है तो कीमतें बढ़ जाती हैं तीसरा कारण सरकारी टैक्स और ड्यूटी है केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं यही कीमतों में अंतर का मुख्य कारण है

    इसके अलावा रिफाइनिंग कॉस्ट भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाती है क्रूड ऑयल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया में लागत आती है यह लागत क्रूड ऑयल की क्वालिटी और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है अंत में फ्यूल की डिमांड और सप्लाई का बैलेंस भी कीमतें तय करता है त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में खपत बढ़ जाती है जिससे दाम में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है

    अगर आप मोबाइल से अपने शहर के पेट्रोल और डीजल के दाम जानना चाहते हैं तो प्रक्रिया आसान है इंडियन ऑयल कस्टमर अपने शहर कोड को RSP के साथ 9224992249 पर भेज सकते हैं बीपीसीएल कस्टमर 9223112222 पर RSP टेक्स्ट करें और एचपीसीएल कस्टमर 9222201122 पर HP Price भेजकर अपने शहर की कीमतें जान सकते हैं

    रोजाना अपडेट रहना न सिर्फ समझदारी है बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता सही और पारदर्शी जानकारी के आधार पर अपने खर्च का प्रबंधन कर सकें पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे आपकी जेब पर असर डालती हैं इसलिए समय पर जानकारी रखना महत्वपूर्ण है

  • बीमा लेना होगा सस्ता… भारी कमीशन में चलेगी कैची…. बड़े सुधार लागू करने की तैयारी में IRDA

    बीमा लेना होगा सस्ता… भारी कमीशन में चलेगी कैची…. बड़े सुधार लागू करने की तैयारी में IRDA


    नई दिल्ली।
    अगर आपको लगता है कि बीमा (Insurance) लेना महंगा (Costly) हो गया है, तो यह खबर आपके काम की है। बीमा नियामक इरडा (Insurance Regulator IRDA) अगले 4-6 महीनों में ऐसे कई बड़े सुधार लागू करने जा रहा है, जिससे बीमा किफायती होगा और आपको पैसे का पूरा दम मिलेगा। इन बदलावों की सबसे बड़ी मार उन भारी-भरकम कमीशनों पर पड़ेगी, जो बीमा कंपनियां एजेंटों और बैंकों को देती हैं।


    बीमा सुगम: एक प्लेटफॉर्म, सबके लिए

    जल्द ही लॉन्च होगा बीमा सुगम – एक डिजिटल मार्केटप्लेस जहां आप अमेजॉन-फ्लिपकार्ट की तरह सभी बीमा कंपनियों की पॉलिसियां कंपेयर कर सकेंगे। कीमत, फीचर्स, क्लेम सेटलमेंट रेशियो – सब कुछ एक क्लिक पर। जब सबकुछ खुला होगा, कंपनियों को अपने दम पर प्रीमियम कम रखना होगा।

    1 लाख करोड़ रुपये का सवाल
    सोचिए, वित्त वर्ष 2025 में अकेले कमीशन के नाम पर बीमा कंपनियों ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये बांटे। यही वह पैसा है जो आपकी जेब से प्रीमियम के रूप में निकलता है। आरबीआई और इरडा दोनों ने इस पर चिंता जताई है। अब नियामक इस वितरण लागत को तर्कसंगत बनाने पर काम कर रहा है।

    30% खर्च पर कैंची चलेगी
    फिलहाल बीमा कंपनियां आपके प्रीमियम का 30% हिस्सा डिस्ट्रिब्यूशन और एडमिन के कामों पर खर्च करती हैं। इसमें 17-18% सीधे बैंकों, एनबीएफसी और एजेंटों की जेब में जाता है। इरडा अब इसे घटाने की तैयारी में है, खासकर हेल्थ इंश्योरेंस में जहां प्रीमियम तेजी से बढ़े हैं।


    कम लागत, तेज प्रोसेस और ज्यादा पारदर्शिता

    नियामक IRDA एक सहमति-आधारित डेटा रजिस्ट्री बना रहा है, जहां पॉलिसी और दावों का सारा डेटा सुरक्षित रहेगा। इससे अंडरराइटिंग तेज होगी, फ्रॉड पर लगाम लगेगी और पॉलिसी पोर्टेबिलिटी आसान होगी। मतलब – कम लागत, तेज प्रोसेस और ज्यादा पारदर्शिता।


    अब कंपनियां नहीं छुपा पाएंगी सच

    इरडा बीमा कंपनियों पर शिकंजा कस रहा है। अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स, रिटर्न और क्लेम सेटलमेंट रेशियो का खुलकर खुलासा करना होगा। जब सबकुछ सार्वजनिक होगा, तो कंपनियों के बीच बेहतर सर्विस और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग की होड़ लगेगी।


    आम आदमी को क्या मिलेगा?

    इन सुधारों का सीधा फायदा आपको मिलेगा। कमीशन खर्च घटेगा तो प्रीमियम स्थिर या कम हो सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तुलना से बेहतर और किफायती पॉलिसी चुन पाएंगे। पता चलेगा कि आपका पैसा कहां जा रहा है और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से क्लेम प्रोसेस तेज होगा। खासकर हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस में इन बदलावों का असर साफ दिखेगा, जहां बढ़ती लागत ने मिडल क्लास की जेब पर दबाव बढ़ा दिया था।