Category: Entertainment

  • तलाक के सालों बाद Harsh Chhaya का दर्द छलका, बोले- रिश्ता टूटने के बाद खुद को संभालने में लगा वक्त

    तलाक के सालों बाद Harsh Chhaya का दर्द छलका, बोले- रिश्ता टूटने के बाद खुद को संभालने में लगा वक्त

    नई दिल्ली । अभिनेता हर्ष छाया ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर लंबे समय बाद खुलकर बात की है, जिसमें उन्होंने अपने और अभिनेत्री शेफाली शाह के बीच रिश्ते के टूटने के बाद के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि समय के साथ उन्हें यह एहसास होने लगा था कि उनका वैवाहिक जीवन अब उस दिशा में नहीं जा रहा, जिसकी उन्होंने कभी उम्मीद की थी, और इसी वजह से उन्होंने मानसिक रूप से खुद को अलगाव के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था।

    हर्ष छाया के अनुसार, रिश्ते के खत्म होने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनती गईं कि दोनों को अलग रास्ते चुनने पड़े। उन्होंने कहा कि समाज में तलाक को लेकर कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हर रिश्ता अलग परिस्थितियों और अनुभवों से गुजरता है। जब दो लोगों के बीच तालमेल खत्म हो जाता है, तो अलग होना भी एक स्वाभाविक निर्णय बन सकता है।

    अभिनेता ने यह भी स्वीकार किया कि तलाक के बाद उनके जीवन में भावनात्मक उतार-चढ़ाव का दौर आया। कभी उन्हें गहरा दुख महसूस हुआ, तो कभी गुस्सा और पछतावा भी सामने आया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार करना जरूरी होता है, क्योंकि इससे व्यक्ति धीरे-धीरे खुद को समझने और संभालने की दिशा में आगे बढ़ता है।

    इस कठिन दौर में उन्होंने खुद को व्यस्त रखने और नए लोगों से मिलने का रास्ता अपनाया। हर्ष छाया ने बताया कि उन्होंने डेटिंग को भी एक सामान्य प्रक्रिया की तरह लिया, जिससे उन्हें अपने जीवन में आगे बढ़ने और नए अनुभव हासिल करने का मौका मिला। उनके अनुसार, लोगों से बातचीत और सामाजिक जुड़ाव कठिन समय में मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात उनका काम रहा, जिसने उन्हें स्थिर रहने और आगे बढ़ने की ताकत दी। अभिनय और अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करके उन्होंने निजी जीवन की परेशानियों को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उनका मानना है कि जीवन में मुश्किल समय आता है, लेकिन उसे कैसे संभाला जाए, यह व्यक्ति की सोच और दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

    हर्ष छाया और शेफाली शाह की मुलाकात एक टेलीविजन प्रोजेक्ट के दौरान हुई थी, जहां दोनों के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता शादी तक पहुंचा। हालांकि समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और दोनों ने अलग होने का फैसला किया। अलगाव के बाद दोनों ने अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता चुना और आज दोनों अपने-अपने करियर और निजी जीवन में सक्रिय हैं।

  • सलमान खान ने ‘अकेलेपन’ वाली पोस्ट पर तोड़ी चुप्पी, बोले— “मम्मी भी पूछने लगीं क्या हुआ बेटा?”

    सलमान खान ने ‘अकेलेपन’ वाली पोस्ट पर तोड़ी चुप्पी, बोले— “मम्मी भी पूछने लगीं क्या हुआ बेटा?”

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुपरस्टार Salman Khan एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में उनकी एक पोस्ट ने फैंस के बीच हलचल मचा दी थी, जिसमें उन्होंने अकेलेपन और तन्हाई जैसे भावों का जिक्र किया था। इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं और कई लोगों ने उनकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई। हालांकि अब सलमान खान ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट कर दी है और बताया है कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया।

    सलमान खान ने अपनी सफाई में कहा कि उनकी पोस्ट का उद्देश्य खुद के बारे में कुछ कहना नहीं था, बल्कि यह एक सामान्य विचार था जिसे लोगों ने व्यक्तिगत मान लिया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि उनके पास बड़ा परिवार और मजबूत दोस्ती का दायरा है, इसलिए उनके अकेले होने का सवाल ही नहीं उठता। उनकी इस प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को शांत करने का काम किया है और फैंस ने भी राहत की सांस ली है।

    अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उनकी हालिया पोस्ट के बाद उनकी मां Salma Khan भी चिंतित हो गई थीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि उनकी मां ने उनसे पूछा कि सब कुछ ठीक तो है न, जिससे यह साफ हो गया कि पोस्ट ने परिवार के भीतर भी हल्की चिंता पैदा कर दी थी। सलमान ने इस पूरे मामले को मुस्कुराते हुए संभाला और लोगों से अपील की कि वे बिना वजह किसी भी पोस्ट का गलत अर्थ न निकालें।

    यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब सलमान खान ने अपनी एक तस्वीर के साथ एक भावनात्मक कैप्शन साझा किया था, जिसमें उन्होंने अकेलेपन और तन्हाई के बीच अंतर को समझाने की कोशिश की थी। पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और फैंस ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कई लोगों ने इसे गंभीर संकेत मान लिया, जबकि कुछ ने इसे एक विचारात्मक अभिव्यक्ति के रूप में देखा।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान लगातार कई बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। वे आने वाले समय में एक्शन और ड्रामा से भरपूर फिल्मों में नजर आने वाले हैं, जिनमें उनके नए किरदारों को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। फिल्मी करियर के साथ-साथ उनकी सोशल मीडिया मौजूदगी भी अक्सर सुर्खियां बटोरती रहती है, जहां उनके हर पोस्ट को लेकर फैंस में खासा उत्साह देखने को मिलता है।

    इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सेलिब्रिटी की छोटी-सी पोस्ट भी किस तरह बड़ी चर्चा का विषय बन सकती है। सलमान खान की सफाई के बाद अब यह मामला शांत होता दिख रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी इस पोस्ट और जवाब को लेकर चर्चा अभी भी जारी है।

  • खतरों के खिलाड़ी में एंट्री से पहले ओरी का मजेदार खुलासा, बोले- यही मेरा पहला और आखिरी रियलिटी शो है

    खतरों के खिलाड़ी में एंट्री से पहले ओरी का मजेदार खुलासा, बोले- यही मेरा पहला और आखिरी रियलिटी शो है

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले ओरी अब रियलिटी टेलीविजन की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। वह जल्द ही स्टंट बेस्ड लोकप्रिय शो में नजर आएंगे, जिसे लेकर उन्होंने अपने अंदाज में एक ऐसा बयान दिया है जिसने दर्शकों का ध्यान खींच लिया है। ओरी का कहना है कि यह शो उनके लिए सिर्फ एक शुरुआत नहीं बल्कि एक तरह का अंतिम अनुभव भी हो सकता है।

    एक बातचीत के दौरान ओरी ने खुद को मजाकिया अंदाज में ‘रियलिटी शो वर्जिन’ बताया और कहा कि यह उनका पहला वास्तविक रियलिटी शो अनुभव होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे पहले वह केवल एक दिन के लिए एक अन्य रियलिटी शो का हिस्सा बने थे, इसलिए वह उसे वास्तविक अनुभव नहीं मानते। इस बार वह पूरी तरह से एक नए माहौल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।

    ओरी ने अपने आने वाले शो को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि वह इस अनुभव को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी बताया कि उन्होंने शो की तैयारी के तौर पर कई व्यक्तिगत तैयारियां की हैं, जिससे यह साफ झलकता है कि वह इस चुनौती को हल्के में नहीं ले रहे। उनका कहना था कि यह अनुभव उन्हें यह समझने का मौका देगा कि वह असल में कितने डर का सामना कर सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि रियलिटी शो में अक्सर लोग अपने डर पर काबू पाने के लिए आते हैं, लेकिन उनके लिए यह एक अलग तरह की यात्रा होगी। उनके अनुसार यह शो उन्हें खुद को और बेहतर तरीके से जानने का अवसर देगा। उनका मानना है कि असली परीक्षा शो के दौरान ही सामने आएगी, जब उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों और टास्क का सामना करना होगा।

    ओरी का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उनके अंदाज में हमेशा हल्का-फुल्का और मनोरंजक टच देखने को मिलता है। इस बार भी उन्होंने अपने स्टाइल में इसे एक मजेदार अनुभव के रूप में पेश किया है, जिसमें आत्मविश्वास और उत्साह दोनों साफ दिखाई देते हैं।

  • सुर्खियों की होड़ पर भड़कीं मीनाक्षी शेषाद्रि, एक्टर्स को दी सलाह-सिर्फ मेहनत से मिलेगी असली पहचान

    सुर्खियों की होड़ पर भड़कीं मीनाक्षी शेषाद्रि, एक्टर्स को दी सलाह-सिर्फ मेहनत से मिलेगी असली पहचान

    नई दिल्ली । मुंबई में अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि ने मौजूदा फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते पीआर कल्चर और पब्लिसिटी स्टंट को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कई कलाकार अपने काम की बजाय सुर्खियों में बने रहने के लिए अलग-अलग तरीकों का सहारा लेते हैं, जबकि असली पहचान हमेशा मेहनत और कला से ही मिलती है। उनके इस बयान ने एक बार फिर मनोरंजन जगत में पीआर और पब्लिसिटी की भूमिका पर बहस को तेज कर दिया है।

    मीनाक्षी शेषाद्रि ने कहा कि कुछ कलाकार बिना ठोस काम किए केवल मीडिया में बने रहने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाते हैं, जिसमें अतरंगी स्टाइल, विवादित बयान और लगातार सुर्खियों में बने रहने की कोशिश शामिल होती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस तरह की सोच से सहमत नहीं हैं और उनका मानना है कि कलाकार की असली पहचान उसके काम से बननी चाहिए, न कि प्रचार के तरीकों से।

    उन्होंने एक पुरानी फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि मनोरंजन की दुनिया में हमेशा से यह धारणा रही है कि यहां केवल वही टिकता है जो दर्शकों को कुछ वास्तविक और प्रभावशाली देता है। उनके अनुसार, अगर कोई कलाकार अपने काम पर ध्यान दे और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़े, तो सफलता अपने आप उसके दरवाजे तक पहुंचती है। उन्होंने यह भी कहा कि मेहनत और प्रतिभा ही वह आधार है जिस पर लंबे समय तक करियर खड़ा रहता है।

    अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं है, बल्कि वह केवल उस प्रवृत्ति पर अपनी राय दे रही हैं जो आज के समय में तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया और पीआर के बढ़ते प्रभाव ने मनोरंजन जगत में प्रतिस्पर्धा का तरीका बदल दिया है, लेकिन इससे कलाकार की वास्तविक प्रतिभा पीछे नहीं छिपनी चाहिए।

    इस बीच फिल्म इंडस्ट्री में पीआर और ट्रोलिंग कल्चर को लेकर पहले भी कई कलाकार अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। कई लोगों का मानना है कि डिजिटल दौर में पहचान बनाने के तरीके बदल गए हैं, लेकिन कुछ कलाकार अब भी मानते हैं कि असली सफलता केवल और केवल काम के दम पर ही हासिल की जा सकती है।

    मीनाक्षी शेषाद्रि के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के दौर में लोकप्रियता का पैमाना केवल पब्लिसिटी है या फिर अब भी प्रतिभा और मेहनत ही सबसे बड़ी पहचान है।

  • सलमान खान की ‘अकेलेपन’ वाली पोस्ट पर मचा हंगामा, मां ने पूछा- क्या हुआ बेटा? अभिनेता ने दी सफाई

    सलमान खान की ‘अकेलेपन’ वाली पोस्ट पर मचा हंगामा, मां ने पूछा- क्या हुआ बेटा? अभिनेता ने दी सफाई

    मुंबई। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान ख़ान की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने फैंस के बीच हलचल पैदा कर दी। अभिनेता ने कुछ दिन पहले अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए अकेलेपन और तन्हाई को लेकर एक संदेश लिखा था, जिसके बाद सोशल media पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। फैंस उनके भावनात्मक हालात को लेकर चिंता जताने लगे। अब सलमान ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर सफाई दी है।

    सलमान खान ने देर रात इंस्टाग्राम पर नई पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनका संदेश उनके निजी जीवन से जुड़ा नहीं था। उन्होंने लिखा कि इतने बड़े परिवार, दोस्तों और चाहने वालों के बीच वह खुद को अकेला महसूस नहीं कर सकते। अभिनेता ने कहा, “जब मेरे पास परिवार, दोस्त और आप सभी का प्यार व दुआएं हैं, तो मैं अकेला कैसे हो सकता हूं? अगर ऐसा कहूं तो मैं सबसे बड़ा नाशुक्रा इंसान होऊंगा।”

    उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पोस्ट पढ़कर उनकी मां सलमा खान भी परेशान हो गई थीं। सलमान ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि इस बार बिना किसी फोटो के ही पोस्ट ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बन गई और उनकी मां ने उनसे पूछा, “क्या हुआ बेटा?” अभिनेता ने आगे कहा कि कभी-कभी लोगों के बीच रहकर थकान महसूस होती है, इसलिए उन्हें थोड़ा अकेले समय की जरूरत पड़ती है।

    दरअसल, इससे पहले सलमान खान ने अपनी शर्टलेस तस्वीर के साथ एक क्रिप्टिक कैप्शन साझा किया था। पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि “अकेला होना और तन्हा होना दोनों अलग बातें हैं। अकेलापन अपनी पसंद से होता है, जबकि तन्हाई तब महसूस होती है जब कोई आपके साथ नहीं रहना चाहता।” इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अलग-अलग अंदाजे लगा रहे थे।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान के पास इस समय कई बड़े प्रोजेक्ट हैं। उनकी आगामी फिल्म मातृभूमि पहले ‘बैटल ऑफ गलवां’ नाम से चर्चा में थी, लेकिन बाद में इसका टाइटल बदल दिया गया। इसके अलावा वह निर्देशक वामशी पेडिपल्ली की फिल्म ‘SVC63’ की शूटिंग में भी व्यस्त हैं, जिसमें उनके साथ नयनतारा नजर आएंगी। वहीं राज निदिमोरु और कृष्ण डी.के. के साथ भी उनके नए प्रोजेक्ट की चर्चाएं जारी हैं।

  • राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

    राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

    नई दिल्ली ।
    राज कुमार सबको जानी कहकर बात करते थे। आपने फिल्मों में भी कई बार देखा होगा कि वह सामने वाले किरदार को जानी बोलते थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज, जानी क्यों बोलते थे। इसके पीछे की वजह काफी अलग है और खास भी। फिल्ममेकर केसी बोकादिया ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज कुमार को हैंडल करना अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा मुश्किल होता था।

    क्यों सबको जानी बोलते थे राज कुमार

    केसी ने इंडिया टीवी से बात करते हुए कहा, ‘उनके कुत्ते का नाम जानी था, यही वजह है कि वह सबको जानी कहते थे। अच्छी बात यह है कि उन्होंने कभी मुझे इस नाम से नहीं बुलाया और मुझे सिर्फ बोकादिया साब बोलते थे।’ हालांकि उन्होंने यह भी क्लीयर किया कि राज के इरादे इसके पीछे नेगेटिव नहीं थे। वह अपने डॉग को काफी प्यार करते थे और उन्हें ये शब्द काफी पसंद था इसलिए वे सबको जानी बोलते थे।
    राज कुमार को कैसे अपनी फिल्म के लिए मनाया
    केसी ने आगे बताया कि कैसे उनकी फिल्म पुलिस और मुजरिम के लिए उन्होंने राज कुमार को लिया था। वह बोले, मैंने उन्हें एक शाम को फोन किया। हमने फिर अगले दिन मुहर्रत शॉट प्लान किया। अगर वह किसी इंसान का चेहरा नहीं जानते तो वह फिल्म नहीं करते। फिल्म की स्टोरी उनके लिए दूसरे नंबर पर होती थी। अब जैसे ही उन्होंने फोन उठाया मैंने कहा राज साहब, मैं आपको एक लाइन कहना चाहता हूं। वह मान गए। उन्हें हैंडल करना, अमिताभ बच्चन को हैंडल करने से काफी मुश्किल होता था। बच्चन कैलकुलेटिव इंसान हैं और राज साहब मूडी थे।
    अमिताभ बच्चन से ज्यादा मुश्किल था राज कुमार को हैंडल करना
    वह आगे बोले, ‘कैलकुलेटिव इंसान को समझाना आसान होता है, लेकिन जब बात मूडी इंसान की आती है तो ये उनकी मूड पर डिपेंड करता है जो हर समय बदलता रहता है। एक गाय भी तभी दूध देती है जब उसका मन हो, नहीं तो नहीं। तो मेरे सीन के डिसक्रिप्शन को पढ़कर उन्होंने कहा कि ये अच्छा है। मैंने फिर उनसे तुरंत मूवी करने की रिक्वेस्ट की। उन्होंने मुझे कहा कि वह मुझे ना नहीं कह सकते हैं।’
    राज कुमार को ज्यादा पैसे किए ऑफर
    केसी ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि उन्हें कितना पैसा चाहिए तो उन्होंने कहा लास्ट टाइम तुमने कितना दिया था? मैंने कहा 21 लाख तो उन्होंने मुझे ज्यादा अमाउंट देने को कहा तो मैंने 24 लाख कहा और फिर तुरंत मैंने 25 लाख का ऑफर दिया। इसके साथ मैंने उनसे एक और फेवर मांगा और रिक्वेस्ट किया कि आप अगली सुबह ही मुझे ज्वाइन करोगे क्योंकि मुहूर्त अगले दिन का शेड्यूल है।’
    पुराना आउटफिट पहन दिया था मुहूर्त शॉट
    राज ने फिर पूछा कि इतनी जल्दी कॉस्ट्यूम कैसे तैयार होंगे तो मैंने उन्हें कहा कि आप पिछले 25-30 साल से वैसे ही लग रहे हो तो न्यू कॉस्ट्यूम की क्या जरूरत। मुझे बस आपसे मुहूर्त शॉट चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि राज फिर आए और उन्होंने वही येलो कलर का कोट पहना है जो उन्होंने नीले गगन के तले पहना था, हमराज फिल्म में।

  • फिल्म सेट पर अचानक फैली दहशत, सांप के डसने से मचा हड़कंप

    फिल्म सेट पर अचानक फैली दहशत, सांप के डसने से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में आज भले ही VFX और CGI ने फिल्मों की दुनिया को सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत बना दिया हो, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब कलाकारों को असली खतरे के बीच शूटिंग करनी पड़ती थी। ऐसा ही एक खौफनाक और चर्चित किस्सा 1982 में आई फिल्म ‘अशांति’ से जुड़ा हुआ है, जिसने उस समय दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे।

    इस फिल्म में एक ऐसा सीन फिल्माया गया था, जो आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे जोखिम भरे दृश्यों में गिना जाता है। कहानी के मुताबिक, फिल्म में विलेन का किरदार निभा रहे अभिनेता को एक जिंदा कोबरा सांप के साथ सीन करना था। दृश्य यह था कि वह सांप को अपने हाथ में उठाकर उसकी मौजूदगी को अपने चेहरे के बेहद करीब लाएगा और अपनी जीभ बाहर निकालकर ऐसा दिखाएगा कि सांप उसे काट रहा है।

    सेट पर असली कोबरा मौजूद था और पूरी यूनिट इस सीन को बेहद सतर्कता के साथ शूट कर रही थी। जैसे ही अभिनेता ने सांप को उठाकर अपने चेहरे के करीब लाया और अभिनय शुरू किया, तभी अचानक एक अप्रत्याशित घटना हुई सांप ने उसकी जीभ के बेहद पास डसने की कोशिश की और उसे काट लिया।

    इस घटना के बाद सेट पर कुछ पलों के लिए पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। हर कोई घबरा गया, लेकिन बाद में पता चला कि सांप का जहर पहले ही निकाला जा चुका था, इसलिए किसी बड़ी अनहोनी से बचाव हो गया।

    यह खतरनाक सीन फिल्म में अमरीश पुरी द्वारा निभाए गए राजा भीष्म बहादुर सिंह के किरदार का हिस्सा था। उनके इस किरदार को और भी अधिक डरावना और प्रभावशाली दिखाने के लिए यह दृश्य फिल्माया गया था, जिसमें वे खुद को इतना निर्दयी दिखाते हैं कि सांप के जहर का भी उन पर कोई असर नहीं होता।

    फिल्म रिलीज होने के बाद यह सीन इतना चर्चित हुआ कि कई दर्शकों को यकीन ही नहीं हुआ कि यह वास्तविक शूटिंग थी। अमरीश पुरी की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और इस खतरनाक स्टंट ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में और भी मजबूत जगह दिलाई।

    आज भी ‘अशांति’ का यह सीन भारतीय फिल्म इतिहास के उन दुर्लभ दृश्यों में गिना जाता है, जिन्हें देखकर दर्शक हैरान भी होते हैं और उस दौर की फिल्ममेकिंग के साहस को सलाम भी करते हैं।

  • कोरियोग्राफी में बदलाव के बाद बिना डांसर्स के शूट हुआ गाना

    कोरियोग्राफी में बदलाव के बाद बिना डांसर्स के शूट हुआ गाना


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा श्रीदेवी को इंडस्ट्री की पहली महिला सुपरस्टार माना जाता है। अपनी अदाकारी, एक्सप्रेशन और डांस के दम पर उन्होंने लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। लेकिन हाल ही में सामने आए एक पुराने किस्से ने उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू फिर चर्चा में ला दिया है।

    यह दावा किया है एक इंटरव्यू में श्रीदेवी के साथ बैकग्राउंड डांसर रह चुकी रुबीना खान ने, जिन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब एक गाने की शूटिंग को लेकर बड़ा बदलाव करना पड़ा।

    मामला फिल्म ‘चांद का टुकड़ा’ के टाइटल ट्रैक ‘तू लगे चांद का टुकड़ा’ से जुड़ा बताया जाता है। इस गाने की कोरियोग्राफी मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान द्वारा की जा रही थी। सेट पर श्रीदेवी को सफेद ड्रेस में एक खास थीम के तहत शूट किया गया था, जबकि करीब 10 बैकग्राउंड डांसर्स को अलग-अलग आउटफिट्स में रखा गया था ताकि गाने को भव्य रूप दिया जा सके।

    हालांकि, शूटिंग के बाद जब गाने का फाइनल वर्जन तैयार हुआ, तो कथित तौर पर श्रीदेवी इससे संतुष्ट नहीं थीं। दावा किया जाता है कि उन्हें लगा कि बैकग्राउंड डांसर्स के बीच उनका लुक अपेक्षाकृत फीका पड़ रहा है। इसी वजह से उन्होंने गाने को लेकर असंतोष जताया और पूरे सीन को दोबारा बनाने की बात सामने आई।

    इसके बाद गाने में बड़ा बदलाव किया गया। पहले जहां सरोज खान इसकी कोरियोग्राफी संभाल रही थीं, वहीं बाद में इसे दोबारा तैयार करने के लिए कोरियोग्राफर चुन्नी प्रकाश को जिम्मेदारी दी गई। नए वर्जन में सबसे बड़ा बदलाव यह था कि गाने को बिना किसी बैकग्राउंड डांसर्स के शूट किया गया, जिससे पूरा फोकस केवल श्रीदेवी पर रहा।

    इस किस्से को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक चर्चा होती रही है। हालांकि यह पूरी तरह से एक पुराना दावा और इंटरव्यू पर आधारित कहानी है, जिसे लेकर अलग-अलग पक्षों की राय भी सामने आती रही है।

    फिर भी यह घटना उस दौर की फिल्म मेकिंग और स्टार पावर को समझने का एक दिलचस्प उदाहरण मानी जाती है, जहां एक कलाकार की स्क्रीन प्रेजेंस पूरी फिल्म की दिशा बदल सकती थी।

  • ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो उठे थे नेहरू, जानिए पूरा किस्सा

    ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो उठे थे नेहरू, जानिए पूरा किस्सा


    नई दिल्ली। भारत के सांस्कृतिक और देशभक्ति इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो केवल संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं और बलिदान की जीवंत तस्वीर बन जाते हैं। ऐसा ही एक अमर गीत है ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, जिसने न सिर्फ देशवासियों की आंखें नम कीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी भावुक कर दिया था।

    यह कहानी 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद की है, जब देश अपने कई वीर सैनिकों के बलिदान से शोक में डूबा हुआ था। इसी दर्द को शब्दों में ढालने का काम किया प्रसिद्ध गीतकार कवि प्रदीप (रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी) ने। उन्होंने यह गीत शहीदों की याद और उनके परिजनों के सम्मान में लिखा था।

    इस गीत को 26 जनवरी 1963 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के रामलीला मैदान में पहली बार लता मंगेशकर की आवाज में प्रस्तुत किया गया। जैसे ही लता मंगेशकर ने अपनी भावपूर्ण आवाज में इसे गाना शुरू किया, पूरा माहौल गहरे सन्नाटे और भावनाओं में डूब गया। हजारों की भीड़ के साथ-साथ मंच पर मौजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखों में भी आंसू आ गए। यह क्षण भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

    कहा जाता है कि इस गीत ने शहीदों के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को एक नई ऊंचाई दी। बाद में कवि प्रदीप ने इस गीत से प्राप्त धनराशि को युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

    कवि प्रदीप का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। उनका जन्म उज्जैन में हुआ था और उन्होंने 1940 में फिल्म ‘बंधन’ से अपने गीत लेखन करियर की शुरुआत की। 1943 में फिल्म ‘किस्मत’ का प्रसिद्ध गीत ‘दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है’ उस समय इतना प्रभावशाली था कि ब्रिटिश सरकार इससे नाराज हो गई और उनके खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें कुछ समय तक भूमिगत रहना पड़ा।

    इसके बावजूद उन्होंने अपने लेखन को जारी रखा और आगे चलकर ‘जागृति’, ‘जय संतोषी मां’ जैसी फिल्मों के लिए कई अमर गीत लिखे, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। 1998 में 83 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके गीत आज भी देशभक्ति की प्रेरणा बने हुए हैं।

    ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय एकता की अमर गाथा बन चुका है।

  • सूर्या की ‘करुप्पु’ की सफलता पर भावुक हुए आरजे बालाजी, थिएटर में दर्शकों के लिए किया मानवीय व्यवहार का आग्रह

    सूर्या की ‘करुप्पु’ की सफलता पर भावुक हुए आरजे बालाजी, थिएटर में दर्शकों के लिए किया मानवीय व्यवहार का आग्रह

    नई दिल्ली । तमिल सुपरस्टार सूर्या की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘करुप्पु’ ने सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों के बीच खास जगह बना ली है। फिल्म को मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स के बीच इसके निर्देशक आरजे बालाजी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश जारी करते हुए दर्शकों और थिएटर मालिकों से विशेष अपील की है, जिसने फिल्म के माहौल को और भी चर्चा में ला दिया है।

    फिल्म 14 मई को रिलीज हुई थी और शुरुआती दिनों से ही इसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। कई जगहों पर हाउसफुल शो देखने को मिल रहे हैं और दर्शक फिल्म के किरदारों और कहानी से गहराई से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इसी बढ़ते उत्साह और भावनात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए निर्देशक ने थिएटर अनुभव को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया।

    आरजे बालाजी ने अपने संदेश में कहा कि ‘करुप्पु’ को जिस तरह का प्यार दर्शकों से मिल रहा है, वह उनके और पूरी टीम के लिए बेहद भावुक करने वाला अनुभव है। उन्होंने स्वीकार किया कि जब फिल्म की शुरुआत की गई थी, तब इस तरह के व्यापक और भावनात्मक रिस्पॉन्स की कल्पना नहीं की गई थी। निर्देशक के अनुसार, कई जगहों से ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं जहां दर्शक फिल्म देखते समय अत्यधिक भावुक हो रहे हैं, रो रहे हैं और कुछ लोग इस अनुभव को गहराई से महसूस कर रहे हैं।

    इसी संदर्भ में आरजे बालाजी ने दर्शकों से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि थिएटर में कोई व्यक्ति अत्यधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया दे रहा हो या उसकी तबीयत या स्थिति असामान्य लग रही हो, तो उसके प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति दिखाना जरूरी है। उन्होंने दर्शकों से अनुरोध किया कि ऐसे समय में उस व्यक्ति को अकेला महसूस न होने दें, बल्कि उसे पानी उपलब्ध कराएं, उसे स्थान दें और जरूरत पड़ने पर थिएटर स्टाफ को सूचित करें ताकि उचित सहायता मिल सके।

    निर्देशक ने यह भी कहा कि थिएटर का माहौल सिर्फ मनोरंजन का स्थान नहीं है, बल्कि यह एक साझा भावनात्मक अनुभव भी बन चुका है। ऐसे में हर दर्शक की जिम्मेदारी है कि वह दूसरों की भावनाओं का सम्मान करे और किसी भी स्थिति में किसी को असहज महसूस न होने दे। उन्होंने थिएटर मालिकों और स्टाफ से भी आग्रह किया कि वे ऐसे संवेदनशील पलों के लिए पहले से तैयार रहें और दर्शकों के साथ सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करें।

    फिल्म ‘करुप्पु’ में सूर्या के साथ तृषा कृष्णन मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं, जबकि फिल्म का संगीत साई अभ्यंकर ने तैयार किया है। फिल्म को न केवल इसकी कहानी और अभिनय के लिए सराहा जा रहा है, बल्कि इसके भावनात्मक प्रभाव को भी दर्शकों द्वारा खास तौर पर महसूस किया जा रहा है।

    बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत करने वाली यह फिल्म अब धीरे-धीरे सुपरहिट की दिशा में बढ़ती नजर आ रही है। दर्शकों की भीड़ और सोशल मीडिया पर मिल रहे सकारात्मक रिएक्शन यह संकेत दे रहे हैं कि ‘करुप्पु’ लंबे समय तक चर्चा में बनी रह सकती है।