Category: Entertainment

  • अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन और अभिनेत्री व संगीतकार सबा आजाद के व्यक्तिगत संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और अटकलें तेजी से फैल रही हैं। पिछले कुछ समय से दोनों कलाकारों के रिश्ते में बदलाव को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन चर्चाओं की मुख्य वजह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आई कुछ कथित तस्वीरें और प्रोफाइल बताई जा रही हैं, जिन्हें लेकर नेटिजन्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर एक नेटवर्किंग ऐप से जुड़े प्रोफाइल की तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं, जिसमें अभिनेता ऋतिक रोशन की तस्वीर और उनके पेशे का विवरण दर्ज है। इन वायरल तस्वीरों के आधार पर कई लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि अभिनेता और सबा आजाद के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, प्रसारित की जा रही इन जानकारियों और तस्वीरों की सत्यता तथा प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

    ऑनलाइन मंचों पर इन खबरों के सामने आने के बाद प्रशंसकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की ओर से मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां कुछ लोग इन अफवाहों के आधार पर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अभिनेता के कई प्रशंसकों ने उनका बचाव किया है। प्रशंसकों का कहना है कि किसी भी वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालना अनुचित है और संभव है कि यह किसी फर्जी प्रोफाइल या पुरानी जानकारी का परिणाम हो।

    गौरतलब है कि ऋतिक रोशन और सबा आजाद के बीच संबंधों की खबरें पहली बार वर्ष 2021 के अंत में सामने आई थीं। इसके बाद वर्ष 2022 की शुरुआत में दोनों को कई सार्वजनिक स्थलों और कार्यक्रमों में एक साथ देखा गया, जिसके बाद उनके रिश्ते को लेकर आधिकारिक रूप से बातें सामने आईं। दोनों कलाकारों को अक्सर विभिन्न फिल्म समारोहों, पारिवारिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ देखा जाता रहा है, जहां उनकी बॉन्डिंग की काफी सराहना भी की जाती थी।

    ऋतिक रोशन के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2000 में सुजैन खान से विवाह किया था। हालांकि, वर्ष 2014 में दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से अलग होने का निर्णय लिया था। इसके बाद से ही ऋतिक रोशन अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ सबा आजाद भी फिल्म उद्योग का एक जाना-माना नाम हैं, जो अभिनय के साथ-साथ संगीत और रंगमंच के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

    वर्तमान में प्रसारित हो रही इन तमाम अटकलों और सोशल मीडिया दावों पर ऋतिक रोशन या सबा आजाद की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दोनों ही कलाकारों ने इस पूरे विषय पर चुप्पी साध रखी है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सेलिब्रिटीज के व्यक्तिगत जीवन को लेकर अक्सर इस तरह की निराधार अफवाहें उड़ती रहती हैं और जब तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई बयान नहीं आता, तब तक इन खबरों को महज एक अटकलबाजी ही माना जाना चाहिए।

  • मिस वर्ल्ड की ग्लैमरस छवि बदलकर ऐश्वर्या राय को बनाया ताल की मानसी, निर्देशक सुभाष घई ने पुरानी यादें कीं ताजा

    मिस वर्ल्ड की ग्लैमरस छवि बदलकर ऐश्वर्या राय को बनाया ताल की मानसी, निर्देशक सुभाष घई ने पुरानी यादें कीं ताजा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शुमार संगीत आधारित रोमांटिक ड्रामा फिल्म ताल के प्रदर्शन को 27 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। इस अवसर पर फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक सुभाष घई ने फिल्म निर्माण और कलाकारों के चयन से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने संस्मरण साझा किए हैं। उन्होंने विशेष रूप से अभिनेत्री ऐश्वर्या राय और अभिनेता अक्षय खन्ना की कास्टिंग के दौरान आई चुनौतियों और अनुभवों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

    सुभाष घई ने बताया कि फिल्म में मुख्य महिला किरदार मानसी के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो न केवल अभिनय में निपुण हो बल्कि जटिल नृत्य शैलियों को भी सहजता से पर्दे पर उतार सके। उस समय ऐश्वर्या राय मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद सौंदर्य और ग्लैमर जगत में एक स्थापित पहचान बना चुकी थीं। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सरोज खान ने सुभाष घई को इस भूमिका के लिए ऐश्वर्या राय का नाम सुझाया था।

    फिल्म में ऐश्वर्या राय के किरदार को प्रामाणिक बनाने के लिए सुभाष घई ने उनकी सौंदर्य प्रतियोगिता वाली छवि को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया था। उन्होंने अभिनेत्री से कहा था कि फिल्म के शुरुआती हिस्से में उन्हें बिना किसी मेकअप के एक साधारण और सहज ग्रामीण युवती के रूप में दिखना होगा। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य उनकी ग्लैमरस छवि को हटाकर दर्शक का ध्यान पूरी तरह उनके अभिनय और किरदार की गहराई पर केंद्रित करना था।

    फिल्म में मुख्य अभिनेता के रूप में अक्षय खन्ना के चयन का किस्सा भी काफी दिलचस्प है। सुभाष घई के अनुसार, अक्षय खन्ना के पिता और दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना उन्हें अपने साथ लेकर आए थे। अक्षय खन्ना के चेहरे की गंभीरता और उनके अभिनय में मौजूद गहराई को देखते हुए सुभाष घई ने उन्हें इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुन लिया। उस समय अक्षय खन्ना अपने करियर के शुरुआती चरण में थे, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात बड़ा स्टार बना दिया।

    वर्ष 1999 में रिलीज हुई फिल्म ताल न केवल अपनी मनोरम कहानी और शानदार अभिनय के लिए जानी जाती है, बल्कि एआर रहमान द्वारा तैयार किए गए इसके सदाबहार संगीत ने भी इतिहास रचा था। अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के अभिनय से सजी इस फिल्म को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी भारी व्यावसायिक सफलता मिली थी। फिल्म के गीत आज भी दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

    इस कल्ट क्लासिक फिल्म के 27 साल पूरे होने के अवसर पर सुभाष घई द्वारा साझा की गई इन यादों ने एक बार फिर हिंदी सिनेमा के उस सुनहरे दौर को ताजा कर दिया है। ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के करियर के लिए यह फिल्म एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी, जिसने उन्हें उद्योग में एक मजबूत पहचान दिलाई।

  • 'कौन हैं आप और कहां जा रहे हैं?' केबीसी में अमिताभ बच्चन ने खोला धर्मेंद्र के घर का बड़ा राज..

    'कौन हैं आप और कहां जा रहे हैं?' केबीसी में अमिताभ बच्चन ने खोला धर्मेंद्र के घर का बड़ा राज..


    नई दिल्ली। 
    टेलीविज़न के लोकप्रिय ज्ञान आधारित शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन के दौरान भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने प्रिय मित्र और दिवंगत दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद करते हुए एक बेहद भावुक और दिलचस्प संस्मरण साझा किया। उन्होंने शो में धर्मेंद्र के सरल स्वभाव, आतिथ्य सत्कार और उनके विशाल हृदय की जमकर सराहना की।

    अमिताभ बच्चन ने बताया कि धर्मेंद्र का निवास स्थान हमेशा हर किसी के लिए खुला रहता था। उनके घर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत बेहद अपनेपन और आत्मीयता के साथ किया जाता था। धर्मेंद्र की इसी दरियादिली का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब खुद धर्मेंद्र को भी अपने घर में आने-जाने वाले मेहमानों की पूरी संख्या का अंदाजा नहीं रहता था।

    संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि एक बार धर्मेंद्र ने अपने ही घर की सीढ़ियों पर चार-पांच अनजान लोगों को चढ़ते हुए देखा। जब उन्होंने उत्सुकता से उनसे पूछा कि वे कौन हैं और कहां जा रहे हैं, तो उन लोगों ने बड़ी सादगी से जवाब दिया कि वे गांव से आए हैं। धर्मेंद्र के घर का माहौल ऐसा था जहां कोई भी व्यक्ति बिना किसी हिचकिचाहट के आ-जा सकता था और उनका घर सबके लिए हमेशा खुला रहता था।

    भारतीय सिनेमा में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की जोड़ी को हमेशा से ही गहरी दोस्ती की मिसाल माना जाता रहा है। यद्यपि धर्मेंद्र फिल्म उद्योग में अमिताभ बच्चन से वरिष्ठ थे, लेकिन दोनों के बीच का संबंध बेहद आत्मीय रहा। दोनों कलाकारों ने कई यादगार फिल्मों में एक साथ अभिनय किया है। विशेष रूप से 1975 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ में जय और वीरू के उनके किरदारों ने दर्शकों के दिलों पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि आज भी सच्ची दोस्ती की मिसाल देने के लिए इन्हीं किरदारों का नाम लिया जाता है।

    गौरतलब है कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन नवंबर 2025 में हुआ था। उनके जाने से न केवल उनका परिवार, बल्कि संपूर्ण फिल्म उद्योग और उनके करोड़ों प्रशंसक गहरे शोक में डूब गए थे। हिंदी सिनेमा के कई बड़े कलाकार धर्मेंद्र को अपने अभिभावक और पिता समान मानते थे, और उनकी कमी आज भी पूरी इंडस्ट्री में महसूस की जाती है।

    हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिलीज हुई फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में भी धर्मेंद्र के पुत्र और अभिनेता सनी देओल ने अपने पिता को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की है। विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस भावुक फिल्म की शुरुआत में ही महान अभिनेता को याद किया गया है।

    अमिताभ बच्चन द्वारा शो के दौरान साझा की गई यह याद दर्शाती है कि धर्मेंद्र केवल पर्दे पर ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक महान और बड़े दिल वाले इंसान थे, जिनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में तरोताजा हैं।

  • सनी देओल की बंटवारा 1947 में विभाजन की कहानी, भावनाएं और एक्शन साथ-साथ नजर आते हैं

    सनी देओल की बंटवारा 1947 में विभाजन की कहानी, भावनाएं और एक्शन साथ-साथ नजर आते हैं


    नई दिल्ली। 
    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के विभाजन की त्रासदी और मानवीय संवेदनाओं को उजागर करने वाली नई बॉलीवुड फिल्म बंटवारा 1947 सिनेमाघरों में दर्शकों के सामने आ चुकी है। प्रसिद्ध निर्देशक राजकुमार संतोषी के कुशल निर्देशन में तैयार की गई यह फिल्म भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौर पर आधारित एक बेहद संवेदनशील कहानी प्रस्तुत करती है। यह फिल्म प्रसिद्ध नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई’ पर आधारित है और इसमें ऐतिहासिक परिदृश्य के साथ मानवीय रिश्तों की मिसाल पेश की गई है।

    कहानी की शुरुआत 14 अगस्त 1947 के घटनाक्रम से होती है, जब देश की आजादी की घोषणा के समय मेरठ में रहने वाला सिकंदर मिर्जा का परिवार जश्न की तैयारियों में जुटा होता है। हालांकि, अचानक भड़की सांप्रदायिक हिंसा के कारण मिर्जा को अपने परिवार की सुरक्षा के लिए लाहौर पलायन करने का कठिन फैसला लेना पड़ता है। लाहौर पहुंचने पर शहर की राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच उन्हें हबीब अंसारी नामक मित्र का सहयोग मिलता है, जिनकी मदद से मिर्जा परिवार को रहने के लिए एक हवेली मिल जाती है।

    इस हवेली में पहले से ही एक बुजुर्ग हिंदू महिला रह रही होती है। फिल्म का मुख्य ताना-बाना इसी बुजुर्ग महिला, जिन्हें परिवार प्यार से माई कहकर संबोधित करता है, और मुस्लिम मिर्जा परिवार के बीच विकसित होते आत्मीय संबंधों के इर्द-गिर्द बुना गया है। विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक दबाव के बावजूद सिकंदर मिर्जा उस बुजुर्ग महिला की रक्षा का जिम्मा उठाते हैं। यह कहानी दर्शकों को बेहद भावुक करती है और स्क्रीन पर विभाजन का दर्द तथा मानवीय आत्मीयता को बखूबी उकेरा गया है।

    अभिनय के दृष्टिकोण से मुख्य कलाकार सनी देओल अपने चिरपरिचित तेवर और संजीदा अंदाज में नजर आए हैं। उन्होंने अपने किरदार के माध्यम से जहां एक तरफ गुस्सा और दृढ़ता दिखाई है, वहीं माई के प्रति सुरक्षात्मक रवैया भी बखूबी निभाया है। लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी अपनी प्रभावी भूमिका से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। दोनों ही कलाकारों का अभिनय कहानी को एक मजबूती प्रदान करता है।

    वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी ने फिल्म में माई का केंद्रीय किरदार निभाया है। बंटवारे की हिंसा में अपनों को खोने का दुख और अपना घर न छोड़ने की जिद्द को उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से जीवित कर दिया है। इसके अलावा, अली फजल ने एक शायर और शांतिप्रिय नागरिक के रूप में प्रभावशाली काम किया है, जो हर विषम परिस्थिति में अमन की बात करता है। वहीं नकारात्मक भूमिका में नजर आए अभिमन्यु सिंह ने अपने सशक्त प्रदर्शन से खलनायक के रूप में गहरी छाप छोड़ी है।

    फिल्म में मुख्य अभिनेता के पुत्र करण देओल भी नजर आते हैं, हालांकि उनका स्क्रीन टाइम अपेक्षाकृत कम रखा गया है। फिल्म का पहला हाफ जहां कहानी की पृष्ठभूमि और भावुक लम्हों को स्थापित करता है, वहीं दूसरे हाफ में सनी देओल का ट्रेडमार्क एक्शन देखने को मिलता है। एक्शन दृश्यों में बग्गी की दौड़ और दुश्मनों से मुकाबले के सीन शामिल हैं, जो एक्शन प्रेमियों को पसंद आ सकते हैं।

    सिनेमाई निर्माण और प्रस्तुतीकरण के लिहाज से फिल्म दर्शकों को बोर नहीं होने देती। संवाद अदायगी और पटकथा लेखन में ऐतिहासिक गंभीरता बनाए रखी गई है। विभाजन के उस भयावह दौर को बड़े पर्दे पर एक भावुक और मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में निर्माण टीम पूरी तरह सफल नजर आ रही है।

    कुल मिलाकर, बंटवारा 1947 एक ऐसी सिनेमाई कृति है जो केवल अतीत के जख्मों को याद नहीं दिलाती, बल्कि संकट के समय इंसानियत की मिसाल भी पेश करती है। बेहतरीन अभिनय, मजबूत निर्देशन और एक्शन का संतुलन इसे एक बार देखने लायक फिल्म बनाता है।

  • सच्ची घटनाओं पर आधारित मलयालम क्राइम थ्रिलर फिल्म 'उइर' ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर दर्शकों को खूब भा रही है।

    सच्ची घटनाओं पर आधारित मलयालम क्राइम थ्रिलर फिल्म 'उइर' ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर दर्शकों को खूब भा रही है।

    नई दिल्ली ।डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर शैलियों की फिल्मों को दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। इसी क्रम में जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही मलयालम भाषा की क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘उइर’ दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। सच्ची घटनाओं पर आधारित यह फिल्म अपने अनूठे कथानक और अप्रत्याशित मोड़ों के चलते लगातार ट्रेंडिंग लिस्ट में बनी हुई है।

    यह फिल्म एक पुलिस अधिकारी अनशाद एस. के वास्तविक जीवन के अनुभवों और सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म की पटकथा दर्शकों को शुरुआत से ही बांधे रखती है। कहानी की शुरुआत एक सामान्य ट्रेन यात्रा से होती है, जहां सफर के दौरान परिवार की एक छोटी बच्ची अचानक गायब हो जाती है। इस घटना के बाद दर्शकों को लगता है कि पूरी कहानी बच्ची की खोज के इर्द-गिर्द घूमेगी, लेकिन यहीं से फिल्म एक नया मोड़ लेती है।

    कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, जांच अधिकारियों को एक कुएं में महिला का संदिग्ध शव मिलने की सूचना प्राप्त होती है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की गहन जांच के बाद पुलिस को अहसास होता है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि बेहद सोच-समझकर अंजाम दिया गया हत्याकांड है।

    हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए जब पुलिस जांच का दायरा बढ़ाती है, तो हर चरण पर नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। फिल्म में एक के बाद एक आने वाले मोड़ दर्शकों का सस्पेंस बढ़ाए रखते हैं। जब भी ऐसा प्रतीत होता है कि केस हल हो चुका है, तभी कहानी में आया एक नया मोड़ पूरी जांच प्रक्रिया को एक नई दिशा में मोड़ देता है।

    फिल्म का निर्देशन एम. पद्मकुमार ने किया है, जिन्होंने थ्रिलर जॉनर के तत्वों का बेहद कुशलता से संयोजन किया है। मुख्य भूमिकाओं में सैयामी खेर, रोशन मैथ्यू, दिव्या एम. नायर और विनीत थट्टिल डेविड जैसे कुशल कलाकारों ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। फिल्म की संवाद अदायगी और बैकग्राउंड स्कोर सस्पेंस को और गहरा बनाता है।

    डिजिटल माध्यमों की बढ़ती पहुंच के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में क्षेत्रीय भाषाओं की उत्कृष्ट फिल्मों की लोकप्रियता बढ़ी है। मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरों में भी ओटीटी के माध्यम से दक्षिण भारतीय सिनेमा की थ्रिलर फिल्मों को काफी पसंद किया जा रहा है। हिंदी भाषा में डब होकर उपलब्ध होने के कारण राज्य के दर्शक भी इस फिल्म का पूरा आनंद ले रहे हैं।

    फिल्म समीक्षकों और दर्शकों की ओर से इस फिल्म को मिली-जुली और विचारोत्तेजक प्रतिक्रियाएं मिली हैं। आईएमडीबी पर 6.5 की रेटिंग हासिल करने वाली यह फिल्म अपनी मनोरंजक और कसी हुई पटकथा के कारण इस वीकेंड के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है।

    वर्तमान में जियो हॉटस्टार की टॉप-10 लिस्ट में शामिल यह फिल्म साबित करती है कि वास्तविक घटनाओं पर आधारित यथार्थवादी सिनेमा दर्शकों को आकर्षित करने में पूरी तरह सफल रहता है। सस्पेंस और थ्रिलर कंटेंट के शौकीनों के लिए यह एक देखने योग्य फिल्म है।

  • संजय दत्त स्टारर पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म 'आखिरी सवाल' सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है।

    संजय दत्त स्टारर पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म 'आखिरी सवाल' सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है।

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त की हालिया रिलीज पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म आखिरी सवाल अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के लिए उपलब्ध हो गई है। सिनेमाघरों में मई महीने के दौरान प्रदर्शित होने के बाद इस फिल्म ने आखिरकार ओटीटी का रुख किया है। जो दर्शक सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखने से चूक गए थे, वे अब इसे घर बैठे डिजिटल माध्यम पर देख सकते हैं।

    यह बहुप्रतीक्षित फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म लायनगेट्स प्ले पर 13 अगस्त से स्ट्रीम की जा रही है। प्लेटफॉर्म ने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर फिल्म का आधिकारिक प्रोमो शेयर करते हुए इसकी डिजिटल स्ट्रीमिंग की घोषणा की है। फिल्म की विषय-वस्तु तीखे सामाजिक और राजनीतिक सवालों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसको लेकर दर्शकों में उत्सुकता देखी जा रही है।

    फिल्म की कहानी मुख्य रूप से एक प्रोफेसर और उनके एक बागी छात्र के बीच के वैचारिक मतभेदों और संवाद पर आधारित है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास और प्रासंगिकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर तार्किक चर्चा दिखाई गई है। कहानी में छात्र द्वारा उठाए गए पांच मुख्य सवालों और प्रोफेसर द्वारा दिए जाने वाले जवाबों को बेहद नाटकीय अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।

    मुख्य स्टारकास्ट की बात करें तो संजय दत्त ने फिल्म में प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी की मुख्य भूमिका निभाई है, जबकि युवा अभिनेता नमाशी चक्रवर्ती ने छात्र की भूमिका में उनका सामना किया है। इनके अलावा नीतू चंद्रा, आयूषी चतुर्वेदी, त्रिधा चौधरी और अर्चना आर्या जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म का निर्देशन अभिजीत वारंग ने किया है।

    इस फिल्म का संगीत मॉन्टी शर्मा द्वारा तैयार किया गया है, जबकि इसके गीत प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। सिनेमाघरों में अपनी रिलीज के दौरान बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म व्यावसायिक रूप से खास कमाल नहीं दिखा सकी थी और इसका कुल घरेलू बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग तीन करोड़ रुपये के आसपास ही सीमित रहा था।

    व्यावसायिक असफलताओं के बावजूद, फिल्म को समीक्षकों और डिजिटल दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। संजय दत्त के अभिनय और फिल्म के गंभीर विषय की सराहना की जा रही है। ऑनलाइन रेटिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी दर्शकों ने इसे विचारोत्तेजक और संजय दत्त के दमदार अभिनय से सजी फिल्म करार दिया है।

    मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों में डिजिटल कंटेंट और ओटीटी फिल्मों को लेकर युवाओं के बीच खासा क्रेज देखा जाता है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों को राज्य के दर्शक हमेशा से गंभीरता से देखते आए हैं, ऐसे में मध्य प्रदेश के सिनेमा प्रेमियों के बीच भी इस फिल्म की ओटीटी रिलीज को लेकर चर्चा बनी हुई है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म को बड़ा दर्शक वर्ग मिलेगा। संजय दत्त के फैंस के लिए यह फिल्म उनके अभिनय का एक अलग रूप देखने का शानदार मौका है, जहां वे एक गंभीर और बौद्धिक भूमिका में नजर आ रहे हैं।

  • अभिनेता यश ने फिल्म टॉक्सिक के दौरान कियारा आडवाणी के समर्पण और प्रेग्नेंसी में शूटिंग अनुभव की सराहना की।

    अभिनेता यश ने फिल्म टॉक्सिक के दौरान कियारा आडवाणी के समर्पण और प्रेग्नेंसी में शूटिंग अनुभव की सराहना की।

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा जगत की बहुप्रतीक्षित आगामी फिल्म टॉक्सिक के एल्बम लॉन्च कार्यक्रम के दौरान मंच पर फिल्म के प्रमुख कलाकारों ने अपने काम करने के अनुभवों को साझा किया है। इस विशेष अवसर पर अभिनेता यश ने अपनी सह-कलाकार कियारा आडवाणी के पेशे के प्रति समर्पण और कठिन परिस्थितियों में भी काम करने के उनके जज्बे की जमकर सराहना की।

    यश ने बताया कि जब कियारा आडवाणी इस फिल्म की शूटिंग कर रही थीं, तब वह गर्भवती थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने काम में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं आने दी और पूरे समर्पण के साथ 100 प्रतिशत योगदान दिया। फिल्म के सेट पर उनके किरदार की शारीरिक और भावनात्मक मांगें बेहद चुनौतीपूर्ण थीं, जिन्हें उन्होंने पूरी कुशलता के साथ पूरा किया।

    फिल्म के निर्माण के दौरान बारिश से जुड़े जटिल दृश्यों और कठिन शेड्यूल की शूटिंग की गई। यश ने स्वीकार किया कि वह और निर्देशक गीतू मोहनदास, कियारा की स्थिति को लेकर शुरुआत में काफी चिंतित थे। सेट पर मौजूद पूरी टीम सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अत्यंत सतर्क थी और एक सुरक्षा कवच या बॉडीगार्ड की तरह उनका ध्यान रखती थी।

    कियारा आडवाणी ने भी अपनी इस विशेष यात्रा के बारे में बात करते हुए पूर्व में बताया था कि उन्होंने गर्भावस्था के सातवें महीने तक फिल्म की शूटिंग जारी रखी थी। शूटिंग के कठिन पलों और भावनात्मक दृश्यों के दौरान वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए लगातार काम में जुटी रहीं। निर्माता और निर्देशक ने उनकी स्थिति को समझते हुए सेट पर हर संभव सुविधा सुनिश्चित की थी।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के सिनेमा प्रेमियों और प्रशंसकों के बीच इस फिल्म को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों के युवाओं में यश और कियारा की इस नई ऑन-स्क्रीन जोड़ी की केमिस्ट्री को बड़े पर्दे पर देखने के लिए काफी उत्सुकता है। खेल और मनोरंजन जगत से जुड़ी ऐसी खबरें प्रदेश के प्रशंसकों को लगातार आकर्षित करती हैं।

    फिल्म टॉक्सिक में यश और कियारा आडवाणी के अलावा तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी, नयनतारा और रुकमणि वसंत जैसे कई प्रमुख कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस भव्य और बहुभाषी फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है, जो अपने अनूठे विषय और शानदार स्टार कास्ट के कारण लगातार चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

    फिल्म की रिलीज डेट को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे। पूर्व में यह फिल्म मार्च के महीने में प्रदर्शित होने वाली थी, लेकिन मध्य पूर्व के वैश्विक हालातों और कुछ तकनीकी कारणों के चलते इसकी रिलीज को आगे बढ़ाना पड़ा था। अब तमाम तैयारियों के बाद यह एक्शन-ड्रामा फिल्म 26 अगस्त को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    कलाकारों के इस पेशेवर रवैये और परस्पर सहयोग की सराहना पूरे फिल्म उद्योग में हो रही है। प्रशंसकों को उम्मीद है कि यश का दमदार अभिनय और कियारा आडवाणी का समर्पित प्रदर्शन बड़े पर्दे पर एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव प्रदान करेगा।

  • यश की 'टॉक्सिक' को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी, 194 मिनट का रनटाइम और A सर्टिफिकेट

    यश की 'टॉक्सिक' को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी, 194 मिनट का रनटाइम और A सर्टिफिकेट


    नई दिल्ली। कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को लेकर दर्शकों का इंतजार अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस एक्शन थ्रिलर फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC से A सर्टिफिकेट मिल गया है। इसके साथ ही फिल्म के रनटाइम की आधिकारिक जानकारी भी सामने आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म करीब 194 मिनट यानी 3 घंटे 14 मिनट लंबी है। फिल्म को 13 अगस्त को CBFC के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय से प्रमाणित किया गया है।

    ‘A’ सर्टिफिकेट का मतलब है कि फिल्म को केवल वयस्क दर्शक ही सिनेमाघरों में देख सकेंगे। वहीं तीन घंटे से ज्यादा की अवधि ने भी फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि केवल लंबे रनटाइम या A सर्टिफिकेट के आधार पर फिल्म की सामग्री के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। इतना जरूर है कि फिल्म को लेकर मेकर्स ने शुरुआत से ही इसे आम मसाला फिल्म से अलग और वयस्क दर्शकों के लिए तैयार किए गए डार्क एक्शन ड्रामा के रूप में पेश किया है।

    फिल्म की कहानी आजादी के बाद के गोवा की पृष्ठभूमि में रखी गई है। कहानी ऐसे दौर को दिखाती है जहां हिंसा सत्ता लालच नफरत और अपराध का गहरा असर दिखाई देता है। इसी माहौल में एक गैंगस्टर अपने जीवन के फैसलों और उनके परिणामों से जूझता नजर आता है। कहानी में वफादारी सही और गलत के बीच संघर्ष तथा खुद को बदलने की कोशिश जैसे पहलू अहम बताए गए हैं। यानी ‘टॉक्सिक’ में सिर्फ एक्शन ही नहीं बल्कि किरदारों के भीतर चलने वाली जंग को भी प्रमुखता दी गई है।

    फिल्म के ट्रेलर ने यश के किरदार को लेकर पहले ही जबरदस्त चर्चा पैदा कर दी है। यश फिल्म में राया नाम के किरदार में नजर आ रहे हैं। ट्रेलर में उनका अंदाज बेहद आक्रामक और खतरनाक दिखाई देता है। सत्ता और अपनी ताकत के नशे में डूबा यह किरदार अपने आसपास के लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करता है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है वैसे-वैसे उसके रिश्तों और फैसलों का असर भी सामने आता है।

    ‘टॉक्सिक’ की एक और बड़ी खासियत इसकी स्टारकास्ट है। फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी नयनतारा तारा सुतारिया हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म को कन्नड़ और अंग्रेजी में तैयार किया गया है और इसे हिंदी तमिल तेलुगु तथा मलयालम समेत कई भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी है। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर रवि बसरूर से जुड़ा है जबकि इसके बड़े एक्शन सीक्वेंस पर भी खास काम किया गया है।

    फिल्म की रिलीज डेट भी कई बार बदली जा चुकी है। अलग-अलग कारणों से इसकी रिलीज आगे खिसकती रही और अब मेकर्स ने 26 अगस्त 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज की तारीख तय की है। ऐसे में CBFC से सर्टिफिकेट मिलने के बाद फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि यश का यह डार्क और बड़े पैमाने वाला अवतार बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को कितना प्रभावित करता है।

  • सालों तक आरोपों और जांच के बीच रहीं रिया चक्रवर्ती, Karan Johar के शो में बोलीं- अब नहीं चाहिए ट्रेटर का टैग

    सालों तक आरोपों और जांच के बीच रहीं रिया चक्रवर्ती, Karan Johar के शो में बोलीं- अब नहीं चाहिए ट्रेटर का टैग


    नई दिल्ली। अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती एक बार फिर अपने बीते मुश्किल दौर को लेकर चर्चा में हैं। रियलिटी शो द ट्रेटर्स सीजन 2 में नजर आ रहीं रिया ने होस्ट करण जौहर के सामने अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कीं। शो में जब उनसे पूछा गया कि वह इनोसेंट बनना पसंद करेंगी या ट्रेटर तो रिया ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि वह इनोसेंट रहना चाहेंगी। उनके इस जवाब में साल 2020 के बाद उनकी जिंदगी में आए बदलाव और लंबे समय तक चले विवाद का दर्द साफ नजर आया।

    करण जौहर के सवाल का जवाब देते हुए रिया ने कहा कि इसी साल उन्हें क्लीन चिट मिली है और इसी साल लोगों को पता चला है कि वह बेगुनाह हैं। उन्होंने कहा कि वह काफी लंबे समय तक शक के घेरे में रही हैं और अब उन्हें यह स्थिति पसंद नहीं है। रिया के मुताबिक उन्होंने कई साल तक ऐसा दौर देखा है जब लोगों की नजर में उन्हें संदेह की नजर से देखा जाता रहा। द ट्रेटर्स के खेल से जुड़े एक सामान्य सवाल के दौरान रिया का यह जवाब उनकी निजी जिंदगी के बेहद संवेदनशील अध्याय की तरफ इशारा करता नजर आया।

    सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद साल 2020 में रिया चक्रवर्ती देशभर में चर्चा के केंद्र में आ गई थीं। सुशांत की मौत के मामले की जांच के साथ ड्रग्स से जुड़े मामले में भी रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती से पूछताछ हुई थी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग्स मामले में दोनों को गिरफ्तार किया था। रिया को जेल में भी समय बिताना पड़ा था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी पर भी काफी असर पड़ा।

    समय के साथ सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI तक पहुंची। 2025 में CBI ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए इसे आत्महत्या का मामला माना और किसी साजिश या आपराधिक भूमिका का सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई। इस रिपोर्ट के बाद रिया और उनके परिवार को मामले में बड़ी राहत मिली। हालांकि ड्रग्स से जुड़े मामले की कानूनी स्थिति अलग थी और उसे सुशांत की मौत की जांच से अलग समझना जरूरी है।

    रिया इससे पहले भी कई मौकों पर उस दौर के अपने अनुभवों के बारे में बात कर चुकी हैं। उन्होंने बताया है कि सुशांत की मौत के बाद उन्हें मीडिया ट्रायल और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। जेल जाने और लंबे समय तक काम से दूर रहने का असर भी उनकी जिंदगी पर पड़ा। रिया ने अपने पुराने इंटरव्यू में मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े प्रभाव को लेकर भी बात की थी।

    अब द ट्रेटर्स सीजन 2 में रिया एक बिल्कुल अलग माहौल में दिखाई दे रही हैं। यह रियलिटी शो रणनीति शक और भरोसे के खेल पर आधारित है। इसमें कंटेस्टेंट्स को इनोसेंट्स और ट्रेटर्स की भूमिका में बांटा जाता है। इनोसेंट्स को छिपे हुए ट्रेटर्स को पहचानकर उन्हें गेम से बाहर करना होता है जबकि ट्रेटर्स अपनी पहचान छिपाकर दूसरे खिलाड़ियों के खिलाफ रणनीति बनाते हैं।

    रिया का इनोसेंट बनने की इच्छा जताना इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि यह उनके वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ा हुआ महसूस हुआ। करण जौहर के सामने उन्होंने जिस तरह अपने अतीत का जिक्र किया उससे साफ हुआ कि सालों तक चले विवाद और शक का दौर उनकी यादों में आज भी गहरा असर छोड़ता है। हालांकि अब वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने और नए काम के जरिए अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। द ट्रेटर्स 2 में उनकी मौजूदगी इसी नए दौर की ओर इशारा करती है।

  • 3 फीट का कद, हौसला आसमान से ऊंचा! KBC 18 में छाए डॉ. गणेश बरैया की कहानी सुन भावुक हुए लोग

    3 फीट का कद, हौसला आसमान से ऊंचा! KBC 18 में छाए डॉ. गणेश बरैया की कहानी सुन भावुक हुए लोग


    नई दिल्ली। अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति 18 में इस बार हॉट सीट पर पहुंचे डॉ. गणेश बरैया ने अपने खेल से ज्यादा अपनी जिंदगी की कहानी से लोगों का ध्यान खींचा। गुजरात के भावनगर जिले के गोरखी गांव से आने वाले गणेश का कद भले ही करीब 3 फीट है लेकिन उनके हौसले और संघर्ष की कहानी किसी बड़े प्रेरणादायक किरदार से कम नहीं है। KBC 18 के हालिया एपिसोड में उन्होंने अपने बचपन से लेकर डॉक्टर बनने तक के सफर के कई ऐसे किस्से साझा किए जिन्हें सुनकर दर्शक भावुक हो गए।

    गणेश बरैया जन्म से ड्वार्फिज्म की चुनौती से जूझते रहे हैं और उनके शरीर का 72 प्रतिशत हिस्सा लोकोमोटर डिसेबिलिटी से प्रभावित है। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई में कभी अपनी शारीरिक स्थिति को बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल किए और साल 2018 में NEET परीक्षा भी पास की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दिव्यांग कोटे के तहत मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की थी। हालांकि डॉक्टर बनने की उनकी राह इतनी आसान नहीं थी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से उनकी शारीरिक अक्षमता को लेकर MBBS में प्रवेश पर आपत्ति जताई गई थी।

    इसके बाद गणेश के स्कूल प्रिंसिपल डॉ. दलपत कटारिया उनके साथ मजबूती से खड़े हुए। मामला अदालत तक पहुंचा और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से गणेश के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद 2019 में उन्हें भावनगर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला और उन्होंने MBBS की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन शिक्षकों और दोस्तों के सहयोग से उन्होंने अपनी मंजिल हासिल की।

    गणेश की जिंदगी का सबसे भावुक अध्याय उनके बचपन से जुड़ा है। उन्होंने KBC में बताया कि जब वह छोटे थे तब सर्कस से जुड़े कुछ लोग उनके घर पहुंचे थे। उनके पिता को गणेश को अपने साथ ले जाने के बदले 5 लाख रुपये देने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उनके पिता ने पैसों के बजाय बेटे की पढ़ाई और सम्मान को चुना। इस घटना की पुष्टि पहले की रिपोर्टों में भी हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गणेश करीब 10 साल के थे जब एक सर्कस मंडली ने उन्हें खरीदने के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की थी। उनके पिता ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और इसके बाद गणेश की सुरक्षा को लेकर और भी सतर्क रहे।

    गणेश बताते हैं कि उनकी बहनें उन्हें गोद में उठाकर स्कूल ले जाती थीं और उनके पिता उन्हें कंधे पर बैठाकर पढ़ने भेजते थे। परिवार के इसी भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। आज वही गणेश भावनगर के अस्पताल में डॉक्टर के तौर पर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम कर चुके हैं और अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़े काम में सक्रिय रहे हैं।

    KBC 18 में गणेश ने फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट चैलेंज जीतकर हॉट सीट तक अपनी जगह बनाई। उन्होंने शुरुआती सवालों का सही जवाब देते हुए 3 लाख रुपये के सवाल तक का सफर तय किया लेकिन उस समय तक उनकी सभी लाइफलाइन खत्म हो चुकी थीं। सवाल का सही जवाब नहीं दे पाने के कारण उनकी जीती हुई रकम घटकर 25 हजार रुपये रह गई और उनकी KBC यात्रा वहीं समाप्त हो गई।

    गणेश बरैया की कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी इंसान की पहचान उसके कद या शारीरिक स्थिति से नहीं बल्कि उसके हौसले और काम से होती है। जिस बच्चे को कभी सर्कस में भेजने के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की गई थी आज वही बच्चा डॉक्टर बनकर मरीजों की जिंदगी बचाने के काम में जुटा है। KBC की हॉट सीट पर गणेश की मौजूदगी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सपनों की कोई ऊंचाई नहीं होती और मजबूत इरादों के सामने मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी आसान हो सकता है।