Category: Economy

  • Directorate General of Civil Aviation का बड़ा आदेश, एयरलाइंस को 9 देशों के ऊपर से उड़ान से बचने का निर्देश

    Directorate General of Civil Aviation का बड़ा आदेश, एयरलाइंस को 9 देशों के ऊपर से उड़ान से बचने का निर्देश


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विमानन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने बड़ा कदम उठाया है। डीजेसीए ने भारतीय एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे नौ देशों के एयरस्पेस का इस्तेमाल करें। यह फैसला क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव और सुरक्षा घेरे को देखते हुए लिया गया है।

    इन 9 देशों के ऊपर उड़ान पर रोक

    डीजीसीए के निर्देश के अनुसार, एयरलाइंस को बहरीन, ईरान, इराक, इजरायल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के ऊपर से उड़ान भरने से बचने को कहा गया है। इन देशों के एयरस्पेस को उच्च जोखिम वाला माना गया है, जहां नागरिक अधिकारों के लिए खतरा बना हुआ है।

    ओमान और सऊदी अरब पर सीमित छूट

    हालांकि, ओमान और सऊदी अरब के कुछ निर्धारित एयरस्पेस में विशेष शर्तों के साथ उड़ान की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन यहां भी विमान को 32,000 फीट (FL320) से नीचे उड़ान भरने से मना किया गया है, जिससे सुरक्षा जोखिम कम किया जा सके।

    ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव बना वजह

    डीजीसीए ने अपने निर्देश में कहा कि ईरान, यूनाइटेड स्टेट्स और इज़राइल के बीच हालिया मिलिट्री घटनाओं ने पूरे इलाके में खतरा बढ़ा दिया है। ईरान पर हुए हमले और उसकी जवाबी कार्रवाई के कारण नागरिक उड़ानों के लिए रिस्क काफी बढ़ गया है।

    एयरलाइंस को सख्त निर्देश और तैयारी के आदेश

    नियामक ने एयरलाइंस से कहा है कि वे विस्तृत सुरक्षा रिस्क असेसमेंट (रिस्क असेसमेंट) करें और संभावित रूट बदलाव के लिए रैंडम योजनाएं तैयार रखें। साथ ही, फ्लाइट क्रू को लेटेस्ट NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) की जानकारी देना भी जरूरी किया गया है, ताकि उन्हें रियल-टाइम स्थिति का पता रहे।

    28 मार्च तक लागू रहेंगे निर्देश

    यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 28 मार्च तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, इलाके में हालात के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।

    यात्रियों पर भी पड़ सकता है असर

    इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ सकता है। लंबा रूट बदलाव के कारण फ्लाइट टाइम बढ़ सकता है और किराए में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, डीजेसीए का यह फैसला यात्रियों और विमानन कंपनियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया एक अहम कदम है।

  • बाजार में जबरदस्त रिकवरी, सेंसेक्स और निफ्टी में 1% से अधिक की बढ़त

    बाजार में जबरदस्त रिकवरी, सेंसेक्स और निफ्टी में 1% से अधिक की बढ़त


    नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को शानदार स्टॉक एक्सचेंज पेश किया। दोपहर 12 बजे बीएसई सेंसेक्स 728 अंक यानी करीब 1% की तेजी के साथ 74,935 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 236 अंक या 1.03% की बढ़त के साथ 23,238 पर कारोबार करता नजर आया। किशोरावस्था के बाद बाजार में आई यह किशोर किशोरों के लिए राहत भरी रही।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी जगहें

    केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी जगह देखने को मिली। मेट्रिक्स मिडकैप 100 स्ट्रेंथ 1.27% की बढ़त के साथ 55,185 पर पहुंच गये, जबकि मार्टियड मिडकैप 100 स्ट्रेंथ में भी 0.65% की बढ़त दर्ज की गयी। इससे साफ होता है कि बाजार में हर स्तर पर दुकान का गोदाम बना हुआ है।

    कच्चे तेल में नारी बनी बड़ी वजह

    बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बाजार में आई गिरावट जारी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.21% 107.3 डॉलर प्रति शेयर पर बढ़त। इससे पहले पश्चिम एशिया में तनाव के चलते यह 119 डॉलर तक पहुंच गया था। तेल के भंडार में प्राकृतिक आने से भारत जैसे तीर्थ देश के लिए राहत की स्थिति बनी हुई है, जिससे बाजार में सकारात्मक असर दिख रहा है।

    पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत

    हाल के दिनों में भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नारी के संकेत मिले हैं, जिनमें से किसी का भी भरोसा नहीं है। इससे बाजार में खरीदारी और भावना मजबूत हुई।

    वैश्विक संस्था से भी मिला सहयोग

    एशियाई उद्यमों-सोल और शंघाई-में भी तेजी से देखने को मिला, जबकि अमेरिकियों में भी गिरावट के बाकी हिस्सों में बढ़त आई। इस ग्लोबल सपोर्ट ने भारतीय बाजार को स्थान दिया।

    इंडिया VIX में गिरावट से तेजी

    बाज़ार में लॉन्च – संकेत देने वाला इंडिया VIX भी लॉन्च हुआ है। आमतौर पर जब VIX गिरता है, तो बाजार में स्थिरता और तेजी देखने को मिलती है।

    वर्चुअल वैल्यूएशन पर खरीदारी

    हाल की गिरावट के बाद साझीदारी को कई शेयर साझीदारी पर मिल रहे हैं। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि यही कारण है कि निवेशक फिर से बाजार में लौट रहे हैं।

    विदेशी आवेदकों के लिए बनाने का मौका

    विशेषज्ञ के अनुसार, खिलौनों ने भारतीय बाज़ार को विदेशी बाज़ारों के लिए आकर्षित किया है। इससे आने वाले दिनों में बाजार में और निवेश देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, कच्चे तेल में गिरावट, वैश्विक संकेत और बेहतर वैल्यूएशन जैसे शेयर बाजार में बाजार में वापसी हुई है और आगे भी सकारात्मक रुख बना हुआ है।

  • प्राइवेसी पर बड़ा कदम, WhatsApp जल्द देगा यूजरनेम-आधारित पहचान का विकल्प

    प्राइवेसी पर बड़ा कदम, WhatsApp जल्द देगा यूजरनेम-आधारित पहचान का विकल्प


    नई दिल्ली दुनिया के सबसे लोकप्रिय टेलीकॉम प्लेटफॉर्म WhatsApp पर जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कंपनी नाम और यूनिक वैल्यू जैसी नई फीचर कंपनी की तैयारी चल रही है, जिससे कंपनी बिना अपना फोन नंबर एक-दूसरे से जुड़ती है।

    फ़ोन नंबर साझा किए बिना होगी चैटिंग

    नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ता अपने लिए एक यूनिक बिल्डरनाम या हैंडला बना फ़ेमनी, ठीक वैसे ही जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होता है। इससे किसी को भी मैसेज, वॉयस कॉल या वीडियो कॉल करने के लिए नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं है। यह विशेषता विशिष्टता पर उन उपभोक्ताओं के लिए अद्भुत होगी, जो अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखना चाहते हैं।

    जून 2026 में लॉन्च किया जा सकता है

    सिद्धांत के अनुसार, यह फीचर जून 2026 तक ग्लोबल लेवल पर लॉन्च किया जा सकता है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस बदलाव को लेकर उत्सुक है, क्योंकि उपभोक्ता नए दोस्तों, समूहों और व्यवसाय से आसानी से जुड़ेंगे, वो भी बिना नंबर सार्वजनिक किए।

    वैकल्पिक नया फीचर होगा

    व्हाट्सएप का यह फीचर पूरी तरह से वैकल्पिक निवास की संभावना है। यानि कि जो भी एप्रिसिज्यलिस्ट है, वे पहले एक तरह के फोन नंबर के जरिए ही ऐप का इस्तेमाल जारी रख फैन करते हैं। इससे वास्तविक उपभोक्ता के अनुभव में कोई बाधा नहीं आएगी और धीरे-धीरे नई सुविधा को शामिल करने का विकल्प जरूरी होगा।

    बिज़नेस के लिए भी नया मॉडल

    मेटा प्लेटफॉर्म्स (मेटा) के अनुसार, एक नए विक्रय मॉडल के बारे में भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत मार्केटिंग मार्केटिंग शिपिंग के लिए वास्तविक समय में बोली लगाई गई। इस सिस्टम का रजिस्ट्रेशन 2026 के दूसरे भाग में शुरू हो सकता है और 2027 तक इसे लागू किया जा सकता है।

    भारत बना सबसे बड़ा बाज़ार

    भारत में व्हाट्सएप के लिए सबसे बड़ा बाजार बन गया है, जहां 50 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 77% खरीदारी के शेयरों का असर सोशल मीडिया पर होता है। इसमें मेटा प्लेटफॉर्म्स के प्लेटफॉर्म्स का 96% योगदान बताया गया है।

    इसके अलावा, 72% उत्पाद डिस्कवरी व्हाट्सएप जैसे व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म के माध्यम से मौजूद हैं, जो इस ऐप की चॉकलेट तकनीकों को पेश करता है।

    निजी और प्रयोगशाला दोनों मजबूत

    कुल मिलाकर, व्हाट्सएप का यह कदम ग्राहकों की गोपनीयता को मजबूत करने के साथ-साथ प्लेटफॉर्म को और प्रमुख कंपनी-फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाने पर विचार किया जा रहा है।

  • ईरान इजरायल तनाव से शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 7,000+ अंक लुढ़का, ₹37 लाख करोड़ निवेशकों के डूबे

    ईरान इजरायल तनाव से शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 7,000+ अंक लुढ़का, ₹37 लाख करोड़ निवेशकों के डूबे


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-इजरायल तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बाजार में लगातार गिरावट का माहौल बना हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों में निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और बाजार में डर और अस्थिरता बढ़ गई है।

    27 फरवरी से 19 मार्च के बीच सेंसेक्स करीब 7,080 अंक गिरकर 81,287 से 74,207 के स्तर पर आ गया। वहीं निफ्टी में भी लगभग 2,176 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और बाजार में घबराहट देखने को मिली।

    ₹37 लाख करोड़ का नुकसान

    मिडिल ईस्ट संकट शुरू होने के बाद से निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट आई है। कुल मिलाकर करीब ₹37 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। सिर्फ एक दिन, गुरुवार को ही लगभग ₹12.87 लाख करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है।

    महंगा कच्चा तेल बना मुख्य कारण

    कच्चे तेल की कीमतें 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। कंपनियों की लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिख रहा है।

    वैश्विक बाजार भी दबाव में

    इस संकट का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी जा रही है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारतीय बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है।

    केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें 3.5%–3.75% पर स्थिर रखी हैं और संकेत दिया है कि महंगाई कम होने तक राहत की उम्मीद नहीं है। बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे बाजार में लिक्विडिटी को लेकर चिंता बनी हुई है।

    20 दिनों में करीब 9% की गिरावट

    पिछले 20 दिनों में सेंसेक्स करीब 8.71% और निफ्टी लगभग 8.65% तक गिर चुके हैं। ब्रोकरेज फर्म नोमूरा के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की कमाई 10–15% तक घट सकती है।

    कमजोर शुरुआत का रिकॉर्ड

    साल 2026 की शुरुआत भी शेयर बाजार के लिए निराशाजनक रही है। 1 जनवरी से 16 मार्च के बीच सेंसेक्स 11.4% तक गिर चुका है। पिछले 47 वर्षों में यह पांचवीं सबसे खराब शुरुआत मानी जा रही है। इससे पहले 2020 कोरोना संकट और 2008 वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान इससे बड़ी गिरावट देखी गई थी। युद्ध जैसे हालात, महंगा कच्चा तेल और सख्त मौद्रिक नीतियों के चलते बाजार पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • देश में 11% तक बढ़े बोतलबंद पानी के दाम… ईरान युद्ध के कारण प्लास्टिक महंगा होने से बढ़ी लागत

    देश में 11% तक बढ़े बोतलबंद पानी के दाम… ईरान युद्ध के कारण प्लास्टिक महंगा होने से बढ़ी लागत


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran War ) के चलते देश में बोतलबंद पानी (Bottled Water ) की कीमत (Price) में 11 फीसदी की वृद्धि हुई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि प्लास्टिक की बोतलों (Plastic Bottles) और ढक्कनों के दाम बढ़ गए हैं। 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में स्वच्छ जल एक विशेषाधिकार है, क्योंकि शोधकर्ताओं का कहना है कि 70 फीसदी भूजल दूषित है। बिसलेरी, कोका-कोला, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पेप्सी और टाटा सभी पांच अरब डॉलर के बाजार में हिस्सेदारी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से पॉलिमर की लागत बढ़ रही है, जो उद्योग की प्लास्टिक की बोतलों के लिए एक प्रमुख सामग्री है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।

    बोतलबंद पानी के बाजार के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी बिसलेरी ने कीमतों में 11 फीसदी वृद्धि की है। एक लीटर पानी की 12 बोतलों के एक बॉक्स की कीमत अब 240 रुपये होगी, जबकि पहले यह 216 रुपये थी। बिसलेरी के सीईओ एंजेलो जॉर्ज ने कहा, पैकेजिंग सामग्री की लागत में भारी वृद्धि के कारण पैकेटबंद पेयजल की कीमत 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है। पिछले पखवाड़े में पैकेजिंग सामग्री की लागत में 70 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है।

    साथ ही, मौजूदा स्थिति किसी के नियंत्रण से बाहर है। पार्ले एग्रो ने भी अपने बैली बोतलबंद पानी ब्रांड की कीमत में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी की है। क्लियर प्रीमियम वाटर के सीईओ नयन शाह ने कहा कि इन युद्ध की घटनाओं के कारण कंपनी ने बोतलबंद पानी की खुदरा कीमतों में 8 से 11 फीसदी की बढ़ोतरी की है।

    बोतलों के निर्माण सामग्री की लागत 50 फीसदी बढ़ी
    तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से प्लास्टिक की बोतलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की लागत 50 फीसदी बढ़कर 170 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। ढक्कनों की कीमत दोगुनी से भी अधिक बढ़कर 0.45 रुपये प्रति पीस हो गई है। नालीदार बक्से, लेबल और चिपकने वाली टेप भी महंगी हो गई हैं। इस मूल्य वृद्धि से सरकार की ओर से सितंबर में किए गए कर सुधारों का लाभ उलट गया है, जब बोतलबंद पानी पर टैक्स 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया था। इससे कई कंपनियों को दाम घटाने के लिए प्रोत्साहन मिला था।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर, भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स 2% से अधिक गिरकर खुला

    मध्य पूर्व तनाव का असर, भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स 2% से अधिक गिरकर खुला


    नई दिल्ली।  भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के निफ्टी सत्र में तेज गिरावट के साथ खुला। सुबह के शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,942.22 अंक या 2.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74,750.92 पर और निफ्टी 50 580 अंक या 2.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,197.75 पर ट्रेड कर रहा था।

    बाजार में चौतरफा दबाव देखा गया। रियल्टी, प्राइवेट बैंक, ऑटो, फाइनेंस सर्विसेज, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सर्विसेज, डिफेंस और मेटल सभी सेक्टर्स लाल निशान में रहे। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,194.40 अंक या 2.12 प्रतिशत घटकर 55,095.45 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.50 अंक या 1.52 प्रतिशत कमजोर होकर 15,930.95 पर था।

    सेंसेक्स पैक के 30 रिकवरी में से 28 लाल निशान में थे। प्रमुख रिकवरी में HDFC Bank, L&T, Axis Bank, M&M, Trent, Itrannal, Asian Paints, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, Kotak Mahindra, Ultratech Engineering, Bajaj Finserv और Indiango शामिल थे। केवल NTPC और पावर ग्रिड हरे निशान में बंद हुए।

    रिटेल्स का मानना ​​है कि बाजार में गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव हैं। अमेरिका और इजरायल ने बुधवार को ईरान के दक्षिणी हिस्से में साउथ पार्स गैस फील्ड और असालुयेह शहर की तेल-गैस सुविधाओं पर एयरस्ट्राइक किया। जवाब में ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट रास लफान पर मिसाइल हमले किए। इससे वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया और निवेशक जोखिम से बचने के लिए बिकवाली कर रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दबाव देखा गया। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी बाजार बुधवार को लाल निशान में बंद हुए, जिसमें डाओ 1.63 प्रतिशत और नैस्डैक 1.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ समाप्त हुआ।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली जारी रही। बुधवार को एफआईआई ने 2,714.35 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,253.03 करोड़ रुपये का निवेश किया।

  • पश्चिम एशिया संकट का असर: कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी

    पश्चिम एशिया संकट का असर: कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 111.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 4.10 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मैक्स एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट में 3.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

    तेल की कीमतों में तेजी का कारण ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल के हमले को माना जा रहा है। यह क्षेत्र विश्व का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। जवाब में ईरान ने कतर के प्रमुख वैश्विक गैस हब, रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया। कतर के विदेश मंत्रालय और एनर्जी विभाग ने पुष्टि की है कि मिसाइल हमले से बड़े स्तर पर नुकसान हुआ और आग बुझाने के लिए आपातकालीन बचाव दल तुरंत तैनात किए गए। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल भारत सहित अन्य तेल आयातक देशों पर असर डाल सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।

    इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी अतिरिक्त हमले का विरोध किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि इजरायल ने साउथ पार्स गैस क्षेत्र के एक प्रमुख प्लांट पर हमला किया, जिससे केवल प्लांट का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा ही क्षतिग्रस्त हुआ।

    एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है और ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसके प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

  • सोने-चांदी की कीमतों में दबाव, अमेरिकी फेड की नीति ने बनाया मार्केट चुनौतीपूर्ण

    सोने-चांदी की कीमतों में दबाव, अमेरिकी फेड की नीति ने बनाया मार्केट चुनौतीपूर्ण


    नई दिल्ली। सोने और चांदी के बाजार में गुरुवार को कमजोरी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 10:21 बजे सोने का 2 अप्रैल 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 0.62 प्रतिशत यानी 953 रुपए की गिरावट के साथ 1,52,072 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। दिन भर में सोने ने 1,51,712 रुपए का न्यूनतम और 1,53,025 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ।

    चांदी की कीमतों में भी गिरावट रही। 5 मई, 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट 3,945 रुपए या 1.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,44,249 रुपए प्रति किलो पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,43,083 रुपए का न्यूनतम और 2,45,387 रुपए का उच्चतम स्तर दर्ज किया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में दबाव देखा गया। खबर लिखे जाने तक सोना 0.92 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,850 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75.735 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का हालिया निर्णय सोने और चांदी में गिरावट का मुख्य कारण है। बुधवार को अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों को लगातार दूसरी बार यथावत रखते हुए 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच बनाए रखा। इससे पहले 2025 में सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में दरों में कटौती की गई थी।

    वीटी मार्केट्स के वरिष्ठ विश्लेषक – एपीएसी जस्टिन खू के अनुसार, फेड का यह कदम भू-राजनीतिक झटकों और लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति से जूझ रही समिति के दृष्टिकोण को दर्शाता है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी कहा कि कई अधिकारियों ने अपने पूर्वानुमानों में कटौती की संख्या घटाकर केवल एक कटौती पर सहमति दी है। यह बदलाव मुख्य रूप से ईरान युद्ध और वैश्विक तेल बाजार पर उसके प्रभाव के कारण मुद्रास्फीति में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि के बाद आया है।

  • बाजार का झटका: पार्ट-टाइम चेयरमैन के त्यागपत्र के बाद HDFC Bank के स्टॉक्स में गिरावट

    बाजार का झटका: पार्ट-टाइम चेयरमैन के त्यागपत्र के बाद HDFC Bank के स्टॉक्स में गिरावट


    नई दिल्ली।  भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank के शेयर गुरुवार को सुर्खियों में रहे, जब पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर Atanu Chakraborty ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बैंक की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, चक्रवर्ती का इस्तीफा 18 मार्च से प्रभावी हो गया। इसके चलते सुबह 11:16 बजे एचडीएफसी बैंक का शेयर 802 रुपए पर था, जो 40 रुपए या 4.80 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक के अनुरोध पर Keki Mistry को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। मिस्त्री ने निवेशकों और बाजार को आश्वस्त किया कि बैंक के भीतर कोई बड़ी समस्या नहीं है और बैंक संचालन सुचारू रूप से जारी है।

    चक्रवर्ती, जो 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे, ने अपने इस्तीफे पत्र में कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं और प्रक्रियाएं देखीं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका निर्णय पूरी तरह से वैचारिक मतभेदों पर आधारित है और किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी के कारण नहीं है। एनडीटीवी प्रॉफिट को दिए बयान में चक्रवर्ती ने कहा, “मैं बैंक में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की ओर इशारा नहीं कर रहा हूं। मेरी विचारधाराएं संगठन से मेल नहीं खाती थीं, इसलिए अलग होने का समय आ गया था।”

    विश्लेषकों के अनुसार, बोर्ड स्तर पर किसी वरिष्ठ पदाधिकारी के इस्तीफे से शेयरों में अल्पकालिक अस्थिरता आम है। हालांकि, आरबीआई और बैंक प्रबंधन ने दोनों ने स्पष्ट किया है कि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है और संचालन पूरी तरह से पेशेवर ढंग से हो रहा है। मिस्त्री ने भी कहा कि उनकी नियुक्ति के पीछे प्राथमिक उद्देश्य संक्रमण काल को सुचारू रखना है, और निवेशकों को किसी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • रिपोर्ट में खुलासा, पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज सेक्टर में अगले चार वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी

    रिपोर्ट में खुलासा, पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज सेक्टर में अगले चार वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। भारत का पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की राह पर है। कंसल्टिंग फर्म रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2030 तक करीब 50 प्रतिशत बढ़कर 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में लगभग 100 अरब डॉलर के आसपास है। इस तेजी से बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ क्विक कॉमर्स का माना जा रहा है, जिसने फार्मासिस्ट की खरीदारी की आदत को पूरी तरह बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब क्विक कॉमर्स केवल ‘लास्ट मिनट’ बिजनेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की खरीदारी का अहम हिस्सा बन चुका है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि क्विक कॉमर्स बिजनेस का सकल व्यापार मूल्य (GMV) 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 25 अरब डॉलर के पार जा सकता है। इसका मुख्य कारण है तेजी से डिलीवरी, सुविधा और बार-बार खरीदारी की बढ़ती प्रवृत्ति। आज के समय में 10-15 मिनट में डिलीवरी का ट्रेंड फार्मासिस्ट को आकर्षित कर रहा है, जिससे ऑन-डिमांड खपत तेजी से बढ़ रही है। देश के 250 से ज़्यादा शहरों में 5 करोड़ से ज़्यादा मासिक कमाने वालों के साथ, इस दूध की पैकेज्ड फ़ूड मार्केट में भी 2030 तक 4 प्रतिशत से बढ़कर 15-20 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है।

    बदले हुए लाइफस्टाइल और हेल्थ ट्रेंड्स से जहाँ मांग

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बदले हुए लाइफस्टाइल और कंज्यूमर रहने वालों ने इस बढ़ोतरी को और गति दी है। खासकर युवा वर्ग अब प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और मोटापे से जूझने वालों की ओर तेज़ी से झुक रहा है। पैकेज्ड फ़ूड में ‘क्लीन लेबल’ और हेल्थ-फोकस्ड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा, छोटे परिवार, व्यस्त लाइफस्टाइल और समय की कमी के चलते रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट दूध भी तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

    मृगांक गुटगुटिया ने इस ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्विक कॉमर्स अब एक ‘संरचनात्मक शक्ति’ के रूप में उभर रहा है, जो न केवल डिस्ट्रीब्यूशन बल्कि प्रोडक्ट बढ़ाना, कैटेगरी स्ट्रेटेजी और निवेश को भी प्रभावित कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि कंपनियां अब उपभोक्ता की तत्काल आमदनी और हेल्थ ट्रेंड्स को ध्यान में रखते हुए नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं।

    स्वास्थ्य पर केंद्रित पेय पदार्थों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। चीजों पर प्रोटीन आधारित ड्रिंक्स और पैकेटबंद नारियल पानी जैसे विकल्पों को उपभोक्ता पसंद कर रहे हैं। कुल मिलाकर, क्विक कॉमर्स और बदले हुए उपभोक्ता आदत का मेल भारत के पैकेज्ड फूड एंड बेवरिज मार्केट को नई मजबूती तक पहुंचाने के लिए तैयार है।