Category: Entertainment

  • गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान चंद्रचूड़ सिंह के घर के बाहर हुई कार्रवाई, अभिनेता का शांत व्यवहार बना चर्चा का विषय

    गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान चंद्रचूड़ सिंह के घर के बाहर हुई कार्रवाई, अभिनेता का शांत व्यवहार बना चर्चा का विषय

    नई दिल्ली । हरियाणा के गुरुग्राम में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के आवास के बाहर भी प्रशासन ने कार्रवाई की। यह अभियान डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 तक विभिन्न स्थानों पर कथित अवैध निर्माण हटाने के लिए चलाया गया। इसी दौरान अभिनेता के घर के बाहर भी बुलडोजर पहुंचा और प्रशासनिक टीम ने निर्धारित दायरे में कार्रवाई की। घटना के दौरान अभिनेता का शांत और संयमित व्यवहार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    जानकारी के अनुसार प्रशासन की टीम जब चंद्रचूड़ सिंह के आवास के बाहर पहुंची तो अभिनेता स्वयं घर से बाहर आए और अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने शांतिपूर्वक यह समझने का प्रयास किया कि कार्रवाई किस सीमा तक की जाएगी। बातचीत के दौरान उन्होंने किसी प्रकार का विरोध या विवाद नहीं किया और पूरी प्रक्रिया के दौरान संयम बनाए रखा।

    घटनास्थल पर मौजूद लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं। वीडियो में अभिनेता प्रशासनिक अधिकारियों से सामान्य तरीके से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। उनके व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कई उपयोगकर्ताओं ने उनकी सादगी, शालीनता और संयम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी स्थिति को बेहद संतुलित तरीके से संभाला।

    गुरुग्राम प्रशासन इन दिनों शहर के विभिन्न इलाकों में अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चला रहा है। इसी क्रम में डीएलएफ क्षेत्र के कई हिस्सों में भी कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप सार्वजनिक स्थानों और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करना है।

    चंद्रचूड़ सिंह हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल रहे हैं जिन्होंने 1990 के दशक में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई सफल फिल्मों में अभिनय कर दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की। बाद के वर्षों में स्वास्थ्य और निजी कारणों से उन्होंने फिल्मी दुनिया से कुछ समय के लिए दूरी बना ली थी, लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने अभिनय में वापसी भी की।

    अभिनेता का पारिवारिक संबंध एक प्रतिष्ठित परिवार से माना जाता है। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके थे और सार्वजनिक जीवन से भी जुड़े रहे, जबकि उनकी मां का संबंध पूर्व रियासती परिवार से बताया जाता है। इसके बावजूद अभिनेता का सरल और विनम्र स्वभाव अक्सर चर्चा का विषय रहा है।

    गुरुग्राम में हुई इस कार्रवाई के दौरान भी उनका शांत रवैया लोगों का ध्यान आकर्षित करता दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अधिकांश प्रतिक्रियाएं उनके संयमित व्यवहार की प्रशंसा करती नजर आ रही हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने का अभियान विभिन्न क्षेत्रों में जारी है और निर्धारित मानकों के अनुसार आगे भी कार्रवाई की जा रही है।

  • जमीन के झगड़े में ग्रामीण को पीटकर जिंदा जलाने का आरोप: इलाज के दौरान मौत, पोते ने कहा- मेरी आंखों के सामने डीजल डालकर लगा दी आग

    जमीन के झगड़े में ग्रामीण को पीटकर जिंदा जलाने का आरोप: इलाज के दौरान मौत, पोते ने कहा- मेरी आंखों के सामने डीजल डालकर लगा दी आग


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पोहरी थाना क्षेत्र के नयागांव में जमीन विवाद को लेकर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक ग्रामीण को कथित तौर पर पहले बेरहमी से पीटा गया और फिर उस पर डीजल डालकर आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसे ग्रामीण की शनिवार सुबह जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर जांच शुरू कर दी है और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    मृतक की पहचान अरविंद धाकड़ के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक परिवार में काफी समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, जिसका मामला अदालत में विचाराधीन है। गुरुवार को अरविंद धाकड़ और उनके परिजनों ने विवादित जमीन पर बोवनी की थी। शुक्रवार दोपहर वह अपने पोते अंशुल धाकड़ के साथ खेत पर फसल देखने पहुंचे थे। इसी दौरान आरोप है कि दूसरे पक्ष के कुछ लोग वहां पहुंचे और विवाद हिंसक हो गया।

    मृतक के पोते अंशुल धाकड़ ने आरोप लगाया कि प्रकाश धाकड़, आशा धाकड़, बंटी धाकड़, हरिओम धाकड़, हरिशंकर और विमल धाकड़ ने आते ही उन पर और उनके दादा पर लाठियों से हमला कर दिया। अंशुल किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकला, लेकिन उसने दूर से देखा कि आरोपी उसके दादा की लगातार पिटाई कर रहे थे। अंशुल का आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने ट्रैक्टर से डीजल निकालकर अरविंद धाकड़ के ऊपर डाला और उन्हें आग के हवाले कर दिया।

    घटना के समय अंशुल के पास मोबाइल फोन नहीं था। वह दौड़कर घर पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद गंभीर रूप से झुलसे अरविंद धाकड़ को पहले पोहरी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। शनिवार सुबह करीब पांच बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

    पोहरी थाना प्रभारी रवि चौहान ने बताया कि पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। घटना के संबंध में परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    प्राथमिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने से तेज हुईं चर्चाएं, प्रिंस नरूला और युविका चौधरी के रिश्ते पर उठे सवाल, आधिकारिक बयान का इंतजार

    इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने से तेज हुईं चर्चाएं, प्रिंस नरूला और युविका चौधरी के रिश्ते पर उठे सवाल, आधिकारिक बयान का इंतजार

    नई दिल्ली । टेलीविजन जगत के चर्चित दंपति प्रिंस नरूला और युविका चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनके किसी नए प्रोजेक्ट या सार्वजनिक बयान को लेकर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर हुई एक गतिविधि को लेकर शुरू हुई है। दोनों के इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने की जानकारी सामने आने के बाद उनके रिश्ते को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अब तक इस विषय पर दोनों कलाकारों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    सोशल मीडिया पर सक्रिय प्रशंसकों ने सबसे पहले यह बदलाव नोटिस किया कि दोनों अब एक-दूसरे की प्रोफाइल को फॉलो नहीं कर रहे हैं। इसके बाद कई प्लेटफॉर्म पर उनके वैवाहिक संबंधों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे रिश्ते में दूरी का संकेत बताया, जबकि कई अन्य लोगों ने बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह दी।

    दिलचस्प बात यह है कि इंस्टाग्राम पर अनफॉलो किए जाने के बावजूद कुछ संकेत ऐसे भी हैं जो अलग तस्वीर पेश करते हैं। प्रिंस नरूला की प्रोफाइल पर अब भी उनके नाम के साथ युविका का नाम जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। इसके अलावा दोनों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक-दूसरे के साथ साझा की गई पुरानी तस्वीरें या यादगार पोस्ट हटाई नहीं हैं। यही वजह है कि कई प्रशंसकों का मानना है कि यह केवल सोशल मीडिया से जुड़ा बदलाव भी हो सकता है।

    प्रिंस नरूला और युविका चौधरी की प्रेम कहानी टेलीविजन के लोकप्रिय रियलिटी शो के दौरान शुरू हुई थी। शो में हुई दोस्ती समय के साथ गहरे रिश्ते में बदली और दोनों ने कई वर्षों तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद वर्ष 2018 में विवाह किया। शादी के बाद यह जोड़ी मनोरंजन जगत की चर्चित जोड़ियों में शामिल रही और सोशल मीडिया पर भी दोनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही।

    वर्ष 2024 में दोनों ने अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए बेटी का स्वागत किया। शुरुआत में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने की कोशिश की, लेकिन बाद में एक विशेष अवसर पर अपनी बेटी की पहली झलक प्रशंसकों के साथ साझा की थी। इसके बाद से परिवार से जुड़ी उनकी तस्वीरों और वीडियो को भी दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिलता रहा।

    यह पहला अवसर नहीं है जब इस दंपति के रिश्ते को लेकर चर्चाएं सामने आई हों। इससे पहले भी युविका की गर्भावस्था के दौरान उनके अलग रहने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं। बाद में युविका ने स्पष्ट किया था कि वह स्वास्थ्य संबंधी सुविधा और घर में चल रहे काम के कारण कुछ समय अपनी मां के घर रह रही थीं। उस स्पष्टीकरण के बाद उन अफवाहों पर विराम लग गया था।

    फिलहाल इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो किए जाने के आधार पर उनके रिश्ते को लेकर किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी माना जा रहा है। जब तक प्रिंस नरूला या युविका चौधरी स्वयं इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं करते, तब तक सामने आ रही चर्चाओं को केवल अटकलों के रूप में ही देखा जा सकता है। प्रशंसकों की नजर अब दोनों की संभावित प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • हेमा मालिनी संग सीन देने में हुई झिझक! नसीरुद्दीन शाह के इनकार के बाद मेकर्स ने निकाला अनोखा रास्ता

    हेमा मालिनी संग सीन देने में हुई झिझक! नसीरुद्दीन शाह के इनकार के बाद मेकर्स ने निकाला अनोखा रास्ता


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई बार ऐसे किस्से सामने आते हैं जो फिल्मों से ज्यादा उनकी शूटिंग के दौरान घटी घटनाओं की वजह से चर्चा में रहते हैं। कलाकार अक्सर अपने किरदार की जरूरत के अनुसार चुनौतीपूर्ण दृश्य निभाते हैं लेकिन कुछ मौके ऐसे भी आए जब कलाकारों ने व्यक्तिगत असहजता के कारण कुछ दृश्यों को करने से परहेज किया। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म रिहाई से जुड़ा है जिसमें हेमा मालिनी और नसीरुद्दीन शाह अहम भूमिकाओं में नजर आए थे।

    बताया जाता है कि फिल्म की कहानी के अनुसार नसीरुद्दीन शाह और हेमा मालिनी के बीच एक रोमांटिक दृश्य फिल्माया जाना था। जब अभिनेता को इस दृश्य के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने इसे करने में असहजता जताई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नसीरुद्दीन शाह का मानना था कि हेमा मालिनी जैसी वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अभिनेत्री के साथ इस तरह का दृश्य करना उनके लिए सहज नहीं था। उन्होंने निर्देशक से अपनी झिझक भी साझा की।

    कहा जाता है कि फिल्म की निर्देशक अरुणा राजे और स्वयं हेमा मालिनी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया ताकि दृश्य कहानी की जरूरत के अनुसार पूरा किया जा सके। हालांकि अभिनेता अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद फिल्म की टीम ने वैकल्पिक तरीका अपनाते हुए संबंधित दृश्य को बॉडी डबल की मदद से फिल्माने का निर्णय लिया। इस तरह फिल्म की शूटिंग पूरी की गई और कहानी के प्रवाह को भी बनाए रखा गया।

    फिल्म रिहाई अपने समय की अलग विषयवस्तु वाली फिल्मों में गिनी जाती है। इसमें ग्रामीण समाज महिलाओं के अकेलेपन सामाजिक बदलाव और रिश्तों की जटिलताओं को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया था। फिल्म में हेमा मालिनी के अलावा विनोद खन्ना नसीरुद्दीन शाह और नीना गुप्ता जैसे कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। समीक्षकों ने इसकी कहानी और अभिनय की सराहना की थी।

    रिपोर्टों के मुताबिक इस फिल्म के लिए शुरुआत में अभिनेत्री स्मिता पाटिल पर भी विचार किया गया था। बाद में यह भूमिका हेमा मालिनी को मिली और उन्होंने मजबूत कहानी तथा महिला निर्देशक के साथ काम करने की इच्छा के चलते फिल्म स्वीकार की। एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने भी बताया था कि अरुणा राजे के निर्देशन में काम करना उनके लिए एक विशेष अनुभव था और यही वजह थी कि उन्होंने यह फिल्म करने का फैसला लिया।

    आज भी रिहाई केवल अपनी कहानी के लिए ही नहीं बल्कि शूटिंग से जुड़े इन दिलचस्प किस्सों के कारण भी याद की जाती है। यह घटना इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कलाकारों की व्यक्तिगत सहजता और पेशेवर जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए फिल्म निर्माण के दौरान कई बार अलग-अलग समाधान तलाशने पड़ते हैं।

  • जब एक ही गाने ने बना दिया रिकॉर्ड! 20 मिनट के इस देशभक्ति ट्रैक की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

    जब एक ही गाने ने बना दिया रिकॉर्ड! 20 मिनट के इस देशभक्ति ट्रैक की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि फिल्मों की आत्मा माने जाते हैं। कई बार किसी फिल्म की कहानी भले ही दर्शकों के दिलों में खास जगह न बना पाए लेकिन उसके गाने वर्षों तक लोगों की जुबान पर बने रहते हैं। बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई गीत हैं जिन्होंने लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड बनाए लेकिन एक गीत ऐसा भी है जिसने अपनी असाधारण लंबाई के कारण अलग पहचान हासिल की। यह गीत फिल्म अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का टाइटल ट्रैक है जिसे हिंदी फिल्मों के सबसे लंबे गीतों में गिना जाता है।

    साल 2004 में रिलीज हुई इस फिल्म का शीर्षक गीत लगभग 20 मिनट की अवधि का है। फिल्म में इसे एक साथ नहीं बल्कि तीन अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तुत किया गया है ताकि कहानी का प्रवाह बना रहे और भावनात्मक प्रभाव भी कायम रहे। इस गीत में देशभक्ति वीरता बलिदान और सैनिकों के सम्मान की भावना को बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। यही वजह है कि यह गीत आज भी देशभक्ति गीतों की सूची में खास स्थान रखता है।

    इस गीत का संगीत मशहूर संगीतकार अनु मलिक ने तैयार किया था। भव्य ऑर्केस्ट्रा दमदार बोल और भावनात्मक प्रस्तुति ने इसे सामान्य फिल्मी गीतों से अलग पहचान दिलाई। गीत के हर हिस्से में सैनिकों के त्याग परिवारों की भावनाएं और राष्ट्र के प्रति समर्पण को प्रमुखता से उभारा गया है। यही कारण है कि यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि देशभक्ति का संदेश देने वाला एक सशक्त संगीतात्मक प्रस्तुतीकरण बन गया।

    फिल्म अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का निर्देशन अनिल शर्मा ने किया था। इसमें अमिताभ बच्चन अक्षय कुमार बॉबी देओल दिव्या खोसला कुमार संदली सिन्हा और नगमा जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। कहानी भारतीय सेना की तीन पीढ़ियों के संघर्ष बलिदान और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर आधारित थी। फिल्म को समीक्षकों से सराहना मिली लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    हालांकि फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही लेकिन इसका शीर्षक गीत समय के साथ अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा। देशभक्ति के अवसरों पर आज भी यह गीत कई मंचों और कार्यक्रमों में सुनाई देता है। इसकी लंबाई के बावजूद दर्शकों की भावनाओं को अंत तक बांधे रखने की क्षमता इसे विशेष बनाती है।

    भारतीय सिनेमा में इतने लंबे गीत बहुत कम देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का टाइटल ट्रैक आज भी बॉलीवुड के सबसे लंबे और यादगार देशभक्ति गीतों में शामिल माना जाता है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं बल्कि देश के वीर जवानों के साहस समर्पण और बलिदान को श्रद्धांजलि देने वाला भावनात्मक दस्तावेज बन चुका है।

  • आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले सुपरस्टार यश का पुराना पारिवारिक बयान इंटरनेट पर वायरल, सोशल मीडिया पर सिनेमाई मर्यादा और लैंगिक भेदभाव को लेकर छिड़ी बड़ी बहस

    आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले सुपरस्टार यश का पुराना पारिवारिक बयान इंटरनेट पर वायरल, सोशल मीडिया पर सिनेमाई मर्यादा और लैंगिक भेदभाव को लेकर छिड़ी बड़ी बहस

    नई दिल्ली । कन्नड़ सिनेमा से निकलकर देशव्यापी पहचान बनाने वाले सुपरस्टार यश इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद से ही अभिनेता को लेकर सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, फिल्म की चर्चाओं के बीच अभिनेता का एक दशक पुराना बयान इंटरनेट पर अचानक दोबारा वायरल हो गया है, जिसने फिल्म जगत और दर्शकों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    यह पूरा मामला साल 2014 का है, जब अभिनेता यश ने मशहूर टॉक शो ‘वीकेंड विद रमेश’ में शिरकत की थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्मों में अपनी सीमाओं, ऑन-स्क्रीन रोमांटिक दृश्यों और अपने पारिवारिक मूल्यों को लेकर खुलकर बात की थी। उस समय दिए गए अपने इंटरव्यू में यश ने स्वीकार किया था कि सेट पर रोमांटिक सीन फिल्माते समय वह काफी असहज और नर्वस हो जाते थे। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी बताया था कि उनके इन दृश्यों को देखकर उनकी पत्नी राधिका और खुद उनकी मां भी उन पर हंसती थीं और कहती थीं कि उन्हें ठीक से रोमांस करना नहीं आता।

    इसी टॉक शो के दौरान यश ने एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत का जिक्र किया था, जिसे वह अपने अभिनय करियर में हमेशा लागू करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि वह आज भी जीवन में एक कड़ा नियम फॉलो करते हैं कि अगर वह किसी दृश्य को अपने माता-पिता के साथ बैठकर आराम से नहीं देख सकते, तो वह वैसा सीन स्क्रीन पर कभी नहीं करेंगे। उनका मानना था कि जिन दृश्यों को देखकर अभिनेता स्वयं या उसका परिवार असहज हो, उससे आम दर्शकों को भी परदे पर देखते समय निश्चित रूप से असहजता महसूस होती है।

    अब जबकि फिल्म ‘टॉक्सिक’ का टीजर दर्शकों के सामने आ चुका है, तो यश के इसी पुराने बयान के स्क्रीनशॉट और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स इस बयान को उनकी नई फिल्म के संदर्भ से जोड़कर देख रहे हैं। कुछ प्रशंसकों का कहना है कि यश हमेशा से अपनी फिल्मों की पारिवारिक मर्यादा को लेकर बेहद सतर्क रहे हैं और वे ‘टॉक्सिक’ में भी अपने इसी पुराने वादे और मूल्यों पर कायम रहेंगे।

    दूसरी तरफ, इस पुराने बयान के दोबारा सामने आने से इंटरनेट पर एक अलग सामाजिक और लैंगिक बहस भी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर यूजर्स का एक धड़ा इस फिल्म से जुड़ी उनकी सह-कलाकार कियारा आडवाणी को लेकर की जा रही टिप्पणियों और आलोचनाओं पर सवाल उठा रहा है। कई यूजर्स ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि जब यश खुद किसी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और बोल्ड या एक्शन दृश्यों का हिस्सा बनते हैं, तो समाज उनके पारिवारिक जीवन, उनकी शादी या उनके बच्चों को लेकर कोई सवाल नहीं उठाता।

    इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कई सोशल मीडिया यूजर्स ने मनोरंजन उद्योग में आज भी मौजूद दोहरे मापदंडों को रेखांकित किया है। लोगों का कहना है कि यश के शादीशुदा और दो बच्चों के पिता होने के बावजूद समाज पुरुषों से उनके ऑन-स्क्रीन किरदारों को लेकर कम सवाल पूछता है, जबकि महिला अभिनेत्रियों को उनके दृश्यों के लिए आज भी अधिक जज किया जाता है। फिलहाल, ‘टॉक्सिक’ की रिलीज से पहले वायरल हुआ यह बयान फिल्म के प्रचार के साथ-साथ सिनेमा में कलाकारों की व्यक्तिगत सीमाओं और सामाजिक दृष्टिकोण पर विचार करने का एक नया जरिया बन गया है।

  • विवादों के बाद आखिरकार OTT पर आई 'सतलुज', दिलजीत दोसांझ का भावुक संदेश- फिल्म बिना किसी कट के रिलीज हुई

    विवादों के बाद आखिरकार OTT पर आई 'सतलुज', दिलजीत दोसांझ का भावुक संदेश- फिल्म बिना किसी कट के रिलीज हुई


    नई दिल्ली। पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की लंबे समय से चर्चा में रही फिल्म सतलुज आखिरकार दर्शकों के बीच पहुंच गई है। पहले पंजाब 95 के नाम से चर्चित रही इस फिल्म को सेंसर बोर्ड के साथ लंबी कानूनी प्रक्रिया और विवादों के बाद नया शीर्षक दिया गया। शुक्रवार को फिल्म को चुपचाप ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज कर दिया गया। खास बात यह रही कि फिल्म अपने मूल स्वरूप में बिना किसी कट के स्ट्रीम की गई जिससे इसके निर्माता और कलाकारों की लंबे समय से चली आ रही कोशिश सफल होती नजर आई।

    फिल्म की रिलीज के साथ ही दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा कर अपने प्रशंसकों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि यह फिल्म केवल उनकी टीम की नहीं बल्कि उन सभी लोगों की है जिन्होंने पूरे सफर में प्रार्थनाओं और समर्थन के जरिए उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उन्हें अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहने की ताकत मिली और आखिरकार फिल्म उसी रूप में दर्शकों तक पहुंची जैसी इसे बनाया गया था।

    दिलजीत ने यह भी बताया कि फिल्म का मूल शीर्षक उन्हें नहीं मिल सका इसलिए अब इसे सतलुज नाम से रिलीज किया गया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नाम बदला है जबकि फिल्म की कहानी और प्रस्तुति में किसी तरह का समझौता नहीं किया गया। अभिनेता ने कहा कि उन्होंने पहले ही दर्शकों से वादा किया था कि फिल्म को उसके वास्तविक स्वरूप में ही रिलीज किया जाएगा और ऐसा ही हुआ।

    यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। कहानी उस दौर को सामने लाती है जब पंजाब में उग्रवाद के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के मामलों को उजागर करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए खालरा ने लंबा संघर्ष किया था। फिल्म में उनके साहस संघर्ष और सच्चाई के लिए चुकाई गई व्यक्तिगत कीमत को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

    फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है जबकि निर्माण RSVP और मैकगफिन पिक्चर्स ने किया है। दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल कंवलजीत सिंह सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओह्ल्यान ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। दमदार कलाकारों और संवेदनशील विषय के कारण फिल्म पहले से ही दर्शकों और समीक्षकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई थी।

    लंबे इंतजार और विवादों के बाद रिलीज हुई सतलुज अब उन दर्शकों तक पहुंच चुकी है जो काफी समय से इस फिल्म का इंतजार कर रहे थे। फिल्म की रिलीज के साथ यह भी साफ हो गया कि टीम ने अपनी मूल रचनात्मक सोच को बरकरार रखते हुए इसे दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की है।

  • हुमा कुरैशी की 'बेबी डू डाई डू' के मुरीद हुए यश, भावुक पोस्ट में कहा- मुश्किल राह चुनकर बनाया मुकाम, तुम पर गर्व है

    हुमा कुरैशी की 'बेबी डू डाई डू' के मुरीद हुए यश, भावुक पोस्ट में कहा- मुश्किल राह चुनकर बनाया मुकाम, तुम पर गर्व है

    नई दिल्ली । अभिनेत्री हुमा कुरैशी की नई फिल्म ‘बेबी डू डाई डू’ को रिलीज के बाद दर्शकों के साथ-साथ फिल्मी सितारों का भी समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में अभिनेता यश ने फिल्म देखने के बाद हुमा कुरैशी और पूरी टीम की खुलकर प्रशंसा की है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए उनके संदेश ने फिल्म को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया है। यश ने अपने संदेश में फिल्म निर्माण की चुनौतियों और हुमा की मेहनत का विशेष रूप से उल्लेख किया।

    यश ने कहा कि फिल्म निर्माण केवल पर्दे पर दिखाई देने वाली चमक तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके पीछे लंबे समय की मेहनत, कई कठिन फैसले और लगातार संघर्ष छिपा होता है। उनके अनुसार किसी अलग और चुनौतीपूर्ण विषय पर फिल्म बनाना आसान नहीं होता, लेकिन ‘बेबी डू डाई डू’ की पूरी टीम ने इस चुनौती को पूरी प्रतिबद्धता के साथ स्वीकार किया।

    अपने संदेश में यश ने विशेष रूप से हुमा कुरैशी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने आसान रास्ता चुनने के बजाय कठिन विषय पर काम कर अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने लिखा कि इस तरह के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि धैर्य, साहस और दृढ़ विश्वास की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा कि “तुम पर गर्व है” जैसे शब्द भी उनकी मेहनत की पूरी प्रशंसा के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

    यश ने फिल्म की पूरी टीम को रिलीज के लिए शुभकामनाएं भी दीं और उम्मीद जताई कि दर्शक इस प्रयास को सकारात्मक रूप से स्वीकार करेंगे। उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रशंसक भी दोनों कलाकारों के बीच पेशेवर सम्मान की सराहना कर रहे हैं।

    यश और हुमा कुरैशी जल्द ही आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक’ में एक साथ स्क्रीन साझा करते नजर आएंगे। ऐसे में यश की ओर से मिली यह सार्वजनिक सराहना दोनों कलाकारों के बीच मजबूत पेशेवर संबंधों को भी दर्शाती है। फिल्म जगत में एक कलाकार द्वारा दूसरे कलाकार के काम की खुले तौर पर प्रशंसा को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    दूसरी ओर, ‘बेबी डू डाई डू’ की रिलीज ऐसे समय हुई है जब सिनेमाघरों में कई बड़ी फिल्में भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इसके बावजूद फिल्म अपने अलग विषय और कलाकारों के प्रदर्शन के कारण चर्चा में बनी हुई है। शुरुआती प्रतिक्रियाओं में दर्शकों की राय अलग-अलग जरूर रही है, लेकिन फिल्म को लेकर लगातार बातचीत जारी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी फिल्म को लेकर दर्शकों के साथ-साथ उद्योग से जुड़े प्रमुख कलाकारों की सकारात्मक प्रतिक्रिया भी उसके प्रति उत्सुकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यश की ओर से मिली खुली सराहना के बाद ‘बेबी डू डाई डू’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

    फिलहाल फिल्म को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया लगातार सामने आ रही है। आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और व्यापक दर्शक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि ‘बेबी डू डाई डू’ व्यावसायिक और समीक्षात्मक दोनों स्तरों पर कितना प्रभाव छोड़ने में सफल रहती है।

  • दिलजीत दोसांझ हमेशा साथ रखते हैं गुटका साहिब, जानिए सिख परंपरा में क्यों माना जाता है इसे आस्था और अनुशासन का प्रतीक

    दिलजीत दोसांझ हमेशा साथ रखते हैं गुटका साहिब, जानिए सिख परंपरा में क्यों माना जाता है इसे आस्था और अनुशासन का प्रतीक

    नई दिल्ली । प्रसिद्ध गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने हाल ही में साझा किया कि वह जब भी घर से बाहर निकलते हैं, अपने साथ गुटका साहिब अवश्य रखते हैं। उनका यह वक्तव्य एक बार फिर सिख परंपरा में गुटका साहिब के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को चर्चा का विषय बना रहा है। सिख समुदाय में इसे केवल एक प्रार्थना पुस्तिका नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में ईश्वर के स्मरण, अनुशासन और आध्यात्मिक संतुलन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

    गुटका साहिब आकार में छोटा और साथ रखने में सुविधाजनक धार्मिक ग्रंथ है। इसमें सिख धर्म की प्रमुख वाणियों और दैनिक पाठों का संकलन होता है। इसकी पोर्टेबल संरचना के कारण श्रद्धालु इसे यात्रा, कार्यस्थल या घर से बाहर रहते हुए भी आसानी से अपने साथ रख सकते हैं। यही कारण है कि अनेक सिख श्रद्धालुओं की तरह दिलजीत दोसांझ भी इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।

    गुटका साहिब में सामान्यतः जापजी साहिब, जाप साहिब, तव-प्रसाद सवैये, रेहरास साहिब, कीर्तन सोहिला तथा अन्य महत्वपूर्ण वाणियों का संकलन शामिल होता है। अलग-अलग प्रकाशनों में इसकी सामग्री में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य श्रद्धालुओं को दैनिक प्रार्थनाओं के लिए एक सुविधाजनक और सम्मानजनक संकलन उपलब्ध कराना होता है। इससे व्यक्ति नियमित रूप से गुरबाणी का पाठ कर अपने आध्यात्मिक जीवन से जुड़ा रह सकता है।

    सिख परंपरा में प्रार्थना को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को संयम, सेवा, विनम्रता और सकारात्मक सोच के साथ जीने का मार्ग माना जाता है। सुबह, शाम और रात्रि के निर्धारित पाठ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुशासन बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। गुटका साहिब इन्हीं दैनिक पाठों को सरल और व्यवस्थित रूप में उपलब्ध कराता है, जिससे व्यस्त जीवन और यात्रा के दौरान भी नियमित प्रार्थना जारी रखी जा सके।

    सिख समुदाय में गुटका साहिब को अत्यंत सम्मान के साथ रखा जाता है। इसे हमेशा स्वच्छ स्थान पर रखने, आदरपूर्वक स्पर्श करने और पाठ के समय पूर्ण श्रद्धा बनाए रखने की परंपरा है। धार्मिक ग्रंथ के प्रति सम्मान को सिख आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और श्रद्धालु इसके रख-रखाव से जुड़े धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखते हैं।

    दिलजीत दोसांझ का गुटका साहिब को हमेशा अपने साथ रखना उनकी व्यक्तिगत आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा सकता है। लगातार यात्राओं और व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद धार्मिक मूल्यों से जुड़े रहने की यह परंपरा अनेक सिख श्रद्धालुओं के जीवन में भी दिखाई देती है। गुटका साहिब उनके लिए केवल प्रार्थना का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और गुरु परंपरा से निरंतर जुड़े रहने का एक महत्वपूर्ण आधार भी है। इसी कारण यह सिख जीवनशैली और धार्मिक आचरण का एक सम्मानित एवं महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।

  • 'हेरा फेरी 3' को लेकर नया विवाद, प्रियदर्शन का बड़ा खुलासा, बोले- निर्माता के व्यवहार से आहत होकर छोड़ी फिल्म, बड़े दावे भी किए

    'हेरा फेरी 3' को लेकर नया विवाद, प्रियदर्शन का बड़ा खुलासा, बोले- निर्माता के व्यवहार से आहत होकर छोड़ी फिल्म, बड़े दावे भी किए

    मुंबई। बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘हेरा फेरी 3’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। कलाकारों और निर्माण से जुड़े विवादों के बीच अब निर्देशक प्रियदर्शन ने पहली बार खुलकर बताया है कि उन्होंने इस फिल्म से खुद को अलग करने का फैसला क्यों लिया। उनके हालिया बयान ने फिल्म को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि, इस मामले में संबंधित पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रियदर्शन ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि फिल्म के निर्माता ने स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी थी कि फिल्म का निर्माण तो उनके अधिकारों के तहत होगा, लेकिन निर्देशन उनके हाथों में नहीं होना चाहिए। निर्देशक के अनुसार, यह बात उनके लिए बेहद निराशाजनक थी और इसी कारण उन्होंने परियोजना से दूरी बनाने का फैसला किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अतीत में भी निर्माता की ओर से कई बार उनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।

    निर्देशक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2000 में रिलीज हुई ‘हेरा फेरी’ के समय भी उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। उनका दावा है कि फिल्म देखने के बाद निर्माता ने उसकी प्रस्तुति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। प्रियदर्शन के अनुसार, उस वक्त उन्हें फिल्म के लंबे संस्करण को काफी संपादित कर छोटा करना पड़ा, ताकि इसे निर्धारित प्रारूप में रिलीज किया जा सके।

    प्रियदर्शन ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में केवल अभिनेता अक्षय कुमार के आग्रह और विश्वास के कारण ‘हेरा फेरी 3’ का निर्देशन करने में रुचि दिखाई थी। उनका मानना था कि इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे सफल कॉमेडी सीरीज में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें फिल्म बनाने का अवसर मिलता तो वह इसे और अधिक बड़े स्तर पर प्रस्तुत करते।

    निर्देशक के अनुसार, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल तीनों चाहते थे कि वही फिल्म का निर्देशन करें। उन्होंने कहा कि कलाकारों का उन पर भरोसा उनके लिए महत्वपूर्ण था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि परियोजना से अलग होना पड़ा। इस बयान के बाद फिल्म के निर्माण से जुड़े घटनाक्रम को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से ‘हेरा फेरी 3’ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। पहले कलाकारों के फिल्म से जुड़ने और अलग होने की खबरें सामने आईं, वहीं अब निर्देशन और निर्माण को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इससे फिल्म के भविष्य और निर्माण प्रक्रिया को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की सफलता केवल कलाकारों पर ही नहीं, बल्कि मजबूत निर्देशन और टीमवर्क पर भी निर्भर करती है। ऐसे में निर्माण से जुड़े मतभेद किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की गति को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल दर्शकों की नजर इस बात पर टिकी है कि फिल्म से जुड़े सभी विवादों के बीच ‘हेरा फेरी 3’ की आगे की दिशा क्या होगी और निर्माण प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।