Category: Entertainment

  • 'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' को लेकर नया दावा, सुनील पाल बोले- ₹25 लाख का ऑफर ठुकराया; कहा- गाली-गलौज वाली कॉमेडी का हिस्सा नहीं बनूंगा

    'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' को लेकर नया दावा, सुनील पाल बोले- ₹25 लाख का ऑफर ठुकराया; कहा- गाली-गलौज वाली कॉमेडी का हिस्सा नहीं बनूंगा


    नई दिल्ली ।
    कॉमेडी जगत में सुनील पाल और समय रैना के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। इस बार सुनील पाल ने दावा किया है कि उन्हें लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ का हिस्सा बनने के लिए 25 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, उन्होंने यह ऑफर स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि वह अपनी कॉमेडी शैली और सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहते थे।

    सुनील पाल के अनुसार, शो की टीम ने उनसे संपर्क कर कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह मंच पर किसी भी प्रकार की गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका कहना है कि इसके जवाब में उन्हें बताया गया कि उन्हें स्वयं ऐसा करने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन कार्यक्रम में अन्य प्रतिभागी अपनी शैली में प्रस्तुति देंगे। इसके बावजूद उन्होंने शो का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया।

    फिलहाल समय रैना या उनकी टीम की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सुनील पाल के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि, उनके इस बयान ने दोनों कॉमेडियनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    यह पहली बार नहीं है जब सुनील पाल ने समय रैना या उनके शो की सार्वजनिक रूप से आलोचना की हो। इससे पहले भी वह कई अवसरों पर आधुनिक स्टैंड-अप कॉमेडी में बढ़ती अभद्र भाषा और विवादित कंटेंट पर सवाल उठा चुके हैं। उनका मानना रहा है कि हास्य का उद्देश्य स्वस्थ मनोरंजन होना चाहिए और मंच पर प्रस्तुत सामग्री समाज के लिए सकारात्मक संदेश देने वाली होनी चाहिए।

    इससे पहले शो के पहले सीजन को लेकर भी सुनील पाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कहा था कि अश्लील भाषा और आपत्तिजनक प्रस्तुति को कॉमेडी का नाम देना उचित नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे प्रयोग दर्शकों के बीच गलत संदेश पहुंचाते हैं और पारिवारिक मनोरंजन की परंपरा को प्रभावित करते हैं। उनके इन बयानों ने उस समय भी सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था।

    हाल के महीनों में दोनों कलाकार एक डिजिटल मनोरंजन कार्यक्रम में भी साथ दिखाई दिए थे। उस दौरान मंच पर दोनों ने एक-दूसरे पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणियां की थीं, लेकिन दर्शकों ने इसे उनके पुराने विवाद से जोड़कर देखा। इसके बाद भी समय-समय पर दोनों के बयानों ने यह संकेत दिया कि उनके विचारों में मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

    कॉमेडी की बदलती शैली और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर मनोरंजन जगत में लगातार चर्चा होती रही है। एक ओर कुछ कलाकार प्रयोगधर्मी और बेबाक प्रस्तुति को आधुनिक दर्शकों की पसंद बताते हैं, वहीं दूसरी ओर कई वरिष्ठ कलाकार मर्यादित और पारिवारिक हास्य को अधिक उपयुक्त मानते हैं। सुनील पाल का ताजा बयान भी इसी बहस को एक बार फिर सामने लेकर आया है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि समय रैना या उनकी टीम इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

  • 'अल्फा' की रिलीज के साथ सोशल मीडिया पर बंटी दर्शकों की राय, ऋतिक रोशन का कैमियो छाया, आलिया-शरवरी के एक्शन पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

    'अल्फा' की रिलीज के साथ सोशल मीडिया पर बंटी दर्शकों की राय, ऋतिक रोशन का कैमियो छाया, आलिया-शरवरी के एक्शन पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

    नई दिल्ली । यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की नई फिल्म ‘अल्फा’ सिनेमाघरों में रिलीज होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। आलिया भट्ट और शरवरी की मुख्य भूमिकाओं वाली इस स्पाई थ्रिलर को लेकर सोशल मीडिया पर शुरुआती प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। दर्शकों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है। जहां फिल्म के कुछ पहलुओं की खुलकर सराहना की जा रही है, वहीं कहानी, प्रस्तुति और कुछ किरदारों को लेकर अलग-अलग मत देखने को मिल रहे हैं।

    फिल्म में महिला केंद्रित स्पाई कहानी को लेकर दर्शकों के एक वर्ग ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका मानना है कि बड़े पैमाने पर एक्शन और जासूसी की दुनिया में महिला किरदारों को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्में हिंदी सिनेमा में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती हैं। ऐसे में ‘अल्फा’ इस दिशा में एक अलग प्रयास करती नजर आती है। कई दर्शकों ने आलिया भट्ट और शरवरी की स्क्रीन प्रेजेंस तथा दोनों के बीच की केमिस्ट्री को फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी बताया है।

    हालांकि फिल्म की कहानी को लेकर प्रतिक्रियाएं मिश्रित रही हैं। कुछ दर्शकों का कहना है कि शुरुआत काफी प्रभावशाली है और फिल्म उत्सुकता बनाए रखती है, लेकिन आगे बढ़ने के साथ इसकी कहानी अपेक्षित गहराई नहीं दे पाती। उनके अनुसार फिल्म कई स्थानों पर पारंपरिक स्पाई थ्रिलर के ढांचे में सिमट जाती है, जिससे नया अनुभव मिलने की उम्मीद पूरी तरह पूरी नहीं होती।

    आलिया भट्ट के अभिनय को लेकर भी दर्शकों की राय बंटी हुई दिखाई दी। कई लोगों ने उनके प्रदर्शन और गंभीर दृश्यों की सराहना की, जबकि कुछ दर्शकों का मानना है कि एक्शन प्रधान किरदार में उनकी मौजूदगी उतनी प्रभावशाली नहीं लगी, जितनी उम्मीद की जा रही थी। कुछ प्रतिक्रियाओं में उनके एक्शन दृश्यों और भाव-भंगिमाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    शरवरी के अभिनय को भी मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। कई दर्शकों ने माना कि उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया है और एक्शन दृश्यों में उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि कहानी की सीमाओं के कारण उनका किरदार भी पूरी क्षमता के साथ उभर नहीं पाया।

    फिल्म में ऋतिक रोशन का कैमियो सोशल मीडिया पर सबसे अधिक चर्चा में है। बड़ी संख्या में दर्शकों ने उनके विशेष प्रवेश को फिल्म का सबसे यादगार क्षण बताया है। उनका मानना है कि कैमियो ने फिल्म में अतिरिक्त रोमांच जोड़ा और स्पाई यूनिवर्स के भविष्य को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी। हालांकि कुछ दर्शकों ने इसे अनावश्यक या कम प्रभावी भी बताया, जिससे इस हिस्से को लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

    रिलीज के साथ ही फिल्म की तुलना अन्य स्पाई और एक्शन फिल्मों से भी होने लगी है। कुछ दर्शकों ने इसे हाल की अन्य फिल्मों की तुलना में कमजोर बताया, जबकि कई लोगों का कहना है कि फिल्म अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास करती है। कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि कहानी कई जगह अंतरराष्ट्रीय स्पाई फिल्मों से प्रेरित महसूस होती है, जबकि भावनात्मक रिश्तों और पारिवारिक संघर्षों पर अपेक्षाकृत अधिक ध्यान दिया गया है।

    कुल मिलाकर ‘अल्फा’ को लेकर शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं। एक ओर फिल्म के एक्शन, महिला प्रधान कहानी और ऋतिक रोशन के कैमियो की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर पटकथा, कुछ किरदारों की प्रस्तुति और कहानी की नवीनता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और व्यापक दर्शक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

  • 77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट ने आधिकारिक रूप से निर्देशन की दुनिया से खुद को अलग करने का फैसला किया है। 77 वर्ष की आयु में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह भविष्य में किसी भी फिल्म का निर्देशन नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण और थिएटर से जुड़े रचनात्मक कार्यों में उनकी सक्रियता आगे भी बनी रहेगी, लेकिन निर्देशक के रूप में वापसी की संभावना अब नहीं है। उनके इस फैसले ने फिल्म उद्योग में लंबे समय से चली आ रही उनकी रचनात्मक यात्रा पर एक महत्वपूर्ण विराम लगा दिया है।

    महेश भट्ट ने अपने निर्णय के पीछे बदलते फिल्मी माहौल और रचनात्मक प्रक्रिया में आए बदलावों को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि आज अधिकांश फिल्मों का स्वरूप पहले से तय रहता है, जिससे निर्देशक और कलाकार के लिए अपनी कल्पनाशीलता तथा स्वतंत्र सोच को पूरी तरह अभिव्यक्त करना पहले जैसा संभव नहीं रह गया है। उनके अनुसार कला का वास्तविक स्वरूप तभी सामने आता है, जब रचनाकार को प्रयोग करने और अपने दृष्टिकोण को खुलकर प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता मिले।

    उन्होंने कहा कि जब किसी फिल्म का लगभग हर पहलू पहले से निर्धारित हो और रचनात्मक निर्णयों की गुंजाइश सीमित हो जाए, तब निर्देशक की भूमिका भी पहले जैसी प्रभावी नहीं रह जाती। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति होती है और यदि वही सीमित हो जाए तो रचनात्मक संतुष्टि भी कम होने लगती है। इसी सोच ने उन्हें निर्देशन से स्थायी रूप से दूरी बनाने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

    महेश भट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्देशन छोड़ने का अर्थ सिनेमा से पूरी तरह अलग होना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह बतौर निर्माता और थिएटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी भागीदारी जारी रखेंगे। उनका उद्देश्य नए विचारों और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है, लेकिन कैमरे के पीछे निर्देशक की भूमिका निभाने की अब उनकी कोई इच्छा नहीं है।

    महेश भट्ट का फिल्मी सफर चार दशकों से भी अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1974 में की थी। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने ऐसी कई फिल्में बनाई, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। संवेदनशील विषयों, मानवीय रिश्तों और सामाजिक मुद्दों पर आधारित उनकी फिल्मों ने उन्हें एक विशिष्ट निर्देशक के रूप में स्थापित किया।

    उनके निर्देशन में बनी कई फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। उन्होंने ऐसी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा, जिन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ समाज और मानवीय भावनाओं पर भी गहरी छाप छोड़ी। लेखक के रूप में भी उन्होंने कई सफल फिल्मों में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी अलग रचनात्मक शैली विकसित की।

    निर्देशन से उनका पहला लंबा विराम वर्ष 1999 के बाद शुरू हुआ था। इसके करीब दो दशक बाद उन्होंने एक फिल्म के जरिए फिर से निर्देशन में वापसी की, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह वापसी अंतिम थी। उनके ताजा बयान के बाद यह लगभग तय हो गया है कि हिंदी सिनेमा को अब उनकी नई निर्देशित फिल्म देखने का अवसर नहीं मिलेगा। हालांकि फिल्म निर्माण और रचनात्मक परियोजनाओं में उनकी उपस्थिति आगे भी बनी रहेगी और उनके अनुभव का लाभ नई पीढ़ी के कलाकारों तथा फिल्मकारों को मिलता रहेगा।

  • ऋतिक-सुजैन के तलाक पर वर्षों बाद टूटी चुप्पी, 400 करोड़ एलिमनी की चर्चाओं पर परिवार ने बताई पूरी सच्चाई

    ऋतिक-सुजैन के तलाक पर वर्षों बाद टूटी चुप्पी, 400 करोड़ एलिमनी की चर्चाओं पर परिवार ने बताई पूरी सच्चाई

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन और उनकी पूर्व पत्नी सुजैन खान के तलाक से जुड़ी वर्षों पुरानी चर्चाएं एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा कि दोनों के तलाक के दौरान सुजैन खान ने सैकड़ों करोड़ रुपये की एलिमनी ली थी। अब इस पूरे मामले पर पहली बार परिवार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताया गया है।

    सुजैन खान की बहन और जानी-मानी ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली ने एक साक्षात्कार में कहा कि तलाक के दौरान 400 करोड़ रुपये की एलिमनी दिए जाने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं थी। उनके अनुसार वर्षों से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इस तरह की बातें दोहराई जाती रही हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अफवाहों ने बिना किसी तथ्य के लोगों के बीच गलत धारणा बना दी।

    फराह खान अली ने स्पष्ट किया कि उनकी बहन को आर्थिक लाभ के लिए विवाह या तलाक से जोड़कर देखना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि सुजैन खान एक सम्मानित परिवार से आती हैं और उन्होंने हमेशा अपने व्यक्तिगत जीवन को गरिमा और संतुलन के साथ आगे बढ़ाया है। उनके अनुसार तलाक के बाद भी दोनों परिवारों के बीच आपसी सम्मान और अच्छे संबंध बने हुए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि उनके रिश्ते में किसी प्रकार का आर्थिक विवाद प्रमुख कारण नहीं था।

    उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने सोशल मीडिया पर सुजैन खान को लेकर अनुचित टिप्पणियां कीं और उन्हें बिना आधार के ‘गोल्ड डिगर’ जैसे शब्दों से संबोधित किया। फराह के अनुसार यह पूरी तरह गलत और दुर्भाग्यपूर्ण था, क्योंकि वास्तविक घटनाओं से इन आरोपों का कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रिश्तों को लेकर इस प्रकार की अटकलें किसी भी व्यक्ति की छवि को प्रभावित करती हैं।

    फराह ने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार अपनी बहन को सार्वजनिक रूप से इन अफवाहों का खंडन करने की सलाह दी थी, लेकिन सुजैन खान ने कभी ऐसा आवश्यक नहीं समझा। उनका मानना था कि लोगों की राय से अधिक महत्वपूर्ण उनका आत्मसम्मान और निजी जीवन है। उन्होंने हमेशा अपने परिवार, बच्चों और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी तथा सार्वजनिक विवादों से दूरी बनाए रखी।

    ऋतिक रोशन और सुजैन खान की दोस्ती बचपन से रही थी। दोनों ने वर्ष 2000 में विवाह किया और उनके दो बेटे हैं। कई वर्षों तक साथ रहने के बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया और वर्ष 2014 में उनका तलाक कानूनी रूप से पूरा हुआ। अलग होने के बावजूद दोनों ने अपने रिश्ते में सम्मान बनाए रखा और बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी मिलकर निभाई।

    तलाक के बाद भी दोनों कई पारिवारिक अवसरों और बच्चों से जुड़े कार्यक्रमों में साथ दिखाई देते रहे हैं। यही कारण है कि उनके संबंधों को अक्सर परिपक्व और सौहार्दपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाता है। परिवार की ओर से आए ताजा बयान ने वर्षों से चली आ रही एलिमनी संबंधी चर्चाओं पर नई स्पष्टता प्रदान की है।

    यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के बारे में बिना प्रमाण फैलने वाली खबरें लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहती हैं। ऐसे मामलों में आधिकारिक या प्रत्यक्ष पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाती है।

  • 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के सेट से अचानक क्यों गायब हो जाते थे संजय दत्त? सह-कलाकार यतिन कार्येकर ने सालों बाद बयां किया शूटिंग का अनसुना दर्द

    'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के सेट से अचानक क्यों गायब हो जाते थे संजय दत्त? सह-कलाकार यतिन कार्येकर ने सालों बाद बयां किया शूटिंग का अनसुना दर्द

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त के जीवन में एक दौर ऐसा भी था, जब वे अपनी पेशेवर प्रतिबद्धताओं और गंभीर कानूनी लड़ाइयों के बीच बुरी तरह फंसे हुए थे। साल 2003 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ की शूटिंग के दौरान सेट पर बने रहने के लिए उन्हें जिस मानसिक और शारीरिक संघर्ष से गुजरना पड़ा, उसका एक बेहद भावुक और अनसुना पहलू अब सामने आया है। फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सह-कलाकार और अनुभवी अभिनेता यतिन कार्येकर ने हाल ही में उस दौर की परिस्थितियों को याद करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

    यतिन कार्येकर ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान संजय दत्त आर्म्स एक्ट मामले और टाडा अदालत की सख्त कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे थे। स्थिति इतनी अनिश्चित थी कि सेट पर काम करते समय भी अभिनेता का पूरा ध्यान अपनी अदालती तारीखों और कानूनी मामलों पर लगा रहता था। सेट पर मौजूद हर व्यक्ति इस बात से वाकिफ था कि संजय दत्त किस भारी मानसिक दबाव और तनाव के साए में कैमरे के सामने अभिनय कर रहे थे।

    शूटिंग के दिनों के माहौल को साझा करते हुए कार्येकर ने बताया कि अक्सर सेट पर अचानक एक फोन कॉल आता था और उसे सुनते ही संजय दत्त बिना किसी से कुछ कहे या बिना कोई औपचारिकता निभाए चुपचाप सेट छोड़कर चले जाते थे। उन्हें अचानक अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए तुरंत रवाना होना पड़ता था। ऐसे अनपेक्षित घटनाक्रमों के कारण फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी को कई बार भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

    संजय दत्त के अचानक चले जाने के बाद निर्देशक को पूरी स्थिति को संभालने के लिए तुरंत अपने पूर्व-निर्धारित शूटिंग शेड्यूल में बदलाव करने पड़ते थे। निर्देशक हिरानी को अक्सर उन दृश्यों या शॉट्स को पूरी तरह बदलना पड़ता था, जिनमें संजय दत्त की मौजूदगी अनिवार्य थी। अभिनेता की अनुपस्थिति के कारण सेट पर मौजूद अन्य कलाकारों के साथ अलग दृश्यों की योजना बनाई जाती थी ताकि शूटिंग का कीमती समय बर्बाद न हो और काम सुचारू रूप से चलता रहे।

    इस भारी व्यक्तिगत संकट और कानूनी दबाव के बावजूद संजय दत्त ने कभी भी अपने काम की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। जब भी वे अदालत की कार्यवाही से लौटकर वापस सेट पर आते थे, तो वे पूरी तरह से अपने किरदार ‘मुन्ना भाई’ में ढल जाते थे। कार्येकर के अनुसार, संजय दत्त की यह क्षमता अद्भुत थी कि वे इतनी बड़ी मानसिक उथल-पुथल के बीच भी कैमरे के सामने आते ही अपने सारे गम और तनाव भूलकर एक जीवंत प्रदर्शन देने में सफल रहते थे।

    फिल्म के क्रू और साथी कलाकारों ने भी उस कठिन समय में संजय दत्त का भरपूर सहयोग किया। सेट पर मौजूद सभी लोग अभिनेता की बेबसी और उनकी पारिवारिक परिस्थितियों को गहराई से समझते थे। उनके पिता सुनील दत्त भी उस समय बेटे को इस संकट से निकालने के लिए हर संभव कानूनी और नैतिक प्रयास कर रहे थे। यही कारण था कि पूरी टीम ने बिना किसी शिकायत के हर विपरीत परिस्थिति में निर्देशक और अभिनेता के साथ तालमेल बिठाया।

    ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ न केवल संजय दत्त के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई, बल्कि इसने उनके गिरते हुए करियर को एक नई संजीवनी भी प्रदान की थी। आज सालों बाद जब सेट के ये वाकये सामने आ रहे हैं, तो यह साफ होता है कि पर्दे पर दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने वाले ‘मुन्ना भाई’ के पीछे एक अभिनेता का कितना बड़ा व्यक्तिगत दर्द और अदालती संघर्ष छिपा हुआ था, जिसने भारतीय सिनेमा इतिहास की एक कालजयी फिल्म को आकार दिया।

  • आमिर खान ने शादी की खबर पर लगाई मुहर 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग लेंगे सात फेरे बेटे जुनैद का रिएक्शन बना चर्चा का विषय

    आमिर खान ने शादी की खबर पर लगाई मुहर 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग लेंगे सात फेरे बेटे जुनैद का रिएक्शन बना चर्चा का विषय


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने अपनी तीसरी शादी को लेकर चल रही सभी अटकलों पर आखिरकार विराम लगा दिया है। अभिनेता ने खुद पुष्टि की है कि वह 5 जुलाई को अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट के साथ विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं। 61 वर्ष की उम्र में आमिर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रहे हैं और इस खास मौके को उन्होंने पूरी तरह निजी रखने का फैसला किया है। शादी में केवल परिवार के सदस्य और कुछ बेहद करीबी दोस्त ही शामिल होंगे। अभिनेता ने इस मौके पर अपने प्रशंसकों से भी प्यार और आशीर्वाद की अपील की है ताकि उनके जीवन का नया सफर खुशियों से भरा रहे।

    आमिर खान हाल ही में अपने बेटे जुनैद खान के साथ एक कार्यक्रम में पहुंचे थे जहां उन्होंने मीडिया से खुलकर अपनी शादी को लेकर बातचीत की। सबसे दिलचस्प पल तब देखने को मिला जब आमिर अपनी शादी की जानकारी साझा कर रहे थे और उनके बगल में बैठे जुनैद खान मुस्कुराते हुए नजर आए। पिता की बात सुनकर उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। इस दौरान आमिर ने बताया कि शादी किसी आलीशान होटल या बड़े वेडिंग वेन्यू पर नहीं बल्कि उनके घर पर ही होगी। उन्होंने कहा कि यह एक छोटा और पारिवारिक समारोह होगा जिसमें केवल अपने लोग शामिल होंगे।

    अभिनेता ने स्पष्ट किया कि वह किसी भव्य रिसेप्शन या करोड़ों रुपये के आयोजन के पक्ष में नहीं हैं। उनकी प्राथमिकता सादगी और पारिवारिक माहौल है। आमिर का कहना है कि जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर को वह शोर शराबे के बजाय अपनों के साथ शांत और यादगार तरीके से मनाना चाहते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सभी से दुआएं मांगते हुए कहा कि उनकी और गौरी की नई जिंदगी खुशियों और विश्वास से भरी रहे।

    आमिर खान की निजी जिंदगी हमेशा चर्चा में रही है। उनकी पहली शादी रीना दत्ता से हुई थी जिनसे उन्हें दो बच्चे जुनैद खान और आयरा खान हैं। कई वर्षों तक साथ रहने के बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद आमिर ने फिल्म निर्माता किरण राव से दूसरी शादी की। इस रिश्ते से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म हुआ। हालांकि वर्ष 2021 में आमिर और किरण ने भी अलग होने का फैसला किया लेकिन दोनों आज भी अच्छे दोस्त हैं और बेटे की परवरिश मिलकर कर रहे हैं।

    अब आमिर खान गौरी स्प्रैट के साथ अपने जीवन की नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से दोनों के रिश्ते की चर्चा लगातार हो रही थी लेकिन अभिनेता ने हमेशा इस रिश्ते को निजी रखा। अब शादी की आधिकारिक पुष्टि के बाद उनके प्रशंसकों में उत्साह बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर भी फैंस उन्हें लगातार शुभकामनाएं दे रहे हैं और नई जिंदगी के लिए ढेर सारी बधाइयां भेज रहे हैं।

    आमिर खान का यह फैसला इस बात का भी संदेश देता है कि जीवन में नई शुरुआत के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। अपने परिवार के समर्थन और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में वह 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट का हाथ थामकर एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे। अब सभी की नजरें इस निजी लेकिन बेहद चर्चित शादी पर टिकी हुई हैं।

  • रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान

    रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को दर्शक आज भी उनकी शानदार अदाकारी दमदार संवाद और बेहतरीन एक्शन के लिए याद करते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में रोमांस कॉमेडी और एक्शन हर शैली की फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हालांकि उनकी पहचान केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं थी। उन्हें करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वास्तविक जीवन में भी धर्मेंद्र बेहद साहसी और निडर इंसान थे। उनके व्यक्तित्व से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा अभिनेता और निर्देशक सत्यजीत पुरी ने साझा किया जिसने यह साबित किया कि धर्मेंद्र केवल फिल्मों के ही नहीं बल्कि असल जिंदगी के भी सच्चे हीरो थे।

    सत्यजीत पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1990 के दशक में जब फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का दबदबा बढ़ रहा था तब कई कलाकारों को धमकी भरे फोन और दबाव का सामना करना पड़ता था। उस दौर में कई लोग खामोश रहना ही बेहतर समझते थे लेकिन धर्मेंद्र का स्वभाव अलग था। उन्होंने कभी भी डर के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया।

    सत्यजीत पुरी के अनुसार एक समय ऐसा भी आया जब अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने धर्मेंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन धर्मेंद्र ने घबराने के बजाय बेहद सख्त और आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई उनसे टकराने की कोशिश करेगा तो उनके गांव सनेहवाल के लोग उनके साथ खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास लड़ने के लिए पूरी फौज जैसी ताकत है और उनसे उलझना किसी के लिए आसान नहीं होगा।

    बताया जाता है कि धर्मेंद्र के इस बेबाक और निडर जवाब के बाद अंडरवर्ल्ड ने दोबारा उन्हें परेशान करने की कोशिश नहीं की। यह घटना आज भी बॉलीवुड के चर्चित किस्सों में गिनी जाती है और धर्मेंद्र के साहस की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है।

    धर्मेंद्र का व्यक्तित्व हमेशा सादगी और आत्मसम्मान से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने करियर में कभी विवादों के सहारे लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने काम और व्यवहार से लोगों का दिल जीता। यही वजह रही कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था।

    धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रहे। उनकी जोड़ी कई बड़े सितारों के साथ पसंद की गई लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्मों को आज भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा का ही मैन बना दिया।

    24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरा दुख पहुंचाया। उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्में उनके संवाद और उनके साहस से जुड़े किस्से लोगों के दिलों में जिंदा हैं। मरणोपरांत उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया जो भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान का सम्मान था।

    धर्मेंद्र का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चा नायक केवल पर्दे पर नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों साहस और आत्मसम्मान से वास्तविक जीवन में भी पहचाना जाता है। यही कारण है कि उन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक कलाकारों में गिना जाता है।

  • क्या सच में सुजैन खान को मिले थे 400 करोड़ रुपये? फराह खान अली ने सालों पुरानी अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी

    क्या सच में सुजैन खान को मिले थे 400 करोड़ रुपये? फराह खान अली ने सालों पुरानी अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के सबसे चर्चित रिश्तों में शामिल रहे ऋतिक रोशन और सुजैन खान का तलाक आज भी चर्चा का विषय बना रहता है। दोनों ने साल 2000 में शादी की थी और करीब 14 साल साथ रहने के बाद 2014 में आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। तलाक के बाद सबसे ज्यादा जिस बात ने सुर्खियां बटोरी वह थी यह दावा कि सुजैन खान को एलिमनी के रूप में 400 करोड़ रुपये मिले थे। अब इस मामले पर सुजैन की बड़ी बहन और जानी मानी ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है और इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताया है।

    एक इंटरव्यू में फराह खान अली ने कहा कि वर्षों से सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में 400 करोड़ रुपये की एलिमनी की जो बातें कही जाती रही हैं उनमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी बहन ने तलाक के दौरान किसी तरह की एलिमनी नहीं ली। उन्होंने बताया कि जब भी वह इस तरह की खबरें पढ़ती हैं तो उन्हें बेहद दुख होता है क्योंकि इससे सुजैन की छवि को गलत तरीके से पेश किया जाता है।

    फराह ने कहा कि उनका परिवार हमेशा से रिश्तों और मानवीय मूल्यों को धन दौलत से अधिक महत्व देता आया है। उनके अनुसार सुजैन ने कभी भी आर्थिक लाभ के लिए कोई निर्णय नहीं लिया और यही वजह है कि आज भी उनके रिश्ते ऋतिक रोशन और उनके परिवार के साथ बेहद सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि राकेश रोशन और पिंकी रोशन आज भी सुजैन को परिवार का हिस्सा मानते हैं और दोनों परिवारों के बीच अच्छे संबंध कायम हैं।

    फराह खान अली ने यह भी बताया कि तलाक के समय पूरा परिवार इस फैसले से भावुक था और सभी को गहरा झटका लगा था। हालांकि समय के साथ दोनों परिवारों ने इस स्थिति को समझदारी से स्वीकार किया और किसी तरह की सार्वजनिक कटुता सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि ऋतिक और सुजैन दोनों ने अपने रिश्ते के अंत को बेहद गरिमा और परिपक्वता के साथ संभाला।

    उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने कई बार सुजैन से कहा कि वह 400 करोड़ रुपये वाली अफवाहों का सार्वजनिक रूप से खंडन करें लेकिन सुजैन ने हमेशा यही कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। फराह के अनुसार सुजैन का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति का उनके जीवन में कोई महत्व नहीं है तो उसकी राय भी उनके लिए मायने नहीं रखती।

    फराह ने ऋतिक और सुजैन की शादी को याद करते हुए कहा कि दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे और शादी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थे। उस समय ऋतिक के करियर की शुरुआत हुई थी और परिवार चाहता था कि शादी कुछ समय बाद हो लेकिन दोनों ने अपने रिश्ते को प्राथमिकता देते हुए विवाह का निर्णय लिया।

    वर्तमान समय में ऋतिक रोशन अभिनेत्री सबा आजाद के साथ रिश्ते में हैं जबकि सुजैन खान अभिनेता अर्सलान गोनी को डेट कर रही हैं। फराह ने दोनों जोड़ों के लिए खुशी जताते हुए कहा कि जीवन में सबसे जरूरी बात खुश रहना है और ऐसे लोगों के साथ रहना है जो आपको सम्मान और सुकून दें। उनके अनुसार जब रिश्ते सम्मान और समझदारी पर टिके हों तो अलग होने के बाद भी आपसी सम्मान और दोस्ती बनाए रखी जा सकती है। यही बात ऋतिक और सुजैन के रिश्ते को आज भी खास बनाती है।

  • किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

    किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में अमित कुमार का नाम उन चुनिंदा गायकों में लिया जाता है, जिन्होंने पारिवारिक विरासत से आगे बढ़कर अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी मधुर आवाज, सहज गायकी और भावपूर्ण प्रस्तुति के दम पर उन्होंने 1980 के दशक में एक ऐसी जगह बनाई, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच विशेष महत्व रखती है। 3 जुलाई 1952 को कोलकाता में जन्मे अमित कुमार का जीवन संगीत, अभिनय और रचनात्मकता से भरपूर रहा।

    अमित कुमार के पिता महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार तथा मां प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका रूमा गुहा ठाकुरता थीं। ऐसे संगीतपूर्ण वातावरण में पले-बढ़े अमित का रुझान बचपन से ही गायन और अभिनय की ओर था। कोलकाता में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुति को काफी सराहना मिली और उनकी प्रतिभा धीरे-धीरे फिल्म जगत का ध्यान आकर्षित करने लगी।

    फिल्मी दुनिया में उनका शुरुआती सफर अभिनय से शुरू हुआ। कम उम्र में उन्होंने अपने पिता के निर्देशन वाली फिल्म में अभिनय किया और इसके बाद बाल कलाकार के रूप में अपना पहला गीत भी रिकॉर्ड किया। हालांकि पार्श्वगायक के रूप में पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था। शुरुआती वर्षों में उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अपनी गायकी को निखारने पर पूरा ध्यान दिया।

    उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें संगीतकार आरडी बर्मन के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उस समय वह बेहद घबराए हुए थे, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यही अवसर आगे चलकर उनके संगीत सफर की मजबूत नींव बना और उन्हें बड़े संगीतकारों के साथ काम करने का अवसर मिला।

    साल 1981 में एक लोकप्रिय फिल्म के गीत ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई। इसके बाद उनकी आवाज कई युवा अभिनेताओं की पहचान बन गई। रोमांटिक, भावनात्मक और ऊर्जावान गीतों में उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। 1980 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत गाकर खुद को उस दौर के सबसे लोकप्रिय पार्श्वगायकों में स्थापित कर लिया।

    उनके करियर का एक ऐतिहासिक क्षण वह भी रहा जब प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक की दौड़ में उनका मुकाबला अपने ही पिता किशोर कुमार से हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद पिता और पुत्र का वह भावनात्मक पल भारतीय फिल्म संगीत के सबसे यादगार क्षणों में गिना जाता है। यह उपलब्धि अमित कुमार के स्वतंत्र और सफल करियर की बड़ी पहचान बन गई।

    पिता किशोर कुमार के निधन के बाद उन्होंने उनकी अधूरी फिल्म को पूरा करने की जिम्मेदारी निभाई। बाद में अपने मार्गदर्शक आरडी बर्मन के निधन के पश्चात उन्होंने धीरे-धीरे पार्श्वगायन से दूरी बनाई और स्वतंत्र संगीत, लाइव कॉन्सर्ट तथा अपने संगीत प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया। आज भी अमित कुमार की आवाज और उनके गीत भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि विरासत प्रेरणा दे सकती है, लेकिन स्थायी पहचान केवल प्रतिभा, मेहनत और समर्पण से ही बनती है।

  • जब गोविंदा की गिफ्ट की शर्ट को राजकुमार ने बना दिया रूमाल, बेबाक अंदाज का यह किस्सा आज भी फिल्मी दुनिया में है मशहूर

    जब गोविंदा की गिफ्ट की शर्ट को राजकुमार ने बना दिया रूमाल, बेबाक अंदाज का यह किस्सा आज भी फिल्मी दुनिया में है मशहूर


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राजकुमार केवल अपनी दमदार संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेबाक स्वभाव और अलग अंदाज के लिए भी याद किए जाते हैं। उनके व्यक्तित्व से जुड़े अनेक किस्से आज भी फिल्म जगत में चर्चा का विषय बने रहते हैं। इन्हीं चर्चित घटनाओं में अभिनेता गोविंदा द्वारा उपहार में दी गई शर्ट से जुड़ा एक किस्सा भी शामिल है, जिसे लोग आज भी बड़े दिलचस्प अंदाज में याद करते हैं।

    बताया जाता है कि फिल्म ‘जंगबाज’ की शूटिंग के दौरान गोविंदा ने सम्मान स्वरूप राजकुमार को एक आकर्षक शर्ट भेंट की थी। उन्हें उम्मीद थी कि वरिष्ठ अभिनेता इस उपहार को पहनेंगे। हालांकि कुछ समय बाद जब गोविंदा दोबारा सेट पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वही शर्ट अब अपने मूल रूप में नहीं थी। राजकुमार ने उसे कटवाकर रूमाल बनवा लिया था। यह देखकर गोविंदा आश्चर्यचकित रह गए। यह घटना बाद में राजकुमार के अनोखे और बेपरवाह व्यक्तित्व का चर्चित उदाहरण बन गई।

    राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को तत्कालीन बलूचिस्तान में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम कुलभूषण पंडित था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में सेवा दी। अपने कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित स्वभाव के कारण उनकी पहचान एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में थी। हालांकि अभिनय के प्रति उनका झुकाव उन्हें अंततः फिल्मी दुनिया की ओर ले आया।

    फिल्मी सफर की शुरुआत एक संयोग से हुई। एक निर्माता से मुलाकात के बाद उन्हें अभिनय का अवसर मिला और उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर सिनेमा को अपना करियर बना लिया। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उनकी अभिनय क्षमता और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की श्रेणी में स्थापित कर दिया।

    अपने लंबे करियर में उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी दमदार आवाज, संवाद बोलने की विशिष्ट शैली और स्क्रीन पर प्रभावशाली उपस्थिति उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई। यही कारण रहा कि उनके कई संवाद और अंदाज आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    राजकुमार को अपने अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले। उन्होंने गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के माध्यम से यह साबित किया कि मजबूत अभिनय किसी भी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हो सकता है। उनके योगदान को हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।

    जीवन के अंतिम वर्षों में वह गले के कैंसर से पीड़ित रहे, जिसका असर उनकी आवाज पर भी पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी गरिमा और आत्मविश्वास बनाए रखा। 3 जुलाई 1996 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्मों, संवादों और उनसे जुड़े अनोखे किस्सों के कारण वह आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार कलाकारों में गिने जाते हैं।