Category: Economy

  • दिसंबर में ऑटो सेल्स में रिकॉर्ड बढ़त, कारों की बिक्री ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

    दिसंबर में ऑटो सेल्स में रिकॉर्ड बढ़त, कारों की बिक्री ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

    नई दिल्ली। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मंगलवार को दिसंबर 2025 के वाहन बिक्री आंकड़े जारी किए। इसके अनुसार, दिसंबर में थोक पैसेंजर वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर करीब 26.8 प्रतिशत बढ़कर 3,99,216 यूनिट्स रही, जो पिछले साल दिसंबर में 3,14,934 यूनिट्स थी। इस बढ़त ने वाहन निर्माता और डीलरों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है।

    दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मजबूत बिक्री

    सियाम के आंकड़ों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर 15,41,036 यूनिट्स हुई, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 11,05,565 यूनिट्स था। तिपहिया वाहनों की बिक्री भी 17 प्रतिशत बढ़कर 61,924 यूनिट्स दर्ज की गई, जो पिछले साल 52,733 यूनिट्स थी। इन आंकड़ों से साफ है कि छोटे और कम लागत वाले वाहन भी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

    तीसरी तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा

    वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में पैसेंजर वाहनों की थोक बिक्री 12.76 लाख यूनिट्स रही। यह तिमाही की बिक्री का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20.6 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।

    2025 में वार्षिक बिक्री का नया रिकॉर्ड

    पूरा साल 2025 (जनवरी-दिसंबर) देखा जाए तो पैसेंजर वाहनों की कुल थोक बिक्री 44.90 लाख यूनिट्स रही। यह वार्षिक बिक्री का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

    निर्यात में भी वृद्धि

    साल 2025 में देश से 8.63 लाख पैसेंजर वाहनों का निर्यात हुआ। यह निर्यात का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और पिछले साल की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    मजबूत बिक्री के पीछे कारक

    सियाम का मानना है कि इस मजबूत वृद्धि के पीछे कई कारक हैं। आयकर में कटौती, जीएसटी 2.0 की सुविधा और आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कमी ने ग्राहकों की खरीद क्षमता और धारणा पर सकारात्मक असर डाला। इन उपायों के चलते उपभोक्ता वाहन खरीदने के लिए ज्यादा प्रेरित हुए।

    सियाम के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर लगातार बढ़त पर है। दिसंबर और पूरे 2025 के आंकड़े बताते हैं कि पैसेंजर, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मांग में मजबूत रिकवरी हुई है। भविष्य में भी यह रुझान उद्योग के लिए उत्साहजनक संकेत देता है।

  • ATM ही नहीं, UPI से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा; जानिए कब से लागू होगा नया नियम?

    ATM ही नहीं, UPI से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा; जानिए कब से लागू होगा नया नियम?

    नई दिल्ली। अगर आप भी जरूरत के समय पीएफ का पैसा निकालने की लंबी प्रक्रिया से परेशान रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बड़ी राहत लेकर आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए ऐसा बदलाव करने जा रहा है, जो पीएफ निकासी की परिभाषा ही बदल देगा। बहुत जल्द पीएफ का पैसा निकालने के लिए न तो दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे और न ही कई दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। अब एटीएम ही नहीं, बल्कि UPI के जरिए भी पीएफ की रकम सीधे निकाली जा सकेगी।अगर आप भी यह सोचकर परेशान रहते हैं कि जरूरत के वक्त पीएफ का पैसा निकालना इतना कठिन क्यों है, तो अब यह परेशानी जल्द ही खत्म होने वाली है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों सदस्यों के लिए एक ऐसा डिजिटल बदलाव लाने जा रहा है, जिससे पीएफ से पैसे निकालना आसान हो जाएगा।

    अप्रैल से शुरू हो सकती है नई सुविधा
    सूत्रों के मुताबिक, EPFO अप्रैल 2026 तक एटीएम और UPI आधारित पीएफ निकासी सुविधा शुरू कर सकता है। इसके लिए संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड कर रहा है। बीते साल श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने घोषणा की थी कि ईपीएफओ सदस्यों के लिए पीएफ निकासी को आसान और तेज बनाया जाएगा। इसी कड़ी में अब बिना किसी अन्य अनुमति के तय सीमा तक राशि निकालने की सुविधा देने की तैयारी है।
    EPFO 3.0 का ट्रायल पूरा
    जानकारी के अनुसार, EPFO 3.0 से जुड़े सभी मॉड्यूल्स का ट्रायल पूरा कर लिया गया है। फिलहाल कोई बड़ी तकनीकी दिक्कत सामने नहीं आई है, लेकिन इसके बावजूद संगठन किसी भी तरह की खामी से बचना चाहता है। यही वजह है कि हर एंगल से सिस्टम की टेस्टिंग की जा रही है, ताकि सुविधा लागू होने के बाद खाताधारकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
    नए सिस्टम के तहत कर्मचारियों को पीएफ खाते से जुड़ा एक एटीएम कार्ड दिया जा सकता है, जिसके जरिए वे तय सीमा तक रकम सीधे एटीएम से निकाल सकेंगे। इसके अलावा UPI के माध्यम से भी पीएफ बैलेंस से भुगतान या ट्रांसफर संभव होगा। इससे इमरजेंसी में तुरंत कैश या डिजिटल पेमेंट करना आसान हो जाएगा।

    पहले ही मिल चुकी है 75% निकासी की छूट
    गौरतलब है कि कुछ महीने पहले EPFO ने सदस्यों को पीएफ में जमा राशि का 75 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा दी थी। इस कदम के बाद कर्मचारियों को आर्थिक संकट के समय बड़ी राहत मिली थी। अब ATM और UPI से निकासी की सुविधा शुरू होने के बाद यह प्रक्रिया और ज्यादा सरल और तेज हो जाएगी।

  • तैयार रखें निवेश की रकम! अगले हफ्ते IPO मार्केट में आएगा तूफान, खुलेंगे 6 नए कमाई के मौके

    तैयार रखें निवेश की रकम! अगले हफ्ते IPO मार्केट में आएगा तूफान, खुलेंगे 6 नए कमाई के मौके


    नई दिल्ली। अगले हफ्ते शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बेहद खास रहने वाला है। 12 जनवरी से 16 जनवरी के बीच प्राइमरी मार्केट में जोरदार हलचल देखने को मिलेगी। इस दौरान कुल 6 कंपनियां अपने IPO लॉन्च कर रही हैं, जिसमें एक बड़ा मेनबोर्ड IPO और पांच SME सेगमेंट के इश्यू शामिल हैं। टेक्नोलॉजी, एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की कंपनियां निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह सप्ताह उन निवेशकों के लिए अहम है जो शुरुआत से किसी कंपनी की ग्रोथ स्टोरी में शामिल होना चाहते हैं। अलग-अलग सेक्टरों के IPO आने से निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को विविधता देने का भी मौका मिलेगा। अधिकांश इश्यू 12 और 13 जनवरी से बोली प्रक्रिया शुरू करेंगे और अलग-अलग तारीखों पर बंद होंगे।

    मेनबोर्ड सेगमेंट में इस हफ्ते सबसे अधिक ध्यान Amagi Media Labs पर रहेगा। यह क्लाउड-बेस्ड SaaS कंपनी 13 जनवरी से निवेश के लिए खुलेगी और 16 जनवरी तक उपलब्ध रहेगी। इसका प्राइस बैंड ₹343 -₹361 प्रति शेयर और इश्यू साइज लगभग ₹1,788 करोड़ है। इसमें फ्रेश इश्यू के साथ OFS भी शामिल है, जिसके तहत पुराने निवेशक आंशिक हिस्सेदारी बेचेंगे। साइज और सेक्टर दोनों ही दृष्टि से यह सप्ताह का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।SME प्लेटफॉर्म पर भी जोरदार हलचल देखने को मिलेगी। पांच कंपनियों के इश्यू निवेशकों के लिए नए अवसर प्रदान करेंगे। इनमें शामिल हैं:

    अवाना इलेक्ट्रोसिस्टम्स: 12–14 जनवरी, प्राइस ₹56–₹59, NSE SME, लॉट साइज 4,000 शेयर।

    नर्मदेश ब्रास इंडस्ट्रीज: 12–15 जनवरी, प्राइस ₹515, इश्यू साइज ₹44.87 करोड़, लॉट 480 शेयर।

    इंडो एसएमसी: 13–15 जनवरी, प्राइस ₹141–₹149, BSE SME, न्यूनतम निवेश 2,000 शेयर।

    GRE रिन्यू एनरटेक: 13–16 जनवरी, प्राइस ₹100–₹105, रिन्यूएबल एनर्जी, लॉट साइज 2,400 शेयर।

    आर्मर सिक्योरिटी इंडिया: 14–19 जनवरी, प्राइस ₹55–₹57, लॉट साइज 4,000 शेयर।

    इसके अलावा, हाल ही में आए कुछ IPO अब लिस्टिंग के लिए तैयार हैं। इनमें भारत कोकिंग कोल, गैबियन टेक्नोलॉजीज, यजुर फाइबर्स, विक्ट्री इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और डिफ्रेल टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। लिस्टिंग के दिन इन शेयरों की चाल यह तय करेगी कि निवेशकों को तुरंत लिस्टिंग गेन मिलेगा या लॉन्ग टर्म निवेश करना पड़ेगा।विशेषज्ञों का कहना है कि IPO में निवेश आकर्षक होता है, लेकिन इसमें जोखिम भी जुड़ा रहता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट, बिजनेस मॉडल और अपने निवेश लक्ष्य को समझना जरूरी है।अगला सप्ताह निवेशकों के लिए नए अवसर और संभावित लाभ के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • नया टैक्स कानून 2025: 1 अप्रैल से होंगे बड़े बदलाव, जानें कैसे प्रभावित होंगे आपका पैसा

    नया टैक्स कानून 2025: 1 अप्रैल से होंगे बड़े बदलाव, जानें कैसे प्रभावित होंगे आपका पैसा

    नई दिल्ली| देश में इनकम टैक्स को लेकर सबसे बड़ी शिकायत हमेशा यही रही है कि कानून बहुत जटिल है. आम आदमी के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि उसे किस सेक्शन में क्या करना है और कितना टैक्स देना है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए सरकार अब एक नया और ज्यादा सरल कानून लेकर आ रही है, जिसका नाम है इनकम टैक्स एक्ट 2025. यह नया कानून 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा और करीब 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा.
    इनकम टैक्स एक्ट 1961 उस दौर में बनाया गया था, जब भारत की अर्थव्यवस्था आज जैसी डिजिटल और आधुनिक नहीं थी. समय के साथ इसमें सैकड़ों संशोधन होते चले गए. नतीजा यह हुआ कि कानून इतना भारी और उलझा हो गया कि टैक्स भरना तो दूर, उसे पढ़ना भी मुश्किल हो गया. छोटे टैक्सपेयर्स, नौकरीपेशा लोगों और सीनियर सिटीज़न्स के लिए यह एक बड़ी समस्या बन चुका था. सरकार का मानना है कि अब समय आ गया था कि पूरे कानून को नए सिरे से लिखा जाए.
    इनकम टैक्स एक्ट 2025 में क्या है खास
    सरकार के मुताबिक नया टैक्स कानून लगभग 50 फीसदी छोटा होगा. इसमें भाषा को आसान किया गया है ताकि आम लोग भी बिना टैक्स एक्सपर्ट की मदद के नियम समझ सकें. गैरज़रूरी सेक्शन हटाए गए हैं और कई पुराने व बेकार टैक्स प्रावधानों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि इससे टैक्स को लेकर होने वाले विवाद और कोर्ट-कचहरी के मामले भी कम होंगे.
    टैक्स रेट वही, नियम हुए आसान
    सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आपकी टैक्स स्लैब वही रहेगी, जो पहले थी. यह कानून रेवेन्यू न्यूट्रल है, मतलब सरकार की कमाई पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब टैक्स भरने के नियम ज्यादा साफ और समझने में आसान होंगे.

    Assessment Year का झंझट खत्म
    अब तक इनकम टैक्स में प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे मुश्किल शब्द लोगों को भ्रम में डालते थे. नए कानून में इसे खत्म कर दिया गया है. अब सिर्फ एक ही शब्द होगा टैक्स ईयर. इससे ITR भरने की प्रक्रिया और भी सरल हो जाएगी. इसके अलावा, अगर कोई टैक्सपेयर तय तारीख के बाद भी रिटर्न फाइल करता है, तो उसे TDS रिफंड पाने का अधिकार मिलेगा, जो पहले आसान नहीं था.

    सरकार ने साफ किया है कि बजट 2026-27 में टैक्स से जुड़े जो भी नए बदलाव होंगे, चाहे वो पर्सनल टैक्स हों, कॉरपोरेट टैक्स या HUF से जुड़े नियम, सभी को इसी नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत शामिल किया जाएगा. संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब इसके नियम और टैक्स फॉर्म तैयार किए जा रहे हैं.

    पहले भी हो चुकी है कोशिश
    यह पहली बार नहीं है जब टैक्स सिस्टम को नया रूप देने की कोशिश हुई है. साल 2010 में डायरेक्ट टैक्स कोड लाने का प्रयास हुआ था, लेकिन वह सफल नहीं हो सका. बाद में 2017 में एक कमेटी बनाई गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर अब यह नया कानून तैयार किया गया है. इनकम टैक्स एक्ट 2025 का मकसद साफ है. टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना. टैक्स वही रहेगा, लेकिन समझना अब आसान होगा. नौकरीपेशा लोगों, छोटे कारोबारियों और सीनियर सिटीज़न्स के लिए यह बदलाव बड़ी राहत माना जा रहा है.

  • Bharat Coking Coal IPO GMP Day 2: बीसीसीएल आईपीओ पर टूटे निवेशक! जीएमपी दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत, निवेश करें या नहीं?

    Bharat Coking Coal IPO GMP Day 2: बीसीसीएल आईपीओ पर टूटे निवेशक! जीएमपी दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत, निवेश करें या नहीं?

    नई दिल्ली| भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) का आईपीओ 9 जनवरी 2026 को खुला और 13 जनवरी तक निवेशकों के लिए उपलब्ध रहेगा। BCCL, कोल इंडिया लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी है और यह कोकिंग कोल के खनन में देश में अहम भूमिका निभाती है। आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है, जिसमें कुल 46.57 करोड़ शेयर प्रमोटर यानी कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा बेचे जा रहे हैं। इससे BCCL को सीधे कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि यह राशि कोल इंडिया के पास जाएगी। आईपीओ के प्राइस बैंड को 21 से 23 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। रिटेल निवेशकों को कम से कम 600 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा, जिसका ऊपरी प्राइस बैंड पर निवेश करीब 13,800 रुपये आएगा। शेयर का अलॉटमेंट 14 जनवरी को और डीमैट खाते में क्रेडिट 15 जनवरी को होने की संभावना है, वहीं 16 जनवरी को बीएसई और एनएसई पर लिस्टिंग होने की उम्मीद है।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम और निवेशकों की उम्मीद
    ग्रे मार्केट में BCCL के आईपीओ को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। 12 जनवरी 2026 तक इस आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 10.6 रुपये तक पहुंच गया है। यदि इसे अपर प्राइस बैंड 23 रुपये के हिसाब से देखें तो लिस्टिंग के समय शेयर की कीमत लगभग 33.6 रुपये हो सकती है। इससे निवेशकों को लिस्टिंग पर करीब 46 प्रतिशत तक रिटर्न मिलने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म एसबीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, बीसीसीएल ने वित्त वर्ष 2023-25 के दौरान आय, मुनाफा और ऑपरेटिंग कमाई में लगातार सुधार दिखाया है। कंपनी अपनी कोल वॉशरी क्षमता को 13.65 मिलियन टन से बढ़ाकर 20.65 मिलियन टन करने की योजना पर काम कर रही है। नई वॉशरी और मौजूदा मूनिडीह वॉशरी का विस्तार करके उत्पादन क्षमता दोगुनी की जाएगी।

    BCCL का महत्व और बाजार में स्थिति
    बीसीसीएल का मुख्य काम कोकिंग कोल का खनन करना है, जो स्टील उत्पादन के लिए अनिवार्य कच्चा माल है। इस वजह से इसकी अहमियत देश के स्टील सेक्टर में बेहद ज्यादा है। कंपनी का कारोबार झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैले खदान क्षेत्रों में केंद्रित है, जिसमें झरिया और रानीगंज क्षेत्र शामिल हैं। कुल लीज एरिया करीब 288 वर्ग किलोमीटर है। कंपनी का प्रशासनिक केंद्र धनबाद और क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता में स्थित हैं। ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी रिसर्च का मानना है कि बीसीसीएल की बाजार में मजबूत पकड़ और भरोसेमंद रिकॉर्ड इसे लिस्टिंग गेन के लिहाज से निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है।

    बीसीसीएल आईपीओ में निवेश करने से रिटेल निवेशकों को लिस्टिंग पर तगड़ा फायदा मिलने की संभावना है। ग्रे मार्केट प्रीमियम और कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के मद्देनजर, यह आईपीओ अल्पकालिक निवेशकों के लिए लाभकारी अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि, निवेश करने से पहले प्राइस बैंड, कंपनी की योजना और स्टील उद्योग की स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • Budget पर मिले सुझावों में क्रिप्टो पर 20% टैक्स लगाने की मांग…कर मुक्त हो PF योगदान

    Budget पर मिले सुझावों में क्रिप्टो पर 20% टैक्स लगाने की मांग…कर मुक्त हो PF योगदान


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) अब तक राज्यों और अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनसे आगामी बजट (Budget 2026) को लेकर सुझाव ले चुका है। बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन सुझाव (Online Suggestions) भेज रहे हैं। अभी तक क्रिप्टो करेंसी (Cryptocurrency) पर लगने वाले टैक्स को कम करने और उसकी निगरानी के लिए समूचित प्रावधान को लेकर सबसे ज्यादा सुझाव मिले हैं।

    कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि क्रिप्टो पर सीधे 20 फीसदी कर लगाया जाना चाहिए। लोगों का सुझाव है कि क्रिप्टो और ब्लॉकचेन सेक्टर के लिए स्पष्ट, संतुलित और व्यावहारिक नीति बनाई जाए।


    अभी कितना लगता है टैक्स

    वर्तमान में 30 फीसदी टैक्स और एक फीसदी टीडीएस लगता है जो छोटे निवेशकों व स्टार्टअप्स के लिए बाधा है, जिसे तर्कसंगत किया जाना चाहिए। क्रिप्टो को डिजिटल एसेट की स्पष्ट परिभाषा मिले और नुकसान को लाभ से समायोजित करने की अनुमति दी जाए। इससे नवाचार बढ़ेगा, रोजगार सृजित होंगे और भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनेगा।

    क्रिप्टोकरेंसी को नियंत्रित ढंग से लागू करने के लिए भी सुझाव दिए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि इसके लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा एवं व्यापक कानून बनाया जाए, जिसमें इसकी कानूनी स्थिति, उपयोग और सीमाएं स्पष्ट हों। इसकी निगरानी के लिए एक नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाए। केवाईसी एवं एंटी मनी लॉड्रिंग (एएमएल) नियमों का पालन सभी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर नियमों को अनिवार्य किया जाए, जिससे अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।


    पीएफ योगदान पर न लगाया जाए टैक्स

    मौजूदा नियमों के तहत किसी कर्मचारी के पीएफ खाते में सालाना 2.5 लाख रुपये के योगदान पर अर्जित ब्याज कर मुक्त होती है लेकिन 2.5 लाख रुपये से अधिक के योगदान पर अर्जित ब्याज पर कर्मचारी को कर देना होता है। लोगों ने सुझाव रखा है कि ईपीएफओ में होने वाले योगदान में कर से जुड़े प्रावधान को हटाया जाए क्योंकि इस प्रावधान से अनिवार्य पीएफ योगदान करने वाले कर्मचारी प्रभावित होते हैं।

    इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाए जाने को लेकर सुझाव आए हैं। काफी लोगों ने www.mygov.in वेबसाइट पर जाकर सुझाव दिया है कि कर्मचारियों की न्यूनतम वेतनमान सीमा को बढ़ाया जाएगा। करीब 11 वर्षों से न्यूनतम वेतन न बढ़ाए जाने के चलते लोगों का ईपीएफओ में जमा होने वाला अंशदान सीमित है। ऐसी स्थिति में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को लंबी नौकरी करने के बाद भी पेंशन बहुत कम मिलती है।

  • एनएसई का बड़ा IPO आने वाला, निवेशकों के लिए संकेत: सेबी से जल्द मिल सकता है NOC

    एनएसई का बड़ा IPO आने वाला, निवेशकों के लिए संकेत: सेबी से जल्द मिल सकता है NOC

    नई दिल्ली| नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का आईपीओ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से जल्द ही नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मिलने के करीब है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नियामक एनएसई को अप्रूवल देने की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक पूरी कर सकता है। एनओसी मिलने के बाद एनएसई अपने पब्लिक इश्यू को बाजार में उतारने के लिए तैयार हो जाएगा, और लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय एक्सचेंज के हाथ में होगा।

    डार्क फाइबर विवाद ने रोके एनएसई के रास्ते

    एनएसई का आईपीओ कई सालों से अटका हुआ था, जिसका मुख्य कारण 2010-2014 के बीच हुए तथाकथित डार्क फाइबर केस हैं। आरोप था कि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एनएसई के को-लोकेशन सर्वर तक खास एक्सेस दिया गया था, जिससे वे अन्य बाजार भागीदारों की तुलना में तेजी से ट्रेडिंग कर पाते थे। अप्रैल 2019 में, सेबी ने एनएसई को कथित गैर-कानूनी मुनाफे के रूप में 62.58 करोड़ रुपये लौटाने और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को मार्केट से जुड़े पदों पर कार्य करने से रोकने का निर्देश दिया था। 2022 में एक्सचेंज पर 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया।

    रिटेल निवेशकों की बड़ी भागीदारी

    एनएसई ने पिछले साल जुलाई में जानकारी दी थी कि लगभग 1.46 लाख रिटेल निवेशक उसके शेयरों में निवेश कर चुके हैं। ये शेयर ग्रे (अनलिस्टेड) मार्केट में हैं और हर निवेशक के पास की कीमत 2 लाख रुपये से कम है। इसके बावजूद रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीओ के बाद इस हिस्सेदारी और बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशकों को लंबे समय से एक्सचेंज के शेयर में संभावित मुनाफा नजर आ रहा है।

    एनएसई के लिए रास्ता अब साफ

    सेबी से एनओसी मिलने के बाद एनएसई को अपने पब्लिक इश्यू को समयबद्ध तरीके से लॉन्च करने का अधिकार मिलेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, आईपीओ के लिए निवेशक पहले से उत्साहित हैं और बाजार में इसकी मांग अच्छी रहने की संभावना है। लंबे समय से रुका यह आईपीओ न केवल एनएसई के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी नया उत्साह और रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा।

  • EMI की जिम्मेदारी किसकी? जानें व्यक्ति की मौत के बाद बैंक क्या कर सकता है

    EMI की जिम्मेदारी किसकी? जानें व्यक्ति की मौत के बाद बैंक क्या कर सकता है

    नई दिल्ली|  किसी भी तरह के लोन में कई तरह की चीजें शामिल होती हैं, जिसकी वजह से लोन आज के डिजिटल युग में भी काफी पेचीदा प्रोसेस बना हुआ है। जिन लोगों को आसानी से लोन मिल जाता है, उन्हें इस पेचीदा प्रोसेस के बारे में मालूम नहीं चल पाता। लेकिन, जिन लोगों के लोन ऐप्लिकेशन को बैंक बार-बार रिजेक्ट कर देते हैं, वे इस समस्या को बहुत अच्छे से जानते हैं। लोन के लिए अप्लाई करने से लेकर लोन की पूरी पेमेंट होने तक ये एक बहुत लंबा प्रोसेस होता है। अगर लोन चलते-चलते किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो क्या होगा? यहां हम जानेंगे कि अगर लोन लेने के बाद किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो क्या होगा? ऐसी स्थिति में बैंक किस व्यक्ति से लोन की वसूली करेगा?
    उधारकर्ता की मृत्यु हो जाए तो क्या होता है आगे का प्रोसेस
    नियमों के मुताबिक, अगर लोन लेने के बाद किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो बैंक सबसे पहले उस लोन अकाउंट के को-ऐप्लिकैंट से संपर्क करेगा। अगर लोन के लिए कोई को-ऐप्लिकैंट ही नहीं है या फिर को-ऐप्लिकैंट लोन की भरपाई के लिए असमर्थ है तो फिर बैंक लोन के लिए गारंटर बने व्यक्ति से संपर्क करती है। अगर गारंटर भी लोन की भरपाई के लिए मना कर दे तो बैंक फिर मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी से संपर्क करते हैं और उनसे लोन की बकाया राशि के समय-समय पर भुगतान करने की अपील करते हैं। को-ऐप्लिकेंट, गारंटर और कानूनी उत्तराधिकारी में से कोई भी लोन की भरपाई करने में समर्थ नहीं है तो बैंक वसूली के लिए मजबूरी में आखिरी विकल्प पर काम करना शुरू कर देते हैं।

    वसूली के लिए किस हद तक जा सकते हैं बैंक
    लोन की वसूली के लिए बैंकों के पास आखिरी विकल्प के तौर पर मृतक की संपत्ति को अपने कब्जे में लेना है। जब लोन अकाउंट के को-ऐप्लिकेंट, गारंटर और कानूनी उत्तराधिकारी लोन का भुगतान करने में असमर्थता जताते हैं तो ऐसे मामलों में बैंकों के पास ये अधिकार होते हैं कि वो मृतक की संपत्ति को बेचकर कर्ज की वसूली कर सकते हैं। होम लोन और ऑटो लोन के मामले में बैंक सीधे-सीधे मृतक के घर या गाड़ी को अपने कब्जे में लेते हैं और फिर नीलामी आयोजित कर उसे बेचकर लोन की वसूली करते हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पर्सनल लोन या फिर कोई अन्य लोन लिया है तो ऐसे मामलों में बैंक उसकी किसी अन्य संपत्ति को नीलामी में बेचकर अपने पैसों की वसूली करते हैं।

  • Post office की धांसू स्कीम, एकमुश्त ₹2,50,000 जमा करने पर मिलेगा ₹1,16,062 का रिटर्न, जानें गणित

    Post office की धांसू स्कीम, एकमुश्त ₹2,50,000 जमा करने पर मिलेगा ₹1,16,062 का रिटर्न, जानें गणित

    नई दिल्ली: अगर आप सुरक्षित और फिक्स्ड रिटर्न की तलाश में हैं, तो पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) स्कीम आपके लिए एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है। यह योजना भारत सरकार द्वारा चलाई जाती है, इसलिए इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और मार्केट उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता। रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की पढ़ाई या भविष्य की जरूरतों के लिए यह योजना निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद मानी जाती है।

    NSC की ब्याज दर और टैक्स बेनिफिट
    पोस्ट ऑफिस NSC पर वर्तमान में 7.7% सालाना फिक्स ब्याज दर मिल रही है। स्कीम की मैच्योरिटी अवधि 5 साल है। ब्याज सालाना आधार पर कंपाउंड होता है और मैच्योरिटी पर भुगतान किया जाता है। आखिरी साल को छोड़कर ब्याज पर टैक्स छूट है और सेक्शन 80C के तहत निवेशकों को ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट भी मिलती है। इसका मतलब है कि आप सुरक्षित निवेश के साथ टैक्स बचत का भी फायदा उठा सकते हैं।

    2.5 लाख निवेश पर रिटर्न का गणित
    अगर आप NSC में एकमुश्त ₹2,50,000 का निवेश करते हैं, तो सालाना 7.7% ब्याज का फायदा मिलेगा। 5 साल में इस निवेश पर कुल ₹1,16,062 ब्याज आएगा। मैच्योरिटी पर कुल राशि ₹3,66,062 हो जाएगी। यह पूरा रिटर्न पहले से तय है और किसी तरह के मार्केट रिस्क से मुक्त है। फिक्स रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के लिए यह स्कीम आदर्श विकल्प है और भविष्य की प्लानिंग में सहायक साबित होती है।

    एनएससी में कौन कर सकता है निवेश
    इस स्कीम में सभी भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं। वयस्क अपने नाम से और अभिभावक नाबालिग के नाम निवेश कर सकते हैं। 10 साल या उससे अधिक उम्र के नाबालिग स्वयं भी निवेश कर सकते हैं। ध्यान रहे कि NRI, ट्रस्ट और HUF सीधे निवेश के लिए पात्र नहीं हैं, लेकिन निवेश के बाद NRI बनने पर सर्टिफिकेट वैध रहता है।

    क्यों चुनें नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट
    NSC उन निवेशकों के लिए आदर्श है जो सुरक्षित, स्थिर और टैक्स बचत वाला विकल्प चाहते हैं। इसमें न्यूनतम निवेश राशि थोड़ी भी हो सकती है और अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। पोस्ट ऑफिस का भरोसा, सरकार की गारंटी और फिक्स रिटर्न इसे मिडिल क्लास और रिस्क से बचने वाले निवेशकों के लिए एक मजबूत विकल्प बनाते हैं। लंबी अवधि के सुरक्षित निवेश की तलाश में NSC आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग का अहम हिस्सा बन सकती है।

  • बड़े निवेशकों के लिए अलर्ट! Reliance Jio का IPO जल्द होगा लॉन्च, जानें पूरी डिटेल और फायदे

    बड़े निवेशकों के लिए अलर्ट! Reliance Jio का IPO जल्द होगा लॉन्च, जानें पूरी डिटेल और फायदे

    नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) साल 2026 की पहली छमाही में अपना आईपीओ लेकर आ सकती है. हाल ही में हुई रिलायंस AGM में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जून 2026 तक कंपनी के शेयरों को लिस्ट कराने के अपने प्लान का जिक्र किया था. कई इंवेस्टमेंट बैंकरों के लगाए गए अनुमान के मुताबिक, , रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के बीच है.

    क्या है कंपनी का प्लान?
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ के जरिए रिलायंस ग्रुप की यह कंपनी अपनी 2.50 परसेंट की हिस्सेदारी बेचकर 4.5 अरब डॉलर जुटा सकती है. इसी के साथ यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है. इससे पहले साल 2025 में ह्युडई मोटर इंडिया 3.3 अरब डॉलर का आईपीओ लेकर आई थी इसलिए अभी तक का सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड इसी कंपनी के नाम है.
    जेरोधा वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, “अगस्त 2025 में 48वीं रिलायंस इंडस्ट्रीज AGM में मुकेश अंबानी ने औपचारिक रूप से कहा था कि जियो IPO के लिए फाइल करने की सभी तैयारियां कर रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी भारतीय मार्केट अथॉरिटीज से सभी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने के बाद 2026 के पहले छमाही में जियो को लिस्ट करने का प्लान बनाकर चल रही है इसलिए रिलायंस जियो IPO के जून 2026 तक भारतीय प्राइमरी मार्केट में आने की उम्मीद है.

    कितना है GMP?
    रिलायंस जियो IPO GMP बिगुल के मुताबिक, रिलायंस जियो IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) फिलहाल 93 रुपये प्रति शेयर चल रहा है. इसका मतलब है कि कंपनी के शेयर DRHP फाइलिंग से काफी पहले ग्रे मार्केट में उपलब्ध हैं. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि कंपनी आईपीओ के जरिए 2.50 परसेंट हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. इससे पहले, मार्केट रेगुलेटर सेबी IPO लाने वाली बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बिक्री का न्यूनतम साइज 5 परसेंट की जगह घटाकर 2.5 परसेंट करने का प्रस्ताव लेकर आई थी, जो अभी वित्त मंत्रालय की मंजूरी के अधीन है.

    कितना रहेगा प्राइस बैंड?
    रिलायंस जियो IPO की अनुमानित प्राइस बैंड को लेकर बोनान्जा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी ने कहा, “कंपनी के बताए गए वैल्यूएशन रेंज 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के हिसाब से और रिटेल इन्वेस्टर्स को 15-20 परसेंट तक डिस्काउंट मिलने की बात को लेकर चले, तो रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिलायंस जियो IPO शेयर की अनुमानित कीमत 1,048 से 1,457 प्रति शेयर के बीच रहने की संभावना है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आखिर में कौन सा वैल्यूएशन बैंड तय होता है.’