Category: Entertainment

  • अफवाहों के बीच करणवीर बोहरा ने तोड़ी चुप्पी, बोले- निजी जीवन पर अभी नहीं करना चाहता कोई बात, काम पर है पूरा फोकस

    अफवाहों के बीच करणवीर बोहरा ने तोड़ी चुप्पी, बोले- निजी जीवन पर अभी नहीं करना चाहता कोई बात, काम पर है पूरा फोकस

    नई दिल्ली । टीवी अभिनेता करणवीर बोहरा ने पिछले कुछ समय से उनकी शादीशुदा जिंदगी को लेकर चल रही तलाक की चर्चाओं पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है। हालांकि उन्होंने इन अफवाहों पर विस्तार से बोलने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि वह फिलहाल अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं बनाना चाहते। अभिनेता ने कहा कि जब वह किसी मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते तो सम्मानपूर्वक मना कर देते हैं और उन्हें उम्मीद है कि लोग भी उनकी निजता का सम्मान करेंगे।

    करणवीर बोहरा और उनकी पत्नी तीजय सिद्धू को लंबे समय से टेलीविजन इंडस्ट्री के चर्चित और लोकप्रिय कपल्स में गिना जाता है। पिछले कुछ महीनों से दोनों के रिश्ते को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में सामने आ रही थीं। इन खबरों के बीच पहली बार करणवीर ने अपनी चुप्पी तोड़ी, लेकिन उन्होंने किसी भी अफवाह की पुष्टि या खंडन करने के बजाय अपनी निजी सीमाओं का सम्मान करने की अपील की।

    अभिनेता ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और नकारात्मक टिप्पणियों पर भी अपनी राय साझा की। उनका कहना था कि वह किसी भी नकारात्मक बात को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। इंटरनेट पर लोग क्या लिखते हैं, उससे वह मानसिक रूप से प्रभावित नहीं होते। उनके अनुसार हर व्यक्ति की अपनी राय हो सकती है, लेकिन उसका असर अपने काम और जीवन पर नहीं पड़ने देना चाहिए। उन्होंने सकारात्मक सोच बनाए रखने को सबसे महत्वपूर्ण बताया।

    करणवीर ने अपने पेशेवर सफर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है और अब केवल अभिनय तक सीमित रहने के बजाय निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनका मानना है कि मनोरंजन उद्योग लगातार बदल रहा है और कलाकारों को समय के साथ अपनी भूमिका का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अभिनय के भरोसे पूरा करियर नहीं चलाया जा सकता, इसलिए नए अवसरों और नए माध्यमों को अपनाना जरूरी है।

    उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उनके करियर के दौरान उन्हें टेलीविजन के दो बड़े और लोकप्रिय शो ऑफर हुए थे, लेकिन उस समय दूसरी परियोजनाओं में व्यस्त होने के कारण वह उनका हिस्सा नहीं बन सके। अभिनेता ने स्वीकार किया कि आज भी उन्हें इस बात का अफसोस होता है कि वह उन चर्चित धारावाहिकों में काम नहीं कर पाए। हालांकि उनका मानना है कि हर कलाकार के करियर में ऐसे अवसर आते हैं, जिन्हें परिस्थितियों के कारण छोड़ना पड़ता है।

    करणवीर बोहरा ने यह भी कहा कि रियलिटी शोज ने उनके व्यक्तित्व को दर्शकों के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों ने उन्हें केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक पिता, दोस्त और सामान्य इंसान के रूप में भी जाना। यही वजह है कि दर्शकों के साथ उनका जुड़ाव पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

    करणवीर बोहरा और तीजय सिद्धू की प्रेम कहानी भी लंबे समय से चर्चा में रही है। दोनों की मुलाकात एक साझा मित्र के माध्यम से हुई थी, जिसके बाद दोस्ती प्यार में बदली और वर्ष 2006 में दोनों ने विवाह कर लिया। आज यह दंपति तीन बेटियों के माता-पिता हैं। हालिया अफवाहों के बीच करणवीर की प्रतिक्रिया ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल अपने निजी जीवन से अधिक अपने काम और परिवार की गरिमा बनाए रखने पर ध्यान देना चाहते हैं।

  • रियलिटी शो 'लॉक अप 2' में शिल्पा शिंदे के बयान पर मचा बवाल, राम कपूर को लेकर की गई टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

    रियलिटी शो 'लॉक अप 2' में शिल्पा शिंदे के बयान पर मचा बवाल, राम कपूर को लेकर की गई टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

    नई दिल्ली । रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ के हालिया एपिसोड में एक बार फिर विवाद देखने को मिला, जब अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने अभिनेता राम कपूर के साथ एक ही सेल में सोने से इनकार कर दिया। इस दौरान राम कपूर को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने शो के भीतर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया और दर्शकों के बीच भी इस घटना की चर्चा तेज हो गई। शो में पहले से मौजूद मतभेद इस घटना के बाद और अधिक स्पष्ट दिखाई दिए।

    हालिया एपिसोड में साप्ताहिक टास्क के बाद प्रतियोगियों को दो टीमों में बांटा गया। टास्क जीतने वाली टीम को रहने और अन्य सुविधाओं में प्राथमिकता मिली, जबकि दूसरी टीम को सीमित संसाधनों के साथ समय बिताना पड़ा। रात में सोने की व्यवस्था के दौरान शिल्पा शिंदे को उस सेल में भेजने का फैसला किया गया, जहां राम कपूर पहले से मौजूद थे। हालांकि, उन्होंने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए वहां जाने से साफ इनकार कर दिया।

    शो में मौजूद अन्य प्रतिभागियों ने शिल्पा शिंदे को समझाने का प्रयास किया कि दोनों के लिए अलग-अलग बेड की व्यवस्था है और किसी तरह की असुविधा नहीं होगी। इसके बावजूद उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदला। बातचीत के दौरान उन्होंने राम कपूर को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसे कई लोगों ने आपत्तिजनक और बॉडी शेमिंग से जोड़कर देखा। इसके बाद घर के अन्य सदस्य भी इस बहस में शामिल हो गए और माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।

    स्थिति को संभालने की कोशिश के बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। अंततः शिल्पा शिंदे की टीम के कुछ सदस्यों ने उनके साथ बाहर ही रात बिताने का फैसला किया। इस घटनाक्रम ने शो के भीतर दोनों टीमों के बीच पहले से मौजूद खींचतान को और बढ़ा दिया। एपिसोड के प्रसारण के बाद इस पूरे मामले पर दर्शकों की भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    शो में शिल्पा शिंदे और राम कपूर के बीच शुरुआत से ही मतभेद देखने को मिले हैं। कई मौकों पर दोनों एक-दूसरे की बातों का विरोध करते और तीखी बहस करते नजर आए हैं। हालिया एपिसोड में भी सोने की व्यवस्था से पहले दोनों के बीच अन्य मुद्दों पर कहासुनी हुई थी, जिससे उनके रिश्तों में तनाव साफ दिखाई दिया। इसी कारण यह नया विवाद भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

    शिल्पा शिंदे इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुकी हैं। हाल के एपिसोड में उन्हें एक अन्य प्रतिभागी की निजी जिंदगी पर टिप्पणी करने के कारण भी फटकार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में लगातार सामने आ रहे विवाद शो के माहौल को और अधिक प्रतिस्पर्धी तथा तनावपूर्ण बना रहे हैं।

    रियलिटी शो में प्रतिभागियों के बीच मतभेद और तीखी बहसें अक्सर देखने को मिलती हैं, लेकिन किसी की शारीरिक बनावट को लेकर की गई टिप्पणी सामाजिक स्तर पर संवेदनशील मानी जाती है। यही वजह है कि इस घटना ने केवल शो के भीतर ही नहीं बल्कि दर्शकों के बीच भी चर्चा को जन्म दिया है। आने वाले एपिसोड में इस विवाद का असर प्रतियोगियों के रिश्तों और खेल की रणनीति पर किस तरह पड़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • भारतीय सिनेमा की प्रतिभावान अभिनेत्री स्मिता पाटिल की अंतिम घड़ियों का दर्दनाक सच: गंभीर संक्रमण और असमय चिकित्सा ने छीना दिग्गज कलाकार

    भारतीय सिनेमा की प्रतिभावान अभिनेत्री स्मिता पाटिल की अंतिम घड़ियों का दर्दनाक सच: गंभीर संक्रमण और असमय चिकित्सा ने छीना दिग्गज कलाकार

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की सबसे प्रभावशाली और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शुमार स्मिता पाटिल के असमय निधन की कहानी आज भी कला जगत को झकझोर देती है। समानांतर और व्यावसायिक सिनेमा दोनों में अपनी सशक्त अदाकारी की छाप छोड़ने वाली इस महान अभिनेत्री की जीवन यात्रा बेहद दर्दनाक परिस्थितियों में समाप्त हुई थी। वर्ष 1986 में अपने पहले बच्चे के जन्म के ठीक दो सप्ताह बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका निधन हो गया था। प्रसव के बाद शरीर में फैले घातक संक्रमण और सही समय पर चिकित्सीय सलाह न लेने की वजह से उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।

    पुत्र के जन्म के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन प्रसवोत्तर संक्रमण ने अभिनेत्री को अपनी चपेट में ले लिया था। शुरुआती दौर में स्वास्थ्य में आ रही गिरावट को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे संक्रमण धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलता चला गया। स्थानीय चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार और ड्रिप दिए जाने के बावजूद उनके शरीर का तापमान लगातार बढ़ता रहा। अपने नवजात शिशु के प्रति अत्यधिक लगाव के कारण वे अस्पताल जाने से बचती रहीं, जिससे स्थिति लगातार नियंत्रण से बाहर होती चली गई।

    निधन वाले दिन अभिनेत्री की स्थिति में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई। शाम के समय उनका चेहरा पीला पड़ने लगा और उन्हें लगातार खून की उल्टियां होने लगीं। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल मुंबई के जसलोक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक वे कोमा की स्थिति में जा चुकी थीं। विशेषज्ञों की टीम ने उन्हें बचाने के भरसक प्रयास किए और स्थिति को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के डॉक्टरों से भी संपर्क साधने की कोशिशें की गईं, परंतु संक्रमण मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका था।

    अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कुछ ही घंटों भीतर आंतरिक रक्तस्राव और अंगों के काम न करने की वजह से स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई। अंततः देर रात चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। केवल इकत्तीस वर्ष की आयु में स्मिता पाटिल का इस तरह अचानक चले जाना संपूर्ण भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक कभी न पूरा होने वाला घाटा था। उनके निधन के बाद उनके नवजात शिशु का पालन-पोषण उनके माता-पिता द्वारा किया गया, जबकि भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को आज भी अत्यंत सम्मान के साथ याद किया जाता है।

  • महाभारत से जुड़ी थी टाइम मशीन की कहानी करण जौहर की एक पेशकश के बाद ठंडे बस्ते में चली गई फिल्म

    महाभारत से जुड़ी थी टाइम मशीन की कहानी करण जौहर की एक पेशकश के बाद ठंडे बस्ते में चली गई फिल्म


    नई दिल्ली । फिल्म निर्माता और लेखक करण राजदान ने बॉलीवुड की सबसे चर्चित लेकिन अधूरी रह गई फिल्मों में शामिल टाइम मशीन को लेकर बड़ा खुलासा किया है। यह फिल्म निर्देशक शेखर कपूर के निर्देशन में बननी थी जिसमें आमिर खान और जूही चावला मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले थे। विज्ञान कल्पना और भारतीय पौराणिक इतिहास को जोड़ने वाली इस फिल्म को उस दौर का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जा रहा था लेकिन कई कारणों से यह फिल्म कभी पर्दे तक नहीं पहुंच सकी।

    करण राजदान ने बताया कि टाइम मशीन की कहानी आमिर खान के किरदार पर आधारित थी जो गलती से एक ऐसी मशीन के जरिए अतीत में पहुंच जाता है जहां महाभारत का युद्ध चल रहा होता है। वहां उसकी मुलाकात भगवान कृष्ण से होती है और वह इतिहास के सबसे बड़े युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी बन जाता है। इस अनोखे विचार ने शुरुआत में पूरी टीम को बेहद उत्साहित कर दिया था।

    उन्होंने बताया कि इस कहानी की प्रेरणा उन्हें और शेखर कपूर को अपने निजी जीवन की एक भावुक घटना से मिली थी। दोनों ने कम समय के अंतराल में अपने माता पिता को खो दिया था और अक्सर यह सोचते थे कि काश समय में पीछे जाकर उनसे एक बार फिर मिल पाते। इसी भावना ने टाइम मशीन की कहानी को जन्म दिया। केवल तीन महीने में पूरी कहानी पटकथा और संवाद तैयार कर लिए गए थे।

    शेखर कपूर इस प्रोजेक्ट को लेकर इतने उत्साहित थे कि उन्होंने संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और गीतकार आनंद बख्शी को भी इससे जोड़ लिया था। आमिर खान परेश रावल और अन्य कलाकारों को भी कहानी सुनाई गई और सभी ने इसकी कल्पना और विषय की सराहना की। उस समय यह फिल्म भारतीय सिनेमा में तकनीकी और कहानी के स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकती थी।

    करण राजदान ने यह भी खुलासा किया कि कई बड़े निर्माता इस फिल्म को बनाना चाहते थे। उन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस के प्रमुख करण जौहर को भी स्क्रिप्ट भेजी थी लेकिन उन्हें स्क्रिप्ट के बदले केवल पच्चीस लाख रुपये की पेशकश की गई। राजदान के मुताबिक उन्हें लगा कि इतनी बड़ी और अनोखी कहानी की यह कीमत बेहद कम थी इसलिए बात आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में निर्माता फिरोज नाडियाडवाला ने भी इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने की कोशिश की लेकिन निर्देशन को लेकर सहमति नहीं बन पाई। राजकुमार संतोषी का नाम भी सामने आया लेकिन राजदान का मानना था कि यह उनकी शैली की फिल्म नहीं थी।

    आज जब भारतीय सिनेमा में विज्ञान कल्पना और पौराणिक कथाओं पर आधारित बड़े बजट की फिल्में बन रही हैं तब टाइम मशीन का अधूरा रह जाना एक बड़ी चूक माना जाता है। यदि यह फिल्म अपने समय में बन जाती तो संभव है कि भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में इसका नाम शामिल होता। वर्षों बाद सामने आए इन खुलासों ने एक बार फिर इस अधूरे ड्रीम प्रोजेक्ट को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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  • अक्षय खन्ना की दमदार एक्शन थ्रिलर जिसने सच्ची घटना को किया पर्दे पर जिंदा 7.5 रेटिंग वाली फिल्म आज भी जीत रही दिल

    अक्षय खन्ना की दमदार एक्शन थ्रिलर जिसने सच्ची घटना को किया पर्दे पर जिंदा 7.5 रेटिंग वाली फिल्म आज भी जीत रही दिल


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय खन्ना इन दिनों अपनी फिल्मों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी हालिया मौजूदगी के बाद दर्शक उनकी पुरानी फिल्मों को भी बड़े उत्साह से देख रहे हैं। अगर आप भी अक्षय खन्ना की दमदार एक्टिंग के प्रशंसक हैं और एक ऐसी फिल्म की तलाश में हैं जिसमें एक्शन रोमांच और देशभक्ति का बेहतरीन मिश्रण हो तो साल 2021 में रिलीज हुई स्टेट ऑफ सीज टेंपल अटैक आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती है। इस फिल्म को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली और इसे 7.5 की प्रभावशाली रेटिंग भी हासिल हुई।

    फिल्म की कहानी वर्ष 2002 में गुजरात के गांधीनगर स्थित अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकवादी हमले से प्रेरित है। 24 सितंबर 2002 को हुए इस हमले में आतंकवादियों ने मंदिर परिसर में अंधाधुंध फायरिंग कर कई निर्दोष लोगों की जान ले ली थी जबकि दर्जनों लोग घायल हुए थे। हालात बेहद गंभीर हो गए थे और इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी एनएसजी के कमांडोज ने ऑपरेशन चलाकर आतंकवादियों का सफाया किया और सैकड़ों लोगों की जान बचाई। फिल्म इसी साहसिक अभियान को सिनेमाई अंदाज में पेश करती है।

    स्टेट ऑफ सीज टेंपल अटैक की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी और निर्देशन है। निर्देशक केन घोष ने वास्तविक घटना के तनाव और भावनात्मक पहलुओं को प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारा है। हालांकि फिल्म में कुछ सिनेमाई बदलाव किए गए हैं लेकिन मूल घटना की गंभीरता और सुरक्षा बलों के साहस को पूरी ईमानदारी से दिखाया गया है। यही वजह है कि फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती बल्कि दर्शकों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ती है।

    फिल्म में अक्षय खन्ना ने मेजर हनुत सिंह के किरदार को बेहद प्रभावशाली ढंग से निभाया है। उन्होंने बिना किसी अतिनाटकीय अंदाज के केवल अपने शांत अभिनय और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस से एक अनुशासित और बहादुर कमांडो की छवि को जीवंत कर दिया है। उनके अभिनय को फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

    फिल्म के एक्शन दृश्य भी इसकी खास पहचान हैं। मंदिर परिसर के भीतर आतंकवादियों और एनएसजी कमांडोज के बीच होने वाली मुठभेड़ को बेहद वास्तविक अंदाज में फिल्माया गया है। हर दृश्य में तनाव और रोमांच का ऐसा माहौल बनता है जो दर्शकों को अंत तक स्क्रीन से बांधे रखता है। करीब 110 मिनट की यह फिल्म कहीं भी अपनी गति नहीं खोती और लगातार रोमांच बनाए रखती है।

    स्टेट ऑफ सीज टेंपल अटैक केवल एक एक्शन फिल्म नहीं बल्कि उन बहादुर सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि भी है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना निर्दोष लोगों की रक्षा की। फिल्म यह संदेश देती है कि देश की सुरक्षा में जुटे जवानों का साहस और समर्पण किसी भी चुनौती से बड़ा होता है।

    अगर आपको सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्में पसंद हैं और आप देशभक्ति के साथ दमदार एक्शन और सस्पेंस का अनुभव करना चाहते हैं तो स्टेट ऑफ सीज टेंपल अटैक जरूर देखनी चाहिए। अक्षय खन्ना का शानदार अभिनय और मजबूत कहानी इसे एक यादगार सिनेमाई अनुभव बनाते हैं।

  • जन नायगन विजय की आखिरी नहीं बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली फिल्म एच विनोद के बयान से बढ़ी हलचल

    जन नायगन विजय की आखिरी नहीं बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली फिल्म एच विनोद के बयान से बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली । साउथ सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म जन नायगन रिलीज से पहले ही सुर्खियों में बनी हुई है। लंबे समय से इस फिल्म को विजय के अभिनय करियर की आखिरी फिल्म माना जा रहा था लेकिन अब निर्देशक एच विनोद के एक बयान ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। उनका कहना है कि जन नायगन को विजय की अंतिम फिल्म के रूप में नहीं बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी पहली फिल्म के रूप में देखा जाना चाहिए। इस बयान के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

    एक इंटरव्यू में एच विनोद ने कहा कि जन नायगन केवल एक मसाला एंटरटेनर नहीं है बल्कि लोकतंत्र और राजनीति से जुड़े गंभीर विषयों पर आधारित फिल्म है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म का उद्देश्य केवल विजय को बड़े पर्दे पर नायक के रूप में पेश करना नहीं बल्कि उन चुनौतियों को सामने लाना है जिनका सामना लोकतंत्र करता है। उनके अनुसार फिल्म में लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकतों और उसकी रक्षा करने वालों के बीच संघर्ष को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है।

    निर्देशक ने दावा किया कि फिल्म का लगभग आधे घंटे का हिस्सा इतना मजबूत और विचारोत्तेजक है कि दर्शक उसे बार बार देखकर नए अर्थ निकाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस हिस्से में कई परतें हैं जिन्हें समझने में समय लगेगा और आने वाले वर्षों तक इस पर चर्चा होती रहेगी। उनका मानना है कि जन नायगन उन फिल्मों में शामिल होगी जिन्हें दस बीस या तीस साल बाद भी याद किया जाएगा।

    एच विनोद ने फिल्म से जुड़ा एक और दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जन नायगन की कहानी सबसे पहले विजय को नहीं बल्कि एक अन्य बड़े अभिनेता को सुनाई गई थी। हालांकि उन्होंने उस अभिनेता का नाम नहीं बताया। निर्देशक के अनुसार जब उन्होंने बताया कि यह एक राजनीतिक विषय पर आधारित फिल्म है तो उस अभिनेता ने इसे करने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद यह कहानी विजय तक पहुंची और उन्होंने इसे करने का फैसला लिया।

    फिल्म में आधुनिक युद्ध और बदलती वैश्विक परिस्थितियों को भी अहम स्थान दिया गया है। एच विनोद ने कहा कि आज की दुनिया में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते बल्कि ड्रोन तकनीक और आधुनिक हथियारों के जरिए भी संघर्ष होता है। फिल्म में इसी नए दौर की चुनौतियों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है जिससे यह सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि समकालीन मुद्दों पर आधारित फिल्म भी बन जाती है।

    निर्देशक ने यह भी स्वीकार किया कि फिल्म की रिलीज को लेकर वह काफी उत्साहित होने के साथ साथ चिंतित भी हैं। उनका कहना है कि यह सामान्य व्यावसायिक फिल्म नहीं है इसलिए इसकी तुलना किसी दूसरी फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से नहीं की जा सकती। फिल्म की रिलीज कई बार टल चुकी है और इसे संवेदनशील माहौल में रिलीज किया जा रहा है। इसके अलावा फिल्म को मिला ए सर्टिफिकेट भी उनके लिए चिंता का विषय है क्योंकि विजय की फिल्मों को बड़ी संख्या में बच्चे भी पसंद करते हैं।

    जन नायगन में विजय के साथ पूजा हेगड़े बॉबी देओल प्रकाश राज प्रियामणि ममिता बैजू गौतम वासुदेव मेनन और नारायण जैसे कई कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म 23 जुलाई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म मनोरंजन के साथ साथ राजनीति और समाज पर नई बहस भी छेड़ेगी।

  • नसीरुद्दीन शाह की अधूरी प्रेम कहानी पहली शादी से लेकर बेटी की अनदेखी तक आत्मकथा में किए भावुक खुलासे

    नसीरुद्दीन शाह की अधूरी प्रेम कहानी पहली शादी से लेकर बेटी की अनदेखी तक आत्मकथा में किए भावुक खुलासे


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपनी दमदार अदाकारी के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनकी निजी जिंदगी भी उतार चढ़ाव और भावनात्मक संघर्षों से भरी रही है। अपनी आत्मकथा एंड देन वन डे में अभिनेता ने पहली शादी पहली पत्नी परवीन मुराद बेटी हीबा और अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल को लेकर खुलकर बात की है। नसीरुद्दीन शाह ने स्वीकार किया कि कम उम्र में लिए गए फैसलों और अपरिपक्व सोच की वजह से वह न तो अच्छे पति बन पाए और न ही अच्छे पिता।

    नसीरुद्दीन शाह की पहली मुलाकात परवीन मुराद से उस समय हुई थी जब वह महज 19 साल के थे और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे। परवीन उनसे लगभग 15 वर्ष बड़ी थीं। वह तलाकशुदा थीं और पहले से दो बच्चों की मां भी थीं। उम्र और सामाजिक परिस्थितियों का अंतर होने के बावजूद दोनों एक दूसरे के करीब आए। नसीरुद्दीन शाह के अनुसार परवीन पहली ऐसी शख्स थीं जिन्होंने उनके भीतर छिपे अभिनेता पर भरोसा जताया और उनके सपनों को पहचान दी। यही विश्वास धीरे धीरे प्यार में बदल गया।

    हालांकि दोनों के रिश्ते को परिवारों की मंजूरी नहीं मिली। नसीरुद्दीन शाह के परिवार को परवीन के तलाकशुदा होने और दो बच्चों की मां होने पर आपत्ति थी जबकि परवीन के परिवार को दोनों की उम्र के बड़े अंतर और नसीरुद्दीन की कम उम्र को लेकर चिंता थी। विरोध के बावजूद दोनों ने शादी कर ली और अपने नए जीवन की शुरुआत की।

    शादी के करीब एक वर्ष बाद बेटी हीबा का जन्म हुआ लेकिन इस खुशी के साथ ही दोनों के रिश्ते में दूरियां बढ़ने लगीं। नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया कि उस समय वह पत्नी की भावनाओं को समझने में पूरी तरह असफल रहे। उन्होंने लिखा कि वह अपने अभिनय करियर और भविष्य को लेकर इतने व्यस्त थे कि परिवार और पत्नी की जरूरतों पर ध्यान ही नहीं दे सके। उन्होंने यह भी माना कि गर्भावस्था के दौरान वह पत्नी का साथ नहीं दे पाए और पिता बनने की जिम्मेदारी निभाने के लिए मानसिक रूप से तैयार भी नहीं थे।

    अभिनेता ने अपनी बेटी हीबा को लेकर भी बेहद भावुक स्वीकारोक्ति की है। उन्होंने लिखा कि कई वर्षों तक वह अपनी बेटी से भावनात्मक रूप से जुड़ ही नहीं पाए। उन्हें इस बात का आज भी गहरा पछतावा है कि उन्होंने पिता होने की जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लिया। नसीरुद्दीन शाह के अनुसार यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलतियों में से एक रही जिसका अफसोस उन्हें हमेशा रहेगा।

    पहली शादी टूटने के दौर में ही थिएटर के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री रत्ना पाठक से हुई। दोनों के बीच दोस्ती धीरे धीरे गहरे रिश्ते में बदल गई। परवीन मुराद से कानूनी रूप से अलग होने के बाद वर्ष 1982 में नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक ने विवाह किया। अभिनेता ने अपनी आत्मकथा में रत्ना पाठक को अपने जीवन का सबसे सच्चा प्रेम बताया है और स्वीकार किया कि उनके साथ उन्होंने रिश्तों की अहमियत को सही मायनों में समझा।

    नसीरुद्दीन शाह की यह कहानी केवल एक अभिनेता की निजी जिंदगी का किस्सा नहीं बल्कि इस बात की सीख भी देती है कि सफलता के पीछे भागते समय रिश्तों और परिवार की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करना जीवनभर का पछतावा बन सकता है। उनकी आत्मस्वीकृति यह साबित करती है कि गलतियों को स्वीकार करना भी साहस का सबसे बड़ा रूप होता है।

  • 11 साल की उम्र में मोहम्मद रफी संग गाया पहला गीत फिर नाम बदलते ही बॉलीवुड पर छा गईं पूर्णिमा

    11 साल की उम्र में मोहम्मद रफी संग गाया पहला गीत फिर नाम बदलते ही बॉलीवुड पर छा गईं पूर्णिमा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसी आवाजें उभरीं जिन्होंने फिल्मों को नई पहचान दी लेकिन कुछ कलाकार ऐसे भी रहे जिनकी कहानी उतनी चर्चा में नहीं आई जितनी उनकी गायकी। ऐसी ही एक मशहूर गायिका हैं सुषमा श्रेष्ठा जिन्होंने बेहद कम उम्र में अपनी मधुर आवाज से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया और बाद में पूर्णिमा नाम से बॉलीवुड की सफल पार्श्व गायिकाओं में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका सफर संघर्ष प्रतिभा और सफलता का शानदार उदाहरण माना जाता है।

    नेपाल में जन्मी सुषमा श्रेष्ठा को बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि थी। उनके परिवार के परिचितों के माध्यम से उनकी मुलाकात फिल्म संगीत जगत से हुई और उनकी प्रतिभा ने संगीतकारों को प्रभावित कर दिया। महज 11 वर्ष की उम्र में उन्हें हिंदी फिल्म अंदाज के लिए मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर के साथ गाने का अवसर मिला। यह उपलब्धि किसी भी बाल कलाकार के लिए बेहद बड़ी मानी जाती है। इसके बाद उन्होंने लगातार कई ऐसे गीत गाए जो आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं।

    बचपन में उन्होंने तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई क्या हुआ तेरा वादा तेरी है जमीन तेरा आसमान और एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल जैसे कई यादगार गीतों में अपनी आवाज दी। उनकी मासूम आवाज ने बच्चों पर आधारित गीतों को एक नई पहचान दी। उस दौर में जब अधिकतर बाल गीत बड़े गायक अपनी आवाज बदलकर गाते थे तब सुषमा श्रेष्ठा ने बाल गायिका के रूप में अलग स्थान बनाया।

    समय के साथ उन्होंने विवाह किया और कुछ वर्षों तक संगीत जगत से दूरी बना ली। इसके बाद 90 के दशक में जब उन्होंने दोबारा फिल्मों में वापसी की तो संगीत कंपनियों की सलाह पर उन्होंने अपना नाम बदलकर पूर्णिमा रख लिया। नाम बदलने के साथ उनकी नई पारी भी शानदार साबित हुई। उनकी आवाज ने उस दौर की कई बड़ी अभिनेत्रियों को नई पहचान दिलाई और वे बॉलीवुड की व्यस्त प्लेबैक सिंगर्स में शामिल हो गईं।

    पूर्णिमा ने जूही चावला के लिए तू तू तू तारा और माधुरी दीक्षित पर फिल्माए गए लोकप्रिय गीत चने के खेत में जैसे सुपरहिट गानों को अपनी आवाज दी। इसके बाद करिश्मा कपूर की फिल्मों में उनकी आवाज सबसे ज्यादा पसंद की गई। उन्होंने ऊंची है बिल्डिंग सोना कितना सोना है उई अम्मा उई अम्मा मैं पैदल से जा रहा था और मैं हूं बीवी नंबर वन जैसे कई लोकप्रिय गीत गाए जो आज भी लोगों की जुबान पर बने हुए हैं।

    पूर्णिमा की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आवाज की बहुमुखी शैली रही। वह रोमांटिक गीतों से लेकर डांस नंबर और बच्चों के गीतों तक हर शैली में सहज नजर आईं। यही वजह रही कि उन्होंने अलग अलग दौर की कई बड़ी अभिनेत्रियों को अपनी आवाज देकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी गायकी में मिठास ऊर्जा और भावनाओं का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।

    आज भी जब 70 और 90 के दशक के लोकप्रिय गीतों की चर्चा होती है तब पूर्णिमा का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची प्रतिभा समय और परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानती। एक बाल गायिका से लेकर सफल पार्श्व गायिका बनने तक का उनका सफर भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में प्रेरणादायक अध्याय के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

  • जंतर-मंतर पहुंचे प्रकाश राज ने उठाए बॉलीवुड की खामोशी पर सवाल, कहा- बड़े सितारों को भी जनता के मुद्दों पर बोलना चाहिए

    जंतर-मंतर पहुंचे प्रकाश राज ने उठाए बॉलीवुड की खामोशी पर सवाल, कहा- बड़े सितारों को भी जनता के मुद्दों पर बोलना चाहिए

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन और तेज हो गया। जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इस बीच सरकार की ओर से संवाद की पहल भी सामने आई, जिससे आंदोलन के समाधान की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई।

    प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों का दावा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उनसे मुलाकात कर उनकी बात सुनी। उनके अनुसार बातचीत की पहल सरकार की ओर से की गई थी। हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई और किसी सहमति पर बात बनी या नहीं, इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिर भी इस मुलाकात को आंदोलन के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    उधर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी संसद परिसर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक के एजेंडे का आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे नीट परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम और जारी विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष लगातार शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जिसके कारण यह मुद्दा संसद के भीतर भी प्रमुखता से उठ रहा है।

    विरोध प्रदर्शन की शुरुआत पिछले महीने जंतर-मंतर पर धरने के रूप में हुई थी। समय के साथ इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं की भागीदारी बढ़ती गई। आंदोलन के दौरान कुछ प्रतिनिधियों ने अनशन भी किया, जिससे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा मिली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च का आह्वान किया, जिसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।

    दिल्ली पुलिस ने बताया कि संसद मार्च के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियों ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। नई दिल्ली जिले में विशेष सतर्कता बरती गई तथा आसपास के जिलों से भी अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाए गए। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की तथा झड़प की घटनाएं भी सामने आईं, हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए लगातार निगरानी बनाए रखी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार और प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की शुरुआत सकारात्मक संकेत हो सकती है, लेकिन किसी ठोस समाधान तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों के बीच आगे भी संवाद जारी रहना आवश्यक होगा। दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठाकर सरकार से जवाब मांग रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विषय संसद और राजनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है। सरकार की अगली रणनीति और बातचीत के परिणाम पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • जंग के साए में कूटनीति, ट्रंप के दूत से मुलाकात को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने किए चौंकाने वाले दावे

    जंग के साए में कूटनीति, ट्रंप के दूत से मुलाकात को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने किए चौंकाने वाले दावे


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ हुई बातचीत को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ वार्ता ऐसे माहौल में हुई जहां किसी भी समय बमबारी शुरू होने का खतरा बना हुआ था। अराघची के इस बयान ने यह संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद भले जारी रहा हो लेकिन जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण और अस्थिर बने हुए थे।

    एक साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान विटकॉफ से सवाल किया था कि क्या वह कभी ऐसी वार्ता का हिस्सा बने हैं जहां हर पल हवाई हमले की आशंका बनी रहती हो। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बातचीत किस स्थान या किस दौर की थी लेकिन उनके बयान से उस समय की गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ईरानी विदेश मंत्री का कहना था कि युद्ध जैसे माहौल में भी बातचीत का रास्ता खुला रखना आसान नहीं होता।

    अराघची ने यह भी दोहराया कि ईरान किसी भी तरह के दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता केवल दबाव या धमकी के आधार पर नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की स्थिति की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती और उनका देश बाहरी दबाव में अपने फैसले नहीं बदलेगा।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पिछले कई महीनों से अलग-अलग स्तर पर बातचीत होती रही है। औपचारिक बैठकों के अलावा दोनों पक्षों के बीच सीधे संदेशों के जरिए भी संपर्क बनाए रखने की कोशिश की गई ताकि तनाव को कम किया जा सके। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और क्षेत्रीय घटनाक्रम ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है।

    इसी बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान से जुड़े कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अपने सैनिकों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। दूसरी ओर ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों और सैन्य हितों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। कुवैत बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों ने संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों को देखते हुए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती तनातनी अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल आपूर्ति के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।

    हालांकि कूटनीतिक संपर्क अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि बातचीत और सैन्य टकराव समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह संकट और गहरा होता है।