Category: Entertainment

  • अमिताभ बच्चन का बड़ा एलान: अब संडे को 'जलसा' के बाहर नहीं दिखेगी प्रशंसकों की भीड़, महानायक ने कहा- अपनी एनर्जी बचाकर रखें

    अमिताभ बच्चन का बड़ा एलान: अब संडे को 'जलसा' के बाहर नहीं दिखेगी प्रशंसकों की भीड़, महानायक ने कहा- अपनी एनर्जी बचाकर रखें


    नई दिल्ली।भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ परंपराएं ऐसी हैं, जो केवल एक रस्म नहीं बल्कि भावना बन चुकी हैं। इन्हीं में से एक है हर रविवार की शाम मुंबई के ‘जलसा’ बंगले के बाहर उमड़ने वाला वह जनसैलाब, जो अपने प्रिय महानायक अमिताभ बच्चन की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करता है।
    पिछले कई दशकों से यह सिलसिला बिना रुके चला आ रहा है कि बिग बी अपने घर के गेट पर आते हैं, हाथ हिलाकर फैंस का अभिवादन करते हैं और उनके प्यार का शुक्रिया अदा करते हैं। लेकिन हाल ही में जो खबर आई है, उसने हजारों प्रशंसकों को मायूस कर दिया है। बिग बी ने खुद इस बात का संकेत दिया है कि बरसों से चली आ रही यह “संडे परंपरा” अब टूटने के कगार पर है या कम से कम इसमें एक बड़ा विराम लगने वाला है।

    अमिताभ बच्चन केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत ब्लॉग और टम्बलर Tumblr पर भी अपने फैंस से सीधा संवाद करते हैं। अपनी हालिया पोस्ट में उन्होंने एक ऐसी जानकारी साझा की जिसने सबको चौंका दिया।

    अमिताभ ने लिखा कि काम का दबाव और कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण अब संडे का वह ब्रेक लेना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने बड़े ही भावुक शब्दों में अपनी असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि, “काम कुछ जोश के साथ चल रहा है… लेकिन एक लेकिन आ जाता है। संडे का ब्रेक लेना अब जरूरी है। अफसोस की बात है कि जलसा के गेट पर अब मुलाकात नहीं होगी। उन्होंने अपने फैंस से अपील की कि वे दूर-दराज से आने वाली अपनी ऊर्जा और समय बचाकर रखें और सही समय आने पर वे फिर से मिलेंगे।

    इस खबर के बीच एक सुखद पहलू यह भी सामने आया कि अमिताभ बच्चन भले ही भीड़ से न मिल पा रहे हों, लेकिन वे अपने करीबियों और पड़ोसियों का ख्याल रखना नहीं भूलते। हाल ही में उनके पड़ोसी निर्मित जेसरानी ने जब उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने की इच्छा जताई, तो सुपरस्टार ने न केवल उन्हें अपने घर आमंत्रित किया, बल्कि उनके साथ समय भी बिताया। निर्मित ने बताया कि उनके लिए 8 फरवरी का दिन ऐतिहासिक बन गया जब बिग बी ने उन्हें ऑटोग्राफ दिया और अपनी फोटो वाली एक टी-शर्ट भेंट की। शाम 5 बजे जलसा में हुई इस खास मुलाकात ने यह साबित कर दिया कि महानायक का अपने चाहने वालों के प्रति स्नेह आज भी उतना ही गहरा है।

    हालांकि, आम प्रशंसकों के लिए रविवार का दिन अब पहले जैसा नहीं रहेगा। जलसा के बाहर वह गेट, जो हर रविवार को किसी मंदिर के कपाट की तरह खुलता था, अब बंद रहेगा। बिग बी ने अपने इस फैसले के पीछे बढ़ती उम्र, काम की थकान और शांति की तलाश को मुख्य कारण बताया है। उनके इस संदेश के बाद सोशल मीडिया पर उनके फैंस उनकी सेहत और सलामती की दुआएं कर रहे हैं, इस उम्मीद में कि जल्द ही वह रविवार फिर आएगा जब महानायक अपनी बालकनी से मुस्कराते हुए हाथ हिलाएंगे।

  • सिनेमा या सियासी हथियार? केरल स्टोरी 2 के ट्रेलर पर भड़के प्रकाश राज और अनुराग कश्यप, सीएम विजयन ने भी दी तीखी प्रतिक्रिया!

    सिनेमा या सियासी हथियार? केरल स्टोरी 2 के ट्रेलर पर भड़के प्रकाश राज और अनुराग कश्यप, सीएम विजयन ने भी दी तीखी प्रतिक्रिया!


    नई दिल्ली :भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेहतरीन अदाकारी के साथ-साथ अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सत्ता और सिस्टम को आईना दिखाने वाले प्रकाश राज ने इस बार ‘द केरल स्टोरी 2’ को लेकर छिड़े विवाद में अपनी एंट्री दर्ज कराई है।
    दक्षिण भारतीय फिल्मों से लेकर बॉलीवुड तक अपनी धाक जमाने वाले इस कलाकार ने फिल्म के कंटेंट पर सवाल उठाते हुए एक ऐसा सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया है जिसने इंटरनेट की दुनिया में हलचल मचा दी है। प्रकाश राज उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जो ट्रोलिंग की परवाह किए बिना अपनी बात रखने का साहस रखते हैं और उनके हालिया X पूर्व में ट्विटर पोस्ट ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है।

    विवाद की असली जड़ विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और कामाख्या नारायण सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ का वह ट्रेलर है जिसमें एक दृश्य दिखाया गया है कि कैसे एक मुस्लिम परिवार एक व्यक्ति को जबरन ‘बीफ’ खिला रहा है। 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म को लेकर जहां एक पक्ष इसे सच्चाई बता रहा है वहीं दूसरी ओर प्रकाश राज ने रविवार को केरल की असली तस्वीर पेश करने की कोशिश की।

    उन्होंने अपने अकाउंट पर पोर्क बीफ और मछली जैसे विभिन्न व्यंजनों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि असली द केरल स्टोरी यह है कि कैसे ये तमाम पकवान शाकाहारी ‘सद्या’ के साथ मिल-जुलकर रहते हैं। प्रकाश राज ने संदेश दिया कि केरल की पहचान वहां की विविधता और आपसी भाईचारा है न कि नफरत।

    सिर्फ प्रकाश राज ही नहीं बल्कि जाने-माने फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने भी इस फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी फिल्मों में यथार्थवाद दिखाने के लिए मशहूर अनुराग ने इस फिल्म को पूरी तरह बकवास और प्रोपेगेंडा करार दिया। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया कि भला कोई किसी को इस तरह जबरदस्ती बीफ कैसे खिला सकता है? अनुराग के मुताबिक ऐसी फिल्में समाज में केवल गलत धारणाएं फैलाने का काम करती हैं।

    इस विवाद में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि केरल धार्मिक सद्भाव और सतत विकास की धरती है। उन्होंने जनता से अपील की कि केरल को आतंकवाद के केंद्र के रूप में दिखाने वाली ऐसी कोशिशों और झूठे प्रोपेगेंडा को सिरे से खारिज कर दिया जाए।

    जैसे-जैसे फिल्म की रिलीज डेट करीब आ रही है वैसे-वैसे बॉलीवुड और राजनीति के गलियारों में बहस और तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां फिल्म मेकर्स इसे समाज का आईना बता रहे हैं वहीं दूसरी तरफ प्रकाश राज और अनुराग कश्यप जैसे दिग्गज इसे राज्य की धर्मनिरपेक्ष नींव को कमजोर करने वाली साजिश मान रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विरोध के इन सुरों के बीच ‘द केरल स्टोरी 2’ बॉक्स ऑफिस पर क्या प्रभाव डालती है और दर्शकों का इस पर क्या रुख रहता है।

  • जब माधुरी की आंखों में देख शर्मा गए थे जग्गू दादा: 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में जैकी श्रॉफ ने खोले रोमांस के दिलचस्प राज

    जब माधुरी की आंखों में देख शर्मा गए थे जग्गू दादा: 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में जैकी श्रॉफ ने खोले रोमांस के दिलचस्प राज


    नई दिल्ली :बॉलीवुड के दो दिग्गज सितारे जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित जब एक साथ ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के मंच पर पहुंचे तो यादों का कारवां मानों ठहर सा गया। कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के साथ गुफ्तगू के दौरान जग्गू दादा ने अपनी चिर-परिचित बेबाकी और मासूमियत के साथ माधुरी दीक्षित की जमकर तारीफ की। जैकी ने माधुरी को न केवल एक बेहतरीन अदाकारा बताया बल्कि उन्हें जमीन से जुड़ी हुई एक ऐसी शख्सियत करार दिया जिसकी सादगी का जादू आज भी बरकरार है। बातचीत के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए जैकी ने बताया कि भले ही पर्दे पर उन्होंने कई रोमांटिक किरदार निभाए हों लेकिन असल जिंदगी में वह माधुरी के साथ रोमांटिक सीन फिल्माते समय बुरी तरह शर्माया करते थे।

    यादों के झरोखे को खोलते हुए माधुरी दीक्षित ने अपनी पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात मशहूर फिल्म ‘कर्मा’ के सेट पर हुई थी। उस वक्त माधुरी फिल्म इंडस्ट्री में नई थीं और फिल्म में एक छोटे से गाने का हिस्सा थीं। माधुरी ने हंसते हुए याद किया कि कैसे अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ एक कोने में बैठकर उन्हें ‘तिरछी नजरों’ से देख रहे थे।

    उस समय की अपनी घबराहट को याद करते हुए माधुरी ने बताया कि दो बड़े स्टार्स के सामने वह काफी नर्वस महसूस कर रही थीं। वहीं दूसरी ओर जैकी श्रॉफ ने बताया कि उन्होंने माधुरी के बारे में सबसे पहले मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान से सुना था। सरोज खान ने ही सुभाष घई को माधुरी के हुनर और खूबसूरती के बारे में बताते हुए उन्हें कास्ट करने की सलाह दी थी।

    शो के दौरान जब कपिल शर्मा ने चुटकी लेते हुए जैकी से पूछा कि वे रिहर्सल छोड़कर माधुरी को क्यों निहारते रहते थे तो जग्गू दादा ने बेहद दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया कि कई बार आपको माधुरी जैसी शख्सियत के सामने खुद को भूलना पड़ता है।

    उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी याद दिलाया कि माधुरी ने उनके साथ हर तरह के रिश्ते निभाए हैं-वे पर्दे पर उनकी प्रेमिका पत्नी और यहाँ तक कि ‘संगीत’ फिल्म में उनकी सास का किरदार भी निभा चुकी हैं। जैकी ने स्वीकार किया कि माधुरी की आंखों में देखकर बात करना या उनके साथ रोमांटिक गाने शूट करना उनके लिए सबसे कठिन काम होता था।

    जैकी श्रॉफ ने अपनी झिझक का कारण बताते हुए कहा कि वह कभी भी पर्दे पर निजी भावनाओं को दिखाने के आदी नहीं थे। उनके अनुसार फिल्म भले ही काल्पनिक हो लेकिन कुछ भावनाएं और इमोशन्स बहुत व्यक्तिगत होते हैं जो दिल में बसते हैं।

    ऐसे में माधुरी जैसी प्रभावशाली अभिनेत्री के सामने अभिनय करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। जैकी और माधुरी की यह जुगलबंदी न केवल दर्शकों के लिए मनोरंजन लेकर आई बल्कि बॉलीवुड के उस सुनहरे दौर की यादें भी ताजा कर गई जहाँ सम्मान और सादगी ही रिश्तों की बुनियाद हुआ करती थी।

  • मौत पर नहीं चाहिए था तमाशा, वसीयत में लिख दी थी आखिरी ख्वाहिश; खंडवा की मिट्टी में ही क्यों समाना चाहते थे किशोर दा?

    मौत पर नहीं चाहिए था तमाशा, वसीयत में लिख दी थी आखिरी ख्वाहिश; खंडवा की मिट्टी में ही क्यों समाना चाहते थे किशोर दा?



    नई दिल्ली।
    भारतीय संगीत जगत के ‘अनमोल रत्न’ और अपनी बहुमुखी गायकी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले किशोर कुमार केवल अपनी आवाज के जादू के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेहद अलग और उसूलपसंद अंदाज के लिए भी मशहूर थे। किशोर दा के गानों में जहाँ एक ओर मस्ती और रोमांस की खनक होती थी, वहीं दूसरी ओर जब वे दर्द भरे नग्में गाते थे, तो सुनने वालों की आंखें नम हो जाती थीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाले इस महान फनकार ने अपनी मौत के बाद के सफर को लेकर भी एक खास वसीयत तैयार की थी? किशोर कुमार नहीं चाहते थे कि उनके जाने के बाद उनकी अंतिम यात्रा किसी फिल्मी तमाशे या किसी बड़े “प्रीमियर” जैसी नजर आए।

    इस दिलचस्प और भावुक कर देने वाले वाकये का खुलासा मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने अपने एक शो के दौरान किया था। जावेद अख्तर ने बताया कि एक रिकॉर्डिंग के दौरान किशोर दा ने उनसे अपनी वसीयत का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने लिखित निर्देश दिए हैं कि मृत्यु के बाद उनका क्रियाकर्म उनके पैतृक शहर खंडवा में ही किया जाए। जब जावेद अख्तर ने हैरानी से इसका कारण पूछा, तो किशोर कुमार का जवाब बेहद मार्मिक था। उन्होंने कहा था कि वे मुंबई की इस ग्लैमरस दुनिया के बीच अपना अंतिम संस्कार नहीं चाहते।

    किशोर दा का मानना था कि मुंबई में किसी दिग्गज कलाकार की मौत पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री उमड़ पड़ती है, बाहर हजारों की भीड़ जमा हो जाती है और लोग सेलिब्रिटीज को देखकर शोर मचाने लगते हैं। उन्हें डर था कि कहीं उनकी अंतिम विदाई किसी फिल्म के भव्य प्रीमियर जैसी न लगने लगे। वे चाहते थे कि जिस छोटे शहर की मिट्टी से वे आए हैं, उनका शरीर उसी मिट्टी में जाकर विलीन हो जाए। यही कारण है कि आज उनकी समाधि मुंबई में नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित है।

    किशोर कुमार का यह अनोखा अंदाज केवल उनकी वसीयत तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके काम करने के तरीके में भी झलकता था। ऐसा ही एक मजेदार किस्सा साल 1974 में आई फिल्म ‘आपकी कसम’ के सुपरहिट गाने “जय जय शिवशंकर” से जुड़ा है। राजेश खन्ना और मुमताज पर फिल्माए गए इस गाने को आर.डी. बर्मन ने कंपोज किया था। रिकॉर्डिंग के दौरान फिल्म के प्रोड्यूसर बार-बार पंचम दा आर.डी. बर्मन को बजट और पैसों के खर्च को लेकर ताने मार रहे थे। जब यह बात किशोर कुमार के कानों तक पहुँची, तो उन्होंने अपने ही अंदाज में प्रोड्यूसर को सबक सिखाने की ठानी।

    गाने के अंत में उन्होंने अचानक एक लाइन जोड़ दी- अरे बजाओ रे बजाओ, 50 हजार खर्च हो गए! यह लाइन किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं थी, बल्कि प्रोड्यूसर के तानों का करारा जवाब था। किशोर दा का यह बेबाकपन और अपनी जड़ों के प्रति उनका गहरा लगाव ही उन्हें एक आम गायक से अलग कर लेजेंड बनाता है। वे एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने शोहरत के शिखर पर रहते हुए भी सादगी और अपनी मिट्टी की सुगंध को कभी ओझल नहीं होने दिया।

  • आलिया भट्ट ने ' BAFTA अवॉर्ड्स के मंच पर हिंदी में स्पीच देकर बटोरी सुर्खियां….

    आलिया भट्ट ने ' BAFTA अवॉर्ड्स के मंच पर हिंदी में स्पीच देकर बटोरी सुर्खियां….


    नई दिल्ली।
    लंदन (London) में कुछ घंटों पहले ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवॉर्ड्स (British Academy Film Awards- BAFTA) का आयोजन हुआ, जहां फिल्मी जगत के कई कलाकार शामिल हुए. इंडिया की तरफ से भी फरहान अख्तर (Farhan Akhtar) और आलिया भट्ट (Alia Bhatt) वहां पहुंचे. फरहान के प्रोडक्शन में बनीं मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ को वहां बेस्ट चिल्ड्रन और फैमिली फिल्म की कैटेगरी में अवॉर्ड भी मिला. वहीं, आलिया ने पहली बार BAFTA में किसी अवॉर्ड को प्रेजेंट किया।


    आलिया ने BAFTA में बोली हिंदी

    आलिया भट्ट को BAFTA में बेस्ट नॉन-इंग्लिश फिल्म प्रेजेंट करने के लिए स्टेज पर बुलाया गया. एक्ट्रेस ने आते ही अपनी स्पीच हिंदी में कही, जिसका बाद में उन्होंने मतलब भी समझाया. उनका ये वीडियो हर तरफ वायरल भी हो रहा है. लोग आलिया की हिंदुस्तानी कल्चर दुनियाभर में फैलाने को लेकर सराहना कर रहे हैं।

    आलिया ने कहा, ‘नमस्कार, अगला अवॉर्ड एक ऐसी फिल्म के लिए है, जो अंग्रेजी में नहीं है. अभी से आप सबटाइटल की तरफ ना जाएं. मैं हिंदी में ये कह रही थी कि जो हमारा अगला अवॉर्ड है, वो एक ऐसी फिल्म के लिए है जिसकी भाषा अंग्रेजी नहीं है. क्योंकि फिल्में तो ढेर सारी अलग-अलग भाषाओं में बोलती हैं, लेकिन हम हमेशा जिस चीज की तारीफ करते हैं, वो है सिनेमा की भाषा. और वो भाषा तो हम सब बहुत अच्छे से समझते और बोलते हैं।’

    BAFTA में बेस्ट नॉन-इंग्लिश फिल्म का अवॉर्ड फिल्म ‘सेंटिमेंटल वैल्यू’ को मिला है, जो इसी साल ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेटेड है. फैंस को आलिया का BAFTA लुक भी बेहद पसंद आया है. एक्ट्रेस ने गुच्ची का सिल्वर गाउन पहना था, जिसके साथ उन्होंने एक सफेद स्टॉल भी कैरी किया. रेड कार्पेट पर आलिया का जलवा खूब जोर-शोर से बिखरा


    तीसरी इंडियन एक्ट्रेस बनीं आलिया

    आलिया से पहले इंडिया की दो और हीरोइन प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण को भी BAFTA में अवॉर्ड प्रेजेंट करने का मौका मिल चुका है. अब ऐसा करके आलिया तीसरी इंडियन एक्ट्रेस बन चुकी हैं. फैंस उनकी तरक्की देखकर बेहद खुश हैं. बात करें आलिया के वर्क फ्रंट की, तो उनकी दो फिल्में ‘अल्फा’ और ‘लव एंड वॉर’ आनी हैं, जिसकी रिलीज का फैंस को बेसब्री से इंतजार है।

  • फरहान अख्तर की मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने BAFTA 2026 अवॉर्ड जीता, भारत के लिए पहला सम्मान

    फरहान अख्तर की मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने BAFTA 2026 अवॉर्ड जीता, भारत के लिए पहला सम्मान


    नई दिल्ली। भारत ने BAFTA 2026 में गर्व का पल मनाया, जब मणिपुरी भाषा की फिल्म ‘बूंग’ ने बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म का अवॉर्ड अपने नाम किया। यह इस साल भारत के लिए पहला BAFTA अवॉर्ड है। फरहान अख्तर के प्रोडक्शन सपोर्ट में बनी यह इमोशनल ड्रामा फिल्म ने इंटरनेशनल कैटेगरी में आर्को, लिलो एंड स्टिच और ज़ूट्रोपोलिस 2 जैसी मजबूत फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। फरहान अख्तर अपनी पत्नी शिबानी दांडेकर के साथ इस सेरेमनी में मौजूद थे, जिससे यह पल और भी खास बन गया।

    लक्ष्मीप्रिया देवी के निर्देशन में बनी ‘बूंग’ मणिपुर के सामाजिक और राजनीतिक तनाव के बीच अपने परिवार को फिर से जोड़ने की कहानी है। फिल्म का नाम मणिपुरी में “छोटा लड़का” के अर्थ में है। मुख्य किरदार बूंग (गुगुन किपगेन) अपने खोए पिता को घर लाकर अपनी मां मंदाकिनी (बाला हिजाम) को खुश करना चाहता है। अपने सबसे अच्छे दोस्त राजू (अंगोम सनामातुम) की मदद से वह बॉर्डर शहर मोरेह जाता है और पिता की तलाश में म्यांमार भी जाता है। फिल्म में परिवार, दोस्ती और सामाजिक संघर्ष की भावनाओं को बेहद संवेदनशील और रीयलिस्टिक अंदाज में दिखाया गया है।

    यह जीत सिर्फ फिल्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे नॉर्थईस्ट सिनेमा और भारतीय क्षेत्रीय फिल्मों के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि भारत के छोटे इलाकों की सीधी-सादी, सच्ची कहानियां भी दुनिया भर के दर्शकों से जुड़ सकती हैं। फरहान अख्तर के प्रोडक्शन सपोर्ट और लक्ष्मीप्रिया देवी के निर्देशन ने फिल्म को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता दिलाई।

    बॉक्स ऑफिस और अवॉर्ड हाइलाइट्स:

    फिल्म: बूंग

    निर्देशक: लक्ष्मीप्रिया देवी

    प्रोड्यूसर: फरहान अख्तर

    अवॉर्ड: BAFTA 2026 – Best Children & Family Film

    मुख्य कलाकार: गुगुन किपगेन, बाला हिजाम, अंगोम सनामातुम

    खासियत: भारत के लिए इस साल का पहला BAFTA, नॉर्थईस्ट फिल्म को अंतरराष्ट्रीय पहचान

    इस जीत से यह साबित होता है कि छोटे बजट और क्षेत्रीय भाषा की फिल्में भी वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल कर सकती हैं, बशर्ते कहानी दमदार और प्रस्तुति सशक्त हो। ‘बूंग’ ने भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी और नॉर्थईस्ट के सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।

    फरहान अख्तर और लक्ष्मीप्रिया देवी की मेहनत, गुगुन किपगेन, बाला हिजाम और अंगोम सनामातुम की शानदार परफॉर्मेंस ने इस फिल्म को दर्शकों और जजेस दोनों के लिए यादगार बना दिया। इस जीत से साफ है कि भारत के छोटे क्षेत्रों की कहानियां भी विश्व स्तर पर सराहना और सम्मान पा सकती हैं।

    अगर चाहें तो मैं इसे और भी न्यूज़पेपर स्टाइल, हेडिंग्स

  • बॉक्स ऑफिस पर रोमांस vs कोर्टरूम क्लैश! तीसरे दिन कौन बना असली विजेता?

    बॉक्स ऑफिस पर रोमांस vs कोर्टरूम क्लैश! तीसरे दिन कौन बना असली विजेता?


    नई दिल्ली। 20 फरवरी 2026 को बॉक्स ऑफिस पर दो अलग-अलग जॉनर की फिल्मों ने दस्तक दीएक तरफ कोर्टरूम ड्रामा तो दूसरी ओर रोमांटिक लव स्टोरी। Assi और Do Deewane Seher Mein के बीच तीसरे दिन भी कांटे की टक्कर देखने को मिली।

    निर्देशक Anubhav Sinha की फिल्म अस्सी में Taapsee Pannu लीड रोल में हैं। यह फिल्म एक रेप केस पर आधारित कोर्टरूम ड्रामा है, जिसमें तापसी के साथ कनी कुसरुति अहम भूमिका में हैं। मजबूत कंटेंट और पॉजिटिव रिव्यू के बावजूद फिल्म की ओपनिंग धीमी रही। पहले दिन 1 करोड़, दूसरे दिन 1.6 करोड़ और तीसरे दिन 1.37 करोड़ की कमाई के साथ फिल्म का कुल कलेक्शन 3.97 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

    वहीं Mrunal Thakur और Siddhant Chaturvedi स्टारर दो दीवाने सहर में एक रोमांटिक ड्रामा है, जिसके गाने और लीड जोड़ी की केमिस्ट्री को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने 1.25 करोड़ से ओपनिंग की, दूसरे दिन 1.5 करोड़ और तीसरे दिन 1.31 करोड़ की कमाई की। तीन दिनों में इसका कुल कलेक्शन 4.06 करोड़ रुपये हो गया है।

    अगर तीसरे दिन की कमाई देखें तो अस्सी ने 1.37 करोड़ के साथ हल्की बढ़त बनाई, लेकिन कुल कलेक्शन के मामले में दो दीवाने सहर में 4.06 करोड़ के साथ मामूली अंतर से आगे है। यानी रेस अभी भी बेहद करीब है और असली तस्वीर वीकडे कलेक्शन के बाद साफ होगी।

  • वक्त से आगे सोचने वाली मधुबाला: 12 साल में थामा स्टीयरिंग, 36 की उम्र में बन गई अमर सितारा

    वक्त से आगे सोचने वाली मधुबाला: 12 साल में थामा स्टीयरिंग, 36 की उम्र में बन गई अमर सितारा


    नई दिल्ली/ मुंबई। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की चमकती हुई धरोहर मधुबाला सिर्फ अपनी अदाकारी और खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि अपनी साहसिक सोच और आत्मनिर्भर व्यक्तित्व के लिए भी जानी जाती हैं। जिस दौर में लड़कियों के लिए सामाजिक सीमाएं तय थीं उस समय उन्होंने महज 12 साल की उम्र में ड्राइविंग सीखकर परंपराओं को चुनौती दे दी थी।

    14 फरवरी 1933 को दिल्ली में जन्मी मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां देहलवी था। उनके पिता अताउल्लाह खान बेहतर जीवन की तलाश में परिवार सहित मुंबई आ गए थे। आर्थिक तंगी के कारण मधुबाला को बचपन में ही काम करना पड़ा। उन्होंने नौ साल की उम्र में फिल्म बसंत में बाल कलाकार के रूप में काम शुरू किया और उस समय उन्हें बेबी मुमताज के नाम से पहचाना जाने लगा। मासूम चेहरा और स्वाभाविक अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

    1947 में फिल्म नील कमल के साथ उनके करियर को नई दिशा मिली और यहीं से वह मधुबाला के नाम से मशहूर हुईं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1950 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सफल फिल्में दीं। महल ने उन्हें रहस्यमयी सौंदर्य की पहचान दी तो हावड़ा ब्रिज और चलती का नाम गाड़ी जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय की बहुमुखी प्रतिभा को साबित किया।

    उनकी जोड़ी उस दौर के दिग्गज अभिनेताओं के साथ खूब सराही गई। दिलीप कुमार के साथ उनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री आज भी याद की जाती है। वहीं राज कपूर और देव आनंद जैसे सितारों के साथ भी उन्होंने काम किया।

    मधुबाला का निजी जीवन भी चर्चा में रहा। दिलीप कुमार के साथ उनका प्रेम संबंध गहरा था लेकिन पारिवारिक कारणों से दोनों अलग हो गए। बाद में उन्होंने किशोर कुमार से विवाह किया जिन्होंने उनके कठिन समय में साथ निभाया।

    उनकी जिंदगी में संघर्ष भी कम नहीं थे। 1960 के दशक में पता चला कि उनके दिल में छेद है। इस गंभीर बीमारी ने धीरे धीरे उनके स्वास्थ्य को कमजोर कर दिया। विदेश में इलाज की कोशिशें भी सफल नहीं हो सकीं। तमाम तकलीफों के बावजूद उन्होंने अपने आत्मसम्मान और हौसले को कभी टूटने नहीं दिया।

    करीब 70 फिल्मों में अभिनय करने वाली मधुबाला ने महज 36 साल की उम्र में 23 फरवरी 1969 को दुनिया को अलविदा कह दिया। कम उम्र में विदा लेने के बावजूद वह आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।

    उनकी कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं बल्कि एक ऐसी लड़की की भी है जिसने समय से आगे सोचने का साहस दिखाया। 12 साल की उम्र में स्टीयरिंग थामना हो या पुरुष प्रधान फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना हो मधुबाला ने हर मोर्चे पर यह साबित किया कि असली खूबसूरती आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच में होती है।

  • 26/11 के सीन ने तोड़ दिए जज़्बात धुरंधर के सेट पर फूट-फूटकर रो पड़े अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल

    26/11 के सीन ने तोड़ दिए जज़्बात धुरंधर के सेट पर फूट-फूटकर रो पड़े अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल


    नई दिल्ली । आदित्य धर की फिल्म धुरंधर ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई कर खुद को हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शुमार कर लिया है। 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई इस फिल्म को देश विदेश में जबरदस्त सराहना मिली। दमदार कहानी भव्य सेट प्रभावशाली संगीत और कलाकारों की सशक्त अदाकारी ने इसे दर्शकों के दिलों में खास जगह दिलाई। लेकिन फिल्म का एक सीन ऐसा था जिसने पर्दे के पीछे कलाकारों को भी भीतर तक झकझोर दिया। 26/11 मुंबई आतंकी हमले पर आधारित एक दृश्य की शूटिंग के बाद अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल खुद को संभाल नहीं पाए और फूट-फूटकर रो पड़े। इस भावुक घटना का खुलासा आर माधवन ने एक इंटरव्यू में किया।

    फिल्म में अक्षय खन्ना रहमान डकैत और अर्जुन रामपाल आईएसआई मेजर इकबाल की भूमिका में नजर आए हैं। कहानी के एक अहम हिस्से में 26/11 के भयावह आतंकी हमले को रीक्रिएट किया गया। इस दृश्य में दोनों किरदार हमले के बाद जश्न मनाते दिखते हैं। अभिनय की दृष्टि से यह दृश्य बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि भारतीय कलाकारों को उन किरदारों को निभाना था जो भारत के खिलाफ खड़े दिखाए गए थे। आर माधवन ने बताया कि जब यह सीन शूट हो रहा था तब सेट पर गहरा सन्नाटा और भारी माहौल था। जैसे ही कैमरा बंद हुआ अक्षय और अर्जुन भावनाओं से टूट गए और रोने लगे।

    माधवन के अनुसार यह सिर्फ एक अभिनय नहीं था बल्कि उस दर्दनाक घटना की यादों से सामना था जिसने पूरे देश को हिला दिया था। 26/11 की त्रासदी आज भी लोगों के ज़ेहन में ताजा है। ऐसे में उस घटना को उल्टे नजरिए से निभाना कलाकारों के लिए बेहद पीड़ादायक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि उस पल उन्हें एहसास हुआ कि सिनेमा की ताकत कितनी गहरी होती है वह कलाकारों को भी वास्तविकता के बेहद करीब ले जाती है। यह अनुभव उनके लिए भी भावनात्मक रूप से परिवर्तनकारी था और उन्होंने महसूस किया कि अच्छा कंटेंट केवल मनोरंजन नहीं बल्कि संवेदनाओं को झकझोरने का माध्यम भी होता है।

    धुरंधर में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में हैं जिन्होंने अपने किरदार को पूरी ऊर्जा और तीव्रता के साथ निभाया है। उनके अलावा संजय दत्त सारा अर्जुन अक्षय खन्ना अर्जुन रामपाल दानिश पंडोर गौरव गेरा सौम्या टंडन राकेश बेदी और आर माधवन जैसे कलाकारों ने फिल्म को और मजबूत बनाया। फिल्म के एक्शन सीक्वेंस और भावनात्मक दृश्यों ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। रिलीज के साथ ही इसने कई बड़े रिकॉर्ड तोड़े और शानदार कमाई की। अब दर्शकों की नजर इसके दूसरे भाग पर है जो 19 मार्च को रिलीज होने जा रहा है।

  • कैंसर की जंग के बीच दीपिका कक्कड़ की बढ़ी मुश्किलें! 13 मिमी की सिस्ट के लिए फिर होंगी अस्पताल में भर्ती, शोएब ने दी हेल्थ अपडेट

    कैंसर की जंग के बीच दीपिका कक्कड़ की बढ़ी मुश्किलें! 13 मिमी की सिस्ट के लिए फिर होंगी अस्पताल में भर्ती, शोएब ने दी हेल्थ अपडेट


    नई दिल्ली ।टेलीविज़न की मशहूर अभिनेत्री और ‘बिग बॉस 12’ की विजेता दीपिका कक्कड़ के लिए पिछला एक साल किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा है। साल 2025 में लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता चलने के बाद, जिसमें उनके लीवर का 22 प्रतिशत हिस्सा हटाना पड़ा था, अब एक्ट्रेस के सामने एक नई स्वास्थ्य चुनौती खड़ी हो गई है।
    दीपिका के पति और अभिनेता शोएब इब्राहिम ने अपने हालिया व्लॉग में प्रशंसकों को जानकारी दी है कि दीपिका के पेट में एक 13 मिमी (1.3 सेमी) की सिस्ट का पता चला है, जिसके इलाज के लिए उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।

    शोएब ने बताया कि शुक्रवार की रात अचानक दीपिका के पेट का दर्द असहनीय हो गया, जिसके बाद तुरंत उन्हें डॉक्टर के पास ले जाया गया। सीटी स्कैन की रिपोर्ट में इस सिस्ट का खुलासा हुआ।
    हालांकि, शोएब ने राहत की खबर देते हुए यह भी साझा किया कि यह कोई बड़ी सर्जरी नहीं होगी, बल्कि डॉक्टर इस सिस्ट को जलाकर Cauterize हटाएंगे।

    दिसंबर के पीईटी स्कैन में यह सिस्ट नहीं दिखी थी, लेकिन समय रहते इसका पता चलना एक सकारात्मक संकेत है। दीपिका को 3-4 दिन अस्पताल में निगरानी में रखा जाएगा और मंगलवार को यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रशंसक और साथी कलाकार अब दीपिका के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।