Category: International

  • Pakistan: इस्लामाबाद में शादी समारोह में हुआ गैस सिलेंडर में ब्लास्ट… दूल्हा-दुल्हन समेत 8 लोगों की मौत

    Pakistan: इस्लामाबाद में शादी समारोह में हुआ गैस सिलेंडर में ब्लास्ट… दूल्हा-दुल्हन समेत 8 लोगों की मौत

    इस्लामाबाद । पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में रविवार की सुबह शादी समारोह (Wedding ceremony.) के बाद घर में रखा गैस सिलेंडर (Gas Cylinder suddenly exploded) अचानक फट गया। इसकी चपेट में आन से 8 लोगों की मौत हो गई, जिसमें दुल्हन और दूल्हा भी शामिल हैं। पुलिस और अधिकारियों ने यह जानकारी दी। विस्फोट तब हुआ जब शादी में शामिल मेहमान जोड़े के उत्सव के बाद घर में सो रहे थे। इस धमाके से घर का एक हिस्सा ढह गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। इस्लामाबाद पुलिस ने यह जानकारी दी है। इस घटना में 7 अन्य लोग घायल भी हुए हैं।

    पुलिस के बयान में कहा गया कि यह विस्फोट शहर के दिल में स्थित एक आवासीय इलाके में हुआ। सरकारी प्रशासक साहिबजादा यूसुफ ने बताया कि रविवार की सुबह जल्दी इस धमाके की सूचना मिली और अधिकारी अभी भी जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आसपास के कुछ घरों को भी नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने कहा कि जांच अभी जारी है। यह दुखद घटना शादी के उत्सव को मातम में बदल देने वाली एक बड़ी त्रासदी बन गई।

    घटना पर प्रधानमंत्री ने जताया गहरा दुख
    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shehbaz Sharif) ने इस घटना में जान गंवाने वालों पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उनके कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को बेहतरीन इलाज उपलब्ध कराया जाए और पूर्ण जांच के आदेश दिए। पाकिस्तान के कई घरों में कम प्राकृतिक गैस दबाव के कारण तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जाता है और गैस रिसाव के कारण ऐसे सिलेंडरों से जुड़े घातक हादसे अक्सर होते हैं।

  • ग्रीनलैंड को लेकर लामबंद होने लगा यूरोप, सैन्य मौजूदगी बढ़ाने पर जोर…

    ग्रीनलैंड को लेकर लामबंद होने लगा यूरोप, सैन्य मौजूदगी बढ़ाने पर जोर…


    लंदन।
    यूरोपीय देशों का एक समूह ग्रीनलैंड (European Countries group Greenland) में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना पर चर्चा कर रहा है। इसकी अगुवाई यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) और जर्मनी (Germany) कर रहे हैं। ग्रुप का उद्देश्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को यह संदेश देना है कि यूरोप और नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) आर्कटिक सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं। साथ ही स्वयं-शासित डेनिश क्षेत्र ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन की कब्जे संबंधी धमकियों का भी जवाब देना इसका मकसद है।

    ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि जर्मनी आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक संयुक्त NATO मिशन प्रस्तावित करने जा रहा है। इस मिशन का नाम आर्कटिक सेंट्री रखा जा सकता है, जो बाल्टिक सागर में महत्वपूर्ण ठिकनों की रक्षा के लिए शुरू किए गए बाल्टिक सेंट्री मिशन की तर्ज पर होगा।


    यूरोपीय कूटनीतिक सक्रियता

    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सहयोगी देशों से हाई नॉर्थ यानी आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा उपस्थिति बढ़ाने की अपील की है। हाल के दिनों में उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज समेत कई नेताओं से इस मसले पर बातचीत की।

    यूरोपीय नेतृत्व का मानना है कि क्षेत्र में NATO की मजबूत और स्पष्ट भूमिका दिखाकर ट्रंप के उस तर्क को कमजोर किया जा सकता है, जिसके तहत वे राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की बात कर रहे हैं।

    ट्रंप के बयान और बढ़ती चिंता
    हाल की घटनाओं ने यूरोप की चिंता बढ़ा दी है। इस महीने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने की कार्रवाई के बाद ट्रंप प्रशासन की आक्रामक बयानबाजी फिर चर्चा में आ गई। खासकर ग्रीनलैंड पर सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना ने सहयोगी देशों को अपने विकल्पों पर तेजी से काम करने को मजबूर किया है।

    रविवार रात ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका ग्रीनलैंड का मालिक बनेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका वहां मौजूद अपने सैन्य अड्डे पर फोर्स बढ़ा सकता है, लेकिन वास्तविक स्वामित्व जरूरी है। उनके मुताबिक, अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता तो रूस या चीन कर सकते हैं- और यह उनके रहते नहीं होगा।

    NATO की भूमिका पर चर्चा
    इस बीच जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल इस सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात करेंगे। बातचीत में ग्रीनलैंड और आर्कटिक स्थिरता में NATO की भूमिका प्रमुख विषय होगी।

    वेडेफुल ने कहा- आर्कटिक की सुरक्षा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। रूस और चीन के साथ पुराने और नए प्रतिद्वंद्वों को देखते हुए हमें NATO के भीतर मिलकर जिम्मेदारी निभाने के तरीकों पर चर्चा करनी चाहिए।


    ब्रिटेन बनाम फ्रांस का दृष्टिकोण

    सूत्रों के मुताबिक, स्टारमर का रुख यह है कि ब्रिटेन और यूरोप को अमेरिका के लिए अपनी ‘सॉफ्ट और हार्ड पावर’ की उपयोगिता दिखाकर ट्रंप को साथ लेना चाहिए- चाहे वह यूक्रेन युद्ध में रूस का प्रतिरोध हो या यूरोप के करीब अमेरिकी सुरक्षा हित। यह फ्रांस जैसे देशों की अपेक्षाकृत मुखर आलोचनात्मक लाइन से अलग है, जिन्होंने हाल ही में अमेरिकी दबाव से यूरोप के लिए खतरे की चेतावनी दी है। पिछले हफ्ते स्टारमर और ट्रंप के बीच हुई बातचीत में यूरो-अटलांटिक सुरक्षा और हाई नॉर्थ में रूस के बढ़ते आक्रामक रवैये को रोकने पर सहमति बनी।


    डेनमार्क की कूटनीतिक कोशिश

    उधर, डेनमार्क अब भी उम्मीद कर रहा है कि वॉशिंगटन की आगामी कूटनीतिक यात्रा से ट्रंप के रुख में नरमी आएगी। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री- लार्स लोके रासमुसेन और विवियन मोट्जफेल्ड्ट उन तथ्यात्मक भूलों और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए सुरक्षा दावों को चुनौती देने की तैयारी में हैं, जिनके आधार पर ग्रीनलैंड को लेकर बहस तेज हुई है। हालांकि ट्रंप ने सैन्य बल के इस्तेमाल से इंकार नहीं किया है, लेकिन रूबियो ने सांसदों से कहा कि उद्देश्य हस्तक्षेप नहीं, बल्कि ग्रीनलैंड को खरीदने का है- ताकि NATO की एकता पर सवाल न खड़े हों।

  • ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    नई दिल्ली| ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरानी सरकार ने बाहरी दुनिया से संपर्क तोड़ने के लिए इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनों को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बावजूद मानवाधिकार संगठनों से आ रही सूचनाएं बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। देशभर में आर्थिक तंगी, महंगाई और दमनकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग अब सीधे धार्मिक सत्ता और शासन व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों पर मौत की धमकी, ‘अल्लाह का शत्रु’ करार

    शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवहेदी आजाद ने सरकारी टेलीविजन पर सख्त बयान देते हुए प्रदर्शनकारियों को ‘मोहारेबेह’ यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध’ का दोषी बताया। उन्होंने कहा कि जो भी इन प्रदर्शनों में शामिल है या प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहा है, उसे ईरानी कानून के तहत मौत की सजा दी जाएगी। अटॉर्नी जनरल ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना किसी देरी और नरमी के ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाएं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के संकेतों के बाद माना जा रहा है कि देशभर में अब बड़ा और व्यापक क्रैकडाउन शुरू होने वाला है।

    मानवाधिकार संगठनों का दावा: 72 की मौत, 2300 से ज्यादा गिरफ्तार

    मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि गचसरन में बासिज बल के तीन सदस्य मारे गए हैं। इसके अलावा हमदान, बंदर अब्बास, गिलान और मशहद में भी सुरक्षा बलों के जवानों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।

    अमेरिका का खुला समर्थन, ट्रंप प्रशासन की चेतावनी

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका का खुला समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के “बहादुर लोगों” के साथ खड़ा है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने कड़ा संदेश देते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ‘खेल’ न करे। विभाग ने कहा कि ट्रंप जो कहते हैं, उसका मतलब होता है और उसके नतीजे भी होते हैं।

    आर्थिक बदहाली से शुरू हुआ विद्रोह

    इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुई थी। ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 14 लाख प्रति डॉलर तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव ने आम जनता की जिंदगी मुश्किल कर दी है। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर है, जो धीरे-धीरे धार्मिक सत्ता के खिलाफ राजनीतिक विद्रोह का रूप ले चुका है।

  • शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर लाठीचार्ज जैसा हमला, भाजपा ने किया विरोध प्रदर्शन

    शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर लाठीचार्ज जैसा हमला, भाजपा ने किया विरोध प्रदर्शन

    नई दिल्ली| पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर शनिवार रात पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना इलाके में हमला किए जाने से राजनीतिक माहौल गर्मा गया। यह घटना उस वक्त हुई जब शुभेंदु अधिकारी पुरुलिया में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद अपने निर्वाचन क्षेत्र नंदीग्राम लौट रहे थे। अधिकारी के अनुसार, रात करीब 8:20 से 8:30 बजे के बीच गरबेटा थाना क्षेत्र के चंद्रकोना रोड बाजार के पास अचानक उनके काफिले को रोक दिया गया।

    तृणमूल समर्थकों पर हमले का आरोप

    भाजपा का आरोप है कि चौराहे पर पहले से मौजूद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के एक समूह ने काफिले को घेर लिया और शुभेंदु अधिकारी की गाड़ी पर बांस की लाठियों व डंडों से हमला किया। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी हुई और हालात तनावपूर्ण हो गए। बताया जा रहा है कि यह झड़प आम सड़क पर करीब एक घंटे तक चली, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप

    शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे और उन्होंने स्थिति को काबू में करने की कोई ठोस कोशिश नहीं की। अधिकारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार की “हिंसा और दंडमुक्ति की संस्कृति” से उत्साहित लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में उन पर हमला किया। उन्होंने इसे कानून व्यवस्था की पूरी तरह विफलता बताया।

    पुलिस चौकी में धरने पर बैठे शुभेंदु अधिकारी

    हमले के बाद शुभेंदु अधिकारी सीधे चंद्रकोना रोड पुलिस चौकी पहुंचे और जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक हमले के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी नहीं होती, वह पुलिस चौकी नहीं छोड़ेंगे। इस दौरान उन्होंने एक वकील की मदद से लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हालात को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

    भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया, लोकतंत्र पर हमला बताया

    इस घटना पर भाजपा की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का पूर्ण पतन हो चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके शासन में पुलिस प्रशासन पक्षपाती और कमजोर हो चुका है। मजूमदार ने कहा कि नंदीग्राम के विधायक और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर हुआ यह हमला सुनियोजित और राजनीतिक हिंसा का उदाहरण है।

    बढ़ता सियासी तनाव

    घटना के बाद पश्चिम मेदिनीपुर से लेकर कोलकाता तक सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया है, वहीं पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।

  • भारत के खिलाफ जहर उगलते लश्कर आतंकी, स्कूल में दिया विवादित भाषण, पाकिस्तान में आलोचना

    भारत के खिलाफ जहर उगलते लश्कर आतंकी, स्कूल में दिया विवादित भाषण, पाकिस्तान में आलोचना

    नई दिल्ली| लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह पाकिस्तानी सेना के साथ अपने संगठन के गहरे संबंधों को खुलासा कर रहा है। कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने सैनिकों की अंतिम यात्रा में जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए आमंत्रित करती है। यह वीडियो किस समय का है, तारीख अभी मालूम नहीं चली। इसमें वह स्कूल के बच्चों को भाषण देता नजर आ रहा है। हालांकि, खुफिया स्रोतों ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि कर दी है।
    सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया, ‘पाकिस्तान की सेना मुझे जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए बुलाती है। क्या तुम्हें पता है कि भारत भी मुझसे डरता है?’ यह खुलासा पाकिस्तान की ओर से राज्य प्रायोजित आतंकवाद के भारत के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों को मजबूती देता है। यह घटना किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है कि एक आतंकी संगठन का दूसरा सबसे बड़ा नेता बच्चों के स्कूल में जाकर युवा दिमागों को प्रभावित करे। पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लश्कर ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर काम किया, जैसा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भी देखा गया था।

    आतंक का निर्यात करने में जुटा पाकिस्तान
    ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद पाकिस्तान समर्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर में नए हमलों की तैयारी की थी, जिसे नई दिल्ली ने गंभीर चेतावनी करार दिया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह बताया गया है। ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुआ था, जो आतंकी ढांचे को नष्ट करने का भारतीय अभियान था। अगर इसी तरह पाकिस्तान की ओर से आतंक का निर्यात जारी रहा तो इसकी नई फेज शुरू हो सकती है। यह भारत ही नहीं, दुनिया भर के लिए चिंता की बात है। ताजा वीडियो से पाकिस्तान की थू-थू हो रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसके खिलाफ सख्त ऐक्शन लेना होगा।

  • US: महिला की हत्या के बाद फूटा गुस्सा, ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग.. कई शहरों में तनाव

    US: महिला की हत्या के बाद फूटा गुस्सा, ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग.. कई शहरों में तनाव


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में इमिग्रेशन अधिकारियों (Immigration officials) द्वारा 37 साल की महिला की गोली मारकर हत्या के बाद हालात संगीन हो गए हैं। गोली लगने के बाद ही रेनी गुड (Renee Good) नाम की महिला की मौत हो गई थी। इसके बाद अमेरिका के कई शहरों में लोगों को गुस्सा फूट पड़ा है। लॉस एंजेल्स, वॉशिंगटन से लेकर कंसास और मिसौरी तक लोग इस घटना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन (Donald Trump administration) पर भी दबाव बढ़ गया है।

    सरकार के अधिकारियों के मुताबिक पहले आईसीई के एजेंट महिला की कार के पास पहुंचे थे। महिला ने जैसे ही कार आगे बढ़ाई कि अधिकारियों ने उसपर गोली चला दी। रेनी गुड आईसीई विरोधी गुट में भी शामिल नहीं थीं। इस गटना के बाद ट्रंप प्रशासन ने मिनेसोटा में भारी तैनाती कर दी है। जानकारी के मुताबिक महिला अमेरिकी ही थी और वह इमिग्रेशन अभियान का टारगेट भी नहीं थी।

    इस घटना के बाद मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ड ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इस तरह की खौफ और हेडलाइन पैदा करने वाले ऐक्शन लोगों की जान लेने के अलावा कुछ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यहां टीवी स्टाइल में सरकार चल रही है और इसकी कीमत लोगों को जान देकर चुकानी पड़ रही है।

    मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने भी कहा कि यह गोली आत्मरक्षा में नहीं चलाई गई बल्कि जानबूझकर हत्या करने के लिए चलाई गई थी। उन्होंने कहा कि आईसीई को शहर छोड़ देना चाहिए और यहां के लोगों को शांति से रहने देना चाहिए। न्यूयॉर्क के नए मेयर ममदानी ने भी कहा कि आईसीई देशभर में हिंसा के लिए जिम्मेदार है।

    अमेरिका में भारी बवाल
    अमेरिका के सिविल ऐक्टिविस्ट अब सड़कों पर उतर चुके हैं। रविवार को कई समूहों ने रैली निकाली। ऐसे में अमेरिका में संघीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच तनाव बढ़ गया है। इसी बीच पोर्टलैं में यूएस बॉर्डर पट्रोल एजेंट ने दो लोगों को गोली मार दी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक हफ्ते के भीतर शूटिंग की दो घटनाएं हो चुकी हैं। इससे पता चलता है कि डोनाल्ड ट्रंप की नजर में किसी की जान की कोई कीमत नहीं है।

  • ट्रंप की धमकी पर ग्रीनलैंड के सियासी दलों की दो-टूक, बोले- कोई दूसरा तय नहीं करेगा हमारे देश का भविष्य

    ट्रंप की धमकी पर ग्रीनलैंड के सियासी दलों की दो-टूक, बोले- कोई दूसरा तय नहीं करेगा हमारे देश का भविष्य


    नूक (ग्रीनलैंड)।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने जब से ग्रीनलैंड (Greenland) पर कब्जे की बात कही है, खलबली मची हुई है। अब ग्रीनलैंड की संसद (Greenland Parliament) के तमाम नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य जारी किया है। इसमें ग्रीनलैंड के नेताओं ने कहा है कि उनके देश का भविष्य कोई दूसरा नहीं तय करेगा, बल्कि खुद यहां के लोग करेंगे। इंसारत्तूस में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी पांच पार्टियों के नेताओं द्वारा साइन किए गए एक बयान में, अमेरिका या डेनमार्क के नियंत्रण के किसी भी सुझाव को अस्वीकार कर दिया। इस बयान में कहा गया है कि हम अमेरिकन नहीं बनना चाहते हैं। हमें डैनिश नहीं होना चाहते। हम सिर्फ ग्रीनलैंड वाले बनकर रहना चाहते हैं।

    गौरतलब है कि तीन जनवरी को की गई कार्रवाई में वेनेजुएला के नेतृत्व को सफलतापूर्वक उखाड़ फेंकने के बाद, अमेरिका सरकार का हौसला बढ़ गया है। अब वह सीधे ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की बात कर रही है। विभिन्न यूरोपीय नेताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की है, लेकिन वे एक कथित सहयोगी द्वारा किए गए विश्वासघात पर कोई सुसंगत प्रतिक्रिया देने में सक्षम नहीं हो पाए हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका को रूस और चीन को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने से रोकने के लिए उस पर अपना नियंत्रण करना चाहिए। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में तेल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर हम ग्रीनलैंड नहीं लेते हैं, तो रूस या चीन आपके पड़ोसी बन जाएंगे। ऐसा नहीं होने वाला है। मैं आसानी से डील करना चाहता हूं। लेकिन अगर हम इसे आसानी से नहीं करते हैं, तो हम इसे मुश्किल तरीके से करेंगे। उन्होंने डेनमार्क के एक स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल उठाया और इस विशाल, संसाधन से भरपूर द्वीप पर ऐतिहासिक दावों को खारिज कर दिया।

    ट्रंप ने कहा कि मैं डेनमार्क का प्रशंसक हूं, लेकिन, आप जानते हैं, सिर्फ इसलिए कि 500 साल पहले उनका एक जहाज वहां उतरा था, इसका मतलब यह नहीं है कि वे उस जमीन के मालिक हैं। यह टिप्पणियां अमेरिका और कई नाटो सहयोगियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने ऐसे किसी भी कदम को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी हमला नाटो और दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था का अंत होगा।

  • Iran में उग्र प्रदर्शनों के बीच क्राउन प्रिंस का घर वापसी का ऐलान, शहरों पर कब्जा करने की अपील

    Iran में उग्र प्रदर्शनों के बीच क्राउन प्रिंस का घर वापसी का ऐलान, शहरों पर कब्जा करने की अपील


    तेहरान।
    ईरान में उग्र होते प्रदर्शनों (Iran’s Escalating Protests) के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी (Exiled Crown Prince Reza Pahlavi) ने घर वापसी का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने ईरान के लोगों से अपील की है कि वे अब सिर्फ सड़कों पर ना उतरें बल्कि शहरों के सिटी सेंटर्स को अपने कब्जे में ले लें। उन्होंने कहा है कि अगर खूनी सत्ता के शीर्ष पर बैठे अली खामेनेई को उतार फेंकना है तो और ज्यादा संगठित होकर प्रदर्शन को तेज करना होगा।

    बता दें कि पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने महंगाई और आर्थिक बदहाली को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसके बाद यह प्रदर्शन उग्र होता चला गया। वहीं ईरान की इस्लामिक सरकार ने भी ऐक्शन के आदेश दे दिए और सेना की गोलीबारी में कई प्रदर्शनकारी मारे गए। अब तक इन प्रदर्शनों में 2017 लोगों के मारे जाने की खबर है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में केवल 65 मौतें ही बताई गई हैं।


    खामेनेई ने दी मृत्युदंड की चेतावनी

    ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (86) ने प्रदर्शनकारियों को मृत्युदंड तक की चेतावनी द है। तेहरान में अपने परिसर में समर्थकों से कहा कि प्रदर्शनकारी अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने (ट्रंप ने) कहा है कि वह उनकी (प्रदर्शनकारियों की) मदद के लिए आगे आएंगे। इसके बजाय उन्हें अपने खुद के देश के हालात पर ध्यान देना चाहिए।”

    ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसिनी-इजेई ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को कोई कानूनी नरमी बरते बिना निर्णायक और अधिकतम सजा दी जाएगी। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ट्रंप की इस चेतावनी को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।


    ईरान पर हमले को तैयार बैठे हैं ट्रंप?

    ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि सैनिक जमीन पर भेजे जाएंगे, बल्कि इसका मतलब होगा कि दुश्मन को बहुत जोरदार तरीके से वहीं चोट पहुंचाई जाएगी जहां सबसे ज्यादा असर हो। ट्रंप ने कहा, “मैं ईरान के नेताओं से कहता हूं कि गोलियां चलाना शुरू मत करना, क्योंकि अगर तुमने ऐसा किया तो हम भी (तुम्हारे खिलाफ) करेंगे।”

    एसोसिएटेड प्रेस को मिले एक वीडियो में उत्तरी तेहरान के सादत आबाद इलाके में विरोध प्रदर्शन होते दिख रहे हैं और सड़कों पर हजारों लोग नजर आ रहे हैं इस दौरान एक व्यक्ति को खामेनेई मुर्दाबाद कहते हुए सुना गया है।

  • पाकिस्‍तान को इजरायल की दो टूक; गाजा पट्टी में मुनीर के मंसूबों पर फेरा पानी

    पाकिस्‍तान को इजरायल की दो टूक; गाजा पट्टी में मुनीर के मंसूबों पर फेरा पानी

    नई दिल्‍ली। इजरायल ने दो टूक कहा है कि गाजा में अमेरिका के प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबलाइज़ेशन फोर्स (ISF) में पाकिस्तानी सेना को एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही इजरायल ने कहा है कि हमास के साथ उसके संबंधों की वजह से उसकी गाजा में भागीदारी संदिग्ध है।
    भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल अमेरिका द्वारा प्रस्तावित किसी भी गाजा स्थिरीकरण बल में पाकिस्तानी सेना को शामिल करने का स्पष्ट रूप से विरोध करता है। उन्होंने कहा कि हमास और आतंकी संगठनों के रिश्तों के कारण पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकते।

    एक विशेष साक्षात्कार में अज़ार ने कहा कि हमास और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, खासकर लश्कर-ए-तैयबा, के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर इज़रायल को गहरी चिंता है। इजरायल की तरफ से यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब पाकिस्तान गाजा में इंटरनेशनल फोर्स में शामिल होने पर अमेरिका की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार ही कर रहा है।

    बता दें कि ट्रंप के गाजा में शांति बहाली और सत्ता हस्तांतरण के फार्मूले के तहत वहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तिरिकरण बल की तैनाती की जानी है, जिसमें कई देश शामिल होंगे। पाकिस्तान ने भी इस बल में शामिल होने की इच्छा जताई थी लेकिन इजरायल ने उसे खारिज कर दिया है।

    हमास के खात्मे के बिना कोई व्यवस्था संभव नहीं
    इजरायली राजदूत अज़ार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में पूरी तरह खत्म किए बिना गाज़ा के भविष्य को लेकर कोई भी व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में एक स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) का विचार तब तक निरर्थक है, जब तक हमास को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता। यह पहली बार है जब इजरायल आधिकारिक तौर पर और खुले तौर पर पाकिस्तानी सेना की भूमिका के खिलाफ सामने आया है।

    यह आसिम मुनीर के लिए बड़ा झटका है, जो गाजा में अपनी सेना की तैनाती के बड़े ख्वाव देख रहे थे।
    पाक समेत कई देशों से अमेरिका ने किया था संपर्क
    हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने गाज़ा में सुरक्षा और पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित बल में योगदान देने को लेकर पाकिस्तान समेत कई देशों से संपर्क किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अज़ार ने कहा, “कई देशों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे हमास से लड़ने के लिए अपने सैनिक नहीं भेजना चाहते। ऐसे में यह योजना व्यावहारिक नहीं लगती।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या इज़रायल गाज़ा में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी को स्वीकार करेगा, तो उनका जवाब साफ था “नहीं।”
    “केवल उन्हीं के साथ काम करेंगे जो भरोसेमंद”
    पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए इज़रायली राजदूत ने कहा,“देश आमतौर पर उन्हीं के साथ सहयोग करते हैं जिनके साथ उनके भरोसेमंद राजनयिक संबंध हों। इस समय पाकिस्तान के साथ ऐसी स्थिति नहीं है।” इस बयान से इज़रायल की पाकिस्तान को लेकर गहरी अविश्वास की भावना साफ झलकती है।
    हमास–पाकिस्तान संपर्कों पर इजरायल की नजर
    राजदूत अज़ार के बयान ऐसे समय आए हैं जब हाल ही में यह बात सामने आई है कि हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी ज़हीर पिछले तीन वर्षों से लगातार पाकिस्तान की यात्राएं कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, नाजी ज़हीर ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से कई बैठकें और मुलाकातें की थीं। ये बैठकें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK)में भी हुईं हैं। यह बात भी सामने आ चुकी है कि 7 अक्टूबर को इज़रायल पर हुए हमले के कुछ ही दिनों बाद ज़हीर पेशावर में मौजूद था।अज़ार ने पुष्टि की कि इज़रायली खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
  • ट्रंप को खामेनेई ने ललकारा, कहा- तुम्‍हारा फिरौन और निमरोद जैसा हश्र होगा

    ट्रंप को खामेनेई ने ललकारा, कहा- तुम्‍हारा फिरौन और निमरोद जैसा हश्र होगा


    तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रंप पर दुनिया को अहंकार के साथ परखने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि इतिहास में ऐसे घमंडी और अत्याचारी शासक अपने सत्ता-शिखर पर ही पतन का शिकार हुए हैं। एक्स पर जारी पोस्ट में खामेनेई ने कहा कि इतिहास गवाह है- फिरौन, निमरोद और ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी जैसे शासकों का अंत तब हुआ, जब वे अपने घमंड की चरम अवस्था में थे।

    खामेनेई ने लिखा- ‘अमेरिकी राष्ट्रपति जो पूरी दुनिया के बारे में घमंड से फैसले करते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि दुनिया के तानाशाहों और घमंडी शासकों का पतन तब हुआ जब वे अपने घमंड के चरम पर थे।

    तुम्हारा भी पतन होगा।’ खामेनेई के बयान में धार्मिक और ऐतिहासिक प्रतीकों का संदर्भ था- फिरौन को इस्लामी और बाइबिल परंपराओं में अत्याचार के प्रतीक के रूप में देखा जाता है; निमरोद को अब्राहमिक ग्रंथों में निरंकुश शासक माना जाता है; मोहम्मद रजा पहलवी को 1979 की इस्लामी क्रांति में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था और जिनकी बाद में निर्वासन में मृत्यु हुई।
    फिरौन, निमरोद कौन थे?

    फिरौन मिस्र के प्राचीन बादशाहों की एक उपाधि थी, जैसे आज राजा या सम्राट कहते हैं। लेकिन कुरान और बाइबल में जब फिरौन का जिक्र आता है, तो ज्यादातर मामलों में वह हजरत मूसा के समय का मिस्र का वह क्रूर बादशाह होता है। वह खुद को खुदा/भगवान घोषित करता था। बनी इसराइल (यहूदियों) पर बहुत ज़ुल्म करता था। उनके नवजात बेटों को मार डालने का हुक्म देता था। आखिर में लाल सागर में डूबकर मर गया।

    निमरोद बाबुल/इराक (मेसोपोटामिया) का एक बहुत शक्तिशाली और अत्याचारी बादशाह था। वह हजरत इब्राहीम के समय का शासक माना जाता है। उसने भी खुद को खुदा घोषित किया था। हालांकि कुरान में उसका नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया गया, लेकिन सूरह अल-बकरह में वर्णित वह बादशाह जिसने इब्राहीम से खुदाई के बारे में बहस की थी, उसे इसी निमरोद से तस्सूर किया जाता है। इस्लामी रिवायतों में कहा जाता है कि उसकी मौत एक छोटे से मच्छर के काटने से हुई, जो उसके दिमाग में घुस गया था (अत्यंत छोटी चीज से बहुत बड़े अहंकारी का अंत)।
    Iran
    रजा पहलवी फिर सुर्खियों में

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी एक बार फिर चर्चा में हैं। वे ईरान के आखिरी शाह- मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं। हालांकि वह जमीनी स्तर पर प्रदर्शनों का नेतृत्व नहीं कर रहे, फिर भी इस्लामी गणराज्य के मुखर आलोचक के तौर पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में लगातार बयान दिए हैं।

    हालिया उथल-पुथल के दौरान रजा पहलवी ने ईरानियों से शांतिपूर्ण प्रतिरोध जारी रखने की अपील की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह शासक धार्मिक प्रतिष्ठान के बजाय ईरानी जनता का साथ दे।

    उन्होंने प्रदर्शनों को किसी एक नेता या विचारधारा से जुड़ी पहल नहीं, बल्कि आर्थिक बदहाली, दमन और दशकों से अधूरे वादों से उपजी जनआंदोलन बताया।

    एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में रजा पहलवी ने कहा कि वह गुरुवार रात को सड़कों पर उतरे हर व्यक्ति पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने लोगों से शुक्रवार रात फिर से बड़ी संख्या में बाहर निकलने का आह्वान किया और कहा कि भीड़ जितनी बड़ी होगी, दमनकारी ताकतें उतनी ही कमजोर पड़ेंगी। इंटरनेट पाबंदियों के बावजूद सड़कों पर डटे रहने का उन्होंने भरोसा जताया और कहा जीत आपकी होगी।
    कड़ा दमन, बढ़ता तनाव

    दूसरी ओर, ईरान ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे- यह ट्रंप की उस सार्वजनिक प्रतिबद्धता के उलट है, जिसमें उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात कही थी। एपी के अनुसार, हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 62 हो गई है।

    तेहरान में अपने परिसर में समर्थकों को संबोधित करते हुए खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी ही सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं ताकि अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश कर सकें, और कहा कि ट्रंप को अपने देश की हालत पर ध्यान देना चाहिए। ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को निर्णायक, अधिकतम और बिना किसी कानूनी रियायत के सजा दी जाएगी।