Category: Entertainment

  • राजकुमार राव बने 'दादा', सौरव गांगुली की बायोपिक का दमदार पहला पोस्टर जारी, लॉर्ड्स की ऐतिहासिक जीत का पल फिर होगा जीवंत

    राजकुमार राव बने 'दादा', सौरव गांगुली की बायोपिक का दमदार पहला पोस्टर जारी, लॉर्ड्स की ऐतिहासिक जीत का पल फिर होगा जीवंत


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में शामिल सौरव गांगुली की जीवन यात्रा अब बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी। उनके जन्मदिन के अवसर पर बहुप्रतीक्षित बायोपिक ‘दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी’ का पहला पोस्टर जारी किया गया, जिसने क्रिकेट और सिनेमा प्रेमियों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। फिल्म में अभिनेता राजकुमार राव सौरव गांगुली की भूमिका निभा रहे हैं और उनका पहला लुक सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    जारी पोस्टर में राजकुमार राव को गांगुली के करियर के सबसे यादगार क्षणों में से एक को दोहराते हुए दिखाया गया है। पोस्टर में वह वर्ष 2002 के नेटवेस्ट सीरीज फाइनल में भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद लॉर्ड्स की बालकनी में शर्ट लहराकर जश्न मनाते नजर आते हैं। यह दृश्य भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित पलों में गिना जाता है और आज भी प्रशंसकों के बीच विशेष पहचान रखता है।

    राजकुमार राव ने फिल्म का पहला पोस्टर साझा करते हुए सौरव गांगुली को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पोस्टर में बड़े अक्षरों में ‘DADA’ शीर्षक के साथ फिल्म का उपशीर्षक ‘The Sourav Ganguly Story’ भी दिखाई देता है। इसके साथ दी गई टैगलाइन इस बात का संकेत देती है कि फिल्म केवल एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट में आए बदलाव की यात्रा को भी दर्शाएगी।

    सौरव गांगुली ने भी इस पोस्टर को अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा करते हुए खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे अपने लिए अब तक का सबसे खास जन्मदिन का उपहार बताया और राजकुमार राव को पर्दे पर अपना प्रसिद्ध कवर ड्राइव खेलते देखने की उत्सुकता भी व्यक्त की। उनके इस संदेश को प्रशंसकों ने भी काफी पसंद किया।

    फिल्म में सौरव गांगुली की पत्नी डोना गांगुली की भूमिका अभिनेत्री तान्या मानिकतला निभाएंगी। तान्या इससे पहले कई चर्चित फिल्मों और वेब सीरीज में अपने अभिनय का प्रभाव छोड़ चुकी हैं। फिल्म के अन्य कलाकारों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन निर्माता जल्द ही आगे की घोषणाएं कर सकते हैं।

    इस बायोपिक का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवाने कर रहे हैं, जिन्हें अलग विषयों पर प्रभावशाली फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। फिल्म का निर्माण लव रंजन और अंकुर गर्ग के बैनर तले किया जा रहा है। निर्माताओं का उद्देश्य सौरव गांगुली के शुरुआती संघर्ष, भारतीय टीम में उनकी एंट्री, कप्तानी के दौर, युवा खिलाड़ियों को अवसर देने की सोच और भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाने वाले उनके योगदान को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना है।

    सौरव गांगुली को भारतीय क्रिकेट के उस कप्तान के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने टीम में आक्रामक सोच, आत्मविश्वास और जीत का नया जज्बा पैदा किया। उनके नेतृत्व में कई युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई और भारतीय टीम ने विदेशी धरती पर भी मजबूत प्रदर्शन करना शुरू किया। यही कारण है कि उनकी जीवन यात्रा पर आधारित इस फिल्म को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में विशेष उत्सुकता बनी हुई है।

    निर्माताओं ने घोषणा की है कि ‘दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी’ 14 मई 2027 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म से जुड़ी आगामी झलकियों और ट्रेलर का इंतजार अब दर्शकों के बीच और भी बढ़ गया है।

  • तलाक के बाद नई शुरुआत को तैयार आकांक्षा चमोला, 'लॉक अप 2' में बताया क्यों नहीं करेंगी दूसरी शादी

    तलाक के बाद नई शुरुआत को तैयार आकांक्षा चमोला, 'लॉक अप 2' में बताया क्यों नहीं करेंगी दूसरी शादी


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री आकांक्षा चमोला ने अपने वैवाहिक जीवन के बाद शुरू होने वाले नए सफर को लेकर पहली बार विस्तार से अपनी सोच साझा की है। रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह अपनी जिंदगी अपने फैसलों के साथ जीना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल दोबारा शादी करने की उनकी कोई इच्छा नहीं है और वह अपने जीवन के इस नए अध्याय को पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर आगे बढ़ाना चाहती हैं।

    शो के दौरान एक बातचीत में आकांक्षा ने बताया कि उन्होंने काफी कम उम्र में विवाह किया था। उनके अनुसार उस समय वह केवल 24 वर्ष की थीं। जीवन के विभिन्न अनुभवों से गुजरने के बाद अब उनकी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं और वह अपने भविष्य को अलग नजरिए से देख रही हैं। उन्होंने कहा कि अब वह स्वयं को बेहतर तरीके से समझ चुकी हैं और जीवन में स्वतंत्र पहचान बनाने पर ध्यान देना चाहती हैं।

    बातचीत के दौरान जब उनसे भविष्य में नया जीवनसाथी मिलने की संभावना का जिक्र किया गया तो उन्होंने बिना किसी झिझक के कहा कि वह दोबारा शादी नहीं करना चाहतीं। उनके अनुसार अब वह उस पड़ाव से आगे बढ़ चुकी हैं और फिलहाल अपना जीवन अकेले और अपनी शर्तों पर जीने में ही संतुष्टि महसूस करती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि उनके लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता इस समय सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

    आकांक्षा ने यह भी बताया कि यह उनके जीवन का ऐसा दौर होगा जब वह पहली बार पूरी तरह अपने दम पर रहेंगी। उन्होंने कहा कि अब वह न तो अपने माता-पिता के घर में रहेंगी और न ही पति के घर में, बल्कि अपने स्वयं के घर में नई शुरुआत करेंगी। उनके मुताबिक यह बदलाव उनके लिए केवल रहने की जगह बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास और व्यक्तिगत पहचान को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

    इससे पहले शो के प्रीमियर एपिसोड में आकांक्षा ने अपने वैवाहिक जीवन को लेकर भी खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि वह और गौरव खन्ना पिछले लगभग एक वर्ष से अलग रह रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों के रिश्ते में किसी प्रकार की कटुता नहीं है और अलग होने का फैसला आपसी सहमति से लिया गया है। उन्होंने कहा कि आज भी दोनों के बीच सम्मान और संवाद बना हुआ है।

    आकांक्षा के इस खुलासे के बाद गौरव खन्ना ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि अलग होने के बावजूद दोनों के बीच सम्मान, स्नेह और एक-दूसरे के प्रति सहयोग की भावना बरकरार है। उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों ने अपने निजी निर्णय को परिपक्वता और आपसी समझ के साथ स्वीकार किया है।

    आकांक्षा चमोला के ताजा बयान को उनके प्रशंसक जीवन की नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने जिस आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजनाओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर दिया है, उससे यह संदेश भी सामने आता है कि जीवन में बड़े बदलावों के बाद भी सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ा जा सकता है। फिलहाल वह अपने करियर और व्यक्तिगत जीवन के नए अध्याय पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की तैयारी में हैं।

  • अंशुला कपूर-रोहन ठक्कर के वेडिंग रिसेप्शन में सजा बॉलीवुड का भव्य जमावड़ा, रेखा से जाह्नवी कपूर तक सितारों ने बिखेरा ग्लैमर

    अंशुला कपूर-रोहन ठक्कर के वेडिंग रिसेप्शन में सजा बॉलीवुड का भव्य जमावड़ा, रेखा से जाह्नवी कपूर तक सितारों ने बिखेरा ग्लैमर

    नई दिल्ली । अंशुला कपूर और रोहन ठक्कर की शादी के बाद मुंबई स्थित ताज लैंड्स एंड में आयोजित वेडिंग रिसेप्शन बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी से बेहद खास बन गया। कपूर परिवार के इस समारोह में फिल्म जगत के कई दिग्गज कलाकार, निर्माता और अन्य चर्चित हस्तियां शामिल हुईं। पारंपरिक परिधानों और आकर्षक अंदाज में पहुंचे मेहमानों ने शाम की रौनक बढ़ा दी। नवविवाहित जोड़े ने भी सभी मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया और पैपराजी के सामने मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवाईं।

    रिसेप्शन में अंशुला कपूर लाल बनारसी साड़ी और एमराल्ड ज्वेलरी में बेहद आकर्षक नजर आईं। उनके पारंपरिक लुक ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं रोहन ठक्कर ब्लैक शेरवानी में दिखाई दिए और दोनों की जोड़ी समारोह का मुख्य आकर्षण रही। दोनों ने पूरे आत्मविश्वास और खुशी के साथ मेहमानों का अभिवादन किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में हैं।

    बेटी के इस खास अवसर पर बोनी कपूर भी अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने कोरल पिंक रंग का सूट पहना और पूरे समारोह के दौरान मेहमानों का स्वागत करते दिखाई दिए। उनके चेहरे पर बेटी की शादी की खुशी साफ झलक रही थी। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी समारोह में सक्रिय भागीदारी निभाई और नवविवाहित जोड़े के साथ यादगार पल साझा किए।

    रिसेप्शन में जाह्नवी कपूर ने पेस्टल रंग की साड़ी और पारंपरिक आभूषणों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं शनाया कपूर ग्लैमरस लहंगे में नजर आईं और उनका स्टाइल भी चर्चा का विषय बना रहा। दोनों के फैशन लुक को समारोह में मौजूद लोगों और फोटोग्राफरों ने खासा पसंद किया। कपूर परिवार की नई पीढ़ी के इन सितारों ने अपने सादगीपूर्ण लेकिन आकर्षक अंदाज से महफिल में अलग पहचान बनाई।

    दिग्गज अभिनेत्री रेखा भी नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं देने पहुंचीं। उनकी मौजूदगी ने समारोह की भव्यता को और बढ़ा दिया। इसके अलावा रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा ने साथ में एंट्री कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। दोनों ने मुस्कुराते हुए फोटोग्राफरों को पोज दिए और नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं। अभिनेता जैकी श्रॉफ अपने खास अंदाज में पहुंचे और उन्होंने उपहार के रूप में एक पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

    इस समारोह में जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दोनों ब्लैक आउटफिट में नजर आए और उन्होंने नवदंपति को शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा अनिल कपूर, संजय कपूर, जहान कपूर, बॉबी देओल, चंकी पांडे, भावना पांडे, रकुल प्रीत सिंह, जैकी भगनानी, हिमेश रेशमिया, सोनिया, नूपुर सेनन और स्टेबिन बेन समेत फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियां भी समारोह का हिस्सा बनीं। सितारों से सजे इस वेडिंग रिसेप्शन ने एक बार फिर बॉलीवुड के पारिवारिक रिश्तों और आपसी जुड़ाव की झलक पेश की, जबकि समारोह की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

  • 'क्वीन 2' पर रिलीज से पहले कानूनी संकट, फैंटम स्टूडियोज ने 250 करोड़ के दावे के साथ फिल्म पर रोक लगाने की मांग की

    'क्वीन 2' पर रिलीज से पहले कानूनी संकट, फैंटम स्टूडियोज ने 250 करोड़ के दावे के साथ फिल्म पर रोक लगाने की मांग की

    नई दिल्ली । कंगना रनौत की चर्चित फिल्म ‘क्वीन 2’ रिलीज से पहले ही बड़े कानूनी विवाद में फंस गई है। फिल्म के अधिकारों को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। वर्ष 2014 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘क्वीन’ का निर्माण करने वाले फैंटम स्टूडियोज ने जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर करते हुए फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने और 250 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। इस विवाद ने फिल्म उद्योग में बौद्धिक संपदा अधिकारों और सीक्वल निर्माण से जुड़े नियमों पर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    फैंटम स्टूडियोज का दावा है कि पहली फिल्म के निर्माण के समय दोनों पक्षों के बीच एक औपचारिक समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार यदि भविष्य में ‘क्वीन’ से जुड़ा कोई सीक्वल, प्रीक्वल या संबंधित प्रोजेक्ट बनाया जाता है तो उसके अधिकार दोनों पक्षों के बीच समान रूप से साझा किए जाएंगे। कंपनी का आरोप है कि ‘क्वीन 2’ के निर्माण और विकास की प्रक्रिया में उनकी सहमति नहीं ली गई, जो समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि फैंटम स्टूडियोज ने मई 2025 से इस विषय पर जियोस्टार से लगातार संपर्क करने की कोशिश की थी। कंपनी का कहना है कि उसने अपने अधिकारों और समझौते के पालन को लेकर कई बार संवाद स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित जवाब नहीं मिला। इसके बाद कानूनी रास्ता अपनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

    दूसरी ओर जियोस्टार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि ‘क्वीन 2’ मूल फिल्म का सीक्वल नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह नई कहानी और अलग अवधारणा पर आधारित फिल्म है। जियोस्टार के अनुसार नई फिल्म का पहली ‘क्वीन’ के पात्रों, कहानी, घटनाक्रम या रचनात्मक सामग्री से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, इसलिए इसे सीक्वल की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

    कंपनी ने यह तर्क भी दिया है कि ‘Queen’ अंग्रेजी भाषा का एक सामान्य शब्द है और किसी एक संस्था का इस शब्द पर विशेष अधिकार नहीं हो सकता। इसलिए केवल शीर्षक के आधार पर इसे मूल फिल्म का विस्तार या सीक्वल मानना उचित नहीं होगा। अदालत में दोनों पक्षों के तर्क अब इस बात पर केंद्रित हैं कि नई फिल्म वास्तव में मूल कृति का विस्तार है या पूरी तरह स्वतंत्र रचना।

    साल 2014 में रिलीज हुई ‘क्वीन’ को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से व्यापक सराहना मिली थी। सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था और कंगना रनौत को उनके अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसी सफलता के कारण ‘क्वीन’ का नाम आज भी हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्मों में शामिल किया जाता है।

    फिलहाल ‘क्वीन 2’ की स्टारकास्ट और रिलीज डेट को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कानूनी विवाद के कारण फिल्म एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अब फिल्म का भविष्य काफी हद तक बॉम्बे हाईकोर्ट के आगामी निर्णय पर निर्भर करेगा। अदालत के फैसले से न केवल इस फिल्म की रिलीज प्रभावित हो सकती है, बल्कि भविष्य में फिल्मों के सीक्वल, रीमेक और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय हो सकती है।

  • दिलजीत दोसांझ की प्रतिबंधित फिल्म 'सतलुज' के लेखक ने तोड़ी चुप्पी; सीबीएफसी और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

    दिलजीत दोसांझ की प्रतिबंधित फिल्म 'सतलुज' के लेखक ने तोड़ी चुप्पी; सीबीएफसी और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों देश के सिनेमा जगत और दर्शकों के बीच गंभीर चर्चा का विषय बनी हुई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘ज़ी5’ पर रिलीज होने के महज दो दिनों के भीतर ही इस फिल्म को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद से इसके कंटेंट और प्रतिबंध को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हनी त्रेहन के निर्देशन में बनी इस फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95’ रखा गया था, जिसे सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद बदलकर ‘सतलुज’ किया गया था। अब इस फिल्म के सह-लेखक निरेन भट्ट ने फिल्म को बिना किसी स्पष्ट कारण के हटाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    फिल्म के सह-लेखक निरेन भट्ट ने हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार में फिल्म को हटाए जाने की प्रक्रिया और सिस्टम की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सिस्टम में बैठे कुछ लोगों को इस फिल्म की कहानी से बहुत बड़ी दिक्कत है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस पूरे मामले पर संबंधित विभागों की ओर से बातचीत का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सीबीएफसी की तरफ से साधी गई लंबी चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड कभी यह स्पष्ट नहीं करता कि उन्हें फिल्म के किस हिस्से से आपत्ति है या ये फैसले आखिर किस स्तर पर लिए जा रहे हैं।

    प्रशासनिक हलकों और रिपोर्ट्स में यह अंदेशा जताया गया था कि इस संवेदनशील फिल्म को भारत विरोधी तत्वों द्वारा एक एजेंडे या प्रोपेगैंडा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए निरेन भट्ट ने देश में हाल ही में रिलीज हुई अन्य राजनीतिक और संवेदनशील फिल्मों का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश में ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरला स्टोरी’ जैसी फिल्में बिना किसी रुकावट के रिलीज हो सकती हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय ताकतों का हथियार क्यों नहीं माना गया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ एक बायोग्राफी को दबाने के लिए काल्पनिक आशंकाओं के आधार पर फैसला लेना बिल्कुल अतार्किक है।

    उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के वास्तविक जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है। जसवंत सिंह खालड़ा पेशे से एक बैंक कर्मचारी थे, जिन्होंने साल 1984 से 1994 के बीच पंजाब के अशांत दौर में मारे गए और लापता घोषित किए गए लगभग 25 हजार लोगों के लावारिस अंतिम संस्कार के मामलों की स्वतंत्र जांच शुरू की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन लोगों को फर्जी पुलिस मुठभेड़ों में मारा गया था। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मानवाधिकारों को लेकर काम करने वाले संगठनों के बीच यह मामला हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है क्योंकि इस मामले की जांच के दौरान ही खालड़ा रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे और बाद में उनका शव सतलुज नदी से बरामद हुआ था।

  • सलमान विवाद के बाद अकेले पड़ गए थे विवेक ओबरॉय ऐसे वक्त में अक्षय कुमार ने बढ़ाया मदद का हाथ

    सलमान विवाद के बाद अकेले पड़ गए थे विवेक ओबरॉय ऐसे वक्त में अक्षय कुमार ने बढ़ाया मदद का हाथ


    नई दिल्ली । फिल्मी दुनिया में सफलता जितनी तेजी से मिलती है उतनी ही तेजी से कठिन दौर भी सामने आ सकता है। अभिनेता विवेक ओबरॉय की जिंदगी इसका बड़ा उदाहरण है। शानदार फिल्मों और कई पुरस्कारों के बावजूद एक समय ऐसा आया जब उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया। इंडस्ट्री में उनका बहिष्कार होने लगा और लगातार बढ़ती परेशानियों के बीच वह मानसिक रूप से भी बेहद परेशान रहने लगे। ऐसे कठिन समय में अभिनेता अक्षय कुमार उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए और बिना किसी दिखावे के उनकी ऐसी मदद की जिसे विवेक आज भी कभी नहीं भूल पाए हैं।

    एक पुराने पॉडकास्ट में विवेक ओबरॉय ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि वह लंबे समय तक घर पर ही रहने लगे थे और गहरे तनाव से गुजर रहे थे। तभी एक दिन अक्षय कुमार का फोन आया। उन्होंने हालचाल पूछा और कुछ ही समय बाद सीधे विवेक के घर पहुंच गए। अक्षय ने उनकी पूरी बात सुनी और उन्हें समझाया कि हर मुश्किल समय हमेशा नहीं रहता। उन्होंने कहा कि वह हर समस्या का समाधान तो नहीं कर सकते लेकिन उनका आत्मविश्वास जरूर वापस ला सकते हैं।

    विवेक के मुताबिक उस समय अक्षय कुमार कई बड़े स्टेज शो और कार्यक्रमों में व्यस्त थे। व्यस्त कार्यक्रम के कारण वह कुछ ऑफर स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने उन कार्यक्रमों और प्रोजेक्ट्स की सिफारिश विवेक ओबरॉय के लिए कर दी। इन आयोजनों में काम मिलने से विवेक को आर्थिक राहत मिली और सबसे बड़ी बात यह रही कि वह फिर से दर्शकों के बीच पहुंचने लगे। स्टेज पर लोगों का प्यार और तालियां सुनकर उनका आत्मविश्वास लौटने लगा और मानसिक स्थिति भी पहले से बेहतर होती गई।

    विवेक ने बताया कि अक्षय कुमार ने कभी यह दावा नहीं किया कि वह उनके लिए किसी से लड़ेंगे या इंडस्ट्री की राजनीति बदल देंगे। उन्होंने केवल एक व्यावहारिक रास्ता दिखाया जिससे वह फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सके। यही वजह है कि विवेक आज भी उस मदद को अपने जीवन का सबसे बड़ा सहारा मानते हैं।

    दरअसल विवेक ओबरॉय का करियर उस समय विवादों में आ गया था जब उन्होंने अभिनेता सलमान खान के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला उस दौर में काफी चर्चा में रहा और इसके बाद उन्हें फिल्मों के ऑफर कम मिलने लगे। हालांकि इस कठिन दौर में भी उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे धीरे अपने करियर को नई दिशा देने का प्रयास किया।
    दरअसल विवेक ओबरॉय का करियर उस समय विवादों में आ गया था जब उन्होंने अभिनेता सलमान खान के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला उस दौर में काफी चर्चा में रहा और इसके बाद उन्हें फिल्मों के ऑफर कम मिलने लगे। हालांकि इस कठिन दौर में भी उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे धीरे अपने करियर को नई दिशा देने का प्रयास किया।

    विवेक ओबरॉय की यह कहानी बताती है कि सफलता के पीछे केवल प्रतिभा ही नहीं बल्कि कठिन समय में मिलने वाला सही साथ भी बेहद मायने रखता है। अक्षय कुमार की संवेदनशीलता और व्यवहारिक मदद ने साबित किया कि सच्ची दोस्ती केवल शब्दों से नहीं बल्कि सही समय पर किए गए सहयोग से पहचानी जाती है। यही वजह है कि वर्षों बाद भी विवेक ओबरॉय खुले दिल से उस मदद को याद करते हैं और अक्षय कुमार के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हैं।

  • धर्मेंद्र के निधन के महीनों बाद हेमा मालिनी का बड़ा खुलासा; बताया 'हीमैन' अपनी आखिरी सांस तक क्या चाहते थे

    धर्मेंद्र के निधन के महीनों बाद हेमा मालिनी का बड़ा खुलासा; बताया 'हीमैन' अपनी आखिरी सांस तक क्या चाहते थे


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और ‘हीमैन’ के नाम से मशहूर धर्मेंद्र के निधन के महीनों बाद उनकी पत्नी और प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी ने उनकी आखिरी इच्छा को लेकर कई भावुक खुलासे किए हैं। एक हालिया साक्षात्कार में हेमा मालिनी ने बताया कि धर्मेंद्र के जाने से लगा झटका ऐसा है जिससे देओल परिवार आज भी पूरी तरह उबर नहीं पाया है। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र अपने जीवन के अंतिम दिनों में परिवार की एकजुटता को लेकर बेहद संवेदनशील थे और उन्होंने अपनी एक ऐसी इच्छा साझा की थी जिसे पूरा करना अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।

    साक्षात्कार के दौरान जब हेमा मालिनी से धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि धरम जी हमेशा कहते थे कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, बच्चों और परिवार के साथ हमेशा जुड़े रहना। उन्होंने परिवार के साथ अधिकतम समय बिताने की बात पर जोर दिया था। धर्मेंद्र का मानना था कि आज के आधुनिक दौर में जहां बच्चे अक्सर अपने करियर और अलग रास्तों पर निकल जाते हैं, वहां परिवार को एक सूत्र में पिरोकर रखना सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि काम तो जीवनभर होता रहेगा, लेकिन परिवार हमेशा प्राथमिकता पर होना चाहिए।

    इसके साथ ही हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के पहली पत्नी से हुए बेटों, सनी देओल और बॉबी देओल के साथ अपने पारिवारिक संबंधों और बॉन्ड को लेकर भी पहली बार खुलकर बात की। मध्य प्रदेश सहित देशभर में उनके प्रशंसकों के बीच अक्सर देओल परिवार के आंतरिक रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन हेमा मालिनी ने इन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि सनी और बॉबी दोनों ही बेहद प्यारे और अच्छे स्वभाव के हैं। उन्होंने साफ किया कि पूरा परिवार हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़ा रहता है।

    हेमा मालिनी ने पारिवारिक एकजुटता पर आगे बात करते हुए कहा कि वे अपने पारिवारिक प्रेम और मुलाकातों की अनावश्यक पब्लिसिटी या सोशल मीडिया पर दिखावा करने में विश्वास नहीं रखती हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर पूरा देओल परिवार एक है और वे सभी एक बेहद सुखी परिवार की तरह रहते हैं। उन्होंने धर्मेंद्र को याद करते हुए उन्हें एक बेहतरीन इंसान, एक स्नेही पिता और एक बेहद प्यारा नाना व दादा बताया। उन्होंने कहा कि परिवार के छोटे बच्चे आज भी उन्हें हर पल बेहद मिस करते हैं क्योंकि उनका व्यक्तित्व ही ऐसा था जो सबको बांधकर रखता था।

    उल्लेखनीय है कि भारतीय सिनेमा के इस महान अभिनेता का निधन 24 नवंबर 2025 को अपने 90वें जन्मदिन से ठीक कुछ दिन पहले हुआ था। छह दशकों से अधिक लंबे फिल्मी करियर में धर्मेंद्र ने करोड़ों दर्शकों के दिलों पर राज किया। उनके निधन के बाद उनकी अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसने दर्शकों के साथ-साथ पूरे फिल्म जगत को बेहद भावुक कर दिया था। वर्तमान में सनी देओल, बॉबी देओल और ईशा देओल सहित उनके सभी बच्चे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पिता की पुरानी यादों और तस्वीरों को प्रशंसकों के साथ साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि देते रहते हैं।

  • मल्टीप्लेक्सों में लागू हुआ एयरलाइंस और होटलों वाला 'डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल'; अब मांग बढ़ने के साथ ही महंगे होंगे मूवी टिकट

    मल्टीप्लेक्सों में लागू हुआ एयरलाइंस और होटलों वाला 'डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल'; अब मांग बढ़ने के साथ ही महंगे होंगे मूवी टिकट

    नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्सों में फिल्म देखने के शौकीन दर्शकों को पिछले कुछ समय से एक अजीब और खर्चीले अनुभव से गुजरना पड़ रहा है। कई लोग ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स के अतिरिक्त चार्ज से बचने के लिए सीधे मल्टीप्लेक्स के काउंटर पर जाकर टिकट खरीदते हैं, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। इसके बावजूद, अब काउंटर पर भी अचानक टिकटों के दाम काफी बढ़े हुए मिल रहे हैं। यह कोई इत्तेफाक या तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि इसके पीछे सिनेमाघर मालिकों की एक सोची-समझी और नई व्यावसायिक रणनीति काम कर रही है, जिसने दर्शकों की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।

    मल्टीप्लेक्स उद्योग में तेजी से पैर पसार रही इस नई तरकीब को ‘डायनैमिक प्राइसिंग मॉडल’ कहा जाता है। यह एक ऐसा डिजिटल और रणनीतिक रेवेन्यू मॉडल है, जिसका उपयोग लंबे समय से विमानन कंपनियां और होटल उद्योग अपनी बुकिंग के लिए करते आ रहे हैं। अब इसी तकनीक को पीवीआर आयनॉक्स जैसी बड़ी सिनेमाई शृंखलाओं ने भी अपने थिएटरों में पूरी तरह लागू कर दिया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत जैसे-जैसे किसी विशेष शो या ऑडिटोरियम की सीटें भरती जाती हैं, वैसे-वैसे बची हुई सीटों की मांग के आधार पर उनके दामों में स्वचालित रूप से बढ़ोतरी कर दी जाती है। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के सिनेमा प्रेमियों को अब इस नई व्यवस्था के तहत पसंदीदा शो देखने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

    इस नई मूल्य निर्धारण नीति के संबंध में पीवीआर आयनॉक्स के बिजनेस प्लानिंग और स्ट्रैटजी चीफ कमल ज्ञानचंदानी ने एक आधिकारिक बातचीत में स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि डायनैमिक प्राइसिंग वैश्विक स्तर पर स्वीकार की जा चुकी एक बेहद प्रभावी रेवेन्यू मैनेजमेंट प्रक्रिया है। इसे फ्लाइटों, होटलों, खेल आयोजनों और लाइव एंटरटेनमेंट जैसे विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में सफलता के साथ अपनाया जा रहा है। इसी तर्ज पर मल्टीप्लेक्सों में भी कुछ समय पहले इस मॉडल को अपनी आंतरिक राजस्व रणनीति के तहत लागू किया गया था, ताकि दर्शकों को कीमतों के विभिन्न विकल्प देते हुए सिनेमाघरों में सीटों की कुल ऑक्यूपेंसी को बेहतर और संतुलित किया जा सके।

    प्रबंधन के अनुसार, इस तरकीब का मुख्य उद्देश्य पूरे थिएटर नेटवर्क में दर्शकों की मांग को संतुलित करना और ग्राहकों को टिकट बुकिंग में अधिक लचीलापन प्रदान करना है। इस मॉडल के लागू होने से जहां एक तरफ भारी मांग में चल रही फिल्मों के शोज को पूरी तरह हाउसफुल होने से रोकने में मदद मिलती है, वहीं उन दर्शकों को पसंदीदा सीट मिल जाती है जो उसके लिए अधिक प्रीमियम मूल्य चुकाने के लिए तैयार होते हैं। इसके विपरीत, इस रणनीति का एक दूसरा पहलू यह भी है कि जिन शोज की टिकटें सामान्यतः नहीं बिक पाती हैं या जिनकी मांग बेहद कम होती है, उन्हें बहुत कम और सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाता है ताकि सिनेमाघर पूरी तरह खाली न रहें।

    इस पूरी व्यवस्था में मल्टीप्लेक्स मालिकों को होने वाला वित्तीय लाभ बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देता है, क्योंकि वे कम शोज चलाकर भी लोकप्रिय फिल्मों से अधिकतम राजस्व वसूलने में सफल हो रहे हैं। दर्शकों के लिए यह मॉडल तब तक ही फायदेमंद है जब तक वे कार्यदिवसों में या कम लोकप्रिय समय पर फिल्में देखने की योजना बनाते हैं। वीकेंड और प्राइम टाइम के शोज के लिए अब दर्शकों को काउंटर पर जाकर भी बढ़ी हुई कीमतें ही चुकानी होंगी। भविष्य में जब भी आप किसी थिएटर काउंटर पर जाएं और आपको टिकट अप्रत्याशित रूप से महंगा मिले, तो समझ जाइए कि आप मल्टीप्लेक्सों की इसी नई एल्गोरिदम आधारित तकनीक का सामना कर रहे हैं।

  • PM मोदी ने इंडोनेशिया में छेड़ा बॉलीवुड कनेक्शन, ‘कुछ कुछ होता है’ के जिक्र से खुश हुए करण जौहर

    PM मोदी ने इंडोनेशिया में छेड़ा बॉलीवुड कनेक्शन, ‘कुछ कुछ होता है’ के जिक्र से खुश हुए करण जौहर


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इंडोनेशिया के जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दोनों देशों के पुराने सांस्कृतिक रिश्तों का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के बीच बॉलीवुड के खास जुड़ाव को भी याद किया और शाहरुख खान की साल 1998 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ का उल्लेख किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया में भारतीय फिल्मों और संगीत की लोकप्रियता काफी गहरी है। उन्होंने बताया कि आज भी वहां ‘कुछ कुछ होता है’ के गाने लोगों के बीच काफी पसंद किए जाते हैं। उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को केवल वर्तमान समय तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे सदियों पुराने सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव का हिस्सा बताया।

    पीएम मोदी ने अपने अंदाज में जोड़ा बॉलीवुड कनेक्शन
    भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बॉलीवुड के इस रिश्ते को खास अंदाज में पेश किया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में भारत का गाना ‘कुछ कुछ होता है’ काफी लोकप्रिय है। उन्होंने राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया जैसे दो बड़े देश साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो यह सिर्फ ‘कुछ कुछ’ नहीं रहता, बल्कि ‘बहुत कुछ होता है’ बन जाता है। इस दौरान पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो को गर्मजोशी से किए गए स्वागत के लिए धन्यवाद भी दिया।

    करण जौहर की प्रोडक्शन कंपनी ने जताई खुशी
    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपनी फिल्म का अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिक्र किए जाने से फिल्ममेकर करण जौहर भी काफी उत्साहित नजर आए। उनकी प्रोडक्शन कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पीएम मोदी के भाषण की एक वीडियो क्लिप साझा की।

    वीडियो के साथ धर्मा प्रोडक्शंस ने लिखा कि सिनेमा और संगीत में सीमाओं को पार कर दुनिया के लोगों को जोड़ने की अनोखी ताकत होती है। कंपनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जकार्ता में फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ को दुनियाभर में मिले प्यार और सराहना का उल्लेख करना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है।

    ‘कुछ कुछ होता है’ रही थी बड़ी ब्लॉकबस्टर
    गौरतलब है कि करण जौहर ने साल 1998 में फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ से बतौर निर्देशक अपने करियर की शुरुआत की थी। शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी अभिनीत यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल रही।

    फिल्म के गाने दुनियाभर में लोकप्रिय हुए और शाहरुख-काजोल की जोड़ी को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। भारत के अलावा यह फिल्म ब्रिटेन, अमेरिका और इंडोनेशिया समेत कई देशों में काफी पसंद की गई और इसने बॉलीवुड को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • 17 साल तक अधर में अटकी रही फिल्म, धर्मेंद्र से शुरू हुआ सफर बॉबी देओल तक पहुंचा, रिलीज के बाद बनी यादगार हिट

    17 साल तक अधर में अटकी रही फिल्म, धर्मेंद्र से शुरू हुआ सफर बॉबी देओल तक पहुंचा, रिलीज के बाद बनी यादगार हिट

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में रही हैं जिनकी कहानी केवल पर्दे तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके निर्माण का सफर भी उतना ही दिलचस्प रहा। वर्ष 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘बिच्छू’ भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म की मूल योजना लगभग 17 वर्ष पहले बनाई गई थी, लेकिन परिस्थितियों के चलते इसका निर्माण बीच में ही रुक गया। बाद में नई टीम और नई स्टारकास्ट के साथ इसे दोबारा शुरू किया गया और रिलीज के बाद फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।

    फिल्म की शुरुआती योजना वर्ष 1983 में तैयार की गई थी। उस समय अभिनेता धर्मेंद्र इस परियोजना से मुख्य अभिनेता के रूप में जुड़े थे और निर्माण की जिम्मेदारी भी उनके पास थी। मुख्य अभिनेत्री के लिए शबाना आज़मी का चयन किया गया था। शुरुआती चरण में फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो चुकी थी और पहला शेड्यूल पूरा होने की चर्चा रही। उस दौर में फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार करने की योजना थी और इसे एक अलग शैली की एक्शन-ड्रामा फिल्म के रूप में देखा जा रहा था।

    निर्माण के दौरान परिस्थितियां लगातार बदलती रहीं। निर्देशन से जुड़े बदलाव, निर्माण संबंधी कठिनाइयों और अन्य कारणों के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। समय के साथ फिल्म पूरी तरह रुक गई और लंबे समय तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। कई वर्षों तक यह परियोजना फिल्म उद्योग में अधूरी योजनाओं के उदाहरण के रूप में याद की जाती रही।

    करीब 17 वर्ष बाद इसी कहानी को नए रूप में दोबारा जीवित किया गया। इस बार मुख्य भूमिका में बॉबी देओल को चुना गया, जबकि रानी मुखर्जी फिल्म की नायिका बनीं। दिलचस्प बात यह रही कि जिस किरदार को कभी धर्मेंद्र निभाने वाले थे, वही भूमिका बाद में उनके बेटे बॉबी देओल के हिस्से आई। इस संयोग ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ा दी और इसे देओल परिवार के लिए एक खास परियोजना माना गया।

    रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। शुरुआती दौर में इसका प्रदर्शन संतोषजनक रहा और समय के साथ इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। टेलीविजन प्रसारण और बाद के वर्षों में भी फिल्म को अच्छी पहचान मिली। आज इसे बॉबी देओल के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है और उनके अभिनय की भी सराहना की जाती है।

    फिल्म में बॉबी देओल और रानी मुखर्जी के अलावा आशिष विद्यार्थी, फरीदा जलाल, सचिन खेडेकर और मलाइका अरोड़ा सहित कई कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं। सभी कलाकारों के अभिनय और फिल्म की तेज रफ्तार कहानी ने इसे दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक्शन और भावनात्मक दृश्यों के संतुलन ने भी फिल्म को अलग पहचान दिलाई।

    सिनेमा जगत में अक्सर ऐसी परियोजनाएं समय और परिस्थितियों के कारण अधूरी रह जाती हैं, लेकिन कुछ कहानियां वर्षों बाद भी अपनी मंजिल तक पहुंचती हैं। ‘बिच्छू’ इसका प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। लगभग दो दशक तक रुकी रहने के बावजूद जब यह फिल्म नए कलाकारों के साथ बड़े पर्दे पर आई तो दर्शकों ने इसे स्वीकार किया। यही कारण है कि आज भी इस फिल्म का नाम उन चुनिंदा फिल्मों में लिया जाता है, जिन्होंने लंबे इंतजार के बाद सफलता हासिल कर यह साबित किया कि अच्छी कहानी को समय की सीमाएं रोक नहीं सकतीं।