Category: International

  • अफगानिस्तान मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर गुस्‍साए डोनाल्‍ड ट्रंप, पत्रकार से कहा- ‘क्या तुम बेवकूफ हो?’

    अफगानिस्तान मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर गुस्‍साए डोनाल्‍ड ट्रंप, पत्रकार से कहा- ‘क्या तुम बेवकूफ हो?’


    नई दिल्‍ली । वाइट हाउस के सामने हुई गोलीबारी को लेकर मीडिया से बात कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप एक सवाल पर अपना आपा खो बैठे। एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि उन्होंने इस घटना के लिए अपने पूर्ववर्ती जो बाइडन प्रशासन को दोष क्यों दिया? इस सवाल को सुनते ही ट्रंप भड़क गए और गुस्से में पत्रकार की तरफ देखते हुए बोले, ‘क्या तुम बेवकूफ हो?’

    गौरतलब है कि कल हुई इस घटना के बाद से ही ट्रंप लगातार बाइडन प्रशासन पर इसका दोष दे रहे हैं। क्योंकि आरोपी रहमानुल्लाह बाइडन प्रशासन के दौरान ही अफगानिस्तान से अमेरिका आया था। आरोपी रहमानुल्लाह बाइडन के ऑपरेशन अलाइज वेलकम अभियान के दौरान अमेरिका आया था।

    ट्रंप ने रिपोर्टर पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, “दोष दे रहा हूं क्योंकि वे (बाइडन) हजारों ऐसे लोगों को अमेरिका लेकर आए थे, जिन्हें यहां होना ही नहीं चाहिए था। तुम ऐसे सवाल पूछ रहे हो क्योंकि तुम बेवकूफ इंसान हो।” राष्ट्रपति ने कहा कि बाइडन प्रशासन ने एक कानून पारित किया है, जिसकी वजह से हम इन लोगों को वापस नहीं भेज सकते। उन्होंने पूरे हालात को गड़बड़ करार देते हुए कहा कि अफगानिस्तान का मामला एक गंदगी था। इन (प्रवासियों को) शुरू से ही यहां नहीं होना चाहिए था।

    इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों नेशनल गार्ड्स की सेहत का अपडेट देते हुए बताया कि इसमें घायल एक जवान सैनिक सारा बेकस्ट्राम की मौत हो चुकी है।

    ट्रंप और उनकी टीम की तरफ से लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बीच बाइडन समर्थकों ने भी जवाब देना शुरू कर दिया है। बाइडन प्रशासन के समर्थकों का कहना है कि इस कार्यक्रम के तहत जिन लोगों को लाया गया था, उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मदद की थी। इस कार्यक्रम को व्यापक सुरक्षा जांच के बाद ही पूरा किया गया था। अफगानिस्तान में तालिबान के वापस आने के बाद इन लोगों के जीवन के लिए यह कार्यक्रम जरूरी था।

    गौरतलब है कि बाइडन प्रशासन की इस पहल के तहत करीब 76 हजार अफगान नागरिकों को अमेरिका लाया गया था। इनमें से कई अमेरिकी सैनिक और राजनयिकों के साथ दुभाषिए और अनुवादक के रूप में काम करते थे।

  • अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ में चुनाव के 3 दिन बाद तख्तापलट… सेना के हाथ में सत्ता, राष्ट्रपति गिरफ्तार

    अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ में चुनाव के 3 दिन बाद तख्तापलट… सेना के हाथ में सत्ता, राष्ट्रपति गिरफ्तार


    बिसाऊ।
    पश्चिम अफ्रीका (West Africa) के छोटे से देश गिनी-बिसाऊ (Guinea-Bissau) में रविवार को हुए राष्ट्रपति व संसदीय चुनाव (Presidential and Parliamentary elections) के महज तीन दिन बाद सेना ने तख्तापलट कर सत्ता अपने हाथ में ले ली। नवनिर्वाचित माने जा रहे राष्ट्रपति उमारो सिस्सोको एम्बालो (President Umaro Sissoko Embalo) को पद से हटा दिया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सैनिकों ने सरकारी टेलीविजन पर तख्तापलट की औपचारिक घोषणा की और खुद को ‘राष्ट्रीय एवं सार्वजनिक व्यवस्था बहाली के लिए उच्च सैन्य कमान’ घोषित कर दिया।

    बुधवार दोपहर को राजधानी बिसाऊ में राष्ट्रपति भवन के आसपास गोलीबारी की आवाजें सुनाई दी थीं। फ्रांस के प्रमुख समाचार माध्यम ‘ज्यून अफ्रीक’ के अनुसार, राष्ट्रपति एम्बालो ने खुद बताया कि सेना प्रमुख ने तख्तापलट कर उन्हें सत्ता से बेदखल कर गिरफ्तार कर लिया है। फ्रांस 24 से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुझे पद से हटा दिया गया है।


    सेना का दावा

    उच्च सैन्य कमान के प्रवक्ता कर्नल दिनिस एन’चामा ने बयान जारी कर कहा कि चुनावी परिणामों में बड़े पैमाने पर धांधली और देश को अस्थिर करने की एक गुप्त साजिश का पता चलने के बाद यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस साजिश में कुछ राजनीतिक नेता, एक कुख्यात ड्रग तस्कर और देशी-विदेशी नागरिक शामिल थे। परिणामस्वरूप राष्ट्रपति को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया तथा गिनी-बिसाऊ की सभी संवैधानिक संस्थाओं को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है।


    चुनावी विवाद

    रविवार को हुए चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति उमारो सिस्सोको एम्बालो और विपक्षी उम्मीदवार फर्नांडो डायस दा कोस्टा दोनों ने मंगलवार को अपनी जीत का दावा किया था। आधिकारिक अस्थायी परिणाम गुरुवार को आने थे, लेकिन अब सेना ने पूरी चुनावी प्रक्रिया ही स्थगित कर दी है।


    राजधानी में मौजूदा हालात

    एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को बिसाऊ की सड़कें लगभग खाली थीं। सैनिक गश्त कर रहे थे, सभी सीमाएं सील कर दी गईं, राष्ट्रपति हिरासत में हैं और राष्ट्रपति भवन पर सशस्त्र सैनिकों का कब्जा है। अधिकारियों ने दावा किया है कि उनके पास ‘पूर्ण नियंत्रण’ है और अब कोई चुनावी परिणाम घोषित नहीं होगा।


    गिनी-बिसाऊ: तख्तापलटों का पुराना इतिहास

    1974 में पुर्तगाल से आजादी मिलने के बाद से गिनी-बिसाऊ में दर्जनों तख्तापलट और तख्तापलट के प्रयास हो चुके हैं। सिर्फ पिछले महीने (अक्टूबर 2025) में भी एक असफल कोशिश हुई थी। दक्षिण अमेरिका से यूरोप जाने वाले कोकीन तस्करी के प्रमुख रास्ते के कारण इस देश में पिछले डेढ़-दो दशक से राजनीतिक अस्थिरता और गहराई है।

  • टैरिफ की आय से राष्ट्रपति ट्रंप खुश… बोले- US से कुछ साल में पूरी तरह खत्म होगा इनकम टैक्स

    टैरिफ की आय से राष्ट्रपति ट्रंप खुश… बोले- US से कुछ साल में पूरी तरह खत्म होगा इनकम टैक्स


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में वे इनकम टैक्स (Income tax) को लगभग पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। इसका कारण यह बताया कि टैरिफ से सरकार को इतनी बड़ी आमदनी होगी कि आयकर की जरूरत ही कम हो जाएगी। हालांकि उन्होंने अपने इस प्लान की विस्तार में जानकारी नहीं दी।


    टैरिफ नीति क्या है?

    ट्रंप ने इस साल फिर से राष्ट्रपति पद संभालने के बाद कई देशों से आने वाले सामानों पर 10% से 50% तक टैरिफ लगाए। उनका कहना है कि इससे सरकार की आमदनी बढ़ेगी और लोग अमेरिकी सामान ज्यादा खरीदेंगे।


    इनकम टैक्स कम होने वाले लोगों पर फोकस

    ट्रंप इस बात पर जोर देते हैं कि ये बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए होंगे जो 2 लाख डॉलर सालाना तक कमाते हैं।


    $2,000 टैरिफ डिविडेंड का वादा

    ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, “जो लोग टैरिफ के खिलाफ हैं, वे मूर्ख हैं! अब हम दुनिया के सबसे अमीर, सबसे सम्मानित देश हैं, जहां लगभग कोई मुद्रास्फीति नहीं है, और शेयर बाजार की रिकॉर्ड कीमत है। 401k अब तक के उच्चतम हैं।

    उन्होंने अमेरिकियों को लाभांश देने का वादा किया और कहा, “हम खरबों डॉलर ले रहे हैं और जल्द ही अपने 37 ट्रिलियन डॉलर के भारी ऋण का भुगतान करना शुरू कर देंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका में रिकॉर्ड निवेश, हर जगह संयंत्र और कारखाने बढ़ रहे हैं। एक व्यक्ति को कम से कम $2000 का डिविडेंड (उच्च आय वाले लोगों सहित नहीं!) सभी को भुगतान किया जाएगा।

    इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस राजस्व से देश का बड़ा कर्ज $37 ट्रिलियन चुकाया जाएगा और निवेश व उत्पादन में तेजी आएगी।


    सुप्रीम कोर्ट की टैरिफ पर प्रतिक्रिया

    सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को लेकर संदेह जताया है और कहा है कि कई टैरिफ को हटाया भी जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका को टैरिफ के रुपयों के तौर पर वापस भुगतान करना पड़ सकता है, जो 100 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है।

  • हॉन्गकॉन्ग में तबाही: 8 इमारतें जलीं, 55 की मौत, 279 लापता, जांच में 3 गिरफ्तार

    हॉन्गकॉन्ग में तबाही: 8 इमारतें जलीं, 55 की मौत, 279 लापता, जांच में 3 गिरफ्तार


    नई दिल्ली
    । हॉन्गकॉन्ग के वांग फुक कोर्ट में आठ टावरों वाले एक विशाल अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई, जिसमें अब तक 55 लोगों की मौत हो चुकी है और 68 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं, पुलिस के अनुसार अभी भी 279 लोग लापता हैं।

    यह कॉम्प्लेक्स 35 मंजिला आठ इमारतों का था, जिसमें लगभग दो हजार अपार्टमेंट शामिल थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इन टावरों की बहुमंजिला संरचनाओं को बांस की मचान से ढका गया था, जिसने आग को तेजी से फैलने में मदद की।

    आग पर काबू पाने की जद्दोजहद

    चार इमारतों में लगी आग पर लगभग 10 घंटे बाद सुबह तक काबू पाया गया, जबकि तीन इमारतों में आग पर 20 घंटे बाद भी नियंत्रण नहीं हो पाया। आग बुझाने वाले दल को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, क्योंकि कई मंजिलों पर तापमान इतना अधिक था कि फायर फाइटर्स उन जगहों तक पहुँच ही नहीं पा रहे थे। इसी दौरान एक फायर फाइटर की मौत भी हुई।

    तेज हवा और जलते हुए मलबे की वजह से लपटें एक इमारत से दूसरी इमारत तक फैलती चली गईं। आग भड़की तो कई लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी क्योंकि मरम्मत के कारण खिड़कियां बंद थीं।

    पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया

    मामले में पुलिस ने कॉम्प्लेक्स के ठेकेदार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। उन पर आग लगने में लापरवाही या गैर-इरादतन हत्या का शक जताया गया है। हालांकि पुलिस ने अभी उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। साथ ही 7 दिसंबर को होने वाले चुनाव से पहले चुनाव प्रचार गतिविधियां भी स्थगित कर दी गई हैं।

    इतिहास में अब तक की सबसे भीषण आग
    हॉन्गकॉन्ग मीडिया साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार यह आग 77 साल में सबसे भीषण मानी जा रही है। इससे पहले 1948 में पांच मंजिला गोदाम में आग और विस्फोट में 176 लोग मारे गए थे।
    इसके बाद 1962 में शुई पो इलाके में आग में लगभग 44 लोग मारे गए। वहीं नवंबर 1996 में कोवलून के गार्ले बिल्डिंग में आग लगने से 41 लोग मरे और 81 घायल हुए थे।

    बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

    आग लगने के समय अधिकांश बुजुर्ग घर में आराम कर रहे थे जिसके कारण वे समय पर बाहर नहीं निकल पाए। यही वजह है कि ज्यादातर घायल बुजुर्ग हैं।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मदद

    इस हादसे पर जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका सहित कई देशों ने संवेदनाएं जताई हैं। वहीं, मैकडॉनल्ड्स ने आपदा प्रभावितों की मदद के लिए 1000 फूड पैकेट मुफ्त देने का ऐलान किया है।

    पुलिस और अग्निशमन विभाग अभी यह पता लगाने में जुटे हैं कि कितने लोग लापता हैं और कितनों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत और बचाव कार्य अब भी जारी है।
  • शेख हसीना का प्रत्यर्पण अनुरोध: भारत सरकार कर रही कानूनी समीक्षा

    शेख हसीना का प्रत्यर्पण अनुरोध: भारत सरकार कर रही कानूनी समीक्षा

    नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण (एक देश से दूसरे देश को सौंपने) की माँग वाले अनुरोध पर भारत सरकार गहन कानूनी और न्यायिक समीक्षा कर रही है। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा मामला आंतरिक कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत जाँचा जा रहा है, और भारत बांग्लादेश के लोगों के व्यापक हितों—जिनमें शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता शामिल हैं—के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

    ज्ञात हो कि शेख हसीना को पिछले सप्ताह ढाका की एक विशेष अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ के आरोप में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी।

    सज़ा का कारण और पृष्ठभूमि
    यह सज़ा पिछले साल छात्रों के नेतृत्व में हुए एक बड़े आंदोलन के दौरान शेख हसीना की सरकार द्वारा की गई कथित क्रूर दमनकारी कार्रवाई से जुड़ी हुई है। बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, पाँच अगस्त, दो हज़ार चौबीस को शेख हसीना भारत चली आई थीं। उनके करीबी सहयोगी और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इसी तरह के आरोपों में मौत की सज़ा सुनाई गई है। अदालत के इस फ़ैसले के बाद, बांग्लादेश सरकार ने भारत को औपचारिक पत्र भेजकर शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल दोनों के प्रत्यर्पण की माँग की थी।

    भारत सरकार का रुख
    इस अनुरोध पर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि यह अनुरोध न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाओं के दायरे में है। उन्होंने दोहराया, “हम बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र तथा लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध हैं और सभी पक्षकारों के साथ रचनात्मक बातचीत बनाए रखेंगे।” इस दौरान, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश के सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नज़र रखे हुए है।

    भारत का यह बयान दिखाता है कि वह इस अत्यंत संवेदनशील मामले को सीधे राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय, पूरी तरह से कानूनी ढांचे के तहत सुलझाना चाहता है, ताकि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर अनावश्यक तनाव न पड़े।

    बांग्लादेश का दावा और हसीना का पक्ष
    दूसरी ओर, बांग्लादेश का विदेश मंत्रालय यह दावा कर रहा है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना को तुरंत सौंपना भारत का दायित्व है। बांग्लादेश सरकार इस मामले को दोनों देशों के बीच हुए समझौते के पालन के रूप में देख रही है।

    वहीं, शेख हसीना का पक्ष है कि यह सज़ा एक ‘अवैध न्यायाधिकरण’ (गैर-कानूनी ट्रिब्यूनल) ने दी है। उनके अनुसार, इस न्यायाधिकरण की स्थापना और संचालन एक अनिर्वान्चित अंतरिम सरकार ने किया है, जिसके पास कोई लोकतांत्रिक जनादेश (जनादेश) नहीं है। उनका तर्क है कि यह सज़ा राजनीतिक प्रतिशोध (बदले) की भावना से प्रेरित है और इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं है।

    यह फ़ैसला ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में फ़रवरी दो हज़ार छब्बीस में संसदीय चुनाव होने हैं और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को फिलहाल चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। ऐसे में, यह प्रत्यर्पण मामला केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि बांग्लादेश की वर्तमान और भविष्य की राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करने वाला एक बड़ा घटनाक्रम बन गया है, जिस पर पूरी दुनिया की नज़र है। भारत इस मामले में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहा है।

  • इमरान खान से नहीं मिलने देने पर धरने पर बैठी बहनें, शहबाज सरकार को दिया अल्टीमेटम

    इमरान खान से नहीं मिलने देने पर धरने पर बैठी बहनें, शहबाज सरकार को दिया अल्टीमेटम

    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान के रावलपिंडी में अदियाला जेल के बाहर एक हफ्ते के बाद फिर से इमरान ख़ान की बहनें अपने भाई से मिलने के लिए पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ़ (PTI) के हज़ारों कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठ गईं. देर रात शुरू हुए इस प्रोटेस्ट में पार्टी के कई नेता भी उनके साथ मौजूद दिखे. इस बार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की बहनें और PTI के नेता आर-पार के मूड में हैं. उन्होंने शहबाज सरकार को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर इमरान ख़ान से उन्हें जेल में नहीं मिलने दिया गया तो ये प्रदर्शन जारी रहेगा. धरने के दौरान PTI के नेता आज़ादी के नारे लगाते रहे.

    इमरान ख़ान की बहन नोरीन नियाज़ी के मुताबिक़ अगर पाकिस्तानी सरकार 5 मिनट भी उन्हें इमरान ख़ान से मिल लेने देती तो वो आराम से चली जातीं, लेकिन पता नहीं इमरान ख़ान को किस हालत में रखा गया है और आख़िर क्यों उनसे नहीं मिलने दिया जा रहा है.

    4 हफ्ते से क्या छिपा रही शहबाज सरकार?

    कोर्ट के आदेश के बावजूद पाकिस्तान की शहबाज़ शरीफ सरकार और पाकिस्तानी पंजाब की मरियम नवाज़ सरकार इमरान ख़ान की बहनों को बीते 4 हफ़्ते से अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से नहीं मिलने दे रही है. पिछले हफ्ते भी इमरान ख़ान की बहनों को जब इमरान ख़ान से मिलने नहीं दिया गया था तो वो धरने पर बैठ गई थी, हालांकि इसके बाद रात में पाकिस्तानी पुलिस ने इमरान ख़ान की बहन नोरीन खानूम नियाज़ी के साथ मारपीट की थी और गिरफ्तार कर लिया था.

    मंगलवार रात को एक बार फिर इमरान ख़ान की बहने जेल के बाहर धरने पर बैठ गईं. पिछली बार जहां इनके साथ 100 के आसपास कार्यकर्ता थे तो इस बार धरने पर कई नेता भी मौजूद है और हज़ारों की संख्या में जेल के बाद कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं.

  • पेशावर हमले के बाद पाक का जवाब, अफगानिस्तान में आधी रात में की बमबारी, 10 की मौत

    पेशावर हमले के बाद पाक का जवाब, अफगानिस्तान में आधी रात में की बमबारी, 10 की मौत

    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के पेशावर में कल सोमवार (24 नवंबर) को फिदायीन हमला हुआ था. इसके जवाब में पाकिस्तानी आर्मी ने अफगानिस्तान में बड़ा हमला किया है. पाकिस्तानी सेना ने इस बार अफगान के रिहायशी इलाकों को अपना निशाना बनाया है. पाकिस्तान की ओर से की गई एयर स्ट्राइक में 10 अफगान नागरिकों की मौत हुई है. मरने वालों में 9 बच्चे शामिल हैं और इन सभी बच्चों की उम्र 10 साल से भी कम बताई जा रही है.

    अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद के मुताबिक़, हमला कल बीती रात अफ़ग़ानिस्तान के समय अनुसार रात 12 बजे हुआ था और पाकिस्तानी वायुसेना ने अफ़ग़ानिस्तान के खोस्त, कंधार और पक्तिका प्रांत को निशाना बनाया. इसमें 10 लोगों की मौत के अलावा 4 लोग घायल भी हुए हैं.

    अफ़ग़ानिस्तान के रिहाइशी इलाकों को निशाना बना रहा पाकिस्तान
    पाकिस्तानी सेना पिछले महीने अक्टूबर से ही अफ़ग़ानिस्तान के रिहाइशी इलाकों को अपना निशाना बना रही है. पिछले महीने अफ़ग़ानिस्तान में एयर स्ट्राइक के दौरान पाकिस्तानी सेना ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाते हुए 59 मासूम अफ़ग़ानियों की जान ले ली थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तुर्किये और कतर की मध्यस्ता में सीजफायर का ऐलान हुआ था.

    तालिबान के प्रवक्ता ने क्या कहा
    अफ़ग़ानिस्तान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान इस तरह के हमलों की कड़ी निंदा करता है और एक बार फिर दोहराता है कि उसके पास अपनी हवाई और ज़मीनी सीमा तथा अपने लोगों की रक्षा करने का कानूनी और धार्मिक अधिकार है और उचित समय पर आवश्यक जवाब दिया जाएगा.

    पाकिस्तान ने बीती रात अफ़ग़ानिस्तान के पक्तिका, कुनार और खोस्त प्रांत में हमला किया, जिसमें खोस्त के गुरबाज़ जिले में एक रिहायशी मकान में हमला किया गया इसमें 9 बच्चों की मौत हो गई. इसके अलावा पक्तिका के बारमल जिले में पाकिस्तानी सेना ने हवाई हमला एक मस्जिद पर किया था, जिसमें 2 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

  • अफगानिस्तान ने भारत को दिया बड़ा निवेश ऑफर, पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची

    अफगानिस्तान ने भारत को दिया बड़ा निवेश ऑफर, पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची

    नई दिल्ली। अफगानिस्तान ने भारत को एक बड़ा निवेश ऑफर दिया है, जिसे जानकर पाकिस्तान को न केवल परेशानी हो सकती है, बल्कि वह इस ऑफर से जलकर खाक भी हो सकता है। अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी ने भारतीय कंपनियों को अफगानिस्तान में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया है। उनका कहना है कि अफगानिस्तान सोने के खनन समेत कई अन्य क्षेत्रों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों को पांच साल की कर छूट देने को तैयार है।

    अजीजी सोमवार को उद्योग मंडल ‘एसोचैम’ द्वारा आयोजित एक परिचर्चा सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा तनाव व्यापार में बड़ी बाधा डाल रहा है और इस कारण भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों को और बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में निवेश के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं और यहां कम प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिलती है।

    अजीजी ने कहा, “अफगानिस्तान में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों को न केवल पांच साल की कर छूट मिलेगी, बल्कि वे आसानी से भूमि प्राप्त कर सकती हैं। इसके अलावा, यदि कंपनियां मशीनरी आयात करती हैं, तो अफगानिस्तान केवल एक प्रतिशत शुल्क लगाएगा।” उनका कहना था कि इस तरह के निवेश से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं।

    सोने के खनन में निवेश की अपील

    अफगान मंत्री ने विशेष रूप से सोने के खनन क्षेत्र में निवेश को लेकर भारतीय कंपनियों से सहयोग का आह्वान किया। उनका कहना था कि इस क्षेत्र में काम शुरू करने के लिए तकनीकी और पेशेवर दलों की आवश्यकता होगी। इसलिए, उन्होंने भारतीय कंपनियों से अनुरोध किया कि वे पहले अपने विशेषज्ञ दल अफगानिस्तान भेजें, जो यहां के खनन क्षेत्रों का अध्ययन और शोध कर सकें, ताकि बाद में यहां निवेश और काम शुरू किया जा सके।

    अजीजी ने यह भी कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि खनन के प्रसंस्करण का काम अफगानिस्तान में ही किया जाएगा, ताकि वहां रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकें। उनका मानना था कि इससे न केवल अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि भारतीय कंपनियों को भी एक नया बाजार मिलेगा, जिसमें वे आसानी से प्रवेश कर सकती हैं।

    भारत-अफगानिस्तान व्यापार संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता

    अजीजी ने भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय संबंधों में कुछ छोटी-छोटी बाधाओं को दूर करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने भारत सरकार के अधिकारियों से आग्रह किया कि वीजा, हवाई मार्ग और बैंकिंग लेन-देन जैसे मामूली मुद्दों को हल किया जाए, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के रास्ते खोल सकें। उनका कहना था कि इन समस्याओं के समाधान से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और अधिक प्रगति कर सकते हैं।

    अफगानिस्तान के उद्योग मंत्री वर्तमान में छह दिन की भारत यात्रा पर हैं और इस दौरान वे भारत सरकार के विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। उनके भारत दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाना है।

    पाकिस्तान को हो सकती है परेशानी

    अफगानिस्तान द्वारा भारत को दी गई कर छूट और निवेश के अवसरों की खबर से पाकिस्तान को निश्चित रूप से परेशानी हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। अफगानिस्तान ने कई बार पाकिस्तान की सीमा पर सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे उठाए हैं। ऐसे में भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंध पाकिस्तान के लिए एक नई चुनौती हो सकते हैं, जो उसके लिए घातक साबित हो सकता है।

    अजीजी ने अफगानिस्तान में निवेश को लेकर जो प्रस्ताव भारत के सामने रखा है, वह न केवल भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का एक अवसर है, बल्कि यह क्षेत्रीय व्यापार में नए रास्ते खोलने के लिए भी एक अहम कदम हो सकता है।

    यह प्रस्ताव अफगानिस्तान की ओर से भारत के प्रति एक सकारात्मक संकेत है, जो दोनों देशों के बीच अच्छे व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों के लिए सहायक हो सकता है। इसके साथ ही, यह पाकिस्तान के लिए भी एक संकेत हो सकता है कि उसे क्षेत्रीय व्यापार में नई भूमिका निभाने के लिए अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

  • भारत का चीन पर तीखा प्रहार: अरुणाचल महिला को 18 घंटे रोके रखने पर मुआवज़े की मांग

    भारत का चीन पर तीखा प्रहार: अरुणाचल महिला को 18 घंटे रोके रखने पर मुआवज़े की मांग


    नई दिल्ली
    भारत ने चीन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जब शंघाई के पुडोंग एयरपोर्ट पर एक अरुणाचल प्रदेश की भारतीय महिला यात्री को 18 घंटे तक हिरासत में रखा गया। चीन के आव्रजन अधिकारियों ने महिला के पासपोर्ट को अमान्य बताते हुए उसे रोकने की कार्रवाई की, केवल इसलिए कि उसके जन्मस्थान के रूप में अरुणाचल प्रदेश लिखा था। भारत ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का अपमान और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों का उल्लंघन बताते हुए चीन से जवाबदेही और मुआवज़ा मांगने का आग्रह किया है।
    अरुणाचल प्रदेश के उल्लेख पर रोक
    सरकारी सूत्रों के अनुसार, महिला यात्री पेमा वांगजोम थोंगडोक 21 नवंबर को लंदन से जापान की यात्रा कर रही थीं। शंघाई एयरपोर्ट पर ट्रांजिट के दौरान उन्हें अचानक रोक लिया गया। चीनी अधिकारियों ने उनके भारतीय पासपोर्ट को अमान्य ठहराते हुए बार-बार पूछताछ की। महिला के अनुसार, उन्हें यह कहा गया कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है और उन्हें चीनी पासपोर्ट के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई।पेमा थोंगडोक ने बताया कि उनके पास वैध जापानी वीज़ा होने के बावजूद उनकी उड़ान रोकी गई, पासपोर्ट जब्त किया गया और उन्हें नया टिकट खरीदने के लिए मजबूर किया गया। इस प्रक्रिया में उन्हें 18 घंटे तक हवाई अड्डे पर रोके रखा गया।
    भारत का कड़ा रिएक्शन
    घटना के सामने आने के तुरंत बाद शंघाई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने महिला की मदद की और उसे सुरक्षित आगे की यात्रा के लिए आवश्यक समर्थन दिया। वहीं, भारत सरकार ने चीन को स्पष्ट संदेश भेजा कि यह कार्रवाई भारत की संप्रभुता का सीधा अपमान है। भारत ने दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहाँ के नागरिकों को अपने भारतीय पासपोर्ट पर यात्रा का पूर्ण अधिकार है।

    अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन
    भारत ने इस मामले में कहा कि चीन की कार्रवाई शिकागो और मॉन्ट्रियल कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों का उल्लंघन करती है। भारत ने चीन से निम्नलिखित मांगें की हैं: घटना के लिए जवाबदेही तय करना
    महिला को उचित मुआवज़ा देना
    भविष्य में अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार दोबारा न होने का आश्वासन देना
    राजनयिक और द्विपक्षीय प्रभावयह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन अपने तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। भारत ने चेतावनी दी है कि इस तरह की घटनाएं दोनों देशों के बीच चल रहे शांतिपूर्ण प्रयासों में बाधा डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शंघाई में हुई यह कार्रवाई सिर्फ एक नागरिक पर नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अधिकारों पर हमला है। भारत ने इसे स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का संकेत दिया है।

  • ओटावा में खालिस्तानियों का ‘अनौपचारिक जनमत संग्रह’, भारतीय तिरंगे का अपमान; भारत-कनाडा रिश्तों पर फिर बादल

    ओटावा में खालिस्तानियों का ‘अनौपचारिक जनमत संग्रह’, भारतीय तिरंगे का अपमान; भारत-कनाडा रिश्तों पर फिर बादल


    कनाडा की राजधानी ओटावा में रविवार को खालिस्तानी समर्थक संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) द्वारा आयोजित अनौपचारिक ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ के दौरान भारतीय तिरंगे के अपमान की घटना सामने आई है। इस आयोजन में भारी संख्या में कनाडाई सिख समुदाय के लोग शामिल हुए, जहां वीडियो के मुताबिक भीड़ में कुछ लोगों द्वारा हिंसक और उकसावे वाले नारे भी लगाए गए। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत–कनाडा संबंध हाल के महीनों में कुछ हद तक सुधार की ओर बढ़ते दिख रहे थे।

    53 हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति का दावा
    यह आयोजन ओटावा के मैकनैब कम्युनिटी सेंटर में 23 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक चला। आयोजक SFJ के अनुसार, कनाडा के विभिन्न प्रांतों—ओन्टारियो, अल्बर्टा, ब्रिटिश कोलंबिया और क्यूबेक—से 53,000 से अधिक समर्थक यहां पहुँचे। संगठन का दावा है कि छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक लोग सुबह से ही कतार में थे, और तीन बजे आधिकारिक समय समाप्त होने के बाद भी हजारों लोग मतदान के लिए लाइन में खड़े थे, जिसके चलते वोटिंग को बढ़ाना पड़ा।

    वीडियो में ‘घेरो-काटो’ जैसे उग्र नारे
    अल्बर्टा स्थित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म मीडिया बेजिर्गन द्वारा साझा किए गए वीडियो में मतदान स्थल पर भारी भीड़ दिखाई देती है। कुछ वीडियो में खालिस्तानी समर्थक कथित तौर पर भारतीय नेताओं और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ उग्र और हिंसक नारे लगाते नज़र आ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस के लायजन अधिकारी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में सीमित सहयोग तो किया, लेकिन हस्तक्षेप नहीं किया।

    भारतीय तिरंगे का अपमान – वीडियो हुआ वायरल
    वोटिंग समाप्त होने के बाद कुछ खालिस्तानी समर्थकों द्वारा भारतीय तिरंगे के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की घटनाएँ सामने आईं, जिनके वीडियो ऑनलाइन प्रसारित हैं। भारत में प्रतिबंधित संगठन SFJ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में तिरंगे के अपमान को भारतीय समुदाय और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की है।

    गुरपतवंत पन्नून का ‘सैटेलाइट संदेश’
    भारत में यूएपीए (UAPA) के तहत प्रतिबंधित SFJ के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नून, जिन्हें भारत ने आतंकवादी घोषित किया है, ने इस कार्यक्रम में सैटेलाइट संदेश के माध्यम से भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने अपनी गतिविधियों को “जनमत की अभिव्यक्ति” बताया, जबकि भारत सरकार ऐसे किसी भी आयोजन को देश की संप्रभुता पर हमला मानती है।

    कनाडाई प्रधानमंत्री की मोदी से मुलाकात पर सवाल
    जनमत संग्रह के दिन ही दक्षिण अफ्रीका में हो रहे G20 नेताओं के सम्मेलन के इतर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई थी। SFJ ने इस मुलाकात पर सवाल उठाते हुए संकेत दिया कि कनाडाई सिख समुदाय की “बढ़ती सक्रियता” के बीच ऐसी बैठक “संदिग्ध” है। हालांकि कनाडाई सरकार ने पहले भी कहा है कि वह अपने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने को प्रतिबद्ध है।

    भारत-कनाडा संबंध फिर तनाव की ओर?
    खालिस्तानी समर्थक कार्रवाइयों को लेकर भारत पहले भी कनाडा को कई बार चेतावनी दे चुका है। नई दिल्ली का कहना है कि हिंसक, अलगाववादी गतिविधियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार नहीं दिया जा सकता। ओटावा की इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों पर फिर से तनाव की छाया पड़ सकती है, खासकर जब हाल ही में दोनों देशों के बीच कुछ सकारात्मक संकेत दिखने लगे थे।

    अतीत में भी कई बार हुआ तिरंगे का अपमान
    कनाडा में इससे पहले भी तिरंगे के अपमान और खालिस्तानी उग्र नारेबाजी की कई घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं।

    मार्च 2024 में कॅलगरी में प्रदर्शनकारियों ने तलवारों और भालों से तिरंगा फाड़ने की कोशिश की थी।

    अप्रैल 2025 की वैसाखी परेड (सरे, कनाडा) में ध्वज को जमीन पर घसीटने की घटना सामने आई थी।

    नवंबर 2025 की शुरुआत में मॉन्ट्रियल की एक रैली में 500 से अधिक वाहन शामिल थे, जहां ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे।

    15 नवंबर 2025 को ओटावा में भारतीय उच्चायुक्त के घर के बाहर रैली निकाली गई, जिसमें एयर इंडिया Kanishka बमकांड से जुड़े दोषियों में शामिल संतोक सिंह खेला को भी देखा गया।

    नतीजा: कूटनीति की नई चुनौती
    ओटावा की यह घटना भारत–कनाडा संबंधों को एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर ले जाने की क्षमता रखती है। जहां भारत ऐसे आयोजनों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है, वहीं कनाडा के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उग्रवाद विरोधी नीतियों के बीच संतुलन एक जटिल चुनौती बन गया है। आने वाले महीनों में दोनों देशों की कूटनीतिक प्रतिक्रिया इस विषय को किस दिशा में ले जाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।