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  • मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    नई दिल्ली। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। सोशल मीडिया पर लाइव बातचीत के दौरान जब उनसे इस प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं।

    दिलजीत हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ इंस्टाग्राम लाइव के माध्यम से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स, संगीत और फिल्मों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। बातचीत के बीच जब एक दर्शक ने उनसे जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है और वह किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

    उन्होंने बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसे मामलों से दूर ही रखा जाए क्योंकि वह किसी राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। उनका कहना था कि वह एक कलाकार हैं और उनका काम लोगों का मनोरंजन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और जीवन में सभी परिस्थितियां कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकतीं।

    दिलजीत ने अपने अंदाज में यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वे भी अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उनका भी अपना पक्ष हो सकता है। उन्होंने किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध करने से बचते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी मुद्दे पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने पूरे विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने उनके इस रुख को एक कलाकार की पेशेवर सोच बताया, जबकि कुछ लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े चर्चित चेहरों की सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भूमिका को लेकर अलग-अलग राय भी व्यक्त की। हालांकि दिलजीत ने अपने बयान में किसी संगठन, व्यक्ति या प्रदर्शन की प्रकृति पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात दोहराई।

    दिलजीत दोसांझ पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट्स और संगीत परियोजनाओं को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। देश और विदेश में उनकी बड़ी प्रशंसक संख्या है और सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रिय मौजूदगी रहती है। ऐसे में उनके किसी भी बयान पर लोगों की नजर रहती है।

    फिलहाल उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता कला और मनोरंजन है तथा वह राजनीतिक या विवादित विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना पसंद करते हैं। इसी वजह से उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

  • 'बाहुबली यूनिवर्स' का महा-विस्तार: दो भागों की एनीमे फिल्म लेकर आ रहे हैं ईशान शुक्ला, मृत्यु के बाद की अनसुनी कहानी का होगा खुलासा

    'बाहुबली यूनिवर्स' का महा-विस्तार: दो भागों की एनीमे फिल्म लेकर आ रहे हैं ईशान शुक्ला, मृत्यु के बाद की अनसुनी कहानी का होगा खुलासा

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो चुकी ‘बाहुबली’ फ्रैंचाइजी के प्रशंसकों के लिए एक अत्यंत रोमांचक और बड़ी खबर सामने आई है। जहाँ एक तरफ मुख्य स्टार कास्ट प्रभास, राणा दग्गुबाती और अनुष्का शेट्टी ने ‘बाहुबली 3’ के निर्माण का संकेत देकर हलचल बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ इस सिनेमाई यूनिवर्स के क्रिएटर एस एस राजामौली के मार्गदर्शन में एक भव्य एनीमे फिल्म ‘बाहुबली: द एटर्नल वॉर’ की तैयारियां तेज हो गई हैं। दो भागों में बनने वाली इस महत्वाकांक्षी एनीमे फिल्म के निर्देशक ईशान शुक्ला ने इसके अनूठे कॉन्सेप्ट और कहानी को लेकर कई बेहद दिलचस्प खुलासे किए हैं।

    इस नई फिल्म की कहानी मूल फिल्मों के नायक अमरेंद्र बाहुबली के जीवन के अंत के बाद से शुरू होगी। निर्देशक ईशान शुक्ला के अनुसार, यह फिल्म अमरेंद्र बाहुबली की आत्मा की उस परलोक यात्रा पर आधारित है, जहां वह एक विशाल और दिव्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए ‘देवासुर संग्राम’ का हिस्सा बनता है। फिल्म का यह अलौकिक और पौराणिक कॉन्सेप्ट पारंपरिक भारतीय सिनेमा से बिल्कुल अलग है, जिसने अपने शुरुआती टीज़र से ही दर्शकों और फिल्म समीक्षकों के बीच भारी उत्सुकता पैदा कर दी है।

    इस अनूठे एनीमे प्रोजेक्ट की शुरुआत की कहानी भी काफी दिलचस्प है। वर्ष 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान निर्देशक ईशान शुक्ला की मुलाकात बाहुबली के मूल निर्माता शोबू येरलागडा से हुई थी। शोबू इस ऐतिहासिक फ्रैंचाइजी को एनिमेशन के माध्यम से वैश्विक मंच पर आगे ले जाने के इच्छुक थे। इसके बाद ईशान ने अमरेंद्र बाहुबली की मृत्यु के बाद की काल्पनिक और आध्यात्मिक यात्रा पर एक पूरी स्क्रिप्ट तैयार की। यह विचार निर्माता शोबू और मास्टर डायरेक्टर एस एस राजामौली को इतना पसंद आया कि उन्होंने तुरंत इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी।

    निर्देशक ने बताया कि हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों में पृथ्वी के अलावा अन्य लोकों और आयामों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसे पर्दे पर जीवंत करने के लिए एनीमे को सबसे उपयुक्त माध्यम माना गया। अमर चित्र कथा के प्रभाव और भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रति लगाव ने इस कहानी को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाई। अमरेंद्र बाहुबली का चरित्र भगवान राम की तरह बेहद पवित्र और आदर्शवादी रहा है, इसलिए उसकी असमय मृत्यु के बाद परलोक में उसकी आत्मा के अंतर्द्वंद्व और उसके सामने आने वाले विकल्पों को देखना दर्शकों के लिए एक बिल्कुल नया और दार्शनिक अनुभव होगा।

    इस कहानी की सबसे बड़ी भावनात्मक त्रासदी का जिक्र करते हुए निर्देशक ने कहा कि अमरेंद्र बाहुबली को पृथ्वी छोड़ते समय यह कभी पता ही नहीं चल पाया था कि उसके सबसे वफादार कटप्पा ने उसकी पीठ में छुरा क्यों घोंपा था। प्राचीन भारतीय इतिहास और गाथाओं में ऐसे कई प्रसंग मिलते हैं जहां पराक्रमी योद्धा सत्ता शिखर पर पहुंचने से ठीक पहले षड्यंत्र का शिकार हो गए। फिल्म का प्री-प्रोडक्शन कार्य आधिकारिक रूप से पूरा कर लिया गया है, और चूंकि उच्च स्तरीय एनिमेशन निर्माण में लंबा समय लगता है, इसलिए मेकर्स ने साल 2027 में इस महागाथा के पहले भाग को सिनेमाघरों में रिलीज करने का लक्ष्य रखा है।

  • सलमान खान की याचिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी अभी सेंसर बोर्ड तक नहीं पहुंची फिल्म इसलिए नहीं लगेगी रोक

    सलमान खान की याचिका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी अभी सेंसर बोर्ड तक नहीं पहुंची फिल्म इसलिए नहीं लगेगी रोक


    नई दिल्ली । अपनी छवि और व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए अभिनेता सलमान खान ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने फिल्म काला हिरण द बैटल फॉर लीगेसी की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए दावा किया है कि यह फिल्म कथित तौर पर ब्लैकबक शिकार मामले पर आधारित है और इसमें उनके जैसे दिखने वाले किरदार के जरिए गलत और भ्रामक कहानी पेश की जा रही है। हालांकि अदालत ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई छह जुलाई तक के लिए टाल दी है।

    सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि संबंधित फिल्म अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजी ही नहीं गई है। अदालत ने कहा कि जब तक किसी फिल्म को सेंसर बोर्ड से प्रमाणपत्र नहीं मिलता तब तक उसकी रिलीज संभव नहीं है। ऐसे में फिलहाल तत्काल रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि अभिनेता की ओर से दाखिल जवाब अभी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है इसलिए मामले पर विस्तार से सुनवाई अगली तारीख पर की जाएगी।

    सलमान खान की ओर से पेश वकील ने अदालत से फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। इसके जवाब में फिल्म निर्माताओं की ओर से आश्वासन दिया गया कि अगली सुनवाई तक फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। इस भरोसे के बाद अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं समझी।

    अपनी याचिका में सलमान खान ने दावा किया है कि फिल्म में दिखाया गया मुख्य किरदार उनकी शक्ल सूरत और व्यक्तित्व से काफी मिलता जुलता है। इतना ही नहीं उस किरदार के हाथ में उनकी तरह का ब्रेसलेट भी दिखाया गया है जिससे आम दर्शकों के लिए उसे सलमान खान के रूप में पहचानना आसान हो जाता है। अभिनेता का कहना है कि इससे उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित होती है और उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन होता है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म के पोस्टर और कथित कहानी के माध्यम से एक ऐसी कहानी प्रस्तुत की जा रही है जो वास्तविक तथ्यों और न्यायिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। सलमान खान का कहना है कि उन्हें शस्त्र अधिनियम से जुड़े मामले में पहले ही बरी किया जा चुका है लेकिन फिल्म के जरिए ऐसा संदेश दिया जा रहा है जिससे लोगों के बीच गलत धारणा बन सकती है। अभिनेता ने आरोप लगाया कि फिल्म निर्माता इस संवेदनशील मामले को सनसनीखेज बनाकर उनकी लोकप्रियता और पहचान का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

    अब इस मामले में सभी की नजरें छह जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि तब तक फिल्म सेंसर बोर्ड के पास भेजी जाती है या उससे जुड़ी कोई नई स्थिति सामने आती है तो अदालत इस पूरे विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय कर सकती है। फिलहाल फिल्म की रिलीज और उससे जुड़े विवाद पर अंतिम फैसला न्यायालय की आगामी सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • भारतीय सिनेमा का मेगा ब्लॉकबस्टर सीजन: साल 2026 की दूसरी छमाही में सिनेमाघरों में दिखेगा बड़े बजट की फिल्मों का महासंग्राम

    भारतीय सिनेमा का मेगा ब्लॉकबस्टर सीजन: साल 2026 की दूसरी छमाही में सिनेमाघरों में दिखेगा बड़े बजट की फिल्मों का महासंग्राम

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए साल 2026 की दूसरी छमाही बॉक्स ऑफिस पर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक व्यावसायिक घमासान लेकर आ रही है। चालू वर्ष की शुरुआती छमाही में हालांकि कई फिल्मों ने अच्छा कारोबार किया, लेकिन बड़े रिकॉर्ड्स के मामले में केवल एक ही फिल्म पांच सौ और हजार करोड़ के क्लब में अपनी जगह बना सकी। मगर फिल्म समीक्षकों और व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि असली व्यावसायिक मुकाबला अब शुरू होने जा रहा है, क्योंकि जुलाई से लेकर दिसंबर तक के आगामी महीनों में बड़े बजट और महासुपरस्टार्स की कई बहुप्रतीक्षित फिल्में बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली हैं, जिनसे हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई की उम्मीद है।

    इस भव्य सिनेमाई सिलसिले की शुरुआत जुलाई के महीने से हो रही है, जहां दो बिल्कुल अलग विधाओं की फिल्में दर्शकों के सामने होंगी। इसमें सबसे पहला और बड़ा नाम यशराज स्पाई यूनिवर्स की बहुचर्चित एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ का है, जो 3 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है। शिव रावेल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, अनिल कपूर और बॉबी देओल मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि ऋतिक रोशन का एक विशेष कैमियो दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण होगा। इसके ठीक बाद, 10 जुलाई को निर्देशक इंद्र कुमार की मशहूर कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ रिलीज होगी, जिसमें अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी जैसे कलाकार मनोरंजन का तड़का लगाएंगे।

    अगस्त का महीना बॉक्स ऑफिस के लिहाज से सबसे बड़ा और कड़ा मुकाबला देखने वाला साबित होगा, जहां एक से बढ़कर एक कई बड़ी फिल्में कतार में हैं। महीने की शुरुआत 7 अगस्त को अविनाश अरुण द्वारा निर्देशित फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ से होगी, जिसमें राजकुमार राव और जयदीप अहलावत मुख्य किरदारों में हैं। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर 14 अगस्त को तीन बड़ी फिल्मों के बीच सीधा महामुकाबला देखने को मिलेगा। इनमें इमरान हाशमी और दिशा पाटनी स्टारर कल्ट क्लासिक का सीक्वल ‘आवारापन 2’, भारत-चीन गलवान घाटी संघर्ष पर आधारित सलमान खान की मुख्य भूमिका वाली देशभक्ति फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ और सनी देओल व प्रीति जिंटा अभिनीत विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी ‘बंटवारा 1947’ शामिल हैं।

    इसी महीने के अंत में दर्शकों का लंबा इंतजार भी खत्म होने जा रहा है। कई बार तकनीकी कारणों से टलने के बाद, कन्नड़ सुपरस्टार यश की अत्यंत महत्वाकांक्षी फिल्म ‘टॉक्सिक’ आखिरकार 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। गीतू मोहन दास के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे कलाकारों की एक लंबी फौज नजर आएगी। इसके तुरंत बाद, 28 अगस्त को महान लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की जीवनी पर आधारित फिल्म ‘ईठा’ प्रदर्शित होगी, जिसमें श्रद्धा कपूर और रणदीप हुड्डा मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे, जिसका निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है।

    सितंबर के महीने में भी सिनेमाघरों में रोमांच का यह स्तर कम नहीं होगा। ओटीटी की दुनिया में अपनी सफलता का परचम लहराने के बाद ‘मिर्जापुर’ की कहानी अब बड़े पर्दे पर तहलका मचाने आ रही है। गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी ‘मिर्जापुर द मूवी’ 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार अपने पुराने अंदाज में लौट रहे हैं। इसके बाद 11 सितंबर को ब्रिटिश कालीन भारत की पृष्ठभूमि पर बनी विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म ‘रणबाली’ रिलीज होगी। इसी तारीख को निर्देशक प्रियदर्शन की सस्पेंस फिल्म ‘हैवान’ भी सिनेमाघरों में दस्तक देगी, जिसमें कई सालों के लंबे अंतराल के बाद सैफ अली खान और अक्षय कुमार की मशहूर जोड़ी एक बार फिर स्क्रीन साझा करती नजर आएगी।

  • हॉलीवुड से मिला बड़ा सम्मान फराह खान बनीं ऑस्कर एकेडमी की सदस्य अब वोटिंग प्रक्रिया में निभाएंगी अहम भूमिका

    हॉलीवुड से मिला बड़ा सम्मान फराह खान बनीं ऑस्कर एकेडमी की सदस्य अब वोटिंग प्रक्रिया में निभाएंगी अहम भूमिका


    नई दिल्ली । फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान के लिए वर्ष 2026 एक बेहद खास उपलब्धि लेकर आया है। भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान दिलाते हुए उन्हें एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया गया है। यही संस्था हर साल दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कारों का आयोजन करती है। इस सम्मान के साथ फराह खान अब उन चुनिंदा फिल्मी हस्तियों की सूची में शामिल हो जाएंगी जिन्हें विश्व सिनेमा के सबसे बड़े मंच पर अपनी भागीदारी निभाने का अवसर मिलता है।

    इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी खुद फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रशंसकों के साथ साझा की। उन्होंने इस सम्मान के लिए एकेडमी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित समूह का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और खुशी दोनों का विषय है। उनके इस संदेश के सामने आते ही फिल्म जगत के कलाकारों और प्रशंसकों ने उन्हें लगातार शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया।

    हर वर्ष एकेडमी दुनिया भर के उन कलाकारों तकनीशियनों और फिल्म विशेषज्ञों को सदस्य बनने का निमंत्रण देती है जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस वर्ष कुल 529 नए सदस्यों को आमंत्रित किया गया है जिनमें फराह खान का नाम भी शामिल है। सदस्यता स्वीकार करने के बाद उन्हें ऑस्कर पुरस्कारों की नामांकन और विजेताओं के चयन की प्रक्रिया में मतदान का अधिकार मिलेगा। यह जिम्मेदारी केवल उन लोगों को मिलती है जिनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और विश्वसनीयता हासिल होती है।

    फराह खान पिछले कई दशकों से भारतीय फिल्म उद्योग का अहम चेहरा रही हैं। उन्होंने बतौर कोरियोग्राफर कई यादगार गीतों को अपनी रचनात्मकता से नई पहचान दी है। इसके अलावा उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की और कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्मों की भव्यता मनोरंजन और बड़े स्तर की प्रस्तुति ने उन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अलग पहचान दिलाई है। यही वजह है कि अब उन्हें विश्व सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित संस्था का सदस्य बनने का अवसर मिला है।

    इस बार एकेडमी की आमंत्रित सूची में कई अन्य भारतीय प्रतिभाओं को भी जगह मिली है। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज के साथ वरिष्ठ संपादक ए श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया को भी सदस्यता का निमंत्रण भेजा गया है। दीपा भाटिया चार दशकों से अधिक लंबे करियर में अनेक चर्चित फिल्मों से जुड़ी रही हैं और उनकी संपादन कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। इसके अलावा कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया एनीमेशन क्षेत्र से अवनीत कौर प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ राजेश रामचंद्रन तथा विजुअल इफेक्ट्स से जुड़े बेकी ग्राहम और जय मेहता को भी इस सूची में स्थान मिला है।

    इन सभी आमंत्रित सदस्यों के शामिल होने के बाद एकेडमी के कुल सदस्यों की संख्या लगभग 11000 से अधिक हो जाएगी। ये सदस्य आने वाले वर्षों में ऑस्कर पुरस्कारों के लिए फिल्मों कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फराह खान को मिला यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी मजबूत प्रमाण है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के फिल्मकारों और कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंच पर भारत की मजबूत मौजूदगी को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।

  • वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

    वैश्विक मंच पर गूंजा बॉलीवुड का नाम: 'द एकेडमी' ने फराह खान सहित भारतीय फिल्म जगत की हस्तियों को वोटिंग अधिकार के लिए किया आमंत्रित

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण सामने आया है। मशहूर फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान को ऑस्कर पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ ने साल 2026 की प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए आमंत्रित किया है। इस विशेष आमंत्रण को स्वीकार करने के बाद फराह खान अब ऑस्कर अवॉर्ड्स की आधिकारिक वोटिंग प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकेंगी, जो भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुंच और प्रभाव को रेखांकित करता है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि और अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए फराह खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खुशी और गर्व साझा किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस बेहद सम्मानित और वैश्विक समूह का हिस्सा बनना उनके लिए एक अत्यंत सुखद और गर्व से भरा अनुभव है। वर्तमान में एक रियलिटी शो की मेजबानी कर रहीं फराह खान के लिए यह आमंत्रण उनके दशकों लंबे फिल्मी करियर और कलात्मक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

    एकेडमी हर साल सिनेमाई जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले दुनिया भर के चुनिंदा कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को अपनी सदस्यता सूची में शामिल करती है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष वैश्विक स्तर पर कुल 529 फिल्म पेशेवरों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें भारत से फराह खान के अलावा मनोरंजन जगत के कई अन्य प्रतिष्ठित नाम भी शामिल हैं। इस सूची में मशहूर फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज का नाम भी प्रमुखता से दर्ज है, जिन्होंने ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’ और ‘हैदर’ जैसी फिल्मों के माध्यम से भारतीय सिनेमा को एक नई वैचारिक और कलात्मक दिशा दी है।

    इस बार एकेडमी की सूची में भारतीय सिनेमा के परदे के पीछे काम करने वाले तकनीकी दिग्गजों को भी व्यापक प्रतिनिधित्व मिला है। दिग्गजों की इस फेहरिस्त में अनुभवी फिल्म एडिटर ए. श्रीकर प्रसाद और दीपा भाटिया का नाम शामिल है। दीपा भाटिया ने अपने साढ़े चार दशक से अधिक लंबे शानदार करियर में ‘आरआरआर’, ‘दिल चाहता है’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘माय नेम इज़ खान’ और ‘काय पो छे’ जैसी कालजयी और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल फिल्मों में संपादन का बेहतरीन कार्य किया है। उनके इस अनुभव को अब वैश्विक स्तर पर सराहा गया है।

    इनके अतिरिक्त, भारतीय सिनेमा में अपनी वेशभूषा और कास्टिंग कला का लोहा मनवाने वाली हस्तियों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है। इनमें कॉस्ट्यूम डिजाइनर एका लखानी, विख्यात कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शालिनी कांतैया का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह चयन दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा के तकनीकी और रचनात्मक दोनों ही पक्षों को समान रूप से सम्मान मिल रहा है।

    सिनेमा की आधुनिक विधाओं में भी भारतीयों की प्रतिभा को इस आमंत्रण के जरिए स्वीकार किया गया है। एनीमेशन श्रेणी में भारत की अवनीत कौर को आमंत्रित किया गया है, जबकि प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राजेश रामचंद्रन को सदस्यता का प्रस्ताव मिला है। वहीं, विजुअल इफेक्ट्स जैसी जटिल तकनीकी श्रेणी में बेकी ग्राहम और जय मेहता को इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनाया गया है। इन पेशेवरों के शामिल होने से ऑस्कर के मंच पर भारतीय दृष्टिकोण और अधिक मजबूत होगा।

    इस आमंत्रण को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के बाद, ये सभी भारतीय दिग्गज दुनिया भर के लगभग 11,000 से अधिक विशिष्ट एकेडमी सदस्यों के विशेष समूह में शामिल हो जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सदस्यता के बाद इन सभी भारतीय सिनेमाई दिग्गजों को ऑस्कर अवॉर्ड्स के मुख्य नॉमिनेशन तय करने और विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं को चुनने के लिए सीधे वोट देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाएगा, जिससे वैश्विक सिनेमा के निर्णयों में भारत की भागीदारी बढ़ेगी।

  • बिना बजट और बिना क्रू के रची गई कालजयी दास्तां: जब गांव के बच्चों की सादगी ने 'विलेज रॉकस्टार्स' को दिलाया नेशनल अवॉर्ड

    बिना बजट और बिना क्रू के रची गई कालजयी दास्तां: जब गांव के बच्चों की सादगी ने 'विलेज रॉकस्टार्स' को दिलाया नेशनल अवॉर्ड

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अमूमन करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट, चमचमाती लाइट्स, नामचीन सितारों और सैकड़ों लोगों के क्रू को ही सफलता की गारंटी माना जाता है। लेकिन असम के एक सुदूर गांव से निकलकर आई एक छोटी सी फिल्म ने फिल्म निर्माण के इन तमाम स्थापित पैमानों और ढर्रों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ की, जिसे भारतीय सिनेमा की एक ऐसी जादुई और ऐतिहासिक कृति माना जाता है, जिसने लगभग शून्य या कहें ना के बराबर संसाधनों के इस्तेमाल से बनकर सीधे देश का सर्वोच्च सिनेमाई सम्मान यानी नेशनल अवॉर्ड अपने नाम कर लिया था।

    इस फिल्म के निर्माण की कहानी किसी सिनेमाई पटकथा से कम दिलचस्प नहीं है। फिल्म की निर्देशक रीमा दास ने इस पूरी परियोजना को बिना किसी बड़े प्रोड्यूसर या बैनर के सहयोग के अकेले ही शुरू किया था। उनके पास फिल्म बनाने के लिए भारी-भरकम बजट नहीं था, इतना कम फंड था कि जितने में शायद कोई शॉर्ट फिल्म बनाना भी मुमकिन नहीं होता। ऐसे में उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए एक साधारण सा डीएसएलआर (DSLR) कैमरा उठाया और सीधे अपने पैतृक गांव की तरफ रुख कर लिया। इस छोटे और साधारण कैमरे का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि गांव के सीधे-साधे लोग कैमरे को देखकर बिल्कुल भी असहज नहीं हुए और उनके भीतर का स्वाभाविक अभिनय खुलकर सामने आ सका।

    फिल्म की मेकिंग के दौरान संसाधनों की कमी को रीमा दास ने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। फिल्म के पास न तो कोई लाइटिंग टीम थी और न ही लाइटमैन का कोई क्रू था। इस खर्च से बचने के लिए उन्होंने पूरी फिल्म की शूटिंग सुबह और शाम के समय मिलने वाली कुदरती और प्राकृतिक रोशनी में की। फिल्म में जब भी और जहां भी किसी अतिरिक्त तकनीकी मदद की जरूरत पड़ती, तो गांव के स्थानीय लोग खुद-ब-खुद आगे आकर हाथ बंटा देते थे। रीमा ने न केवल फिल्म का निर्देशन किया, बल्कि सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, स्क्रीनप्ले और यहां तक कि कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग का जिम्मा भी खुद अपने कंधों पर उठाया।

    फिल्म के लिए प्रोफेशनल एक्टर्स को हायर करना और उनके बजट का इंतजाम करना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसका समाधान निकालने के लिए रीमा दास ने गांव के ही बच्चों को धीरे-धीरे अभिनय की बुनियादी ट्रेनिंग दी और उन्हें ही अपनी फिल्म के मुख्य किरदारों में कास्ट कर लिया। इन बच्चों के लिए यह पूरी तरह से सिनेमाई डेब्यू था, लेकिन स्क्रीन पर उनकी मासूमियत और सादगी ने ऐसा जादू बिखेरा कि बड़े-बड़े मंझे हुए कलाकार भी उनके सामने फीके नजर आने लगे। जब यह आसान और सादगी से भरी फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हुई, तो इसने न केवल समीक्षकों को हैरान किया बल्कि नेशनल अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया।

    इस अभूतपूर्व सफलता के बाद, साल 2024 में इस फिल्म का सीक्वल भी तैयार किया गया। दिलचस्प बात यह है कि इस दूसरे भाग के निर्माण में भी रीमा दास को उसी गांव के लोगों और बच्चों का पूरा सहयोग मिला, जिन्होंने पहली बार में फिल्म को फर्श से अर्श पर पहुंचाया था। भारतीय सिनेमा में न्यूनतम संसाधनों के साथ अधिकतम प्रभाव छोड़ने का यह अपनी तरह का इकलौता उदाहरण है। सादगी और कड़े संघर्ष से उपजी कला की यह अद्भुत मिसाल वर्तमान में ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है, जो स्वतंत्र सिनेमा के क्षेत्र में एक कड़े मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है।

  • सीमित बजट और 75 शिफ्ट का सटीक गणित: 'वेलकम टू द जंगल' की रिकवरी रणनीति ने बदला बॉलीवुड का पुराना ढर्रा, मुनाफे में निर्देशक अहमद खान की मल्टीस्टारर फिल्म

    सीमित बजट और 75 शिफ्ट का सटीक गणित: 'वेलकम टू द जंगल' की रिकवरी रणनीति ने बदला बॉलीवुड का पुराना ढर्रा, मुनाफे में निर्देशक अहमद खान की मल्टीस्टारर फिल्म

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित मल्टीस्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही है। इसी बीच फिल्म के निर्देशक अहमद खान ने इसके निर्माण, बजट नियंत्रण और कुशल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। आम तौर पर बड़े सितारों से सजी फिल्मों का बजट आसमान छू जाता है, लेकिन अहमद खान ने एक सटीक रणनीति के तहत इस फिल्म को बेहद नियंत्रित बजट में पूरा कर फिल्म उद्योग के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है। फिल्म ने न केवल अपनी लागत वसूल कर ली है, बल्कि अब टिकट खिड़की पर होने वाली हर कमाई सीधे तौर पर इसके मुनाफे में जुड़ रही है।

    निर्देशक अहमद खान के अनुसार, इस फिल्म में तीस से भी अधिक स्थापित और दिग्गज कलाकारों की फौज शामिल थी, जिसके बावजूद उन्होंने फिल्म की कुल निर्माण लागत को 115 से 125 करोड़ रुपये के दायरे में ही सीमित रखा। इस बजट में कलाकारों की फीस, एक्शन सीक्वेंस, भव्य गानों की शूटिंग और यहां तक कि ब्याज की रकम भी शामिल है। फिल्म निर्माण की इस लागत को थिएटर्स में रिलीज होने से पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सैटेलाइट राइट्स, म्यूजिक और ओवरसीज राइट्स के जरिए पूरी तरह सुरक्षित और रिकवर कर लिया गया था। यही वजह है कि फिल्म अब बॉक्स ऑफिस पर जो भी कलेक्शन कर रही है, वह फिल्म के निर्माताओं के लिए शुद्ध लाभ साबित हो रहा है।

    अहमद खान ने फिल्म की शूटिंग के दौरान समय प्रबंधन और अनुशासन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस विशालकाय स्टारकास्ट के साथ फिल्म की पूरी शूटिंग महज 75 शिफ्टों में संपन्न कर ली गई थी। प्रत्येक शिफ्ट की अवधि आठ घंटे निर्धारित थी, जिससे न केवल समय की बचत हुई बल्कि फिजूलखर्ची पर भी पूरी तरह लगाम लगी रही। शुरुआत में यह फिल्म साल 2024 के क्रिसमस के मौके पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन इसके जटिल वीएफएक्स कार्य और बड़े पैमाने पर फैले शूटिंग शेड्यूल को दुरुस्त करने के लिए इसकी रिलीज को आगे बढ़ा दिया गया था। इसके बाद फिल्म को 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में उतारा गया, जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

    बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के प्रदर्शन की बात करें तो अक्षय कुमार अभिनीत इस फिल्म ने भारतीय बाजार में अब तक कुल 94.54 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज कर लिया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी फिल्म का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है, जहां इसने शुरुआती चार दिनों के भीतर ही 100 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है। ट्रेड एनालिस्ट्स का अनुमान है कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए यह फिल्म अपने पहले वीकेंड के समाप्त होने तक 200 करोड़ रुपये के प्रतिष्ठित क्लब में आसानी से शामिल हो जाएगी।

    ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की इस तीसरी किस्त में नाना पाटेकर और अनिल कपूर जैसे सदाबहार कलाकारों की कमी को लेकर भी अहमद खान और अक्षय कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। अक्षय कुमार ने एक बातचीत में कहा कि वे दोनों ही इस फ्रेंचाइजी के अभिन्न अंग और परिवार के सदस्य की तरह हैं। इस बार कहानी की मांग और परिस्थितियों के चलते वे फिल्म का हिस्सा नहीं बन सके, लेकिन यदि भविष्य में इस फ्रेंचाइजी का चौथा भाग बनाया जाता है, तो उसमें नाना पाटेकर और अनिल कपूर की वापसी निश्चित रूप से होगी। फिलहाल सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, अरशद वारसी और राजपाल यादव जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने में पूरी तरह सफल साबित हो रही है।

  • 'ग्लैमर के पीछे छिपी रही मेरी प्रतिभा', ज़ीनत अमान ने पुरानी कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

    'ग्लैमर के पीछे छिपी रही मेरी प्रतिभा', ज़ीनत अमान ने पुरानी कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सदाबहार और दिग्गज अभिनेत्री ज़ीनत अमान ने अपने दशकों पुराने फिल्मी सफर और समकालीन कार्यसंस्कृति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अतीत के अनुभवों को साझा करते हुए मनोरंजन जगत में अभिनेत्रियों के प्रति बनी संकीर्ण मानसिकता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ज़ीनत अमान के अनुसार, लंबे समय तक फिल्म उद्योग में उन्हें केवल एक ‘ग्लैमरस आइकन’ के रूप में ही देखा और प्रस्तुत किया गया, जिसके कारण उनकी वास्तविक अभिनय क्षमता, रचनात्मक सोच और बौद्धिक क्षमता को वह स्थान और सम्मान नहीं मिल सका, जिसकी वे हकदार थीं। पर्दे की चमकीली दुनिया ने उनके वास्तविक और गंभीर व्यक्तित्व को दर्शकों के सामने आने ही नहीं दिया।

    अपने दौर की सबसे चर्चित अभिनेत्रियां होने के बावजूद ज़ीनत अमान को इस बात का मलाल है कि समाज और फिल्मकारों ने उनके किरदारों के आधार पर ही उनकी एक अपरिवर्तनीय छवि गढ़ दी थी। उन्होंने बताया कि जब लोग उनसे व्यक्तिगत जीवन में मिलते थे, तो उनके संतुलित और वैचारिक स्वभाव को देखकर चकित रह जाते थे, क्योंकि वह उनकी फिल्मी छवि से बिल्कुल उलट था। उनका मानना है कि व्यावसायिक सफलता की अंधी दौड़ में तत्कालीन फिल्मकारों ने उनके लुक्स और स्क्रीन प्रेजेंस का तो भरपूर लाभ उठाया, लेकिन एक कलाकार के रूप में उनकी गहराई को समझने या उसे पर्दे पर उभारने का प्रयास बहुत कम किया गया।

    उस दौर की कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए दिग्गज अभिनेत्री ने कहा कि तब फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया पुरुष प्रधान मानसिकता से संचालित होती थी। सेट पर और स्क्रिप्टिंग के स्तर पर महिलाओं की राय या उनके रचनात्मक सुझावों को कोई खास तवज्जो नहीं दी जाती थी। अभिनेत्रियों से केवल यह अपेक्षा की जाती थी कि वे अपनी आकर्षक उपस्थिति, नृत्य और गानों के माध्यम से फिल्म के व्यावसायिक पक्ष को मजबूत करें। किसी दृश्य की प्रासंगिकता या किरदार के मनोवैज्ञानिक विकास में उनकी भागीदारी को हमेशा सीमित रखा जाता था, जो एक रचनात्मक कलाकार के रूप में उनके लिए काफी निराशाजनक था।

    पोशाक और प्रस्तुतीकरण के मुद्दों पर खुलकर बात करते हुए ज़ीनत अमान ने साझा किया कि व्यावसायिक आवश्यकताओं के नाम पर अक्सर उन पर अधिक बोल्ड और आकर्षक परिधान पहनने का दबाव बनाया जाता था। जबकि व्यक्तिगत स्तर पर वे बेहद सादगीपूर्ण और संतुलित जीवनशैली पसंद करती थीं। उस दौर में किसी भी महिला कलाकार की योग्यता का पैमाना उसकी अभिनय क्षमता से ज्यादा उसकी बाहरी सुंदरता और स्क्रीन अपील को माना जाता था, जिसने कई बेहतरीन प्रतिभाओं को एक खास दायरे में समेट कर रख दिया।

    हालांकि, उन्होंने वर्तमान सिनेमाई परिदृश्य में आ रहे बदलावों की सराहना भी की है। उनका मानना है कि आज की अभिनेत्रियों के पास बेहतर अवसर हैं, कहानियां अधिक सशक्त हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसके बावजूद, वे इस बात से पूरी तरह इनकार नहीं करतीं कि आज भी महिलाओं को उनकी बाहरी बनावट और शारीरिक सुंदरता के तराजू पर तौलने की प्रवृत्ति मनोरंजन उद्योग में आंशिक रूप से जीवित है, जिसे पूरी तरह बदलने के लिए अभी और समय और वैचारिक परिपक्वता की आवश्यकता है।

    ज़ीनत अमान ने अपने इस विचार के जरिए फिल्म जगत और दर्शकों दोनों के सामने एक गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया है। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी कलाकार की वास्तविक पहचान और उसका मूल्यांकन उसके काम, अनुभव, समर्पण और रचनात्मक योगदान के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल इस बात पर कि वह पर्दे पर कितना ग्लैमरस दिखता है। ग्लैमर केवल इस पेशे का एक छोटा सा हिस्सा है, न कि किसी कलाकार के संपूर्ण अस्तित्व की परिभाषा।

    अपने समय में आधुनिकता, अदम्य आत्मविश्वास और लीक से हटकर किरदार निभाने के लिए जानी जाने वाली ज़ीनत अमान का यह आत्मनिरीक्षण नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी एक मार्गदर्शक की तरह है। उनका यह बयान केवल एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक व्यवस्था पर एक गंभीर टिप्पणी है जो कलाकारों को केवल एक स्टीरियोटाइप या ढांचे में बंद कर देखना पसंद करती है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य का सिनेमा कलाकारों की बौद्धिक और रचनात्मक क्षमता को अधिक महत्व देगा।

  • अजय देवगन की आगामी फिल्म 'चौहान' के टीज़र पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद, श्रीनगर के सांसद और क्षत्रिय संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

    अजय देवगन की आगामी फिल्म 'चौहान' के टीज़र पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद, श्रीनगर के सांसद और क्षत्रिय संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की आगामी एक्शन फिल्म ‘चौहान’ अपने आधिकारिक घोषणा वीडियो के रिलीज होते ही बड़े विवादों के केंद्र में आ गई है। फिल्म के शुरुआती टीज़र में अजय देवगन को एक सैन्य अधिकारी के रूप में दिखाया गया है, जो कश्मीर में कानून-व्यवस्था और पत्थरबाजी की घटनाओं से निपटता नजर आ रहा है। इस वीडियो में दिखाए गए कुछ दृश्यों और संवादों ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों में भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विशेष रूप से कश्मीर की संवेदनशीलता और राजपूत समुदाय की ऐतिहासिक विरासत को लेकर फिल्म के निर्माताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मुख्यधारा के सिनेमा में संवेदनशील मुद्दों के प्रस्तुतीकरण को लेकर यह विवाद अब गहराता जा रहा है।

    फिल्म के टीज़र में कश्मीरी युवाओं द्वारा की जाने वाली पत्थरबाजी और उसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को जिस अंदाज में प्रस्तुत किया गया है, उसने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नाराज कर दिया है। श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि फिल्म में दिखाए गए पैलेट गन और सैन्य बल के दृश्य कश्मीर के लोगों के पुराने जख्मों और दर्दनाक अतीत को हरा करने वाले हैं। उन्होंने मुख्यधारा के सिनेमा की आलोचना करते हुए कहा कि कश्मीर के दर्द और वहां की त्रासदी का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक और मनोरंजन के उद्देश्यों के लिए एक एक्शन बैकग्राउंड के रूप में नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए संवेदनशीलता और गरिमा की आवश्यकता है।

    इस फिल्म को लेकर विवाद केवल कश्मीर की छवि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया है। ‘क्षत्रिय परिषद’ नामक एक प्रमुख संगठन ने फिल्म के शीर्षक और उसमें क्षत्रिय पहचान के इस्तेमाल पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि फिल्म निर्माता नीरज यादव और अभिनेता अजय देवगन राजनीतिक व वैचारिक हितों के लिए चौहान वंश के ऐतिहासिक गौरव का अनुचित उपयोग कर रहे हैं। क्षत्रिय परिषद ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि राजपूत इतिहास संपूर्ण देश की धरोहर है और इसे किसी सांप्रदायिक विमर्श, चुनावी लाभ या व्यावसायिक फिल्म का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।

    यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसने अजय देवगन की ही पूर्व में आई फिल्म ‘सिंघम अगेन’ की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें कश्मीर की एक बिलकुल अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश की थी। उस फिल्म में कश्मीर के युवाओं को विकास, शांति और देश के साथ चलते हुए दिखाया गया था, जिसकी दर्शकों और समीक्षकों ने काफी सराहना की थी। वहीं, दूसरी ओर ‘चौहान’ में फिर से उसी पुरानी और नकारात्मक छवि को उभारा गया है, जिसे लेकर कश्मीरी समाज लंबे समय से असहज रहा है। एक ही अभिनेता द्वारा कश्मीर की दो विपरीत छवियों को पर्दे पर उतारने के इस विरोधाभास ने भी विश्लेषकों का ध्यान खींचा है।

    वर्तमान में फिल्म ‘चौहान’ का केवल शुरुआती प्रचार वीडियो ही सामने आया है और इसकी पूरी शूटिंग तथा निर्माण कार्य होना अभी बाकी है। ऐसे में फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि निर्माताओं को व्यावसायिक सफलता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच एक बारीक संतुलन बनाने की आवश्यकता होगी। राष्ट्रवाद और वीरता के नाम पर बनने वाली फिल्मों में ऐतिहासिक तथ्यों और क्षेत्रीय भावनाओं का सम्मान करना बेहद जरूरी माना जाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बढ़ते देशव्यापी विवाद के बाद फिल्म के निर्माता-निर्देशक अपनी कहानी और दृश्यों की प्रस्तुतीकरण शैली में किसी प्रकार का बदलाव करते हैं या नहीं।