Category: Economy

  • नया ग्रामीण रोजगार कानून 2026: गांवों में रोजगार की कानूनी गारंटी और नई व्यवस्था की पूरी डिटेल

    नया ग्रामीण रोजगार कानून 2026: गांवों में रोजगार की कानूनी गारंटी और नई व्यवस्था की पूरी डिटेल

    नई दिल्ली । ग्रामीण रोजगार और विकास व्यवस्था को नए ढांचे में लाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम की जानकारी साझा की है। विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम 2025 के नाम से तैयार यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को अधिक सुरक्षित, संगठित और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।

    इस व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को हर वर्ष 125 दिनों तक अकुशल कार्य का कानूनी अधिकार दिया जाएगा। यह बदलाव ग्रामीण मजदूरों को स्थिर आय और नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही गांवों में सार्वजनिक संपत्तियों के निर्माण को भी इस योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है।

    नई व्यवस्था पूरे देश में एक साथ लागू की जाएगी और सभी राज्यों को इसके अनुसार अपनी कार्ययोजना तैयार करनी होगी। पहले से चल रहे विकास कार्यों को भी इसी ढांचे के तहत जारी रखा जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर काम बाधित न हो।

    रोजगार मांगने की प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है। ग्रामीण परिवार ग्राम पंचायत के माध्यम से रोजगार की मांग कर सकेंगे और इसके बाद 15 दिनों के भीतर उन्हें काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि तय समय में रोजगार नहीं मिलता है तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जिससे श्रमिकों को आर्थिक सहारा मिल सके।

    मजदूरी भुगतान को सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। भुगतान में देरी होने पर अतिरिक्त मुआवजे का भी प्रावधान रखा गया है, ताकि श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें। काम की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधुनिक डिजिटल प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

    कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। कृषि कार्यों के व्यस्त समय में राज्यों को अस्थायी रूप से काम रोकने की अनुमति भी दी गई है।

    इस पूरे सिस्टम में ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है, जिससे योजना का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके। वित्तीय व्यवस्था में भी केंद्र और राज्यों के बीच तय अनुपात के अनुसार फंडिंग की जाएगी।

    कुल मिलाकर यह नया कानून ग्रामीण रोजगार प्रणाली को अधिक मजबूत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ने और जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

  • सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम: शेयर बाजार की बड़ी गिरावट से निवेशकों में घबराहट

    सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम: शेयर बाजार की बड़ी गिरावट से निवेशकों में घबराहट


    नई दिल्ली।  घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को भारी उतार-चढ़ाव और बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन बाजार खुलते ही निवेशकों में हड़कंप मच गया। बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर में तेज बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़े नुकसान के साथ कारोबार करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स सैकड़ों अंक टूट गया, जबकि निफ्टी भी अहम स्तर के नीचे फिसल गया।
    विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। मिडिल ईस्ट तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। इसके चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया।
    बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। कई दिग्गज बैंकिंग स्टॉक्स लाल निशान में कारोबार करते रहे। आईटी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे टेक इंडेक्स पर असर पड़ा। मेटल और ऑटो सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि कुछ एफएमसीजी शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का मूड नकारात्मक बना रहा।
    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को बाजार की चाल पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
    इस गिरावट के चलते निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए। छोटे निवेशकों में सबसे ज्यादा बेचैनी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी बाजार की गिरावट को लेकर चर्चा तेज रही। कई निवेशकों ने इसे हाल के महीनों की बड़ी गिरावटों में से एक बताया।
  • Gold Buying Rules: क्या भारत में सोने की खरीद पर लगेगा बैन? समझिए पूरा मामला

    Gold Buying Rules: क्या भारत में सोने की खरीद पर लगेगा बैन? समझिए पूरा मामला


    नई दिल्ली। देश में सोने की खरीद पर बैन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानिए क्या सरकार पूरी तरह गोल्ड बैन लगा सकती है, पहले लागू हो चुके Gold Control Act का इतिहास क्या है और किन परिस्थितियों में सोने के आयात व खरीद पर सख्ती बढ़ सकती है।

    सोने पर बैन की चर्चा क्यों तेज हुई?
    हाल ही में Narendra Modi की अपील के बाद देशभर में यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत में भविष्य में सोने की खरीद पर रोक लगाई जा सकती है। भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि परंपरा, संस्कृति और भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। शादी-ब्याह, त्योहार और धार्मिक आयोजनों में सोने का विशेष महत्व माना जाता है।

    क्या सरकार सोने की खरीद पर पूरी तरह बैन लगा सकती है
    तकनीकी रूप से सरकार के पास सोने के आयात, व्यापार और खरीद-बिक्री को नियंत्रित करने का अधिकार होता है। सरकार टैक्स, आयात शुल्क और नियमों के जरिए गोल्ड मार्केट को प्रभावित कर सकती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत जैसे देश में सोने पर पूरी तरह बैन लगाना बेहद कठिन होगा, क्योंकि यहां सोना सामाजिक और धार्मिक जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है।

    पहले भी लागू हो चुका है Gold Control Ac
    भारत में सोने को लेकर सख्त कानून पहले भी लागू किए जा चुके हैं। साल 1968 में लागू किए गए Gold Control Act के तहत लोगों के पास सोना रखने और व्यापार करने पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे। उस समय सरकार ने सोने की खरीद और भंडारण को नियंत्रित करने की कोशिश की थी। बाद में आर्थिक उदारीकरण के दौर में 1990 में इस कानून को समाप्त कर दिया गया।

    सरकार पहले से लागू कर चुकी है कई सख्त निय
    पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सोने की खरीद और आयात पर कई नियम कड़े किए हैं, जिनमें शामिल हैं:-

    सोने के आयात पर भारी कस्टम ड्यूटी
    हॉलमार्किंग अनिवार्य
    बड़ी खरीदारी पर PAN कार्ड जरूरी
    2 लाख रुपये से अधिक कैश ट्रांजैक्शन पर रोक
    बड़ी खरीद पर आय के स्रोत की जांच

    इन नियमों का उद्देश्य टैक्स चोरी और काले धन पर नियंत्रण बताई जाती है।

    किन हालात में बढ़ सकती है सख्ती?

    भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश सोना विदेशों से आता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।

    अगर भविष्य में:-
    विदेशी मुद्रा भंडार घटे,
    व्यापार घाटा बढ़े,
    आर्थिक संकट गहराए,
    या डॉलर भुगतान का दबाव बढ़े,

    तो सरकार सोने के आयात और खरीद पर और ज्यादा सख्ती कर सकती है।

    क्या पूरी तरह Gold Ban संभव है
    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार पूरी तरह बैन लगाने की बजाय इन कदमों को प्राथमिकता दे सकती है:

    आयात शुल्क बढ़ाना
    बड़े लेन-देन पर निगरानी
    कैश खरीद पर और सख्ती
    निवेश के वैकल्पिक साधनों को बढ़ावा देना
    लोगों को कम सोना खरीदने के लिए जागरूक करना
    आम लोगों पर क्या होगा असर?

    अगर सरकार गोल्ड खरीद पर नियम और सख्त करती है तो इसका असर ज्वेलरी कारोबार, निवेशकों और आम ग्राहकों पर पड़ सकता है।

    सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं
    खरीदारी महंगी हो सकती है
    शादी और त्योहारों के बाजार प्रभावित हो सकते हैं
    ज्वेलरी इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ सकता है
    फिलहाल भारत में सोने की खरीद पर पूरी तरह बैन लगने की संभावना कम मानी जा रही है। लेकिन आर्थिक हालात और विदेशी मुद्रा दबाव को देखते हुए सरकार भविष्य में गोल्ड खरीद और आयात पर सख्ती जरूर बढ़ा सकती है।

  • डिजिटल कॉमर्स में बड़ा कदम: डिजीहाट का ‘स्वदेशी’ मार्केटप्लेस बदल सकता है खरीदारी का तरीका

    डिजिटल कॉमर्स में बड़ा कदम: डिजीहाट का ‘स्वदेशी’ मार्केटप्लेस बदल सकता है खरीदारी का तरीका

    नई दिल्ली । देश में डिजिटल खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच एक नया बदलाव देखने को मिला है, जहां स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष मार्केटप्लेस की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य भारत में बने उत्पादों को एक संगठित डिजिटल मंच प्रदान करना है, ताकि छोटे कारीगरों, किसानों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा जा सके।

    इस नए प्लेटफॉर्म के जरिए उपभोक्ता अब बिना किसी मध्यस्थ के सीधे उन लोगों से खरीदारी कर सकेंगे, जो अपने हाथों से या स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार करते हैं। इसमें रोजमर्रा की जरूरत के सामान से लेकर हस्तशिल्प, कपड़े, कृषि उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और कई अन्य श्रेणियां शामिल की गई हैं।

    इस पहल को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच की दूरी को भी कम करता है। लंबे समय से यह समस्या देखी जा रही थी कि छोटे उत्पादक बड़े बाजारों तक अपनी पहुंच नहीं बना पाते थे, जिससे उनकी आय सीमित रह जाती थी।

    नए प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सीधे उत्पादक और ग्राहक के बीच संबंध स्थापित करता है। इससे न केवल कीमतों में पारदर्शिता आती है, बल्कि उत्पादकों को उनके काम का उचित मूल्य भी मिल पाता है। यह व्यवस्था छोटे व्यापारियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी नए अवसर पैदा कर रही है।

    इस प्रणाली से जुड़ने वाले कारीगरों और किसान समूहों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ग्रामीण भारत भी अब डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहले जहां स्थानीय उत्पाद केवल सीमित क्षेत्रों तक ही पहुंच पाते थे, अब वे देशभर के ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

    इस प्लेटफॉर्म को इस तरह तैयार किया गया है कि यह भविष्य में केवल एक खरीदारी मंच तक सीमित न रहे, बल्कि एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में विकसित हो सके। इसमें कई प्रकार की सेवाओं को जोड़ने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे उपयोगकर्ताओं को एक ही स्थान पर कई सुविधाएं मिल सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से भारत की अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। छोटे उद्योगों को डिजिटल बाजार मिलने से उनकी पहुंच बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

    कुल मिलाकर, यह नया डिजिटल मार्केटप्लेस केवल एक तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह स्थानीय उत्पादन को सम्मान और पहचान देने का एक प्रयास है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय उत्पादों को न केवल देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक नई पहचान दिला सकती है।

  • EPFO का बड़ा कदम: प्राइवेट PF ट्रस्ट्स पर कसा शिकंजा, मनमानी ब्याज दरों पर रोक

    EPFO का बड़ा कदम: प्राइवेट PF ट्रस्ट्स पर कसा शिकंजा, मनमानी ब्याज दरों पर रोक

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने निजी क्षेत्र के प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। नए नियमों के तहत अब कंपनियां अपने कर्मचारियों को मनमानी ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। यह कदम कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
    ब्याज दर पर सख्त लिमिट लागू
    EPFO के नए नियमों के अनुसार अब कोई भी प्राइवेट या छूट प्राप्त PF ट्रस्ट EPFO द्वारा तय की गई सालाना ब्याज दर से अधिकतम 2 प्रतिशत तक ही ज्यादा ब्याज दे सकेगा। इससे पहले कुछ कंपनियां अधिक ब्याज दरों का वादा कर कर्मचारियों को आकर्षित कर रही थीं, जिससे भविष्य में वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका थी।
    ऑडिट सिस्टम में बड़ा बदलाव
    EPFO ने अब सभी ट्रस्ट्स के लिए हर साल अनिवार्य ऑडिट को खत्म कर दिया है। इसकी जगह अब रिस्क बेस्ड ऑडिट सिस्टम लागू किया गया है। इसका मतलब है कि केवल उन्हीं कंपनियों का ऑडिट होगा जहां नियमों के उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी की संभावना होगी। इससे अनुपालन करने वाली कंपनियों पर अनावश्यक दबाव कम होगा।
    कर्मचारियों की बचत पर फोकस
    देश में हजारों कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए अलग PF ट्रस्ट चलाती हैं। EPFO ने स्पष्ट किया है कि इन ट्रस्ट्स को कर्मचारियों को कम से कम EPFO जैसी या उससे बेहतर सुविधाएं देनी होंगी। साथ ही अगर कोई कंपनी अपना छूट प्राप्त दर्जा छोड़ती है, तो उसे सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी ताकि कर्मचारियों को किसी तरह का नुकसान न हो।
    क्यों जरूरी हुआ यह कदम?
    हाल के समय में कुछ प्राइवेट ट्रस्ट्स द्वारा ज्यादा ब्याज दरों का लालच देकर निवेश आकर्षित करने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे भविष्य में फंड की स्थिरता पर सवाल उठने लगे थे। इसी को देखते हुए EPFO ने यह सख्त फैसला लिया है ताकि कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत सुरक्षित रहे।
  • ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक

    ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक


    नई दिल्ली। ट्रेन में सफर करने वाले ज्यादातर यात्री लोअर बर्थ को सबसे आरामदायक मानते हैं। खासतौर पर बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और लंबी दूरी के यात्री लोअर सीट को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन टिकट कन्फर्म होने के बाद भी कई बार अपर या मिडिल बर्थ मिल जाती है। अगर आप भी हर बार लोअर बर्थ चाहते हैं, तो IRCTC की टिकट बुकिंग के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    1. Reservation Choice में जरूर चुनें Lower Berth
    टिकट बुक करते समय “Reservation Choice” सेक्शन में “Lower Berth” का विकल्प जरूर चुनें। इससे रेलवे का कंप्यूटराइज्ड सिस्टम आपकी प्राथमिकता को रिकॉर्ड करता है और सीट अलॉटमेंट के दौरान उसे ध्यान में रखता है। हालांकि यह 100% गारंटी नहीं देता, लेकिन संभावना काफी बढ़ जाती है।

    2. जितनी जल्दी बुकिंग, उतने ज्यादा चांस
    लोअर बर्थ पाने का सबसे बड़ा नियम है  जल्दी टिकट बुक करना। जैसे-जैसे सीटें भरती जाती हैं, लोअर बर्थ उपलब्धता कम होती जाती है। Tatkal या आखिरी समय की बुकिंग में अक्सर मिडिल और अपर बर्थ ही बचती हैं।

    3. सीनियर सिटीजन कोटे का लें फायदा
    भारतीय रेलवे बुजुर्ग यात्रियों और 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए विशेष लोअर बर्थ कोटा देता है। अगर बुकिंग के दौरान सही उम्र और विवरण भरे जाएं तो सिस्टम प्राथमिकता के आधार पर लोअर बर्थ अलॉट कर सकता है।

    4. ज्यादा लोगों की बजाय छोटे ग्रुप में करें बुकिंग
    अगर आप एक साथ बहुत ज्यादा लोगों की टिकट बुक करते हैं, तो सिस्टम सभी को साथ सीट देने की कोशिश करता है। ऐसे में लोअर बर्थ मिलने की संभावना कम हो सकती है। कम यात्रियों के साथ अलग-अलग बुकिंग करने पर लोअर सीट मिलने के चांस बढ़ सकते हैं।

    5. चार्ट बनने के बाद TTE से जरूर बात करें
    कई बार अंतिम समय में यात्रियों के टिकट कैंसिल हो जाते हैं या सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में चार्ट बनने के बाद TTE से विनम्रता से बात करने पर लोअर बर्थ मिल सकती है। विशेष परिस्थितियों में TTE सीट एडजस्ट करने में मदद कर सकते हैं।

    ध्यान रखें ये जरूरी बात
    रेलवे का सीट अलॉटमेंट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से होता है, इसलिए हर बार लोअर बर्थ मिलना तय नहीं होता। लेकिन सही विकल्प, समय पर बुकिंग और रेलवे नियमों की जानकारी आपकी यात्रा को ज्यादा आरामदायक बना सकती है।

  • Hyundai Discount Offer: Creta पर 1 लाख से ज्यादा की छूट, Verna और i20 भी सस्ती

    Hyundai Discount Offer: Creta पर 1 लाख से ज्यादा की छूट, Verna और i20 भी सस्ती


    नई दिल्ली। अगर आप नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो Hyundai की ओर से आया यह ऑफर आपके लिए बड़ा मौका साबित हो सकता है। कंपनी ने मई 2026 में अपनी कई लोकप्रिय कारों पर आकर्षक डिस्काउंट और एक्सचेंज बेनिफिट्स की घोषणा की है। इसमें SUV से लेकर हैचबैक और सेडान तक कई मॉडल शामिल हैं।
    सबसे ज्यादा फायदा Hyundai की पॉपुलर SUV Hyundai Creta पर मिल रहा है। इस पर ग्राहकों को करीब 1.05 लाख रुपये तक का लाभ दिया जा रहा है। इसमें कैश डिस्काउंट के साथ-साथ एक्सचेंज और स्क्रैपेज बोनस भी शामिल हैं। Creta पहले से ही बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और इस ऑफर के बाद इसकी डिमांड और बढ़ने की उम्मीद है।
    सेडान सेगमेंट में Hyundai Verna पर भी शानदार ऑफर दिया जा रहा है। इस कार पर करीब 55 हजार रुपये तक का फायदा मिल सकता है। स्टाइलिश डिजाइन और फीचर्स की वजह से यह कार फैमिली और यंग कस्टमर्स के बीच काफी पसंद की जाती है।
    हैचबैक सेगमेंट में Hyundai i20 पर लगभग 65 हजार रुपये तक की छूट दी जा रही है। वहीं Hyundai Grand i10 Nios पर करीब 80 हजार रुपये तक का लाभ मिल रहा है। ये दोनों मॉडल कम बजट में बेहतर माइलेज और फीचर्स के लिए जाने जाते हैं।
    कॉम्पैक्ट SUV Hyundai Exter पर भी लगभग 40 हजार रुपये तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। शहरों में इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह ऑफर ग्राहकों के लिए आकर्षक माना जा रहा है।
    कंपनी के अनुसार, इन सभी ऑफर्स में कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, स्क्रैपेज बेनिफिट और लॉयल्टी ऑफर्स शामिल हैं। अगर ग्राहक अपनी पुरानी कार एक्सचेंज करते हैं तो उन्हें अतिरिक्त फायदा भी मिल सकता है।
    ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी ऑफर्स सीमित समय के लिए हैं और मई 2026 तक ही लागू रहेंगे। अलग-अलग शहरों और डीलरशिप पर ऑफर की राशि में थोड़ा अंतर हो सकता है।
  • सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार गिरावट, ज्वेलरी स्टॉक्स में मचा हड़कंप, कई कंपनियों के शेयर टूटे

    सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार गिरावट, ज्वेलरी स्टॉक्स में मचा हड़कंप, कई कंपनियों के शेयर टूटे


    नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर रही, जहां सोमवार को कारोबार की शुरुआत से ही भारी गिरावट का माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स दबाव में रहे और पूरे दिन निवेशकों की चिंता बढ़ती रही। खासकर ज्वेलरी सेक्टर पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा, जहां कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार खुलते ही टाइटन के शेयर में गिरावट देखने को मिली और कुछ ही समय में इसमें लगभग 7 प्रतिशत तक की कमी आ गई। इसी तरह ज्वेलरी सेक्टर की अन्य कंपनियां भी दबाव में रहीं और निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी। कल्याण ज्वेलर्स और सेनको गोल्ड जैसे स्टॉक्स में भी 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई, जिससे पूरे सेक्टर में हड़कंप मच गया।

    इस गिरावट का असर केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे बाजार पर इसका दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी बड़े नुकसान के साथ ट्रेड करता नजर आया। बाजार में इस अचानक कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया और कई ट्रेडर्स सतर्क हो गए।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार की स्थिति को कमजोर किया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता कम हुई, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बना हुआ है।

    ज्वेलरी सेक्टर में आई इस बड़ी गिरावट का एक कारण निवेशकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया भी माना जा रहा है। सोने की मांग और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े संकेतों ने इस सेक्टर को सीधे प्रभावित किया, जिससे अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली।

    कुल मिलाकर, आज का दिन शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर साबित हुआ, जहां ज्वेलरी स्टॉक्स सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता का है, क्योंकि वैश्विक संकेत और घरेलू बाजार की स्थिति मिलकर आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं।

  • भारत की ताकत उसकी संस्कृति और संकल्प में है: सोमनाथ उदाहरण से पीयूष गोयल का संदेश

    भारत की ताकत उसकी संस्कृति और संकल्प में है: सोमनाथ उदाहरण से पीयूष गोयल का संदेश

    नई दिल्ली ।सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उसकी ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने भारत की मजबूती, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सोमनाथ मंदिर ने बार-बार कठिन दौर और आक्रमणों के बावजूद खुद को पुनः स्थापित किया, उसी तरह भारत भी हर चुनौती के बाद और अधिक सशक्त होकर उभरा है।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत शक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक है। सदियों के संघर्ष और कई बार हुए हमलों के बाद भी इस मंदिर का अस्तित्व और उसकी पुनर्स्थापना यह दर्शाती है कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें कितनी मजबूत हैं।

    Piyush Goyal ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण देश के लिए केवल धार्मिक महत्व की घटना नहीं थी, बल्कि यह एक नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक भी बना। यह वह समय था जब देश अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से स्थापित करने और अपनी विरासत पर गर्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था।

    उन्होंने भारत की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उनके अनुसार भारत की खासियत यह है कि यहां आधुनिकता और परंपरा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक ओर देश तकनीक, उद्योग और आर्थिक विकास में नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को भी मजबूती से संजोए हुए है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन हर कठिन परिस्थिति के बाद देश ने नई ऊर्जा के साथ वापसी की है। यही क्षमता भारत को दुनिया के अन्य देशों से अलग बनाती है। उनके अनुसार भारत की सभ्यता और संस्कृति ने हमेशा लोगों को जोड़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।

    अपने विचारों में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत अपने विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य केवल आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि उसके मूल्यों, विरासत और आत्मविश्वास से तय होगा।

    उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने और अधिक मजबूती से उभरेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की प्रगति का आधार उसकी सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत ही बनी रहेगी, जो हर पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।