Category: Entertainment

  • रणवीर सिंह का बड़ा ऑफर भी नहीं चला: फरहान अख्तर ने 10 करोड़ रुपए और फीस में 25% छूट का प्रस्ताव ठुकराया!

    रणवीर सिंह का बड़ा ऑफर भी नहीं चला: फरहान अख्तर ने 10 करोड़ रुपए और फीस में 25% छूट का प्रस्ताव ठुकराया!


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में इन दिनों रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच चल रहा विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब इंडस्ट्री के सबसे चर्चित विवादों में शामिल हो चुका है। इसी बीच अब एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि रणवीर सिंह ने मामले को सुलझाने के लिए फरहान अख्तर की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट को बड़ा ऑफर दिया था, लेकिन फरहान और रितेश सिधवानी ने उसे स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च 2026 के पहले हफ्ते में रणवीर सिंह ने एक्सेल एंटरटेनमेंट को 10 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव रखा था। इतना ही नहीं उन्होंने भविष्य में किसी दूसरे प्रोजेक्ट में साथ काम करने की स्थिति में अपनी फीस में 25 प्रतिशत तक की कटौती करने की बात भी कही थी। बताया जा रहा है कि रणवीर इस विवाद को खत्म कर रिश्ते सुधारना चाहते थे, लेकिन एक्सेल एंटरटेनमेंट इस मामले में अपना फैसला पहले ही कर चुका था।

    खबरों के अनुसार फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी पिछले दो सालों में हुए घटनाक्रम से बेहद नाराज हैं। फिल्म की शूटिंग में लगातार देरी, बातचीत में अनिश्चितता और अचानक प्रोजेक्ट छोड़ने की वजह से उन्हें आर्थिक और प्रोफेशनल दोनों तरह का नुकसान झेलना पड़ा। यही कारण है कि उन्होंने रणवीर सिंह के इस ऑफर को ठुकरा दिया और भविष्य में उनके साथ काम नहीं करने का फैसला किया।

    दरअसल पूरा विवाद फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा हुआ है। साल 2023 में फरहान अख्तर ने रणवीर सिंह को नए डॉन के रूप में लॉन्च करते हुए फिल्म का टीजर जारी किया था। अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान के बाद रणवीर को इस आइकॉनिक किरदार में देखने को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा हुई थी। हालांकि कुछ फैंस इस फैसले से खुश नहीं थे, लेकिन रणवीर ने दर्शकों से उन्हें एक मौका देने की अपील की थी।

    इसके बाद अचानक खबर आई कि रणवीर सिंह फिल्म से बाहर हो गए हैं। बताया गया कि शूटिंग शुरू होने से महज तीन हफ्ते पहले उन्होंने प्रोजेक्ट छोड़ दिया। उस समय तक फिल्म का प्री-प्रोडक्शन काफी आगे बढ़ चुका था और इसी वजह से एक्सेल एंटरटेनमेंट को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

    FWICE यानी फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने भी इस मामले में दखल दिया। संगठन ने बताया कि फरहान अख्तर ने अप्रैल 2026 में उनके पास शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में दावा किया गया कि रणवीर सिंह ने एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था, लेकिन डॉन 3 छोड़ने से कंपनी को करीब 45 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। फरहान अख्तर ने इस नुकसान की भरपाई की मांग भी की है।

    इस पूरे विवाद के दौरान रणवीर सिंह की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि उनकी टीम ने पहले यह जरूर कहा था कि अभिनेता जानबूझकर चुप्पी बनाए हुए हैं। दूसरी तरफ इंडस्ट्री में रणवीर के बैन होने की खबरें भी सामने आई थीं, लेकिन बाद में साफ किया गया कि उन्हें आधिकारिक रूप से बैन नहीं किया गया है।

    अब देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है और क्या भविष्य में रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के रिश्ते फिर सामान्य हो पाएंगे या नहीं।

  • Friday Release: 29 मई को एंटरटेनमेंट का महाधमाका, 14 फिल्में-सीरीज होंगी रिलीज; थिएटर्स में 9 और OTT पर 5 की एंट्री

    Friday Release: 29 मई को एंटरटेनमेंट का महाधमाका, 14 फिल्में-सीरीज होंगी रिलीज; थिएटर्स में 9 और OTT पर 5 की एंट्री


    नई दिल्ली। मई महीने का आखिरी शुक्रवार सिनेप्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है। 29 मई 2026 को मनोरंजन की दुनिया में बड़ा धमाका होने जा रहा है क्योंकि इस दिन एक साथ 14 नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज हो रही हैं। खास बात यह है कि दर्शकों को इस बार थिएटर्स और ओटीटी दोनों प्लेटफॉर्म्स पर भरपूर कंटेंट मिलने वाला है। जहां 9 फिल्में बड़े पर्दे पर दस्तक देंगी वहीं 5 नई फिल्में और सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होकर दर्शकों का मनोरंजन करेंगी।

    ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इस शुक्रवार कई दिलचस्प कहानियां देखने को मिलेंगी। जियोहॉटस्टार पर रिलीज हो रही ‘कजिन्स एंड कल्याणम्स’ फैमिली ड्रामा और कॉमेडी का शानदार मिश्रण है। यह कहानी छह भाई-बहनों की जिंदगी और उनके रिश्तों के बदलते रंगों को दिखाती है। वहीं नेटफ्लिक्स पर ‘मर्डर माइंडफुली सीजन 2’ रिलीज हो रहा है जो डार्क कॉमेडी और क्राइम थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए खास होने वाला है। इस बार कहानी में अपराध से ज्यादा किरदार के मानसिक संघर्ष को दिखाया गया है।

    स्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए नेटफ्लिक्स की मिनी सीरीज ‘ब्राजील 70 द थर्ड स्टार’ भी खास आकर्षण होगी। यह सीरीज 1970 फुटबॉल वर्ल्ड कप में ब्राजील टीम की ऐतिहासिक जीत की कहानी बयां करती है। वहीं अमेजन प्राइम वीडियो पर ‘सुखमानो सुखमन्न’ रिलीज हो रही है जिसमें एक एम्बुलेंस ड्राइवर की अकेलेपन और मानसिक संघर्ष से भरी जिंदगी दिखाई गई है। इसके अलावा एक्शन थ्रिलर ‘लीडर’ भी दर्शकों को रोमांच से भरने के लिए तैयार है।

    अगर थिएटर रिलीज की बात करें तो इस शुक्रवार बड़े पर्दे पर हर तरह के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ मौजूद है। सस्पेंस और थ्रिल पसंद करने वालों के लिए ‘ऑब्सेस’ रिलीज हो रही है जिसमें एक महिला की जिंदगी में घटने वाली रहस्यमयी घटनाओं को दिखाया गया है। फैमिली ड्रामा ‘द ब्रेडविनर’ एक ऐसे पिता की कहानी है जिसे पहली बार घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है।

    हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए ‘पैसेंजर’ डर और रहस्य से भरी कहानी लेकर आ रही है। वहीं जैकी श्रॉफ और प्रतीक बब्बर स्टारर ‘द ग्रेट ग्रांड सुपरहीरो’ बच्चों और फैमिली ऑडियंस को पसंद आ सकती है। फिल्म में एक बच्चे को अपने दादाजी की जादुई ताकतों का पता चलता है जो दुनिया को बचा सकती हैं।

    आध्यात्मिक और बायोपिक कंटेंट पसंद करने वालों के लिए ‘श्री बाबा नीब करोरी महाराज’ रिलीज हो रही है जिसमें नीम करौली बाबा के जीवन सफर को दिखाया गया है। दूसरी तरफ ‘रजनी की बारात’ सामाजिक संदेश और रोमांटिक कॉमेडी का मिश्रण लेकर आ रही है। क्रिकेट और इमोशनल कहानी पसंद करने वालों के लिए ‘कृष्ण और चिट्ठी’ खास हो सकती है जिसमें खेल और आस्था का मेल देखने को मिलेगा।

    इसके अलावा ‘हीर सारा और पुडुचेरी’ दोस्ती और जिंदगी को नए नजरिए से देखने वाली रोड ट्रिप ड्रामा फिल्म है जबकि ‘जीना दिल से’ युवाओं के सपनों रोमांस और जिंदगी को खुलकर जीने की कहानी दिखाएगी।

    कुल मिलाकर 29 मई का शुक्रवार हर उम्र और हर पसंद के दर्शकों के लिए एंटरटेनमेंट का फुल पैकेज साबित होने वाला है। चाहे आप ओटीटी पर घर बैठे कंटेंट देखना पसंद करते हों या थिएटर में बड़े पर्दे का रोमांच महसूस करना चाहते हों इस शुक्रवार आपके पास विकल्पों की कोई कमी नहीं रहने वाली।

  • “परवीन बाबी को लगता था अमिताभ बच्चन उनकी हत्या करना चाहते हैं” – पूजा भट्ट का बड़ा खुलासा

    “परवीन बाबी को लगता था अमिताभ बच्चन उनकी हत्या करना चाहते हैं” – पूजा भट्ट का बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की सबसे ग्लैमरस और चर्चित अभिनेत्रियों में गिनी जाने वाली परवीन बाबी की जिंदगी जितनी चमकदार पर्दे पर नजर आती थी उतनी ही दर्द और अकेलेपन से भरी हुई असल जिंदगी में थी। अब अभिनेत्री पूजा भट्ट ने परवीन बाबी को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं जिन्होंने एक बार फिर बॉलीवुड के उस दर्दनाक दौर की याद दिला दी है।

    महेश भट्ट की बेटी और अभिनेत्री पूजा भट्ट ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में परवीन बाबी के आखिरी दिनों को याद करते हुए कहा कि वह मानसिक रूप से बेहद परेशान थीं। पूजा ने बताया कि उन्हें आज भी वह समय याद है जब परवीन बाबी को यह डर सताने लगा था कि अमिताभ बच्चन उन्हें मारना चाहते हैं।

    पूजा भट्ट ने पत्रकार विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब परवीन बाबी विदेश से लौटकर आई थीं तब वह स्टारडस्ट मैगजीन के ऑफिस में बैठकर लगातार जेरॉक्स मशीन का इस्तेमाल कर रही थीं और अमिताभ बच्चन के खिलाफ इंटरव्यू दे रही थीं। पूजा के मुताबिक परवीन बाबी को लगता था कि अमिताभ बच्चन अभी भी उनकी हत्या करना चाहते हैं।

    इतना ही नहीं पूजा ने यह भी खुलासा किया कि परवीन बाबी खाने-पीने की चीजों को लेकर बेहद डरी हुई रहती थीं। उन्हें शक था कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग उनके खाने में जहर मिला रहे हैं। यही वजह थी कि वह सिर्फ अंडे खाती थीं क्योंकि उन्हें वही सुरक्षित लगता था।

    हालांकि पूजा भट्ट ने यह भी साफ कहा कि वह डॉक्टर नहीं हैं इसलिए किसी बीमारी को लेकर दावा नहीं कर सकतीं लेकिन इतना जरूर था कि परवीन बाबी मानसिक रूप से ठीक नहीं थीं। बाद में जांच में सामने आया था कि वह सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं।

    परवीन बाबी और अमिताभ बच्चन ने साथ में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया था जिनमें दीवार अमर अकबर एंथोनी काला पत्थर शान और नमक हलाल जैसी फिल्में शामिल हैं। दोनों की ऑनस्क्रीन जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। एक समय उनके अफेयर की अफवाहें भी उड़ी थीं लेकिन दोनों कलाकारों ने इन खबरों को कभी स्वीकार नहीं किया।

    1980 के दशक में परवीन बाबी ने अमिताभ बच्चन के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अमिताभ बच्चन एक अंतरराष्ट्रीय गैंग का हिस्सा हैं और उनका अपहरण कर उनके कान में माइक्रोचिप लगाने की कोशिश की गई है। हालांकि जांच के दौरान अमिताभ बच्चन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।

    पूजा भट्ट ने परवीन बाबी के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि वह बेहद खूबसूरत और दिलदार इंसान थीं। पूजा ने बताया कि जब उनके पिता महेश भट्ट उन्हें परवीन बाबी के घर लेकर जाते थे तब वह हमेशा उन्हें प्यार से मिलती थीं और गिफ्ट दिया करती थीं। पूजा आज भी वह परफ्यूम नहीं भूल पाईं जो परवीन बाबी ने उन्हें दिया था।

    जनवरी 2005 में परवीन बाबी का निधन हो गया था। वह सिर्फ 50 साल की थीं। उनकी मौत ने पूरे फिल्म जगत को झकझोर दिया था। बताया जाता है कि उनका शव कई दिनों तक मुंबई के कूपर अस्पताल के मुर्दाघर में लावारिस पड़ा रहा था। बाद में महेश भट्ट आगे आए और उन्होंने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।

    परवीन बाबी की कहानी आज भी बॉलीवुड की सबसे दर्दनाक कहानियों में गिनी जाती है जहां शोहरत के पीछे छिपा अकेलापन और मानसिक संघर्ष साफ दिखाई देता है।

  • ‘अल्फा’ में आलिया भट्ट के एक्शन ने मचाया असर, बॉबी देओल बोले- मेहनत ने हर सीन को खास बनाया

    ‘अल्फा’ में आलिया भट्ट के एक्शन ने मचाया असर, बॉबी देओल बोले- मेहनत ने हर सीन को खास बनाया

    नई दिल्ली । बॉलीवुड में बदलते समय के साथ एक्शन फिल्मों का स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहा है और इसी कड़ी में फिल्म ‘अल्फा’ को एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। इस फिल्म में महिला केंद्रित एक्शन को बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया गया है, जिसमें आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाली हैं। फिल्म में बॉबी देओल भी एक महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं और रिलीज से पहले उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए फिल्म की टीम और विशेषकर आलिया भट्ट की परफॉर्मेंस की खुलकर सराहना की है।

    बॉबी देओल ने कहा कि उनके लिए यह अनुभव बेहद खास रहा क्योंकि उन्हें लंबे समय से आलिया भट्ट और रणबीर कपूर दोनों के साथ काम करने की इच्छा थी। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें रणबीर कपूर के साथ एक फिल्म में काम करने का अवसर मिला था और अब आलिया के साथ काम करना भी उनके करियर का एक यादगार अनुभव बन गया है। उन्होंने कहा कि दोनों कलाकार अपने काम को लेकर बेहद गंभीर हैं और सेट पर एक सकारात्मक माहौल बनाए रखते हैं, जिससे हर सीन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

    आलिया भट्ट की कार्यशैली की तारीफ करते हुए बॉबी देओल ने कहा कि वह अपने किरदार को समझने और उसे जीवंत बनाने के लिए पूरी मेहनत करती हैं। उनके अनुसार आलिया शूटिंग के दौरान हर सीन को बहुत ध्यान से समझती थीं और पूरी तैयारी के साथ सेट पर आती थीं। बॉबी ने यह भी बताया कि एक्शन फिल्मों में केवल शारीरिक ताकत ही नहीं बल्कि मानसिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी होती है और आलिया ने इस चुनौती को पूरी गंभीरता के साथ निभाया है।

    उन्होंने आगे कहा कि एक्शन सीन करना जितना स्क्रीन पर आसान दिखता है, असल में उतना ही कठिन होता है। इसमें लगातार अभ्यास, सही टाइमिंग और मानसिक संतुलन की आवश्यकता होती है। आलिया भट्ट ने हर सीन में खुद को पूरी तरह झोंक दिया और उनके समर्पण ने सभी को प्रभावित किया। बॉबी देओल के अनुसार यह फिल्म इस बात का उदाहरण है कि कैसे कलाकार अपने किरदार को वास्तविकता के करीब लाने के लिए मेहनत करते हैं।

    फिल्म ‘अल्फा’ को लेकर बॉबी देओल ने कहा कि भारतीय सिनेमा में इस तरह की फिल्में कम ही देखने को मिलती हैं, जहां महिला कलाकार बड़े पैमाने पर एक्शन करती नजर आएं। उन्होंने कहा कि यह फिल्म दर्शकों को एक नया अनुभव देने वाली है क्योंकि इसमें केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक मजबूत कहानी और नए विजुअल्स का मिश्रण है।

    उन्होंने यह भी कहा कि आज का दर्शक नई कहानियों और नए प्रयोगों को स्वीकार कर रहा है और ‘अल्फा’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। फिल्म में एक्शन के साथ-साथ भावनात्मक गहराई भी देखने को मिलेगी, जो इसे सामान्य एक्शन फिल्मों से अलग बनाती है।

    फिल्म का निर्देशन एक युवा निर्देशक द्वारा किया गया है और इसमें अनुभवी तथा नए कलाकारों का संतुलन देखने को मिलता है। यह फिल्म आगामी महीनों में सिनेमाघरों में रिलीज होगी और इससे दर्शकों को एक नई शैली और प्रस्तुति का अनुभव मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • नेहा धूपिया की अमृतसर यात्रा चर्चा में, स्वर्ण मंदिर दर्शन के साथ लोकल खाने का उठाया लुत्फ

    नेहा धूपिया की अमृतसर यात्रा चर्चा में, स्वर्ण मंदिर दर्शन के साथ लोकल खाने का उठाया लुत्फ


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा धूपिया इन दिनों अपनी निजी और आध्यात्मिक यात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में वह पंजाब के अमृतसर पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर में श्रद्धा के साथ मत्था टेका। यह यात्रा उनके लिए न केवल आध्यात्मिक अनुभव रही, बल्कि सांस्कृतिक और खानपान के लिहाज से भी बेहद खास साबित हुई। इस दौरान उनकी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह पूरी श्रद्धा और सादगी के साथ नजर आ रही हैं।

    अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में नेहा धूपिया ने सिर पर दुपट्टा ओढ़कर पवित्र सरोवर के पास खड़े होकर प्रार्थना की। उनके चेहरे पर दिखाई देने वाली शांति और भाव स्पष्ट रूप से उनकी आध्यात्मिक अनुभूति को दर्शाते हैं। मंदिर परिसर में बिताए गए इन पलों को उन्होंने बेहद निजी और भावनात्मक अनुभव के रूप में महसूस किया। इस दौरान ली गई तस्वीरों में उनकी सादगी और श्रद्धा साफ झलकती है, जिसे उनके प्रशंसकों ने भी काफी सराहा है।

    स्वर्ण मंदिर दर्शन के बाद नेहा धूपिया ने अमृतसर के स्थानीय स्वाद का भी आनंद लिया। उन्होंने शहर के मशहूर छोले-भटूरे का स्वाद चखा, जिसे वहां की पहचान माना जाता है। एक वीडियो में वह स्थानीय दुकान पर बैठकर पारंपरिक पंजाबी व्यंजन का आनंद लेते हुए दिखाई दीं। उनके चेहरे की मुस्कान और सहजता इस बात का संकेत देती है कि उन्हें यह अनुभव बेहद पसंद आया। इसके अलावा उन्होंने शहर की गलियों में घूमते हुए अन्य स्थानीय व्यंजनों और माहौल को भी करीब से महसूस किया।

    अपनी इस यात्रा को उन्होंने खास बताते हुए कहा कि हर पल यादगार रहा। तस्वीरों और वीडियो में वह कभी गंभीर भाव में प्रार्थना करती नजर आती हैं, तो कभी हल्के-फुल्के अंदाज में पोज देती दिखाई देती हैं। यह संतुलन उनकी यात्रा को और भी प्राकृतिक और वास्तविक बनाता है, जिससे दर्शकों को भी उनकी यह यात्रा जुड़ी हुई महसूस होती है।

    यह पहली बार नहीं है जब नेहा धूपिया किसी धार्मिक स्थल पर पहुंची हों। इससे पहले भी वह विभिन्न आध्यात्मिक स्थानों पर दर्शन और सेवा कार्यों में भाग ले चुकी हैं। उनकी यह यात्राएं अक्सर उनके निजी जीवन में शांति और संतुलन के पहलू को दर्शाती हैं।

    नेहा धूपिया ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में मॉडलिंग से की थी और मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों और टेलीविजन प्रोजेक्ट्स में काम कर अपनी अलग पहचान बनाई। अभिनय के साथ-साथ वह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय हैं और विभिन्न शो के माध्यम से दर्शकों से जुड़ी रहती हैं।

    उनकी यह अमृतसर यात्रा एक बार फिर यह दिखाती है कि व्यस्त फिल्मी जीवन के बावजूद वह अपने लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों को भी महत्व देती हैं। स्वर्ण मंदिर में उनका यह दौरा और पंजाबी व्यंजनों के प्रति उनका आकर्षण दोनों ही उनकी इस यात्रा को यादगार बनाते हैं।

  • राजस्थान के मांगणियार मुस्लिम कलाकारों की कृष्ण भक्ति परंपरा ने संगीत जगत में रचा सांस्कृतिक एकता का अनोखा अध्याय

    राजस्थान के मांगणियार मुस्लिम कलाकारों की कृष्ण भक्ति परंपरा ने संगीत जगत में रचा सांस्कृतिक एकता का अनोखा अध्याय

    नई दिल्ली । राजस्थान की लोकसंगीत परंपरा में मांगणियार समुदाय का नाम विशेष सम्मान और सांस्कृतिक गौरव के साथ लिया जाता है। यह समुदाय सदियों से अपनी अनोखी संगीत साधना और पारंपरिक गायन शैली के लिए जाना जाता है, जिसने उन्हें न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई है। इन कलाकारों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनकी संगीत यात्रा की शुरुआत धार्मिक सीमाओं से परे जाकर कृष्ण भजनों और मीराबाई के पदों से होती है, जो भारतीय संस्कृति की गहरी एकता और समरसता को दर्शाती है।

    मांगणियार समुदाय राजस्थान के उन क्षेत्रों से जुड़ा रहा है जहां लोकसंस्कृति और दरबारी परंपराओं का गहरा प्रभाव रहा है। ऐतिहासिक रूप से ये कलाकार राजपूत शासकों और जमींदार परिवारों के संरक्षण में रहते हुए दरबारी संगीतकार के रूप में अपनी सेवाएं देते थे। उस दौर में अधिकांश संरक्षक परिवार कृष्ण भक्ति से जुड़े थे, जिसके कारण सुबह के समय भजन गायन की परंपरा विकसित हुई। यह परंपरा समय के साथ केवल एक धार्मिक अभ्यास न रहकर एक सांस्कृतिक पहचान बन गई और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही।

    आज भी यह परंपरा जीवित है जहां मांगणियार कलाकार अपने दैनिक अभ्यास की शुरुआत पारंपरिक रीति से करते हैं। वे अपने वाद्य यंत्रों के साथ जब रियाज शुरू करते हैं, तो सबसे पहले कृष्ण भक्ति और मीरा के पदों की गूंज सुनाई देती है। यह अभ्यास केवल संगीत की तैयारी नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन भी माना जाता है, जो उनकी गायकी को गहराई और आत्मीयता प्रदान करता है। इसी परंपरा ने राजस्थान के लोकसंगीत को एक ऐसा स्वरूप दिया है जो धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानी भावनाओं को जोड़ता है।

    मांगणियार कलाकारों की यह संगीत परंपरा समय के साथ व्यापक मंचों तक पहुंची है। लोकधुनों और पारंपरिक गायकी की यह शैली अब फिल्मी संगीत और आधुनिक प्रस्तुतियों में भी अपनी जगह बना चुकी है। इस समुदाय के कई कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान बनाई है। उनकी गायकी में राजस्थान की मिट्टी की सादगी, लोकधुनों की गहराई और सांस्कृतिक विरासत की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    इस परंपरा की सबसे बड़ी ताकत इसकी पीढ़ीगत शिक्षा प्रणाली है, जिसमें बच्चे बचपन से ही संगीत की बारीकियां सीखना शुरू कर देते हैं। घरों में ही उन्हें राग, ताल और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की शिक्षा दी जाती है, जिससे उनकी कला में स्वाभाविक निखार आता है। यह निरंतर अभ्यास और पारिवारिक परंपरा ही उनकी गायकी को विशिष्ट बनाती है और उसे वैश्विक मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    आज मांगणियार संगीत केवल एक क्षेत्रीय परंपरा नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है। कृष्ण भजनों से शुरू होकर आधुनिक मंचों तक पहुंचने वाली यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि संगीत न केवल कला है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और एकता का संदेश देने का भी माध्यम है।

  • रणवीर सिंह के डॉन-3 से बाहर होने पर बढ़ा विवाद, FWICE ने स्पष्ट किया- यह बैन नहीं बल्कि असहयोग नोटिस

    रणवीर सिंह के डॉन-3 से बाहर होने पर बढ़ा विवाद, FWICE ने स्पष्ट किया- यह बैन नहीं बल्कि असहयोग नोटिस

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म डॉन-3 से जुड़े विवाद ने फिल्म इंडस्ट्री में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अभिनेता के अचानक प्रोजेक्ट से बाहर होने की खबर सामने आने के बाद जहां सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, वहीं अब फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने इस पूरे मामले पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। संस्था की ओर से कहा गया है कि रणवीर सिंह पर किसी प्रकार का बैन नहीं लगाया गया है और उनके खिलाफ चल रही खबरें गलत और भ्रामक हैं।

    संस्था के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने बयान जारी करते हुए कहा कि FWICE कोई न्यायिक संस्था नहीं है और न ही यह किसी कलाकार पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार रखती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की ओर से केवल असहयोग नोटिस जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि मौजूदा परिस्थितियों में सदस्यों को संबंधित अभिनेता के साथ काम करने से फिलहाल परहेज करने की सलाह दी गई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई स्थायी फैसला नहीं है और परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव संभव है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब रणवीर सिंह के डॉन-3 से अचानक अलग होने की खबरें सामने आईं। बताया जा रहा है कि फिल्म से जुड़े कई प्री-प्रोडक्शन कार्य पूरे हो चुके थे और बड़े स्तर पर शूटिंग की तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। ऐसे में अभिनेता के प्रोजेक्ट छोड़ने के फैसले ने निर्माताओं और पूरी टीम को असमंजस की स्थिति में डाल दिया। इस बदलाव के कारण आर्थिक और प्रोडक्शन स्तर पर असर पड़ने की बात भी सामने आई है, जिससे इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है।

    FWICE ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस तरह की परिस्थितियां फिल्म निर्माण प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती हैं। बड़े बजट की फिल्मों में जब प्रमुख कलाकार अचानक किसी प्रोजेक्ट से हटते हैं तो इसका असर केवल फिल्म तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे कई विभागों की योजनाएं प्रभावित होती हैं। संस्था ने इसे उद्योग के लिए संवेदनशील मुद्दा बताया है और संतुलित समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    संस्था ने यह भी दावा किया कि इस मामले को लेकर रणवीर सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं दूसरी ओर अभिनेता की टीम ने इस मुद्दे को FWICE के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। इसके बावजूद संगठन का कहना है कि बातचीत के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं और आपसी समझौते की संभावना बनी हुई है।

    बॉलीवुड में अनुबंध और पेशेवर प्रतिबद्धता को हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि बड़े प्रोजेक्ट्स में कई स्तरों पर निवेश और तैयारी शामिल होती है। ऐसे में किसी भी बड़े बदलाव का असर पूरी टीम पर पड़ता है। यही कारण है कि यह मामला केवल एक फिल्म से जुड़ा विवाद न रहकर इंडस्ट्री स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में यह विवाद सुलझता है या और आगे बढ़ता है।

  • बॉलीवुड के ‘मैं तेरा’ गानों का जादू बरकरार, रोमांस से लेकर मस्ती तक हर दौर में बना दर्शकों की पहली पसंद

    बॉलीवुड के ‘मैं तेरा’ गानों का जादू बरकरार, रोमांस से लेकर मस्ती तक हर दौर में बना दर्शकों की पहली पसंद


    नई दिल्ली । सहित पूरे देश में बॉलीवुड संगीत की लोकप्रियता समय के साथ लगातार बदलती रही है, लेकिन कुछ शब्द ऐसे हैं जिन्होंने हर दौर में अपनी खास पहचान बनाए रखी है। इन्हीं में से एक है ‘मैं तेरा’, जो सिर्फ एक वाक्यांश नहीं बल्कि हिंदी फिल्म संगीत में भावनाओं, रिश्तों और मनोरंजन की एक पूरी श्रृंखला का प्रतीक बन चुका है। 90 के दशक से लेकर आज तक इस थीम पर आधारित कई गाने अलग-अलग अंदाज में सामने आए और दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाने में सफल रहे। इन गीतों की खासियत यह रही कि हर बार इनका अंदाज नया रहा, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव हमेशा बरकरार रहा।

    बॉलीवुड के शुरुआती दौर में ‘मैं तेरा’ जैसी पंक्तियों पर आधारित गीतों ने हल्के-फुल्के रोमांस और मस्ती भरे संगीत को दर्शकों तक पहुंचाया। उस समय के गानों में सरल शब्दों और आकर्षक धुनों का प्रयोग किया जाता था, जिससे वे आसानी से लोगों की जुबान पर चढ़ जाते थे। धीरे-धीरे जैसे फिल्मी संगीत ने आधुनिकता की ओर कदम बढ़ाया, वैसे ही इन शब्दों का उपयोग भी अधिक विविध और रचनात्मक रूप में होने लगा। यह बदलाव न केवल संगीत की शैली में दिखा, बल्कि गीतों के विषय और प्रस्तुति में भी स्पष्ट रूप से नजर आया।

    समय के साथ जब युवा दर्शकों की पसंद बदली तो ‘मैं तेरा’ थीम पर आधारित गानों में भी तेज म्यूजिक, पार्टी वाइब और आधुनिक लिरिक्स का समावेश हुआ। इन गानों ने न केवल रोमांस को नए अंदाज में पेश किया बल्कि दोस्ती, जुनून और मनोरंजन के रंगों को भी साथ जोड़ा। कुछ गीतों ने प्रेम और समर्पण को केंद्र में रखा, तो कुछ ने हल्के-फुल्के मजाकिया अंदाज में रिश्तों की गहराई को दिखाया। इसी विविधता के कारण ये गाने हर पीढ़ी के दर्शकों के बीच लोकप्रिय होते चले गए।

    फिल्मी दुनिया में जब डिजिटल युग की शुरुआत हुई, तब इन गानों की लोकप्रियता और भी बढ़ गई। सोशल प्लेटफॉर्म और म्यूजिक प्लेलिस्ट के दौर में ‘मैं तेरा’ जैसे गानों को नई पहचान मिली और ये युवाओं के बीच ट्रेंड करने लगे। इन गीतों की खास बात यह रही कि इनमें इस्तेमाल होने वाले शब्द सरल होने के बावजूद भावनात्मक रूप से बहुत प्रभावशाली थे, जिससे लोग आसानी से उनसे जुड़ पाते थे।

    आज भी जब पुराने और नए बॉलीवुड संगीत की बात होती है तो ‘मैं तेरा’ थीम पर आधारित गीतों को विशेष रूप से याद किया जाता है। ये गाने केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहे, बल्कि प्रेम, अपनापन और रिश्तों की गहराई को व्यक्त करने का एक मजबूत माध्यम भी बने हैं। समय बदलने के बावजूद इन गीतों की लोकप्रियता यह साबित करती है कि सरल और भावनात्मक शब्द हमेशा दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखते हैं और लंबे समय तक संगीत की दुनिया में अपनी छाप छोड़ते हैं।

  • छोटे कद पर तानों ने तोड़ी रिश्ते की डोर, दो साल बाद मंगेतर ने छोड़ा साथ, पहली बार छलका अब्दू रोजिक का दर्द

    छोटे कद पर तानों ने तोड़ी रिश्ते की डोर, दो साल बाद मंगेतर ने छोड़ा साथ, पहली बार छलका अब्दू रोजिक का दर्द

    नई दिल्ली । लोकप्रिय सिंगर और टीवी स्टार अब्दू रोजिक ने पहली बार अपनी निजी जिंदगी के उस दर्दनाक अध्याय का खुलासा किया है, जिसने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था। अपनी पहचान, लोकप्रियता और सफलता के बावजूद अब्दू को निजी रिश्तों में ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें लंबे समय तक मानसिक तनाव और अकेलेपन में धकेल दिया। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी टूटी सगाई और उससे जुड़े भावनात्मक संघर्षों को लेकर खुलकर बातचीत की।

    अब्दू रोजिक ने बताया कि उनकी सगाई लगभग दो वर्षों तक चली, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां इतनी कठिन होती गईं कि रिश्ता टूटने की नौबत आ गई। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके छोटे कद और बीमारी को लेकर लगातार होने वाली टिप्पणियों और सामाजिक तानों का असर केवल उन पर ही नहीं, बल्कि उनकी मंगेतर पर भी पड़ा। समय के साथ यह दबाव इतना बढ़ गया कि दोनों के रिश्ते में दूरियां आने लगीं।

    उन्होंने कहा कि लोगों की सोच और समाज का रवैया कई बार किसी इंसान की निजी जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर देता है। अब्दू के मुताबिक, उनकी मंगेतर लगातार इस बात से परेशान रहने लगी थीं कि लोग उनके रिश्ते को लेकर मजाक बनाते थे। सार्वजनिक जीवन में रहने के कारण यह स्थिति और ज्यादा कठिन हो गई थी। हर जगह होने वाली चर्चा, ट्रोलिंग और व्यक्तिगत टिप्पणियों ने रिश्ते की मजबूती को कमजोर कर दिया। आखिरकार दोनों ने अलग होने का फैसला लिया।

    अब्दू ने यह भी स्वीकार किया कि सगाई टूटने के बाद वह मानसिक रूप से काफी टूट गए थे। उन्होंने लंबे समय तक खुद को अकेला महसूस किया और डिप्रेशन जैसी स्थिति से गुजरना पड़ा। हालांकि उन्होंने अपने परिवार और करीबी लोगों के सहयोग से धीरे-धीरे खुद को संभाला। उन्होंने कहा कि जिंदगी में सफलता मिलने के बावजूद इंसान भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ सकता है और रिश्तों का टूटना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोग अक्सर किसी व्यक्ति के बाहरी रूप या शारीरिक स्थिति को देखकर राय बना लेते हैं, जबकि असली संघर्ष और दर्द को समझने की कोशिश बहुत कम लोग करते हैं। अब्दू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समाज को संवेदनशील होने की जरूरत है, क्योंकि मजाक और ताने कई बार किसी व्यक्ति के आत्मविश्वास और निजी जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

    अब्दू रोजिक की यह कहानी केवल एक सेलिब्रिटी के टूटे रिश्ते की नहीं, बल्कि उन लोगों की भावनाओं को भी सामने लाती है जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि प्यार और रिश्तों में सबसे ज्यादा जरूरी समझ, सम्मान और भावनात्मक सहयोग होता है। यदि समाज बाहरी चीजों के बजाय इंसानियत को महत्व दे, तो कई रिश्ते टूटने से बच सकते हैं।

    अपने संघर्षों के बावजूद अब्दू ने सकारात्मक सोच बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि कठिन समय इंसान को मजबूत बनाता है और अब वह अपने करियर तथा भविष्य पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं। उनकी इस भावुक कहानी ने उनके प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया है और कई लोग सोशल मीडिया पर उनके साहस और ईमानदारी की सराहना कर रहे हैं।

  • मोहम्मद रफी के गीत ने बदली इंदिरा गांधी की भावनाएं टैक्स फ्री हुई फिल्म नौनिहाल

    मोहम्मद रफी के गीत ने बदली इंदिरा गांधी की भावनाएं टैक्स फ्री हुई फिल्म नौनिहाल


    नई दिल्ली । भारत के सिनेमा इतिहास में कुछ घटनाएं ऐसी रही हैं जो आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है महान गायक मोहम्मद रफी की मखमली और भावनाओं से भरी आवाज से। यह किस्सा फिल्म नौनिहाल से जुड़ा है जिसे सुनकर उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भावुक हो उठी थीं और उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। इसी भावनात्मक अनुभव के बाद फिल्म को पूरे देश में टैक्स फ्री कर दिया गया था।

    साठ के दशक का समय हिंदी सिनेमा में संगीत का स्वर्ण युग माना जाता है। इस दौर में मोहम्मद रफी की आवाज ने लाखों दिलों पर राज किया। उनकी गायकी में ऐसा दर्द और ऐसा जादू था जो सीधे दिल को छू लेता था। जब भी किसी फिल्म में गहरे भावनात्मक गीत की जरूरत होती थी तो निर्माता और संगीतकार सबसे पहले रफी साहब को याद करते थे। उनकी आवाज में वह शक्ति थी जो कहानी को जीवंत बना देती थी।

    फिल्म नौनिहाल के निर्माता सावन कुमार टाक थे। वे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से बहुत प्रभावित थे। जब 27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू के निधन की खबर आई तो वे गहरे दुख में डूब गए। उन्होंने तय किया कि वे नेहरू को श्रद्धांजलि देने के लिए एक फिल्म बनाएंगे। इस सोच से फिल्म नौनिहाल की शुरुआत हुई। इस फिल्म की कहानी एक अनाथ बच्चे के इर्द गिर्द घूमती है जो अपने जीवन में एक बड़ी यात्रा पर निकलता है और भावनात्मक मोड़ से गुजरता है।

    फिल्म के लिए एक ऐसा गीत चाहिए था जो दर्शकों के दिल को झकझोर दे। गीतकार कैफी आजमी ने इस भावनात्मक गीत को लिखा। जब इस गीत को आवाज देने की बात आई तो मोहम्मद रफी का नाम चुना गया। रफी साहब ने जब इस गीत को अपनी आवाज दी तो उसमें एक गहरी संवेदना और दर्द समा गया।

    फिल्म रिलीज से पहले सावन कुमार टाक ने इसे टैक्स फ्री कराने के लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की। इंदिरा गांधी ने फिल्म देखने से पहले कहा कि वे कोई गीत सुनना चाहेंगी। इसके बाद सावन कुमार ने टेप रिकॉर्डर पर रफी की आवाज में वह गीत सुनाया। जैसे ही गीत बजना शुरू हुआ पूरा माहौल भावनाओं से भर गया।

    गीत की पंक्तियां सुनते सुनते इंदिरा गांधी अपने पिता जवाहरलाल नेहरू की यादों में खो गईं। उनकी आंखें नम हो गईं और वे कुछ देर के लिए बहुत भावुक हो गईं। कुछ समय बाद वे अपने केबिन में चली गईं। इस भावनात्मक अनुभव के बाद फिल्म को पूरे देश में टैक्स फ्री करने का निर्णय लिया गया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भावनाओं की गहराई तक पहुंचने वाली शक्ति है और मोहम्मद रफी की आवाज उस शक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण रही है।