Category: Economy

  • भोपाल में कृषि वर्ष पर मंत्रियों-विधायकों का महामंथन:खेती को 'फायदे का धंधा' बनाने पर जोर

    भोपाल में कृषि वर्ष पर मंत्रियों-विधायकों का महामंथन:खेती को 'फायदे का धंधा' बनाने पर जोर


    भोपाल । भोपाल में सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में कृषि वर्ष 2026 को लेकर बड़ा वैचारिक मंथन आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा के मध्य प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, एदल सिंह कंसाना, करन सिंह वर्मा, विश्वास सारंग सहित कई मंत्री और विधायक मंच पर उपस्थित थे।

    खेती को लाभ का धंधा बनाने पर चर्चा
    कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारकर किसानों की आय बढ़ाना। दिनभर चलने वाले इस मंथन में विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के सामने विभागवार प्रेजेंटेशन दे रहे हैं।

    कृषि विभाग: उन्नत बीज, खाद और नई तकनीकों पर आधारित योजनाएं।

    उद्यानिकी एवं मत्स्य पालन: नकदी फसलों और मछली पालन से आय दोगुनी करने के रोडमैप।

    सहकारिता एवं पशुपालन: डेयरी और सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा।

    कार्यक्रम की रूपरेखा
    सवालों का निराकरण: विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के सामने रखेंगे।

    मंत्रीगणों का संबोधन: विभागों की प्राथमिकताएं साझा।

    मुख्यमंत्री का मुख्य संबोधन: किसानों के हित में सरकार के विजन और आगामी रणनीतियों पर प्रकाश।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के इस कार्यक्रम का उद्देश्य हर जिले के जनप्रतिनिधि को किसानों से जोड़ना और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाना है।

  • एमपी में GST चोरी का बड़ा आरोप: गुजरात-महाराष्ट्र से बिना टैक्स का माल खपाने का दावा, नेता प्रतिपक्ष ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र

    एमपी में GST चोरी का बड़ा आरोप: गुजरात-महाराष्ट्र से बिना टैक्स का माल खपाने का दावा, नेता प्रतिपक्ष ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र



    भोपाल। उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रही कथित GST चोरी को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर पूरे मामले की केंद्रीय स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    गुजरात-महाराष्ट्र से आ रहा बिना टैक्स का माल
    सिंघार ने आरोप लगाया कि Madhya Pradesh में संगठित नेटवर्क के जरिए Gujarat, Maharashtra और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों से आयरन, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और मसालों की खेप बिना वैध टैक्स चुकाए प्रदेश के बाजारों में खपाई जा रही है।

    ऐसे किया जा रहा टैक्स में घोटाला
    नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक इस नेटवर्क में कई तरीके अपनाए जा रहे हैंफर्जी E-Way बिल: ट्रकों में माल भरा होता है, लेकिन कागजों में फर्जी या हेरफेर किए गए E-Way बिल दिखाए जाते हैं।अंडर-इनवॉइसिंग: टैक्स बचाने के लिए माल की असली कीमत और मात्रा कागजों में कम दिखाई जाती है।बिचौलियों का नेटवर्क: बॉर्डर से लेकर जिलों तक ट्रांसपोर्टरों और बिचौलियों का संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो बिना टैक्स चुकाए माल को सुरक्षित बाजारों तक पहुंचाता है।

    हजारों करोड़ के नुकसान का दावा
    उमंग सिंघार ने अपने पत्र में कहा कि इस संगठित टैक्स चोरी से केंद्र और राज्य सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है और उनके पास इसके पुख्ता प्रमाण भी हैं।

    इन अधिकारियों को भी भेजी शिकायत
    मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंघार ने अपने पत्र की प्रतियां कई अहम अधिकारियों को भी भेजी हैं, जिनमें शामिल हैं:Central Board of Indirect Taxes and Customs के अध्यक्षमध्यप्रदेश शासन के वित्त मंत्रीवाणिज्यिक कर विभाग (मप्र) के प्रमुख सचिव
    नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि पूरे नेटवर्क की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि टैक्स चोरी के इस कथित सिंडिकेट का खुलासा हो सके।

  • दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सीएम मोहन यादव, मध्यप्रदेश की योजनाओं और किसान कल्याण वर्ष पर हुई चर्चा

    दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सीएम मोहन यादव, मध्यप्रदेश की योजनाओं और किसान कल्याण वर्ष पर हुई चर्चा



    नई दिल्ली। Mohan Yadav ने सोमवार को नई दिल्ली में Narendra Modi से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की विकास योजनाओं और किसान कल्याण वर्ष के तहत चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।

    सीएम मोहन यादव ने मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री से भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत चल रही गतिविधियों और राज्य की प्रगति से प्रधानमंत्री को अवगत कराया गया।

    संसद परिसर में सांसदों के साथ मीडिया से चर्चा
    मुलाकात के बाद संसद भवन परिसर में मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के सांसदों के साथ मीडिया से भी चर्चा की। इस दौरान उनके साथ Shankar Lalwani, Rahul Singh Lodhi, Ashish Dubey और Rajesh Mishra मौजूद रहे।

    चार वर्गों के लिए काम कर रही सरकार
    सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए चार प्रमुख वर्ग – किसान, महिला, गरीब और युवा के कल्याण के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के तहत करीब 16 विभागों जैसे कृषि, पशुपालन, मछली पालन और बागवानी को जोड़कर योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए आगे भी मार्गदर्शन और आशीर्वाद दिया है, जिससे भविष्य में बेहतर परिणाम मिलेंगे।

  • अनिवेशकों सावधान! कच्चे तेल के चलते 15 साल के सबसे बड़े संकट की ओर बाजार, सोना और चांदी भी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त

    अनिवेशकों सावधान! कच्चे तेल के चलते 15 साल के सबसे बड़े संकट की ओर बाजार, सोना और चांदी भी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त


    नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय निवेशकों की नींद उड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति निवेश के हर मोर्चे-चाहे वह शेयर बाजार हो, सोना-चांदी हो या म्यूचुअल फंड-के लिए बड़ा झटका साबित हो रही है। इस पूरे संकट की धुरी “कच्चा तेल” बना हुआ है, जिसके बेतहाशा बढ़ते दाम वैश्विक अर्थव्यवस्था के पहियों को जाम कर रहे हैं। यदि तनाव बढ़ता है और होर्मुज जलमार्ग Strait of Hormuzपर तेल की आपूर्ति 4 से 8 सप्ताह तक बाधित रहती है, तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए शेयर बाजार में भारी गिरावट और आसमान छूती महंगाई का दोहरा संकट खड़ा होना तय है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में भारतीय बाजार ने कई युद्ध और वैश्विक संकट देखे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब सभी एसेट क्लास Asset Classesमें एक साथ गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सीधा असर विदेशी संस्थागत निवेशकों FPI के व्यवहार पर दिख रहा है, जिन्होंने इस महीने भारतीय बाजार से लगभग 52,704 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है। निवेशक अब जोखिम भरे इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर और बॉन्ड्स की ओर रुख कर रहे हैं। गौरतलब है कि कच्चे तेल के दाम संघर्ष की शुरुआत के समय 72.48 डॉलर प्रति बैरल थे, जो मार्च तक 65% की उछाल के साथ 119 डॉलर के पार निकल गए थे, और अब एक बार फिर 100 डॉलर के ऊपर बने हुए हैं।

    इस अनिश्चितता का सबसे चौंकाने वाला असर सोने और चांदी पर पड़ा है। आम तौर पर युद्ध के समय सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार डॉलर की मजबूती ने इसे फीका कर दिया है। फरवरी के अंत से अब तक सोना 6% और चांदी 9% तक टूट चुकी है। चूंकि कच्चे तेल का व्यापार डॉलर में होता है, तेल की कीमतें बढ़ने से डॉलर की मांग और मजबूती बढ़ जाती है, जिसका सीधा दबाव कीमती धातुओं पर पड़ता है। वहीं, म्यूचुअल फंड सेक्टर में भी घबराहट साफ देखी जा सकती है; फरवरी में जहां 65.7 लाख नए SIP खाते खुले, वहीं लगभग 49.7 लाख खाते बंद भी हो गए, जिससे ‘एसआईपी स्टॉपेज अनुपात’ बढ़कर 76% के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

    हालांकि, विशेषज्ञों का एक धड़ा यह भी मानता है कि भारतीय बाजार हर बड़े झटके से उबरने का माद्दा रखता है। उदाहरण के तौर पर, 2020 के कोविड संकट के दौरान बाजार ने जितनी बड़ी गिरावट देखी थी, उसके अगले कुछ ही वर्षों में निवेशकों को 21-22% तक का शानदार रिटर्न भी दिया। फिलहाल ऑटो, बैंकिंग और कंज्यूमर सेक्टर के शेयरों पर बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इतिहास गवाह है कि संकट के बाद बाजार हमेशा मजबूती से वापसी करता है। आगे की राह इस बात पर टिकी है कि मध्य-पूर्व का यह तनाव कितनी जल्दी शांत होता है।

  • एलपीजी बुकिंग घटकर 77 लाख हुईं, देश में ईंधन की कोई कमी नहीं: सरकार

    एलपीजी बुकिंग घटकर 77 लाख हुईं, देश में ईंधन की कोई कमी नहीं: सरकार


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार ने सरकार ने कहा है कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी तरह की कमी नहीं है। देश में घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी रिफिल की बुकिंग में गिरावट आई है, यह घटकर अब करीब 77 लाख पर पहुंच गई है, जबकि 13 मार्च को ये 88.8 लाख थी।

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि देशभर में एलपीजी की कोई कमी नहीं है, जबकि तेल विपणन कंपनियों के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। मंत्रालय के मुताबिक हालिया दहशत में कमी आने के बाद एलपीजी बुकिंग 88 लाख से घटकर लगभग 77 लाख रह गई है। केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग से बचें और ऑनलाइन रिफिल बुक करें।

    मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी तरह की कमी नहीं है। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रभाव पर जारी दैनिक अपडेट में बताया कि ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग का हिस्सा बढ़कर लगभग 87 फीसदी हो गया है, जो पहले 84 फीसदी था। इसका श्रेय तेल विपणन कंपनियों के डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा देने और लोगों को एलपीजी डीलरशिप पर लंबी कतारों में खड़ा होकर आवश्यकता से ज्यादा खरीदारी करने से रोकने वाले अभियान को दिया गया है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश की सभी घरेलू रिफाइनरी पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और पर्याप्त कच्चे तेल का भंडारण बनाए हुए हैं। देश पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए इन ईंधनों का कोई आयात आवश्यक नहीं है। तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन खुदरा बिक्री केंद्रों या एलपीजी वितरकों के पास भंडारण खत्म होने की कोई जानकारी नहीं दी है। पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी की आपूर्ति नियमित रूप से बनाए रखी जा रही है। एलपीजी बुकिंग में गिरावट आई है। इससके एक दिन पहले शनिवार को लगभग 77 लाख बुकिंग दर्ज की गई थी, जबकि 13 मार्च, 2026 को यह संख्या 88.8 लाख थी। इसके साथ ही ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग बढ़कर 84 फीसदी से लगभग 87 फीसदी हो गया है।

    मंत्रालय के मुताबिक घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देना और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना फिलहाल जारी रहेगा, विशेषकर घरों और प्राथमिक क्षेत्रों जैसे अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों के लिए। केंद्र सरकार ने बिहार, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन के लिए निर्देश जारी किए हैं। वहीं, राज्य सरकारें पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की जमाखोरी और काला बाजारी रोकने के लिए कड़ाई से निगरानी और कार्रवाई कर रही हैं।

    पेट्रोयिम मंत्रालय के मुताबिक एलपीजी का उत्पादन अधिकतम किया गया है और बुकिंग अंतराल को समुचित रूप से निर्धारित किया गया है, ताकि समान वितरण भी सुनिश्चित हो सके। अद्यतन जानकारी में सरकार ने कहा कि विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों को 24 घंटे हेल्पलाइन सेवाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहा है। 28 फरवरी के बाद से लगभग 1.94 लाख यात्रियों को भारत लौटाया गया है।

    मंत्रालय के मुताबिक सरकारी तेल विपणन कंपनियां डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा दे रही हैं, घबराकर बुकिंग करने से रोक रही हैं। एलपीजी वितरकों को रविवार को भी खुला रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपूर्ति सुचारू रहे। सरकार ने कहा कि नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। साथ ही उपभोक्ताओं से अनुरोध किया गया है कि वे घबराकर बुकिंग न करें, डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें। इसके अलावा नागरिकों को पीएनजी जैसी वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

  • डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट

    डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच विमानन सुरक्षा निगरानी संस्था नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों से एयर इंडिया को लंबी दूरी की उड़ानों के लिए अस्थायी छूट दी है।

    आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को दी जानकारी में बताया कि पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के कारण एयर इंडिया यूरोप और अमेरिका जाने के लिए लंबा मार्ग अपनाकर उड़ानें संचालित कर रही है। विमानन नियामक डीजीसीए ने पायलटों के उड़ान और कार्य समय-सीमा में अस्थायी ढील दी है, जो 30 अप्रैल तक लागू रहेगी।

    डीजीसीए ने इस छूट के तहत लंबी दूरी की उड़ानों में दो पायलटों के लिए उड़ान समय 11 घंटे 30 मिनट और कार्य अवधि 11 घंटे 45 मिनट तक बढ़ा दी है। इसके साथ ही, पायलटों के समय-सारणी में 30 मिनट की अतिरिक्त सुविधा की जरूरत को भी छूट दी गई है। सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया की जेद्दा उड़ान में कार्य अवधि 11 घंटे 55 मिनट है, जो अनुमत सीमा से 10 मिनट अधिक है।

    डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि उड़ान समय वह अवधि है जब विमान उड़ान भरने के लिए जमीन से उठकर सुरक्षित लैंडिंग तक चलता है। कार्य अवधि तब शुरू होती है जब पायलट अपनी ड्यूटी पर रिपोर्ट करता है और तब खत्म होती है जब वह अंतिम उड़ान के इंजन बंद होने के बाद अपनी ड्यूटी समाप्त करता है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में कटौती की है। डीजीसीए ने कहा कि यह छूट पायलटों की सुरक्षा और थकान को ध्यान में रखकर दी गई है, ताकि लंबा मार्ग अपनाने के बावजूद उड़ान संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके।

  • एलपीजी संकट से टाइल्स उद्योग पर असर, फैक्ट्रियां बंद; कीमतों में 20% तक उछाल

    एलपीजी संकट से टाइल्स उद्योग पर असर, फैक्ट्रियां बंद; कीमतों में 20% तक उछाल



    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर का प्रभाव अब निर्माण सामग्री के बाजार में भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की कमी के कारण देश के प्रमुख टाइल्स उत्पादन केंद्र गुजरात की कई फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हो गया है। गैस आपूर्ति बाधित होने से कुछ इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ा है, जिससे बाजार में टाइल्स की उपलब्धता घटने लगी है और कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    दरअसल टाइल्स उद्योग में भट्टियों को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर एलपीजी गैस का उपयोग किया जाता है। लेकिन हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े तनाव और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में आई बाधा के कारण गैस की उपलब्धता कम हो गई है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है और कई फैक्ट्रियों को सीमित क्षमता पर काम करना पड़ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर
    विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति प्रभावित हुई है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे उद्योगों के संचालन में दिक्कतें आने लगी हैं।

    बाजार में घट रही उपलब्धता
    गैस संकट के कारण फैक्ट्रियों का उत्पादन कम होने से टाइल्स की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। कंपनियों द्वारा अब माल की आपूर्ति करीब 40 दिन की वेटिंग के बाद की जा रही है। पहले जहां दुकानदारों को कुछ ही दिनों में माल मिल जाता था, वहीं अब उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

    कीमतों में तेज उछाल
    आपूर्ति घटने के कारण बाजार में टाइल्स की कीमतों में अचानक तेजी आ गई है। दुकानदारों के अनुसार पहले जो टाइल्स की पेटी करीब 450 रुपये में मिलती थी, उसका दाम बढ़कर 550 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं सामान्य रूप से 160 रुपये में मिलने वाली पेटी अब लगभग 230 रुपये तक बिक रही है।

    स्थानीय बाजार में करीब 15 दुकानें टाइल्स का कारोबार कर रही हैं, जबकि पूरे जिले में 100 से अधिक व्यापारी इस व्यापार से जुड़े हुए हैं। इन दुकानों में बिकने वाला अधिकांश माल गुजरात की फैक्ट्रियों से आता है, इसलिए वहां उत्पादन प्रभावित होने का असर सीधे स्थानीय बाजारों में दिखाई दे रहा है।

    निर्माण कार्य पर बढ़ा दबाव
    टाइल्स की कीमतों में आई इस बढ़ोतरी से ठेकेदारों, मकान बनवा रहे लोगों और उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। निर्माण कार्य की लागत बढ़ने से कई परियोजनाओं का बजट प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले समय में टाइल्स की कीमतों में और भी वृद्धि हो सकती है।

    टाइल्स विक्रेता विपुल रस्तोगी के अनुसार, एलपीजी गैस की कमी के कारण फैक्ट्रियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है और इसका असर सीधे बाजार पर पड़ा है। पहले जो माल आसानी से उपलब्ध हो जाता था, अब उसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ा दी हैं।

    एलपीजी गैस की कमी के कारण गुजरात की कई टाइल्स फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे बाजार में सप्लाई घट गई है। इसका असर कीमतों पर पड़ा है और टाइल्स के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं

  • SRU Steels सहित टॉप 5 पेनी स्टॉक्स ने निवेशकों को लगाया झटका..

    SRU Steels सहित टॉप 5 पेनी स्टॉक्स ने निवेशकों को लगाया झटका..


    नई दिल्ली:पिछले दो हफ्तों में शेयर बाजार ने निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल पेश किया। इस दौरान खासकर कम कीमत वाले पेनी स्टॉक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 15 ऐसे पेनी स्टॉक्स रहे जिनमें 15% से लेकर 55% तक की गिरावट दर्ज की गई। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले टॉप 5 स्टॉक्स की पहचान की गई है, जो निवेशकों के लिए चेतावनी के रूप में काम कर सकते हैं।

    इन स्टॉक्स का चयन एक विशेष स्क्रीनिंग के आधार पर किया गया। इसका उद्देश्य ऐसे कम कीमत वाले और सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाले शेयर ढूंढना था, जिन पर हाल ही में दबाव दिखा। इस स्क्रीन में मार्केट कैप 1,000 करोड़ रुपये से कम, शेयर की कीमत 20 रुपये से कम और न्यूनतम ट्रेडिंग वॉल्यूम 5 लाख शेयर जैसी शर्तें शामिल थीं।

    सूची में सबसे ऊपर एसआरयू स्टील्स (SRU Steels) है। कंपनी ने पिछले दो हफ्तों में 56% की भारी गिरावट दर्ज की। इसका पिछला क्लोजिंग प्राइस 1.47 रुपये था और मार्केट कैप मात्र 8.81 करोड़ रुपये। 1995 में स्थापित यह कंपनी मुख्य रूप से स्टेनलेस स्टील की ट्रेडिंग के बिजनेस में सक्रिय है।

    दूसरे नंबर पर सुफा फार्माकेम (Supha Pharmachem / Remedium Lifecare) है, जिसने 34% की गिरावट दिखाई। इसका पिछला क्लोजिंग प्राइस 0.45 रुपये रहा। 1988 में स्थापित यह कंपनी एडवांस्ड फार्मास्युटिकल इंटरमीडिएट्स और अन्य फार्मा उत्पादों की ट्रेडिंग करती है।

    तीसरे स्थान पर पारले इंडस्ट्रीज (Parle Industries) है, जिसने 33% का नुकसान झेला। इसका क्लोजिंग प्राइस 4.96 रुपये था। 1983 में स्थापित यह कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है।

    चौथे नंबर पर है ए-1 एसिड लिमिटेड (A-1 Acid), जिसने 28% की गिरावट दर्ज की। पिछला क्लोजिंग प्राइस 18.16 रुपये था और मार्केट कैप 835 करोड़ रुपये। 2004 में स्थापित यह कंपनी एसिड और केमिकल्स की होलसेल ट्रेडिंग के साथ-साथ ट्रांसपोर्टेशन बिजनेस में भी सक्रिय है।

    पांचवें नंबर पर है नवकार अर्बनस्ट्रक्चर (Navkar Urbanstructure), जिसने 27% की गिरावट दर्ज की। इसका क्लोजिंग प्राइस 0.95 रुपये और मार्केट कैप 107 करोड़ रुपये रहा। 1992 में स्थापित यह कंपनी RCC और RMC पाइप्स सहित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण और विकास में सक्रिय है।

    पेनी स्टॉक्स निवेशकों को आकर्षित करते हैं क्योंकि इनकी कीमत कम होती है और इनमें जल्दी मुनाफा कमाने की संभावना रहती है। लेकिन इनके साथ जुड़े जोखिम भी कम नहीं हैं। कम लिक्विडिटी और अधिक अस्थिरता के कारण इन स्टॉक्स को बेचना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा इन कंपनियों के बारे में जानकारी सीमित होती है, जिससे कीमतों में हेरफेर और अचानक क्रैश का खतरा रहता है। बिना स्पष्ट रणनीति और जोखिम प्रबंधन के निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    इसलिए, अगर आप भी पेनी स्टॉक्स में निवेश करते हैं, तो बाजार की हालिया गतिविधियों पर नज़र रखना और समझदारी से निर्णय लेना बेहद जरूरी है।

  • पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या नहीं? ओएमसी की रिफाइनरी कीमतों पर तैयारी और जनता को क्या मिलेगा फायदा

    पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या नहीं? ओएमसी की रिफाइनरी कीमतों पर तैयारी और जनता को क्या मिलेगा फायदा


    नई दिल्ली  में पब्लिक सेक्टर की पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां यानी ओएमसी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें पश्चिम एशिया संकट से पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने के बावजूद ओएमसी को इस बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है।
    इस परिस्थिति से निपटने के लिए ओएमसी अब रिफाइनरियों को कम दरों पर पेट्रोल और डीजल देने पर विचार कर रही हैं। विशेष रूप से रिफाइनरी ट्रांसपोर्टेशन शुल्क यानी आरटीपी पर रोक लगाने या उस पर छूट तय करने का विकल्प इस योजना का मुख्य हिस्सा है। आरटीपी वह इंटरनल प्राइस है, जिस पर रिफाइनरियां अपने मार्केटिंग सेगमेंट को ईंधन बेचती हैं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिफाइनरियां कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ मार्केटिंग कंपनियों पर न डाल सकें।
    यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इस प्रस्तावित कदम से रिफाइनरियां आरटीपी के जरिये अपने बढ़े हुए खर्च का पूरा बोझ आगे नहीं बढ़ा पाएंगी और उन्हें इसका एक हिस्सा खुद वहन करना होगा। इस तरह ओएमसी को घाटा कम करने का अवसर मिलेगा और खुदरा कीमत स्थिर रखी जा सकेगी।

    इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) जैसी एकीकृत कंपनियां इस घाटे की भरपाई अपने रिफाइनिंग और विपणन परिचालन के बीच कर सकती हैं। लेकिन मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल), चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीपीसीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) जैसी एकल रिफाइनरियों का खुदरा बाजार में योगदान सीमित है। ये कंपनियां अपना उत्पादन मुख्य रूप से ओएमसी को बेचती हैं, इसलिए उनके मार्जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
    सूत्रों के अनुसार यदि यह आरटीपी पर रोक या छूट निजी रिफाइनरियों पर भी लागू होती है, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी निजी कंपनियां भी प्रभावित होंगी। ये कंपनियां अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा ओएमसी को बेचती हैं, इसलिए उनके लाभ में कमी आने की संभावना है।

    इस पूरे कदम का मकसद जनता को सीधा फायदा पहुंचाना है, यानी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रह सकें। हालांकि रिफाइनरियों और निजी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका मतलब यह है कि आम लोग फिलहाल कीमतों की बढ़ोतरी से बचेंगे, लेकिन कंपनियों को घाटा सहना पड़ेगा।
    इस योजना से यह साफ होता है कि ओएमसी सरकार और जनता की ओर से कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं, जबकि रिफाइनरियों को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ेगा। अगर वैश्विक तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो यह कदम ओएमसी और रिफाइनरियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, लेकिन आम जनता के लिए फिलहाल राहत का संकेत है।
  • एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप इस हफ्ते 61,715 करोड़ रुपए घटा, एसबीआई और बजाज फाइनेंस को भी नुकसान

    एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप इस हफ्ते 61,715 करोड़ रुपए घटा, एसबीआई और बजाज फाइनेंस को भी नुकसान

    नई दिल्ली। एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप इस हफ्ते 61,715 करोड़ रुपए घटा है। इसकी वजह वैश्विक अस्थिरता के कारण शेयर बाजार में तेज बिकवाली होना है।इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमत में उछाल के कारण पिछले हफ्ते सेंसेक्स में 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत और निफ्टी में 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत की गिरावट आई।

    इससे निवेशकों का सेंटीमेंट बाजार को लेकर नकारात्मक हो गया है, जिसके कारण बाजार में भारी गिरावट हुई और बीएसई पर सूचीबंद्ध सभी कंपनियों का मार्केट कैप करीब 20 लाख करोड़ रुपए कम होकर 430 लाख करोड़ रुपए हो गया।

    एचडीएफसी बैंक के साथ देश की शीर्ष कंपनियों का मार्केट कैप इस हफ्ते 4.48 लाख करोड़ रुपए कम हो गया है। इसमें एसबीआई, बजाज फाइनेंस, टीसीएस और रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, एलआईसी, इन्फोसिस और एचयूएल नाम शामिल है।

    एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप 61,715.32 करोड़ रुपए कम होकर 12,57,391.76 करोड़ रुपए हो गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का मार्केटकैप 89,306.22 करोड़ रुपए कम होकर 9,66,261.05 करोड़ रुपए हो गया है।

    बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 59,082.49 करोड़ रुपए कम होकर 5,32,053.54 करोड़ रुपए हो गया है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मार्केटकैप 53,312.52 करोड़ रुपए कम होकर 8,72,067.63 करोड़ रुपए हो गया है।

    आईसीआईसीआई बैंक का मार्केटकैप 42,205.04 करोड़ रुपए कम होकर 8,97,844.78 करोड़ रुपए रह गया है। भारती एयरटेल का मार्केटकैप 38,688.78 करोड़ रुपए कम होकर 10,28,431.72 करोड़ रुपए हो गया है।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केटकैप 33,289.88 करोड़ रुपए कम होकर 18,68,293.17 करोड़ रुपए हो गया है। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) का बाजार पूंजीकरण 31,245.49 करोड़ रुपए कम होकर 4,88,985.57 करोड़ रुपए हो गया है।

    इन्फोसिस का मार्केटकैप 24,230.96 करोड़ रुपए कम होकर 5,06,315.58 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, एफएमजीसी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का मार्केट कैप 15,401.57 करोड़ रुपए कम होकर 5,07,640.94 करोड़ रुपए हो गया है।