Category: Economy

  • नोएडा बना टेक इनोवेशन का नया केंद्र, अडोबी ने 1.58 लाख वर्गफुट में शुरू किया अत्याधुनिक ऑफिस

    नोएडा बना टेक इनोवेशन का नया केंद्र, अडोबी ने 1.58 लाख वर्गफुट में शुरू किया अत्याधुनिक ऑफिस

    नई दिल्ली । नोएडा के एक आधुनिक व्यावसायिक परिसर में हाल ही में एक ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे क्षेत्र की पहचान को और मजबूत कर दिया है। ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी अडोबी ने यहां अपने नए बड़े ऑफिस की शुरुआत कर दी है, जो न केवल एक कॉर्पोरेट विस्तार है बल्कि भारत के बढ़ते डिजिटल भविष्य का भी प्रतीक बन चुका है। करीब 1.58 लाख वर्गफुट में फैला यह नया कार्यस्थल इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी विकास का एक मजबूत केंद्र बनता जा रहा है।

    इस नए ऑफिस में 700 से अधिक पेशेवर एक साथ काम करेंगे, जिनमें मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और ग्राहक अनुभव से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह कार्यस्थल इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां नवाचार, सहयोग और रचनात्मकता को बढ़ावा मिल सके। जैसे-जैसे दुनिया एआई आधारित तकनीकों की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस केंद्र की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।

    यह विस्तार केवल एक व्यावसायिक निर्णय नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत में बढ़ते तकनीकी भरोसे और प्रतिभा की क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत में वर्षों से विकसित हो रही डिजिटल स्किल्स और मजबूत इंजीनियरिंग इकोसिस्टम ने वैश्विक कंपनियों को लगातार आकर्षित किया है। इसी कड़ी में नोएडा का यह नया केंद्र आने वाले समय में बड़े इनोवेशन का हिस्सा बनने जा रहा है।

    इस पूरे कैंपस को इस तरह तैयार किया गया है कि यह भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करे। यहां का माहौल न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा देता है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी प्राथमिकता देता है। ऊर्जा की बचत करने वाली प्रणालियां, टिकाऊ निर्माण तकनीक और आधुनिक डिजाइन इस बात को दर्शाते हैं कि भविष्य के कार्यस्थल किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    भारत में कंपनी की यात्रा कई वर्षों पहले एक छोटे अनुसंधान केंद्र के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन आज यह देश इसके वैश्विक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। यहां मौजूद हजारों कर्मचारी न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक उत्पादों और सेवाओं के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस नए विस्तार से यह योगदान और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

    नोएडा में इस तरह के बड़े निवेश यह भी दिखाते हैं कि यह क्षेत्र अब केवल एक औद्योगिक या आवासीय केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यह एक पूर्ण तकनीकी और नवाचार हब के रूप में विकसित हो रहा है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन और तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम इसे वैश्विक कंपनियों के लिए एक आदर्श स्थान बना रहा है।

    आने वाले समय में इस प्रकार के निवेश न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा देंगे। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक को बनाने और दिशा देने वाला देश बनता जा रहा है।

  • भारत–इजिप्ट रणनीतिक साझेदारी मजबूत, 2030 तक 12 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

    भारत–इजिप्ट रणनीतिक साझेदारी मजबूत, 2030 तक 12 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य



    नई दिल्ली। भारत और मिस्र (इजिप्ट) के बीच आर्थिक संबंधों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। हाल ही में मुंबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एक बिजनेस डेलिगेशन मीटिंग में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया।


    इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि दोनों देश आने वाले वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान लगभग 5 अरब डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 12 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
    इस मौके पर मुंबई में तैनात डाहलिया मोहम्मद नाजिह मोहम्मद तवाकोल ने कहा कि भारत और इजिप्ट के संबंध ऐतिहासिक और मजबूत रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने जून 2023 में रणनीतिक साझेदारी समझौता किया था, जिससे सहयोग के नए रास्ते खुले हैं।
    उन्होंने आगे कहा कि ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, फार्मास्युटिकल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच अपार संभावनाएं हैं। विशेष रूप से सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र को भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा निवेश केंद्र बताया गया है।
    इस अवसर पर विजय कलंत्री ने भी कहा कि भारत और इजिप्ट के बीच व्यापारिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग 5 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 12 अरब डॉलर करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल, केमिकल और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए इजिप्ट एक बड़ा बाजार बन सकता है। साथ ही, इजिप्ट में भारतीय निवेश भी बढ़ रहा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे।
    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार के साथ-साथ पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। हालांकि कुछ लॉजिस्टिक और वीजा संबंधी चुनौतियां हैं, लेकिन दोनों देश इन्हें तेजी से हल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर, भारत और इजिप्ट की यह साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक व्यापार के नए अवसर खोल सकती है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती है।
  • ईरान युद्ध से भड़के तेल के दाम… जानें दुनिया में कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?

    ईरान युद्ध से भड़के तेल के दाम… जानें दुनिया में कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran war) से दुनिया भर में तेल के दाम (Oil prices) में उछाल देखने को मिल है। इस बीच पूरी दुनिया में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत कहीं 2.25 रुपये है तो कहीं 394.95 रुपये। यानी पेट्रोल की कीमत कही भारत से 44 गुना सस्ता है तो कहीं करीब चार गुना महंगा। आइए जानें दुनिया में सबसे सस्ता और महंगा पेट्रोल और डीजल (Petrol Diesel Prices) कहां मिलता है?


    सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाले देश

    सबसे पहले बात दुनिया में सबसे महंगे पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देशों की। इस लिस्ट में सबसे ऊपर हांगकांग का नाम है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 400 रुपये है। इसके बाद मलावी का नाम आता है। यहां पेट्रोल का रेट 364.27 रुपये प्रति लीटर है।

    इजरायल में पेट्रोल जहां, 269.19 रुपये लीटर है वहीं, डेनमार्क में 265.74 रुपये। नीदरलैंड में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 260.15 रुपये है। ग्रीस में 231.57 और अल्बानिया में 231.49 रुपये लीटर है। स्विट्जरलैंड में पेट्रोल की कीमत 231.12 और सिंगापुर में 230.02 रुपये लीटर है।


    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देश

    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल लीबिया में है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 2.25 रुपये है। इसके बाद ईरान का नंबर है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 3.32 रुपये है। इसके बाद अंगोला में 31.08, कुवैत में 32.41, अल्जीरिया में 33.75 और तुर्कमेनिस्तान में 40.78 रुपये लीटर है।

    आठवें नंबर इजिप्ट है। यहां पेट्रोल की कीमत 42.78 रुपये है। नौवें पर कतर है, जहां पेट्रोल की कीमत 54.62 रुपये लीटर है। 10वें नंबर पर सऊदी अरब है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 59.62 रुपये है।


    किस देश में सबसे सस्ता डीजल

    सबसे सस्ता डीजल वेनेजुएला में मिलता है। यहां 1 लीटर डीजल की कीमत महज 39 पैसे है। इसके बाद ईरान में 54 पैसे और लीबिया में 2.25 रुपये लीटर। अल्जीरिया में एक लीटर डीजल की कीमत 22.26 रुपये है।

    तुर्कमेनिस्तान में डीजल 27.19 रुपये प्रति लीटर है तो कुवैत में 35.50 रुपये। इजिप्ट में डीजल का रेट 36.36 रुपये लीटर है तो अंगोला में 41.44 रुपये लीटर। सऊदी अरब में एक लीटर डीजल की कीमत 45.37 रुपये और कतर में 53.32 रुपये।


    हांगकांग में 446 रुपये लीटर है डीजल

    दुनिया में सबसे महंगा डीजल हांगकांग में 446 रुपये लीटर है। एक लीटर डीजल की कीमत मलावी में 365, सिंगापुर में 310.49, डेनमार्क में 273.16, स्विट्जरलैंड में 262.09, नीदरलैंड में 257 रुपये लीटर है। इजरायल में जहां एक लीटर डीजल 255.60 रुपये है तो फिनलैंड में 255.59 रुपये।

  • अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें

    अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों को टिकट बुकिंग और यात्रा से जुड़ी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देने जा रहा है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि अगस्त 2026 से ट्रेनों को नई उन्नत यात्री आरक्षण प्रणाली में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह बदलाव पूरी तरह सुचारु तरीके से किया जाए और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
    रेल भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान रेलवे की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था और नई तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म की तैयारियों का जायजा लिया गया। मौजूदा यात्री आरक्षण प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। पिछले चार दशकों में इसमें कई छोटे बदलाव किए गए, लेकिन अब रेलवे इसे पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है।
    रेल मंत्रालय के मुताबिक नई प्रणाली की क्षमता को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए काफी बढ़ाया गया है, ताकि भविष्य में बढ़ती यात्री संख्या और टिकट बुकिंग के दबाव को आसानी से संभाला जा सके। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रेलवे लगातार डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में काम कर रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम है।
    वर्तमान में करीब 88 प्रतिशत रेलवे टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। इसमें RailOne मोबाइल एप की अहम भूमिका रही है, जिसे पिछले साल जुलाई में लॉन्च किया गया था। यह ऐप अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन, रिफंड और लाइव ट्रेन स्टेटस जैसी कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं।
    नई आरक्षण प्रणाली की सबसे खास बात इसमें शामिल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम है। यह फीचर वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है। रेलवे के अनुसार, इस सुविधा की सटीकता पहले 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है।
    इसके अलावा RailOne ऐप के जरिए यात्रियों को लाइव ट्रेन ट्रैकिंग, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी, रेल मदद शिकायत निवारण सेवा और सीट तक भोजन पहुंचाने जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं, जिनमें आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट शामिल हैं।
    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा बनी हुई है। वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री सब्सिडी पर 60,239 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे यात्रियों को औसतन 43 प्रतिशत तक किराए में राहत मिली। नई तकनीक आधारित आरक्षण प्रणाली से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में रेलवे यात्रा पहले से ज्यादा स्मार्ट, आसान और तेज हो जाएगी।
  • EPF और EPS में क्या है अंतर? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित

    EPF और EPS में क्या है अंतर? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित


    नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्लिप में हर महीने PF यानी प्रोविडेंट फंड की कटौती जरूर दिखाई देती है, लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों को यह नहीं पता होता कि यह पैसा आखिर कहां जमा होता है और रिटायरमेंट के समय इससे कितना फायदा मिलता है। दरअसल, PF केवल एक सेविंग स्कीम नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और पेंशन का मजबूत आधार है। यही वजह है कि लंबे समय तक नौकरी करने वालों के लिए EPF और EPS दोनों बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा हर महीने PF के रूप में काटा जाता है। इतनी ही राशि कंपनी की ओर से भी जमा की जाती है। हालांकि, कंपनी का पूरा 12 प्रतिशत सीधे EPF खाते में नहीं जाता। यही वह हिस्सा है जिसे लेकर अधिकांश कर्मचारियों के मन में भ्रम रहता है।

    कर्मचारी के योगदान का पूरा 12 प्रतिशत Employees’ Provident Fund यानी EPF खाते में जमा होता है। वहीं कंपनी के 12 प्रतिशत योगदान में से केवल 3.67 प्रतिशत EPF में जाता है, जबकि 8.33 प्रतिशत हिस्सा Employees’ Pension Scheme यानी EPS में ट्रांसफर कर दिया जाता है। EPS का मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन उपलब्ध कराना होता है।

    अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये है, तो कर्मचारी की ओर से हर महीने 3 हजार रुपये EPF में जमा होंगे। कंपनी भी 3 हजार रुपये देगी, लेकिन इसमें से करीब 1,250 रुपये EPS में चले जाएंगे और बाकी राशि EPF खाते में जुड़ जाएगी। यानी कर्मचारी के EPF अकाउंट में हर महीने कर्मचारी और कंपनी दोनों के हिस्से मिलाकर रकम जमा होती रहती है, जिस पर सालाना ब्याज भी मिलता है।

    फिलहाल EPFO कर्मचारियों के EPF बैलेंस पर करीब 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रहा है। यही वजह है कि लंबे समय तक लगातार नौकरी करने पर PF का फंड लाखों से बढ़कर करोड़ों तक पहुंच सकता है। कंपाउंडिंग का फायदा इसमें सबसे बड़ा रोल निभाता है।

    वहीं EPS में जमा राशि पर ब्याज नहीं मिलता, क्योंकि यह पेंशन स्कीम के तहत संचालित होती है। हालांकि, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारियों को 58 साल की उम्र के बाद मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। पेंशन की राशि नौकरी की अवधि और सैलरी के आधार पर तय की जाती है।

    आजकल सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग EPS को लेकर सवाल पूछते नजर आते हैं। कई कर्मचारियों को लगता है कि उनका EPS बैलेंस दिखाई क्यों नहीं देता। विशेषज्ञों के मुताबिक EPS राशि सीधे पेंशन फंड में मैनेज होती है, इसलिए यह सामान्य EPF बैलेंस की तरह अलग से नहीं दिखती।

    कुल मिलाकर, PF केवल सैलरी से होने वाली कटौती नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक मजबूती का बड़ा सहारा है। सही जानकारी और लंबी अवधि तक नियमित निवेश से यही छोटी कटौती भविष्य में बड़ी वित्तीय सुरक्षा में बदल सकती है।

  • डेटा सुरक्षा और एआई विस्तार पर बड़ा कदम, भारत में तैयार होगा आईबीएम-योट्टा का नया क्लाउड प्लेटफॉर्म

    डेटा सुरक्षा और एआई विस्तार पर बड़ा कदम, भारत में तैयार होगा आईबीएम-योट्टा का नया क्लाउड प्लेटफॉर्म


    नई दिल्ली।

    भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम सामने आया है, जहां आईबीएम और योट्टा डेटा सर्विसेज ने मिलकर एक नए एजेंटिक एआई प्लेटफॉर्म को विकसित करने की योजना बनाई है। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह भारत स्थित क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित होगा और इसका उद्देश्य देश की कंपनियों और सरकारी संस्थानों को सुरक्षित, नियंत्रित और आधुनिक एआई समाधान उपलब्ध कराना है।

    इस पहल के तहत आईबीएम की उन्नत एआई तकनीक को योट्टा के स्वदेशी क्लाउड सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा। इससे एक ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार होगा जो डेटा सुरक्षा, नियामकीय अनुपालन और स्थानीय डेटा स्टोरेज की जरूरतों को पूरा करेगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए संगठन अपने विभिन्न विभागों जैसे आईटी सेवाएं, मानव संसाधन, वित्त, खरीद और ग्राहक सेवा में एआई आधारित एजेंट्स का उपयोग कर सकेंगे।

    कंपनियों में अब एआई को केवल प्रयोग के स्तर से आगे बढ़ाकर वास्तविक संचालन में शामिल करने की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिससे कारोबारी प्रक्रियाएं अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकें। इसके साथ ही यह प्रणाली कंपनियों को यह सुविधा भी देगी कि वे एआई का उपयोग अपने नियंत्रण और अनुपालन मानकों के अनुसार कर सकें।

    इस परियोजना के तहत आईबीएम का सॉवरेन कोर सिस्टम भी योट्टा के क्लाउड प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया जाएगा, जिससे एक मजबूत और स्वदेशी डिजिटल वातावरण तैयार होगा। यह व्यवस्था कंपनियों को डेटा सुरक्षा, ऑडिट ट्रैकिंग और नियंत्रित एआई संचालन जैसी सुविधाएं प्रदान करेगी, जिससे नियामकीय आवश्यकताओं का पालन आसान हो जाएगा।

    इस साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय कंपनियों को आत्मनिर्भर एआई इकोसिस्टम प्रदान करना है, जहां वे बिना किसी बाहरी निर्भरता के अपने डेटा और तकनीकी प्रक्रियाओं को नियंत्रित कर सकें। योट्टा का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और आईबीएम की एआई क्षमताएं मिलकर एक ऐसा समाधान तैयार करेंगी, जो बड़े पैमाने पर एआई अपनाने को सरल और सुरक्षित बनाएगा।

    कुल मिलाकर यह पहल भारत में एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करती है, जो आने वाले समय में डिजिटल इनोवेशन को नई दिशा दे सकती है।

  • उतार-चढ़ाव के बाद सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स में 114 अंकों की गिरावट..

    उतार-चढ़ाव के बाद सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स में 114 अंकों की गिरावट..

    नई दिल्ली। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती तेजी के बावजूद कारोबार के अंत तक बाजार लगभग सपाट बंद हुआ। निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित तनाव कम होने की खबरों पर बनी रहीं।

    कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 114 अंक गिरकर 77,844.52 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी मामूली कमजोरी के साथ 24,326.65 पर बंद हुआ। दिन की शुरुआत दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ की थी, लेकिन बाद में बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली।

    दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 78,384.70 का उच्च स्तर और 77,713.21 का निचला स्तर छुआ। वहीं निफ्टी 24,482.10 तक पहुंचा, जबकि दिन का निचला स्तर 24,284 रहा।

    हालांकि बड़े सूचकांकों में दबाव देखने को मिला, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी रही, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुआ।

    सेक्टर आधारित कारोबार में ऑटो, रियल्टी, मेटल, मीडिया और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर दबाव में रहे।

    बाजार में बजाज ऑटो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंडाल्को, ओएनजीसी, कोटक बैंक और एनटीपीसी जैसे शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। वहीं एचयूएल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, आईटीसी और सन फार्मा जैसे शेयर कमजोर रहे।

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की संपत्ति में इजाफा हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 475 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जिससे निवेशकों को लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ।

    तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,400-24,500 का स्तर फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस दायरे के ऊपर टिकता है, तो बाजार में फिर तेजी लौट सकती है। वहीं 24,100-24,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीतिक घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखा। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया भी मजबूत हुआ और हल्की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।

  • डिजिटल दुनिया में नया धमाका करने की तैयारी, सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में उतर सकती है रिलायंस

    डिजिटल दुनिया में नया धमाका करने की तैयारी, सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में उतर सकती है रिलायंस

    नई दिल्ली। भारत में इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। टेलीकॉम सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अब रिलायंस सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में भी बड़ी तैयारी करती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि कंपनी लो अर्थ ऑर्बिट यानी LEO सैटेलाइट तकनीक के जरिए देशभर में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।

    सैटेलाइट इंटरनेट ऐसी तकनीक है जिसमें इंटरनेट सेवा के लिए मोबाइल टावर या फाइबर केबल की जरूरत नहीं पड़ती। इंटरनेट सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के जरिए यूजर्स तक पहुंचाया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जिन इलाकों में नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल होता है, वहां भी आसानी से इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है।

    पहाड़ी क्षेत्रों, गांवों, जंगलों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है। जहां आज भी कमजोर नेटवर्क या इंटरनेट की समस्या बनी रहती है, वहां हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल पेमेंट, वीडियो कॉलिंग और छोटे कारोबारों को भी मजबूती मिलेगी।

    LEO सैटेलाइट धरती के अपेक्षाकृत करीब रहते हैं, जिससे इंटरनेट सिग्नल तेजी से ट्रांसफर होता है और नेटवर्क में देरी काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की इंटरनेट तकनीक माना जा रहा है। वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और लाइव कम्युनिकेशन जैसी सेवाएं भी इससे ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकती हैं।

    बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कई स्तरों पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और कंपनी इसे अपने डिजिटल कारोबार के अगले बड़े कदम के रूप में देख रही है। आने वाले समय में यह तकनीक भारत के इंटरनेट सेक्टर में नई प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर सकती है।

    फिलहाल सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरुआती चरण में हैं और इससे जुड़े कई नियम व प्रक्रियाएं अभी पूरी की जानी बाकी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद इसकी कीमतें धीरे-धीरे आम लोगों की पहुंच में आ सकती हैं।

  • तमिलनाडु बना आर्थिक ग्रोथ का नया पावरहाउस, मैन्युफैक्चरिंग से सर्विस सेक्टर तक तेज रफ्तार विकास

    तमिलनाडु बना आर्थिक ग्रोथ का नया पावरहाउस, मैन्युफैक्चरिंग से सर्विस सेक्टर तक तेज रफ्तार विकास

    नई दिल्ली। तमिलनाडु आज भारत की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। राज्य ने मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और एक्सपोर्ट सेक्टर में लगातार मजबूत प्रदर्शन करते हुए आर्थिक विकास की रफ्तार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इसी वजह से इसे देश का एक प्रमुख ग्रोथ इंजन माना जा रहा है।

    हाल के आंकड़ों के अनुसार राज्य ने लगातार दो वर्षों तक डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इसकी कुल अर्थव्यवस्था भी तेजी से बढ़ते हुए लाखों करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है। यह प्रदर्शन बताता है कि तमिलनाडु केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    राज्य की इस सफलता के पीछे कई मजबूत कारण हैं। सबसे बड़ा कारण इसका विविध औद्योगिक आधार है, जहां चेन्नई, कोयंबटूर, होसुर और मदुरै जैसे शहर अलग-अलग उद्योगों के केंद्र के रूप में विकसित हुए हैं। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग में राज्य की मजबूत पकड़ इसे अन्य राज्यों से अलग बनाती है।

    इसके अलावा तमिलनाडु ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी लगातार ध्यान दिया है। बेहतर सड़क नेटवर्क, बंदरगाहों का विस्तार और बिजली आपूर्ति में सुधार ने निवेशकों के लिए माहौल को और आकर्षक बनाया है। यही वजह है कि देश-विदेश की बड़ी कंपनियां यहां निवेश को प्राथमिकता देती हैं।

    शिक्षित और स्किल्ड वर्कफोर्स भी राज्य की बड़ी ताकत है। उच्च शिक्षा में भागीदारी और तकनीकी कौशल के कारण यहां उद्योगों को प्रशिक्षित श्रमिक आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। यह कारक भी औद्योगिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाता है।

    तमिलनाडु इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट के क्षेत्र में भी देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए सेक्टर्स में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    राज्य सरकार का लक्ष्य तमिलनाडु को एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए लगातार निवेश आकर्षित करने और ग्लोबल कंपनियों को जोड़ने पर काम किया जा रहा है। औद्योगिक नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल के कारण राज्य भविष्य में और तेजी से विकास की ओर बढ़ने की क्षमता रखता है।

  • पेट्रोल-डीजल के दाम में नहीं हुआ कोई बदलाव, 7 मई को भी ईंधन कीमतें स्थिर

    पेट्रोल-डीजल के दाम में नहीं हुआ कोई बदलाव, 7 मई को भी ईंधन कीमतें स्थिर

    नई दिल्ली। देशभर में 7 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं देखा गया। लगातार कई दिनों से ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर इसका असर तुरंत दिखाई नहीं दे रहा है।

    भारत में ईंधन की कीमतें रोजाना आधार पर तय की जाती हैं, लेकिन हाल के समय में इनमें स्थिरता बनी हुई है। इसका मुख्य कारण वैश्विक बाजार में संतुलन और घरेलू टैक्स संरचना का स्थिर रहना माना जा रहा है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों के आधार पर रेट तय करती हैं, लेकिन फिलहाल बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं।

    राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले की तरह ही बनी हुई हैं। वहीं मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बनी हुई हैं। डीजल की कीमतें अधिकतर शहरों में अभी भी 100 रुपये के नीचे हैं।

    महानगरों में ईंधन की कीमतों में अंतर टैक्स और परिवहन लागत की वजह से देखने को मिलता है। कुछ शहरों में पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि छोटे शहरों में यह दरें थोड़ी कम बनी हुई हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव कम देखने को मिले हैं। टैक्स में बदलाव के बाद से कीमतें एक सीमित दायरे में स्थिर बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।

    ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और लॉजिस्टिक्स लागत शामिल हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी बदलाव का असर धीरे-धीरे घरेलू कीमतों पर पड़ता है।