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  • हॉलीवुड से मिला बड़ा सम्मान फराह खान बनीं ऑस्कर एकेडमी की सदस्य अब वोटिंग प्रक्रिया में निभाएंगी अहम भूमिका

    हॉलीवुड से मिला बड़ा सम्मान फराह खान बनीं ऑस्कर एकेडमी की सदस्य अब वोटिंग प्रक्रिया में निभाएंगी अहम भूमिका


    नई दिल्ली । फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान के लिए वर्ष 2026 एक बेहद खास उपलब्धि लेकर आया है। भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान दिलाते हुए उन्हें एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया गया है। यही संस्था हर साल दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कारों का आयोजन करती है। इस सम्मान के साथ फराह खान अब उन चुनिंदा फिल्मी हस्तियों की सूची में शामिल हो जाएंगी जिन्हें विश्व सिनेमा के सबसे बड़े मंच पर अपनी भागीदारी निभाने का अवसर मिलता है।

    इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी खुद फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रशंसकों के साथ साझा की। उन्होंने इस सम्मान के लिए एकेडमी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित समूह का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और खुशी दोनों का विषय है। उनके इस संदेश के सामने आते ही फिल्म जगत के कलाकारों और प्रशंसकों ने उन्हें लगातार शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया।

    हर वर्ष एकेडमी दुनिया भर के उन कलाकारों तकनीशियनों और फिल्म विशेषज्ञों को सदस्य बनने का निमंत्रण देती है जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस वर्ष कुल 529 नए सदस्यों को आमंत्रित किया गया है जिनमें फराह खान का नाम भी शामिल है। सदस्यता स्वीकार करने के बाद उन्हें ऑस्कर पुरस्कारों की नामांकन और विजेताओं के चयन की प्रक्रिया में मतदान का अधिकार मिलेगा। यह जिम्मेदारी केवल उन लोगों को मिलती है जिनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और विश्वसनीयता हासिल होती है।

    फराह खान पिछले कई दशकों से भारतीय फिल्म उद्योग का अहम चेहरा रही हैं। उन्होंने बतौर कोरियोग्राफर कई यादगार गीतों को अपनी रचनात्मकता से नई पहचान दी है। इसके अलावा उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की और कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्मों की भव्यता मनोरंजन और बड़े स्तर की प्रस्तुति ने उन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अलग पहचान दिलाई है। यही वजह है कि अब उन्हें विश्व सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित संस्था का सदस्य बनने का अवसर मिला है।

    इस बार एकेडमी की आमंत्रित सूची में कई अन्य भारतीय प्रतिभाओं को भी जगह मिली है। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज के साथ वरिष्ठ संपादक ए श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया को भी सदस्यता का निमंत्रण भेजा गया है। दीपा भाटिया चार दशकों से अधिक लंबे करियर में अनेक चर्चित फिल्मों से जुड़ी रही हैं और उनकी संपादन कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। इसके अलावा कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया एनीमेशन क्षेत्र से अवनीत कौर प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ राजेश रामचंद्रन तथा विजुअल इफेक्ट्स से जुड़े बेकी ग्राहम और जय मेहता को भी इस सूची में स्थान मिला है।

    इन सभी आमंत्रित सदस्यों के शामिल होने के बाद एकेडमी के कुल सदस्यों की संख्या लगभग 11000 से अधिक हो जाएगी। ये सदस्य आने वाले वर्षों में ऑस्कर पुरस्कारों के लिए फिल्मों कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फराह खान को मिला यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी मजबूत प्रमाण है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के फिल्मकारों और कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंच पर भारत की मजबूत मौजूदगी को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।

  • वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

    वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण सामने आया है। मशहूर फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान को ऑस्कर पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ ने साल 2026 की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया है। इस विशेष आमंत्रण को स्वीकार करने के बाद फराह खान अब ऑस्कर अवॉर्ड्स की आधिकारिक वोटिंग प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकेंगी, जो भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच और प्रभाव को रेखांकित करता है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि और अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खुशी और गर्व साझा किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस बेहद सम्मानित और वैश्विक समूह का हिस्सा बनना उनके लिए एक अत्यंत सुखद और गर्व से भरा अनुभव है। वर्तमान में एक रियलिटी शो की मेजबानी कर रहीं फराह खान के लिए यह आमंत्रण उनके दशकों लंबे फिल्मी करियर और कलात्मक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

    एकेडमी हर साल सिनेमाई जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले दुनिया भर के चुनिंदा कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को अपनी सदस्यता सूची में शामिल करती है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष वैश्विक स्तर पर कुल 529 फिल्म पेशेवरों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें भारत से फराह खान के अलावा मनोरंजन जगत के कई अन्य प्रतिष्ठित नाम भी शामिल हैं। इस सूची में मशहूर फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज का नाम भी प्रमुखता से दर्ज है, जिन्होंने ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’ और ‘हैदर’ जैसी फिल्मों के माध्यम से भारतीय सिनेमा को एक नई वैचारिक और कलात्मक दिशा दी है।

    इस बार एकेडमी की सूची में भारतीय सिनेमा के परदे के पीछे काम करने वाले तकनीकी दिग्गजों को भी व्यापक प्रतिनिधित्व मिला है। दिग्गजों की इस फेहरिस्त में अनुभवी फिल्म एडिटर ए. श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया का नाम शामिल है। दीपा भाटिया ने अपने साढ़े चार दशक से अधिक लंबे शानदार करियर में ‘आरआरआर’, ‘दिल चाहता है’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘माय नेम इज़ खान’ और ‘काय पो छे’ जैसी कालजयी और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल फिल्मों में संपादन का बेहतरीन कार्य किया है। उनके इस अनुभव को अब वैश्विक स्तर पर सराहा गया है।

    इनके अतिरिक्त, भारतीय सिनेमा में अपनी वेशभूषा और कास्टिंग कला का लोहा मनवाने वाली हस्तियों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है। इनमें कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी, विख्यात कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह चयन दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा के तकनीकी और रचनात्मक दोनों ही पक्षों को समान रूप से सम्मान मिल रहा है।

    सिनेमा की आधुनिक विधाओं में भी भारतीयों की प्रतिभा को इस आमंत्रण के जरिए स्वीकार किया गया है। एनीमेशन श्रेणी में भारत की अवनीत कौर को आमंत्रित किया गया है, जबकि प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राजेश रामचंद्रन को सदस्यता का प्रस्ताव मिला है। वहीं, विजुअल इफेक्ट्स जैसी जटिल तकनीकी श्रेणी में बेकी ग्राहम और जय मेहता को इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनाया गया है। इन पेशेवरों के शामिल होने से ऑस्कर के मंच पर भारतीय दृष्टिकोण और अधिक मजबूत होगा।

    इस आमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के बाद, ये सभी भारतीय दिग्गज दुनिया भर के लगभग 11,000 से अधिक विशिष्ट एकेडमी सदस्यों के विशेष समूह में शामिल हो जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सदस्यता के बाद इन सभी भारतीय सिनेमाई दिग्गजों को ऑस्कर अवॉर्ड्स के मुख्य नॉमिनेशन तय करने और विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को चुनने के लिए सीधे वोट देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाएगा, जिससे वैश्विक सिनेमा के निर्णयों में भारत की भागीदारी बढ़ेगी।

  • बिना बजट और बिना क्रू के रची गई कालजयी दास्तां: जब गांव के बच्चों की सादगी ने 'विलेज रॉकस्टार्स' को दिलाया नेशनल अवॉर्ड

    बिना बजट और बिना क्रू के रची गई कालजयी दास्तां: जब गांव के बच्चों की सादगी ने 'विलेज रॉकस्टार्स' को दिलाया नेशनल अवॉर्ड

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अमूमन करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट, चमचमाती लाइट्स, नामचीन सितारों और सैकड़ों लोगों के क्रू को ही सफलता की गारंटी माना जाता है। लेकिन असम के एक सुदूर गांव से निकलकर आई एक छोटी सी फिल्म ने फिल्म निर्माण के इन तमाम स्थापित पैमानों और ढर्रों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ की, जिसे भारतीय सिनेमा की एक ऐसी जादुई और ऐतिहासिक कृति माना जाता है, जिसने लगभग शून्य या कहें ना के बराबर संसाधनों के इस्तेमाल से बनकर सीधे देश का सर्वोच्च सिनेमाई सम्मान यानी नेशनल अवॉर्ड अपने नाम कर लिया था।

    इस फिल्म के निर्माण की कहानी किसी सिनेमाई पटकथा से कम दिलचस्प नहीं है। फिल्म की निर्देशक रीमा दास ने इस पूरी परियोजना को बिना किसी बड़े प्रोड्यूसर या बैनर के सहयोग के अकेले ही शुरू किया था। उनके पास फिल्म बनाने के लिए भारी-भरकम बजट नहीं था, इतना कम फंड था कि जितने में शायद कोई शॉर्ट फिल्म बनाना भी मुमकिन नहीं होता। ऐसे में उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए एक साधारण सा डीएसएलआर (DSLR) कैमरा उठाया और सीधे अपने पैतृक गांव की तरफ रुख कर लिया। इस छोटे और साधारण कैमरे का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि गांव के सीधे-साधे लोग कैमरे को देखकर बिल्कुल भी असहज नहीं हुए और उनके भीतर का स्वाभाविक अभिनय खुलकर सामने आ सका।

    फिल्म की मेकिंग के दौरान संसाधनों की कमी को रीमा दास ने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। फिल्म के पास न तो कोई लाइटिंग टीम थी और न ही लाइटमैन का कोई क्रू था। इस खर्च से बचने के लिए उन्होंने पूरी फिल्म की शूटिंग सुबह और शाम के समय मिलने वाली कुदरती और प्राकृतिक रोशनी में की। फिल्म में जब भी और जहां भी किसी अतिरिक्त तकनीकी मदद की जरूरत पड़ती, तो गांव के स्थानीय लोग खुद-ब-खुद आगे आकर हाथ बंटा देते थे। रीमा ने न केवल फिल्म का निर्देशन किया, बल्कि सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, स्क्रीनप्ले और यहां तक कि कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग का जिम्मा भी खुद अपने कंधों पर उठाया।

    फिल्म के लिए प्रोफेशनल एक्टर्स को हायर करना और उनके बजट का इंतजाम करना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसका समाधान निकालने के लिए रीमा दास ने गांव के ही बच्चों को धीरे-धीरे अभिनय की बुनियादी ट्रेनिंग दी और उन्हें ही अपनी फिल्म के मुख्य किरदारों में कास्ट कर लिया। इन बच्चों के लिए यह पूरी तरह से सिनेमाई डेब्यू था, लेकिन स्क्रीन पर उनकी मासूमियत और सादगी ने ऐसा जादू बिखेरा कि बड़े-बड़े मंझे हुए कलाकार भी उनके सामने फीके नजर आने लगे। जब यह आसान और सादगी से भरी फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हुई, तो इसने न केवल समीक्षकों को हैरान किया बल्कि नेशनल अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया।

    इस अभूतपूर्व सफलता के बाद, साल 2024 में इस फिल्म का सीक्वल भी तैयार किया गया। दिलचस्प बात यह है कि इस दूसरे भाग के निर्माण में भी रीमा दास को उसी गांव के लोगों और बच्चों का पूरा सहयोग मिला, जिन्होंने पहली बार में फिल्म को फर्श से अर्श पर पहुंचाया था। भारतीय सिनेमा में न्यूनतम संसाधनों के साथ अधिकतम प्रभाव छोड़ने का यह अपनी तरह का इकलौता उदाहरण है। सादगी और कड़े संघर्ष से उपजी कला की यह अद्भुत मिसाल वर्तमान में ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है, जो स्वतंत्र सिनेमा के क्षेत्र में एक कड़े मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है।

  • सीमित बजट और 75 शिफ्ट का सटीक गणित: 'वेलकम टू द जंगल' की रिकवरी रणनीति ने बदला बॉलीवुड का पुराना ढर्रा, मुनाफे में निर्देशक अहमद खान की मल्टीस्टारर फिल्म

    सीमित बजट और 75 शिफ्ट का सटीक गणित: 'वेलकम टू द जंगल' की रिकवरी रणनीति ने बदला बॉलीवुड का पुराना ढर्रा, मुनाफे में निर्देशक अहमद खान की मल्टीस्टारर फिल्म

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित मल्टीस्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही है। इसी बीच फिल्म के निर्देशक अहमद खान ने इसके निर्माण, बजट नियंत्रण और कुशल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। आम तौर पर बड़े सितारों से सजी फिल्मों का बजट आसमान छू जाता है, लेकिन अहमद खान ने एक सटीक रणनीति के तहत इस फिल्म को बेहद नियंत्रित बजट में पूरा कर फिल्म उद्योग के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है। फिल्म ने न केवल अपनी लागत वसूल कर ली है, बल्कि अब टिकट खिड़की पर होने वाली हर कमाई सीधे तौर पर इसके मुनाफे में जुड़ रही है।

    निर्देशक अहमद खान के अनुसार, इस फिल्म में तीस से भी अधिक स्थापित और दिग्गज कलाकारों की फौज शामिल थी, जिसके बावजूद उन्होंने फिल्म की कुल निर्माण लागत को 115 से 125 करोड़ रुपये के दायरे में ही सीमित रखा। इस बजट में कलाकारों की फीस, एक्शन सीक्वेंस, भव्य गानों की शूटिंग और यहां तक कि ब्याज की रकम भी शामिल है। फिल्म निर्माण की इस लागत को थिएटर्स में रिलीज होने से पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सैटेलाइट राइट्स, म्यूजिक और ओवरसीज राइट्स के जरिए पूरी तरह सुरक्षित और रिकवर कर लिया गया था। यही वजह है कि फिल्म अब बॉक्स ऑफिस पर जो भी कलेक्शन कर रही है, वह फिल्म के निर्माताओं के लिए शुद्ध लाभ साबित हो रहा है।

    अहमद खान ने फिल्म की शूटिंग के दौरान समय प्रबंधन और अनुशासन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस विशालकाय स्टारकास्ट के साथ फिल्म की पूरी शूटिंग महज 75 शिफ्टों में संपन्न कर ली गई थी। प्रत्येक शिफ्ट की अवधि आठ घंटे निर्धारित थी, जिससे न केवल समय की बचत हुई बल्कि फिजूलखर्ची पर भी पूरी तरह लगाम लगी रही। शुरुआत में यह फिल्म साल 2024 के क्रिसमस के मौके पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन इसके जटिल वीएफएक्स कार्य और बड़े पैमाने पर फैले शूटिंग शेड्यूल को दुरुस्त करने के लिए इसकी रिलीज को आगे बढ़ा दिया गया था। इसके बाद फिल्म को 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में उतारा गया, जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

    बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के प्रदर्शन की बात करें तो अक्षय कुमार अभिनीत इस फिल्म ने भारतीय बाजार में अब तक कुल 94.54 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज कर लिया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी फिल्म का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है, जहां इसने शुरुआती चार दिनों के भीतर ही 100 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है। ट्रेड एनालिस्ट्स का अनुमान है कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए यह फिल्म अपने पहले वीकेंड के समाप्त होने तक 200 करोड़ रुपये के प्रतिष्ठित क्लब में आसानी से शामिल हो जाएगी।

    ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की इस तीसरी किस्त में नाना पाटेकर और अनिल कपूर जैसे सदाबहार कलाकारों की कमी को लेकर भी अहमद खान और अक्षय कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। अक्षय कुमार ने एक बातचीत में कहा कि वे दोनों ही इस फ्रेंचाइजी के अभिन्न अंग और परिवार के सदस्य की तरह हैं। इस बार कहानी की मांग और परिस्थितियों के चलते वे फिल्म का हिस्सा नहीं बन सके, लेकिन यदि भविष्य में इस फ्रेंचाइजी का चौथा भाग बनाया जाता है, तो उसमें नाना पाटेकर और अनिल कपूर की वापसी निश्चित रूप से होगी। फिलहाल सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, अरशद वारसी और राजपाल यादव जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने में पूरी तरह सफल साबित हो रही है।

  • 'ग्लैमर के पीछे छिपी रही मेरी प्रतिभा', ज़ीनत अमान ने पुरानी कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

    'ग्लैमर के पीछे छिपी रही मेरी प्रतिभा', ज़ीनत अमान ने पुरानी कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सदाबहार और दिग्गज अभिनेत्री ज़ीनत अमान ने अपने दशकों पुराने फिल्मी सफर और समकालीन कार्यसंस्कृति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अतीत के अनुभवों को साझा करते हुए मनोरंजन जगत में अभिनेत्रियों के प्रति बनी संकीर्ण मानसिकता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ज़ीनत अमान के अनुसार, लंबे समय तक फिल्म उद्योग में उन्हें केवल एक ‘ग्लैमरस आइकन’ के रूप में ही देखा और प्रस्तुत किया गया, जिसके कारण उनकी वास्तविक अभिनय क्षमता, रचनात्मक सोच और बौद्धिक क्षमता को वह स्थान और सम्मान नहीं मिल सका, जिसकी वे हकदार थीं। पर्दे की चमकीली दुनिया ने उनके वास्तविक और गंभीर व्यक्तित्व को दर्शकों के सामने आने ही नहीं दिया।

    अपने दौर की सबसे चर्चित अभिनेत्रियां होने के बावजूद ज़ीनत अमान को इस बात का मलाल है कि समाज और फिल्मकारों ने उनके किरदारों के आधार पर ही उनकी एक अपरिवर्तनीय छवि गढ़ दी थी। उन्होंने बताया कि जब लोग उनसे व्यक्तिगत जीवन में मिलते थे, तो उनके संतुलित और वैचारिक स्वभाव को देखकर चकित रह जाते थे, क्योंकि वह उनकी फिल्मी छवि से बिल्कुल उलट था। उनका मानना है कि व्यावसायिक सफलता की अंधी दौड़ में तत्कालीन फिल्मकारों ने उनके लुक्स और स्क्रीन प्रेजेंस का तो भरपूर लाभ उठाया, लेकिन एक कलाकार के रूप में उनकी गहराई को समझने या उसे पर्दे पर उभारने का प्रयास बहुत कम किया गया।

    उस दौर की कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए दिग्गज अभिनेत्री ने कहा कि तब फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया पुरुष प्रधान मानसिकता से संचालित होती थी। सेट पर और स्क्रिप्टिंग के स्तर पर महिलाओं की राय या उनके रचनात्मक सुझावों को कोई खास तवज्जो नहीं दी जाती थी। अभिनेत्रियों से केवल यह अपेक्षा की जाती थी कि वे अपनी आकर्षक उपस्थिति, नृत्य और गानों के माध्यम से फिल्म के व्यावसायिक पक्ष को मजबूत करें। किसी दृश्य की प्रासंगिकता या किरदार के मनोवैज्ञानिक विकास में उनकी भागीदारी को हमेशा सीमित रखा जाता था, जो एक रचनात्मक कलाकार के रूप में उनके लिए काफी निराशाजनक था।

    पोशाक और प्रस्तुतीकरण के मुद्दों पर खुलकर बात करते हुए ज़ीनत अमान ने साझा किया कि व्यावसायिक आवश्यकताओं के नाम पर अक्सर उन पर अधिक बोल्ड और आकर्षक परिधान पहनने का दबाव बनाया जाता था। जबकि व्यक्तिगत स्तर पर वे बेहद सादगीपूर्ण और संतुलित जीवनशैली पसंद करती थीं। उस दौर में किसी भी महिला कलाकार की योग्यता का पैमाना उसकी अभिनय क्षमता से ज्यादा उसकी बाहरी सुंदरता और स्क्रीन अपील को माना जाता था, जिसने कई बेहतरीन प्रतिभाओं को एक खास दायरे में समेट कर रख दिया।

    हालांकि, उन्होंने वर्तमान सिनेमाई परिदृश्य में आ रहे बदलावों की सराहना भी की है। उनका मानना है कि आज की अभिनेत्रियों के पास बेहतर अवसर हैं, कहानियां अधिक सशक्त हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसके बावजूद, वे इस बात से पूरी तरह इनकार नहीं करतीं कि आज भी महिलाओं को उनकी बाहरी बनावट और शारीरिक सुंदरता के तराजू पर तौलने की प्रवृत्ति मनोरंजन उद्योग में आंशिक रूप से जीवित है, जिसे पूरी तरह बदलने के लिए अभी और समय और वैचारिक परिपक्वता की आवश्यकता है।

    ज़ीनत अमान ने अपने इस विचार के जरिए फिल्म जगत और दर्शकों दोनों के सामने एक गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया है। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी कलाकार की वास्तविक पहचान और उसका मूल्यांकन उसके काम, अनुभव, समर्पण और रचनात्मक योगदान के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल इस बात पर कि वह पर्दे पर कितना ग्लैमरस दिखता है। ग्लैमर केवल इस पेशे का एक छोटा सा हिस्सा है, न कि किसी कलाकार के संपूर्ण अस्तित्व की परिभाषा।

    अपने समय में आधुनिकता, अदम्य आत्मविश्वास और लीक से हटकर किरदार निभाने के लिए जानी जाने वाली ज़ीनत अमान का यह आत्मनिरीक्षण नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी एक मार्गदर्शक की तरह है। उनका यह बयान केवल एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक व्यवस्था पर एक गंभीर टिप्पणी है जो कलाकारों को केवल एक स्टीरियोटाइप या ढांचे में बंद कर देखना पसंद करती है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य का सिनेमा कलाकारों की बौद्धिक और रचनात्मक क्षमता को अधिक महत्व देगा।

  • अजय देवगन की आगामी फिल्म 'चौहान' के टीज़र पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद, श्रीनगर के सांसद और क्षत्रिय संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

    अजय देवगन की आगामी फिल्म 'चौहान' के टीज़र पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद, श्रीनगर के सांसद और क्षत्रिय संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की आगामी एक्शन फिल्म ‘चौहान’ अपने आधिकारिक घोषणा वीडियो के रिलीज होते ही बड़े विवादों के केंद्र में आ गई है। फिल्म के शुरुआती टीज़र में अजय देवगन को एक सैन्य अधिकारी के रूप में दिखाया गया है, जो कश्मीर में कानून-व्यवस्था और पत्थरबाजी की घटनाओं से निपटता नजर आ रहा है। इस वीडियो में दिखाए गए कुछ दृश्यों और संवादों ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों में भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विशेष रूप से कश्मीर की संवेदनशीलता और राजपूत समुदाय की ऐतिहासिक विरासत को लेकर फिल्म के निर्माताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मुख्यधारा के सिनेमा में संवेदनशील मुद्दों के प्रस्तुतीकरण को लेकर यह विवाद अब गहराता जा रहा है।

    फिल्म के टीज़र में कश्मीरी युवाओं द्वारा की जाने वाली पत्थरबाजी और उसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को जिस अंदाज में प्रस्तुत किया गया है, उसने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नाराज कर दिया है। श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि फिल्म में दिखाए गए पैलेट गन और सैन्य बल के दृश्य कश्मीर के लोगों के पुराने जख्मों और दर्दनाक अतीत को हरा करने वाले हैं। उन्होंने मुख्यधारा के सिनेमा की आलोचना करते हुए कहा कि कश्मीर के दर्द और वहां की त्रासदी का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक और मनोरंजन के उद्देश्यों के लिए एक एक्शन बैकग्राउंड के रूप में नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए संवेदनशीलता और गरिमा की आवश्यकता है।

    इस फिल्म को लेकर विवाद केवल कश्मीर की छवि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया है। ‘क्षत्रिय परिषद’ नामक एक प्रमुख संगठन ने फिल्म के शीर्षक और उसमें क्षत्रिय पहचान के इस्तेमाल पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि फिल्म निर्माता नीरज यादव और अभिनेता अजय देवगन राजनीतिक व वैचारिक हितों के लिए चौहान वंश के ऐतिहासिक गौरव का अनुचित उपयोग कर रहे हैं। क्षत्रिय परिषद ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि राजपूत इतिहास संपूर्ण देश की धरोहर है और इसे किसी सांप्रदायिक विमर्श, चुनावी लाभ या व्यावसायिक फिल्म का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।

    यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसने अजय देवगन की ही पूर्व में आई फिल्म ‘सिंघम अगेन’ की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें कश्मीर की एक बिलकुल अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश की थी। उस फिल्म में कश्मीर के युवाओं को विकास, शांति और देश के साथ चलते हुए दिखाया गया था, जिसकी दर्शकों और समीक्षकों ने काफी सराहना की थी। वहीं, दूसरी ओर ‘चौहान’ में फिर से उसी पुरानी और नकारात्मक छवि को उभारा गया है, जिसे लेकर कश्मीरी समाज लंबे समय से असहज रहा है। एक ही अभिनेता द्वारा कश्मीर की दो विपरीत छवियों को पर्दे पर उतारने के इस विरोधाभास ने भी विश्लेषकों का ध्यान खींचा है।

    वर्तमान में फिल्म ‘चौहान’ का केवल शुरुआती प्रचार वीडियो ही सामने आया है और इसकी पूरी शूटिंग तथा निर्माण कार्य होना अभी बाकी है। ऐसे में फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि निर्माताओं को व्यावसायिक सफलता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच एक बारीक संतुलन बनाने की आवश्यकता होगी। राष्ट्रवाद और वीरता के नाम पर बनने वाली फिल्मों में ऐतिहासिक तथ्यों और क्षेत्रीय भावनाओं का सम्मान करना बेहद जरूरी माना जाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बढ़ते देशव्यापी विवाद के बाद फिल्म के निर्माता-निर्देशक अपनी कहानी और दृश्यों की प्रस्तुतीकरण शैली में किसी प्रकार का बदलाव करते हैं या नहीं।

  • आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

    आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा प्रेमियों के बीच आगामी फिल्मों को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आईएमडीबी द्वारा जारी की गई साल 2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों की हालिया सूची में देखने को मिला है। इस प्रतिष्ठित सूची में अभिनेता रणबीर कपूर की मुख्य भूमिका वाली पौराणिक फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ ने अन्य सभी बड़ी और बहुप्रतीक्षित फिल्मों को पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों ने शानदार सफलता दर्ज की है, जिसके बाद अब साल के उत्तरार्ध में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्मों पर दर्शकों की निगाहें टिकी हुई हैं। आईएमडीबी की यह रैंकिंग दर्शाती है कि आगामी महीनों में पौराणिक कथाओं, स्पाई थ्रिलर, एक्शन और ड्रामा शैलियों के बीच कड़ा मुकाबला होने वाला है, जिसमें फिलहाल ‘रामायण’ सबसे आगे चल रही है।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों और समीक्षकों के बीच जबरदस्त चर्चा है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के मुख्य किरदार को जीवंत कर रहे हैं, जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी। इस फिल्म की स्टार कास्ट को लेकर भी खासा उत्साह है, जिसमें कन्नड़ सुपरस्टार यश रावण के रूप में, सनी देओल हनुमान की भूमिका में और टीवी व फिल्म अभिनेता रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा कर रहे हैं, जबकि यश भी इसके सह-निर्माता के रूप में जुड़े हुए हैं। यह फिल्म इस साल दिवाली के बड़े त्योहार पर सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके चलते इसे इस साल की सबसे बड़ी रिलीज माना जा रहा है।

    आईएमडीबी की इस सूची में दूसरे पायदान पर यशराज फिल्म्स के बैनर तले बन रही स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ ने अपनी जगह बनाई है। शिव रवैल द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में एक्शन करती नजर आएंगी। इनके साथ ही फिल्म में बॉबी देओल और अनिल कपूर भी महत्वपूर्ण किरदारों में शामिल हैं, जो फिल्म के आकर्षण को और बढ़ाते हैं। इस बहुप्रतीक्षित सूची में तीसरा स्थान कन्नड़ अभिनेता यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ को मिला है, जिसका निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

    सूची के चौथे स्थान पर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ का कब्जा है, जिसका निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। इस फिल्म में शाहरुख खान के साथ दीपिका पादुकोण और सुहाना खान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिससे यह फिल्म साल के अंत में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। इसके बाद पांचवें स्थान पर टी-सीरीज और देवगन फिल्म्स के संयुक्त निर्माण में बनी कॉमेडी फ्रैंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ शामिल है, जिसमें अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    सूची में ओटीटी प्लेटफॉर्म की बेहद लोकप्रिय सीरीज के सिनेमाई रूपांतरण ‘मिर्जापुर द मूवी’ को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला है, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल, जितेंद्र कुमार और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार बड़े पर्दे पर धमाल मचाने आ रहे हैं। इसके साथ ही श्रद्धा कपूर की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘इथा’ भी इस सूची का हिस्सा बनी है, जिसका निर्देशन लक्ष्मण उत्तेकर कर रहे हैं। आगामी महीनों में होने वाली इन बड़ी रिलीज से स्पष्ट है कि भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए साल 2026 का दूसरा भाग व्यावसायिक और रचनात्मक दोनों ही दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक होने वाला है।

  • भारतीय सिनेमा का गौरव: पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियां, कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान की पूरी सूची

    भारतीय सिनेमा का गौरव: पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियां, कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान की पूरी सूची

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत यानी बॉलीवुड में ऐसे कई प्रतिभावान कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय और कला के प्रति समर्पण से न केवल दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, बल्कि देश का नाम भी रोशन किया है। सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट और अमूल्य योगदान देने वाले इन सितारों को भारत सरकार द्वारा समय-समय पर देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से अलंकृत किया गया है। इस प्रतिष्ठित सूची में फिल्म उद्योग की कई ऐसी दिग्गज अभिनेत्रियों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कलात्मक यात्रा से भारतीय सिनेमा को एक नया आयाम दिया है। इनमें से कुछ अभिनेत्रियां आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी।

    इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाली अभिनेत्रियों में बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ कही जाने वाली हेमा मालिनी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी बेहतरीन अदाकारी और नृत्य कला के लिए प्रसिद्ध हेमा मालिनी को भारत सरकार द्वारा साल 2000 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। वहीं, हिंदी सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार मानी जाने वाली दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी को कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2013 में इस गौरवपूर्ण नागरिक सम्मान से नवाजा गया था। भले ही वे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्में आज भी सिनेप्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।

    समीक्षकों द्वारा सराहे गए अभिनय और अपनी बेबाक शैली के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री और निर्माता कंगना रनौत को साल 2020 में पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किया गया था। सत्तर और अस्सी के दशक की अपनी संजीदा अदाकारी से समां बांधने वाली सदाबहार अभिनेत्री रेखा को साल 2010 में इस सम्मान से विभूषित किया गया था। उन्होंने ‘उमराव जान’ और ‘खूबसूरत’ जैसी यादगार फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाई हैं। नब्बे के दशक की लोकप्रिय और सफल अभिनेत्रियों में शामिल रवीना टंडन को हाल ही में वर्ष 2023 में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा इस राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय क्षमता के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाली पूर्व विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय बच्चन को साल 2009 में पद्म श्री की उपाधि दी गई थी। वहीं, लीक से हटकर किरदारों को पर्दे पर जीवंत करने वाली सशक्त अभिनेत्री विद्या बालन को साल 2014 में इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त, बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी कला का परचम लहराने वाली ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा को साल 2016 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।

    गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को सहजता से निभाने वाली उत्कृष्ट अभिनेत्री तब्बू और अपनी चुलबुली अदाकारी से करोड़ों फैंस के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री काजोल को साल 2011 में एक साथ इस सर्वोच्च सम्मान के लिए चुना गया था। अपने जमाने की बेहद खूबसूरत और बोल्ड अभिनेत्री मानी जाने वाली शर्मिला टैगोर को सिनेमाई दुनिया में उनके विशेष योगदान हेतु साल 2005 में इस उपाधि से विभूषित किया गया था। इस सूची में भारतीय समानांतर सिनेमा की मजबूत स्तंभ रहीं दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल का नाम भी शामिल है, जिन्हें बहुत कम उम्र में, साल 1985 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। कला जगत में इन सभी महिलाओं का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

  • मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन पर बनी फिल्म 'रंग रसिया' के विवादों की कहानी, बोल्ड कंटेंट के कारण छह साल तक थमा रहा था रिलीज का रास्ता

    मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन पर बनी फिल्म 'रंग रसिया' के विवादों की कहानी, बोल्ड कंटेंट के कारण छह साल तक थमा रहा था रिलीज का रास्ता

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी कई फिल्में रही हैं, जिन्हें अपनी अनूठी कहानी या बोल्ड कंटेंट के कारण भारी विवादों का सामना करना पड़ा है। इन्हीं में से एक बेहद चर्चित और विवादास्पद फिल्म ‘रंग रसिया’ थी, जिसे बनकर तैयार होने के बाद भी सिनेमाघरों तक पहुंचने में करीब छह साल का लंबा समय लग गया था। साल 2008 में पूरी तरह निर्मित हो चुकी इस फिल्म पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए गए कड़े एतराज के बाद एक तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। काफी कानूनी अड़चनों और विरोध प्रदर्शनों के दौर से गुजरने के बाद आखिरकार यह फिल्म नवंबर 2014 में दर्शकों के सामने आ सकी थी।

    केतन मेहता के निर्देशन में बनी यह पीरियड ड्रामा फिल्म देश के महान और विख्यात चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन और उनकी अद्भुत कलाकृतियों से प्रेरित थी। फिल्म में अभिनेता रणदीप हुड्डा ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिनके अभिनय की काफी सराहना भी हुई। इस फिल्म को शुरू में हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में डब करके एक साथ बड़े पैमाने पर रिलीज करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन सेंसरशिप के विवादों और कानूनी पचड़ों में फंसने के कारण मेकर्स की यह महत्वाकांक्षी योजना समय पर धरातल पर नहीं उतर सकी।

    फिल्म के मुख्य विषय और उसकी कहानी पर गौर करें तो यह कला, जुनून और प्रेम की एक बेहद संवेदनशील दास्तान को दर्शाती है। राजा रवि वर्मा इतिहास के एक ऐसे दूरदर्शी कलाकार थे, जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट पेंटिंग्स के माध्यम से देवी-देवताओं के स्वरूप को आम जनमानस और विशेष रूप से समाज के उस निचले तबके तक पहुंचाया, जिन्हें उस दौर में मंदिरों में प्रवेश करने या ईश्वर की छवि देखने तक की अनुमति नहीं थी। लेकिन विवाद की स्थिति तब पैदा हुई जब इस महान कलाकार ने अपनी कलात्मक स्वतंत्रता को समाज के तत्कालीन पारंपरिक नियमों और सीमाओं से ऊपर रखने का फैसला किया।

    पटकथा के अनुसार, मुख्य चित्रकार ने जिस खूबसूरत महिला को अपनी कला की प्रेरणा बनाकर उसे देवी के रूप में कैनवास पर उतारा था, बाद में उसी मॉडल की अन्य पेंटिंग्स में अत्यधिक बोल्डनेस और अश्लीलता दर्शाने के आरोप लगने लगे। उन बोल्ड पेंटिंग्स को जब व्यावसायिक रूप से बाजारों में लाया जाने लगा, तो समाज का एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ खड़ा हो गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब कहानी में उस कलाकार और उनकी मॉडल के बीच के व्यक्तिगत संबंधों को भी बेहद संजीदगी और बोल्ड अंदाज में पर्दे पर दिखाया गया। इस दृश्य के बाद समाज में उनके प्रति तीखा आक्रोश फैल गया और उन पर देश की संस्कृति व मर्यादा को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे, जिसके चलते उनकी प्रिंटिंग प्रेस तक को आग के हवाले कर दिया गया था।

    फिल्म के कुछ विशिष्ट दृश्यों और प्रचार पोस्टरों पर हिंदू देवी-देवताओं के आपत्तिजनक चित्रण को लेकर देश के कई धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। मेकर्स पर लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए देश की विभिन्न अदालतों में मुकदमे दर्ज कराए गए और सिनेमाघरों के बाहर हिंसक प्रदर्शन भी हुए। सेंसर बोर्ड का मानना था कि फिल्म के कई इंटीमेट और बोल्ड सीन्स आम दर्शकों के देखने के लिहाज से बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं, इसलिए इन्हें बिना कांट-छांट के पास नहीं किया जा सकता।

    इस पूरे विवाद और फिल्म की लंबी देरी पर मुख्य अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की थी। उन्होंने एक बातचीत में स्वीकार किया था कि यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण और विवादास्पद प्रोजेक्ट था, जिसे सेंसरशिप की वजह से बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, उनका मानना था कि कला से जुड़े ऐसे विषयों पर समाज में जितनी अधिक चर्चा और बहस होगी, वह फिल्म के संदर्भ को समझने में उतनी ही मददगार साबित होगी। कला प्रेमियों के लिए यह फिल्म आज भी सिनेमाई स्वतंत्रता और सामाजिक बंदिशों के बीच की एक बड़ी मिसाल मानी जाती है।

  • सलमान खान से अलग होने के बाद मुश्किल वक्त में भी ऐश्वर्या राय ने खुद को संभाला, फिल्म 'शब्द' की को-स्टार ने खोल दिए राज

    सलमान खान से अलग होने के बाद मुश्किल वक्त में भी ऐश्वर्या राय ने खुद को संभाला, फिल्म 'शब्द' की को-स्टार ने खोल दिए राज

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित जोड़ियों और उनके आपसी रिश्तों को लेकर समय-समय पर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में, फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में साथ काम कर चुकीं सह-कलाकार सादिया सिद्दीकी ने सुपरस्टार सलमान खान और ऐश्वर्या राय के बहुचर्चित ब्रेकअप के बाद के दौर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि निजी जीवन में चल रहे इतने बड़े उतार-चढ़ाव और मुश्किलों के बावजूद ऐश्वर्या राय ने जिस तरह खुद को संभाला और अपने काम के प्रति निष्ठा दिखाई, वह वाकई तारीफ के काबिल था।

    एक हालिया साक्षात्कार के दौरान जब सादिया सिद्दीकी से पूछा गया कि क्या साल 2005 में आई फिल्म ‘शब्द’ की शूटिंग के दौरान उन्हें ऐश्वर्या राय की व्यक्तिगत जिंदगी में चल रहे तनाव का कोई अंदाजा हुआ था? इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि उस फिल्म में ऐश्वर्या के साथ उनका कोई सीधा सीन नहीं था और वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत करीब से नहीं जानती थीं, लेकिन सेट पर उनके व्यवहार को देखकर कोई भी उनकी आंतरिक उथल-पुथल का अंदाजा नहीं लगा सकता था। उन्होंने अपनी भावनाओं और निजी जीवन की दिक्कतों को बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से छिपाकर रखा था।

    सह-कलाकार ने ऐश्वर्या राय के पेशेवर रवैये की जमकर सराहना करते हुए कहा कि वे हमेशा समय पर पूरी तैयारी के साथ सेट पर पहुंचती थीं। शूटिंग शुरू होने से पहले वे अपनी सभी पंक्तियों (लाइन्स) को अच्छी तरह याद रखती थीं, अपनी स्क्रिप्ट का गहराई से अध्ययन करती थीं और पूरे प्रोफेशनलिज्म के साथ अपना काम पूरा करती थीं। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं की परछाई को कभी भी अपने काम पर या सेट के माहौल पर नहीं पड़ने दिया।

    सादिया ने आगे बताया कि ऐश्वर्या अपने किरदारों को जीवंत करने के लिए काफी समर्पित थीं। वे दृश्यों को बेहतर बनाने के लिए बार-बार स्क्रिप्ट पढ़ती थीं और निर्देशक व साथी कलाकारों के साथ उस पर चर्चा करती थीं। वे अपने किरदार की मानसिक स्थिति और उसकी गहराई को समझने का पूरा प्रयास करती थीं, जो उनके एक बेहतरीन कलाकार होने का प्रमाण है। गौरतलब है कि साल 2005 में रिलीज हुई सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘शब्द’ में ऐश्वर्या राय के साथ संजय दत्त और जायद खान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे।

    यदि दोनों कलाकारों के वर्तमान पेशेवर जीवन की बात करें, तो सलमान खान आने वाले समय में फिल्म ‘मातृभूमि’ में दिखाई देंगे, जिसका निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में होंगी। इसके अतिरिक्त, वे दक्षिण भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नयनतारा के साथ भी एक अनाम फिल्म (एसवीसी63) पर काम कर रहे हैं, जिसका निर्देशन वामशी पैदिपल्ली कर रहे हैं और यह फिल्म साल 2027 की ईद के अवसर पर सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। दूसरी तरफ, ऐश्वर्या राय आखिरी बार साल 2023 में आई मणिरत्नम की ऐतिहासिक फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन’ में नजर आई थीं, जिसमें बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से भी नवाजा गया था।