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  • नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया

    नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया


    वाशिंगटन।
    नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की मांग कर रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को नोबेल तो नहीं लेकिन फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) जरूर मिल गया है। फुटबॉल की वैश्विक संस्था (FIFA) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने नए फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार खेल से इतर वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ट्रंप इसके पहले विजेता हैं।


    फीफा ने क्यों दिया यह पुरस्कार

    डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए।

    फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं।” इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को ‘दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान’ देने वाला बताया गया।

    इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, “आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए।

    फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, “यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।

  • यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत

    यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) (United Nations General Assembly (UNGA) ने रूस पर दबाव बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। इसमें रूस से यूक्रेनी बच्चों को तुरंत और बिना शर्त वापस लौटाने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मानवीय संकट पर केंद्रित है, जहां कथित तौर पर हजारों बच्चों को जबरन रूसी क्षेत्र में निर्वासित किया गया है। इस महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान हुआ, जिसमें भारत ने मतदान से परहेज किया।

    193 सदस्यीय महासभा में ‘यूक्रेनी बच्चों की वापसी’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को 91 देशों ने समर्थन दिया, 12 देशों ने इसका विरोध किया और 57 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ-साथ बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका ने भी वोटिंग से परहेज किया। बता दें कि यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले पेश किया गया था। भारत ने फिलहाल वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।


    प्रस्ताव में क्या कहा गया?

    प्रस्ताव में युद्ध के बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई, विशेषकर उन यूक्रेनी बच्चों की स्थिति पर जिन्हें 2014 के बाद अपने परिवारों से अलग कर रूस-नियंत्रित इलाकों में ले जाया गया या रूस भेजा गया।


    महासभा ने रूस से मांग की कि वह-

    – जबरन ले जाए गए सभी यूक्रेनी बच्चों को तुरंत, सुरक्षित और बिना शर्त वापस भेजे।
    – बच्चों के जबरन निर्वासन, परिवारों से अलगाव, नागरिकता बदलने, दत्तक ग्रहण या फॉस्टर केयर में रखने जैसी सभी कार्रवाइयों को तुरंत रोके।
    – इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

    प्रस्ताव ने रूस द्वारा 2022 के बाद किए गए उन कानूनी बदलावों पर भी आपत्ति जताई, जिनसे यूक्रेनी अनाथ बच्चों या अभिभावक-विहीन बच्चों को रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है।

    यूक्रेन का दावा: 20000 से अधिक बच्चों के मामले की जांच
    यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेट्सा ने महासभा में मसौदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 तक 6395 बच्चों की जबरन ट्रांसफर/डेपोर्टेशन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20,000 से अधिक मामलों की जांच जारी है।


    रूस का जवाब: झूठे आरोपों से भरा प्रस्ताव

    रूस की उप स्थायी प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने मसौदा प्रस्ताव को झूठे आरोपों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि कई बच्चे युद्ध क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए थे, जिसे उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यूक्रेनी शरणार्थियों के लिए रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना स्वेच्छिक और बिना किसी दबाव के है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के पक्ष में हर वोट झूठ, युद्ध और टकराव के समर्थन में है, जबकि विरोध में दिया गया हर वोट शांति के पक्ष में है।


    यूएन महासभा अध्यक्ष की टिप्पणी

    यूएन महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बैरबॉक ने कहा कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से महासभा ने लगातार अपनी आठ अलग-अलग प्रस्तावों में रूस से तत्काल और बिना शर्त वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा- यूक्रेनी बच्चों का मामला खाली संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। यह पूरी स्थिति रूस के आक्रमण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से न सिर्फ यूक्रेन बल्कि अन्य क्षेत्रों और वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।

  • पुतिन की भारत यात्रा: राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी, पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत

    पुतिन की भारत यात्रा: राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी, पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत



    नई दिल्ली ।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू की। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और चार साल बाद उनकी भारत यात्रा है। इस दौरान भारत और रूस के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग को बढ़ाने व्यापारिक रिश्तों को प्रगाढ़ करने और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    भारत-रूस साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ

    पुतिन की यात्रा भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर हो रही है। यह साझेदारी अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थी और दिसंबर 2010 में इसे स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है  खासकर रक्षा ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों में।

    यात्रा का मुख्य उद्देश्य

    पुतिन की इस यात्रा में प्रमुख रूप से रक्षा सहयोग, व्यापारिक रिश्तों और बाहरी दबावों से दोनों देशों को बचाने पर ध्यान दिया जाएगा। भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में पुराने संबंध रहे हैं, और दोनों देशों के बीच यह सहयोग और मजबूत हो सकता है। साथ ही  भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी पर विचार हो सकता है।

    शिखर सम्मेलन और RT इंडिया चैनल का शुभारंभ

    5 दिसंबर को पुतिन का औपचारिक स्वागत होगा जिसके बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे जिनमें रक्षा ऊर्जा व्यापार और सामरिक साझेदारी से संबंधित मुद्दे शामिल होंगे।

    सम्मेलन के बाद पुतिन रूस के प्रसारक रूसी टेलीविजन के नए भारतीय चैनल का शुभारंभ करेंगे। यह चैनल भारत में रूसी मीडिया की पहुंच को बढ़ाने में मदद करेगा और भारत-रूस के संबंधों को और मजबूत बनाएगा।

    राजकीय भोज और भविष्य की दिशा

    यात्रा के अंतिम दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पुतिन के सम्मान में एक राजकीय भोज आयोजित करेंगी। यह भोज भारत-रूस संबंधों की गहरी साझेदारी और मित्रता का प्रतीक होगा।

    इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामरिक साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा। भारत और रूस के रिश्ते खासकर रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहे हैं और यह यात्रा इन रिश्तों को एक नए दौर में प्रवेश दिला सकती है।

    भारत-रूस का सामरिक महत्व

    भारत और रूस के बीच सामरिक रिश्ते बहुत मजबूत रहे हैं विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। रूस ने हमेशा भारत को उन्नत रक्षा प्रणाली प्रदान की है जिसमें विमान मिसाइलें और अन्य तकनीकी सहयोग शामिल है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा विज्ञान तकनीकी और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है।

    यह यात्रा भारत और रूस के रिश्तों में एक नई दिशा का संकेत देती है, जिसमें दोनों देशों के साझा हितों के साथ-साथ वैश्विक राजनीति में सामरिक समन्वय भी बढ़ेगा। पुतिन की यात्रा विशेष रूप से रक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में भारत-रूस साझेदारी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • भारत पहुंचे पुतिन: राष्ट्रपति भवन में मिला 21 तोपों की सलामी का सम्मान

    भारत पहुंचे पुतिन: राष्ट्रपति भवन में मिला 21 तोपों की सलामी का सम्मान


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत पहुंचे और उनके आगमन पर राजधानी दिल्ली में पारंपरिक सम्मान के साथ शानदार स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और भारतीय सेना की तीनों सेवाओं ने गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद थोड़ी ही देर में पुतिन और मोदी राजघाट पहुंचे, जहां दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की

    पुतिन के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में सात वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं, जिनकी उपस्थिति इस दौरे की अहमियत को दर्शाती है। दोनों देशों के बीच आज दो महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित हैं जिनमें से एक क्लोज़्ड-डोर बैठक होगी। इनके दौरान रक्षा, ऊर्जा, आर्थिक सहयोग और कौशल आधारित भारतीय कामगारों की आवाजाही को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। उम्मीद है कि मुलाकात के दौरान 25 से अधिक द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जो भविष्य में भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद पुतिन का काफिला राजघाट के लिए रवाना हुआ। सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई थी और रास्तों को पहले ही खाली करा लिया गया था। राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों नेता हैदराबाद हाउस पहुँचे, जहाँ 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच दशकों पुराने विश्वास और सहयोग की परंपरा को आगे बढ़ाने का एक और अवसर है।

    पुतिन की यात्रा का एक दिलचस्प पहलू वह सफेद टोयोटा फॉर्च्यूनर सिग्मा-4 भी रही जिसमें पीएम मोदी और पुतिन एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक साथ बैठे। यह गाड़ी मुंबई के एक एडिशनल पुलिस कमिश्नर के नाम रजिस्टर्ड है और अप्रैल 2024 में पंजीकृत हुई थी। सुरक्षा के लिहाज से पीएम की रेंज रोवर और पुतिन की विशेष सुरक्षा वाली कारें भी काफिले में शामिल थीं।

    फ्लाइटडाटा-24 की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन का विमान Ilyushin Il-96-300 मॉस्को के ज़ुकोवस्की एयरपोर्ट से उड़ा और कजाकिस्तान, कैस्पियन सागर, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर राजस्थान के ऊपर भारतीय सीमा में दाखिल हुआ। यह उड़ान मार्ग अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से सावधानीपूर्वक तय किया गया था।

    भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा ही रिश्तों की मजबूत नींव रहा है। पुतिन ने हाल ही में कहा था कि भारत और रूस का रिश्ता सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त का नहीं बल्कि गहरे विश्वास और तकनीकी साझेदारी का है। यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग की ओर संकेत करती है।

    पुतिन के आगमन की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वयं उनका स्वागत कर इस दौरे को विशेष महत्व दिया। दोनों नेताओं ने एक ही गाड़ी में सफर किया और रात में पीएम आवास पर निजी रात्रिभोज हुआ। इस मुलाकात की तस्वीरों और वीडियो को दुनिया भर के मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया। अमेरिका यूरोपीय देशों, यूक्रेन और एशियाई मीडिया ने भी इस दौरे के भू-राजनीतिक महत्व पर विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की हैं।

    भारत-रूस संबंध एक ऐसे दौर में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं जब वैश्विक राजनीति में बदलाव तेजी से हो रहे हैं। यह दौरा न केवल सामरिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते भी खोल सकता है।

  • भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन

    भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन


    नई दिल्ली।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने भारत-अमेरिका (India-America) के बीच रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच दो टूक कहा कि दुनिया का कोई भी देश भारत को आज से 77 साल पहले का हिन्दुस्तान समझने की भूल नहीं करे। उन्होंने कहा कि 150 करोड़ आबादी वाले इस देश ने अतीत से सीख लेकर हर क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर कोई भी देश दबाव बनाकर अपनी बात नहीं मनवा सकता। राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि भारत किसी भी देश के आगे झुकने वाला नहीं है और वह अपनी शर्तों पर किसी भी देश के साथ व्यापारिक संबंध बनाता है।

    एक इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया के सामने एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है। रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे और उस पर अमेरिका की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं कभी अपने सहयोगियों का चरित्र-चित्रण नहीं करता। उनका भी नहीं, जिन्होंने मेरे साथ काम किया और खासतौर पर राष्ट्राध्यक्षों का तो बिलकुल नहीं।


    अमेरिका अब भी हमसे यूरेनियम खरीद रहा

    उन्होंने कहा कि मेरे विचार में ये आकलन उस देश के नागरिकों को करना चाहिए, जिन्होंने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी है।लेकिन जहां तक भारत की ओर से रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद की बात है तो मैं साफ कर दूं कि अमेरिका अब भी अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे परमाणु ऊर्जा की खरीद करता है। इनमें अमेरिका में चल रहे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम भी शामिल है। पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका खुद अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से यूरेनियम खरीद सकता है तो फिर भारत की खरीद को लेकर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर गहन अध्ययन की जरूरत है। पुतिन ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से चर्चा के लिए तैयार हैं।


    भारत यात्रा पर पहुंचे हैं पुतिन

    बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रणनीतिक और वाणिज्यिक समझौतों के लिए भारत यात्रा पर पहुंचे हैं, लेकिन उनकी इस यात्रा को लेकर भारत का दृष्टिकोण इन समझौतों से कहीं अलग और स्पष्ट है, जो मात्र औपचारिक कुटनीति से कहीं अधिक तेजी से खंडित होती वैश्विक व्यवस्था को बचाने से जुड़ा है। भारत के लिए रूस तीन मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह वैश्विक स्तर पर टैरिफ की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है, कच्चे तेल का एक विश्वसनीय स्रोत है, और सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारत के पड़ोसी चीन को साधने में भूराजनैतिक कवच का काम करता है।

    भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा परिवर्तन
    पुतिन की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन के साथ अपनी बातचीत कर रहा है और यूरोप एक भयावह युद्ध से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। यदि ये वार्ताएं सफल होती हैं और यूक्रेन को थका देने वाला यह असमान युद्ध समाप्त हो जाता है, तो संभव है कि अमेरिका और रूस के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक नया दौर दुनिया के सामने आए। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत अपनी जरूरतों का केवल 2.5 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करता था लेकिन, प्रतिबंधों और यूरोपीय बाजारों द्वारा रूस के बहिष्कार के बाद भारत अपनी जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करने लगा है। इस प्रकार भारत की ऊर्जा रणनीति में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है।

  • भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा

    भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को चार साल बाद भारत पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले और एक ही कार में बैठकर PM निवास पहुंचे, जहां पुतिन के सम्मान में प्राइवेट डिनर आयोजित किया गया। यह दृश्य सिर्फ कूटनीति नहीं था बल्कि दुनिया को भारत-रूस की रणनीतिक गहराई का मजबूत संदेश भी था। इस दौरे को अमेरिका, यूरोप, यूक्रेन और ग्लोबल मीडिया ने बेहद करीब से कवर किया क्योंकि यह ऐसे वक्त हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की धुरी बदल रही है-ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आने रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच।

    ब्रिटेन: रूस अलग-थलग नहीं, भारत उसका अहम साथी
    मिडिया के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा इस बात का संकेत है कि रूस वैश्विक मंच पर अकेला नहीं है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, विशाल मार्केट है और रूस के लिए ऊर्जा, रक्षा और कौशल-आधारित कामगारों का प्रमुख स्रोत भी। रूस को उम्मीद है कि भारत सस्ती तेल खरीद और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।रूस भारत को Su-57 फाइटर जेट और नए एयर डिफेंस सिस्टम की पेशकश कर सकता है।

    कीव इंडिपेंडेंट यूक्रेन: भारत की कूटनीति की कठिन परीक्षा

    यूक्रेनी मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बताया। भारत को रूस और यूक्रेन दोनों से रिश्ते संभालने हैं। रूस चाहता है कि भारत उसके साथ खड़ा दिखे, जबकि अमेरिका-यूरोप उम्मीद करते हैं कि मोदी पुतिन पर दबाव डालें ताकि युद्ध कमजोर पड़े।
    यूक्रेन को यह चिंता भी है कि क्या मोदी उस वादे पर टिके रहेंगे जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से युद्ध खत्म कराने में मदद का आश्वासन दिया था। साथ ही, भारत का तटस्थ रुख ध्यान खींचता है-UN में रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों पर भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई है।

    द डॉन पाकिस्तान: रक्षा से ज्यादा व्यापार पर फोकस
    पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने लिखा कि पुतिन का यह दौरा रक्षा सहयोग और खासकर आर्थिक रिश्तों को मजबूती देने पर केंद्रित है। अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है, वहीं ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त में भारत के कई उत्पादों पर 50% टैरिफ भी लगा दिया था। रूस भारत को अधिक S-400 सिस्टम और Su-57 जेट के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दे सकता है।भारत को डर है कि रूस से किसी बड़ी डील का असर अमेरिका के साथ उसके आर्थिक रिश्तों पर पड़ सकता है।

    अल जजीरा कतर: मोदी-पुतिन का व्यक्तिगत रिश्ता जगजाहिर
    अल जजीरा ने जोर दिया कि मोदी द्वारा एयरपोर्ट पर जाकर गले लगाना व्यक्तिगत संबंधों की मजबूती का संकेत है। पुतिन ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को रूसी तेल खरीदने का पूरा हक है और यह साझेदारी यूक्रेन युद्ध से प्रभावित नहीं होगी। भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है2022 से पहले रूस से सिर्फ 2.5% तेल आता था, अब यह बढ़कर करीब 36% हो गया है, जिससे भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है।

    द गार्डियन (ब्रिटेन): रूस-भारत अमेरिकी दबाव से नहीं डरते

    द गार्डियन के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-भारत संबंध ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण तनावपूर्ण हैं। इस पृष्ठभूमि में पुतिन का दिल्ली पहुंचना यह संकेत है कि भारत-रूस अपने रणनीतिक हितों को किसी तीसरे देश के दबाव पर आधारित नहीं करते। रूस के लिए यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय अलगाव की धारणा तोड़ने का मंच है जबकि भारत के लिए यह संतुलन साधने का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास।

    भारत-रूस रिश्तों की नई परिभाषा

    पुतिन की यह यात्रा प्रतीकात्मक भी है और रणनीतिक भी।
    यह दिखाती है कि- भारत रूस को ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा का अनिवार्य स्तंभ मानता है
    रूस भारत को एशिया में अपना सबसे विश्वसनीय साझेदार और अमेरिका को यह संदेश है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है। दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थीं, बल्कि उस रिश्ते की झलक थीं जो वैश्विक ध्रुवीयता के बदलते दौर में भी मजबूती से खड़ा है
  • 44 अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान में लोकतंत्र पर चिंता जताई

    44 अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान में लोकतंत्र पर चिंता जताई

    नई दिल्ली। अमेरिकी संसद के 44 सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर तुरंत प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। सांसदों का आरोप है कि पाकिस्तान में सेना सरकार चला रही है और आम नागरिकों के अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन हो रहा है। विदेश में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिकों को भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर धमकियां मिल रही हैं। पत्र का नेतृत्व डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल और ग्रेग कासर ने किया। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान में तानाशाही बढ़ रही है। पत्रकारों को धमकाया जा रहा है, अगवा किया जा रहा है या देश छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है।

    प्रमुख घटनाएँ

    वर्जीनिया के जर्नलिस्ट अहमद नूरानी के दोनों भाइयों को पाकिस्तान में एक महीने से अधिक समय तक अगवा रखा गया। मशहूर संगीतकार सलमान अहमद के जीजा का अपहरण हुआ, जिन्हें अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद छोड़ा गया। विपक्षी नेताओं को बिना आरोप जेल में डाला जा रहा है। आम नागरिकों को सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तार किया जा रहा है। महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और बलूचिस्तान के लोगों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहे हैं।

    2024 के चुनाव और धांधली

    सांसदों ने 2024 के आम चुनावों में भारी धांधली का जिक्र किया। स्वतंत्र संस्था की ‘पट्टन रिपोर्ट’ और अमेरिकी विदेश विभाग ने गड़बड़ी की पुष्टि की थी। पत्र में कहा गया कि चुनावों के जरिए सिर्फ एक कठपुतली सरकार बनाई गई है, जिसे वास्तव में सेना चलाती है। सेना के दबाव में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि आम नागरिकों के केस भी सैन्य अदालतों में चल सकते हैं।

    संभावित अमेरिकी प्रतिबंध

    वीजा बैन: अमेरिका में यात्रा पर पूर्ण रोक। संपत्ति जब्ती: अमेरिका या अमेरिकी प्रभाव वाले देशों में बैंक खाते और लेन-देन रोक ग्लोबल मैग्निट्सकी एक्ट के तहत। अमेरिकी–पाकिस्तानी उच्चस्तरीय बैठकें  आसिम मुनीर 2025 में दो बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिले। सितंबर में शहबाज और मुनीर ने ट्रम्प से लगभग 1 घंटा 20 मिनट की बैठक की।

    इमरान खान और राजनीतिक कैदी

    अमेरिकी सांसदों ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और अन्य राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की। इमरान के परिवार को 27 दिन तक उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिली; 2 दिसंबर को मिलने की इजाजत मिली। 27वां संवैधानिक संशोधन और सेना का प्रभाव 12 नवंबर को पास हुए 27वें संशोधन से सेना की ताकत बढ़ी और कोर्ट के अधिकार कम हुए।  फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को CDF बनाए जाने की योजना थी लेकिन अभी तक पद खाली है।पीएम शहबाज शरीफ ने नोटिफिकेशन पर साइन नहीं किया; इस बीच वे बहरीन और लंदन यात्रा पर गए।

  • पुतिन भारत दौरे पर रवाना: शाम को PM मोदी देंगे प्राइवेट डिनर; S-400 खरीद पर हो सकता है बड़ा समझौता, पाकिस्तानी जेट गिराने में है सक्षम

    पुतिन भारत दौरे पर रवाना: शाम को PM मोदी देंगे प्राइवेट डिनर; S-400 खरीद पर हो सकता है बड़ा समझौता, पाकिस्तानी जेट गिराने में है सक्षम


    नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच कल शुक्रवार को 9 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं जिसमें रक्षा सौदे प्रमुख होंगेभारत रूस से और ज्यादा S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने पर डील कर सकता है।’ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान S-400 ने कई पाकिस्तानी जेट्स मार गिराए थे, जिसने भारत के लिए गेमचेंजर का काम किया।इसके अपडेटेड वर्जन S-500 को खरीदने को लेकर भी बातचीत हो सकती है।पुतिन के दौरे से ठीक पहले, भारत ने रूस से करीब 2 अरब डॉलर में परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन पनडुब्बी 10 साल की लीज पर लेने की डील लगभग फाइनल कर ली है। यह सबमरीन भारतीय नौसैनिकों को ट्रेनिंग देने में मदद करेगी।
    रणनीतिक स्वायत्तता की असली परीक्षा
    पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पीएम मोदी अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूत करना चाहते हैं, लेकिन भारत-अमेरिका संबंध ट्रम्प प्रशासन के लौटने के बाद सबसे खराब दौर में चले गए हैं।भारत की रणनीति रही है कि वह रूस को छोड़े नहीं और पश्चिमी देशों को भी नाराज न करे। मोदी के लिए यह संतुलन साधना अहम हैट्रम्प के लौटने के बाद भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ का मामला अभी भी अटका हुआ है, ऐसे में पुतिन का दौरा मोदी की रणनीतिक स्वतंत्रता की असली परीक्षा है। भारत को यह दिखाना होगा कि वह पुतिन का भरोसेमंद साझेदार है, लेकिन अमेरिका और यूरोप को भी पूरी तरह नाराज नहीं कर रहा है।

    रूस का दबदबा घटा, पर अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर

    पिछले दस साल में भारत ने अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है, जिससे हथियारों की सप्लाई में रूस की हिस्सेदारी घटकर लगभग 36% रह गई है SIPRI रिपोर्ट। हालांकि, रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बना हुआ है, खासकर न्यूक्लियर सबमरीन, मिसाइल डिफेंस और विशेष तकनीक जैसे बड़े डिफेंस सिस्टम के लिए।

    2030 तक $100 अरब ट्रेड का लक्ष्य

    पुतिन दो दिवसीय दौरे पर 23वीं भारत-रूस समिट में भाग लेंगे, जिसका मुख्य लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना है।एनर्जी, इन्वेस्टमेंट, तकनीक और इंडस्ट्री।भारत रूस की मदद से कुडनकुलम  तमिलनाडु में न्यूक्लियर पावर प्लांट चला रहा है। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर भी बात होगी।

    इंडियन वर्कर्स के लिए रूस में नौकरी और पेमेंट सिस्टम पर बात

    पुतिन के साथ 7 मंत्री और रूसी सेंट्रल बैंक के गवर्नर भी आ रहे हैं। इस दौरान दो बड़े मुद्दों पर बात हो सकती हैरूस में वर्कर्स की कमी के कारण, रूस चाहता है कि भारत से तकनीकी विशेषज्ञ, मेडिकल स्टाफ, इंजीनियर आदि आएं। भारत से 10 लाख स्किल्ड वर्कर्स को रूस में रोजगार देने के लिए मोबिलिटी पैक्ट हो सकता है।
    अमेरिका और यूरोपीय दबाव के कारण रूस से सस्ता क्रूड ऑयल खरीदने के पेमेंट में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए, रुपया-रूबल ट्रेड, डिजिटल भुगतान या किसी तीसरे देश के बैंक का इस्तेमाल जैसे नए पेमेंट सिस्टम बनाने पर सहमति बन सकती हैरूस, भारत को आर्कटिक रीजन की एनर्जी परियोजनाओं में निवेश का मौका भी दे सकता है।

    पुतिन करेंगे ज़्यादा तेल खरीद की डिमांड

    यूक्रेन युद्ध के बाद भारत की रूस से तेल खरीद 2.5% से बढ़कर 35% हो गई थी, लेकिन अमेरिका के टैरिफ लगाने के बाद भारत ने यह खरीद कम कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन चाहते हैं कि भारत दोबारा बढ़-चढ़कर रूसी तेल खरीदे, जो दोनों देशों के व्यापार संतुलन के लिए अहम है।पुतिन दिल्ली के ITC मौर्य होटल में रुकेंगे, और दोनों नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत होगी।
  • कंगाल पाकिस्तान पर IMF की शिकंजा, सरकारी एयरलाइन PIA की लाइव नीलामी 23 दिसंबर को

    कंगाल पाकिस्तान पर IMF की शिकंजा, सरकारी एयरलाइन PIA की लाइव नीलामी 23 दिसंबर को


    नई दिल्‍ली ।
    पाकिस्तान की आर्थिक हालत अब इतनी बिगड़ चुकी है कि उसे अपनी सरकारी एयरलाइन Pakistan International Airlines (PIA) तक बेचनी पड़ रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने घोषणा की है कि 23 दिसंबर 2025 को इस एयरलाइन की नीलामी लाइव दिखायी जाएगी. यह फैसला IMF के कड़े दबाव और बेलआउट पैकेज की कठिन शर्तों को देखते हुए लिया गया है.

    PIA को खरीदने की दौड़ में चार बड़े नाम शामिल हैं. इन चारों में सबसे ज़्यादा चर्चा फौजी फर्टिलाइज़र कंपनी की है, जो सीधे पाकिस्तानी सेना के प्रभाव में चलने वाली फौजी फाउंडेशन से जुड़ी है. पाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सेना की गहरी पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि अंततः यह एयरलाइन उसी समूह के हाथों जा सकती है. बाकी दावेदारों में लकी सीमेंट समूह, आरिफ हबीब कॉर्प और एयर ब्लू लिमिटेड भी शामिल हैं. यह पहली बार है जब पाकिस्तान किसी सरकारी एयरलाइन की बोली को सार्वजनिक तौर पर लाइव दिखाएगा.

    IMF की शर्तों पर ही बची अर्थव्यवस्था
    पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से कर्ज पर कर्ज लेकर चल रहा है. 2023 में देश लगभग दिवालिया होने के कगार पर था. रक्षा खर्च लगातार बढ़ता गया और राजस्व घटता रहा. IMF से लिए गए कर्ज़ों की संख्या 20 से भी अधिक हो चुकी है, जबकि देश की अपनी आर्थिक क्षमता बहुत कम है. IMF ने 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंजूरी तो दी, लेकिन शर्त रखी कि पाकिस्तान सरकारी कंपनियों में सुधार करे, घाटा कम करे और PIA जैसी डूबती कंपनियों का निजीकरण करे.

    PIA की तबाही कैसे हुई?
    कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानी जाने वाली PIA अपनी ही गलतियों के कारण बर्बादी की गहराई में चली गई. 2020 में सामने आया कि लगभग एक-तिहाई पाकिस्तानी पायलटों के लाइसेंस फर्जी या संदिग्ध थे. इस खुलासे के बाद यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका ने PIA की उड़ानों पर रोक लगा दी. इसके साथ भ्रष्टाचार, राजनीतिक दखल, रिश्तेदारी आधारित भर्तियां और गैर-जरूरी कर्मचारियों की भीड़ ने एयरलाइन को पूरी तरह खोखला कर दिया. हर साल अरबों का घाटा लिखने वाली यह कंपनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक बीमारी बन गई.

    कर्ज में डूबे देश
    पाकिस्तान अब वहां पहुंच चुका है, जहां पुराने कर्ज़ चुकाने के लिए भी नया कर्ज़ लेना पड़ रहा है. ऐसे में PIA का निजीकरण उसके लिए मजबूरी बन गया है. IMF की शर्तें पूरी करने के अलावा पाकिस्तान के पास कोई और रास्ता दिखाई नहीं दे रहा. आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि क्या PIA को बेचने के बाद देश अपने आर्थिक गिरावट के सिलसिले को रोक पाता है या नहीं.

  • भारत दौरे से पहले पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर दिया बयान, बोले- PM मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं

    भारत दौरे से पहले पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर दिया बयान, बोले- PM मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं


    नई दिल्‍ली । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आ रहे हैं. अपने भारत दौरे के दौरान वो कई बड़े समझौते साइन कर सकते हैं. इसी बीच भारत पर अमेरिका की तरफ से लगाए टैरिफ को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं. यह बयान उन्होंने उस सवाल के जवाब में दिया जिसमें पूछा गया था कि क्या अमेरिका भारत पर टैरिफ के जरिए दबाव डाल रहा है.

    पुतिन ने PM मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की
    पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और भारत-रूस संबंधों के भविष्य के बारे में भी पूछा गया. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत की अडिग नीति देखी है और देश को अपने नेतृत्व पर गर्व होना चाहिए. पुतिन ने यह भी बताया कि भारत और रूस के बीच 90 प्रतिशत से अधिक द्विपक्षीय लेन देन सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं.

    मोदी से मित्रता और आगामी भारत दौरा
    पुतिन ने कहा कि उन्हें अपने मित्र, प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए यात्रा करने में बहुत खुशी हो रही है. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों नेताओं ने अगली बैठक भारत में आयोजित करने पर सहमति जताई है.

    भारत-रूस सहयोग और ऐतिहासिक संबंध
    पुतिन ने कहा कि बहुत सारी बातें चर्चा के लिए हैं, क्योंकि भारत और रूस के बीच सहयोग का दायरा बहुत व्यापक है. उन्होंने दोनों देशों के बीच के विशिष्ट ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया. उन्होंने भारत की आजादी के बाद की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि सिर्फ 77 साल के अल्प समय में, देश ने अद्भुत विकास हासिल किया है.

    बता दें कि पुतिन अब तक भारत के नौ दौरे कर चुके हैं, जिनमें से तीन मोदी के कार्यकाल में (2016, 2018 और 2021) हुए. दिसंबर में यह उनका दसवां दौरा होगा. वहीं प्रधानमंत्री मोदी सात बार रूस जा चुके हैं.