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  • राजस्व वसूली में तेजी के लिए सरकार का बड़ा कदम, बड़े टैक्स मामलों पर खास फोकस

    राजस्व वसूली में तेजी के लिए सरकार का बड़ा कदम, बड़े टैक्स मामलों पर खास फोकस


    नई दिल्ली ।
    देश में टैक्स वसूली प्रणाली को और मजबूत करने तथा लंबे समय से लंबित बकाया मामलों को निपटाने के लिए सरकार ने एक बड़े अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड अब 2.57 लाख करोड़ रुपये के पुष्टि किए गए टैक्स बकाया की वसूली को प्राथमिकता देने जा रहा है। इस कदम को राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने और कर अनुपालन को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

    इस अभियान के तहत सबसे अधिक बकाया वाले मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। देशभर में करीब 10,000 बड़े टैक्स डिफॉल्ट मामलों की पहचान कर उनकी अलग से निगरानी की जाएगी। इन मामलों की जांच और वसूली के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी, जो लगातार प्रगति पर नजर रखेंगी और तेजी से समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगी।

    इस पूरी प्रक्रिया में तकनीक को मुख्य आधार बनाया जा रहा है। टैक्स वसूली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे आधुनिक टूल्स का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों की मदद से न केवल डिफॉल्टरों की पहचान आसान होगी, बल्कि उनकी वित्तीय गतिविधियों और संपत्ति के नेटवर्क को भी बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा।

    इसके अलावा टैक्स विभाग संपत्ति और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े डिजिटल डेटाबेस का भी उपयोग करेगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि बकाया राशि की वसूली किन परिसंपत्तियों के माध्यम से संभव है। इससे वसूली प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

    सरकार अब केवल बड़े बकायेदारों पर ही नहीं, बल्कि उन मामलों पर भी नजर रख रही है जहां टैक्स छूट और कटौतियों का गलत उपयोग किया गया हो सकता है। इस कदम का उद्देश्य टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाना और कर अनुपालन को सख्ती से लागू करना है।

    पिछले कुछ वर्षों में टैक्स विवादों के निपटारे में सुधार देखने को मिला है और लाखों मामलों का समाधान किया गया है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में अपीलें और विवाद लंबित हैं। इन्हें तेजी से निपटाने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे हासिल करने के लिए यह वसूली अभियान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आर्थिक परिस्थितियों और कर संग्रह की गति को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि वसूली प्रक्रिया को और अधिक तेज और व्यवस्थित किया जाए।

    हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष में कर संग्रह में वृद्धि दर्ज की गई थी, लेकिन यह अनुमानित लक्ष्य से कुछ कम रहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि कर प्रणाली को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। इसी कारण अब तकनीक आधारित वसूली और निगरानी प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है।

    सरकार का यह कदम आने वाले समय में टैक्स व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे न केवल राजस्व संग्रह में सुधार होगा बल्कि करदाताओं के बीच अनुपालन की संस्कृति भी मजबूत होगी।

  • हिमाचल की बागवानी में बड़ा बदलाव, अब सेब के बाद चेरी, आड़ू और प्लम की भी होगी संगठित खरीद

    हिमाचल की बागवानी में बड़ा बदलाव, अब सेब के बाद चेरी, आड़ू और प्लम की भी होगी संगठित खरीद


    नई दिल्ली ।
    हिमाचल प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था में एक नया और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अब पारंपरिक सेब उत्पादन के साथ-साथ अन्य फलों की संगठित खरीद और विपणन की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में लंबे समय से सेब की खेती मुख्य आर्थिक आधार रही है, लेकिन अब चेरी, आड़ू और प्लम जैसे स्टोन फ्रूट्स भी बाजार व्यवस्था का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

    इस नई पहल के तहत इन फलों की खरीद को व्यवस्थित तरीके से शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर और स्थिर बाजार उपलब्ध हो सके। अब तक सेब के लिए जो संगठित आपूर्ति और भंडारण प्रणाली विकसित की गई थी, उसी ढांचे को अन्य फलों के लिए भी विस्तार देने की योजना है।

    हिमाचल के कई क्षेत्रों में नियंत्रित वातावरण वाले भंडारण केंद्र पहले से मौजूद हैं, जिन्हें अब स्टोन फ्रूट्स के लिए भी अपग्रेड किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चेरी, आड़ू और प्लम जैसे नाजुक फलों की गुणवत्ता बनी रहे और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। इससे किसानों को नुकसान कम होगा और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

    किसानों के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक उनकी निर्भरता सीमित फसलों और पारंपरिक मंडियों पर अधिक रही है। नई व्यवस्था के आने से उन्हें एक ऐसा संगठित प्लेटफॉर्म मिलेगा जहां उनकी उपज का मूल्य गुणवत्ता के आधार पर तय किया जाएगा और पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

    इस विस्तार योजना के तहत आने वाले समय में सबसे पहले चेरी की खरीद शुरू की जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे आड़ू और प्लम को भी इस प्रणाली में शामिल किया जाएगा। इससे हिमाचल के बागवानों को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलने की संभावना बढ़ जाएगी और उनकी आय में भी सुधार देखा जा सकता है।

    पिछले वर्षों में सेब की खरीद और वितरण प्रणाली को मजबूत करते हुए हजारों किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया गया है। इसी मॉडल को आधार बनाकर अब अन्य फलों के लिए भी समान व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे न केवल बागवानी क्षेत्र का दायरा बढ़ेगा बल्कि पूरे कृषि ढांचे में भी आधुनिकता आएगी।

    इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी किसानों को नई सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे वे बिना भौतिक रूप से बाजार पहुंचे अपनी उपज का विक्रय कर सकते हैं। यह व्यवस्था किसानों के लिए समय और लागत दोनों की बचत कर रही है और उन्हें अधिक स्वतंत्रता भी प्रदान कर रही है।

    भंडारण क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि फलों को बाजार तक पहुंचाने से पहले उनकी स्थिति बेहतर बनी रहे। यह पूरा ढांचा किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

    कुल मिलाकर यह कदम हिमाचल प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, जहां पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक और संगठित बाजार प्रणाली के साथ जोड़कर किसानों की आय और उत्पादन क्षमता दोनों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • पेट्रोल-डीजल को लेकर बड़ा मोड़: चुनाव के बाद कीमतों पर फैसला संभव, आम जनता की नजरें टिकी

    पेट्रोल-डीजल को लेकर बड़ा मोड़: चुनाव के बाद कीमतों पर फैसला संभव, आम जनता की नजरें टिकी

    नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से स्थिर रखी गई ईंधन दरें अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलते हालात और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण दबाव में आ चुकी हैं। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और सप्लाई में बाधाओं ने भारत की ऊर्जा नीति के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। स्थिति यह है कि सरकार पर हर दिन करीब एक हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है।

    पिछले कई महीनों से भारत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई थी। लेकिन इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। शुरुआत में उम्मीद थी कि वैश्विक तनाव कम होने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, लेकिन हालात इसके उलट बने हुए हैं और दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

    सरकार फिलहाल ईंधन की बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है ताकि जनता पर सीधा असर न पड़े। इससे सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है। तेल कंपनियों को भी इस स्थिति में बड़ा घाटा झेलना पड़ रहा है, जो लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले जब कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थीं, तब टैक्स में कटौती कर स्थिति को संभालने की कोशिश की गई थी, लेकिन मौजूदा हालात पहले से ज्यादा जटिल हैं।

    सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि रसोई गैस पर भी सरकार को भारी सब्सिडी देनी पड़ रही है। हर घरेलू सिलेंडर पर सरकार बड़ी राशि वहन कर रही है, जिससे वित्तीय संतुलन पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा गैस आपूर्ति और आयात लागत में बढ़ोतरी ने भी सरकार की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।

    वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। समुद्री मार्गों पर बढ़ी लागत, लंबी दूरी की ढुलाई और बीमा खर्च में वृद्धि ने कच्चे तेल की वास्तविक कीमत को और बढ़ा दिया है। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर सीधा असर पड़ा है और ऊर्जा लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

    अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जनता को राहत देती रहे या फिर बढ़ते खर्च का बोझ कुछ हद तक उपभोक्ताओं पर डाले। अगर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर सिर्फ वाहन ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और महंगाई के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देगा। वहीं दूसरी ओर लगातार भारी बोझ उठाना भी लंबे समय तक संभव नहीं माना जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश पहले ही ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी कर चुके हैं और वहां महंगाई का दबाव बढ़ा है। भारत अब तक कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन बदलते वैश्विक हालात में सरकार के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।

    फिलहाल सरकार इस मुद्दे पर गंभीर विचार-विमर्श कर रही है कि आगे क्या कदम उठाया जाए। आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। यह निर्णय न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि इसका सीधा असर आम जनता की जेब और पूरे देश की महंगाई पर पड़ेगा।

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा..

    कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा..


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय भारी उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, जहां मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में सैन्य गतिविधियों और टकराव की स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को झकझोर कर रख दिया है। इसी अस्थिरता के बीच कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर $100 प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।

    तेल बाजार में यह तेजी अचानक नहीं आई है, बल्कि पिछले कुछ दिनों से जारी तनाव और अनिश्चितता का सीधा परिणाम है। समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे और आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसी वजह से बाजार में घबराहट का माहौल है और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में स्थिरता की उम्मीद कम है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य हलचल का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर पड़ता है। यही कारण है कि इस समय बाजार में जोखिम बढ़ा हुआ है और कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं।

    तेल की कीमतों में इस उछाल ने महंगाई की चिंता को भी बढ़ा दिया है। कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा असर परिवहन, उत्पादन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर पड़ता है। इससे दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खासकर आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन सकती है।

    भारत जैसे देशों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल और डीजल की लागत बढ़ती है, जिसका असर आम जनता की जेब पर पड़ता है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ने से वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति बेहद अस्थिर है और निवेशक बड़े फैसलों से बच रहे हैं। हर नई राजनीतिक या सैन्य खबर के साथ तेल बाजार में तेजी या गिरावट देखी जा रही है। यदि तनाव और बढ़ता है तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जबकि कूटनीतिक समाधान से बाजार को राहत मिल सकती है।

    फिलहाल दुनिया की नजर इस क्षेत्र में होने वाली आगे की घटनाओं पर टिकी हुई है, क्योंकि यहां का हर बदलाव सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

  • ज्वेलरी सेक्टर में शानदार रैली: मजबूत नतीजों और डिविडेंड के ऐलान से कल्याण ज्वैलर्स के शेयरों में उछाल

    ज्वेलरी सेक्टर में शानदार रैली: मजबूत नतीजों और डिविडेंड के ऐलान से कल्याण ज्वैलर्स के शेयरों में उछाल

    नई दिल्ली ।
    शेयर बाजार में ज्वेलरी सेक्टर की बड़ी कंपनी कल्याण ज्वैलर्स ने अपने ताज़ा नतीजों से निवेशकों को चौंका दिया है। कंपनी ने मार्च तिमाही में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत कर दिया है। इस अवधि में कंपनी का मुनाफा पिछले साल की तुलना में 118% से अधिक बढ़कर 409.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह उछाल केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बाजार में कंपनी की मजबूत पकड़ और बढ़ती मांग को भी दर्शाया है।

    कंपनी की कुल आय में भी तेज वृद्धि देखने को मिली है। रेवेन्यू 66% से अधिक बढ़कर 10,274.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो यह संकेत देता है कि देश और विदेश दोनों बाजारों में ज्वेलरी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। खासकर शादी और त्योहारों के सीजन ने बिक्री को और गति दी है, जिससे कंपनी के कारोबार को बड़ा सहारा मिला है।

    सिर्फ बिक्री ही नहीं, कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में भी सुधार दर्ज किया गया है। EBITDA में 84% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है और मार्जिन भी बेहतर हुआ है। इसका मतलब यह है कि कंपनी ने न सिर्फ अधिक बिक्री की है, बल्कि अपने खर्चों और संचालन को भी बेहतर तरीके से संभाला है, जिससे मुनाफे में मजबूती आई है।

    इस शानदार प्रदर्शन के साथ कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। प्रति शेयर 2.50 रुपये के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की गई है, जो निवेशकों के लिए अतिरिक्त लाभ का संकेत है। इस घोषणा के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ।

    कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। विदेशी बाजारों से होने वाली आय में 43% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि वहां का मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया है। यह संकेत है कि कंपनी केवल भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।

    इसके अलावा कंपनी के डिजिटल और लाइफस्टाइल ज्वेलरी प्लेटफॉर्म ने भी स्थिर प्रदर्शन किया है, जिससे कुल कारोबार को अतिरिक्त समर्थन मिला है। प्रबंधन के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष में भी मांग मजबूत बनी हुई है और आने वाले समय में ग्रोथ की गति जारी रहने की उम्मीद है।

    नतीजों की घोषणा के बाद शेयर बाजार में भी कंपनी के स्टॉक में तेजी देखने को मिली। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन ने शेयर को ऊपर की ओर धकेल दिया। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि कल्याण ज्वैलर्स आने वाले समय में ज्वेलरी सेक्टर में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • UPI ग्रोथ और लोन बिजनेस से Paytm शेयर में 34% तक उछाल की संभावना

    UPI ग्रोथ और लोन बिजनेस से Paytm शेयर में 34% तक उछाल की संभावना


    नई दिल्ली ।
    डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर में तेज बदलाव के बीच One 97 Communications Ltd एक बार फिर निवेशकों के रडार पर आ गई है। हाल ही में आए तिमाही नतीजों के बाद कंपनी को लेकर बाजार की धारणा काफी सकारात्मक होती दिख रही है। कई बड़े निवेश विश्लेषण संस्थानों ने इस शेयर पर भरोसा जताते हुए इसे “बाय” श्रेणी में बनाए रखा है और आने वाले समय में इसमें मजबूत तेजी की संभावना जताई है।

    कंपनी के कारोबार में सबसे बड़ा योगदान डिजिटल पेमेंट और UPI सेगमेंट का माना जा रहा है। लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और ग्राहकों की बढ़ती भागीदारी ने कंपनी की स्थिति को मजबूत किया है। इसके साथ ही फाइनेंशियल सर्विसेज, लोन डिस्ट्रीब्यूशन और मर्चेंट सॉल्यूशंस जैसे सेगमेंट भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं, जिससे कुल राजस्व में सुधार देखने को मिला है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी ने हाल के तिमाही नतीजों में स्थिर प्रदर्शन दर्ज किया है। भले ही प्रमोशनल खर्च और कैशबैक योजनाओं के कारण शॉर्ट टर्म में मार्जिन पर दबाव बना रहा हो, लेकिन यूजर ग्रोथ और मार्केट शेयर बढ़ाने की रणनीति लंबे समय में मजबूत परिणाम दे सकती है। इसी रणनीति के चलते डिजिटल पेमेंट बाजार में कंपनी की पकड़ और मजबूत होती दिखाई दे रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की आय में सुधार का सबसे बड़ा कारण फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस की तेज वृद्धि है। इसके अलावा कोर पेमेंट बिजनेस में भी लगातार मजबूती बनी हुई है, जिससे कुल बिजनेस ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है। मर्चेंट पेमेंट्स और सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाओं से भी कंपनी की आय में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

    एक अहम पहलू यह भी है कि कंपनी का EBITDA पहले के मुकाबले बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। जहां पहले कंपनी घाटे में चल रही थी, वहीं अब ऑपरेशनल स्तर पर सुधार देखने को मिला है। यह बदलाव निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है कि कंपनी अब प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    इसके साथ ही कंपनी की बैलेंस शीट भी मजबूत होती दिख रही है। पर्याप्त कैश रिजर्व और बेहतर फाइनेंशियल स्थिति भविष्य की विस्तार योजनाओं को समर्थन दे सकती है। AI आधारित सेवाओं और नए डिजिटल प्रोडक्ट्स के विस्तार को भी कंपनी की अगली ग्रोथ स्टोरी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि प्रतिस्पर्धा और मार्जिन दबाव जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर में लंबी अवधि की संभावनाएं काफी मजबूत हैं। बढ़ता डिजिटल लेनदेन, कैशलेस इकोसिस्टम और तकनीकी बदलाव इस सेक्टर को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।

    कुल मिलाकर, मौजूदा संकेत बताते हैं कि कंपनी एक बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां से आगे ग्रोथ और स्थिरता दोनों की संभावना बनती दिख रही है। इसी वजह से बाजार में इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब इसके आने वाले प्रदर्शन पर टिकी हुई है।

  • निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बीच भी मजबूत तेजी की उम्मीद, जानें अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

    निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बीच भी मजबूत तेजी की उम्मीद, जानें अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

    नई दिल्ली ।
    शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से निफ्टी 50 इंडेक्स एक अस्थिर लेकिन दिलचस्प स्थिति में बना हुआ है। एक ओर जहां बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी चार्ट यह संकेत दे रहे हैं कि निफ्टी में अभी भी ऊपर जाने की क्षमता बची हुई है। निवेशकों के बीच फिलहाल अनिश्चितता का माहौल है, लेकिन बाजार का समग्र ढांचा पूरी तरह कमजोर नहीं माना जा रहा है।

    पिछले सप्ताह निफ्टी ने कई बार दिशा बदली। शुरुआती सत्रों में इंडेक्स ने मजबूती दिखाते हुए 24500 के करीब पहुंचने की कोशिश की, जिससे बाजार में थोड़ी सकारात्मकता देखने को मिली। लेकिन इसके बाद किसी मजबूत सकारात्मक संकेत के अभाव में बाजार दबाव में आ गया और इंडेक्स नीचे की ओर फिसलने लगा। 24000 का स्तर इस दौरान एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आया, जहां से बार-बार खरीदारी का समर्थन मिलता रहा।

    मध्य सप्ताह में निफ्टी ने इसी सपोर्ट से उभरते हुए फिर से ऊपर की ओर रुख किया और कुछ समय के लिए तेजी का माहौल भी बना। लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी और अंततः बाजार एक बार फिर अस्थिरता की ओर लौट आया। सप्ताह के अंत तक इंडेक्स ने लगभग 24176 के स्तर पर क्लोजिंग दी, जबकि दिन के दौरान लगभग 150 अंकों की गिरावट भी देखने को मिली।

    इसके बावजूद तकनीकी संकेत यह दर्शाते हैं कि बाजार पूरी तरह दबाव में नहीं है। वीकली चार्ट पर बनी डोजी कैंडल इस बात का संकेत देती है कि बाजार में अनिश्चितता जरूर है, लेकिन ट्रेंड अभी भी पूरी तरह टूटता हुआ नहीं दिख रहा है। ऊपरी स्तरों से आई बिकवाली के बावजूद निचले स्तरों पर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है, जो बाजार को गिरने से रोक रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23920 के आसपास का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। जब तक यह स्तर सुरक्षित रहता है, तब तक बाजार में ऊपर जाने की संभावना बनी रह सकती है। वहीं दूसरी ओर 24500 का स्तर एक मजबूत रेजिस्टेंस की तरह काम कर रहा है, जिसे पार करना बाजार के लिए अगला बड़ा संकेत होगा। यदि निफ्टी इस स्तर को मजबूती से तोड़ता है, तो आगे 24800 और फिर 25000 तक के स्तर देखने को मिल सकते हैं।

    हालांकि बाजार की दिशा काफी हद तक बाहरी घटनाओं और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। किसी भी सकारात्मक अंतरराष्ट्रीय विकास से बाजार को तेजी का नया ट्रिगर मिल सकता है, जबकि नकारात्मक संकेत दबाव बढ़ा सकते हैं। इसी कारण आने वाले सत्रों को बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर निफ्टी फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर है जहां गिरावट के बावजूद तेजी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल अगले बड़े मूवमेंट की दिशा तय करेंगे।

  • स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर

    स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर


    नई दिल्ली। मुंबई में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 के अपने ताजा नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के शुद्ध घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में स्विगी का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,117 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है।
    हालांकि, चौथी तिमाही के आंकड़ों में कंपनी की स्थिति कुछ बेहतर नजर आई है। 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में स्विगी का घाटा घटकर 800 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,081 करोड़ रुपये था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के खर्च नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है।
    रेवेन्यू के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में परिचालन से आय 45 प्रतिशत बढ़कर 6,383 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं, कुल आय 46.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,649 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,531 करोड़ रुपये थी।
    कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। विज्ञापन और बिक्री प्रमोशन पर खर्च बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।
    स्विगी के प्रबंधन ने बताया कि उसका क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यूनिट इकॉनॉमिक्स को सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 68.8 प्रतिशत बढ़कर 7,881 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, फूड डिलीवरी सेगमेंट में भी स्थिर ग्रोथ देखी गई है, जहां कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 9,005 करोड़ रुपये रही और ऑर्डर संख्या 18.3 मिलियन तक पहुंच गई।
    स्विगी के एमडी और सीईओ ने कहा है कि कंपनी का फोकस अब लाभप्रदता और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने पर है। उनका लक्ष्य आने वाली तिमाहियों में बेहतर मार्जिन और ब्रेकईवन की दिशा में आगे बढ़ना है।
    कुल मिलाकर, हालांकि स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कंपनी विस्तार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
  • Bank of Baroda FD Scheme: 2 लाख की FD पर मिलेगा 1 लाख से ज्यादा ब्याज, सुरक्षित निवेश का शानदार मौका

    Bank of Baroda FD Scheme: 2 लाख की FD पर मिलेगा 1 लाख से ज्यादा ब्याज, सुरक्षित निवेश का शानदार मौका


    नई दिल्ली। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शामिल Bank of Baroda की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम इन दिनों निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सुरक्षित निवेश और तय रिटर्न की वजह से FD हमेशा से भरोसेमंद विकल्प मानी जाती रही है। खास बात यह है कि बैंक की लंबी अवधि वाली FD स्कीम में ₹2 लाख जमा करने पर निवेशक को मैच्योरिटी तक करीब ₹1.03 लाख तक ब्याज मिल सकता है।
    बैंक फिलहाल अलग-अलग अवधि की FD पर 3.50 प्रतिशत से लेकर 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दर ऑफर कर रहा है। वरिष्ठ नागरिकों और 80 वर्ष से अधिक आयु वाले सुपर सीनियर सिटीजन को अतिरिक्त ब्याज का लाभ भी दिया जा रहा है। बैंक की चर्चित “bob Square Drive Deposit Scheme” 444 दिनों की अवधि पर आम ग्राहकों को 6.45 प्रतिशत, वरिष्ठ नागरिकों को 6.95 प्रतिशत और सुपर सीनियर सिटीजन को 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दे रही है।
    अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए ₹2 लाख की FD कराता है और ब्याज को कंपाउंडिंग के साथ निवेश में ही रहने देता है, तो मैच्योरिटी पर कुल रकम ₹3 लाख से अधिक पहुंच सकती है। कई FD कैलकुलेशन के अनुसार, 5 साल या उससे ज्यादा की अवधि में ब्याज की राशि ₹1 लाख से अधिक हो सकती है। यही वजह है कि सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहने वाले निवेशक FD की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
    FD का सबसे बड़ा फायदा यह माना जाता है कि इसमें शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की तरह बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता। निवेशक को पहले से तय ब्याज दर के अनुसार निश्चित रिटर्न मिलता है। यही कारण है कि रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की शिक्षा या भविष्य के सुरक्षित निवेश के लिए लोग FD को प्राथमिकता देते हैं।
    विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बैंक की FD उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है जो बिना जोखिम के निवेश करना चाहते हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त ब्याज दर इस योजना को और आकर्षक बनाती है।
    हालांकि निवेश से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। FD कराने से पहले ब्याज दर, निवेश अवधि, कंपाउंडिंग का तरीका और समय से पहले पैसा निकालने के नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। बैंक समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव करते रहते हैं, इसलिए निवेश से पहले ताजा ब्याज दर जरूर जांच लें।
    वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई निवेशक सुरक्षित, स्थिर और गारंटीड रिटर्न चाहता है, तो सरकारी बैंक की FD आज भी सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों में से एक मानी जाती है।
  • दो दिन में 97 लाख से ज्यादा LPG सिलेंडर की डिलीवरी, ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची: सरकार

    दो दिन में 97 लाख से ज्यादा LPG सिलेंडर की डिलीवरी, ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची: सरकार


    नई दिल्ली।  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से सामान्य और सुचारू बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों में करीब 87.66 लाख सिलेंडर की बुकिंग के मुकाबले 97 लाख से अधिक सिलेंडर की डिलीवरी की गई है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग का स्तर बढ़कर लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो डिजिटल प्रणाली की ओर बढ़ते उपभोक्ता व्यवहार को दर्शाता है। मंत्रालय ने बताया कि उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ऑथेंटिकेशन कोड के आधार पर लगभग 95 प्रतिशत डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या हेराफेरी को रोका जा सके।

    पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बावजूद देश में एलपीजी सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और किसी भी रिटेल गैस एजेंसी पर स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति नहीं देखी गई है।

    इसके अलावा, पिछले दो दिनों में 1.11 लाख छोटे 5 किलोग्राम वाले सिलेंडरों की भी बिक्री हुई है। सरकार के अनुसार, यह छोटे सिलेंडर खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों और छोटे उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

    सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम लगातार एलपीजी वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में लगी हुई हैं। साथ ही कमर्शियल एलपीजी की बिक्री भी पिछले दो दिनों में 15,493 मीट्रिक टन से अधिक दर्ज की गई, जो लगभग 8.15 लाख 19 किलो वाले सिलेंडरों के बराबर है।

    मंत्रालय ने यह भी बताया कि देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन का विस्तार तेजी से हो रहा है। अब तक करीब 6.5 लाख कनेक्शनों में गैस सप्लाई शुरू हो चुकी है, जबकि कुल कनेक्शन संख्या 9.16 लाख तक पहुंच गई है। इसके अलावा, 7.08 लाख नए उपभोक्ताओं ने कनेक्शन के लिए आवेदन किया है।

    सरकार ने बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए देशभर में सख्त कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में 2,000 से अधिक जगहों पर छापेमारी की गई, जिसमें 378 डिस्ट्रीब्यूटरों पर जुर्माना लगाया गया और 76 एजेंसियों को निलंबित किया गया।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सभी सरकारी तेल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।

    सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अतिरिक्त खरीदारी न करें। साथ ही उपभोक्ताओं को डिजिटल माध्यम से बुकिंग करने और गैस एजेंसियों पर अनावश्यक भीड़ से बचने की सलाह दी गई है।