Category: Entertainment

  • नसीरुद्दीन शाह और पुनीत इस्सर के बीच वैचारिक टकराव, JNU और सरकार के मुद्दे पर अभिनेता ने उठाए तीखे सवाल

    नसीरुद्दीन शाह और पुनीत इस्सर के बीच वैचारिक टकराव, JNU और सरकार के मुद्दे पर अभिनेता ने उठाए तीखे सवाल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड और टेलीविजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता पुनीत इस्सर इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में दुर्योधन की भूमिका निभाकर घर घर में पहचान बनाने वाले पुनीत इस्सर ने दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के हालिया बयानों पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह उनके सीनियर ही नहीं बल्कि शिक्षक भी रहे हैं और एक बेहतरीन कलाकार हैं। इसके बावजूद देश से जुड़े मुद्दों पर उनके बयान देने के तरीके से वह सहमत नहीं हैं। पुनीत का आरोप है कि नसीरुद्दीन शाह कई अहम विषयों पर चुप रहते हैं और कुछ चुनिंदा मुद्दों पर ही अपनी राय सामने रखते हैं।

    एक समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान पुनीत इस्सर ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह का सम्मान अपनी जगह है लेकिन जब कोई सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखता है तो उसे सभी पक्षों को ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक देश और दुनिया में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिन पर कलाकारों और बुद्धिजीवियों को अपनी बात रखनी चाहिए। पुनीत ने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह का नजरिया एकतरफा दिखाई देता है और वह वामपंथी तथा नक्सल समर्थक विचारों से जुड़े मुद्दों पर ही अधिक बोलते हैं। उन्होंने इसे चुनिंदा मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति बताया।

    पुनीत इस्सर ने अपनी बातचीत में जेएनयू के छात्रों और कथित टुकड़े टुकड़े गैंग का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में दोषी अपराधियों और जेल में बंद आतंकवादियों से जुड़े मामले सामने आते हैं तो कुछ लोग उनके समर्थन में आवाज उठाते हैं। पुनीत के अनुसार ऐसे मामलों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के प्रति जिम्मेदारी केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े विषयों पर भी स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए। ये सभी पुनीत इस्सर के निजी विचार हैं।

    अभिनेता ने यह भी साफ किया कि उन्हें नसीरुद्दीन शाह के विचार रखने या सरकार की आलोचना करने के अधिकार से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात कहने और सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार है। लेकिन यदि किसी को मौजूदा सरकार की नीतियां पसंद नहीं हैं तो उसे राजनीतिक रास्ता भी अपनाना चाहिए। पुनीत ने कहा कि ऐसे लोगों को चुनावी मैदान में उतरना चाहिए जनता के बीच जाना चाहिए और चुनाव जीतकर सरकार को बदलने की कोशिश करनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार को जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुना है। इसलिए केवल असहमति जताने के बजाय राजनीतिक विकल्प के जरिए अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहिए। उनके इस बयान को नसीरुद्दीन शाह की हालिया टिप्पणियों पर सीधी प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    दरअसल नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। छात्र अपनी छात्र यूनियन को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में खुद को दिमागी नक्सल बताया था। नसीरुद्दीन शाह ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था।

    इन्हीं बयानों के बाद पुनीत इस्सर की प्रतिक्रिया सामने आई है। दोनों अभिनेता अपने अपने विचारों को लेकर चर्चा में हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर फिल्मी दुनिया के कलाकारों की राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर राय को लेकर बहस तेज कर दी है।

  • गौतम गुलाटी की हरकत पर भड़के वीरेंद्र सहवाग, मंच छोड़कर गए होस्ट, बोले- मुझे चुनौती देना स्वीकार नहीं

    गौतम गुलाटी की हरकत पर भड़के वीरेंद्र सहवाग, मंच छोड़कर गए होस्ट, बोले- मुझे चुनौती देना स्वीकार नहीं

    नई दिल्ली । रियलिटी शो राइज एंड फॉल 2 के हालिया एपिसोड में गौतम गुलाटी और वीरेंद्र सहवाग के बीच तनाव देखने को मिला। शो में मनीष कश्यप के साथ गौतम की बहस के दौरान सहवाग नाराज हो गए और गुस्से में मंच छोड़कर चले गए। कुछ देर बाद लौटे सहवाग ने गौतम के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी को होस्ट करने के लिए बुलाया गया हो, तो उसके सामने इस तरह का बर्ताव करना सही नहीं है। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

    दरअसल, मनीष कश्यप के साथ बहस के दौरान गौतम गुलाटी ने सोफे पर पैर रख दिया था। सहवाग को उनका यह व्यवहार पसंद नहीं आया और वह मंच से उठकर चले गए। उस समय शो में मौजूद निहारिका तिवारी ने भी इस घटनाक्रम पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि सहवाग सर मंच से चले गए हैं, लेकिन गौतम रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसके बाद शो का माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

    कुछ समय बाद सहवाग वापस आए और उन्होंने कंटेस्टेंट्स के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की बातें सुनने की आदत नहीं है। प्रतियोगियों के रवैये पर टिप्पणी करते हुए सहवाग ने कहा कि उन्हें लगा था कि यह सेलिब्रिटी वाला शो है, लेकिन अब उन्हें ऐसा लग रहा है कि यह ‘क्रिमिनल’ वाला शो बन गया है। उनके इस बयान से साफ था कि वह शो में हो रहे व्यवहार से असहज थे।

    सहवाग ने गौतम गुलाटी को सीधे संबोधित करते हुए पूछा कि यह कैसा तरीका है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति शो में होस्ट करने आया है, तो उसके सामने पैर रखकर इस तरह खड़े होना उचित नहीं है। सहवाग ने यह भी कहा कि गौतम उन्हें चुनौती दे रहे हैं, जबकि ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी दौरान ऋषभ ने भी बीच में अपनी बात रखी, तो सहवाग ने उन्हें भी टोकते हुए कहा कि वह उनकी जगह आ जाएं और सहवाग दूसरी जगह बैठ जाते हैं।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर गौतम गुलाटी के व्यवहार को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने उनके रवैये की आलोचना की और कहा कि खुद को जेंटलमैन बताने वाले गौतम को होस्ट के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। कुछ अन्य प्रतिक्रियाओं में भी उनके व्यवहार और दूसरों को सलाह देने के तरीके पर सवाल उठाए गए। हालांकि, ये प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया यूजर्स की व्यक्तिगत राय हैं।

    एपिसोड के दौरान सहवाग ने अपने क्रिकेट करियर से जुड़ा एक पुराना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में एक मैच के दौरान पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने उन्हें गाली दी थी। सहवाग के अनुसार, उस समय उन्होंने तत्काल जवाब देने के बजाय अपने खेल पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि बाद में 309 रन बनाकर उन्होंने मैदान पर अपने प्रदर्शन से जवाब दिया।

    सहवाग ने इस किस्से के जरिए प्रतियोगियों के व्यवहार और सीमाओं को लेकर अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, राइज एंड फॉल 2 के कंटेस्टेंट्स ने कई सीमाएं पार कर दी हैं। शो में गौतम और मनीष के बीच बहस से शुरू हुआ विवाद सहवाग की नाराजगी तक पहुंच गया। अब इस घटनाक्रम को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा हो रही है, खासकर गौतम के व्यवहार और सहवाग की प्रतिक्रिया को लेकर।

  • नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर भड़के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, बोले- अभिनेता का यह रूप नहीं जानते थे…

    नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर भड़के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, बोले- अभिनेता का यह रूप नहीं जानते थे…

    नई दिल्ली । अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक वीडियो में खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहने और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अभिनेता के बयान पर हैरानी जताते हुए उनकी सोच को लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह बताया। वहीं, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतीश राणे ने भी शाह पर निशाना साधा और उन पर पाकिस्तान के पक्ष में बात करने का आरोप लगाया। यह विवाद शिक्षा संस्थानों में छात्रों के साथ कथित कार्रवाई और सरकार की भूमिका को लेकर शाह की टिप्पणियों के बाद सामने आया है।

    किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह का वीडियो साझा करते हुए कहा कि वह अभिनेता का सम्मान करते थे और उन्हें पसंद भी करते थे, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनकी सोच इस तरह की हो सकती है। रिजिजू ने अपनी प्रतिक्रिया में शाह को ‘खतरनाक दिमागी नक्सल’ बताया और कहा कि ऐसी सोच भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है। जिस वीडियो पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी, उसमें शाह कहते सुनाई देते हैं कि वह गर्व के साथ खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं।

    महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतीश राणे ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह पाकिस्तान की स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं और इसके लिए उन्हें भुगतान किया जाता है। राणे ने अभिनेता की आलोचना करते हुए उनकी बातों को गंभीरता से लेने पर भी सवाल उठाए। ये आरोप राणे की ओर से लगाए गए हैं; इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण खबर में नहीं दिया गया है।

    नसीरुद्दीन शाह ने अपने वीडियो में सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रविरोधी और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे नामों से पुकारा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र और शिक्षा संस्थानों को खतरे में डाला जा रहा है। शाह ने सरकार से सवाल किया कि युवाओं का हौसला तोड़ने और शैक्षणिक संस्थानों को प्रभावित करने के लिए और क्या किया जाएगा। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं को याद रखा जाएगा।

    शाह ने 24 अक्टूबर को जारी एक अन्य वीडियो में सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) के छात्रों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद भाजपा उन लोगों से बदला लेने की कोशिश कर रही है, जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक, संस्थान के छात्रों और भविष्य के फिल्म निर्माताओं को प्रशासन से जवाबदेही मांगने के बदले कारण बताओ नोटिस दिए गए, निगरानी में रखा गया, धमकियां दी गईं और छात्रावास खाली करने को कहा गया।

    अभिनेता ने यह भी कहा कि सरकार छात्रों को डराने या उनका विचार बदलने की कोशिश कर सकती है, लेकिन ऐसा सफल नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को देश और समाज की वास्तविक स्थिति सामने लाने वाले भावी फिल्मकार बताया। शाह का कहना था कि युवा भविष्य में अपने काम के जरिए देश के बारे में सच्चाई सामने रखेंगे।

    एसआरएफटीआई से जुड़े मामले को लेकर पहले भी राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। शाह ने संस्थान के छात्रों के साथ कथित व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, जबकि केंद्र सरकार के मंत्री ने उनके बयान की आलोचना की है। इस तरह मामला अब शिक्षा संस्थानों में छात्रों के अधिकार, सरकार की नीतियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चल रही बहस से भी जुड़ गया है।

  • अन्नू कपूर के ‘दूधिया बदन’ वाले कमेंट पर तमन्ना भाटिया ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं ऐसी बातों को तवज्जो देने से नहीं बढ़ेंगे आगे

    अन्नू कपूर के ‘दूधिया बदन’ वाले कमेंट पर तमन्ना भाटिया ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं ऐसी बातों को तवज्जो देने से नहीं बढ़ेंगे आगे

    नई दिल्ली । अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने अन्नू कपूर की ओर से उनके लिए इस्तेमाल किए गए ‘दूधिया बदन’ शब्द पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस टिप्पणी को लेकर पहले सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी और अन्नू कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब तमन्ना ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा है कि ऐसी टिप्पणियों को जरूरत से ज्यादा महत्व देने से आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस तरह की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने काम और अभिनय पर केंद्रित रहना पसंद करती हैं।

    तमन्ना से एक बातचीत के दौरान उनके रंग-रूप को लेकर की गई टिप्पणी के बारे में सवाल पूछा गया। उनसे जानना चाहा गया कि क्या वह चाहती हैं कि करियर के इस पड़ाव पर लोग उन्हें किसी अलग नजरिए से देखें। इसके जवाब में अभिनेत्री ने अपने काम के प्रति दृष्टिकोण साझा किया और बताया कि एक रचनात्मक व्यक्ति के लिए यह समझना जरूरी है कि उसे दूसरों की कही बातों में से क्या सुनना चाहिए और किन बातों को नजरअंदाज करना चाहिए।

    तमन्ना ने कहा कि किसी भी रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति के लिए सुनने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। लेकिन केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह पहचानना भी जरूरी है कि किस बात को महत्व देना है और किसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देना है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी टिप्पणियों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दी जाए, तो आगे बढ़ने में मुश्किल हो सकती है। इसी वजह से वह इन बातों को देखना भी पसंद नहीं करतीं।

    अभिनेत्री के मुताबिक, उनका ध्यान अपने काम, अपनी रचनात्मकता और अभिनय करियर पर रहता है। वह अपने काम को एक सेवा की तरह करना चाहती हैं। उनका मानना है कि जब कोई काम सही भावना और उद्देश्य के साथ किया जाता है, तो वह लोगों तक पहुंचता है। तमन्ना ने इस बातचीत में अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह बाहरी टिप्पणियों के बजाय अपने काम की गुणवत्ता पर ध्यान देती हैं।

    यह विवाद वर्ष 2025 में शुरू हुआ था, जब एक पॉडकास्ट में अन्नू कपूर से तमन्ना भाटिया के बारे में सवाल किया गया। उनसे पूछा गया था कि क्या उन्हें अभिनेत्री पसंद हैं। इसके जवाब में अन्नू कपूर ने ‘दूधिया बदन’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रतिक्रिया दी और उनकी टिप्पणी की आलोचना भी हुई।

    बाद में अन्नू कपूर ने अपने बयान पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि भाषा को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं। उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों पर समाज की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए अपनी बात रखी थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनकी टिप्पणी से तमन्ना को बुरा लगा हो, तो वह माफी मांगने के लिए तैयार हैं। उनके इस स्पष्टीकरण के बावजूद यह मामला चर्चा में बना रहा।

    तमन्ना भाटिया ने वर्ष 2005 में आई फिल्म ‘चांद सा रोशन चेहरा’ से हिंदी सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की थी। उस फिल्म में उनके साथ समीर अफताब नजर आए थे। फिल्म में काम करने के समय तमन्ना की उम्र करीब 15 साल थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम किया और अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

    अन्नू कपूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए तमन्ना ने किसी तरह के विवाद को बढ़ाने के बजाय अपने काम को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनका जवाब इस बात पर केंद्रित रहा कि सार्वजनिक जीवन में लोगों की राय से अधिक जरूरी अपने लक्ष्य और काम पर ध्यान बनाए रखना है।

  • वरुण धवन ने अर्जुन कपूर की डेटिंग लाइफ को लेकर किया दावा, अलीबाग जाने की वजह पर करण जौहर भी हुए शामिल

    वरुण धवन ने अर्जुन कपूर की डेटिंग लाइफ को लेकर किया दावा, अलीबाग जाने की वजह पर करण जौहर भी हुए शामिल


    नई दिल्ली । अभिनेता अर्जुन कपूर की निजी जिंदगी को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। कॉफी विद करण के हालिया एपिसोड में वरुण धवन ने दावा किया कि अर्जुन कपूर सिंगल नहीं हैं और किसी को डेट कर रहे हैं। बातचीत के दौरान वरुण ने अर्जुन के अलीबाग जाने का जिक्र करते हुए अपनी बात रखी। हालांकि, अर्जुन ने इस दावे को सही मानने से इनकार किया और कहा कि वरुण को इस बारे में कुछ पता नहीं है।

    शो के तीसरे एपिसोड में वरुण धवन और जाह्नवी कपूर मेहमान के रूप में पहुंचे थे। इस दौरान दोनों ने अपने करियर और निजी जिंदगी से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की। एपिसोड में अर्जुन कपूर भी विशेष रूप से शामिल हुए। कॉफी काउच पर अर्जुन और वरुण के बीच दोस्ताना बातचीत देखने को मिली। इसी बातचीत के दौरान अर्जुन की डेटिंग लाइफ का मुद्दा उठा और शो का माहौल दिलचस्प हो गया।

    एपिसोड के अंतिम हिस्से में वरुण ने कहा कि अर्जुन किसी को डेट कर रहे हैं। उनकी इस बात पर करण जौहर और जाह्नवी कपूर हैरान नजर आए। जाह्नवी ने भी अर्जुन से सवाल किया कि क्या वह वास्तव में किसी को डेट कर रहे हैं। वरुण ने अपने दावे के समर्थन में अर्जुन के अलीबाग जाने का उल्लेख किया और कहा कि वह वहां दो से तीन दिनों के लिए जाते हैं।

    वरुण की बात सुनकर अर्जुन कपूर ने उनसे ही पूछ लिया कि वह किसे डेट कर रहे हैं। इस पर वरुण ने उन्हें खुद ही बताने के लिए कहा। अर्जुन ने जवाब में एक तस्वीर का जिक्र किया और कहा कि वरुण किसी व्यक्ति से मिले थे और उसके साथ तस्वीर भी खिंचवाई थी। उनकी इस टिप्पणी से बातचीत में नया मोड़ आया, लेकिन किसी व्यक्ति का नाम सामने नहीं आया।

    जाह्नवी कपूर ने भी इस विषय पर अर्जुन से सवाल किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी उन्हें अर्जुन की डेटिंग को लेकर जानकारी वरुण की वजह से ही मिली थी। इसके जवाब में अर्जुन ने वरुण के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें कुछ पता नहीं है और वह केवल अनुमान लगा रहे हैं। इस तरह बातचीत के दौरान अर्जुन ने किसी रिश्ते की पुष्टि नहीं की।

    अलीबाग जाने की वजह पर भी शो में चर्चा हुई। वरुण ने सवाल उठाया कि अर्जुन वहां दो से तीन दिनों के लिए क्यों जाते हैं। इस पर करण जौहर ने अर्जुन का पक्ष लेते हुए कहा कि उनके वहां दोस्त भी हो सकते हैं और वह उनसे मिलने के लिए भी जा सकते हैं। करण की इस प्रतिक्रिया ने बातचीत को आगे बढ़ाया, लेकिन अर्जुन की यात्रा के पीछे की कोई निश्चित वजह सामने नहीं आई।

    अर्जुन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें अलीबाग जाने की जरूरत नहीं है और वह अपने घर पर अकेले रहते हैं। इसके बाद वरुण ने जुहू-विले पार्ले डेवलपमेंट क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जगह काफी करीब है। हालांकि, इस बातचीत में भी अर्जुन की कथित गर्लफ्रेंड के नाम का खुलासा नहीं हुआ।

    शो में हुई इस चर्चा के बाद अर्जुन कपूर की निजी जिंदगी को लेकर अटकलें जरूर बढ़ सकती हैं, लेकिन फिलहाल किसी रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वरुण धवन ने डेटिंग का दावा किया, जबकि अर्जुन कपूर ने इसे अनुमान बताया। ऐसे में बातचीत को किसी निश्चित रिश्ते या गर्लफ्रेंड के नाम के खुलासे के रूप में देखना सही नहीं होगा।

  • रवीना टंडन ने एक साल में दीं 8 हिट फिल्में, श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित भी नहीं तोड़ पाईं यह रिकॉर्ड

    रवीना टंडन ने एक साल में दीं 8 हिट फिल्में, श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित भी नहीं तोड़ पाईं यह रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में रवीना टंडन उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने करियर में कई सफल फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। 1990 के दशक में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाओं से अपनी पहचान मजबूत की। उनके करियर से जुड़ा एक खास रिकॉर्ड भी चर्चा में रहा है। बताया जाता है कि 1994 में रवीना की कई सफल फिल्में रिलीज हुई थीं और एक ही साल में आठ ब्लॉकबस्टर फिल्में देने का रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हुआ।

    रवीना टंडन ने हिंदी सिनेमा में अपने सफर की शुरुआत 1991 में आई फिल्म ‘पत्थर के फूल’ से की थी। इस फिल्म में सलमान खान उनके साथ नजर आए थे। फिल्म को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला और रवीना को पहली ही फिल्म से पहचान मिल गई। अपने डेब्यू के लिए उन्होंने फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता। शुरुआती सफलता ने उनके फिल्मी करियर को आगे बढ़ने का अवसर दिया और वह जल्द ही प्रमुख अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं।

    रवीना के करियर में 1994 का साल विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान उनकी ‘मोहरा’, ‘लाडला’, ‘दिलवाले’, ‘आतिश’ और ‘अंदाज अपना अपना’ जैसी फिल्में रिलीज हुईं। इन फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग अंदाज के किरदार निभाए। कुछ फिल्मों में वह रोमांटिक भूमिकाओं में दिखाई दीं, तो कुछ में उनका अंदाज अधिक चुलबुला और प्रभावशाली रहा। लगातार फिल्मों के रिलीज होने और दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ने से उस दौर में रवीना की मौजूदगी हिंदी सिनेमा में मजबूत हुई।

    उनकी उपलब्धियों की चर्चा करते समय श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों का भी उल्लेख किया जाता है। दोनों अभिनेत्रियों ने अपने लंबे करियर में कई यादगार और सफल फिल्में दीं। हालांकि, रवीना के नाम एक साल में आठ ब्लॉकबस्टर फिल्में देने का रिकॉर्ड होने का दावा किया जाता है। इस उपलब्धि ने उनके करियर को एक अलग पहचान दी। यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग फिल्मों की व्यावसायिक सफलता का आकलन समय, बाजार और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अलग हो सकता है।

    रवीना ने अपने करियर की शुरुआत में फिल्मों को लेकर कई फैसले भी किए थे। वर्ष 2023 में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने बताया था कि मॉडलिंग करते समय उन्हें लगातार फिल्मों के प्रस्ताव मिल रहे थे, लेकिन उस समय अभिनय को लेकर उनकी विशेष रुचि नहीं थी। उन्होंने कुछ फिल्मों को करने से इनकार भी किया था।

    रवीना के मुताबिक, यश चोपड़ा की फिल्म ‘डर’ के लिए भी उनसे संपर्क किया गया था। बाद में इस फिल्म में शाहरुख खान, सनी देओल और जूही चावला ने काम किया। रवीना ने बताया था कि कुछ दृश्यों को लेकर सहज महसूस नहीं करने के कारण उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा, करिश्मा कपूर की पहली फिल्म ‘प्रेम कैदी’ का प्रस्ताव भी उन्हें मिला था, लेकिन उन्होंने इसे नहीं किया।

    अभिनेत्री ने अजय देवगन की पहली फिल्म ‘फूल और कांटे’ में काम करने से भी इनकार कर दिया था। बाद में यह फिल्म सफल रही और अजय देवगन को इससे पहचान मिली। रवीना के इन फैसलों से पता चलता है कि करियर की शुरुआत में उन्होंने अपनी सहजता और पसंद को महत्व दिया। समय के साथ उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई।

  • रणबीर कपूर ने अमिताभ बच्चन को सुनाई आलिया भट्ट को प्रपोज करने की कहानी, बोले- मेरी शेरनी सामने थी और मैं चूहा बन गया

    रणबीर कपूर ने अमिताभ बच्चन को सुनाई आलिया भट्ट को प्रपोज करने की कहानी, बोले- मेरी शेरनी सामने थी और मैं चूहा बन गया

    नई दिल्ली । अभिनेता रणबीर कपूर ने अभिनेत्री आलिया भट्ट को शादी के लिए प्रपोज करने से जुड़ा एक खास किस्सा साझा किया है। अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति में पहुंचे रणबीर ने बताया कि उन्होंने आलिया को प्रपोज करने के लिए पहले से पूरी योजना बनाई थी। इस दौरान उन्होंने उस पल को याद किया, जब केन्या के मसाई मारा में उन्होंने आलिया के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था। रणबीर के मुताबिक, यह उनकी जिंदगी के सबसे यादगार पलों में से एक है, जिसे वह कभी नहीं भूल सकते।

    रणबीर कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म रामायण को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के प्रचार के सिलसिले में वह कौन बनेगा करोड़पति के सेट पर पहुंचे थे। उनके साथ अभिनेत्री साई पल्लवी और अभिनेता रवि दुबे भी मौजूद थे। शो के दौरान बातचीत में रणबीर ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा यह किस्सा सुनाया और बताया कि आलिया को प्रपोज करने के लिए उन्होंने किस तरह तैयारी की थी।

    रणबीर ने बताया कि उन्होंने पहले ही अपने गाइड और ड्राइवर को इस योजना के बारे में बता दिया था। उन्होंने उन्हें निर्देश दिया था कि यात्रा के दौरान किसी उपयुक्त जगह पर गाड़ी रोक दें। रणबीर अपने साथ अंगूठी लेकर गए थे और चाहते थे कि वह घुटनों पर बैठकर आलिया को शादी के लिए पूछें। उन्होंने गाइड से यह भी कहा था कि वह कुछ दूरी से इस पल की तस्वीरें खींच लें, क्योंकि लड़कियों को तस्वीरें खिंचवाना और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करना पसंद होता है।

    प्रपोज करने के दौरान आसपास मौजूद शेरों का जिक्र भी रणबीर ने किया। उन्होंने बताया कि उस जगह से कुछ दूरी पर तीन बब्बर शेर मौजूद थे। उनकी बात सुनकर अमिताभ बच्चन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस खास पल का प्रमाण भी होना चाहिए। रणबीर ने इसके बाद आलिया और खुद की तुलना करते हुए कहा कि उनकी शेरनी उनके सामने खड़ी थी और वह चूहे की तरह घुटनों पर बैठकर उनसे पूछ रहे थे कि क्या वह उनसे शादी करेंगी।

    रणबीर ने इस पूरे अनुभव को अपनी जिंदगी का अद्भुत पल बताया। उनके अनुसार, आलिया को प्रपोज करने का यह क्षण उनके लिए बेहद खास था और इसकी याद हमेशा उनके साथ रहेगी। मसाई मारा की यात्रा के दौरान हुआ यह प्रस्ताव दोनों के रिश्ते की महत्वपूर्ण यादों में शामिल है।

    रणबीर और आलिया ने केन्या के मसाई मारा में सगाई की थी। दोनों वहां छुट्टियां बिताने गए थे, जहां रणबीर ने आलिया को सरप्राइज देते हुए शादी का प्रस्ताव रखा। इसके बाद दोनों ने 14 अप्रैल 2022 को मुंबई स्थित अपने घर पर शादी की। समारोह में परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों ने हिस्सा लिया था। उसी साल 6 नवंबर को दोनों की बेटी का जन्म हुआ।

    इस बीच रणबीर की फिल्म रामायण भी चर्चा में है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणबीर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि साई पल्लवी सीता और यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में अरुण गोविल, रकुल प्रीत सिंह, लारा दत्ता, काजल अग्रवाल और कुणाल कपूर सहित अन्य कलाकार भी शामिल हैं। फिल्म की रिलीज तारीख 5 नवंबर बताई गई है।

    फिल्म के बजट को लेकर भी चर्चा है। निर्माता नमित मल्होत्रा ने एक पॉडकास्ट में बताया था कि रामायण के दोनों भागों का कुल बजट 4,000 करोड़ रुपये है। इस बड़े बजट के कारण फिल्म को भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी परियोजनाओं में गिना जा रहा है। रणबीर जहां फिल्म को लेकर सुर्खियों में हैं, वहीं शो में सुनाया गया उनका निजी किस्सा उनके और आलिया के रिश्ते के एक यादगार पल को फिर सामने लाया है।

  • रावण को पूरी तरह बुरा नहीं मानतीं साई पल्लवी, रामायण पर बयान से सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..

    रावण को पूरी तरह बुरा नहीं मानतीं साई पल्लवी, रामायण पर बयान से सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री साई पल्लवी का रावण के व्यक्तित्व को लेकर दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है। फिल्म रामायण के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान उन्होंने कहा कि रावण पूरी तरह बुरा नहीं था। उनके इस कथन के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने उनके विचारों पर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने बयान का समर्थन करते हुए रावण के व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया।

    27 अक्टूबर को लॉस एंजेलिस में आयोजित फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान साई पल्लवी ने भारतीय संस्कृति और महाकाव्य रामायण के महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और महाकाव्यों को समझने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यह फिल्म एक अच्छी शुरुआत साबित हो सकती है। उनके मुताबिक, रामायण को धर्मग्रंथ मानकर उस पर विश्वास करने वालों के लिए आत्मचिंतन करना भी जरूरी है।

    साई पल्लवी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अच्छाइयों और बुराइयों को पहचानना चाहिए। समय के साथ अपनी कमियों को समझकर उनमें सुधार करने का प्रयास करना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने रावण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पूरी तरह बुरा नहीं था। अभिनेत्री ने अपने बयान के माध्यम से इस बात पर जोर दिया कि लोगों को अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानकर खुद को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

    हालांकि, रावण को लेकर उनकी यह टिप्पणी सामने आने के बाद कई लोगों ने नाराजगी जताई। कुछ यूजर्स का कहना था कि रावण के कृत्यों को देखते हुए उसके बारे में इस तरह की बात करना उचित नहीं है। एक यूजर ने सवाल उठाया कि किसी अपहरण करने वाले की तारीफ कैसे की जा सकती है। कुछ लोगों ने अभिनेत्री से अपने बयान को स्पष्ट करने की भी मांग की।

    दूसरी ओर, साई पल्लवी के समर्थन में भी कई प्रतिक्रियाएं सामने आईं। समर्थकों ने कहा कि रावण के व्यक्तित्व को केवल एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है। कुछ लोगों ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि देश के कई हिस्सों में दशहरे पर रावण का दहन किया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर उसकी पूजा भी होती है। उनके अनुसार, यह अंतर रावण को लेकर प्रचलित विभिन्न मान्यताओं और विचारों को दर्शाता है।

    कुछ यूजर्स ने रावण के शिवभक्त और महान संगीतज्ञ होने का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके व्यक्तित्व में अच्छाइयां भी थीं। उनका मानना था कि साई पल्लवी की बात को संदर्भ से अलग करके विवाद का विषय बनाया जा रहा है। इस तरह अभिनेत्री के बयान पर आलोचना और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

    इस विवाद के बीच फिल्म रामायण भी चर्चा में बनी हुई है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी यह फिल्म दो भागों में रिलीज होने वाली है। फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर को दिवाली के अवसर पर रिलीज होना निर्धारित है, जबकि दूसरा भाग दिवाली 2027 के आसपास आने की योजना है।

    फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। वहीं, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म की कास्टिंग और अन्य पहलुओं के साथ अब साई पल्लवी का बयान भी चर्चा का हिस्सा बन गया है।

  • प्रतीक सहजपाल बोले- ‘इंडियन गेम शो’ में हारना भी जीतने जैसा

    प्रतीक सहजपाल बोले- ‘इंडियन गेम शो’ में हारना भी जीतने जैसा


    मुंबई।
    अपने प्रतिस्पर्धी स्वभाव और ऊर्जावान अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले प्रतीक सहजपाल ने सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के शो ‘इंडियन गेम शो विद भारती एंड हर्ष’ में हिस्सा लेने के अपने अनुभव साझा किए। प्रतीक के मुताबिक, आमतौर पर प्रतियोगिताओं में जीत हासिल करना सबसे अहम होता है, लेकिन इस शो का अनूठा कॉन्सेप्ट प्रतिभागियों को जीत-हार के दबाव से दूर रखकर मनोरंजन पर ध्यान देने का मौका देता है।

    प्रतीक ने बताया कि शो की सबसे खास बात यह है कि यहां हारने वाले प्रतिभागियों को भी उतना ही महत्व मिलता है। यही वजह है कि प्रतियोगिता का माहौल तनावपूर्ण होने के बजाय मनोरंजक बना रहता है। उनके लिए यह अनुभव सामान्य गेम शो से अलग रहा, जहां अप्रत्याशित घटनाओं और मजेदार चुनौतियों के बीच हर पल का आनंद लेना ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

    इस अनुभव को और खास बनाने में शो के मेजबान भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के साथ उनकी सहज बॉन्डिंग की भी अहम भूमिका रही। प्रतीक दोनों को अपने परिवार जैसा मानते हैं। उनके साथ बिताया समय और शूटिंग के दौरान बनी आपसी समझ ने शो के अनुभव को उनके लिए यादगार बना दिया।

    जीत-हार से ज्यादा मनोरंजन पर जोर

    अपना अनुभव साझा करते हुए प्रतीक सहजपाल ने कहा, “मैं वास्तव में बहुत प्रतिस्पर्धी इंसान हूं, लेकिन जब बात ‘इंडियन गेम शो विद भारती एंड हर्ष’ की आती है, तो पूरा अनुभव इतना मजेदार होता है कि आप लगभग जीतने के बारे में भूल ही जाते हैं। शो का कॉन्सेप्ट ऐसा है कि यहां हारने वाले को भी ज्यादा महत्व मिलता है, इसलिए एक तरह से यहां हारना भी जीतने जैसा लगता है। मैंने शो में बिताए हर पल का दिल से आनंद लिया।”

    उन्होंने आगे कहा, “हर्ष भैया और भारती दी मेरे लिए परिवार जैसे हैं। जब भी मैं उनके साथ होता हूं, मेरा समय हमेशा बहुत अच्छा गुजरता है। मैं उनके साथ ऐसे और मजेदार शूटिंग के दिनों का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।”

    गेम शो में मनोरंजन का नया अंदाज

    मजेदार चुनौतियों, अप्रत्याशित पलों और भारती सिंह व हर्ष लिंबाचिया की शानदार केमिस्ट्री के साथ ‘इंडियन गेम शो विद भारती एंड हर्ष’ दर्शकों के लिए मनोरंजन का एक अलग अनुभव पेश करता है। शो का प्रारूप इस विचार को सामने लाता है कि प्रतियोगिता में जीत हासिल करना ही सब कुछ नहीं, बल्कि साथ मिलकर हंसना और हर पल का आनंद लेना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

    ‘इंडियन गेम शो विद भारती एंड हर्ष’ का प्रसारण हर सोमवार से शुक्रवार रात 8 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर किया जाता है। यह शो सोनी लिव पर भी उपलब्ध है।

  • नेपोटिज्म की बहस पर सारा अली खान ने तोड़ी चुप्पी, परिवार की पहचान मिली लेकिन मुश्किलें भी खुद झेलीं

    नेपोटिज्म की बहस पर सारा अली खान ने तोड़ी चुप्पी, परिवार की पहचान मिली लेकिन मुश्किलें भी खुद झेलीं


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानी परिवारवाद को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को अक्सर इस सवाल का सामना करना पड़ता है कि क्या उन्हें अपने पारिवारिक संबंधों की वजह से फिल्मों में आसानी से मौके मिल जाते हैं। अब अभिनेत्री सारा अली खान ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है। सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा ने माना कि फिल्मी परिवार से होने के कारण उन्हें कई फायदे मिले हैं लेकिन उन्होंने अपने करियर में आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके बयान के बाद एक बार फिर बॉलीवुड में अवसरों और संघर्ष को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में सारा अली खान ने कहा कि फिल्मी विरासत के अपने फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। उनके मुताबिक परिवार की पहचान होने से उन्हें अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले ही पहचान और अवसर मिलने लगे थे। किसी बड़े फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकार के लिए शुरुआत में कुछ दरवाजे आसानी से खुल सकते हैं। सारा ने इस बात से इनकार नहीं किया कि उन्हें भी इसका फायदा मिला और उन्हें फिल्मों में डेब्यू करने का अवसर मिला। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके साथ दर्शकों और इंडस्ट्री की उम्मीदें भी काफी बढ़ जाती हैं।

    सारा ने जाह्नवी कपूर और अनन्या पांडे का जिक्र करते हुए कहा कि किसी ने भी अपना परिवार खुद नहीं चुना। उनका जन्म जिस परिवार में हुआ वह उनकी पसंद नहीं बल्कि किस्मत का हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्मी परिवार से आने के कारण मिलने वाले अवसरों को स्वीकार करने के साथ कलाकारों की मेहनत को भी देखा जाना चाहिए। सारा के अनुसार किसी कलाकार की पारिवारिक पृष्ठभूमि उसके करियर का एक हिस्सा हो सकती है लेकिन लंबे समय तक काम करने के लिए अपनी प्रतिभा और मेहनत भी दिखानी पड़ती है।

    अभिनेत्री ने इंडस्ट्री में करीब आठ साल बिताने के बाद अपने विशेषाधिकार को लेकर बार बार सफाई देने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि वह अपने पारिवारिक बैकग्राउंड के फायदे को समझती हैं और उसे छिपाने की कोशिश नहीं करतीं। लेकिन उनके मुताबिक किसी कलाकार के काम और उसके सफर को केवल परिवार के नाम तक सीमित करके देखना भी सही नहीं है। सारा की बातों से यह स्पष्ट हुआ कि वह नेपोटिज्म की बहस में अपने फायदे स्वीकार करने के साथ अपनी व्यक्तिगत यात्रा को भी सामने रखना चाहती हैं।

    अपने संघर्ष के बारे में बात करते हुए सारा ने कहा कि वह अपनी मां के साथ रहीं और उनके पिता ऐसे व्यक्ति नहीं थे जो उनके लिए काम दिलाने के लिए फिल्म निर्माताओं के कार्यालयों के चक्कर लगाते या लोगों से उन्हें अपनी फिल्मों में लेने की गुजारिश करते। उन्होंने फिल्म केदारनाथ के दौरान आई मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्हें कई चीजें खुद संभालनी पड़ीं। सारा ने यह भी कहा कि उन्हें इंडस्ट्री में कोई ऐसा गॉडफादर नहीं मिला जो हर परिस्थिति में उनके लिए रास्ता आसान कर देता।

    सारा अली खान ने साल 2018 में फिल्म केदारनाथ से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद वह कई फिल्मों में नजर आईं और अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती रहीं। हाल के वर्षों में वह अलग अलग तरह की भूमिकाओं में दिखाई दी हैं। उनकी फिल्मों को दर्शकों से कभी अच्छी तो कभी मिली जुली प्रतिक्रिया मिली है।

    सारा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में स्टार किड्स को मिलने वाले अवसरों और बाहरी प्रतिभाओं के संघर्ष पर बहस जारी है। उनके विचारों में एक तरफ पारिवारिक विरासत से मिले फायदे स्वीकार करने की बात है तो दूसरी तरफ अपने काम और मेहनत को भी महत्व देने की अपील है। इस बयान से यह बहस फिर सामने आई है कि फिल्मी परिवार से जुड़ाव शुरुआती अवसर दिला सकता है लेकिन करियर में आगे बढ़ने के लिए कलाकार को अपनी क्षमता साबित करनी पड़ती है।