Category: Economy

  • Small Saving Schemes Q4FY26: PPF और सुकन्या योजना पर ब्याज दरें स्थिर, निवेशकों को राहत

    Small Saving Schemes Q4FY26: PPF और सुकन्या योजना पर ब्याज दरें स्थिर, निवेशकों को राहत


    नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत में निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाहीQ4FY26 के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है। इस निर्णय के अनुसार पब्लिक प्रोविडेंट फंडPPF सुकन्या समृद्धि योजना, पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट जैसी योजनाओं पर मौजूदा दरें ही लागू रहेंगी।स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर PPF निवेशकों को 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% सालाना ब्याज मिलेगा। अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें 4% से 8.2% के दायरे में स्थिर रहेंगी। यह लगातार आठवीं तिमाही है जब इन योजनाओं की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले दिसंबर 2023 में ब्याज दरों में संशोधन किया गया था।

    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरें तय करते समय महंगाई दर, सरकारी उधारी और बाजार में नकदी की स्थिति जैसे कई पहलुओं का ध्यान रखा जाता है। हर तिमाही इन दरों की समीक्षा होती है। श्यामला गोपीनाथ समिति की सिफारिशों के अनुसार, इन योजनाओं पर मिलने वाला रिटर्न समान अवधि के सरकारी बॉन्ड की यील्ड से थोड़ी अधिक होना चाहिए, ताकि निवेशकों को सुरक्षित और आकर्षक विकल्प मिल सके।छोटी बचत योजनाएं भारतीय घरेलू बचत का अहम हिस्सा हैं। इन 12 वित्तीय साधनों के माध्यम से लोग जोखिम से दूर रहकर निवेश कर सकते हैं। इन योजनाओं में जुटाई गई राशि नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड NSSF में जमा होती है, जिसका उपयोग सरकार वित्तीय प्रबंधन और घाटे की भरपाई के लिए करती है।

    स्मॉल सेविंग स्कीम्स को संरचना के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में पोस्टल डिपॉजिट आते हैं, जिनमें सेविंग अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट, टाइम डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में सेविंग सर्टिफिकेट जैसे नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और किसान विकास पत्र शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं हैं, जिनमें PPF सुकन्या समृद्धि योजना और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना प्रमुख हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार स्थिर ब्याज दर निवेशकों में विश्वास बनाए रखती है। यह खासकर उन लोगों के लिए अहम है जो लंबी अवधि के लिए सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं। 2026 की शुरुआत में ब्याज दरों में स्थिरता ने निवेशकों को यह संकेत दिया है कि सरकारी छोटी बचत योजनाएं जोखिम-मुक्त और लाभदायक विकल्प बनी हुई हैं।

  • 2026 की पहली ट्रेडिंग: शेयर बाजार में तेजी, MRPL और HFCL पर मजबूत निवेश का रुझान

    2026 की पहली ट्रेडिंग: शेयर बाजार में तेजी, MRPL और HFCL पर मजबूत निवेश का रुझान


    नई दिल्ली। नए साल 2026 के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जोश और सकारात्मक माहौल देखने को मिला। साल 2025 का समापन मजबूती के साथ होने के बाद निवेशकों ने 1 जनवरी को भी उत्साह के साथ ट्रेडिंग की। बीएसई सेंसेक्स 545 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 85,220 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 190 अंकों से ऊपर उठकर 26,129 पर पहुंचा।विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में यह तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई प्रमुख सेक्टरों में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। ऑयल एंड गैस, पीएसयू, कमोडिटी, एनर्जी और मेटल शेयरों में निवेशकों ने सक्रियता दिखाई, जबकि आईटी सेक्टर में हल्का दबाव देखा गया।

    सेंसेक्स के बड़े शेयरों में टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, टाइटन, ट्रेंट, पावर ग्रिड, बीईएल और एनटीपीसी ने बाजार को मजबूती दी। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में भी तेजी का असर देखा गया। कई शेयरों ने अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर को पार किया, जिससे निवेशकों में भरोसा बढ़ा।विशेष रूप से MRPL और HFCL में निवेशकों का ध्यान केंद्रित रहा। इन दोनों शेयरों में वॉल्यूम बढ़ा और तकनीकी चार्ट्स पर मजबूत संकेत मिले। इसके अलावा Graphite India, Craftsman Automation, HPCL, Deepak Fertilisers और PCBL Chemical जैसे शेयरों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 26,200 का स्तर अहम माना जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो आगे और तेजी की संभावना है। वहीं, कुछ शेयरों में कमजोरी के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। Vodafone Idea, Radico Khaitan और कुछ मिडकैप स्टॉक्स में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए साल में निवेशकों को संतुलित पोर्टफोलियो और चुनिंदा मजबूत शेयरों पर ध्यान देना चाहिए। बाजार की यह शुरुआत 2026 में निवेश के लिए सकारात्मक संकेत देती है और निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ाती है।

  • भारत की इन कंपनियों का नहीं है कोई भी मालिक, सिर्फ ट्रस्ट के भरोसे करती हैं कारोबार

    भारत की इन कंपनियों का नहीं है कोई भी मालिक, सिर्फ ट्रस्ट के भरोसे करती हैं कारोबार

    नई दिल्ली।भारत में ज्यादातर बड़े बिजनेस फैमिली कंट्रोल में होते हैं यानी कंपनी के मालिक और उसके बोर्ड के प्रमुख अक्सर एक ही परिवार से होते हैं. लेकिन इसके बावजूद कई बड़ी कंपनियों में ऐसा होता है कि परिवार के किसी सदस्य के पास कंपनी का कंट्रोल नहीं होता हैं जब परिवार में कोई वारिस नहीं होता या बच्चों को व्यापार में कोई इंटरेस्ट नहीं होती, तो कंपनियों को संभालने के लिए पेशेवर मैनेजर्स या ट्रस्ट जिम्मेदार बन जाते हैं. इस तरह बिजनेस को चलाए रखने में मदद करती है, बल्कि निवेशकों और समाज के भरोसे को भी बनाए रखती है.

    भारत में कुछ बड़ी कंपनियां ऐसी हैं जिनका कोई व्यक्तिगत मालिक नहीं है और ये ट्रस्ट या फाउंडेशन के भरोसे चलती हैं. इसका मतलब है कि कंपनी का नियंत्रण किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होता, बल्कि ट्रस्ट या बोर्ड तय करता है कि मुनाफा और संचालन कैसे होंगे, इन कंपनियों का उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि समाज की भलाई और विकास के लिए काम करना होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि भारत की किन कंपनियों का कोई भी मालिक नहीं है सिर्फ ट्रस्ट के भरोसे कारोबार करती हैं.

    भारत की किन कंपनियों का कोई भी मालिक नहीं है

    -टाटा ग्रुप में रतन टाटा के कोई प्रत्यक्ष वारिस नहीं थे, इसलिए साइरस मिस्त्री जैसे पेशेवरों को नेतृत्व दिया गया. बाद में मिस्त्री के जाने के बाद एन. चंद्रशेखरन टाटा ग्रुप के प्रमुख बने. लेकिन टाटा ग्रुप की ज्यादा हिस्सेदारी अब भी परिवार या व्यक्तिगत मालिकों के बजाय टाटा ट्रस्ट्स के पास है. ये ट्रस्ट्स कंपनी के मुनाफे को शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे सामाजिक कार्यों में निवेश करते हैं. -. महिंद्रा ग्रुप में भी ऐसा ही मामला है. आनंद महिंद्रा की बेटियों ने व्यापार संभालने में कोई सक्रिय भूमिका नहीं ली, उनके दोस्तों या पेशेवरों ने ग्रुप को प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली, भारत में अब पारिवारिक मालिकाना होना जरूरी नहीं है, बल्कि पेशेवर प्रबंधन और ट्रस्ट आधारित नियंत्रण भी कंपनियों को मजबूत बनाए रखता है.

    – भारत की तीसरी बड़ी दवा कंपनी सिप्ला भी इसी स्थिति में है. इसके चेयरमैन युसूफ हमीद के वारिस कारोबार में दिलचस्पी नहीं रखते हैं. इसलिए वे अब अपनी कंपनी बेचने की तैयारी कर रहे हैं. इसी तरह बिसलेरी और बायोकॉन जैसे बड़े ब्रांडों में भी वारिस की अनुपस्थिति के कारण व्यवसाय को पेशेवर हाथों में सौंपा गया या ट्रस्ट आधारित प्रबंधन अपनाया गया.

    ये कंपनियां सिर्फ ट्रस्ट के भरोसे करती हैं कारोबार

    -टाटा ट्रस्ट्स – टाटा ग्रुप की ज्यादातर कंपनियों की हिस्सेदारी इन ट्रस्टों के पास है. इसका फायदा शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे सामाजिक कार्यों में निवेश किया जाता है. -. इंफोसिस फाउंडेशन – इंफोसिस कंपनी के मुनाफे का यूज शिक्षा और ग्रामीण विकास में कियाजाता है. – अजीम प्रेमजी फाउंडेशन – यह शिक्षा सुधार पर केंद्रित है और विप्रो के मुनाफे का समाज में योगदान सुनिश्चित करता है. इन कंपनियों में कोई व्यक्तिगत मालिक नहीं होता है. इसके बजाय बोर्ड और ट्रस्ट कंपनियों के संचालन और दिशा-निर्देश तय करते हैं.

    कैसे काम करता है ट्रस्ट मॉडल?

    ट्रस्ट आधारित कंपनियों में कोई भी एक व्यक्ति कंपनी का मालिक नहीं होता है. इसका फायदा भी व्यक्तिगत फायदे के बजाय सामाजिक कार्यों में लगाया जाता है. इसके अलावा पेशेवर मैनेजर्स और बोर्ड कंपनी का संचालन करते हैं. साथ ही लंबे समय तक सस्टेनेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी रहती है.

  • Zomato-Swiggy ने किया बड़ा ऐलान… गिग वर्कर्स को मिलेगा ज्यादा पेमेंट, जानिए कितना

    Zomato-Swiggy ने किया बड़ा ऐलान… गिग वर्कर्स को मिलेगा ज्यादा पेमेंट, जानिए कितना


    नई दिल्ली।नए साल 2026 की पूर्व संख्‍या यानी बुधवार 31 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन फूड और ग्रॉसरी ऑर्डर पहुंचाने के काम करने वाले गिग और डिलीवरी वर्कर्स ने देशभर में हड़ताल का आह्वान क्या किया इस सेक्टर की बड़ी कंपनियों के होश उड़ गए. रिपोर्ट के मुताबिक New Year Eve पर डिलीवरी में रुकावट आने की आशंका के बीच ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों जोमैटो और स्विगी ने आनन-फानन में बड़ा ऐलान कर दिया. जी हां दोनों ही कंपनियों ने अब गिग वर्कस को ज्यादा पेमेंट देने का ऑफर दिया है.रिपोर्ट की मानें तो ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म ज़ोमैटो और स्विगी अपने डिलीवरी पार्टनर्स को अब ज्यादा इंसेंटिव देंगे. ये त्योहारों के समय में उनका एक स्टैंडर्ड तरीका है ताकि गिग वर्कर्स यूनियनों की हड़ताल के आह्वान के बीच न्यू ईयर ईव पर ऑर्डर डिीवरी सर्विस में कम से कम रुकावट आए.

    कंपनियों के सताने लगी ये चिंता 

    गौरतलब है कि तेलंगाना गिग एंड प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स यूनियन TGPWU और इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स IFAT ने दावा किया था कि लाखों वर्कर्स बेहतर पेमेंट और काम करने के बेहतर हालात की मांग को लेकर देश भर में हड़ताल में शामिल होने वाले हैं. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस हड़ताल से New Year Eve पर ज़ोमैटो स्विगी ब्लिंकिट इंस्टामार्ट और ज़ेप्टो जैसी फ़ूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स फर्मों के कामकाज पर असर पड़ सकता है. ये कंपनियों के लिए इसलिए भी बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि इस मौक पर डिमांड सबसे ज्यादा हाई लेवल पर होती है.
    Zomato ने दिया ये ऑफर
    ज़ोमैटो ने न्यू ईयर ईव पर शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच पीक आवर्स में डिलीवरी पार्टनर्स को हर ऑर्डर पर 120 से 150 रुपये का पेमेंट देने का ऑफ़र दिया है. अचानक लिए गए इस फैसे की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि प्लेटफॉर्म ने दिन भर में 3000 रुपये तक की कमाई का भी वादा किया है जो ऑर्डर की संख्या और वर्कर की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.इसके सा ही जोमैटो ने ऑर्डर रिजेक्ट करने और कैंसल करने पर लगने वाली पेनल्टी को कुछ समय के लिए माफ भी कर दिया है. PTI की रिपोर्ट में जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल के प्रवक्ता ने बताया कि यह ज्यादा डिमांड वाले त्योहारों और साल के आखिर के समय में फॉलो किया जाने वाला एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल है.

    स्विगी ने बढ़ाया इंसेंटिव

    Zomato की तरह ही Swiggy ने भी साल के आखिरी समय में इंसेंटिव बढ़ा दिए हैं और इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच डिलीवरी वर्कर्स को 10000 रुपये तक की कमाई का ऑफर दिया है. उन्होंने कहा कि नए साल की शाम को प्लेटफॉर्म शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच छह घंटे के समय के लिए 2000 रुपये तक की पीक-आवर कमाई का ऐड कर रहा है ताकि साल के सबसे बिजी ऑर्डरिंग टाइम में से एक के दौरान काफी राइडर मौजूद रह सकें.

  • घरेलू निवेशकों की सक्रियता से बाजार में मजबूती, मीडिया और मेटल शेयर चमके

    घरेलू निवेशकों की सक्रियता से बाजार में मजबूती, मीडिया और मेटल शेयर चमके


    नई दिल्ली। 31 दिसंबर, बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में मजबूती का माहौल देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 200 अंकों की तेजी के साथ 84,870 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज NSE का निफ्टी 70 अंक चढ़कर 26,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस तेजी में वैश्विक संकेत मिले-जुले रहने के बावजूद घरेलू निवेशकों की सक्रिय खरीदारी का बड़ा योगदान रहा।सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि निफ्टी-50 के 40 शेयरों ने तेजी दिखाई। सेक्टोरल स्तर पर एनएसई के प्रमुख इंडेक्स में भी मजबूती देखने को मिली। विशेष रूप से मीडिया, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। निवेशकों का रुझान चुनिंदा सेक्टरों पर केंद्रित रहा, जिससे बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी।

    वैश्विक बाजारों में कारोबार मिला-जुला रहा। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई अवकाश के कारण बंद रहे। पिछले कारोबारी सत्र में कोस्पी 0.15 फीसदी और निक्केई 0.37 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुए थे। वहीं, हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स लगभग 1.01 फीसदी की गिरावट के साथ 25,592 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.07 फीसदी की कमजोरी के साथ 3,962 पर कारोबार करता दिखा। अमेरिकी बाजारों में भी दबाव देखा गया, जहां 30 दिसंबर को डाउ जोंस 0.20 फीसदी, नैस्डेक 0.24 फीसदी और एसएंडपी 500 लगभग 0.14 फीसदी गिरकर बंद हुए।

    घरेलू स्तर पर बाजार को सबसे बड़ा सहारा घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs से मिला। 29 दिसंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs ने 3,844 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि DIIs ने 6,159 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। दिसंबर महीने में अब तक FIIs लगभग 30,752 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं, जबकि DIIs ने 72,860 करोड़ रुपये का निवेश किया है। नवंबर में भी यही रुझान देखने को मिला था जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों की खरीदारी ज्यादा रही।इससे पहले, 30 दिसंबर को बाजार लगभग सपाट कारोबार में रहा। सेंसेक्स 20 अंक गिरकर 84,675 पर और निफ्टी मामूली कमजोरी के साथ 25,938 पर बंद हुआ। उस दिन ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में मजबूती रही, जबकि मीडिया और रियल्टी सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली।

    विश्लेषकों का कहना है कि साल के आखिरी कारोबारी सत्रों में घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत रहना आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।कुल मिलाकर, 2025 के आखिरी कारोबारी हफ्ते में घरेलू निवेशकों की सक्रिय खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों प्रमुख स्तरों पर मजबूती के साथ बंद हुए। मीडिया, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने निवेशकों को सबसे ज्यादा लाभ दिया, जिससे साल के अंत में बाजार में उत्साह बना रहा।

  • 1 जनवरी से नए दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम अनिवार्य करने के फैसले में फंसा पेच

    1 जनवरी से नए दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम अनिवार्य करने के फैसले में फंसा पेच

    नई दिल्ली। देश में 1 जनवरी 2026 से सभी नए दोपहिया वाहनों (New two-wheelers) में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) (Anti-lock braking system – ABS) अनिवार्य करने के फैसले पर पेच फंस गया है। इसे लागू होने में सिर्फ एक दिन बचा है, लेकिन वाहन कंपनियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सरकार से इस नियम पर फिर विचार करने की मांग की है।

    माना जा रहा है कि एक जनवरी की समयसीमा को आगे बढ़ाया जा सकता है। गौरतलब है कि सरकार ने इस साल जून में यह प्रस्तावित किया था कि कंपनियों के लिए एक जनवरी 2026 से सभी नए दोपहिया वाहनों में एबीएस लगाना अनिवार्य होगा। इस मामले से जुड़े दो अधिकारियों ने बताया कि कंपनियों ने अब सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है।

    इनकी दलील है कि देश में नई ब्रेक प्रणाली से जुड़ी आपूर्ति अभी पर्याप्त नहीं है। अगर एक साथ सभी दोपहिया वाहनों में इसे अनिवार्य किया गया तो पुर्जों की कमी हो सकती है और उत्पादन पर असर पड़ेगा। इससे गाड़ियों की कीमतें भी बढ़ेंगी, जिसका सीधा बोझ आम ग्राहकों पर पड़ सकता है। उनका सुझाव है कि इस नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि वाहन उद्योग को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।

    क्या है मामला
    सरकार की योजना है कि सड़क हादसों को कम करने के लिए सभी दोपहिया वाहनों में एबीएस को अनिवार्य किया जाए। फिलहाल यह व्यवस्था सिर्फ 125 सीसी से अधिक क्षमता वाली बाइकों में लागू है, जबकि छोटी बाइकों और स्कूटरों में केवल कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम (सीबीएस) होता है। देश के कुल बाइक बाजार में लगभग 84% हिस्सेदारी इसी सस्ते श्रेणी की है।


    अधिसूचना जारी नहीं

    अधिकारियों के मुताबिक, एक जनवरी की समयसीमा नजदीक होने के बावजूद स्थिति अभी साफ नहीं है। सरकार ने इस संबंध में जल्द अधिसूचना जारी करने की बात कही थी लेकिन यह अब तक नहीं हुई है। यह संकेत माना जा रहा है कि नई समय सीमा तय की जा सकती है। केंद्र सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।


    ऐसे काम करता है एबीएस

    एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) एक उन्नत तकनीक है, जो अचानक ब्रेक लगाने पर पहियों को लॉक होने से रोकता है, जिससे वाहन का संतुलन बना रहता है और दुर्घटनाएं टल सकती हैं। यह प्रणाली ब्रेक लगाते समय पहियों पर बार-बार दबाव देकर वाहनों को फिसलने और घसीटने को रोकती है, जिससे चालक को वाहन को नियंत्रित करने और अवरोधों से बचने का समय मिल जाता है।


    क्या है सरकार का मकसद

    सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सड़क हादसों में 44% मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा में सुधार जरूरी है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य दोपहिया वाहनों से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को कम करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में देश में हुई कुल 1,51,997 सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 20% में दोपहिया वाहन शामिल थे।

  • 4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न

    4,400 से 1.4 लाख तक: 25 साल में सोने ने दिया निवेशकों को सबसे शानदार रिटर्न


    नई दिल्ली।पिछले 25 वर्षों में अगर किसी निवेश ने लगातार और मजबूत रिटर्न दिया है, तो वह सोना रहा है। वर्ष 1999 के अंत में सोने की कीमत लगभग ₹4,400 प्रति 10 ग्राम थी। दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर ₹1.4 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर चुकी है। इस दौरान सोने ने औसतन 14.3% सालाना रिटर्न दिया, जो भारतीय शेयर बाजार और अन्य पारंपरिक निवेश विकल्पों से कहीं अधिक है।विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में यह तेजी कई कारणों से आई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती ने सोने की मांग को बढ़ाया। ब्याज दरों में कमी से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे डॉलर में कारोबार होने वाली कीमती धातुएँ अन्य मुद्राओं के लिए सस्ती पड़ीं। इसका सीधा असर सोने की कीमतों और मांग पर पड़ा।

    वर्ष 2025 सोने और चांदी दोनों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। इस साल सोने की कीमतों में 70% से अधिक की तेजी आई, जबकि चांदी ने 160% तक का उछाल दिखाया। यह प्रदर्शन 1979 के बाद सबसे मजबूत सालाना बढ़त माना जा रहा है। न केवल भारत, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं ने निवेशकों को आकर्षित किया।इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। पिछले 25 वर्षों में सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः लगभग 11.5% और 11.7% का औसत सालाना रिटर्न दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेंसेक्स को चांदी के बराबर रिटर्न देना होता, तो आज इसका स्तर लगभग 1.6 लाख अंक के आसपास होता, जबकि वास्तविकता में यह करीब 85,000 के स्तर पर है।

    चांदी की तेजी के पीछे भी विशेष कारण हैं। सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल EV और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में इसकी बढ़ती मांग ने कीमतों को समर्थन दिया। द सिल्वर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता और औद्योगिक मांग के बीच चांदी की सप्लाई अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे कीमतों में और तेजी आई।भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और बचत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड से जुड़े विशेषज्ञ विक्रम धवन का कहना है कि सोने को पोर्टफोलियो में शामिल करना संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। गोल्ड ETF के जरिए निवेश करना आज एक सुरक्षित और आसान विकल्प बन चुका है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि अल्पकाल में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है। फिर भी मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों में ये दोनों धातुएँ निवेशकों के लिए मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनी हुई हैं।निवेशक इस तथ्य को भी ध्यान में रखें कि सोना और चांदी लंबे समय में पूंजी सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का बेहतर माध्यम साबित हुए हैं। साथ ही, डिजिटल और म्यूचुअल फंड जैसे आधुनिक निवेश विकल्प ने इसे और भी सुलभ बना दिया है।

  • साल 2025 का आखिरी धमाका: मॉडर्न डायग्नोस्टिक का IPO 31 दिसंबर से खुलेगा, निवेश से पहले जान लें पूरी डिटेल

    साल 2025 का आखिरी धमाका: मॉडर्न डायग्नोस्टिक का IPO 31 दिसंबर से खुलेगा, निवेश से पहले जान लें पूरी डिटेल


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2025 आईपीओ के लिहाज से बेहद शानदार रहा है। अब इस साल के आखिरी पड़ाव पर निवेश का एक और मौका सामने आया है। हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी मॉडर्न डायग्नोस्टिक एंड रिसर्च सेंटर Modern Diagnostic and Research Centre अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम IPO लेकर आ रही है। यह इस साल का आखिरी और नए साल की शुरुआत करने वाला आईपीओ होगा।

    IPO का शेड्यूल और साइज

    मॉडर्न डायग्नोस्टिक का आईपीओ निवेश के लिए 31 दिसंबर 2025 को खुलेगा और निवेशक 2 जनवरी 2026 तक इसमें बोली लगा सकेंगे। कंपनी इस इश्यू के जरिए बाजार से 36.89 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। खास बात यह है कि यह आईपीओ पूरी तरह से ‘फ्रेश इश्यू’ Fresh Issue पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि सीधे कंपनी के पास जाएगी और इसका इस्तेमाल कंपनी के विस्तार और कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कंपनी कुल 41 लाख नए शेयर जारी करेगी।

    प्राइस बैंड और निवेश की सीमा

    कंपनी ने अपने शेयरों के लिए 85 रुपये से 90 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। चूंकि यह SME सेगमेंट का आईपीओ है, इसलिए इसमें लॉट साइज सामान्य आईपीओ की तुलना में काफी बड़ा रखा गया है।मॉडर्न डायग्नोस्टिक आईपीओ का एक लॉट 1600 शेयरों का है।कंपनी के निर्देशों के अनुसार, निवेशकों को कम से कम 2 लॉट के लिए आवेदन करना होगा।इस लिहाज से, एक रिटेल निवेशक को कम से कम 2,88,000 रुपये का निवेश करना होगा।यह आईपीओ बीएसई एसएमई BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होगा, जो छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों के लिए एक विशेष एक्सचेंज सेगमेंट है।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम GMP की स्थिति

    निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जीएमपी Grey Market Premium फिलहाल शांत नजर आ रहा है। बाजार विशेषज्ञों और ‘इन्वेस्टर गेन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, Modern Diagnostic IPO का जीएमपी आज जीरो ₹0 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। इसका मतलब है कि फिलहाल ग्रे मार्केट में इस शेयर को लेकर कोई अतिरिक्त हलचल या प्रीमियम नहीं देखा जा रहा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे सब्सक्रिप्शन की तारीख करीब आएगी, बाजार की धारणा में बदलाव हो सकता है।

    कंपनी का प्रोफाइल और भविष्य

    1985 में स्थापित हुई यह कंपनी पिछले करीब चार दशकों से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए है। कंपनी मुख्य रूप से पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी सेवाएं प्रदान करती है। इनके पोर्टफोलियो में टेस्ट पैकेज, होम कलेक्शन और ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। वर्तमान में कंपनी का नेटवर्क काफी मजबूत है:कुल 21 सेंटर का संचालन। इनमें 18 लैब और 3 डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल हैं।कंपनी के पास एक बड़ा ‘इंस्टीट्यूशनल कस्टमर’ बेस है, जो इसकी आय का एक मुख्य स्रोत है।

    प्रबंधन और रजिस्ट्रार
    इस पब्लिक इश्यू के प्रबंधन की जिम्मेदारी बीलाइन कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है, जो बुक रनिंग लीड मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, आईपीओ के लिए MUFG Intime India को आधिकारिक रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है, जो अलॉटमेंट और रिफंड की प्रक्रिया को संभालेंगे।हेल्थकेयर सेक्टर में लगातार बढ़ती मांग और कंपनी के पुराने अनुभव को देखते हुए, लंबी अवधि के निवेशक इसे अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। हालांकि, SME आईपीओ में जोखिम और लिक्विडिटी की स्थिति को ध्यान में रखना अनिवार्य है।
  • चुटकी भर सेंधा नमक से मिलेगा राहत जानें इसके फायदे और सेवन का तरीका

    चुटकी भर सेंधा नमक से मिलेगा राहत जानें इसके फायदे और सेवन का तरीका


    नई दिल्ली । नमक का प्रयोग हर भारतीय रसोई में आम है और बिना नमक के भोजन अक्सर बेस्वाद सा लगता है। आयोडीन नमक का सेवन तो अधिकांश घरों में होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्राकृतिक रूप से मिलने वाला सेंधा नमक  शरीर के लिए कई फायदे प्रदान कर सकता है? यह नमक न केवल स्वाद बढ़ाने के लिए प्रयोग होता है बल्कि इसमें कई खनिज और लवण पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से मिलता है और इसमें आयोडीन नमक के मुकाबले कम नमकीनता होती है। यह हल्का गुलाबी रंग का होता है लेकिन कभी-कभी सफेद भी हो सकता है। सेंधा नमक में सोडियम क्लोराइड कैल्शियम पोटैशियम मैग्नीशियम ब्रोमाइन और फ्लोराइन जैसे खनिज होते हैं जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।

    सेंधा नमक के फायदेपाचन में सहायता

    अगर पाचन में कोई समस्या हो या पेट में खराबी हो तो सेंधा नमक का सेवन मददगार साबित हो सकता है। यह पाचन रस के निर्माण को बढ़ावा देता है जिससे भोजन बेहतर तरीके से पचता है और पेट में किसी तरह का गड़बड़ नहीं होती। यह विशेष रूप से तब उपयोगी है जब पाचन अग्नि कमजोर हो।

    सर्दी जुकाम और खांसी

    सेंधा नमक सर्दी जुकाम और खांसी में भी राहत देता है। यह शरीर के भीतर जमा कफ को तोड़ने में मदद करता है। इसके सेवन के लिए सेंधा नमक को हल्दी या अदरक के साथ लिया जा सकता है जो जुकाम और खांसी को कम करने में सहायक है।

    सूजन में आराम

    अगर शरीर के किसी हिस्से में सूजन हो तो सेंधा नमक उसके लिए भी लाभकारी हो सकता है। यह अंदरूनी सूजन को कम करने में मदद करता है और बाहरी सूजन के लिए सेंधा नमक के पानी से सेंकाई की जा सकती है।

    बीपी और रक्त संचार में सुधार

    बीपी के मरीजों के लिए सेंधा नमक सीमित मात्रा में फायदेमंद हो सकता है। यदि सही मात्रा में सेवन किया जाए तो यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है जिससे दिल की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है।

    दांतों का स्वास्थ्य

    अगर मसूड़ों में सूजन खून आना या दांतों से जुड़ी कोई परेशानी हो तो सेंधा नमक का उपयोग लाभकारी हो सकता है। आप इसे हल्दी और सरसों के तेल के साथ मिलाकर मसूड़ों पर मालिश कर सकते हैं जिससे सूजन कम होगी और खून आना भी बंद हो सकता है।

    सेंधा नमक का सेवन करने का तरीका

    सेंधा नमक का सेवन सामान्य नमक की तुलना में थोड़ी कम मात्रा में करना चाहिए। इसे अपनी रोजमर्रा की डाइट में जोड़ा जा सकता है जैसे सलाद में सब्जियों में या फिर उबले हुए पानी में। एक चुटकी सेंधा नमक को पानी में डालकर पिया जा सकता है जो शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करने में मदद करता है।

    कौन लोग सेंधा नमक का सेवन नहीं करें

    हालांकि सेंधा नमक कई लाभ प्रदान करता है लेकिन कुछ लोगों के लिए इसका सेवन सुरक्षित नहीं हो सकता। गर्भवती महिलाओं थायरायड के मरीजों और किडनी की समस्या से ग्रस्त मरीजों को सेंधा नमक से परहेज करना चाहिए। सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा अधिक होती है जो थायरायड और किडनी के मरीजों के लिए ठीक नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए आयोडीन की जरूरत होती है जो इस नमक में कम होता है। सेंधा नमक एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है जो कई प्रकार की परेशानियों से राहत दिला सकता है। हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए और कुछ विशेष स्थितियों में इससे बचना चाहिए। हमेशा ध्यान रखें कि किसी भी चीज़ का अत्यधिक सेवन शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।

  • 31 दिसंबर तक न करें ये काम, वरना पैन कार्ड वॉलेट में बेकार हो जाएगा!

    31 दिसंबर तक न करें ये काम, वरना पैन कार्ड वॉलेट में बेकार हो जाएगा!


    नई दिल्ली। अगर आपके पास पैन कार्ड है और आपने इसे अभी तक आधार कार्ड से लिंक नहीं कराया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सभी पैन कार्ड होल्डर्स को चेतावनी दी है कि 31 दिसंबर, 2025 तक पैन और आधार लिंक न कराने पर 1 जनवरी, 2026 से आपका पैन कार्ड इनएक्टिव हो जाएगा।
    लेट फीस और छूट की जानकारी
    31 दिसंबर, 2025 तक लिंक न कराने वाले लोगों को पैन-आधार लिंक करते समय 1000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। हालांकि, 1 अक्टूबर, 2024 के बाद आधार से पैन बनवाने वालों को यह लेट फीस नहीं देनी होगी। समय पर लिंक न कराने से TDS/TCS अधिक कट सकता है और अन्य वित्तीय परेशानियां भी हो सकती हैं।
    पैन को आधार से लिंक कैसे करें
    सबसे पहले ऑफिशियल इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं: www.incometax.gov.in
    ‘क्विक लिंक्स’ सेक्शन में जाएं और ‘लिंक आधार ऑप्शन’ पर क्लिक करें।
    अपना पैन कार्ड और आधार नंबर डालें और वैलिडेट पर क्लिक करें।
    अगर पैन पहले से आधार से लिंक है, तो स्क्रीन पर मैसेज दिखेगा।
    अगर लिंक नहीं है, तो आपको NSDL पोर्टल पर 1000 रुपये का चालान जमा करना होगा।
    वैलिडेशन के बाद एक पॉप-अप नोटिफिकेशन मिलेगा, जिसमें लिखा होगा ‘आपकी पेमेंट डिटेल्स वेरिफाई हो गई है’।
    जरूरी डिटेल्स डालने के बाद लिंक आधार ऑप्शन पर क्लिक करें।
    रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मिला 6-डिजिट OTP डालें और रिक्वेस्ट सबमिट करें।
    पैन कार्ड को आधार से लिंक होने में 4-5 वर्किंग डे का समय लग सकता है।
    इस बार की आखिरी डेट 31 दिसंबर, 2025 है। समय रहते पैन और आधार लिंक कर लें, वरना न केवल आपका पैन कार्ड इनएक्टिव होगा बल्कि वित्तीय परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।