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  • थलाइवा के फैंस के लिए डबल खुशखबरी जेलर 2 के बाद इस फिल्म में दिखेंगे रजनीकांत डॉक्टर का निभाएंगे किरदार

    थलाइवा के फैंस के लिए डबल खुशखबरी जेलर 2 के बाद इस फिल्म में दिखेंगे रजनीकांत डॉक्टर का निभाएंगे किरदार


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत के फैंस के लिए एक साथ दो बड़ी खुशखबरियां सामने आई हैं। अभिनेता की बहुप्रतीक्षित फिल्म जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है और अब उनका अगला प्रोजेक्ट भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रजनीकांत ने खुद अपने आगामी प्रोजेक्ट को लेकर जानकारी साझा की है। इस फिल्म का नाम धर्मन बताया जा रहा है और इसकी शूटिंग फिलहाल जारी है। खास बात यह है कि इस फिल्म में रजनीकांत एक डॉक्टर की भूमिका में दिखाई देंगे। ऐसे में फैंस को सुपरस्टार का एक बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिल सकता है।

    रजनीकांत ने बताया कि जेलर 2 की शूटिंग पूरी हो चुकी है और फिल्म अब पोस्ट प्रोडक्शन के चरण में है। जेलर 2 को नेल्सन दिलीपकुमार निर्देशित कर रहे हैं। यह 2023 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म जेलर का सीक्वल है। पहले भाग की सफलता के बाद इसके दूसरे पार्ट को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म में पहले पार्ट से जुड़े कई कलाकारों की वापसी भी हो रही है। राम्या कृष्णन विनायकन मिर्ना योगी बाबू और शिवराजकुमार जैसे कलाकार सीक्वल में नजर आने वाले हैं। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी एक बार फिर अनिरुद्ध रविचंदर के पास है।

    जेलर 2 की रिलीज को लेकर भी फैंस के बीच खासा उत्साह है। फिल्म 15 अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। ऐसे में रजनीकांत एक बार फिर अपने दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का मनोरंजन करते दिखाई देंगे। जेलर के पहले भाग ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था और दुनियाभर में करीब 600 से 650 करोड़ रुपये की कमाई करने वाली बड़ी भारतीय फिल्मों में शामिल हुई थी। यही वजह है कि सीक्वल से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

    वहीं जेलर 2 के बाद रजनीकांत जिस फिल्म में व्यस्त हैं उसे धर्मन बताया जा रहा है। इस फिल्म का निर्देशन अश्वथ मारिमुथु कर रहे हैं जिन्हें ड्रैगन जैसी फिल्म के लिए जाना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म की शूटिंग अपने दूसरे शेड्यूल में पहुंच चुकी है। फिल्म में रजनीकांत का किरदार डॉक्टर का होगा। यह भूमिका उनके अब तक के कई चर्चित किरदारों से अलग हो सकती है और यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर अभी से चर्चा तेज हो गई है।

    धर्मन की एक और खास बात यह बताई जा रही है कि फिल्म से कमल हासन भी जुड़े हुए हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक कमल हासन फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं और रजनीकांत के साथ इसमें एक्टिंग भी कर रहे हैं। अगर दोनों दिग्गज कलाकार एक ही प्रोजेक्ट में स्क्रीन पर नजर आते हैं तो यह सिनेमा प्रेमियों के लिए बेहद खास मौका होगा। हालांकि फिल्म की कहानी और दोनों कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    रजनीकांत के लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहने से साफ है कि उनका स्टारडम आज भी पूरी मजबूती के साथ कायम है। एक तरफ जेलर 2 जैसी बड़े स्तर की एक्शन एंटरटेनर फिल्म रिलीज के लिए तैयार है तो दूसरी तरफ धर्मन में वह डॉक्टर के किरदार के जरिए नया रंग दिखाने वाले हैं। अब फैंस को इंतजार है कि जेलर 2 में थलाइवा का एक्शन अवतार कितना धमाल मचाता है और उसके बाद धर्मन में उनका नया किरदार दर्शकों को कितना प्रभावित करता है।

  • छह महीने की प्रेग्नेंसी में कियारा आडवाणी ने बारिश वाला सीन किया, हुमा कुरैशी ने बताया कैसे मिली प्रेरणा

    छह महीने की प्रेग्नेंसी में कियारा आडवाणी ने बारिश वाला सीन किया, हुमा कुरैशी ने बताया कैसे मिली प्रेरणा

    नई दिल्ली ।यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से उत्सुकता बनी हुई है। इसी बीच चेन्नई में आयोजित प्री रिलीज कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने फिल्म की शूटिंग से जुड़ा एक अनुभव साझा किया, जिसमें उन्होंने कियारा आडवाणी की पेशेवर प्रतिबद्धता और मुश्किल परिस्थितियों में काम करने की क्षमता की तारीफ की।

    हुमा ने बताया कि फिल्म के एक दृश्य में उन्हें और कियारा को साथ काम करना था। इस दृश्य में बारिश का इस्तेमाल किया गया था और दोनों कलाकारों को बारिश में शूटिंग करनी थी। हुमा के मुताबिक उस दौरान उन्हें तेज सिरदर्द हो रहा था और ऐसे समय में कियारा को देखकर उन्हें हिम्मत मिलती थी।

    हुमा ने बताया कि शूटिंग के दौरान कियारा गर्भावस्था के छठे महीने में थीं। इसके बावजूद वह बारिश वाले दृश्य में पूरी मजबूती के साथ खड़ी होकर अपना काम कर रही थीं। हुमा के लिए यह अनुभव इसलिए खास था क्योंकि खुद असहज महसूस करने के बावजूद वह कियारा की स्थिति और उनकी कार्यक्षमता देखकर प्रेरित होती थीं।

    हुमा के मुताबिक जब भी उन्हें अपनी परेशानी की शिकायत करने का मन करता, वह कियारा की ओर देखती थीं। कियारा की स्थिति देखकर उन्हें लगता था कि उन्हें भी अपनी परेशानी के बावजूद काम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस अनुभव को अपने लिए प्रेरणादायक बताया और कियारा की दृढ़ता की सराहना की।

    ‘टॉक्सिक’ में कियारा आडवाणी के साथ हुमा कुरैशी भी महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म में यश मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की रिलीज से पहले इसके गाने और प्रचार सामग्री को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा रही है। फिल्म की कहानी और कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर भी दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

    कियारा और हुमा की जोड़ी फिल्म के उस दृश्य में साथ दिखाई देगी, जिसका जिक्र हुमा ने कार्यक्रम के दौरान किया। हालांकि उन्होंने बातचीत में दृश्य से जुड़ी पूरी जानकारी साझा नहीं की और इसे फिल्म के कथानक के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए केवल अपने शूटिंग अनुभव तक ही बात सीमित रखी।

    कियारा आडवाणी की निजी जिंदगी भी पिछले कुछ समय से प्रशंसकों की दिलचस्पी का विषय रही है। कियारा और अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा ने वर्ष 2023 में राजस्थान के जैसलमेर में शादी की थी। दोनों कलाकार इससे पहले फिल्म ‘शेरशाह’ में साथ नजर आए थे। फिल्म में उनकी जोड़ी को दर्शकों ने पसंद किया था और इसके बाद दोनों के रिश्ते की चर्चाएं भी सामने आई थीं।

    बाद में दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया और शादी की। इसके बाद उनके परिवार में बेटी के जन्म की खुशी भी आई। दोनों ने अपनी निजी जिंदगी और बेटी की तस्वीरों को लेकर मीडिया से निजता बनाए रखने की अपील की थी।

    अब ‘टॉक्सिक’ के साथ कियारा एक बार फिर बड़े पर्दे पर दिखाई देंगी। फिल्म में उनका किरदार कैसा है, इसे लेकर पूरी जानकारी रिलीज के बाद ही सामने आएगी। वहीं हुमा कुरैशी द्वारा साझा किया गया शूटिंग अनुभव फिल्म से जुड़े कलाकारों की मेहनत और कठिन परिस्थितियों में काम करने की प्रक्रिया की एक झलक देता है। दर्शकों की नजर अब फिल्म की रिलीज और कलाकारों के प्रदर्शन पर है।

  • जब शूटिंग के दौरान सच में पिटने लगे थे अक्षय कुमार, चौकीदार का हमला भी कैमरे में कैद; फिल्म में दिखा दिया पूरा सीन

    जब शूटिंग के दौरान सच में पिटने लगे थे अक्षय कुमार, चौकीदार का हमला भी कैमरे में कैद; फिल्म में दिखा दिया पूरा सीन


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में फिल्मों की शूटिंग आज बेहद योजनाबद्ध तरीके से होती है। बड़े बजट की फिल्मों में हर सीन की तैयारी पहले से की जाती है और कलाकारों की सुरक्षा से लेकर लोकेशन की अनुमति तक हर चीज का खास ध्यान रखा जाता है। लेकिन 90 के दशक में फिल्मों की शूटिंग का अंदाज काफी अलग हुआ करता था। कई बार सीमित संसाधनों के बीच ऐसे सीन शूट कर लिए जाते थे जिनकी कल्पना आज के दौर में करना भी मुश्किल लगता है। अभिनेता अक्षय कुमार ने खुद एक इंटरव्यू में अपने शुरुआती दौर की शूटिंग से जुड़ा ऐसा ही मजेदार और हैरान करने वाला किस्सा साझा किया था।

    यह किस्सा साल 1997 में रिलीज हुई फिल्म अफलातून की शूटिंग से जुड़ा है। अक्षय कुमार ने बताया था कि उस दौर में शूटिंग के दौरान कई बार टीम बिना ज्यादा औपचारिकता के लोकेशन तलाश लेती थी और वहीं कैमरा लगाकर काम शुरू कर देती थी। फिल्म के टाइटल ट्रैक की शूटिंग के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ। गाने में दिखाई गई एक कार शूटिंग के लिए खास तौर पर मंगाई गई कोई फिल्मी गाड़ी नहीं थी बल्कि वह वहां से गुजर रही थी।

    अक्षय कुमार के मुताबिक जब उन्हें पता चला कि कार का मालिक उनका फैन है तो उन्होंने उससे मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या वह कुछ मिनट के लिए उसकी गाड़ी पर डांस कर सकते हैं। फैन ने खुशी से इसकी अनुमति दे दी। इसके बाद अक्षय कुमार और फिल्म की टीम ने उसी कार को शूटिंग का हिस्सा बना लिया। गाड़ी के ऊपर डांस करने के साथ उसके आसपास कई दूसरे शॉट भी रिकॉर्ड किए गए। उस समय फिल्म निर्माण में मौजूद यह जुगाड़ वाला अंदाज आज की हाईटेक शूटिंग से बिल्कुल अलग नजर आता है।

    लेकिन इस शूटिंग का सबसे दिलचस्प हिस्सा तब सामने आया जब अक्षय कुमार ने बताया कि कई जगहों पर टीम बिना अनुमति के बिल्डिंग के अंदर जाकर शूटिंग कर लिया करती थी। ऐसी ही एक जगह पर शूटिंग करते समय चौकीदार ने टीम को देख लिया। चौकीदार को जब पता चला कि बिना अनुमति वहां शूटिंग की जा रही है तो वह उन्हें रोकने के लिए दौड़ पड़ा। मामला सिर्फ रोकने तक सीमित नहीं रहा बल्कि अक्षय कुमार ने बताया कि वे पिटते-पिटते बच गए।

    सबसे खास बात यह रही कि चौकीदार के पीछे भागने और उन्हें मारने की कोशिश का पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। अक्षय कुमार के मुताबिक चौकीदार ने उन्हें मारा भी था और टीम ने उस वास्तविक घटना को बेकार जाने देने के बजाय शूट किए गए विजुअल का हिस्सा बना दिया। यानी फिल्म में दिखाई देने वाला वह सीन किसी स्टंट या पहले से तय किए गए एक्शन का हिस्सा नहीं बल्कि शूटिंग के दौरान घटा वास्तविक घटनाक्रम था।

    अक्षय कुमार ने इस पूरे किस्से को याद करते हुए बताया था कि उस दौर में इस तरह की घटनाओं के बावजूद शूटिंग करने में काफी मजा आता था। आज जहां किसी फिल्म के एक छोटे से सीन के लिए भी लोकेशन परमिशन सुरक्षा टीम और कई स्तर की तैयारी की जाती है वहीं 90 के दशक में कई बार मौके की परिस्थितियों को ही शूटिंग का हिस्सा बना लिया जाता था।

    फिल्म अफलातून में अक्षय कुमार ने डबल रोल निभाया था। कहानी एक छोटे मोटे चोर के इर्द गिर्द घूमती है जिसकी जिंदगी एक लड़की से प्यार के बाद बदलती है। कहानी में उसका हमशक्ल सामने आता है जो एक किलर होता है और इसके बाद घटनाएं तेजी से बदलती हैं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी लेकिन इसके गाने और कुछ सीन दर्शकों के बीच चर्चा में रहे। अक्षय कुमार से जुड़ा शूटिंग का यह किस्सा आज भी उनके शुरुआती फिल्मी दौर की अलग और बेफिक्र कार्यशैली की याद दिलाता है।

  • यश की टॉक्सिक रिलीज पर तड़के सिनेमाघरों के बाहर उमड़ा उत्साह, फैंस ने डीजे और डांस के साथ मनाया जश्न

    यश की टॉक्सिक रिलीज पर तड़के सिनेमाघरों के बाहर उमड़ा उत्साह, फैंस ने डीजे और डांस के साथ मनाया जश्न


    नई दिल्ली ।
    यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म की रिलीज को लेकर लंबे समय से उत्साहित प्रशंसकों ने इसे सामान्य फिल्म प्रदर्शन की तरह नहीं, बल्कि किसी उत्सव की तरह मनाया। कर्नाटक में कई सिनेमाघरों के बाहर सुबह से ही दर्शकों की भीड़ देखने को मिली। कुछ प्रशंसक तड़के करीब तीन बजे ही सिनेमाघरों में पहुंच गए और फिल्म के प्रदर्शन का इंतजार करते नजर आए।

    फिल्म की रिलीज के मौके पर प्रशंसकों का उत्साह खास तौर पर सिनेमाघरों के बाहर दिखाई दिया। कई जगहों पर डीजे और संगीत के बीच दर्शक नाचते नजर आए। कुछ प्रशंसक झंडे लहराते हुए अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे, जबकि कुछ ने दोस्तों को कंधे पर उठाकर जश्न मनाया। सिनेमाघरों के आसपास का माहौल काफी उत्साहपूर्ण रहा और प्रशंसकों ने यश के प्रति अपनी दीवानगी खुलकर जाहिर की।

    कर्नाटक के एक सिनेमाघर के बाहर दर्शकों की लंबी कतार भी दिखाई दी। लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए फिल्म देखने के लिए उत्सुक नजर आए। सिनेमाघर के बाहर यश की बड़ी तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया। कई दर्शक फिल्म के पहले शो का हिस्सा बनने के लिए सुबह-सुबह ही पहुंच गए थे।

    कुछ स्थानों पर फिल्म की रिलीज को लेकर विशेष आयोजन भी देखने को मिले। सिनेमाघर के बाहर बनाए गए मंच पर प्रशंसक संगीत की धुन पर डांस करते नजर आए। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा दर्शकों ने हिस्सा लिया। फिल्म को लेकर पहले से बने माहौल के बीच रिलीज के दिन प्रशंसकों की यह प्रतिक्रिया यश की लोकप्रियता को दर्शाती है।

    इसी बीच यश की मौजूदगी से जुड़े एक वीडियो ने भी प्रशंसकों का ध्यान खींचा। इसमें अभिनेता एक मॉल में नजर आए, जहां उनकी एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। प्रशंसक मॉल की छत और आसपास के स्थानों से यश को देखने की कोशिश करते दिखाई दिए। अभिनेता को देखने के लिए उमड़ी भीड़ ने उनके प्रति प्रशंसकों की उत्सुकता को और स्पष्ट किया।

    हालांकि फिल्म की रिलीज के साथ सभी दर्शकों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं रही। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में फिल्म देखकर सिनेमाघर से बाहर निकलने वाले दर्शकों से उनकी राय पूछी गई। इनमें एक दर्शक की प्रतिक्रिया से ऐसा संकेत मिला कि वह फिल्म से प्रभावित नहीं हुआ। इससे यह भी सामने आया कि शुरुआती दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं।

    टॉक्सिक में यश के साथ कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और नयनतारा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म को लेकर यश के प्रशंसकों के बीच पहले से काफी उत्सुकता बनी हुई थी। रिलीज के दिन सिनेमाघरों के बाहर दिखाई दिया उत्साह इसी प्रतीक्षा का परिणाम माना जा रहा है।

    फिलहाल फिल्म को लेकर दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं में उत्साह और निराशा दोनों तरह के संकेत सामने आए हैं। आने वाले दिनों में दर्शकों की व्यापक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि टॉक्सिक कहानी और अभिनय के स्तर पर कितनी मजबूत साबित होती है और बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन कैसा रहता है।

  • महिला समानता दिवस पर सोमी अली ने कहा, सिर्फ चर्चा से नहीं सिस्टम और सोच बदलने से महिलाओं को वास्तविक बराबरी मिलेगी

    महिला समानता दिवस पर सोमी अली ने कहा, सिर्फ चर्चा से नहीं सिस्टम और सोच बदलने से महिलाओं को वास्तविक बराबरी मिलेगी

    नई दिल्ली । महिला समानता दिवस के अवसर पर अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सोमी अली ने महिलाओं की वास्तविक स्थिति और समानता को लेकर अपने विचार साझा किए। करीब दो दशक से महिलाओं के साथ काम करने के दौरान हिंसा और असुरक्षा झेल रही महिलाओं के अनुभवों को करीब से देखने वाली सोमी अली का कहना है कि केवल बराबरी की बातें करने से बदलाव नहीं आएगा। इसके लिए व्यवस्था, सामाजिक सोच और संस्थागत प्रतिक्रिया में ठोस परिवर्तन जरूरी है।

    सोमी अली के अनुसार महिलाओं के मुद्दों पर पहले की तुलना में अधिक बातचीत हो रही है और यह सकारात्मक बदलाव है। लंबे समय तक महिलाओं का चुप रहना सामान्य माना जाता था, जबकि कई मामलों में यही चुप्पी अत्याचार करने वालों को बचाती रही। हालांकि, उनका मानना है कि आवाज उठाने के बाद वास्तविक बदलाव तभी माना जाएगा जब अदालतों, पुलिस, परिवारों और सामाजिक व्यवस्था की प्रतिक्रिया भी बदले।

    उन्होंने विशेष रूप से उन महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई जो तत्काल खतरे में होती हैं। उनके मुताबिक ऐसी महिलाओं को सहायता मिलने में अक्सर समय लग जाता है। सुरक्षा आदेश, आश्रय और कानूनी प्रक्रिया जैसी व्यवस्थाओं के बीच महिला को कई बार उसी परिस्थिति में रहना पड़ता है जहां उसकी सुरक्षा को खतरा बना रहता है। सोमी अली का कहना है कि सबसे जरूरी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे गंभीर खतरे में मौजूद महिला को जल्द सुरक्षित स्थान मिल सके।

    महिला सशक्तीकरण के लिए आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा और कानूनी सहायता को भी उन्होंने महत्वपूर्ण माना। लेकिन उनके मुताबिक इन सुविधाओं के साथ आत्मविश्वास भी जरूरी है। कई महिलाएं संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद डर, सामाजिक दबाव या दूसरों की स्वीकृति की आवश्यकता के कारण अपने फैसले लेने में कठिनाई महसूस करती हैं। इसके विपरीत कुछ महिलाओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लिए सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन का रास्ता चुना है।

    सोमी अली ने समानता की बहस में संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि महिला समानता का अर्थ हर परिस्थिति में महिला को सही और पुरुष को गलत मान लेना नहीं है। उनके अनुभव में महिलाओं के साथ गंभीर अत्याचार के मामले वास्तविक हैं, लेकिन किसी भी पक्ष को बिना तथ्य के हमेशा सही मान लेना न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है।

    उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं और पुरुषों दोनों को इंसान के रूप में देखा जाना चाहिए, जिनके व्यवहार और परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। उनके अनुसार वास्तविक समानता का आधार किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि तथ्य और सच के आधार पर न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए।

    सोमी अली ने यह भी कहा कि झूठे आरोपों की स्थिति उन महिलाओं के लिए भी नुकसानदेह हो सकती है जो वास्तव में हिंसा का सामना कर रही हैं। इससे वास्तविक पीड़ितों की शिकायतों पर संदेह बढ़ सकता है और न्याय पाने की प्रक्रिया कठिन हो सकती है। इसलिए उनका जोर इस बात पर है कि कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति की सुरक्षा हो, लेकिन गलत को केवल किसी पक्ष के आधार पर सही न ठहराया जाए।

    महिला समानता दिवस पर उनका संदेश महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के साथ जिम्मेदारी तथा निष्पक्षता को जोड़ता है। उनके मुताबिक बदलाव तभी सार्थक होगा जब महिलाओं को अपनी बात कहने का भरोसा मिले, खतरे के समय व्यवस्था तेजी से काम करे और समाज समानता को केवल चर्चा का विषय न रखकर व्यवहार और संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाए।

  • इला अरुण ने फेमिनिज्म और महिलाओं की बदलती स्थिति पर कहा, बराबरी के साथ जिम्मेदारी और शोषण के खिलाफ आवाज जरूरी

    इला अरुण ने फेमिनिज्म और महिलाओं की बदलती स्थिति पर कहा, बराबरी के साथ जिम्मेदारी और शोषण के खिलाफ आवाज जरूरी

    नई दिल्ली ।महिला समानता दिवस के मौके पर अभिनेत्री और गायिका इला अरुण ने सिनेमा में महिलाओं की स्थिति, अपने करियर और फेमिनिज्म को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने चर्चित गीत चोली के पीछे क्या है से जुड़ी पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि इस गीत ने उन्हें लोकप्रियता तो दी, लेकिन इसके साथ उनके ऊपर एक ऐसा ठप्पा भी लगा, जिसके कारण उनके दूसरे कामों पर पर्याप्त ध्यान नहीं गया।

    इला अरुण ने कहा कि लोगों ने उनके कई अन्य गीतों और एल्बमों को उस तरह नहीं सुना, जिस तरह एक चर्चित फिल्मी गीत को सुना गया। उनका मानना है कि सिनेमा का प्रभाव बहुत व्यापक होता है और किसी एक लोकप्रिय गीत या किरदार के आधार पर कलाकार की पूरी पहचान तय कर देना उचित नहीं है।

    उन्होंने अपने अभिनय करियर के अलग-अलग किरदारों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक कलाकार को लगातार नई भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। उन्होंने स्क्रीन पर मां, सौतेली मां, मजबूत महिला और वेश्या जैसे अलग-अलग किरदार निभाए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी भूमिका उनकी वास्तविक व्यक्तिगत पहचान को परिभाषित नहीं करती। उनके अनुसार कलाकार के किरदार और उसके निजी व्यक्तित्व के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    समाज और महिलाओं के रिश्ते पर इला अरुण ने कहा कि वह न तो समाज के दबाव में रहती हैं और न ही समाज को पूरी तरह नजरअंदाज करती हैं। उनका मानना है कि व्यक्ति और समाज साथ-साथ चलते हैं। उन्होंने खास तौर पर महिलाओं द्वारा मिले समर्थन और प्यार को महत्वपूर्ण बताया।

    फिल्म उद्योग में महिलाओं के साथ भेदभाव के सवाल पर इला ने अपने अनुभव को अलग तरीके से रखा। उन्होंने कहा कि बतौर चरित्र कलाकार उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ऐसा भेदभाव बहुत अधिक महसूस नहीं हुआ, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके दौर में महिलाओं को लेकर सोच में अंतर नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं के लिए केंद्रित और मजबूत भूमिकाओं वाली कहानियां अपेक्षाकृत कम लिखी जाती थीं।

    इला के अनुसार, समय के साथ इस स्थिति में बदलाव आया है। अब महिलाओं को केंद्र में रखकर कहानियां लिखी जा रही हैं और महिला प्रधान भूमिकाओं के लिए पहले की तुलना में अधिक अवसर दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि दर्शकों की पसंद भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि दर्शक महिलाओं की मजबूत कहानियों वाली फिल्में देखते हैं तो फिल्म उद्योग भी ऐसी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए आगे आता है।

    देश में महिलाओं की स्थिति पर इला अरुण ने कहा कि पूरे भारत को एक ही नजरिए से देखना संभव नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने माना कि कई जगहों पर आज भी लड़कियों को शिक्षा नहीं मिलती और कम उम्र में विवाह जैसी समस्याएं मौजूद हैं, लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि देश धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने पुरुषों के नजरिए में भी बदलाव की बात कही। उनके अनुसार आज कई पुरुष अधिक संवेदनशील हो रहे हैं, परिवार में जिम्मेदारियां साझा कर रहे हैं और अपनी पत्नियों तथा बच्चों के प्रति सहयोगी भूमिका निभा रहे हैं।

    फेमिनिज्म पर इला अरुण ने संतुलित दृष्टिकोण रखने की बात कही। उन्होंने महिलाओं के अधिकार और बराबरी की जरूरत को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि किसी भी विचार का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार बराबरी का अर्थ किसी के साथ अनुचित व्यवहार करना या जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना नहीं है।

    उन्होंने महिलाओं के शोषण के मामलों में आवाज उठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि पेशेवर जीवन में गलत व्यवहार का सामना करने वाली कई महिलाएं डर या दबाव के कारण बोल नहीं पातीं। ऐसी महिलाओं के लिए समाज और अन्य लोगों को आगे आकर समर्थन देना चाहिए। इला के विचारों में महिला समानता का अर्थ अधिकारों के साथ जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और एक दूसरे के समर्थन से जुड़ा हुआ है।

  • कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    कृति सैनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर ट्रोलिंग के बीच राहुल गांधी ने किया समर्थन, महिला की पसंद और स्वतंत्रता पर दिया संदेश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सैनन अपने रक्षाबंधन से जुड़े एक ज्वेलरी विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच चर्चा में हैं। विज्ञापन में कृति को इंडो वेस्टर्न परिधान में दिखाया गया था, जिसके बाद उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद कृति ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बात स्पष्ट की।

    कृति ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी त्योहार की भावना केवल कपड़ों से तय नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े भाव और परंपराओं के अर्थ अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई बहन के बीच सुरक्षा, स्नेह और शुभकामनाओं से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वह और उनकी बहन एक दूसरे को राखी बांधती हैं और एक दूसरे की उसी तरह देखभाल कर सकती हैं, जैसे परिवार में भाई बहन करते हैं।

    कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह तय करने का अधिकार दूसरों को नहीं होना चाहिए कि किसी महिला को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। उनकी पोस्ट का मुख्य संदेश यह था कि त्योहार की भावना को कपड़ों की शैली के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।

    इसी पोस्ट को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। उन्होंने कृति के विचारों का समर्थन करते हुए महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता की बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां करती है, यह उसकी अपनी पसंद है। उन्होंने महिलाओं को उनकी स्वतंत्रता के लिए ट्रोल किए जाने का विरोध किया और पुरुषसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाया।

    राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गया। कृति सैनन के विज्ञापन को लेकर शुरू हुई बहस अब महिलाओं के पहनावे, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक टिप्पणी की सीमाओं तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों में कलाकारों के कपड़ों और उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को लेकर अलग अलग विचार सामने आते रहे हैं।

    कृति ने अपने संदेश में रक्षाबंधन की पारिवारिक भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनके लिए राखी केवल किसी एक पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच एक दूसरे की सुरक्षा, खुशी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी है। उन्होंने अपने परिवार और पालतू कुत्तों के संदर्भ में भी स्नेह की इसी भावना को व्यक्त किया।

    विज्ञापन में कृति के परिधान को लेकर उठी आपत्तियों के बावजूद अभिनेत्री ने अपने संदेश में विवाद को बढ़ाने के बजाय त्योहार के मूल भाव पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सांस्कृतिक मूल्यों को केवल पहनावे के आधार पर निर्धारित करना उचित नहीं है।

    इस पूरे विवाद में राहुल गांधी का कृति की पोस्ट को साझा करना महत्वपूर्ण रहा। उनके समर्थन से मुद्दे को राजनीतिक संदर्भ भी मिला। हालांकि, मूल विवाद कृति के विज्ञापन और उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर हुई आलोचना से शुरू हुआ था।

    काम के मोर्चे पर कृति सैनन हाल में फिल्म कॉकटेल में नजर आई थीं, जिसमें उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर भी थे। फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसके बाद कृति के अगले प्रोजेक्ट को लेकर प्रशंसकों में उत्सुकता बनी हुई है। फिलहाल रक्षाबंधन विज्ञापन से जुड़ा विवाद उनके सार्वजनिक चर्चाओं में बने रहने की वजह बना हुआ है।

  • सलमान खान को कोर्ट का समन जैसा नोटिस! शोरूम में कथित धोखाधड़ी के मामले में बहन अलवीरा भी तलब

    सलमान खान को कोर्ट का समन जैसा नोटिस! शोरूम में कथित धोखाधड़ी के मामले में बहन अलवीरा भी तलब


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। चंडीगढ़ की जिला अदालत ने सलमान खान और उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री समेत कई लोगों को कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में नोटिस जारी किया है। यह विवाद मनीमाजरा इलाके में Being Human ब्रांड के ज्वेलरी शोरूम खोलने से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले में शिकायतकर्ता स्थानीय बिजनेसमैन अरुण गुप्ता हैं जिन्होंने आरोप लगाया है कि शोरूम शुरू करने को लेकर उनके साथ किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया और उन्हें कथित तौर पर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि अभी अदालत ने आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और मामले की शुरुआती कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
    शिकायत के मुताबिक यह मामला Style Quotient Jewellery Private Limited से जुड़ा है। इसी कंपनी के साथ शोरूम को लेकर कारोबारी समझौता किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें Being Human ब्रांड के तहत ज्वेलरी शोरूम शुरू करने के लिए तैयार किया गया था लेकिन बाद में परिस्थितियां उनके लिए मुश्किल होती चली गईं। उनका दावा है कि जिस तरह से कारोबार को लेकर बातें और आश्वासन दिए गए थे उन्हें उस रूप में पूरा नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया और अपनी शिकायत के आधार पर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

    इस मामले में अदालत ने सिर्फ सलमान खान को ही नोटिस नहीं भेजा है बल्कि उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री का नाम भी इसमें शामिल है। इसके अलावा Style Quotient Jewellery Private Limited से जुड़े डायरेक्टर संतोष श्रीवास्तव और प्रसाद बिंदु माधव कापड़े को भी नोटिस जारी किया गया है। अदालत का उद्देश्य फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष जानना है ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे बढ़ाई जा सके।

    खास बात यह है कि अदालत की ओर से जारी नोटिस BNSS की धारा 223 के तहत बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि सलमान खान या अन्य संबंधित लोगों को इस मामले में दोषी ठहरा दिया गया है। यह प्रक्रिया शिकायत पर आगे बढ़ने से पहले संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने से जुड़ी है। इसलिए इस मामले में आरोप और अदालत के अंतिम निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    अदालत ने सभी संबंधित लोगों को 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे उपस्थित होने का निर्देश दिया है। वे खुद या अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं। अब इस तारीख पर होने वाली कार्यवाही काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी दौरान शिकायत से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्ष अपनी सफाई पेश कर सकते हैं।

    यह विवाद सलमान खान के चर्चित Being Human ब्रांड से जुड़ा होने के कारण भी खासा चर्चा में है। Being Human ब्रांड का नाम सलमान खान से लंबे समय से जुड़ा रहा है और इसके तहत फैशन तथा ज्वेलरी से जुड़े उत्पादों का कारोबार भी किया जाता है। ऐसे में शोरूम से जुड़ा यह कानूनी विवाद अभिनेता के लिए एक और चुनौती बनकर सामने आया है। फिलहाल मामले में अदालत की अगली सुनवाई का इंतजार है और 5 अक्टूबर को होने वाली कार्यवाही से साफ होगा कि इस शिकायत पर आगे किस दिशा में कानूनी कदम बढ़ता है।

  • कुकू कोहली संग रिश्ते पर लगे थे घर तोड़ने के आरोप, अरुणा ईरानी ने क्यों चुनी बिना बच्चों की जिंदगी?

    कुकू कोहली संग रिश्ते पर लगे थे घर तोड़ने के आरोप, अरुणा ईरानी ने क्यों चुनी बिना बच्चों की जिंदगी?


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर कुकू कोहली अब इस दुनिया में नहीं हैं। 25 अगस्त को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में 77 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। बताया गया कि हार्ट अटैक के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। कुकू कोहली ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं और अजय देवगन को फूल और कांटे के जरिए बतौर अभिनेता लॉन्च किया। उनके निधन के बाद जहां फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है वहीं उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी पुरानी बातें भी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उनकी और दिग्गज अभिनेत्री अरुणा ईरानी की प्रेम कहानी की हो रही है।

    कुकू कोहली की पहली शादी रीता कोहली से हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां करिश्मा और पूजा कोहली हुईं। इसके बाद उनकी जिंदगी में अभिनेत्री अरुणा ईरानी की एंट्री हुई। दोनों की मुलाकात एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। शुरुआती दौर में दोनों के बीच ज्यादा अच्छी बॉन्डिंग नहीं थी। बताया जाता है कि कुकू कोहली के सेट पर देर से पहुंचने की वजह से अरुणा उनसे नाराज रहती थीं। बाद में कुकू उन्हें मनाने लगे और इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती चली गईं।

    अरुणा ईरानी ने अपने पुराने इंटरव्यू में बताया था कि जब उनकी मुलाकात कुकू कोहली से हुई थी तब उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वह शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं। जब दोनों के रिश्ते की खबर सामने आई तो अरुणा को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्हें घर तोड़ने वाली दूसरी औरत तक कहा गया। हालांकि अरुणा ईरानी ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि उन्होंने किसी का घर तोड़ने के इरादे से यह रिश्ता नहीं बनाया था। उनके मुताबिक रिश्तों में परिस्थितियां कई बार ऐसी बन जाती हैं जिन्हें बाहर से देखने वाला व्यक्ति पूरी तरह नहीं समझ सकता।

    कुकू कोहली की पहली पत्नी के निधन के बाद अरुणा ईरानी ने अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बात करनी शुरू की। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। लेकिन इस रिश्ते में एक ऐसा फैसला भी था जिसने अरुणा ईरानी की जिंदगी को हमेशा के लिए अलग दिशा दे दी। शादी के बाद उन्होंने मां न बनने का फैसला किया।

    अरुणा ईरानी ने खुद इसके पीछे दो बड़ी वजहें बताई थीं। पहली वजह दोनों के बीच उम्र का अंतर था। उन्हें लगता था कि अगर इस उम्र में वह मां बनती हैं तो बच्चे और उनके बीच उम्र का फासला काफी ज्यादा होगा। उन्हें डर था कि भविष्य में यह अंतर बच्चे और उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

    दूसरी वजह इससे भी ज्यादा भावनात्मक थी। अरुणा नहीं चाहती थीं कि उनका बच्चा बड़ा होकर अपने पिता को लेकर उनसे ऐसे सवाल पूछे जिनका वह स्पष्ट जवाब न दे पाएं। उन्हें यह चिंता भी थी कि अगर कभी बच्चे को रात के समय पिता की जरूरत हुई तो वह उसकी मदद के लिए उन्हें बुलाने की स्थिति में नहीं होंगी। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि जिस उलझन और परेशानी का सामना उन्हें खुद करना पड़ा है उसका असर वह अपने बच्चे की जिंदगी पर नहीं पड़ने देंगी।

    इस तरह अरुणा ईरानी और कुकू कोहली की प्रेम कहानी भले ही विवादों में रही लेकिन अरुणा ने अपनी जिंदगी का यह बेहद निजी फैसला सोच समझकर लिया। कुकू कोहली के निधन के बाद उनकी यह कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है और यह बताती है कि बॉलीवुड की चमकती दुनिया के पीछे सितारों की निजी जिंदगी में कितने मुश्किल और भावनात्मक फैसले छिपे होते हैं।

  • 18 साल बाद फिर साथ आएंगे अक्षय-सैफ: ‘हैवान’ से पहले देखिए 6 फिल्मों में कैसी रही जोड़ी की किस्मत

    18 साल बाद फिर साथ आएंगे अक्षय-सैफ: ‘हैवान’ से पहले देखिए 6 फिल्मों में कैसी रही जोड़ी की किस्मत


    नई दिल्ली। अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में है। दोनों कलाकार फिल्म हैवान के जरिए लंबे समय बाद एक ही प्रोजेक्ट का हिस्सा बने हैं हालांकि इस बार दोनों एक साथ स्क्रीन पर दोस्त या साथी के तौर पर नहीं बल्कि अलग अलग भूमिकाओं में नजर आएंगे। सैफ अली खान फिल्म में लीड रोल निभा रहे हैं जबकि अक्षय कुमार विलेन के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म की रिलीज से पहले दर्शकों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर अतीत में जब अक्षय और सैफ एक साथ फिल्मों में आए तो बॉक्स ऑफिस पर उनका प्रदर्शन कैसा रहा था।

    अक्षय कुमार और सैफ अली खान ने अपने करियर में करीब छह फिल्मों में साथ काम किया है। इन फिल्मों में कुछ को शानदार सफलता मिली तो कुछ फिल्मों का प्रदर्शन औसत या मिला जुला रहा। यानी दोनों की जोड़ी ने कई यादगार फिल्में जरूर दीं लेकिन केवल इन दोनों सितारों का साथ आना किसी फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं रहा। इसके बावजूद दोनों कलाकारों की स्क्रीन केमिस्ट्री और अलग अलग अंदाज दर्शकों को पसंद आया है और यही वजह है कि हैवान को लेकर भी उम्मीदें काफी ज्यादा हैं।

    दोनों की सबसे चर्चित फिल्मों में साल 1994 में रिलीज हुई मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल करने वाली फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में अक्षय कुमार ने सख्त मिजाज पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया था जबकि सैफ अली खान एक ऐसे अभिनेता के रोल में नजर आए थे जो अपने अभिनय को बेहतर बनाने के लिए अक्षय के किरदार के साथ जुड़ जाता है। फिल्म में एक्शन कॉमेडी और दोनों कलाकारों की शानदार टाइमिंग ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था। इसके गाने भी उस दौर में काफी लोकप्रिय हुए थे।

    साल 1994 में ही दोनों कलाकार फिल्म ये दिल्लगी में भी नजर आए। इसके बाद 1996 में तू चोर मैं सिपाही में दोनों ने साथ काम किया। साल 1998 में कीमत और 1999 में आरजू में भी अक्षय और सैफ की जोड़ी देखने को मिली। दोनों की साथ में आखिरी चर्चित फिल्मों में 2008 की टशन शामिल है। इन फिल्मों में दोनों ने अलग अलग तरह के किरदार निभाए और कई फिल्मों में उनकी जोड़ी ने दर्शकों का मनोरंजन किया।

    अब हैवान को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कहानी और कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर है। फिल्म में सैफ अली खान मुख्य किरदार में हैं जबकि अक्षय कुमार पहली बार उनके सामने खलनायक के अंदाज में दिखाई देंगे। दोनों के बीच टकराव फिल्म की सबसे बड़ी खासियतों में से एक माना जा रहा है। ऐसे में दर्शकों की नजर इस बात पर होगी कि दोनों दिग्गज अभिनेता एक दूसरे के सामने किस तरह का स्क्रीन प्रेजेंस दिखाते हैं।

    हैवान की उम्मीदों को बढ़ाने वाली दूसरी बड़ी वजह यह है कि यह एक सफल साउथ फिल्म का हिंदी रीमेक बताई जा रही है। मूल कहानी दर्शकों के बीच पहले ही अपनी पहचान बना चुकी है और ऐसे में हिंदी दर्शकों के लिए इसे बड़े सितारों के साथ पेश किया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन कर रहे हैं। प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी इससे पहले हेरा फेरी और भूल भुलैया जैसी बेहद लोकप्रिय फिल्मों में काम कर चुकी है। यही कारण है कि हैवान को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता और बढ़ गई है।

    अक्षय और सैफ का पिछला रिकॉर्ड भले ही पूरी तरह ब्लॉकबस्टर नहीं रहा हो लेकिन दोनों ने मिलकर कुछ ऐसी फिल्में जरूर दी हैं जो आज भी दर्शकों को याद हैं। मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी जैसी सफलता इस जोड़ी के खाते में दर्ज है जबकि अन्य फिल्मों का प्रदर्शन अलग अलग रहा। अब हैवान में दोनों का समीकरण पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। सैफ जहां कहानी के केंद्र में होंगे वहीं अक्षय का विलेन अवतार फिल्म में संघर्ष को नया रंग देगा।

    फिल्म की रिलीज के बाद ही साफ होगा कि अक्षय और सैफ की यह नई जोड़ी पुराने बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड को दोहरा पाती है या नहीं। फिलहाल दोनों सितारों की लोकप्रियता प्रियदर्शन का निर्देशन और साउथ की सफल कहानी का आधार हैवान को रिलीज से पहले ही एक चर्चित फिल्म बना चुका है।