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  • आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल की पहली ऑन-स्क्रीन जोड़ी…

    आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल की पहली ऑन-स्क्रीन जोड़ी…

    नई दिल्ली:   बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज डेट आखिरकार तय कर दी गई है, जिससे लंबे समय से इंतजार कर रहे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। कई बार शेड्यूल बदलने के बाद अब यह फिल्म 21 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

    यह मेगा प्रोजेक्ट अपने भव्य पैमाने और स्टारकास्ट की वजह से पहले ही सुर्खियों में रहा है। फिल्म में आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इन तीनों बड़े सितारों का एक साथ आना फिल्म को खास बनाता है और इसे लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

    फिल्म की रिलीज डेट को लेकर पहले कई बदलाव किए गए थे। शुरुआत में इसे क्रिसमस 2025 पर रिलीज करने की योजना थी, जिसके बाद इसे आगे बढ़ाकर 2026 के अलग-अलग स्लॉट में शिफ्ट किया गया। अब निर्माताओं ने इसे 2027 की शुरुआत में रिलीज करने का अंतिम निर्णय लिया है, ताकि फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा सके।

    फिल्म के सेट से सामने आई तस्वीरों ने पहले ही दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ा दी थी, जहां रणबीर कपूर और विक्की कौशल को एयरफोर्स यूनिफॉर्म में देखा गया था। फाइटर जेट के पास शूट किए गए दृश्य और उनका लुक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने थे।

    ‘लव एंड वॉर’ को एक भावनात्मक प्रेम कहानी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें एक प्रेम त्रिकोण की कहानी दिखाई जाएगी। इसमें रणबीर और विक्की एयरफोर्स अधिकारियों की भूमिका निभाएंगे, जबकि आलिया भट्ट का किरदार भावनाओं, रिश्तों और कर्तव्य के बीच संघर्ष करता हुआ नजर आएगा।

    यह पहली बार होगा जब आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल एक साथ बड़े पर्दे पर दिखाई देंगे। साथ ही रणबीर कपूर और संजय लीला भंसाली की यह दूसरी फिल्म होगी, जिसने उनके शुरुआती करियर से जुड़ी यादों को फिर से ताजा कर दिया है। फिल्म को लेकर इंडस्ट्री में भी बड़ी उम्मीदें जताई जा रही हैं और इसे एक भव्य सिनेमाई अनुभव माना जा रहा है।

  • टीआरपी रैंकिंग में बड़ा बदलाव, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ बना नंबर वन…

    टीआरपी रैंकिंग में बड़ा बदलाव, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ बना नंबर वन…

    नई दिल्ली : टीवी दर्शकों की पसंद में इस हफ्ते बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां लोकप्रिय धारावाहिकों की रैंकिंग में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। टेलीविजन की दुनिया में लंबे समय से चर्चा में बना रहने वाला शो ‘अनुपमा’ इस बार चौथे स्थान पर खिसक गया है, जबकि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ ने मजबूत वापसी करते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है।

    इस सप्ताह की रेटिंग में दर्शकों की बदलती पसंद साफ नजर आई है। नए और रीमेक आधारित शोज ने जहां अपनी पकड़ मजबूत की है, वहीं कुछ लंबे समय से चल रहे कार्यक्रमों की लोकप्रियता में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। इससे टेलीविजन इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र हो गई है।

    इस हफ्ते ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ ने 2.0 रेटिंग के साथ पहला स्थान हासिल किया। शो में चल रहे नए ट्रैक और पारिवारिक कहानी को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। दूसरे स्थान पर ‘वसुधा’ रहा, जिसने 1.9 रेटिंग के साथ मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। तीसरे स्थान पर ‘गंगा माई की बेटियां’ रहा, जिसकी कहानी और भावनात्मक प्रस्तुति दर्शकों को आकर्षित कर रही है।

    दूसरी ओर, लंबे समय से टॉप पर बने रहने वाला शो ‘अनुपमा’ इस सप्ताह 1.4 रेटिंग के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इस गिरावट को टीवी इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। शो के मौजूदा ट्रैक और नए किरदारों के बावजूद दर्शकों की रुचि में कमी देखने को मिली है।

    पांचवें स्थान पर भी 1.4 रेटिंग के साथ एक अन्य लोकप्रिय धारावाहिक रहा, जिसने टॉप रैंकिंग में अपनी जगह बनाए रखी है। इसके बाद छठे स्थान पर ‘तुम से तुम तक’, सातवें पर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’, आठवें पर ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’, नौवें पर ‘उड़ने की आशा’ और दसवें स्थान पर ‘नागिन 7’ शामिल रहे हैं।

    इस हफ्ते की टीआरपी रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि टीवी दर्शकों की पसंद तेजी से बदल रही है। पुराने स्थापित शोज अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नए कॉन्सेप्ट और रीमेक आधारित शोज लगातार प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा रहे हैं।

  • नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म का गाना ‘तलाश’ बना भावनात्मक कहानी का अहम हिस्सा..

    नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म का गाना ‘तलाश’ बना भावनात्मक कहानी का अहम हिस्सा..

    नई दिल्ली:   फिल्मी संगीत की दुनिया में लंबे अंतराल के बाद मशहूर गायक रब्बी शेरगिल ने एक बार फिर अपनी दमदार वापसी दर्ज कराई है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी की आने वाली फिल्म ‘मैं एक्टर नहीं हूं’ का नया गाना ‘तलाश’ रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है और दर्शकों के बीच इसे लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। इस गाने ने न केवल फिल्म की कहानी को लेकर जिज्ञासा बढ़ाई है बल्कि संगीत प्रेमियों के बीच भी एक नई हलचल पैदा कर दी है।

    रब्बी शेरगिल की आवाज की खासियत हमेशा से उनकी गहराई और भावनात्मक पकड़ रही है, और ‘तलाश’ में भी यही प्रभाव साफ नजर आता है। यह गाना अकेलेपन, आत्ममंथन और रिश्तों की जटिल भावनाओं को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करता है। इसे फिल्म की कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो किरदारों की मानसिक स्थिति और उनके भीतर चल रहे संघर्ष को प्रभावी ढंग से सामने लाता है।

    फिल्म के मुख्य अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इस सहयोग को लेकर अपनी खुशी व्यक्त की है। उनके अनुसार रब्बी शेरगिल की आवाज हमेशा से उनके लिए खास रही है और इस फिल्म में उनका गाना शामिल होना कहानी को और भी गहराई देता है। उन्होंने कहा कि ‘तलाश’ सुनने के बाद यह महसूस होता है कि यह केवल एक गीत नहीं बल्कि फिल्म की भावनात्मक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    निर्देशक आदित्य कृपलानी ने भी इस गाने को फिल्म के लिए एक अहम मोड़ बताया है। उनके अनुसार यह गीत कहानी की भावनात्मक संरचना को मजबूत करता है और दर्शकों को किरदारों के भीतर झांकने का अवसर देता है। फिल्म में दिखाए गए अकेलेपन और रिश्तों की उलझनों को यह गाना और अधिक प्रभावशाली बनाता है।

    ‘मैं एक्टर नहीं हूं’ एक ऐसी कहानी पर आधारित है जिसमें दो अलग-अलग जीवन जी रहे किरदार एक डिजिटल माध्यम के जरिए एक-दूसरे से जुड़ते हैं। यह मुलाकात धीरे-धीरे एक भावनात्मक यात्रा में बदल जाती है, जहां दोनों अपने भीतर छिपी कमजोरियों और भावनाओं का सामना करते हैं। फिल्म का फोकस मानवीय रिश्तों, मानसिक संघर्ष और आत्म-खोज जैसे विषयों पर केंद्रित है।

    रब्बी शेरगिल की यह वापसी उनके प्रशंसकों के लिए एक खास पल बन गई है, क्योंकि लंबे समय बाद उनकी आवाज एक बार फिर बड़े पर्दे पर सुनाई दे रही है। ‘तलाश’ ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है और अब इसके रिलीज का इंतजार और भी गहराई से किया जा रहा है।

  • जन नायकन’ लीक मामले में साइबर क्राइम की बड़ी और निर्णायक कार्रवाई, मुख्य आरोपी गिरफ्तार..

    जन नायकन’ लीक मामले में साइबर क्राइम की बड़ी और निर्णायक कार्रवाई, मुख्य आरोपी गिरफ्तार..

    नई दिल्ली:   तमिल फिल्म इंडस्ट्री की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ के ऑनलाइन लीक मामले में साइबर क्राइम विंग ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या नौ हो गई है। जांच एजेंसियों ने डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया है।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी फिल्म की अनधिकृत कॉपी तैयार करने और उसे इंटरनेट पर फैलाने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। साइबर क्राइम विंग के अनुसार यह कार्रवाई गहन डिजिटल ट्रैकिंग और तकनीकी जांच के बाद की गई, जिसमें आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई।

    मुख्य आरोपी एक फिल्म प्रोजेक्ट में फ्रीलांस असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत था। इसी दौरान उसने एडिटिंग स्टूडियो में मौजूद फिल्म की सामग्री तक अनधिकृत पहुंच बनाई और महत्वपूर्ण रील्स को अवैध रूप से कॉपी कर लिया। बाद में इन्हीं चोरी किए गए फुटेज को जोड़कर पूरी फिल्म की पाइरेटेड कॉपी तैयार की गई और अन्य सहयोगियों की मदद से इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित कर दिया गया।

    गिरफ्तार सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। साइबर क्राइम विंग ने स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि डिजिटल पाइरेसी में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी अवैध या संदिग्ध कंटेंट को डाउनलोड, शेयर या स्ट्रीम करने से बचें।

    फिल्म ‘जन नायकन’ एक बड़े बजट की बहुप्रतीक्षित परियोजना है, जिसमें प्रमुख भूमिकाओं में थलापति विजय और पूजा हेगड़े नजर आ रहे हैं। इस लीक घटना के बाद फिल्म उद्योग में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है और कई फिल्मी हस्तियों ने इस तरह की घटनाओं पर सख्त नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

  • अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की सफल जोड़ी दशकों पुराने इस कल्ट क्लासिक शीर्षक के साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रही है।

    अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की सफल जोड़ी दशकों पुराने इस कल्ट क्लासिक शीर्षक के साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रही है।

    नई दिल्ली:   भारतीय सिनेमा के विकास क्रम में साठ का दशक एक ऐसा समय था जब मनोरंजन की नई विधाएं जन्म ले रही थीं। उस दौर में जब दर्शक मुख्य रूप से सामाजिक और रूमानी फिल्मों को पसंद करते थे तब दिग्गज कलाकार महमूद ने एक बड़ा जोखिम उठाया। उन्होंने वर्ष 1965 में फिल्म भूत बंगला के जरिए दर्शकों को एक ऐसी दुनिया से रूबरू कराया जहां डर के साये में हंसी के ठहाके गूंजते थे।
    लगभग दो घंटे पच्चीस मिनट की यह फिल्म न केवल उस समय की सफलतम फिल्मों में शामिल हुई बल्कि इसने आने वाले समय के लिए एक नई शैली की नींव भी रखी। यह फिल्म आज भी उन सिने प्रेमियों के लिए एक मिसाल है जो सस्पेंस और हास्य के सटीक संतुलन को समझना चाहते हैं। उस समय के सीमित संसाधनों के बावजूद इस फिल्म ने जो प्रभाव पैदा किया वह आज के आधुनिक तकनीक वाले दौर में भी दुर्लभ प्रतीत होता है।

    महमूद ने इस फिल्म में न केवल मुख्य भूमिका निभाई बल्कि इसके निर्देशन की जिम्मेदारी भी बहुत कुशलता से संभाली। उनकी रचनात्मक दृष्टि का ही परिणाम था कि फिल्म का हर दृश्य दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में सफल रहा। फिल्म में अभिनेत्री तनुजा और महान संगीतकार आरडी बर्मन की उपस्थिति ने इसमें चार चांद लगा दिए थे।

    आरडी बर्मन के संगीत ने उस समय की फिल्म संगीत की दिशा बदल दी थी और आज भी वे धुनें लोगों के कानों में रस घोलती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के जरिए ही पंचम दा के नाम से मशहूर इस महान संगीतकार ने अभिनय की दुनिया में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई थी। उनकी जादुई धुनों और महमूद की शानदार कॉमेडी ने मिलकर एक ऐसा सिनेमाई अनुभव प्रदान किया जो छह दशक बीत जाने के बाद भी भारतीय दर्शकों के जेहन में ताजा है।

    वर्तमान समय में जब भारतीय सिनेमा एक बार फिर अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है तो साठ के दशक की उन यादों का ताजा होना स्वाभाविक है। हाल ही में फिल्म जगत में एक बड़ी घोषणा ने हलचल मचा दी है जब अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की जोड़ी के एक नए प्रोजेक्ट की जानकारी सामने आई।

    इस प्रोजेक्ट का शीर्षक भी वही रखा गया है जिसने साठ के दशक में अपनी अनूठी कहानी से तहलका मचाया था। अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी ने पहले भी दर्शकों को कई बेहतरीन कॉमेडी फिल्में दी हैं जिससे प्रशंसकों के बीच उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। यह देखना वास्तव में दिलचस्प है कि तकनीक के इस आधुनिक युग में पुराने दौर की उस सादगी और स्वाभाविक डर को किस तरह नए कलेवर में पेश किया जाएगा ताकि वह नई पीढ़ी को भी उसी तरह प्रभावित कर सके।

    हॉरर कॉमेडी एक ऐसी कठिन विधा है जिसमें संतुलन बनाना बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि कहानी में डर की मात्रा अधिक हो जाए तो वह शुद्ध हॉरर फिल्म बन जाती है और यदि हंसी ज्यादा हो जाए तो वह केवल एक साधारण कॉमेडी बनकर रह जाती है। महमूद ने 1965 में इस बारीक अंतर को बहुत संजीदगी से पकड़ा था और एक संतुलित पटकथा तैयार की थी।

    उस समय की तकनीकी सीमाओं के बावजूद उन्होंने छायांकन और ध्वनि के प्रभावी उपयोग से एक ऐसा रहस्यमयी माहौल बनाया जिसने लोगों को अपनी कुर्सियों से उछलने पर मजबूर कर दिया। आज के दौर में जब फिल्म निर्माण की प्रक्रिया बहुत महंगी और जटिल हो गई है तब भी उन पुरानी फिल्मों की कहानी और उनके पात्रों की गहराई अतुलनीय लगती है। नई फिल्म से दर्शकों को यही अपेक्षा है कि वह उस ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करते हुए मनोरंजन का एक नया मानदंड स्थापित करेगी।

    भारतीय दर्शक हमेशा से ही विविधतापूर्ण और मौलिक कहानियों के प्रति आकर्षित रहे हैं। साठ के दशक की उस फिल्म ने न केवल व्यावसायिक सफलता हासिल की बल्कि उसने भविष्य के फिल्मकारों को यह साहस भी दिया कि वे लीक से हटकर प्रयोग कर सकें। आज की पीढ़ी के लिए वह पुरानी फिल्म एक ऐसे अध्याय की तरह है जिसमें मनोरंजन के साथ-साथ सिनेमाई बारीकियों का अद्भुत समावेश था।

    अक्षय कुमार का इस शैली में वापस आना और उसी ऐतिहासिक शीर्षक का चयन करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अच्छी कहानियों और प्रभावशाली विषयों की प्रासंगिकता कभी खत्म नहीं होती। आने वाले समय में यह नया प्रोजेक्ट निश्चित रूप से सिनेमा प्रेमियों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बना रहेगा और यह साबित करेगा कि कला का कोई अंत नहीं होता बल्कि वह समय के साथ और भी निखरती जाती है।
  • अदाणी समूह के शेयरों में तेजी से संपत्ति में भारी बढ़ोतरी और बाजार में सकारात्मक असर

    अदाणी समूह के शेयरों में तेजी से संपत्ति में भारी बढ़ोतरी और बाजार में सकारात्मक असर

    नई दिल्ली: वैश्विक अरबपति रैंकिंग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है जिसमें भारतीय उद्योग जगत के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया है बाजार में जारी उतार चढ़ाव और शेयरों में तेज गतिविधियों के बीच गौतम अदाणी ने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है और इस उपलब्धि के साथ उन्होंने लंबे समय से शीर्ष पर बने मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया है यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और निवेश प्रवाह में लगातार बदलाव देखा जा रहा है

    ताजा आंकड़ों के अनुसार गौतम अदाणी की कुल संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है जिससे वह वैश्विक रैंकिंग में भी ऊपर पहुंच गए हैं उनकी संपत्ति में यह उछाल मुख्य रूप से उनके समूह की कंपनियों के शेयरों में आई तेजी के कारण देखा गया है विशेषकर ऊर्जा बंदरगाह और गैस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की बढ़ती रुचि ने उनकी संपत्ति को नई ऊंचाई दी है दूसरी ओर मुकेश अंबानी की संपत्ति में मामूली गिरावट देखने को मिली है जिसके चलते वह रैंकिंग में दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं

    शेयर बाजार में अदाणी समूह की कंपनियों ने हाल के सत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया है जिससे न केवल समूह की बाजार स्थिति मजबूत हुई है बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है एक ही दिन में संपत्ति में अरबों डॉलर का इजाफा इस बात को दर्शाता है कि बाजार में सकारात्मक धारणा तेजी से बदल सकती है और बड़े उद्योगपतियों की रैंकिंग पर इसका सीधा असर पड़ता है

    वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की सूची में टेक्नोलॉजी सेक्टर का दबदबा लगातार बना हुआ है और शीर्ष स्थानों पर अधिकांश नाम इसी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं टेस्ला और अन्य बड़ी टेक कंपनियों से जुड़े उद्योगपति अब भी सूची में मजबूत स्थिति में हैं जबकि विभिन्न क्षेत्रों जैसे ऊर्जा खुदरा और औद्योगिक सेक्टर के अरबपतियों की संपत्ति में अधिक उतार चढ़ाव देखा जा रहा है

    विश्लेषकों के अनुसार यह रैंकिंग केवल व्यक्तिगत संपत्ति का संकेत नहीं है बल्कि यह वैश्विक बाजारों में पूंजी प्रवाह तकनीकी विकास और भू राजनीतिक परिस्थितियों का भी प्रतिबिंब है पिछले कुछ समय से वैश्विक निवेश माहौल में अस्थिरता बनी हुई है जिसके कारण बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है

    भारतीय उद्योग जगत की बात करें तो अन्य प्रमुख नाम भी वैश्विक सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए हैं जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज शामिल हैं हालांकि उनकी रैंकिंग में मामूली उतार चढ़ाव देखा गया है लेकिन समग्र रूप से भारतीय अरबपतियों की वैश्विक प्रभावशीलता बनी हुई है

    अदाणी समूह की कंपनियों में हालिया तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के आधार पर यह स्थिति और भी बदल सकती है फिलहाल यह बदलाव भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है

  • जब बोले चूड़ियां के सेट पर मचा था हंगामा ,करण जौहर हुए बेहोश और बजट ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

    जब बोले चूड़ियां के सेट पर मचा था हंगामा ,करण जौहर हुए बेहोश और बजट ने तोड़े सारे रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई गाने ऐसे बने हैं जो सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं बल्कि इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं और ऐसा ही एक गाना है बोले चूड़ियां जो फिल्म कभी खुशी कभी गम का हिस्सा है यह गाना आज भी शादियों और सेलिब्रेशन की जान माना जाता है लेकिन इसकी शूटिंग की कहानी उतनी ही दिलचस्प और हैरान करने वाली है

    इस गाने को बनाने के पीछे जितनी मेहनत और पैसा लगाया गया वह उस समय के हिसाब से चौंकाने वाला था फिल्म के निर्देशक करण जौहर इस गाने को बेहद भव्य बनाना चाहते थे और यही वजह थी कि सेट डिजाइन से लेकर कॉस्ट्यूम और डांस तक हर चीज को बड़े स्तर पर प्लान किया गया शूटिंग के दौरान लगभग दो सौ डांसर और तीन सौ जूनियर आर्टिस्ट शामिल थे इसके अलावा सेट को और शानदार बनाने के लिए खास झूमर भी तैयार किए गए थे

    लेकिन इतने बड़े सेट और भारी भरकम तैयारियों के बीच स्थिति तब बिगड़ गई जब करण जौहर खुद शूटिंग के दौरान बेहोश हो गए इस बात का खुलासा फिल्ममेकर निखिल आडवाणी ने किया था उन्होंने बताया कि सेट पर अफरातफरी का माहौल था और सभी परफेक्ट शॉट के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे इसी दौरान काजोल को अपने भारी लहंगे में डांस करने में परेशानी हो रही थी जिससे शूट और भी चुनौतीपूर्ण बन गया

    इस गाने का बजट इतना बढ़ गया कि उसने पूरी फिल्म के तय बजट को भी पीछे छोड़ दिया शुरुआत में फिल्म का बजट करीब तीन करोड़ तय किया गया था लेकिन जैसे ही बोले चूड़ियां का सेट तैयार हुआ यह आंकड़ा पार हो गया बताया जाता है कि यश जौहर ने जब यह देखा तो उन्होंने सभी को बुलाया और बजट की शीट को सबके सामने फाड़ दिया यह घटना आज भी बॉलीवुड के दिलचस्प किस्सों में गिनी जाती है

    साल 2001 में रिलीज हुई यह फिल्म उस समय की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बनी इसमें अमिताभ बच्चन जया बच्चन शाहरुख खान काजोल ऋतिक रोशन और करीना कपूर खान जैसे बड़े सितारे नजर आए फिल्म ने दुनियाभर में शानदार कमाई की और करीब एक सौ उन्नीस करोड़ का आंकड़ा पार किया

    हालांकि फिल्म की सफलता के पीछे कुछ भावनात्मक पहलू भी जुड़े थे काजोल के लिए यह समय निजी जीवन में काफी कठिन था क्योंकि इसी दौरान उन्हें मिसकैरेज का सामना करना पड़ा था उन्होंने बाद में बताया कि फिल्म की सफलता के बावजूद वह अंदर से काफी टूट चुकी थीं

    फिल्म से जुड़ा एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि इसमें शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ने राहुल के बचपन का किरदार निभाया था वहीं कॉमेडियन जॉनी लीवर और उनके बेटे जेसी लीवर भी पहली बार साथ नजर आए

    बोले चूड़ियां सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक ऐसी कहानी है जिसमें जुनून मेहनत और जोखिम सब कुछ शामिल है शायद यही वजह है कि यह गाना आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है और एक बिलियन से ज्यादा व्यूज के साथ इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है

  • सोमी अली ने धर्मेंद्र के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते और जीवनभर के जुड़ाव को किया याद..

    सोमी अली ने धर्मेंद्र के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते और जीवनभर के जुड़ाव को किया याद..


    नई दिल्ली: 
     हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को लेकर अभिनेत्री सोमी अली द्वारा साझा की गई यादों ने फिल्म जगत में एक बार फिर भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया है। लंबे समय तक भारतीय सिनेमा में सक्रिय रहे धर्मेंद्र अपनी सादगी, अपनापन और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके निधन के बाद भी उनके प्रशंसक और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोग लगातार उन्हें याद कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमी अली ने उनके साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव सामने रखा है।

    सोमी अली ने बताया कि उनके जीवन के शुरुआती दौर में धर्मेंद्र से उनकी मुलाकात एक निजी अवसर पर हुई थी, जहां बातचीत बेहद सहज और आत्मीय माहौल में हुई। इस मुलाकात के दौरान साधारण बातचीत और अपनत्व ने दोनों के बीच ऐसा रिश्ता बना दिया जिसे उन्होंने पिता और बेटी जैसे भावनात्मक जुड़ाव के रूप में महसूस किया। उनके अनुसार धर्मेंद्र का व्यवहार हमेशा बेहद सरल और स्नेहपूर्ण रहा, जिससे उनके आसपास मौजूद हर व्यक्ति को अपनापन महसूस होता था।

    अभिनेत्री ने यह भी साझा किया कि समय के साथ यह रिश्ता और गहरा होता गया और उनके जीवन के कठिन समय में धर्मेंद्र ने उन्हें मानसिक रूप से सहारा दिया। उन्होंने कहा कि जब भी जीवन में चुनौतियां आईं, धर्मेंद्र ने एक मार्गदर्शक की तरह उन्हें हिम्मत दी और सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। यह जुड़ाव केवल औपचारिक पहचान तक सीमित नहीं रहा बल्कि भावनात्मक रूप से जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

    सोमी अली ने फिल्मी करियर के दौरान धर्मेंद्र के साथ काम करने के अनुभव को भी याद किया, जिसमें दोनों ने एक फिल्म में साथ काम किया था। इस दौरान उनके बीच पेशेवर सहयोग के साथ एक मजबूत समझ विकसित हुई, जिसने उनके रिश्ते को और गहराई दी। फिल्म के सेट पर भी धर्मेंद्र का व्यवहार बेहद सहज और सहयोगी बताया गया, जिससे काम का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा में ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने अपने अभिनय के साथ-साथ अपने मानवीय स्वभाव से भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके व्यक्तित्व की सरलता और गरिमा ने उन्हें हर पीढ़ी के दर्शकों के लिए खास बना दिया। सोमी अली की यह यादें इस बात को फिर से उजागर करती हैं कि फिल्मी दुनिया में कई रिश्ते समय के साथ भावनात्मक गहराई प्राप्त कर लेते हैं।

    उनकी साझा की गई भावनात्मक बातें इस ओर संकेत करती हैं कि सिनेमा केवल अभिनय और मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इंसानी रिश्तों और अनुभवों का एक ऐसा संसार है जो कलाकारों के बीच जीवनभर के जुड़ाव पैदा कर सकता है।

  • साउथ की फीमेल लीड फिल्मों का बॉक्स ऑफिस जलवा किसने मारी बाजी बनी नंबर वन क्वीन

    साउथ की फीमेल लीड फिल्मों का बॉक्स ऑफिस जलवा किसने मारी बाजी बनी नंबर वन क्वीन


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा में लंबे समय तक हीरो केंद्रित फिल्मों का दबदबा रहा लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तस्वीर तेजी से बदली है अब कई ऐसी फिल्में सामने आई हैं जिनमें हीरोइन ने पूरी कहानी को अपने कंधों पर उठाया और बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार सफलता हासिल की इन फिल्मों ने यह साबित किया कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के दम पर फीमेल लीड फिल्में भी बड़ी कमाई कर सकती हैं

    इस सूची में सबसे ऊपर नाम आता है कल्याणी प्रियदर्शन की फिल्म लोका चैप्टर 1 का जिसमें उन्होंने चंद्रा नाम के एक बेहद खास और रहस्यमयी किरदार को निभाया यह किरदार साधारण नहीं बल्कि एक अनोखी शक्ति से भरपूर है फिल्म ने दर्शकों को अपने कॉन्सेप्ट और प्रस्तुति से बांध कर रखा और वर्ल्डवाइड लगभग 303 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर डाली यह आंकड़ा इसे फीमेल लीड फिल्मों की रेस में सबसे आगे ले जाता है

    दूसरे स्थान पर कीर्ति सुरेश की चर्चित फिल्म महानती है जो साउथ इंडस्ट्री की महान अभिनेत्री के जीवन पर आधारित है इस फिल्म में कीर्ति ने भावनाओं से भरा ऐसा अभिनय किया कि उन्हें नेशनल अवॉर्ड तक मिला फिल्म एक कलाकार की सफलता संघर्ष और व्यक्तिगत टूटन की कहानी दिखाती है और करीब 85 करोड़ की कमाई के साथ यह भी बड़ी हिट साबित हुई

    तीसरे नंबर पर अनुष्का शेट्टी की भव्य ऐतिहासिक फिल्म रुद्रमादेवी आती है जिसमें उन्होंने एक शक्तिशाली रानी का किरदार निभाया फिल्म की भव्यता और अनुष्का की स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया और इसने लगभग 84 करोड़ का कलेक्शन किया

    अनुष्का शेट्टी की ही फिल्म अरुंधति चौथे स्थान पर है यह एक ऐसी फिल्म है जिसने अपने समय में महिला केंद्रित सिनेमा को नई पहचान दी हॉरर और ड्रामा के मेल से बनी इस फिल्म ने करीब 70 करोड़ की कमाई की और आज भी इसे एक कल्ट फिल्म माना जाता है

    पांचवें स्थान पर भी अनुष्का शेट्टी की फिल्म भागमती है जिसमें उन्होंने एक मजबूत और रहस्यमयी किरदार निभाया फिल्म ने सस्पेंस और थ्रिल के दम पर दर्शकों को बांधे रखा और लगभग 67 करोड़ का कलेक्शन किया छठे नंबर पर नजरिया नाजिम की फिल्म सुकशमदर्शिनि आती है जिसने लगभग 54 करोड़ से ज्यादा की कमाई की यह फिल्म कंटेंट के दम पर आगे बढ़ी और दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला

    सातवें स्थान पर सामंथा रुथ प्रभु की फिल्म ओह बेबी है जो एक अलग तरह की कहानी लेकर आई इस फिल्म में उम्र और जीवन के अनुभव को हल्के फुल्के अंदाज में दिखाया गया और इसने करीब 40 करोड़ की कमाई की

    इन सभी फिल्मों की सफलता यह साफ दिखाती है कि साउथ सिनेमा में अब कहानियां बदल रही हैं और दर्शक भी मजबूत महिला किरदारों को उतना ही पसंद कर रहे हैं जितना बड़े हीरो को यह ट्रेंड आने वाले समय में और भी मजबूत हो सकता है जहां हीरोइनों का दबदबा और बढ़ेगा और वे बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाती नजर आएंगी

  • असरानी की कॉमेडी यात्रा: दिग्गज कलाकारों से मिली प्रेरणा ने बदला करियर..

    असरानी की कॉमेडी यात्रा: दिग्गज कलाकारों से मिली प्रेरणा ने बदला करियर..

    नई दिल्ली:   हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडी अभिनेता असरानी का सफर भारतीय फिल्म जगत में एक ऐसी मिसाल के रूप में देखा जाता है जिसने यह साबित किया कि सहज अभिनय और सटीक कॉमिक टाइमिंग किसी भी कलाकार को अमर बना सकती है। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक अभिनय से आगे बढ़कर हास्य की बारीकियों को समझने की कोशिश की और धीरे धीरे अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी छवि आज भी दर्शकों के मन में उस सख्त लेकिन हास्यपूर्ण जेलर के रूप में जीवित है, जिनका संवाद आज भी लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बना हुआ है।

    असरानी के अभिनय जीवन को आकार देने में हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शुरुआती दौर में उन्होंने किशोर कुमार की फिल्मों और उनके अनोखे अंदाज को करीब से समझा, जहां हास्य केवल संवाद पर नहीं बल्कि अभिव्यक्ति और समय पर आधारित होता था। इसी तरह महमूद की कॉमेडी शैली ने उन्हें यह सिखाया कि हास्य में भावनाओं का संतुलन कितना महत्वपूर्ण होता है। वहीं जॉनी वॉकर के साथ काम करने के अनुभव ने उनके पेशेवर अनुशासन को मजबूत किया और यह समझ दी कि समय की पाबंदी और सेट पर अनुशासन भी एक कलाकार की पहचान बनाते हैं। इन तीनों कलाकारों का प्रभाव असरानी के व्यक्तित्व और अभिनय शैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    फिल्मी करियर के दौरान असरानी ने कई ऐसी फिल्मों में काम किया जो भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर का हिस्सा मानी जाती हैं। इन फिल्मों में उनका योगदान केवल एक हास्य कलाकार तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने हर किरदार में एक अलग तरह की ऊर्जा और वास्तविकता जोड़ी। उनकी खासियत यह रही कि वे हर दृश्य में स्वाभाविक लगते थे और दर्शकों को बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के हंसा देते थे। समय के साथ उन्होंने यह भी समझाया कि कॉमेडी केवल चुटकुलों पर निर्भर नहीं होती बल्कि सही समय पर बोले गए संवाद और परिस्थिति की समझ से उत्पन्न होती है।

    अपने लंबे करियर में असरानी ने यह सिद्ध किया कि एक सफल कलाकार बनने के लिए निरंतर सीखना और अपने अनुभवों से विकसित होना जरूरी है। उन्होंने अपने समकालीन कलाकारों से जो सीख ली, उसे अपने अभिनय में इस तरह ढाला कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई। उनकी कॉमेडी शैली में सरलता, वास्तविकता और गहरी समझ का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है, जिसने उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।

    आज भी उनके किरदार और अभिनय शैली दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं और नई पीढ़ी के कलाकार उनके काम से प्रेरणा लेते हैं। उनका योगदान भारतीय सिनेमा में हास्य अभिनय की परिभाषा को नया आयाम देता है और यह दर्शाता है कि एक कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी उसका अनुशासन, अवलोकन क्षमता और सीखने की इच्छा होती है।