ईशान खट्टर का क्यूट सरप्राइज
ऐसे शुरू हुई थी लव स्टोरी
फिल्मों में व्यस्त हैं शाहिद

ऐसे शुरू हुई थी लव स्टोरी

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक सलीम खान को पिछले सप्ताह माइनर ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती किया गया था। शुरुआती जांच और उपचार के बाद न्यूरो सर्जरी की गई जो सफल रही। उम्र और पूर्व स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें आईसीयू में रखा गया है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रख रही है और आवश्यकतानुसार दवा व निगरानी जारी रखी जा रही है।
बुधवार को अभिनेता आमिर खान ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में स्वास्थ्य अपडेट साझा किया। उन्होंने बताया कि सलीम खान की हालत पहले से बेहतर है और चिकित्सकीय टीम उपचार से संतुष्ट है। आमिर खान शाम को अस्पताल भी पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार से मुलाकात की और उन्हें स्वास्थ्य सुधार की जानकारी दी।
अस्पताल परिसर में बीते कई दिनों से परिवार के सदस्य और फिल्म जगत के लोग लगातार आ-जा रहे हैं। गीतकार जावेद अख्तर, अर्पिता खान, अलवीरा खान और अतुल अग्निहोत्री समेत कई करीबी परिजन नियमित रूप से अस्पताल पहुंच रहे हैं और डॉक्टरों के मार्गदर्शन में स्थिति पर नजर रख रहे हैं। परिवार ने अभी तक आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन जारी नहीं किया है और मीडिया से निजी जीवन का सम्मान करने का अनुरोध किया है।
चिकित्सकों के अनुसार माइनर ब्रेन हेमरेज के मामलों में शुरुआती 10–14 दिन सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी कारण आईसीयू में निगरानी अवधि बढ़ाई जाती है ताकि किसी भी जटिलता का समय रहते पता चल सके। डॉक्टरों ने कहा कि यदि स्वास्थ्य में सुधार इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले दिनों में सलीम खान को सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है। इसके बाद डिस्चार्ज प्रक्रिया शुरू की जाएगी और घर लौटने की संभावना बढ़ जाएगी।
फिल्म उद्योग और प्रशंसकों के बीच सलीम खान के स्वास्थ्य को लेकर व्यापक रुचि देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं का सिलसिला लगातार जारी है। फैंस और सहयोगी दोनों ही उनकी त्वरित स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
सलीम खान की ICU में 10वें दिन की स्थिति स्थिर है और चिकित्सक आशावादी हैं। परिवार और अस्पताल प्रशासन का ध्यान केवल उनकी सुरक्षा और आराम सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। आने वाले कुछ दिनों में सुधार की प्रक्रिया यदि सुचारू रही, तो उन्हें जल्दी ही सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं में स्थानांतरित किया जा सकता है।

रश्मिका और विजय की शादी का थीम प्राइमल यानी मूल और आदिम पर आधारित है। इस थीम का मकसद है जड़ों की ओर लौटना और शादी की हर रस्म को उसी सादगी, पवित्रता और भावनात्मक गहराई के साथ निभाना, जैसे दशकों पहले विवाह होते थे। इस थीम में दिखावे से ज्यादा महत्व परंपराओं, रीति रिवाजों और रिश्तों की गहन भावनाओं को दिया गया है। सजावट में प्राकृतिक रंगों, मिट्टी, लकड़ी, फूलों और पारंपरिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। शादी का हर पल जीवन की मूल ऊर्जा, प्रकृति और पंचतत्व के साक्षी में संपन्न होगा।
इस प्राइमल थीम के जरिए यह जोड़ा अपनी नई जिंदगी की शुरुआत सादगी और आध्यात्मिकता के साथ करना चाहता है। यह केवल एक शादी नहीं, बल्कि रिश्तों के वास्तविक अर्थ का उत्सव होगा, जहां विश्वास और संस्कार ही सबसे महत्वपूर्ण होंगे।
संगीत समारोह में भी ट्रेडिशन को प्राथमिकता दी गई। विजय की मां माधवी देवरकोंडा ने इस मौके पर भावनाओं से भरा एक अनोखा पल साझा किया। उन्होंने रश्मिका को पारंपरिक चूड़ियां भेंट कीं, जो सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि रश्मिका का देवरकोंडा परिवार में स्वागत और खानदान की विरासत का प्रतीक हैं। यह पल दर्शाता है कि यह रिश्ता केवल दो सितारों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक है।
पिछले कुछ दिनों में आयोजित विरोश प्रीमियर लीग, पूल पार्टी और हल्दी की रस्में सोशल मीडिया पर छाई रहीं। संगीत समारोह ने न केवल नाच गाने और रंग बिरंगी सजावट का जश्न पेश किया, बल्कि परिवार और परंपरा की गहराई को भी उजागर किया। रश्मिका और विजय की यह शादी दिखावे से परे, सादगी, प्राकृतिक सौंदर्य और पुरातन भारतीय संस्कृति के संगम का उदाहरण बन रही है।
उदयपुर की शांत पहाड़ियों में सजाई गई यह शादी दर्शकों को याद दिलाती है कि वास्तविक खुशी और उत्सव केवल बाहरी चमक दमक में नहीं, बल्कि रिश्तों, संस्कारों और प्रकृति के गहरे जुड़ाव में छिपी होती है। रश्मिका और विजय का यह प्राइमल थीम, उनकी नई यात्रा की शुरुआत को स्थायी, भावपूर्ण और यादगार बनाने का संकल्प है।

वीर सावरकर पर हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं में कई फिल्में बनाई गई हैं। इनमें क्षेत्रीय सिनेमा की विशेषता और स्थानीय प्रभाव भी देखने को मिलता है। सबसे पहले रणदीप हुड्डा की फिल्म स्वातंत्र्य वीर सावरकर का नाम आता है। इस फिल्म के लिए रणदीप ने अपनी पूरी मेहनत के साथ-साथ घर तक बेच दिया था। उन्होंने सावरकर का किरदार निभाया और उसमें जीवन का हर भाव भर दिया। फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन औसत रहा, लेकिन सावरकर के संघर्ष और देशभक्ति की भावना को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।
इसके बाद प्रियदर्शन की कालापानी भी शुरुआती फिल्मों में शामिल है, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी और उनके संघर्ष का उल्लेख है। यह फिल्म उन क्रांतिकारियों की कहानी दिखाती है जिन्हें ब्रिटिश राज ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कैद किया था। फिल्म में अनु कपूर ने सावरकर का किरदार निभाया। 1996 में रिलीज हुई यह फिल्म अपने समय की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है और दर्शकों को इतिहास की कठोर सच्चाई से अवगत कराती है।
साल 2001 में आई फिल्म वीर सावरकर भी यादगार रही। इसके गुजराती संस्करण को भी दर्शकों ने खूब सराहा। फिल्म का निर्माण Sudhir Phadke ने सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान के तहत किया, जबकि शैलेंद्र गौर ने सावरकर का किरदार निभाया। निर्देशन Ved Rahi ने किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म के निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा किया गया था और लोगों को सावरकर के साहस और प्रयासों से जागरूक किया गया।
2015 में रिलीज हुई मराठी फिल्म व्हाट अबाउट सावरकर? भी खास नजर आई। यह फिल्म सीधे सावरकर की जीवनी पर आधारित नहीं थी, लेकिन उनके सम्मान और देशभक्ति की जंग को प्रभावशाली ढंग से पेश करती है। फिल्म में अभिमान मराठे की कहानी दिखाई गई है, जो वीर सावरकर का अपमान करने वाले भ्रष्ट मंत्री के खिलाफ आवाज उठाता है। संघर्ष में उसके मित्र भी उसका साथ देते हैं। इस तरह फिल्म सावरकर को सम्मान दिलाने की जंग को दर्शाती है और युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती है।
ये फिल्में सिर्फ सिनेमा की कृतियाँ नहीं हैं। ये स्वतंत्रता संग्राम, वीर सावरकर की प्रेरक जीवन-गाथा और देशभक्ति की मिसाल पेश करती हैं। उनके संघर्ष, त्याग और साहस को दर्शाती ये फिल्में आज भी प्रत्येक राष्ट्रप्रेमी को प्रेरित करती हैं और हमें यह याद दिलाती हैं कि देश के लिए समर्पण और वीरता का मतलब क्या होता है।

फिल्म में आलिया भट्ट रणबीर कपूर और विकी कौशल मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। इन तीनों सितारों की मौजूदगी ने फिल्म को पहले ही चर्चा का केंद्र बना दिया था लेकिन अब इसका बढ़ता बजट इसे इंडस्ट्री की सबसे महंगी फिल्मों की कतार में खड़ा कर रहा है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में फिल्म को लगभग 350 करोड़ रुपये में पूरा करने की योजना थी मगर बार-बार प्रोडक्शन शेड्यूल बढ़ने विशाल सेट्स और तकनीकी स्तर पर बड़े पैमाने पर काम होने के कारण लागत तेजी से बढ़ती चली गई।
भंसाली अपनी परफेक्शन के लिए मशहूर हैं। वे तब तक संतुष्ट नहीं होते जब तक हर फ्रेम उनके विजन के अनुरूप न हो। यही कारण है कि फिल्म की शूटिंग अवधि भी बढ़ा दी गई। पहले इसे 120 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य था लेकिन अब यह शेड्यूल बढ़कर लगभग 175 दिनों का हो गया है। इसमें भव्य डांस सीक्वेंस बड़े एरियल एक्शन सीन और भारी-भरकम विजुअल इफेक्ट्स शामिल हैं। हाई-एंड वीएफएक्स पर काम होने के कारण पोस्ट-प्रोडक्शन में भी अधिक समय लग रहा है जिससे रिलीज में देरी हो रही है।
दिलचस्प पहलू यह है कि फिल्म के बजट में तीनों सितारों की पारंपरिक फीस शामिल नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार रणबीर आलिया और विकी ने प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल अपनाया है। यानी वे फिल्म की कमाई से हिस्सा लेंगे। इससे शुरुआती लागत का बड़ा हिस्सा सीधे प्रोडक्शन वैल्यू पर खर्च किया गया है।
हालांकि मेकर्स ने रिलीज से पहले ही अच्छी रिकवरी कर ली है। फिल्म के डिजिटल राइट्स Netflix को लगभग 130 करोड़ रुपये में बेचे गए हैं जबकि सैटेलाइट राइट्स से करीब 80 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं। इस तरह लगभग 200 करोड़ रुपये पहले ही सुरक्षित कर लिए गए हैं जिससे प्रोजेक्ट को वित्तीय मजबूती मिली है।
रिलीज डेट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन खबरों के मुताबिक फिल्म 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। रणबीर कपूर के व्यस्त रिलीज शेड्यूल को भी देरी की एक वजह माना जा रहा है क्योंकि उनकी बड़ी फिल्म रामायण पार्ट 1 भी इसी वर्ष दिवाली पर रिलीज होने वाली है।
लव एंड वॉर की एक और खास बात यह है कि रणबीर और विकी इससे पहले संजू में साथ नजर आ चुके हैं जबकि आलिया और विकी राज़ी में साथ काम कर चुके हैं। रणबीर और आलिया की जोड़ी ब्रह्मास्त्र पार्ट 1: शिवा में दर्शकों को पसंद आई थी। अब पहली बार ये तीनों सितारे एक साथ बड़े पर्दे पर दिखाई देंगे जिससे उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।

विजय देवरकोंडा, जिन्हें अक्सर ‘राउडी स्टार’ कहा जाता है, उन्होंने साल 2011 में फिल्म ‘नुव्विला’ से अपने सफर की शुरुआत की थी। विजय की पहली बड़ी सफलता ‘येवढे सुब्रमण्यम’ (8 करोड़) से शुरू हुई, जिसके बाद ‘पेल्ली चूपुलु’ (30 करोड़) ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। लेकिन उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’। 60 करोड़ की वर्ल्डवाइड कमाई करने वाली इस फिल्म ने विजय को पूरे भारत में मशहूर कर दिया। इसके बाद ‘टैक्सीवाला’ (40 करोड़) सुपरहिट रही और उनकी अब तक की सबसे बड़ी हिट ‘गीता गोविंदम’ रही, जिसने 130 करोड़ का भारी-भरकम कलेक्शन किया।
हालांकि, जब हम रश्मिका मंदाना के करियर की ओर देखते हैं, तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। रश्मिका ने अपनी पहली ही फिल्म ‘किरिक पार्टी’ (36.8 करोड़) से ब्लॉकबस्टर शुरुआत की थी। इसके बाद ‘अंजनीपुत्र’, ‘चमक’ और ‘चलो’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता की गारंटी बना दिया। रश्मिका की सबसे बड़ी ताकत उनकी फिल्मों का विशाल कलेक्शन है। जहाँ विजय की सबसे बड़ी फिल्म 130 करोड़ पर रुकी, वहीं रश्मिका की ‘सरिलरु नीकेवरु’ ने 227 करोड़ और ‘वरिसु’ ने 303 करोड़ का बिजनेस किया। बॉलीवुड में कदम रखते ही उन्होंने रणबीर कपूर के साथ ‘एनिमल’ जैसी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म दी, जिसने 901.2 करोड़ कमाकर इतिहास रच दिया।
इतना ही नहीं, रश्मिका की ‘पुष्पा: द राइज’ (350 करोड़) के बाद इसके दूसरे पार्ट ‘पुष्पा: द रूल’ ने तो सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। भारत में 1471 करोड़ की ऐतिहासिक कमाई के साथ रश्मिका आज देश की सबसे सफल अभिनेत्रियों में शुमार हैं। साफ़ है कि हिट फिल्मों की संख्या और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, दोनों ही पैमानों पर रश्मिका अपने होने वाले पति विजय देवरकोंडा से काफी आगे निकल गई हैं। अब देखना यह होगा कि शादी के बाद यह ‘पावर कपल’ एक साथ पर्दे पर क्या नया धमाका करता है। फिलहाल, उदयपुर में होने वाली उनकी शादी की तैयारियों ने फैंस का उत्साह सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।

त्रिलोक कपूर केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह अपने दौर के एक ऐसे ‘पावरहाउस’ थे, जिनका रिकॉर्ड आज तक अटूट है। दीवान बशेश्वरनाथ के बेटे त्रिलोक ने जब अभिनय की दुनिया में कदम रखा, तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह सफलता का एक ऐसा शिखर छुएंगे, जहाँ पहुँचने के लिए उनके भतीजे राज कपूर और पोते रणबीर कपूर को भी कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। त्रिलोक कपूर ने अपने करियर में 30 सुपरहिट फिल्में दीं। यह एक ऐसा आंकड़ा है, जिसे कपूर परिवार का कोई भी दूसरा सदस्य आज तक पार नहीं कर पाया है।
त्रिलोक कपूर का फिल्मी सफर 1928 में शुरू हुआ, जब वे पढ़ाई पूरी कर कोलकाता पहुंचे। वह दौर स्वतंत्रता आंदोलन का था और त्रिलोक भी इससे अछूते नहीं रहे। उन्होंने 1933 में फिल्म ‘चार दरवेश’ से डेब्यू किया। इसके बाद आई फिल्म ‘सीता’, जिसमें उनके बड़े भाई पृथ्वीराज कपूर ‘राम’ बने थे और त्रिलोक ने भी अहम भूमिका निभाई थी। 1930 और 1940 के दशक में उन्होंने इंडस्ट्री पर राज करना शुरू किया, लेकिन उनकी लोकप्रियता का असली सैलाब 1950 के दशक में आया।
उस दौर में त्रिलोक कपूर ‘पौराणिक फिल्मों’ Mythological Films के बेताज बादशाह बन गए थे। उन्होंने पर्दे पर भगवान के इतने जीवंत किरदार निभाए कि लोग उन्हें असलियत में पूजने लगे थे। खास तौर पर ‘शिव’ के रूप में उनकी छवि घर-घर में लोकप्रिय हो गई थी। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि अगर उस समय सोशल मीडिया होता, तो शायद उनके फॉलोअर्स की संख्या आज के दिग्गजों को मात दे देती।
जैसे-जैसे वक्त बदला, त्रिलोक कपूर ने खुद को बदला और करैक्टर आर्टिस्ट के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू की। 1970 और 80 के दशक में उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पिता का किरदार निभाया था। इसके अलावा उन्होंने ‘दोस्ताना’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ और ‘अल्लाह रखा’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।
त्रिलोक कपूर भले ही आज की पीढ़ी के लिए एक अनसुना नाम हों, लेकिन भारतीय सिनेमा के पन्नों में उनकी कामयाबी स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उनके बेटे विजय कपूर ने भी निर्देशन के क्षेत्र में हाथ आजमाया, लेकिन जो जादू त्रिलोक कपूर ने पर्दे पर पैदा किया, वह बेमिसाल था। 1988 में इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन अपनी 30 हिट फिल्मों की विरासत को वह पीछे छोड़ गए, जो आज भी कपूर खानदान के गौरवशाली इतिहास का सबसे मजबूत स्तंभ है।

सबसे पहले बात करें कॉमेडी क्वीन भारती सिंह की। भारती ने अपने पहले बच्चे के जन्म के महज 12 दिन बाद ही शो हुनरबाज के सेट पर वापसी कर सबको हैरान कर दिया था। बेटे को घर पर छोड़कर आने के बाद वह भावुक भी हो गई थीं। पैपराजी से बातचीत में उन्होंने बताया था कि वह काफी रोईं क्योंकि उनका बेबी सिर्फ 12 दिन का था लेकिन काम की जिम्मेदारी भी जरूरी थी। हालांकि इस फैसले को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा।
वहीं अभिनेत्री नेहा धूपिया ने भी मां बनने के बाद जल्दी काम संभाला। उन्होंने अपनी बेटी महर के जन्म के लगभग 45 दिन बाद रियलिटी शो रोडीज की शूटिंग शुरू कर दी थी। इतना ही नहीं दूसरे बच्चे के जन्म के छह दिन बाद ही उन्होंने सोशल मीडिया पर स्क्रिप्ट पढ़ते हुए अपनी तस्वीर साझा कर यह संकेत दे दिया था कि वह जल्द ही काम पर लौटने वाली हैं।
आलिया भट्ट ने भी बेटी राहा के जन्म के तीन से चार महीने के भीतर काम पर वापसी कर ली थी। खास बात यह है कि उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान ही हॉलीवुड फिल्म हार्ट ऑफ़ स्टोन की शूटिंग पूरी की थी जिसमें उन्होंने कई एक्शन सीन भी किए। आलिया का यह प्रोफेशनलिज्म दर्शाता है कि वह अपने करियर को लेकर कितनी समर्पित हैं।
बॉलीवुड की फिटनेस आइकन करीना कपूर खान भी इस सूची में शामिल हैं। उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान विज्ञापन और शूटिंग जारी रखी थी। दूसरे बेटे जेह के जन्म के करीब एक महीने बाद ही वह दोबारा काम पर लौट आई थीं। करीना ने हमेशा यह संदेश दिया है कि प्रेग्नेंसी किसी महिला के काम करने की क्षमता को सीमित नहीं करती।
टीवी इंडस्ट्री की बात करें तो भाभी जी घर पर हैं फेम सौम्या टंडन ने जनवरी 2019 में बेटे को जन्म दिया और महज चार महीने बाद मई में शूटिंग पर लौट आईं। इसी तरह छवी मित्तल बेटे के जन्म के एक महीने के भीतर ही काम पर सक्रिय हो गई थीं। वह अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान भी काफी एक्टिव रहीं और बाद में बेटे को सेट पर साथ लेकर भी पहुंचीं।
साउथ और बॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुकीं काजल अग्रवाल ने भी बेबी के जन्म के दो महीने बाद काम पर वापसी की। वह अक्सर अपने बेटे को सेट पर साथ लेकर जाती थीं जिससे वह मां और प्रोफेशनल दोनों भूमिकाएं निभा सकें।
इन अभिनेत्रियों की कहानियां यह साबित करती हैं कि आज की महिलाएं पारिवारिक और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बनाने में सक्षम हैं। उन्होंने यह दिखाया कि मां बनने के बाद भी सपनों की उड़ान थमती नहीं बल्कि और मजबूत हो जाती है।