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  • बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख पहुंचे इस्लामाबाद… पाकिस्तान से फाइटर जेट खरीदने की तैयारी

    बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख पहुंचे इस्लामाबाद… पाकिस्तान से फाइटर जेट खरीदने की तैयारी


    इस्लामाबाद।
    बांग्लादेश (Bangladesh) अब पाकिस्तान (Pakistan) से फाइटर जेट (Fighter jet) खरीदने की फिराक में है। इसी सिलसिले में बांग्लादेश वायुसेना (Bangladesh Air Force) के एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान (Air Chief Marshal Hasan Mahmood Khan) ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान वायुसेना के चीफ एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू (Pakistan Air Force Chief Air Chief Marshal Zaheer Ahmed Babar Sidhu) से मुलाकात की। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और इसके बाद दोनों सैन्य नेताओं ने रक्षा सहयोग से संबंधित मामलों पर चर्चा की और समीक्षा की। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूर करने की दिशा में बांग्लादेश द्वारा पाकिस्तान के जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट की संभावित खरीद पर विस्तृत चर्चा की। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग, इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी।

    आईएसपीआर के अनुसार बांग्लादेश वायुसेना के एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान वायुसेना के चीफ एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और इसके बाद दोनों सैन्य नेताओं ने रक्षा सहयोग से संबंधित मामलों पर चर्चा की और समीक्षा की। यह विमान, जो चीन और पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित है, एक 4.5 जेनरेशन का मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट है, जिसमें आधुनिक चीनी एवियोनिक्स और हाई-रेंज हथियार हल्के एयरफ्रेम में एकीकृत हैं।

    बयान में आगे कहा गया कि बैठक में ऑपरेशनल सहयोग और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और एयरोस्पेस उन्नति में सहयोग पर जोर दिया गया। पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख बाबर सिद्हू ने अपने बंगलादेशी समकक्ष हसन खान को जेएफ-17 ब्लॉक तृतीय के हालिया उन्नयन के बारे में जानकारी दी तथा बंगलादेश वायुसेना को बेसिक से एडवांस्ड फ्लाइंग और विशेष कोर्स तक व्यापक प्रशिक्षण फ्रेमवर्क के माध्यम से समर्थन देने की पाकिस्तानी वायुसेना की प्रतिबद्धता दोहराई।

    बयान में आगे कहा गया कि बांग्लादेशी वायुसेना प्रमुख ने पाकिस्तानी वायुसेना के कॉम्बैट रिकॉर्ड की सराहना की और इसके ऑपरेशनल विशेषज्ञता से लाभ उठाने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने बंगलादेश वायुसेना के पुराने बेड़े के रखरखाव समर्थन और हवाई निगरानी बढ़ाने के लिए एयर डिफेंस राडार सिस्टम के एकीकरण में सहायता मांगी।

    सैन्य मीडिया विंग के अनुसार बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी वायुसेना की प्रमुख सुविधाओं का दौरा किया, जिसमें नेशनल आईएसआर एंड इंटीग्रेटेड एयर ऑपरेशंस सेंटर, पाकिस्तानी वायुसेना साइबर कमांड और नेशनल एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क शामिल हैं।

  • ग्रीनलैंड पर बयानबाज़ी से बढ़ा वैश्विक तनाव, डेनमार्क ने नाटो की एकता पर जताई गहरी चिंता

    ग्रीनलैंड पर बयानबाज़ी से बढ़ा वैश्विक तनाव, डेनमार्क ने नाटो की एकता पर जताई गहरी चिंता


    नई दिल्ली।ग्रीनलैंड को लेकर हालिया बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए तनाव को जन्म दे दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए नाटो की एकता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने की आशंका जताई है। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी सहयोगी देश ने ग्रीनलैंड पर दबाव बनाने या बल प्रयोग करने की कोशिश की, तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होगी, बल्कि नाटो जैसे सामूहिक सुरक्षा गठबंधन की नींव भी कमजोर पड़ सकती है।

    प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सार्वजनिक टिप्पणी में ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताते हुए उस पर नियंत्रण की इच्छा जाहिर की थी। हालांकि यह बयान किसी आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं है लेकिन इसके बाद यूरोप और नाटो से जुड़े देशों में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई देशों ने इसे सहयोगी देशों के बीच भरोसे के सिद्धांत के खिलाफ बताया है।ग्रीनलैंड भले ही जनसंख्या के लिहाज़ से छोटा इलाका हो, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक राजनीति में बेहद अहम बनाती है। यह डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो का हिस्सा भी है। आर्कटिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण ग्रीनलैंड से सैन्य निगरानी, मिसाइल चेतावनी प्रणाली और समुद्री मार्गों पर नजर रखना अपेक्षाकृत आसान होता है। जलवायु परिवर्तन के चलते आर्कटिक में नए समुद्री रास्तों के खुलने की संभावना ने इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ा दी है।

    डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने नाटो के मूल सिद्धांतों की याद दिलाते हुए कहा कि यह संगठन आपसी भरोसे, सामूहिक सुरक्षा और संप्रभुता के सम्मान पर आधारित है। यदि किसी सदस्य या सहयोगी देश की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती दी जाती है, तो इससे नाटो की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हालात में नाटो केवल एक औपचारिक संगठन बनकर रह जाएगा, जिसकी वैश्विक भूमिका सीमित हो सकती है।इस पूरे विवाद पर ग्रीनलैंड की ओर से भी स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि उनके देश का भविष्य किसी बाहरी दबाव या अंतरराष्ट्रीय बयानबाज़ी से तय नहीं होगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड के लोग अपने राजनीतिक और आर्थिक फैसले खुद लेने में सक्षम हैं और किसी भी तरह की अटकलों से डरने की जरूरत नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियां, दुर्लभ खनिज संसाधनों की उपलब्धता और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुलने वाले नए समुद्री मार्ग इस इलाके को वैश्विक शक्तियों के लिए अहम बनाते हैं। इसके अलावा, ग्रीनलैंड में पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचा भी इसकी रणनीतिक उपयोगिता को बढ़ाता है।फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानों और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं तक सीमित है, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में बढ़ता तनाव साफ नजर आ रहा है। डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में नाटो और उसके सहयोगी देशों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • हिटलर से बच निकली थी एनी फ्रैंक की बहन, 96 साल की उम्र में निधन

    हिटलर से बच निकली थी एनी फ्रैंक की बहन, 96 साल की उम्र में निधन

    पोलैंड। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हिटलर ने यहूदियों का जिस तरह से नरसंहार किया और उन्हें यातनाएं दीं, उसकी कहानी जाकर भी रूह कांप उठती है। दूसरे विश्वयुद्ध की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है जिसे ‘एनी फ्रैंक का धोखा’ नाम से जाना जाता है। एनी फ्रैंक होलोकॉस्ट में सबसे चर्चित पीड़ित थीं। उनके एक करीबी ने ही फ्रैंक को परिवार सहित धोखा देकर पकड़वा दिया था। उन्होंने एक डायरी लिखी जिसको बाद में ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ के नाम से प्रकाशित किया गया । मात्र 15 साल की उम्र में ही एनी की मौत हो गई। उनकी एक सौतेली बहन इवा स्क्लॉस की 96 साल की उम्र में सोमवार को मौत हो गई है। इवा स्क्लॉस भी लंबे समय तक हिटलर के बनाए ऑस्त्विच यातना शिविर में रहीं। हालांकि रूस के हमले के बाद वह बच गईं।

    मौत का दरवाजा
    जानकारी के मुताबिक दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड में नाजियों के यातना शिविरों में करीब 10 लाख लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से ज्यादातर यहूदी ही थे। ऑस्त्विच के यातना शिविर को ‘मौत का दरवाजा कहा जाता है। कहा जाता है कि नाजी लोग जब बंदियों को यातना शिविर में ले जाते थे तो उनके बाल तक काट लेते थे ताकि वे किसी भी तरीके से कपड़े ना बना सकें।

    एनी फ्रैंक की सौतेली बहन इवा लंदन में एनी फ्रैंक ट्रस्ट चलाती थीं। ब्रिटेन के महाराज किंग चार्ल्स थर्ड ने इस ट्रस्ट को बनाने में मदद की थी। हिटलर के यातना शिविर से बचने के बाद इवा ने ठान लिया था कि बाकी बचा हुआ जीवन वह लोगों की मदद करने और ऐसा काम करने में बिताएंगी जिससे नफरत कम हो और प्रेम को बल मिले।

    इवा का जन्म 1929 में विएना में हुआ था। ऑस्ट्रिया पर नाजियों के कब्जे के बाद वे भागकर ऐम्सटर्डम चले गए। वहीं इवा की दोस्ती एी से हुई थी। फ्रैंक की तरह इवा का परिवार भी दो साल तक यातना शिविर में रहा। 1945 में जब रूस की सेना ने शिविर से बंदियों को छुड़वाया तो इवा और उनकी मां की जान बच गई। उनके परिवार के बाकी लोग यातना शिविर में मारे गए थे। इवा के पिता भी ऑस्त्विच में ही मारे गए थे। 1953 में इवा की मां फ्रिजी ने एनी फ्रैंक के पिता से शादी कर ली। एनी फ्रैंक की मौत बेलसन बेलसन कैंप में पहले ही हो चुकी थी।

    इवा ने लगभग एक दशक तक यातना शिविर के बारे में किसी से बात ही नहीं की। वह युद्ध की उस विभीषिका से बाहर ही नहीं आ पा रही थीं। ऐसे में वह ज्यादातर चुप ही रहती थीं। 1986 में एनी फ्रैंक एग्जिबिशन शुरू होने के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह नई पीढञी को नाजियों के अत्याचार के बारे में बताएँगी। इसके बाद उन्होंने यातना शिविर के बारे में बताना शुरू किया। इवा ने पूरा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया।

  • यूक्रेन के खुफिया विभाग में क्यों मची उथल-पुथल? जेलेंस्की ने करीबी से ही छीन लिया पद

    यूक्रेन के खुफिया विभाग में क्यों मची उथल-पुथल? जेलेंस्की ने करीबी से ही छीन लिया पद

    कीव। यूक्रेन में इन दिनों सेना और खुफिया विभाग में काफी उलटफेर हो रहे हैं। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने देश के खुफिया चीफ को ही बर्खास्त कर दिया है। जेलेंस्की ने ही बतायाकि वासिल मैलिउक अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। बता दें कि रूस के खिलाफ कई सफल अभियानों को लेकर मैलिउक की काफी तारीफ की गई थी। जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने मैलिउक से मुलाकात की और उन्हें अबतक की शानदार सेवा के लिए धन्यवाद दिया।

    मैलिउक ने कहा कि वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं लेकिन वह एसबीयू सिस्टम का हिस्सा बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दुश्मन के खिलाफ अभियानों में भी वह ऐक्टिव रह सकते हैं। बीते एक महीने से ही मैलिउक के हटाए जाने की खबरें चल रही थीं। सेना के भी कई अधिकारी उनके समर्थन में उतर गए थे। उनकी अगुआई में एसबीयू ने रूस के खिलाफ कई सफल अभियान चलाए थे और कई बार रूसी सेना में घुसकर हमले किए थे।

    रूस के बड़े सैन्य अधिकारी की हत्या

    मैलिउक की ही अगुआई में मॉस्को में पुतिन के केमिकल वेपन डिवीजन के चीफ की हत्या करवा दी गई थी। जून 2025 में एसबीयू ने ऑपरेशन स्पाइडरवेब चलाया था। यूक्रेन की सेना ने रूस के अंदर घुसकर परमाणु क्षमता वाले बॉम्बर विमानों पर ड्रोन अटैक किया था। पिछले ही सप्ताह जेलेंस्की ने यूक्रेन के मिलिट्री इंटेलिजेंस चीफ किरिलो बुदानोव को राष्ट्रपति कार्यालय का चीफ बना दिया था उन्होंने यह भी कहा था कि वह रक्षा मंत्री भी बदलने वाले हैं।

    जेलेंस्की ने सोमवर को ही येवगेनी खमारा को एसबीयू डिवीजन का चीफ बना दिया है। जब तक इस पद पर कोई स्थायी नियुक्ति नहीं होती तब तक वह डिपार्टमेंट का कार्यभार संभालेंगे। बीते दिनों रूस में व्लादिमीर पुतिन के आवास पर भी यूक्रेनी हमले की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी यूक्रेन पर नाराजगी जताई थी। हालांकि यूक्रेन ने सफाई देते हुए कहा था कि उसने ऐसा कोई हमला नहीं किया है। अब डोनाल्ड ट्रंप भी कहने लगे हैं कि यूक्रेन ने पुतिन के आवास पर हमला नहीं करवाया था।

  • बांग्लादेश में अब हिंदू विधवा के साथ गैंगरेप; पेड़ से बांधकर बाल काटे, बनाया वीडियो

    बांग्लादेश में अब हिंदू विधवा के साथ गैंगरेप; पेड़ से बांधकर बाल काटे, बनाया वीडियो


    ढाका। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ही हिंदू अल्पसंख्यक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। हाल ही में दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या ने सारे हिंदू समुदाय और इंसानियत में विश्वास रखने वाले लोगों को हिलाकर रख दिया।
    अब बांग्लादेश के कालीगंज से दरिदंगी की एक और घटना सामने आई है। यहां एक 40 साल की विधवा महिला के साथ दो लोगों ने गैंगरेप किया और फिर उसे पेड़ से बांधकर उसके बाल काट डाले। आरोपियों ने महिला को बेइज्जत करने का वीडियो भी बना लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया।

    पुलिस के पास दर्ज करवाई गई शिकायत में महिला ने बताया कि उसने शाहीन उसके भाई से दो कट्ठे जमीन और एक दो मंजिला मकान खरीदा था। इसके लिए उसने उन्हें 20 लाख टका अदा किए थे। इसके कुछ दिन बाद ही शाहीन और उसका भाई और पैसे मांगने लगे। जब इस अवैध वसूली के खिलाफ महिला ने आवाज उठाई तो वे उसे धमकी देने लगे।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार की शाम को शाहीन और उसका साथी हसन अचानक महिला के घर में घुस गए और उसके साथ रेप किया। इसके बाद वे विधवा महिला से 50 हजार टका यानी करीब 37 हजार रुपये की मांग करने लगे।

    पीड़िता के घर पर उस दिन कुछ मेहमान भी आए थे। आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की।
    पेड़ से बांधकर काट डाले बाल

    शिकायत के मुताबिक महिला ने जब चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो उसे पेड़ से बांध दिया गया। आरोपियों ने इसका भी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी उसे तब तक पीटते रहे जबतक की वह बेहोश नहीं हो गई। बाद में स्थानीय लोगों ने उसे छुड़ाया और पास के अस्पताल में भर्ती करवाया।

    अस्पताल प्रशासन ने बताया कि पहले तो महिला ने रेप की बात नहीं बताई हालांकि मेडिकल एग्जामिनेश में यौन उत्पीड़न की बात सामने आई।

    होश आने के बाद पीड़िता ने कालीगंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस अधिकारी ने बताया, हमने पीड़िता को थाने बुलाया था और उसकी शिकायत दर्ज की है। जांच के बाद पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करेगी।

    महिला के साथ दरिंदगी की घठना वाले दिन ही शरीयतपुर जिले में एक हिंदू शख्स को भीड़ने बुरी तरह पीटा। इसके बाद उसे आग लगा दी गई। जान बचाने के लिए वह तालाब में कूद गया लेकिन बुरी तरह घायल होने की वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं एक अन्य घटना में 24 दिसंबर को अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की लिंचिंग के बाद उनके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी।

  • एलन मस्क की संपत्ति में एक दिन में 32.5 अरब डॉलर का इजाफा, अडानी-अंबानी को बड़ा झटका

    एलन मस्क की संपत्ति में एक दिन में 32.5 अरब डॉलर का इजाफा, अडानी-अंबानी को बड़ा झटका


    वाशिंगटन।
    साल 2025 के सबसे बड़े गेनर और दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क (World’s richest man, Elon Musk) का जलवा नए साल में भी बरकरार है। मस्क की संपत्ति में सोमवार को 32.5 अरब डॉलर का बंपर उछाल दर्ज की गई। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के मुताबकि मस्क का नेटवर्थ 644 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। जबकि, एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी को 1.04 अरब डॉलर और अडानी को 607 मिलियन डॉलर का झटका लगा है।

    दुनिया के टॉप-10 अरबपतियों में से 3 को छोड़ सभी की संपत्ति में बढ़त दर्ज की गई है। एलन मस्क के साथ ही लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन, जेफ बेजोस, मार्क जुकरबर्ग की दौलत में इजाफा हुआ है।


    टेस्ला के शेयरों में तेजी

    एलन मस्क की कंपनी टेस्ला के शेयरों में सोमवार को 3.10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसका असर दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क के नेटवर्थ पर भी पड़ा और उनकी संपत्ति 32.5 अरब डॉलर बढ़कर 644 अरब डॉलर पर पहुंच गई।


    जेफ बेजोस की बढ़ी दौलत

    दूसरे सबसे बड़े गेनर जेफ बेजोस रहे। इनकी संपत्ति में 5.89 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। अब इनके पास 255 अरब डॉलर का नेटवर्थ है। बेजोस दुनिया के तीसरे सबसे अमीर हैं। दुनिया दूसरे सबसे रईस शख्स लैरी पेज को 1.40 अरब डॉलर का फायदा हुआ है। अब इनके पास 272 अरब डॉलर की संपत्ति है।

    सर्गेई ब्रिन को 1.29 अरब डॉलर का फायदा हुआ और अब वह 253 अरब डॉलर के साथ चौथे नंबर पर हैं। पांचवे पर काबिज लैरी एलिसन को 2.36 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। उनकी संपत्ति अब 245 अरब डॉलर रह गई है।


    जुकरबर्ग को भी फायदा

    जुकरबर्ग दुनिया के अमीरों की लिस्ट में अब छठे स्थान पर हैं। उनकी संपत्ति में 2.90 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। अब इनकी कुल संपत्ति 233 अरब डॉलर हो गई है। इस टॉप-10 की लिस्ट में अकेले गैर-अमेरिकी हैं फ्रांस के बर्नार्ड अर्नाल्ट। टेक से नहीं होने के बावजूद उन्हें 443 मिलियन डॉलर का फायदा हुआ। अब 207 अरब डॉलर के साथ 7वें स्थान पर हैं।

    स्टीव बाल्मर को 3.73 मिलियन डॉलर की चोट पहुंची। अब इनकी संपत्ति 165 अरब डॉलर है। जेनसेन हुआंग 156 अरब डॉलर के साथ ब्लूमबर्ग इंडेक्स में 9वें स्थान पर हैं। इन्हें 568 मिलियन डॉलर की चोट पहुंची है। 10वें स्थान पर वॉरेन बफेट हैं। इनकी कुल संपत्ति 713 मिलियन डॉलर बढ़कर 150 अरब डॉलर हो गई है।


    अडानी-अंबानी को नुकसान

    अडानी 607 मिलियन डॉलर गंवाने के बाद 85.7 अरब डॉलर के साथ 20वें स्थान पर हैं। अंबानी 18वें स्थान पर काबिज हैं। इनकी संपत्ति में सोमवार को 1.04 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई और अब उनके पास 108 अरब डॉलर का नेटवर्थ है।

  • Venezuela: काराकास में फिर गूंजी धमाकों की आवाज… राष्ट्रपति भवन पर दोबारा हुआ हमला

    Venezuela: काराकास में फिर गूंजी धमाकों की आवाज… राष्ट्रपति भवन पर दोबारा हुआ हमला


    काराकास।
    वेनेजुएला (Venezuela) पर अमेरिकी अटैक (American Attack) के महज कुछ ही घंटों बाद राजधानी काराकास (Capital Caracas) एक बार फिर धमाकों की आवाजों से गूंज रहा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सोमवार देर रात (स्थानीय समय) वेनेजुएला के काराकास में राष्ट्रपति भवन पर हमला हुआ है। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें राष्ट्रपति भवन के पास भारी गोलीबारी देखी जा सकती है।

    सूत्रों के मुताबिक काराकास में मिराफ्लोरेस पैलेस के ऊपर अज्ञात ड्रोन देखे गए हैं। सुरक्षा बलों ने रात 8 बजे के आसपास जवाबी गोलीबारी भी की। बीते शनिवार को काराकास में अमेरिकी हमलों और राष्ट्रपति मादुरो को कैदी बनाए जाने के महज कुछ ही घंटों बाद अब देश में इस तरह कर हमलों के बाद लोगों में अफरा तफरी मची हुई है। हालांकि सरकार के करीबी एक सूत्र ने एएफपी को बताया है फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए विडियोज में बताया गया है कि काराकास की सड़कें सुरक्षा बलों से भरी हुई हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए विडियोज में बताया गया है कि काराकास की सड़कें सुरक्षा बलों से भरी हुई हैं। एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया गया, “वेनेजुएला की राजधानी काराकास का डाउनटाउन इलाका सशस्त्र झड़पों से भरा हुआ है, कई सुरक्षा बल भारी गोलीबारी कर रहे हैं। काराकास की सड़कें अलर्ट पर हैं।”

  • ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    तेहरान। ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण भड़के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ (HRANA) ने रविवार सुबह बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 25 प्रांतों में 170 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं। एजेंसी के अनुसार, मरने वालों की संख्या कम से कम 15 पहुंच गई है और 580 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में अशांति पैदा करने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि दंगाइयों को उनके स्थान पर रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर इजरायल की ओर से ऐसा बयान सामने आया है, जिसे सुनकर खामनेई आग-बबूला हो जाएंगे।

    दरअसल, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर अन्य देशों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि इस सप्ताह इस्लामी गणराज्य के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान इजरायल ईरान के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता के साथ खड़ा है। नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि हम ईरानी जनता के संघर्ष तथा उनकी स्वतंत्रता, आजादी और न्याय की आकांक्षाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह बहुत संभव है कि हम ऐसे क्षण में खड़े हैं जब ईरानी लोग अपना भाग्य अपने हाथों में ले रहे हैं। बता दें कि ईरान में प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले रविवार को हुई थी, जब दुकानदारों ने आर्थिक समस्याओं को लेकर हड़ताल की थी। उस वक्त से इसका दायरा और आकार लगातार बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारी राजनीतिक मांगें भी उठा रहे हैं।
    जून 2025 में 12 दिनों का चला था युद्ध

    बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच पिछले साल जून में 12 दिनों तक युद्ध चला था, जब इजरायल ने ईरानी परमाणु सुविधाओं के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों पर हमलों की श्रृंखला शुरू की थी। यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य इस्लामी गणराज्य की परमाणु अनुसंधान और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना था। ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करके जवाब दिया। बाद में संघर्ष के दौरान अमेरिका ने इजरायल का साथ देते हुए ईरानी परमाणु स्थलों को निशाना बनाया, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई।

    रविवार को नेतन्याहू ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की और कहा कि उन्होंने इस सप्ताह अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ इस पर बातचीत की थी। नेतन्याहू ने कहा कि हमने शून्य संवर्धन के अपने साझा रुख को दोहराया तथा ईरान से 400 किलोग्राम संवर्धित सामग्री हटाने और उन स्थलों को सख्त तथा वास्तविक निगरानी के अधीन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • वेनेजुएला में अमेरिकी ऐक्शन से घबराया तानाशाह किम जोंग? मिसाइल का किया परीक्षण

    वेनेजुएला में अमेरिकी ऐक्शन से घबराया तानाशाह किम जोंग? मिसाइल का किया परीक्षण

    प्योंगयांग । अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करने और उस देश को राष्ट्रपति को उठा कर ले आने के बाद उसके विरोधी देशों में एक डर का माहौल है। ईरान, उत्तर कोरिया और लैटिन अमेरिका के कई देश, जो खुले तौर पर अमेरिका का विरोध करते नजर आते हैं, उन्होंने ट्रंप की इस हरकत की कड़ी निंदा की है।
    यूएस के वेनेजुएला पर किए हमले के एक दिन बाद ही उत्तर कोरिया ने एक ताकतवर मिसाइल का परीक्षण किया। कई विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर कोरिया इसके जरिए यह दिखाना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। इस तरह की स्थिति में वह एक ताकतवर जवाब देने के लिए तैयार है।

    वेनेजुएला पर हुए अमेरिका आक्रमण की निंदा करते हुए किम जोंग उन के प्रशासन ने इसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और एक संप्रुभ देश की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया। प्योंगयांग ने कहा कि यह कदम साम्राज्यवादी अमेरिका के बागी और क्रूर स्वाभाव को दर्शाता है।

    प्योंगयांग की तरफ से की गई यह मिसाइल दो लक्ष्यों को साधती हुई नजर आती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चीन की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा चीन के साथ दक्षिण अमेरिका की बढ़ती दोस्ती और कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति को बढ़ावा देने के लिए मानी जा रही है। हालांकि, मिसाइल के जरिए उत्तर कोरिया ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

    दक्षिण कोरिया की इंस्टीट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम ने कहा कि कोरिया और जापान के बीच समुद्र में किए गए इस मिसाइल टेस्ट के जरिए दक्षिण कोरिया और चीन के बीच होने वाली बैठक के पहले तानाशाह की तरफ से चीन को दिया गया संदेश है।

    दरअसल, दक्षिण कोरिया कि मुख्य मांग कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु निरस्रीकरण हैं, जिसके लिए उत्तर कोरिया तैयार नहीं है।

    बकौल, लिम ‘उत्तर कोरिया इसके साथ अमेरिका को भी संदेश देना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। यानी अगर अमेरिका, वेनेजुएला जैसा कोई अभियान उत्तर कोरिया के साथ करने की सोचता है, तो ऐसी स्थिति के लिए वह दिखाना चाहता था कि उसकी तरफ से जबरदस्त प्रतिरोध होगा।

    किम जोंग उन का जिक्र करते हुए योंसई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बोंग यांगशिक ने कहा कि इस समय वेनेजुएला में जो कुछ हुआ है, उसे देखकर सबसे ज्यादा डरने वाला व्यक्ति किम जोंग उन ही है। क्योंकि वह भी एक तानाशाह ही है।

    अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया में ऐसा कोई हमला करने की संभावना कम है। क्योंकि एक तो उत्तर कोरिया सीधे तौर पर अमेरिका से उलझने से बचता आया है। हालांकि वह धमकी देता रहा है। दूसरी तरफ, वेनेजुएला की तुलना में उत्तर कोरिया की तानाशाही ज्यादा मजबूत और सैन्य शक्ति भी मजबूत है।

  • थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह

    थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह


    मुंबई। भारतीयों के बीच में थाईलैंड की एक खास छवि बनी हुई है। हर साल लाखों लोग छुट्टियां मनाने के लिए थाईलैंड जाते हैं। ऐसे में कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो सोशल मीडिया पर एक शर्म का कारण बन जाती हैं। ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें थाईलैंड के पटाया में कुछ ट्रांसजेंडर महिलाएं मिलकर एक भारतीय नागरिक के साथ हाथा-पाई करती नजर आ रही हैं।
    कथित तौर पर व्यक्ति यौन सेवाओं का भुगतान किए बिना भाग रहा था।
    सोशल मीडिया साइट पर वायरल हो रहा यह वीडियो 27 दिसंबर का बताया जा रहा है। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे तीन महिलाएं मिलकर एक 52 वर्षीय भारतीय व्यक्ति से पैसे की मांग कर रही है। जैसे ही व्यक्ति पैसे देने से इनकार करते हुए कार में बैठकर जाने लगता है, तो विवाद बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों की मदद से वह उसे कार से बाहर खींच लेती हैं और फिर जमकर मारपीट करती हैं। बाद में पुलिस वहां आकर उन्हें अलग करवाती है।

    एक स्थानीय युवक ने बताया कि आरोपी व्यक्ति वॉकिंग स्ट्रीट इलाके में एक ट्रांस सेक्स वर्कर के साथ बहस करत रहा था। जल्दी ही यह बहस एक हिंसक झड़प में बदल गई और फिर मारपीट शुरू हो गई।

    व्यक्ति ने बताया कि इस लड़ाई की शुरूआत रकम तय करने के बाद मुकर जाने की वजह से हुई।

    आपको बता दें, थाईलैंड का पटाया भारतीयों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यहाँ पर अक्सर ऐसे विवाद सामने आते रहते हैं। कुछ समय पहले सिंतबर में भी एक ऐसा वीडियो सामने आया था, जिसमें ट्रांसजेंडर महिला ने आरोप लगाया था कि व्यक्ति ने उसे गलत तरीके से छुआ है। इसी तरह अक्तूबर में भी तीन ट्रांस महिलाओं पर दो भारतीयों ने हमला किया था और उनके पैसे लेकर फरार हो गए थे।