Category: Entertainment

  • 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के सेट से अचानक क्यों गायब हो जाते थे संजय दत्त? सह-कलाकार यतिन कार्येकर ने सालों बाद बयां किया शूटिंग का अनसुना दर्द

    'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के सेट से अचानक क्यों गायब हो जाते थे संजय दत्त? सह-कलाकार यतिन कार्येकर ने सालों बाद बयां किया शूटिंग का अनसुना दर्द

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त के जीवन में एक दौर ऐसा भी था, जब वे अपनी पेशेवर प्रतिबद्धताओं और गंभीर कानूनी लड़ाइयों के बीच बुरी तरह फंसे हुए थे। साल 2003 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ की शूटिंग के दौरान सेट पर बने रहने के लिए उन्हें जिस मानसिक और शारीरिक संघर्ष से गुजरना पड़ा, उसका एक बेहद भावुक और अनसुना पहलू अब सामने आया है। फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सह-कलाकार और अनुभवी अभिनेता यतिन कार्येकर ने हाल ही में उस दौर की परिस्थितियों को याद करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

    यतिन कार्येकर ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान संजय दत्त आर्म्स एक्ट मामले और टाडा अदालत की सख्त कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे थे। स्थिति इतनी अनिश्चित थी कि सेट पर काम करते समय भी अभिनेता का पूरा ध्यान अपनी अदालती तारीखों और कानूनी मामलों पर लगा रहता था। सेट पर मौजूद हर व्यक्ति इस बात से वाकिफ था कि संजय दत्त किस भारी मानसिक दबाव और तनाव के साए में कैमरे के सामने अभिनय कर रहे थे।

    शूटिंग के दिनों के माहौल को साझा करते हुए कार्येकर ने बताया कि अक्सर सेट पर अचानक एक फोन कॉल आता था और उसे सुनते ही संजय दत्त बिना किसी से कुछ कहे या बिना कोई औपचारिकता निभाए चुपचाप सेट छोड़कर चले जाते थे। उन्हें अचानक अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए तुरंत रवाना होना पड़ता था। ऐसे अनपेक्षित घटनाक्रमों के कारण फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी को कई बार भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

    संजय दत्त के अचानक चले जाने के बाद निर्देशक को पूरी स्थिति को संभालने के लिए तुरंत अपने पूर्व-निर्धारित शूटिंग शेड्यूल में बदलाव करने पड़ते थे। निर्देशक हिरानी को अक्सर उन दृश्यों या शॉट्स को पूरी तरह बदलना पड़ता था, जिनमें संजय दत्त की मौजूदगी अनिवार्य थी। अभिनेता की अनुपस्थिति के कारण सेट पर मौजूद अन्य कलाकारों के साथ अलग दृश्यों की योजना बनाई जाती थी ताकि शूटिंग का कीमती समय बर्बाद न हो और काम सुचारू रूप से चलता रहे।

    इस भारी व्यक्तिगत संकट और कानूनी दबाव के बावजूद संजय दत्त ने कभी भी अपने काम की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। जब भी वे अदालत की कार्यवाही से लौटकर वापस सेट पर आते थे, तो वे पूरी तरह से अपने किरदार ‘मुन्ना भाई’ में ढल जाते थे। कार्येकर के अनुसार, संजय दत्त की यह क्षमता अद्भुत थी कि वे इतनी बड़ी मानसिक उथल-पुथल के बीच भी कैमरे के सामने आते ही अपने सारे गम और तनाव भूलकर एक जीवंत प्रदर्शन देने में सफल रहते थे।

    फिल्म के क्रू और साथी कलाकारों ने भी उस कठिन समय में संजय दत्त का भरपूर सहयोग किया। सेट पर मौजूद सभी लोग अभिनेता की बेबसी और उनकी पारिवारिक परिस्थितियों को गहराई से समझते थे। उनके पिता सुनील दत्त भी उस समय बेटे को इस संकट से निकालने के लिए हर संभव कानूनी और नैतिक प्रयास कर रहे थे। यही कारण था कि पूरी टीम ने बिना किसी शिकायत के हर विपरीत परिस्थिति में निर्देशक और अभिनेता के साथ तालमेल बिठाया।

    ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ न केवल संजय दत्त के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई, बल्कि इसने उनके गिरते हुए करियर को एक नई संजीवनी भी प्रदान की थी। आज सालों बाद जब सेट के ये वाकये सामने आ रहे हैं, तो यह साफ होता है कि पर्दे पर दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने वाले ‘मुन्ना भाई’ के पीछे एक अभिनेता का कितना बड़ा व्यक्तिगत दर्द और अदालती संघर्ष छिपा हुआ था, जिसने भारतीय सिनेमा इतिहास की एक कालजयी फिल्म को आकार दिया।

  • आमिर खान ने शादी की खबर पर लगाई मुहर 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग लेंगे सात फेरे बेटे जुनैद का रिएक्शन बना चर्चा का विषय

    आमिर खान ने शादी की खबर पर लगाई मुहर 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग लेंगे सात फेरे बेटे जुनैद का रिएक्शन बना चर्चा का विषय


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने अपनी तीसरी शादी को लेकर चल रही सभी अटकलों पर आखिरकार विराम लगा दिया है। अभिनेता ने खुद पुष्टि की है कि वह 5 जुलाई को अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट के साथ विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं। 61 वर्ष की उम्र में आमिर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रहे हैं और इस खास मौके को उन्होंने पूरी तरह निजी रखने का फैसला किया है। शादी में केवल परिवार के सदस्य और कुछ बेहद करीबी दोस्त ही शामिल होंगे। अभिनेता ने इस मौके पर अपने प्रशंसकों से भी प्यार और आशीर्वाद की अपील की है ताकि उनके जीवन का नया सफर खुशियों से भरा रहे।

    आमिर खान हाल ही में अपने बेटे जुनैद खान के साथ एक कार्यक्रम में पहुंचे थे जहां उन्होंने मीडिया से खुलकर अपनी शादी को लेकर बातचीत की। सबसे दिलचस्प पल तब देखने को मिला जब आमिर अपनी शादी की जानकारी साझा कर रहे थे और उनके बगल में बैठे जुनैद खान मुस्कुराते हुए नजर आए। पिता की बात सुनकर उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। इस दौरान आमिर ने बताया कि शादी किसी आलीशान होटल या बड़े वेडिंग वेन्यू पर नहीं बल्कि उनके घर पर ही होगी। उन्होंने कहा कि यह एक छोटा और पारिवारिक समारोह होगा जिसमें केवल अपने लोग शामिल होंगे।

    अभिनेता ने स्पष्ट किया कि वह किसी भव्य रिसेप्शन या करोड़ों रुपये के आयोजन के पक्ष में नहीं हैं। उनकी प्राथमिकता सादगी और पारिवारिक माहौल है। आमिर का कहना है कि जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर को वह शोर शराबे के बजाय अपनों के साथ शांत और यादगार तरीके से मनाना चाहते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सभी से दुआएं मांगते हुए कहा कि उनकी और गौरी की नई जिंदगी खुशियों और विश्वास से भरी रहे।

    आमिर खान की निजी जिंदगी हमेशा चर्चा में रही है। उनकी पहली शादी रीना दत्ता से हुई थी जिनसे उन्हें दो बच्चे जुनैद खान और आयरा खान हैं। कई वर्षों तक साथ रहने के बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद आमिर ने फिल्म निर्माता किरण राव से दूसरी शादी की। इस रिश्ते से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म हुआ। हालांकि वर्ष 2021 में आमिर और किरण ने भी अलग होने का फैसला किया लेकिन दोनों आज भी अच्छे दोस्त हैं और बेटे की परवरिश मिलकर कर रहे हैं।

    अब आमिर खान गौरी स्प्रैट के साथ अपने जीवन की नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से दोनों के रिश्ते की चर्चा लगातार हो रही थी लेकिन अभिनेता ने हमेशा इस रिश्ते को निजी रखा। अब शादी की आधिकारिक पुष्टि के बाद उनके प्रशंसकों में उत्साह बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर भी फैंस उन्हें लगातार शुभकामनाएं दे रहे हैं और नई जिंदगी के लिए ढेर सारी बधाइयां भेज रहे हैं।

    आमिर खान का यह फैसला इस बात का भी संदेश देता है कि जीवन में नई शुरुआत के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। अपने परिवार के समर्थन और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में वह 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट का हाथ थामकर एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे। अब सभी की नजरें इस निजी लेकिन बेहद चर्चित शादी पर टिकी हुई हैं।

  • रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान

    रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को दर्शक आज भी उनकी शानदार अदाकारी दमदार संवाद और बेहतरीन एक्शन के लिए याद करते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में रोमांस कॉमेडी और एक्शन हर शैली की फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हालांकि उनकी पहचान केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं थी। उन्हें करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वास्तविक जीवन में भी धर्मेंद्र बेहद साहसी और निडर इंसान थे। उनके व्यक्तित्व से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा अभिनेता और निर्देशक सत्यजीत पुरी ने साझा किया जिसने यह साबित किया कि धर्मेंद्र केवल फिल्मों के ही नहीं बल्कि असल जिंदगी के भी सच्चे हीरो थे।

    सत्यजीत पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1990 के दशक में जब फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का दबदबा बढ़ रहा था तब कई कलाकारों को धमकी भरे फोन और दबाव का सामना करना पड़ता था। उस दौर में कई लोग खामोश रहना ही बेहतर समझते थे लेकिन धर्मेंद्र का स्वभाव अलग था। उन्होंने कभी भी डर के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया।

    सत्यजीत पुरी के अनुसार एक समय ऐसा भी आया जब अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने धर्मेंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन धर्मेंद्र ने घबराने के बजाय बेहद सख्त और आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई उनसे टकराने की कोशिश करेगा तो उनके गांव सनेहवाल के लोग उनके साथ खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास लड़ने के लिए पूरी फौज जैसी ताकत है और उनसे उलझना किसी के लिए आसान नहीं होगा।

    बताया जाता है कि धर्मेंद्र के इस बेबाक और निडर जवाब के बाद अंडरवर्ल्ड ने दोबारा उन्हें परेशान करने की कोशिश नहीं की। यह घटना आज भी बॉलीवुड के चर्चित किस्सों में गिनी जाती है और धर्मेंद्र के साहस की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है।

    धर्मेंद्र का व्यक्तित्व हमेशा सादगी और आत्मसम्मान से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने करियर में कभी विवादों के सहारे लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने काम और व्यवहार से लोगों का दिल जीता। यही वजह रही कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था।

    धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रहे। उनकी जोड़ी कई बड़े सितारों के साथ पसंद की गई लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्मों को आज भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा का ही मैन बना दिया।

    24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरा दुख पहुंचाया। उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्में उनके संवाद और उनके साहस से जुड़े किस्से लोगों के दिलों में जिंदा हैं। मरणोपरांत उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया जो भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान का सम्मान था।

    धर्मेंद्र का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चा नायक केवल पर्दे पर नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों साहस और आत्मसम्मान से वास्तविक जीवन में भी पहचाना जाता है। यही कारण है कि उन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक कलाकारों में गिना जाता है।

  • क्या सच में सुजैन खान को मिले थे 400 करोड़ रुपये? फराह खान अली ने सालों पुरानी अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी

    क्या सच में सुजैन खान को मिले थे 400 करोड़ रुपये? फराह खान अली ने सालों पुरानी अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के सबसे चर्चित रिश्तों में शामिल रहे ऋतिक रोशन और सुजैन खान का तलाक आज भी चर्चा का विषय बना रहता है। दोनों ने साल 2000 में शादी की थी और करीब 14 साल साथ रहने के बाद 2014 में आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। तलाक के बाद सबसे ज्यादा जिस बात ने सुर्खियां बटोरी वह थी यह दावा कि सुजैन खान को एलिमनी के रूप में 400 करोड़ रुपये मिले थे। अब इस मामले पर सुजैन की बड़ी बहन और जानी मानी ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है और इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताया है।

    एक इंटरव्यू में फराह खान अली ने कहा कि वर्षों से सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में 400 करोड़ रुपये की एलिमनी की जो बातें कही जाती रही हैं उनमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी बहन ने तलाक के दौरान किसी तरह की एलिमनी नहीं ली। उन्होंने बताया कि जब भी वह इस तरह की खबरें पढ़ती हैं तो उन्हें बेहद दुख होता है क्योंकि इससे सुजैन की छवि को गलत तरीके से पेश किया जाता है।

    फराह ने कहा कि उनका परिवार हमेशा से रिश्तों और मानवीय मूल्यों को धन दौलत से अधिक महत्व देता आया है। उनके अनुसार सुजैन ने कभी भी आर्थिक लाभ के लिए कोई निर्णय नहीं लिया और यही वजह है कि आज भी उनके रिश्ते ऋतिक रोशन और उनके परिवार के साथ बेहद सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि राकेश रोशन और पिंकी रोशन आज भी सुजैन को परिवार का हिस्सा मानते हैं और दोनों परिवारों के बीच अच्छे संबंध कायम हैं।

    फराह खान अली ने यह भी बताया कि तलाक के समय पूरा परिवार इस फैसले से भावुक था और सभी को गहरा झटका लगा था। हालांकि समय के साथ दोनों परिवारों ने इस स्थिति को समझदारी से स्वीकार किया और किसी तरह की सार्वजनिक कटुता सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि ऋतिक और सुजैन दोनों ने अपने रिश्ते के अंत को बेहद गरिमा और परिपक्वता के साथ संभाला।

    उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने कई बार सुजैन से कहा कि वह 400 करोड़ रुपये वाली अफवाहों का सार्वजनिक रूप से खंडन करें लेकिन सुजैन ने हमेशा यही कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। फराह के अनुसार सुजैन का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति का उनके जीवन में कोई महत्व नहीं है तो उसकी राय भी उनके लिए मायने नहीं रखती।

    फराह ने ऋतिक और सुजैन की शादी को याद करते हुए कहा कि दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे और शादी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थे। उस समय ऋतिक के करियर की शुरुआत हुई थी और परिवार चाहता था कि शादी कुछ समय बाद हो लेकिन दोनों ने अपने रिश्ते को प्राथमिकता देते हुए विवाह का निर्णय लिया।

    वर्तमान समय में ऋतिक रोशन अभिनेत्री सबा आजाद के साथ रिश्ते में हैं जबकि सुजैन खान अभिनेता अर्सलान गोनी को डेट कर रही हैं। फराह ने दोनों जोड़ों के लिए खुशी जताते हुए कहा कि जीवन में सबसे जरूरी बात खुश रहना है और ऐसे लोगों के साथ रहना है जो आपको सम्मान और सुकून दें। उनके अनुसार जब रिश्ते सम्मान और समझदारी पर टिके हों तो अलग होने के बाद भी आपसी सम्मान और दोस्ती बनाए रखी जा सकती है। यही बात ऋतिक और सुजैन के रिश्ते को आज भी खास बनाती है।

  • किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

    किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में अमित कुमार का नाम उन चुनिंदा गायकों में लिया जाता है, जिन्होंने पारिवारिक विरासत से आगे बढ़कर अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी मधुर आवाज, सहज गायकी और भावपूर्ण प्रस्तुति के दम पर उन्होंने 1980 के दशक में एक ऐसी जगह बनाई, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच विशेष महत्व रखती है। 3 जुलाई 1952 को कोलकाता में जन्मे अमित कुमार का जीवन संगीत, अभिनय और रचनात्मकता से भरपूर रहा।

    अमित कुमार के पिता महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार तथा मां प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका रूमा गुहा ठाकुरता थीं। ऐसे संगीतपूर्ण वातावरण में पले-बढ़े अमित का रुझान बचपन से ही गायन और अभिनय की ओर था। कोलकाता में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुति को काफी सराहना मिली और उनकी प्रतिभा धीरे-धीरे फिल्म जगत का ध्यान आकर्षित करने लगी।

    फिल्मी दुनिया में उनका शुरुआती सफर अभिनय से शुरू हुआ। कम उम्र में उन्होंने अपने पिता के निर्देशन वाली फिल्म में अभिनय किया और इसके बाद बाल कलाकार के रूप में अपना पहला गीत भी रिकॉर्ड किया। हालांकि पार्श्वगायक के रूप में पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था। शुरुआती वर्षों में उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अपनी गायकी को निखारने पर पूरा ध्यान दिया।

    उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें संगीतकार आरडी बर्मन के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उस समय वह बेहद घबराए हुए थे, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यही अवसर आगे चलकर उनके संगीत सफर की मजबूत नींव बना और उन्हें बड़े संगीतकारों के साथ काम करने का अवसर मिला।

    साल 1981 में एक लोकप्रिय फिल्म के गीत ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई। इसके बाद उनकी आवाज कई युवा अभिनेताओं की पहचान बन गई। रोमांटिक, भावनात्मक और ऊर्जावान गीतों में उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। 1980 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत गाकर खुद को उस दौर के सबसे लोकप्रिय पार्श्वगायकों में स्थापित कर लिया।

    उनके करियर का एक ऐतिहासिक क्षण वह भी रहा जब प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक की दौड़ में उनका मुकाबला अपने ही पिता किशोर कुमार से हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद पिता और पुत्र का वह भावनात्मक पल भारतीय फिल्म संगीत के सबसे यादगार क्षणों में गिना जाता है। यह उपलब्धि अमित कुमार के स्वतंत्र और सफल करियर की बड़ी पहचान बन गई।

    पिता किशोर कुमार के निधन के बाद उन्होंने उनकी अधूरी फिल्म को पूरा करने की जिम्मेदारी निभाई। बाद में अपने मार्गदर्शक आरडी बर्मन के निधन के पश्चात उन्होंने धीरे-धीरे पार्श्वगायन से दूरी बनाई और स्वतंत्र संगीत, लाइव कॉन्सर्ट तथा अपने संगीत प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया। आज भी अमित कुमार की आवाज और उनके गीत भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि विरासत प्रेरणा दे सकती है, लेकिन स्थायी पहचान केवल प्रतिभा, मेहनत और समर्पण से ही बनती है।

  • जब गोविंदा की गिफ्ट की शर्ट को राजकुमार ने बना दिया रूमाल, बेबाक अंदाज का यह किस्सा आज भी फिल्मी दुनिया में है मशहूर

    जब गोविंदा की गिफ्ट की शर्ट को राजकुमार ने बना दिया रूमाल, बेबाक अंदाज का यह किस्सा आज भी फिल्मी दुनिया में है मशहूर


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राजकुमार केवल अपनी दमदार संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेबाक स्वभाव और अलग अंदाज के लिए भी याद किए जाते हैं। उनके व्यक्तित्व से जुड़े अनेक किस्से आज भी फिल्म जगत में चर्चा का विषय बने रहते हैं। इन्हीं चर्चित घटनाओं में अभिनेता गोविंदा द्वारा उपहार में दी गई शर्ट से जुड़ा एक किस्सा भी शामिल है, जिसे लोग आज भी बड़े दिलचस्प अंदाज में याद करते हैं।

    बताया जाता है कि फिल्म ‘जंगबाज’ की शूटिंग के दौरान गोविंदा ने सम्मान स्वरूप राजकुमार को एक आकर्षक शर्ट भेंट की थी। उन्हें उम्मीद थी कि वरिष्ठ अभिनेता इस उपहार को पहनेंगे। हालांकि कुछ समय बाद जब गोविंदा दोबारा सेट पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वही शर्ट अब अपने मूल रूप में नहीं थी। राजकुमार ने उसे कटवाकर रूमाल बनवा लिया था। यह देखकर गोविंदा आश्चर्यचकित रह गए। यह घटना बाद में राजकुमार के अनोखे और बेपरवाह व्यक्तित्व का चर्चित उदाहरण बन गई।

    राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को तत्कालीन बलूचिस्तान में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम कुलभूषण पंडित था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में सेवा दी। अपने कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित स्वभाव के कारण उनकी पहचान एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में थी। हालांकि अभिनय के प्रति उनका झुकाव उन्हें अंततः फिल्मी दुनिया की ओर ले आया।

    फिल्मी सफर की शुरुआत एक संयोग से हुई। एक निर्माता से मुलाकात के बाद उन्हें अभिनय का अवसर मिला और उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर सिनेमा को अपना करियर बना लिया। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उनकी अभिनय क्षमता और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की श्रेणी में स्थापित कर दिया।

    अपने लंबे करियर में उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी दमदार आवाज, संवाद बोलने की विशिष्ट शैली और स्क्रीन पर प्रभावशाली उपस्थिति उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई। यही कारण रहा कि उनके कई संवाद और अंदाज आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    राजकुमार को अपने अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले। उन्होंने गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के माध्यम से यह साबित किया कि मजबूत अभिनय किसी भी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हो सकता है। उनके योगदान को हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।

    जीवन के अंतिम वर्षों में वह गले के कैंसर से पीड़ित रहे, जिसका असर उनकी आवाज पर भी पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी गरिमा और आत्मविश्वास बनाए रखा। 3 जुलाई 1996 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्मों, संवादों और उनसे जुड़े अनोखे किस्सों के कारण वह आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार कलाकारों में गिने जाते हैं।

  • मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    नई दिल्ली। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। सोशल मीडिया पर लाइव बातचीत के दौरान जब उनसे इस प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं।

    दिलजीत हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ इंस्टाग्राम लाइव के माध्यम से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स, संगीत और फिल्मों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। बातचीत के बीच जब एक दर्शक ने उनसे जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है और वह किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

    उन्होंने बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसे मामलों से दूर ही रखा जाए क्योंकि वह किसी राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। उनका कहना था कि वह एक कलाकार हैं और उनका काम लोगों का मनोरंजन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और जीवन में सभी परिस्थितियां कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकतीं।

    दिलजीत ने अपने अंदाज में यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वे भी अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उनका भी अपना पक्ष हो सकता है। उन्होंने किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध करने से बचते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी मुद्दे पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने पूरे विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने उनके इस रुख को एक कलाकार की पेशेवर सोच बताया, जबकि कुछ लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े चर्चित चेहरों की सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भूमिका को लेकर अलग-अलग राय भी व्यक्त की। हालांकि दिलजीत ने अपने बयान में किसी संगठन, व्यक्ति या प्रदर्शन की प्रकृति पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात दोहराई।

    दिलजीत दोसांझ पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट्स और संगीत परियोजनाओं को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। देश और विदेश में उनकी बड़ी प्रशंसक संख्या है और सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रिय मौजूदगी रहती है। ऐसे में उनके किसी भी बयान पर लोगों की नजर रहती है।

    फिलहाल उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता कला और मनोरंजन है तथा वह राजनीतिक या विवादित विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना पसंद करते हैं। इसी वजह से उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

  • 'बाहुबली यूनिवर्स' का महा-विस्तार: दो भागों की एनीमे फिल्म लेकर आ रहे हैं ईशान शुक्ला, मृत्यु के बाद की अनसुनी कहानी का होगा खुलासा

    'बाहुबली यूनिवर्स' का महा-विस्तार: दो भागों की एनीमे फिल्म लेकर आ रहे हैं ईशान शुक्ला, मृत्यु के बाद की अनसुनी कहानी का होगा खुलासा

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो चुकी ‘बाहुबली’ फ्रैंचाइजी के प्रशंसकों के लिए एक अत्यंत रोमांचक और बड़ी खबर सामने आई है। जहाँ एक तरफ मुख्य स्टार कास्ट प्रभास, राणा दग्गुबाती और अनुष्का शेट्टी ने ‘बाहुबली 3’ के निर्माण का संकेत देकर हलचल बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ इस सिनेमाई यूनिवर्स के क्रिएटर एस एस राजामौली के मार्गदर्शन में एक भव्य एनीमे फिल्म ‘बाहुबली: द एटर्नल वॉर’ की तैयारियां तेज हो गई हैं। दो भागों में बनने वाली इस महत्वाकांक्षी एनीमे फिल्म के निर्देशक ईशान शुक्ला ने इसके अनूठे कॉन्सेप्ट और कहानी को लेकर कई बेहद दिलचस्प खुलासे किए हैं।

    इस नई फिल्म की कहानी मूल फिल्मों के नायक अमरेंद्र बाहुबली के जीवन के अंत के बाद से शुरू होगी। निर्देशक ईशान शुक्ला के अनुसार, यह फिल्म अमरेंद्र बाहुबली की आत्मा की उस परलोक यात्रा पर आधारित है, जहां वह एक विशाल और दिव्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए ‘देवासुर संग्राम’ का हिस्सा बनता है। फिल्म का यह अलौकिक और पौराणिक कॉन्सेप्ट पारंपरिक भारतीय सिनेमा से बिल्कुल अलग है, जिसने अपने शुरुआती टीज़र से ही दर्शकों और फिल्म समीक्षकों के बीच भारी उत्सुकता पैदा कर दी है।

    इस अनूठे एनीमे प्रोजेक्ट की शुरुआत की कहानी भी काफी दिलचस्प है। वर्ष 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान निर्देशक ईशान शुक्ला की मुलाकात बाहुबली के मूल निर्माता शोबू येरलागडा से हुई थी। शोबू इस ऐतिहासिक फ्रैंचाइजी को एनिमेशन के माध्यम से वैश्विक मंच पर आगे ले जाने के इच्छुक थे। इसके बाद ईशान ने अमरेंद्र बाहुबली की मृत्यु के बाद की काल्पनिक और आध्यात्मिक यात्रा पर एक पूरी स्क्रिप्ट तैयार की। यह विचार निर्माता शोबू और मास्टर डायरेक्टर एस एस राजामौली को इतना पसंद आया कि उन्होंने तुरंत इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी।

    निर्देशक ने बताया कि हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों में पृथ्वी के अलावा अन्य लोकों और आयामों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसे पर्दे पर जीवंत करने के लिए एनीमे को सबसे उपयुक्त माध्यम माना गया। अमर चित्र कथा के प्रभाव और भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रति लगाव ने इस कहानी को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाई। अमरेंद्र बाहुबली का चरित्र भगवान राम की तरह बेहद पवित्र और आदर्शवादी रहा है, इसलिए उसकी असमय मृत्यु के बाद परलोक में उसकी आत्मा के अंतर्द्वंद्व और उसके सामने आने वाले विकल्पों को देखना दर्शकों के लिए एक बिल्कुल नया और दार्शनिक अनुभव होगा।

    इस कहानी की सबसे बड़ी भावनात्मक त्रासदी का जिक्र करते हुए निर्देशक ने कहा कि अमरेंद्र बाहुबली को पृथ्वी छोड़ते समय यह कभी पता ही नहीं चल पाया था कि उसके सबसे वफादार कटप्पा ने उसकी पीठ में छुरा क्यों घोंपा था। प्राचीन भारतीय इतिहास और गाथाओं में ऐसे कई प्रसंग मिलते हैं जहां पराक्रमी योद्धा सत्ता शिखर पर पहुंचने से ठीक पहले षड्यंत्र का शिकार हो गए। फिल्म का प्री-प्रोडक्शन कार्य आधिकारिक रूप से पूरा कर लिया गया है, और चूंकि उच्च स्तरीय एनिमेशन निर्माण में लंबा समय लगता है, इसलिए मेकर्स ने साल 2027 में इस महागाथा के पहले भाग को सिनेमाघरों में रिलीज करने का लक्ष्य रखा है।

  • सलमान खान की याचिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी अभी सेंसर बोर्ड तक नहीं पहुंची फिल्म इसलिए नहीं लगेगी रोक

    सलमान खान की याचिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी अभी सेंसर बोर्ड तक नहीं पहुंची फिल्म इसलिए नहीं लगेगी रोक


    नई दिल्ली । अपनी छवि और व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए अभिनेता सलमान खान ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने फिल्म काला हिरण द बैटल फॉर लीगेसी की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए दावा किया है कि यह फिल्म कथित तौर पर ब्लैकबक शिकार मामले पर आधारित है और इसमें उनके जैसे दिखने वाले किरदार के जरिए गलत और भ्रामक कहानी पेश की जा रही है। हालांकि अदालत ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई छह जुलाई तक के लिए टाल दी है।

    सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि संबंधित फिल्म अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजी ही नहीं गई है। अदालत ने कहा कि जब तक किसी फिल्म को सेंसर बोर्ड से प्रमाणपत्र नहीं मिलता तब तक उसकी रिलीज संभव नहीं है। ऐसे में फिलहाल तत्काल रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि अभिनेता की ओर से दाखिल जवाब अभी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है इसलिए मामले पर विस्तार से सुनवाई अगली तारीख पर की जाएगी।

    सलमान खान की ओर से पेश वकील ने अदालत से फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। इसके जवाब में फिल्म निर्माताओं की ओर से आश्वासन दिया गया कि अगली सुनवाई तक फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। इस भरोसे के बाद अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं समझी।

    अपनी याचिका में सलमान खान ने दावा किया है कि फिल्म में दिखाया गया मुख्य किरदार उनकी शक्ल सूरत और व्यक्तित्व से काफी मिलता जुलता है। इतना ही नहीं उस किरदार के हाथ में उनकी तरह का ब्रेसलेट भी दिखाया गया है जिससे आम दर्शकों के लिए उसे सलमान खान के रूप में पहचानना आसान हो जाता है। अभिनेता का कहना है कि इससे उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित होती है और उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन होता है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म के पोस्टर और कथित कहानी के माध्यम से एक ऐसी कहानी प्रस्तुत की जा रही है जो वास्तविक तथ्यों और न्यायिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। सलमान खान का कहना है कि उन्हें शस्त्र अधिनियम से जुड़े मामले में पहले ही बरी किया जा चुका है लेकिन फिल्म के जरिए ऐसा संदेश दिया जा रहा है जिससे लोगों के बीच गलत धारणा बन सकती है। अभिनेता ने आरोप लगाया कि फिल्म निर्माता इस संवेदनशील मामले को सनसनीखेज बनाकर उनकी लोकप्रियता और पहचान का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

    अब इस मामले में सभी की नजरें छह जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि तब तक फिल्म सेंसर बोर्ड के पास भेजी जाती है या उससे जुड़ी कोई नई स्थिति सामने आती है तो अदालत इस पूरे विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय कर सकती है। फिलहाल फिल्म की रिलीज और उससे जुड़े विवाद पर अंतिम फैसला न्यायालय की आगामी सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • भारतीय सिनेमा का मेगा ब्लॉकबस्टर सीजन: साल 2026 की दूसरी छमाही में सिनेमाघरों में दिखेगा बड़े बजट की फिल्मों का महासंग्राम

    भारतीय सिनेमा का मेगा ब्लॉकबस्टर सीजन: साल 2026 की दूसरी छमाही में सिनेमाघरों में दिखेगा बड़े बजट की फिल्मों का महासंग्राम

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए साल 2026 की दूसरी छमाही बॉक्स ऑफिस पर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक व्यावसायिक घमासान लेकर आ रही है। चालू वर्ष की शुरुआती छमाही में हालांकि कई फिल्मों ने अच्छा कारोबार किया, लेकिन बड़े रिकॉर्ड्स के मामले में केवल एक ही फिल्म पांच सौ और हजार करोड़ के क्लब में अपनी जगह बना सकी। मगर फिल्म समीक्षकों और व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि असली व्यावसायिक मुकाबला अब शुरू होने जा रहा है, क्योंकि जुलाई से लेकर दिसंबर तक के आगामी महीनों में बड़े बजट और महासुपरस्टार्स की कई बहुप्रतीक्षित फिल्में बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली हैं, जिनसे हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई की उम्मीद है।

    इस भव्य सिनेमाई सिलसिले की शुरुआत जुलाई के महीने से हो रही है, जहां दो बिल्कुल अलग विधाओं की फिल्में दर्शकों के सामने होंगी। इसमें सबसे पहला और बड़ा नाम यशराज स्पाई यूनिवर्स की बहुचर्चित एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ का है, जो 3 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है। शिव रावेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, अनिल कपूर और बॉबी देओल मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि ऋतिक रोशन का एक विशेष कैमियो दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण होगा। इसके ठीक बाद, 10 जुलाई को निर्देशक इंद्र कुमार की मशहूर कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ रिलीज होगी, जिसमें अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी जैसे कलाकार मनोरंजन का तड़का लगाएंगे।

    अगस्त का महीना बॉक्स ऑफिस के लिहाज से सबसे बड़ा और कड़ा मुकाबला देखने वाला साबित होगा, जहां एक से बढ़कर एक कई बड़ी फिल्में कतार में हैं। महीने की शुरुआत 7 अगस्त को अविनाश अरुण द्वारा निर्देशित फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ से होगी, जिसमें राजकुमार राव और जयदीप अहलावत मुख्य किरदारों में हैं। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर 14 अगस्त को तीन बड़ी फिल्मों के बीच सीधा महामुकाबला देखने को मिलेगा। इनमें इमरान हाशमी और दिशा पाटनी स्टारर कल्ट क्लासिक का सीक्वल ‘आवारापन 2’, भारत-चीन गलवान घाटी संघर्ष पर आधारित सलमान खान की मुख्य भूमिका वाली देशभक्ति फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ और सनी देओल व प्रीति जिंटा अभिनीत विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी ‘बंटवारा 1947’ शामिल हैं।

    इसी महीने के अंत में दर्शकों का लंबा इंतजार भी खत्म होने जा रहा है। कई बार तकनीकी कारणों से टलने के बाद, कन्नड़ सुपरस्टार यश की अत्यंत महत्वाकांक्षी फिल्म ‘टॉक्सिक’ आखिरकार 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। गीतू मोहन दास के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे कलाकारों की एक लंबी फौज नजर आएगी। इसके तुरंत बाद, 28 अगस्त को महान लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की जीवनी पर आधारित फिल्म ‘ईठा’ प्रदर्शित होगी, जिसमें श्रद्धा कपूर और रणदीप हुड्डा मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे, जिसका निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है।

    सितंबर के महीने में भी सिनेमाघरों में रोमांच का यह स्तर कम नहीं होगा। ओटीटी की दुनिया में अपनी सफलता का परचम लहराने के बाद ‘मिर्जापुर’ की कहानी अब बड़े पर्दे पर तहलका मचाने आ रही है। गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी ‘मिर्जापुर द मूवी’ 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार अपने पुराने अंदाज में लौट रहे हैं। इसके बाद 11 सितंबर को ब्रिटिश कालीन भारत की पृष्ठभूमि पर बनी विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म ‘रणबाली’ रिलीज होगी। इसी तारीख को निर्देशक प्रियदर्शन की सस्पेंस फिल्म ‘हैवान’ भी सिनेमाघरों में दस्तक देगी, जिसमें कई सालों के लंबे अंतराल के बाद सैफ अली खान और अक्षय कुमार की मशहूर जोड़ी एक बार फिर स्क्रीन साझा करती नजर आएगी।