Category: Economy

  • एविएशन क्षेत्र का आंकड़ा, भारत में 11,000 से अधिक पायलट, महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 1,900

    एविएशन क्षेत्र का आंकड़ा, भारत में 11,000 से अधिक पायलट, महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 1,900


    नई दिल्ली। भारत में 11,000 से अधिक पायलट देश की बड़ी घरेलू एयरलाइंस में काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग 1,900 महिला पायलट शामिल हैं। यह जानकारी सरकार ने गुरुवार को संसद में दी। भारतीय विमानन कंपनियों में कुल 11,394 पायलट कार्यरत हैं, जिनमें 1,871 महिला पायलट शामिल हैं।

    एयरलाइनवार पायलट आंकड़े
    देश की प्रमुख एयरलाइनों में पायलटों की संख्या इस प्रकार है:

    इंडिगो: सबसे बड़ी एयरलाइन, 5,200 पायलट, जिनमें 970 महिला पायलट शामिल।

    एयर इंडिया: 3,123 पायलट, जिनमें 508 महिला पायलट।

    एयर इंडिया एक्सप्रेस: 1,820 पायलट, 234 महिलाएं।

    अकासा एयर: 761 पायलट, 76 महिलाएं।

    स्पाइसजेट: 375 पायलट, 58 महिलाएं।

    एलायंस एयर: 115 पायलट, 25 महिलाएं।

    सरकार ने यह भी बताया कि विदेशी पायलटों की तादाद कुछ एयरलाइनों में है। एलायंस एयर में 15, एयर इंडिया एक्सप्रेस में 48 और इंडिगो में 29 विदेशी पायलट कार्यरत हैं।

    पायलट-से-विमान अनुपात
    विभिन्न एयरलाइनों में पायलट-से-विमान अनुपात अलग है:

    स्पाइसजेट: 9.4 पायलट प्रति विमान

    अकासा एयर: 9.33

    एयर इंडिया: 9.1

    एयर इंडिया एक्सप्रेस: 8.8

    इंडिगो: 7.6

    एलायंस एयर: सबसे कम, 6 पायलट प्रति विमान

    इससे एयरलाइनों में फ्लाइट ऑपरेशन के लिए पायलट उपलब्धता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    महिला पायलटों का बढ़ता योगदान
    महिला पायलटों की संख्या भारतीय विमानन क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइनों में महिला पायलट अब टीम की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बन चुकी हैं। यह न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

    भारतीय विमानन क्षेत्र में विदेशी पायलट
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ एयरलाइनों ने विदेशी पायलटों को काम पर रखा है। यह कदम तकनीकी विशेषज्ञता, अंतरराष्ट्रीय मानकों और वैश्विक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

    नियमों में कड़ाई का प्रस्ताव
    इस बीच, डीजीसीए ने भारत से आने-जाने वाली विदेशी एयरलाइनों के लिए नियमों को कड़ा करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण, स्थानीय प्रतिनिधियों के लिए कानूनी जवाबदेही, और औपचारिक यात्री शिकायत निवारण प्रणाली की स्थापना शामिल है। इसका उद्देश्य एयरलाइन संचालन में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाना है।

    संसद में दिए गए आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत की प्रमुख एयरलाइंस में पायलटों की संख्या और उनका वितरण संतुलित है। महिला पायलटों की बढ़ती संख्या और पायलट-से-विमान अनुपात की जानकारी एयरलाइनों के सुरक्षित और सतत संचालन के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं। साथ ही, डीजीसीए के नए नियमों से यात्रियों और पायलट दोनों के लिए सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

  • भारत में खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.21% रही, अरहर, लहसुन और आलू के दाम में गिरावट

    भारत में खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.21% रही, अरहर, लहसुन और आलू के दाम में गिरावट


    नई दिल्ली। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि फरवरी 2026 में भारत में खुदरा महंगाई दर (CPI) 3.21 प्रतिशत रही, जो जनवरी की 2.74 प्रतिशत के मुकाबले 0.47 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में महंगाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बावजूद कई मुख्य खाद्य वस्तुओं के दामों में गिरावट ने आम लोगों को कुछ राहत दी है।
    ग्रामीण और शहरी इलाकों में महंगाई का हाल
    मंत्रालय के डेटा के अनुसार, फरवरी में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह 2.73 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी इलाकों में महंगाई दर फरवरी में 3.02 प्रतिशत रही, जो जनवरी की 2.75 प्रतिशत से बढ़ी है। यह अंतर दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में महंगाई शहरी क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा अधिक रही।

    खाद्य महंगाई दर में बदलाव
    फरवरी में खाद्य महंगाई दर 3.47 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में यह 3.46 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 3.48 प्रतिशत रही। खासकर, लहसुन (-31.09 प्रतिशत), प्याज (-28.20 प्रतिशत), आलू (-18.46 प्रतिशत), अरहर (-16 प्रतिशत) और लीची (-11.52 प्रतिशत) के दाम सालाना आधार पर सबसे अधिक कम हुए। इससे आम घरेलू बजट पर सकारात्मक असर पड़ा।

    वहीं, जिन वस्तुओं के दाम सबसे अधिक बढ़े, उनमें सिल्वर ज्वेलरी (160.84 प्रतिशत), गोल्ड/डायमंड/प्लेटिनम ज्वेलरी (48.16 प्रतिशत), कोपरा (46.16 प्रतिशत), टमाटर (45.29 प्रतिशत) और फूलगोभी (43.77 प्रतिशत) शामिल हैं। ज्वेलरी और कुछ सब्जियों की कीमतों में तेज वृद्धि ने महंगाई के आंकड़ों में अलग रुझान दिखाया।

    अन्य सेक्टरों में महंगाई
    फरवरी में विभिन्न सेक्टरों में महंगाई दर इस प्रकार रही:

    फूड एंड बेवरेज: 3.35 प्रतिशत

    पान और तंबाकू: 3.49 प्रतिशत

    कपड़े और जूते: 2.81 प्रतिशत

    हाउसिंग, पानी, बिजली, गैस और अन्य फ्यूल: 1.52 प्रतिशत

    एजुकेशन सर्विसेज: 3.33 प्रतिशत

    राज्यों में महंगाई की स्थिति
    50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में सबसे अधिक महंगाई वाले पांच राज्य हैं:

    तेलंगाना: 5.02 प्रतिशत

    राजस्थान: 3.53 प्रतिशत

    केरल: 3.50 प्रतिशत

    आंध्र प्रदेश: 3.45 प्रतिशत

    पश्चिम बंगाल: 3.44 प्रतिशत

    डेटा संग्रह और विश्वसनीयता
    मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा संगठन (NSO) के फील्ड स्टाफ ने 1407 शहरी बाजारों (ऑनलाइन बाजार सहित) और 1465 गांवों से वास्तविक समय मूल्य डेटा एकत्र किया। फरवरी 2026 के दौरान, 100 प्रतिशत ग्रामीण और शहरी बाजारों से मूल्य एकत्र किए गए, जबकि बाजारवार रिपोर्ट किए गए मूल्य ग्रामीण बाजारों के लिए 99.89 प्रतिशत और शहरी बाजारों के लिए 99.78 प्रतिशत थे।

    फरवरी 2026 में महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन लहसुन, आलू, प्याज और अरहर जैसे प्रमुख खाद्य पदार्थों के दामों में गिरावट ने आम जनता को राहत दी। वहीं, ज्वेलरी और कुछ सब्जियों की कीमतों में तेज वृद्धि ने महंगाई में मिश्रित रुझान दिखाया। सरकारी आंकड़ों की व्यापक निगरानी और वास्तविक समय मूल्य डेटा संग्रह से यह सुनिश्चित होता है कि महंगाई की सही स्थिति आम जनता तक पहुंच सके।

  • उज्जैन में प्रतिष्ठानों पर खाद्य विभाग का छापा:35 से अधिक गैस सिलेंडर जब्त, दो टीमों ने की कार्रवाई, प्रशासन हुआ सख्त

    उज्जैन में प्रतिष्ठानों पर खाद्य विभाग का छापा:35 से अधिक गैस सिलेंडर जब्त, दो टीमों ने की कार्रवाई, प्रशासन हुआ सख्त



    नई दिल्ली। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की शिकायतों के बीच उज्जैन कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग की टीम ने शहर के कई रेस्टोरेंट और भोजनालयों पर गुरुवार को छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 35 से अधिक घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

    पिछले दो दिनों से शहर में गैस सिलेंडर की जमाखोरी और घरेलू सिलेंडर के व्यावसायिक उपयोग की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने आठ अधिकारियों की दो टीमें बनाकर अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी की।पिछले दो दिनों से शहर में गैस सिलेंडर की जमाखोरी और घरेलू सिलेंडर के व्यावसायिक उपयोग की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने आठ अधिकारियों की दो टीमें बनाकर अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी की।

    रेलिस फ्रायड अंडे वाले से 9 सिलेंडर जब्त

    पहली टीम में सहायक खाद्य नियंत्रक संतोष सिमोलिया, फूड इंस्पेक्टर अंकिता जोशी, नागेश दाहिमा और भूषण गुज्जर शामिल थे। टीम ने आरटीओ कार्यालय के पास रंगीला कैफे से एक घरेलू सिलेंडर, फ्रीगंज में रेलिस फ्रायड अंडे वाले से 9, महाकाल भोजनालय से 1, जैन कचोरी फ्रीगंज से 2, नवरतन फ्यूजन से 2, ऋषि नगर के एक रेस्टोरेंट से 1 और फ्रीगंज के फाफड़ा विक्रेता से 8 सिलेंडर जब्त किए।

    रश्मि खामबेटे शामिल थे। इस टीम ने हरी फाटक क्षेत्र में स्थित अन्नपूर्णा श्याम पवित्र भोजनालय सहित अन्य प्रतिष्ठानों से कुल 7 सिलेंडर जब्त किए।

    घरेलू सिलेंडर का उपयोग न करने की हिदायत

    खाद्य विभाग की टीम ने संबंधित संचालकों को सख्त हिदायत देते हुए समझाइश दी कि वे व्यावसायिक कार्यों में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग न करें। इसके स्थान पर इलेक्ट्रिक इंडक्शन, पीएनजी या डीजल भट्टी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    ईरान अमेरिका युद्ध से देश भर में गैस सिलेंडर को लेकर मचे हाहाकार के बीच उज्जैन में काला बाजारी पर लगाम लगाने के लिए उज्जैन कलेक्टर के आदेश पर खाद्य विभाग की टीम ने शहर के कई रेस्टोरेंट पर छापा मार कर 35 से अधिक गैस सिलेंडर जब्त किये है। इनमे कई घरेलु और कमर्शियल सिलेंडर शामिल है।

    दो दिन से शहर में ग़ज़ल सिलेंडर को लेकर जामखोरी की मिल रही शिकायतों को लेकर खाद्य आपूर्ति विभाग के 8 अधिकारियों की टीम ने दो अलग अलग टीम बनाकर छापा मारकर कार्रवाई को अंजाम दिया। जिसमें संतोष सिमोलिया एसटीटेंट फ़ूड कंट्रोलर,अंकिता जोशी फ़ूड इंस्पेकटर,नागेश दाहिमा और भूषण गुज्जर की टीम ने आरटीओ कार्यालय के रंगीला कैफे से एक घरेलू टंकी,रेलिस फ्रायड अंडे वाले फ्रीगंज से 9,महाकाल भोजनालय से 1,जैन कचोरी फ्रीगंज से 2,नवरतन फ्यूजन से 2,ऋषि नगर रेस्टोरेंट से 1,फ्रीगंज में फाफड़े वाले से 8 सिलेंडर जब्त किये है। इसी तरह दूसरी टीम में शामिल चन्द्र शेखर बारोड़ एसिस्टेंट फ़ूड कंट्रोलर,

    समद खान फ़ूड इंस्पेकटर,रश्मि खामबेटे की टीम ने हरी फाटक क्षेत्र के रेस्टोरेंट अन्नपूर्णा श्याम पवित्र भोजनालय सहित एक अन्य से कुल 7 सिलेंडर जब्त किये है। टीम ने बताया कि सभी को हिदायत देकर समझाईश दी है कि घरेलु गैस सिलेंडर का उपयोग ना करे। वे इलेक्ट्रिक इंडेक्शन पीएनजी या डीजल भट्टी का भी उपयोग कर सकते है।

  • मध्यप्रदेश में अब दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य, मिलावटी दूध पर कड़ा नियंत्रण

    मध्यप्रदेश में अब दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य, मिलावटी दूध पर कड़ा नियंत्रण



    भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर सभी दूध उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस या पंजीकरण के बिना अपने कारोबार को जारी नहीं रख सकते। यह निर्णय एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

    सरकार ने दूध संग्रह और परिवहन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और भंडारण व्यवस्थाओं की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे मिलावटी दूध और नकली दुग्ध उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। राज्य में ऐसे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान की जाएगी जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही, दूध से जुड़ी हर गतिविधि की मासिक निगरानी रिपोर्ट 15 और 30 या 31 तारीख को तैयार कर प्राधिकरण को भेजी जाएगी।

    मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहाँ कुल 213 लाख टन दूध का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत है। राज्य में भैंस के दूध का हिस्सा लगभग 48 प्रतिशत है। वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 652 से 707 ग्राम प्रतिदिन रही।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में दूध उत्पादन को वर्तमान 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ अनुबंध भी किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 381 नई सहकारी समितियां भी संचालित हो रही हैं।

    प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत यदि कोई किसान 25 गायों की यूनिट स्थापित करता है, तो उसे 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

    केंद्र सरकार भी दूध उत्पादन और बिक्री पर नजर रख रही है। एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र में दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की निगरानी बढ़ाएं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य इस अनिवार्यता से छूट प्राप्त हैं, लेकिन अन्य सभी को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार पंजीकरण या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

    एफएसएसएआई ने विशेष पंजीकरण अभियान चलाकर उन दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान करने को कहा है जो अब तक पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही, दूध संग्रह, परिवहन और भंडारण की जांच को नियमित रूप से लागू करने का निर्देश भी दिया गया है।

  • एमएसएमई क्षेत्र में बढ़त, Jitan Ram Manjhi के अनुसार उद्यम पोर्टल पर 7.83 करोड़ पंजीकरण और करोड़ों रोजगार

    एमएसएमई क्षेत्र में बढ़त, Jitan Ram Manjhi के अनुसार उद्यम पोर्टल पर 7.83 करोड़ पंजीकरण और करोड़ों रोजगार


    नई दिल्ली। केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने गुरुवार को संसद में जानकारी दी कि उद्यम पोर्टल पर 2020 से 28 फरवरी 2026 तक करीब 7.83 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पंजीकृत हुए हैं। इन उद्यमों से लगभग 34.50 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, जिससे देश में स्वरोजगार और उद्यमिता को मजबूती मिली है।

    बंद हुए उद्यम और कारण
    लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि इस अवधि में 1.37 लाख एमएसएमई बंद हुए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी उद्यम का बंद होना या पंजीकरण रद्द होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे मालिक में बदलाव, प्रमाण पत्र की आवश्यकता न होना, दोहरा पंजीकरण या अन्य प्रशासनिक कारण।

    सरकार की पहलें और योजनाएँ
    मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कोशिशों में सहयोग कर रही है। इनमें शामिल हैं:

    प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)

    सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी योजना

    सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम

    एमएसएमई प्रदर्शन में सुधार और गति प्रदान करने वाली योजनाएँ

    एसआरआई फंड (आत्मनिर्भर भारत कोष)

    प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना

    एमएसएमई चैंपियंस योजना

    आपातकालीन ऋण और कोविड-19 सहायता
    कोविड-19 महामारी के दौरान एमएसएमई और अन्य व्यवसायों के लिए 5 लाख करोड़ रुपए की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना लागू की गई थी। मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत 31 मार्च 2023 तक 1.13 करोड़ एमएसएमई को गारंटी प्रदान की गई।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 23 जनवरी, 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14.6 लाख एमएसएमई खाते बचाए गए, जिनमें से 98.3 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यम थे।

    गैर-कर लाभ और इक्विटी निवेश
    मंत्री ने बताया कि एमएसएमई की स्थिति सुधारने पर तीन वर्षों के लिए गैर-कर लाभ भी प्रदान किया गया। इसके अलावा, आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) कोष के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपए का इक्विटी निवेश किया गया, जिसमें सरकार का योगदान 10,000 करोड़ रुपए और निजी इक्विटी/वेंचर कैपिटल फंड का 40,000 करोड़ रुपए है। इस योजना का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र की योग्य इकाइयों को विकास पूंजी प्रदान करना है।

    पीएमईजीपी के माध्यम से स्वरोजगार
    एमएसएमई मंत्रालय पीएमईजीपी कार्यक्रम का कार्यान्वयन करता है, जो ऋण-आधारित सब्सिडी योजना है। इसका लक्ष्य पारंपरिक कारीगरों और ग्रामीण/शहरी बेरोजगार युवाओं को गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने में सहायता करना और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है।

    मंत्री ने कहा कि पीएमईजीपी के कुल लाभार्थियों में 39 प्रतिशत महिलाएँ हैं, और उन्हें गैर-विशेष श्रेणी (25 प्रतिशत तक) की तुलना में अधिक 35 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाती है।

    एमएसएमई क्षेत्र में विकास और रोजगार
    इस प्रकार, सरकार की योजनाओं और पंजीकरण प्रक्रिया के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 7.83 करोड़ पंजीकृत उद्यम न केवल देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए स्थायी रोजगार और स्वरोजगार का अवसर भी प्रदान कर रहे हैं।

  • भू-राजनीतिक तनाव का असर, Air India ने डीजीसीए से फ़्लाइट ड्यूटी लिमिटेशन में छूट मांगी

    भू-राजनीतिक तनाव का असर, Air India ने डीजीसीए से फ़्लाइट ड्यूटी लिमिटेशन में छूट मांगी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, एयर इंडिया ने विमानन नियामक डीजीसीए से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों में अस्थायी ढील देने की मांग की है। गुरुवार को एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई। एयरलाइन का कहना है कि क्षेत्रीय हवाई प्रतिबंध और लंबा रास्ता अपनाने के कारण पायलटों पर ड्यूटी का दबाव बढ़ गया है।

    लंबी दूरी की उड़ानों के लिए दो पायलट पर्याप्त?
    रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने डीजीसीए से अनुरोध किया है कि कुछ लंबी दूरी की उड़ानों को तीन पायलट की बजाय दो पायलट के साथ संचालित करने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही एयरलाइन ने अधिकतम उड़ान समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया ने उड़ान के अनुमत समय में 1 घंटा 3 मिनट की वृद्धि की मांग की है, जिससे अधिकतम उड़ान समय 10 घंटे से बढ़कर 11–11.5 घंटे तक पहुंच जाएगा।

    फ्लाइट ड्यूटी पीरियड में वृद्धि की मांग
    इसके अलावा एयर इंडिया ने अधिकतम फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (एफडीपी) को भी बढ़ाने का अनुरोध किया है। प्रस्ताव के अनुसार ड्यूटी समय को 13 घंटे से बढ़ाकर 14 घंटे 45 मिनट करने की मांग की गई है, यानी पायलटों के लिए करीब 1 घंटा 45 मिनट अतिरिक्त ड्यूटी अवधि।

    लंबा मार्ग और ईंधन की बढ़ती खपत
    रिपोर्ट में बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में कई हिस्सों का हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित है और पाकिस्तान का एयरस्पेस भारतीय एयरलाइंस के लिए बंद रहने के कारण उड़ानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इस वजह से एयरलाइंस को अरब सागर, मध्य एशिया और अफ्रीका के ऊपर से उड़ान भरनी पड़ रही है। इससे न केवल उड़ान का समय बढ़ गया है, बल्कि ईंधन की खपत और क्रू की थकान पर दबाव भी बढ़ गया है।

    डीजीसीए की सुरक्षा सलाह
    अधिकारियों ने बताया कि डीजीसीए ने हाल ही में भारतीय एयरलाइंस को मिडिल ईस्ट के 11 देशों के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी है, जिन्हें उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। एयर इंडिया के लिए ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र से बचने की वजह से कई लंबी दूरी की उड़ानों का समय काफी बढ़ गया है, जिससे इस सप्ताह कुछ उड़ानें रद्द भी करनी पड़ीं।

    प्रस्ताव पर डीजीसीए विचार कर रही
    रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया का यह प्रस्ताव फिलहाल डीजीसीए के पास विचाराधीन है और नियामक इसकी जांच कर रहा है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि विमानन उद्योग की अन्य कंपनियां भी रूट संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं, लेकिन फिलहाल इंडिगो जैसी एयरलाइंस ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है।

    पायलटों की थकान पर सवाल
    हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एयर इंडिया ने इस मामले में क्रू की थकान और सुरक्षा जोखिम से जुड़े सवालों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी उड़ान और ड्यूटी समय में वृद्धि के बावजूद सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • केंद्र का बयान: भारत के पास तेल की कोई कमी नहीं, पर्याप्त भंडार सुरक्षित

    केंद्र का बयान: भारत के पास तेल की कोई कमी नहीं, पर्याप्त भंडार सुरक्षित


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत के पास तेल की कोई कमी नहीं है और देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट जैसी परिस्थितियों का सामना करना संभव है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत का रणनीतिक तेल भंडार और 40 प्रमुख तेल निर्यातक देशों से विविध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की लगातार आपूर्ति बनी रहे।

    आर्थिक मजबूती और विदेशी मुद्रा भंडार
    सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत का आर्थिक आधार व्यापक और मजबूत है। देश के पास 11-12 महीने तक आवश्यक वस्तुओं और ऊर्जा आयात करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। यह भंडार आने वाले पांच वर्षों में देश के तेल आयात बिल को भी कवर करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे मजबूत वित्तीय भंडार के चलते भारत वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकटों के लिए तैयार है।

    बाजार की मांग के लिए पर्याप्त स्टॉक
    अधिकारी ने बताया कि देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का इतना भंडार है कि यह बाजार की 70 दिनों से अधिक की मांग को पूरा कर सकता है। इसके साथ ही, भारत ने मध्य पूर्व पर अपनी निर्भरता भी घटाई है। इससे किसी भी संभावित आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में देश सुरक्षित रहेगा।

    बहुसंबद्ध नीति और आर्थिक कूटनीति
    सरकार की बहुसंबद्ध नीति ने देश को संकट से निपटने में सक्षम बनाया है। इसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद, आवश्यक वस्तु अधिनियम का प्रयोग और विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है। अधिकारी ने कहा कि यह रणनीति न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे देश की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होता।

    मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और विकास
    इस संकट का प्रभाव मुद्रास्फीति की तुलना में विकास पर अधिक पड़ता है। वर्तमान में भारत की मुद्रास्फीति दर लगभग 2.75 प्रतिशत है, जो विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है। रूसी तेल आयात, ईंधन कर में लचीलापन और एलपीजी की नियंत्रित कीमतों की वजह से घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर हैं।

    ऊर्जा आयात में विविधता और होर्मुज पर निर्भरता में कमी
    जापान जैसे देशों में मुद्रास्फीति दर 5 प्रतिशत है और उनका कच्चे तेल पर निर्भरता लगभग 75-90 प्रतिशत है। इसके विपरीत, भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति पर अपनी निर्भरता घटाकर 20 प्रतिशत कर दी है। इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे अन्य देशों से आयात कर, भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है।

    पड़ोसी देशों की तुलना में सुरक्षित स्थिति
    अधिकारी ने बताया कि भारत के पास दो महीने से अधिक का भंडार है, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के पास केवल 30 दिन या उससे कम का स्टॉक है। पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है, वहीं श्रीलंका और बांग्लादेश में भी ईंधन की आपूर्ति संकट और भाव वृद्धि देखी जा रही है।

     ऊर्जा सुरक्षा और विकास की राह
    केंद्र सरकार की रणनीति ने भारत को न केवल ऊर्जा संकट के लिए तैयार किया है, बल्कि व्यापक आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित की है। बहुसंबद्ध नीति, विविध आपूर्ति स्रोत और मजबूत आर्थिक भंडार देश की ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत आधार हैं। इससे भारत वैश्विक तेल संकट और पड़ोसी देशों की तुलना में सुरक्षित स्थिति में है।

  • शेयर मार्केट अपडेट: InterGlobe Aviation में ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस घटाने से आई 4% गिरावट

    शेयर मार्केट अपडेट: InterGlobe Aviation में ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस घटाने से आई 4% गिरावट


    नई दिल्ली। इंडिगो एयरलाइन की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation Limited के शेयर गुरुवार को 4 प्रतिशत तक गिर गए। यह गिरावट तब हुई जब वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सिटी ने स्टॉक का टारगेट प्राइस घटाकर 5,100 रुपए प्रति शेयर कर दिया, जो पहले 5,700 रुपए था।

    ब्रोकरेज का दृष्टिकोण
    टारगेट प्राइस में कटौती: करीब 10.5% की कमी।
    रेटिंग: ‘बाय’ बरकरार है।
    संभावित तेजी: नया टारगेट प्राइस अभी भी स्टॉक के पिछले बंद भाव से लगभग 17% की संभावना दिखाता है।

    कारण और पृष्ठभूमि
    सिटी ब्रोकरेज ने बताया कि पिछले एक साल में इंडिगो ने कई नकारात्मक परिस्थितियों का सामना किया:
    पहली तिमाही में भू-राजनीतिक तनाव से संचालन प्रभावित।
    फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों के कारण कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा।
    ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े नए भू-राजनीतिक तनाव ने अनिश्चितता बढ़ाई।
    ईंधन की बढ़ती कीमतें और कमजोर भारतीय रुपया एयरलाइन की लाभप्रदता पर दबाव डाल सकते हैं।

    सकारात्मक संकेत
    जनवरी में इंडिगो ने घरेलू बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाकर 59.6% से 63.6% कर दी।
    एयरलाइन की लागत संरचना प्रतिस्पर्धियों की तुलना में मजबूत है।

    शेयर प्रदर्शन
    रिपोर्ट आने के बाद दिन में शेयर 3.6% गिरकर 4,194.10 रुपए के इंट्रा-डे लो पर।
    दोपहर करीब 2:55 बजे शेयर 2.51% गिरकर 4,243.50 रुपए पर।
    पिछले एक महीने में स्टॉक लगभग 14.8% गिर चुका है।
    52 हफ्ते का उच्चतम स्तर: 6,232.50 रुपए; निम्नतम: 4,035 रुपए।
    मार्केट कैप: 1.64 लाख करोड़ रुपए।

    हालांकि टारगेट प्राइस घटने के बाद शेयरों में गिरावट आई, लेकिन इंडिगो की मजबूत घरेलू हिस्सेदारी और लागत संरचना इसे निवेशकों के लिए अभी भी आकर्षक बना रही है।

  • दूध सुरक्षा पर सख्ती, उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस के बिना नहीं कर सकेंगे व्यापार: FSSAI

    दूध सुरक्षा पर सख्ती, उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस के बिना नहीं कर सकेंगे व्यापार: FSSAI


    नई दिल्ली। देश में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने गुरुवार को नया नियम लागू किया। इसके तहत सभी दूध उत्पादक और दूध विक्रेता, डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर, अपने व्यवसाय को चलाने से पहले एफएसएसएआई के साथ अनिवार्य पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त करेंगे।

    उद्देश्य और लाभ
    एफएसएसएआई ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य दूध में मिलावट की घटनाओं को रोकना, खाद्य सुरक्षा अनुपालन को मजबूत करना और सुरक्षित भंडारण तथा स्वच्छ आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इससे आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा होगी और उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित दूध उपलब्ध होगा।

    राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश
    एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे विशेष पंजीकरण अभियान चलाएं और दूध उत्पादकों एवं विक्रेताओं के लाइसेंस और पंजीकरण का कड़ाई से सत्यापन करें। राज्य स्तर पर अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि सभी व्यवसायियों के पास एफएसएसएआई का प्रमाणपत्र उपलब्ध हो।

    संसद में उठे थे मिलावट के मामले
    इससे पहले बीते महीने दूध और खाद्य उत्पादों में मिलावट का मुद्दा संसद में उठ चुका था। Raghav Chadha ने कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे सेहतमंद और ऊर्जा बढ़ाने वाले झूठे दावों के तहत हानिकारक पदार्थों वाले उत्पाद बेच रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि दूध में यूरिया, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर, फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग, खाने के तेल में मशीन का तेल, मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा, चाय में सिंथेटिक रंग और पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलाए जाते हैं। यहां तक कि देशी घी की मिठाइयों में वनस्पति तेल और डालडा का इस्तेमाल किया जाता है।

    एफएसएसएआई की सलाह और अभियान
    एफएसएसएआई ने सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों से अपील की है कि वे स्थानीय अधिकारियों, डेयरी सहकारी समितियों, स्कूलों, और समुदायों के साथ मिलकर व्यापक अभियान चलाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास वैध लाइसेंस हो और किसी भी प्रकार की मिलावट को रोका जा सके।

    भविष्य के लिए प्रभाव
    इस पहल से न केवल दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यह उपभोक्ताओं में विश्वास बढ़ाने और डेयरी उद्योग में जवाबदेही स्थापित करने में भी मदद करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसका प्रभावी कार्यान्वयन हुआ, तो दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की घटनाओं में काफी कमी आएगी।

    एफएसएसएआई का यह कदम दूध और डेयरी उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद देने के लिए एक महत्वपूर्ण और समयोचित पहल है।

  • खाड़ी संकट का असर: GAIL ने Yelahanka Power Plant को गैस सप्लाई रोकी, बिजली उत्पादन पर असर संभव

    खाड़ी संकट का असर: GAIL ने Yelahanka Power Plant को गैस सप्लाई रोकी, बिजली उत्पादन पर असर संभव


    नई दिल्ली। सरकारी महारत्न कंपनी GAIL (India) Limited (गेल) ने गुरुवार सुबह 6 बजे से बेंगलुरु स्थित Yelahanka Gas-based Power Plant को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी है। इस फैसले की पुष्टि ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने की है। गैस सप्लाई बंद होने से इस गैस आधारित बिजली संयंत्र के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    कर्नाटक का एकमात्र गैस आधारित प्लांट
    यह 370 मेगावाट क्षमता वाला बिजली संयंत्र Karnataka Power Corporation Limited (केपीसीएल) द्वारा स्थापित किया गया है। यह कर्नाटक का एकमात्र गैस आधारित पावर प्लांट है और मुख्य रूप से Bengaluru शहर को बिजली आपूर्ति के लिए बनाया गया था। यह संयंत्र पिछले साल दिसंबर से लगातार संचालन में था, लेकिन गैस आपूर्ति रुकने के बाद बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

    पश्चिम एशिया संकट से गैस की कमी
    अधिकारियों के अनुसार West Asia में जारी भू-राजनीतिक तनाव और विशेष रूप से Israel–Iran conflict के कारण प्राकृतिक गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते भारत में भी गैस की उपलब्धता कम हो गई है और सरकार को विभिन्न क्षेत्रों के लिए गैस आवंटन की प्राथमिकता तय करनी पड़ी है।

    बिजली क्षेत्र को मिली सबसे कम प्राथमिकता
    केंद्र सरकार ने गैस आवंटन के लिए हाल ही में एक गजट अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत घरेलू खपत को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। इसके बाद परिवहन और उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है, जबकि बिजली उत्पादन को सबसे निचली श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि गैस की कमी रहने तक बिजली संयंत्रों को सीमित सप्लाई ही मिल पाएगी।

    कर्नाटक में बिजली की मांग
    फिलहाल कर्नाटक में प्रतिदिन लगभग 35.5 करोड़ यूनिट बिजली की मांग है। इस मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट के अलावा सौर और पवन ऊर्जा स्रोतों का भी इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही केंद्रीय ग्रिड से मिलने वाली बिजली और पावर एक्सचेंज व्यवस्था के माध्यम से भी अतिरिक्त बिजली ली जा रही है।

    अन्य राज्यों से भी मिल रही बिजली
    राज्य सरकार बिजली आपूर्ति को बनाए रखने के लिए अन्य राज्यों के साथ पावर एक्सचेंज व्यवस्था का भी सहारा ले रही है। इसके तहत Punjab, Uttar Pradesh और Haryana जैसे राज्यों से भी कुछ मात्रा में बिजली प्राप्त की जा रही है।

    गैस संकट जारी रहने पर असर संभव
    अधिकारियों का कहना है कि अगर Yelahanka Gas-based Power Plant को गैस सप्लाई और कम हुई या लंबे समय तक बंद रही, तो बिजली आपूर्ति पर हल्का असर पड़ सकता है। हालांकि राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अन्य स्रोतों से उत्पादन बढ़ाकर बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने की कोशिश की जाएगी।

    गैस आवंटन के नए नियम
    Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 के तहत सरकार ने गैस आवंटन के लिए विभिन्न क्षेत्रों को प्राथमिकता श्रेणियों में रखा है। इसमें घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस, एलपीजी उत्पादन, परिवहन के लिए सीएनजी और पाइपलाइन संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 100 प्रतिशत गैस आवंटन मिलेगा।

    अन्य क्षेत्रों को सीमित आपूर्ति
    उर्वरक संयंत्रों को दूसरी प्राथमिकता में रखा गया है और उन्हें औसत खपत का लगभग 70 प्रतिशत गैस मिलेगा। औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को तीसरी प्राथमिकता में रखा गया है। वहीं बिजली उत्पादन क्षेत्र को सबसे निचली प्राथमिकता दी गई है, जिसके कारण गैस की कमी के दौरान इस क्षेत्र को सीमित आपूर्ति ही मिलने की संभावना है।