Category: International

  • घटती आबादी से जूझ रहे चीन में कंडोम और गर्भनिरोधक हुए महंगे, सरकार ने लगाया भारी टैक्स

    घटती आबादी से जूझ रहे चीन में कंडोम और गर्भनिरोधक हुए महंगे, सरकार ने लगाया भारी टैक्स


    बीजिंग।
    घटती आबादी (Declining Population) से परेशान चीन (China) ने कंडोम और अन्य गर्भ निरोधकों (Condoms and Other Contraceptives) को लेकर बड़ा फैसला किया है। चीन कि शी जिनपिंग सरकार (Xi Jinping government.) ने पुरानी नीति को खत्म करके अब गर्भनिरोधकों पर 13 फीसदी का सेल्स टैक्स लगाने का फैसला किया है। यह फैसला 1 जनवरी 2026 से ही लागू हो गया है और इसके बाद कंडोम और गर्भनिरोधकों की कीमत में इजाफा हो गया है। बता दें कि 1994 से ही इन प्रोडक्ट्स को टैक्स से छूट दी गई थी। बढ़ती आबादी को देखते हुए चीन ने वन चाइ्ल्ड पॉलिसी लागू की थी। हालांकि 30 सालों में ही चीन की डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव आ गया और तेजी से गिरती हुई जन्मदर चिंता की वजह बन गई।

    दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन लाख कोशिश करने के बाद भी जन्म दर बढ़ा नहीं पा रहा है। 2024 में लगातार तीसरे साल चीन की जनसंख्या कम हो गई। ऐसे में एक्सपर्ट्स ने चीन को चेतावनी दी है। 2024 में चीन में 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ जो कि 2016 की तुलना में आधा था।


    क्यों टेंशन में है चीन?

    चीन इस समय दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ ही बड़ा बाजार भी है। वहीं घटती आबादी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या उत्पादकता को प्रभावित करेगी और सरकार पर बोझ बढ़ेगा। आने वाले समय में चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह डगमगाने का खतरा है। जानकारों का कहना है कि चीन अमीर होने से पहले ही बूढ़ा हो जाएगा। 2024 में ही चीन में 60 साल से ज्यादा की उम्र वाले लोगों की जनसंख्या 31 करोड़ को पार कर गई।


    कभी बढ़ती आबादी से परेशान था चीन

    एक समय था जब चीन अपनी बढ़ती आबादी को लेकर टेंशन में था। 1970 में चीन की आबादी 1 अरब के करीब पहुंच गई थी। उस समय चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी लागू की गई थी। कई बार जबरन नसबंदी या फिर गर्भपात भी करवाया जाता था। यह सब कई दशकों तक चलता रहा और पहली बार 2016 में दो बच्चों को अनुमति दी गई। इसके बाद 2021 में तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी गई।


    बढ़ती महंगाई की वजह से भी बढ़ रही आबादी

    चीन में बढ़ती आबादी की वजह से भी लोग ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करना चाहते हैं। हालांकि चीन की सरकार अब शादी और बच्चे पैदा करने को काफी तवज्जो दे रही है। ऐसे में कई कॉलेज में लव एजुकेशन का कोर्स भी चलाया जा रहा है।

    एक तरफ सरकार गर्भनिरोधकों पर टैक्स लगा रही है तो दूसरी तरफ बच्चे पैदा करने पर नकद लाभ की योजना भी चलाई जा रही है। सरकार की नीति के मुताबिक 1 जनवरी 2025 के बाद हर बच्चे पर सरकार की तरफ से 3600 युआन की वार्षिक सब्सिडी दी जाती है जो कि लगभग 45 हजार रुपये के करीब होता है। वहीं तीन साल के बाद यह सब्सिडी बढ़ाकर 10800 युआन कर दिया जाएगा। चाइल्ड केयर सब्सिडी को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसके अलावा चीन की सरकार ने फ्री पब्लिक प्री स्कूल स्कीम भी शुरू की है।


    क्या कहते हैं संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े

    संयुक्त राष्ट्र के आकड़ों की मानें तो 1.4 अरब लोगों की आबादी में 60 साल से ज्यादा के लोगों की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है। सन 2100 तक आधी आबादी ब ुजुर्ग हो सकती है। चीन में जनसंख्या को बढ़ाने के लिए जो भी योजनाएं चलाई जा रही हैं वे नाकाफी साबित हो सकती हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि गर्भनिरोधक को महंगा करने से हो सकता है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र जोखिम उठाने लगे। ऐसे में यह नई नीति खतरनाक साबित होगी। कई जानकारों का कहना है कि कंडोम पर टैक्स लगा देने पर जन्मदर पर कोई प्रभावन नहीं पड़ने वाला है।

  • भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि का होगा नवीकरण… औपचारिक वार्ता शुरू

    भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि का होगा नवीकरण… औपचारिक वार्ता शुरू


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) ने 1996 में साइन की गई गंगा जल बंटवारा संधि (Ganges water sharing treaty) के नवीकरण पर औपचारिक वार्ता शुरू कर दी है। यह संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है, जो इसके हस्ताक्षर के ठीक 30 वर्ष बाद होगी। अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों ने गुरुवार से गंगा और पद्मा नदियों में जल स्तर का संयुक्त मापन शुरू कर दिया है। यह मापन हर 10 दिन में दर्ज किया जाएगा और 31 मई तक जारी रहेगा।

    यह कदम संधि के प्रावधानों के अनुरूप है, जो सूखे मौसम (जनवरी से मई) के दौरान फरक्का बैराज पर जल बंटवारे को नियंत्रित करता है। संधि के अंतिम वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही दोनों देश नवीकरण पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि क्षेत्रीय जल प्रबंधन में निरंतरता बनी रहे। भारतीय केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के उप निदेशक सौरभ कुमार और सहायक निदेशक सनी अरोड़ा बांग्लादेश में हैं, जबकि बांग्लादेश जल विकास बोर्ड की उत्तर-पूर्वी मापन जलविज्ञान प्रभाग के कार्यकारी इंजीनियर अरिफिन जुबेद के नेतृत्व में चार सदस्यीय बांग्लादेशी दल भारत में है।

    मापन कार्य पद्मा नदी पर हार्डिंग ब्रिज से 3,500 फीट ऊपर के बिंदु और भारत में फरक्का बिंदु पर शुरू हुआ है। बता दें कि पद्मा नदी बांग्लादेश की एक प्रमुख नदी है, जो भारत से आने वाली गंगा नदी की मुख्य धारा है और बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद इसी नाम से जानी जाती है। बांग्लादेश के वरिष्ठ जल संसाधन मंत्रालय अधिकारी शिब्बर हुसैन ने कहा कि भारतीय दल की सुरक्षा को विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जल संसाधन मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है।


    क्या है संधि और इसका महत्व?

    1996 की गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौता है, जो फरक्का बैराज पर सूखे मौसम में गंगा के जल को साझा करने का प्रावधान करता है। यह संधि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद को सुलझाने में मील का पत्थर साबित हुई थी। हालांकि, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती सिंचाई आवश्यकताएं और विकास परियोजनाओं के कारण दोनों पक्ष नई संधि में बदलाव चाहते हैं।

    भारत अपनी बढ़ती जल आवश्यकताओं (सिंचाई, बंदरगाह रखरखाव और बिजली उत्पादन) को ध्यान में रखते हुए संधि में संशोधन की मांग कर रहा है, जबकि बांग्लादेश सूखे मौसम में अधिक जल हिस्सेदारी की अपील कर रहा है, क्योंकि दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में कृषि और आजीविका प्रभावित हो रही है। दोनों देश 54 साझा नदियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं, हालांकि अभी केवल गंगा और कुछ अन्य पर ही समझौते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नवीकरण वार्ता जलवायु-प्रतिरोधी और अधिक समावेशी समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

    संधि में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, दोनों देश एक जनवरी से 31 मई तक गंगा और पद्मा नदियों में विभिन्न निर्दिष्ट बिंदुओं पर जलस्तर का मापन करेंगे और प्रत्येक 10 दिन का आंकड़ा रिकॉर्ड करेंगे।

  • पायलट ने शराब के नशे में उड़ाया विमान… कनाड़ा ने Air India को 26 जनवरी तक एक्शन लेने को कहा

    पायलट ने शराब के नशे में उड़ाया विमान… कनाड़ा ने Air India को 26 जनवरी तक एक्शन लेने को कहा


    वैंकूवर।
    कनाडा (Canada) ने एयर इंडिया (Air India) को सूचित किया है कि 23 दिसंबर 2025 को उसकी एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान (International flight) के संचालन से ठीक पहले एयरलाइन का एक पायलट शराब के नशे में पाया गया। यह कनाडाई कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है। कनाडा के परिवहन नियामक ट्रांसपोर्ट कानाडा ने इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने और 26 जनवरी 2026 तक उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है।

    यह सूचना पायलट के ब्रीथ एनालाइजर (BA) टेस्ट में फेल पाए जाने के एक दिन बाद भेजी गई। ट्रांसपोर्ट कनाडा ने एयर इंडिया से अपने सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) के तहत सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।


    आरसीएमपी की पुष्टि और संभावित कार्रवाई

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट कनाडा द्वारा 24 दिसंबर को एयर इंडिया को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने एयरलाइन को बताया कि संबंधित कप्तान 23 दिसंबर को उड़ान संख्या AI 186 की ड्यूटी के लिए शराब के नशे में पहुंचा था और उड़ान संचालन के लिए अयोग्य पाया गया। वैंकूवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर RCMP द्वारा कराए गए दो ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट में इसकी पुष्टि हुई, जिसके बाद पायलट को विमान से उतारकर ड्यूटी से हटा दिया गया।

    पत्र के अनुसार, यह घटना कनाडा के एविएशन रेगुलेशंस के साथ-साथ एयर इंडिया के फॉरेन एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (FAOC 1946) की शर्तों का भी उल्लंघन है। FAOC की एक शर्त है कि विदेशी एयर ऑपरेटर सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करेगा। ट्रांसपोर्ट कनाडा ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में RCMP और स्वयं उसका विभाग कानूनी कार्रवाई कर सकता है।


    DGCA को सूचना, विवरण मांगा

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एयर इंडिया ने कनाडाई अधिकारियों से ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट का पूरा विवरण, जिसमें अल्कोहल का स्तर भी शामिल है, मांगा है। साथ ही, एयरलाइन ने भारत के विमानन नियामक DGCA को भी इस घटना की जानकारी दे दी है। ऑपरेशन सिंदूर के चलते पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने के बाद एयर इंडिया की उत्तरी अमेरिका से भारत आने वाली अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल उड़ानों को बीच में ईंधन भरने के लिए ठहराव करना पड़ रहा है। AI 186 को वैंकूवर से वियना तक दो सेट पायलटों (प्रत्येक सेट में एक कप्तान और एक सह-पायलट) द्वारा संचालित किया जाना था। वियना से दिल्ली के लिए तीसरा सेट उड़ान संचालित करता।

    संबंधित पायलट का वियना में लेओवर था और वह कथित तौर पर वैंकूवर ड्यूटी-फ्री से शराब खरीद रहा था। चूंकि वह कनाडा से बोर्ड कर ऑस्ट्रिया में उतरने वाला था, इसलिए दोनों विदेशी स्टेशनों पर सामान्यतः ब्रीथ एनालाइजर जांच नहीं होती। हालांकि, ड्यूटी-फ्री स्टाफ को उसकी सांस से शराब की गंध आई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस ने उसे एयर इंडिया की उड़ान तक ट्रेस किया।


    ‘12 घंटे पहले शराब निषिद्ध’

    वरिष्ठ पायलटों का कहना है कि उड़ान से कम से कम 12 घंटे पहले शराब पीना सख्त वर्जित है। यदि कोई पायलट इस नियम का पालन नहीं कर पाता, तो उसे चिकित्सा कारणों से उड़ान संचालन से इनकार कर देना चाहिए। ऐसा करने से उसकी नौकरी, लाइसेंस और करियर सुरक्षित रह सकता है।

    एयर इंडिया ने बुधवार को जारी बयान में कहा- 23 दिसंबर 2025 को वैंकूवर से दिल्ली जाने वाली उड़ान AI 186 में अंतिम क्षणों में देरी हुई, क्योंकि एक कॉकपिट क्रू सदस्य को उड़ान से पहले उतार दिया गया। कनाडाई अधिकारियों ने पायलट की ड्यूटी के लिए फिटनेस पर चिंता जताई, जिसके बाद उन्हें आगे की पूछताछ के लिए ले जाया गया।

  • नए साल पर पाकिस्तान ने शुभकामनाएं नहीं धमकी भेजी, आसिम मुनीर ने भारत को लेकर क्या कह डाला?

    नए साल पर पाकिस्तान ने शुभकामनाएं नहीं धमकी भेजी, आसिम मुनीर ने भारत को लेकर क्या कह डाला?


    नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत में ही पाकिस्तान ने एक बार फिर आक्रामक तेवर दिखाए हैं. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भारत का नाम लिए बिना कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उल्लंघन होने पर ठोस और निर्णायक जवाब दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान खुद आंतरिक अशांति और आतंकवाद की गंभीर समस्या से जूझ रहा है.

    जीएचक्यू में दिया बयान

    पाक सेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक, जनरल आसिम मुनीर ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर्सजीएचक्यू में बलूचिस्तान पर आयोजित 18वीं राष्ट्रीय कार्यशाला के प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.

    क्षेत्रीय शांति की बात, लेकिन लहजा धमकी भरा

    आसिम मुनीर ने एक ओर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता दोहराई, वहीं दूसरी ओर चेतावनी भरे अंदाज में कहा, पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी उल्लंघन हुआ तो दृढ़ और निर्णायक प्रतिक्रिया दी जाएगी.

    बलूचिस्तान हिंसा के लिए भारत समर्थित गुटों पर आरोप

    पाक सेना प्रमुख ने बिना कोई सबूत पेश किए आरोप लगाया कि भारत समर्थित गुट बलूचिस्तान में हिंसा फैलाने और विकास कार्यों को बाधित करने में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल प्रांत को आतंकवाद और अशांति से मुक्त कराने के लिए कड़ी कार्रवाई जारी रखेंगे.

    भारत का पलटवार

    पाकिस्तान की इस बयानबाजी के बीच भारत में पंजाब के पुलिस महानिदेशकडीजीपी गौरव यादव ने पाकिस्तान की असलियत उजागर करते हुए बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआईISI ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद पंजाब भेज रही है.

    पंजाब को अशांत करने की साजिश

    बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी यादव ने कहा कि पाकिस्तान ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं को बढ़ावा देकर पंजाब को अत्यधिक अशांत राज्य के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने इसे भारत के खिलाफ छेड़े गए छद्म युद्ध का हिस्सा बताया. डीजीपी ने बताया कि पाकिस्तान का मकसद पंजाब में अशांति फैलाना है, इसी वजह से ड्रोन के जरिए हथियार भेजे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क के सूत्रधार उत्तरी अमेरिका, यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी देशों में बैठे हुए हैं.

    हर साजिश को नाकाम कर रही है पंजाब पुलिस

    गौरव यादव ने साफ कहा कि सीमा पार से आईएसआई द्वारा रची जा रही हर साजिश को पंजाब पुलिस नाकाम कर रही है. पंजाब में पुलिस थानों को निशाना बनाकर किए गए ग्रेनेड हमलों को लेकर डीजीपी ने कहा कि पाकिस्तान सीमावर्ती राज्य में शांति भंग करना चाहता है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और हर कोशिश को विफल किया जा रहा है.
  • 'सूअर के मल से उगा मक्का खा रहे बांग्लादेशी'

    'सूअर के मल से उगा मक्का खा रहे बांग्लादेशी'


    ढाका । अमेरिका से बांग्लादेश में मक्का (कॉर्न) के आयात ने सोशल मीडिया पर एक अनोखा विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी दूतावास की एक पोस्ट के बाद लोग व्यंग्य कर रहे हैं कि यह मक्का ‘सूअर के मल की अच्छाई’ से भरपूर है, क्योंकि अमेरिका में मक्का की खेती में सूअर के मल (पिग मैन्योर) को आमतौर पर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। बांग्लादेश एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां इस्लामी शरीअत के तहत सूअर और उससे जुड़े उत्पाद हराम (निषिद्ध) माने जाते हैं। ऐसे में पिग मैन्योर के उपयोग का मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ गया।

    क्या था अमेरिकी दूतावास का पोस्ट?
    अमेरिकी दूतावास ने अपने पोस्ट में लिखा था कि इस महीने अमेरिकी मकई बांग्लादेश पहुंचने वाली है। पोस्ट में मकई को पौष्टिक बताते हुए कहा गया कि इसका उपयोग कॉर्नब्रेड, ब्रेकफास्ट सीरियल्स जैसे खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पशुओं के चारे में भी होता है, जिससे मांस, डेयरी और अंडों की आपूर्ति सुनिश्चित होती है। हालांकि, पोस्ट में सीधे तौर पर सूअर के मल का जिक्र नहीं था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने अमेरिकी खेती पद्धतियों का हवाला देते हुए इस बिंदु को उछाल दिया।

    पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक लहजे में प्रतिक्रियाएं दीं। एक पत्रकार ने कटाक्ष करते हुए लिखा- डॉन (ट्रंप) की चापलूसी के बदले बांग्लादेश को सूअर के मल से उगा अमेरिकी मकई मिला। अन्य यूजर ने इसे सांस्कृतिक असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि यह बांग्लादेश जैसे देश के लिए अपमानजनक है। अब तक अमेरिकी दूतावास की ओर से इस आलोचना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
    पहले भी उठ चुका है ‘पॉर्क’ का मुद्दा

    यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में पोर्क से जुड़ा विवाद सामने आया हो। कुछ साल पहले मछली और पशु आहार के लिए आयात किए जा रहे मीट एंड बोन मील (MBM) में पोर्क (सूअर के मांस) के अंश पाए गए थे। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने MBM के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।
    अमेरिकी मकई और पिग मैन्योर

    मकई की अधिक पैदावार के लिए भारी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होती है और अमेरिका में सुअर के मल का उपयोग आम है। इस साल अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर मकई उत्पादन हुआ है, जिसके चलते वह बांग्लादेश और भारत जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अधिक उत्पादन के कारण अमेरिकी किसान सड़कों के किनारे मकई फेंकने को मजबूर हुए।
    भारत की हिचक और व्यापार वार्ता

    भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद बड़े पैमाने पर अमेरिकी मकई और सोयाबीन आयात से परहेज किया है। भारत का तर्क है कि इससे छोटे किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। हालांकि, रायटर्स के अनुसार, भारत एथेनॉल उत्पादन के लिए सीमित मात्रा में आयात की अनुमति दे सकता है। माना जा रहा है कि इसी मुद्दे पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत अटकी हुई है।
    अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार तनाव

    बांग्लादेश का अमेरिका के साथ लगभग 6 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी देखने को मिला।

    इस वर्ष अमेरिका ने बांग्लादेश पर 37% टैरिफ लगाया था, जिससे उसके कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट निर्यात को बड़ा झटका लगा। बांग्लादेश के कुल निर्यात में कपड़ा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 80% है।

    बाद में बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर अमेरिका से आयात बढ़ाने का वादा किया, जिसके बाद टैरिफ घटाकर 20% कर दिया गया। इस वादे में अमेरिकी गेहूं, मकई और सोयाबीन शामिल थे। हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने सरकार-से-सरकार समझौते के तहत करीब 2.20 लाख मीट्रिक टन अमेरिकी गेहूं खरीदने की मंजूरी भी दी है।
    बांग्लादेश के लिए धार्मिक और स्वास्थ्य पहलू

    बांग्लादेश में 90% से अधिक आबादी मुस्लिम है, जहां सूअर का मांस खाना इस्लामी नियमों के खिलाफ है। हालांकि, मक्का में खाद के रूप में सूअर के गोबर का उपयोग वैज्ञानिक रूप से सामान्य है और इसमें कोई सूअर का मांस अवशेष नहीं रहता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़कर वायरल हो गया।

  • हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    इस्‍लामाबाद । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने बीते मई महीने में ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों को करारा सबक सिखाया। भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान भारत ने ना सिर्फ उनके ठिकानों को समतल कर दिया, बल्कि सौ से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। आतंकी इस ऑपरेशन की मार से अब तक उबर नहीं पाए हैं। हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप लीडर और हाफिज सईद के करीबी ने माना है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकियों को कितना गहरा जख्म दिया।

    पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले दर्द को खुद कबूला है। तिलमिलाए कसूरी ने इस दौरान भारत के खिलाफ जमकर जहर भी उगला है। कसूरी ने कहा है कि भारत ने आतंकी कैंपों को निशाना बनाकर गलती की है। वहीं उसने ऐलान किया है कि लश्कर “कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेगा।”

    इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सैफुल्लाह कसूरी ने हजारों लोगों की भीड़ के सामने एक सार्वजनिक सभा में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर बहुत बड़ी गलती की।” उसने आगे कहा, “…जो पाबंदियां लगाते हैं, जो रुकावट पैदा करते हैं, वो सुनो, जो हमें आतंकवादी कहते हैं, सुनो। पूरी दुनिया को पलटा जा सकता है, सिस्टम बदला जा सकता है। हम अपने कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेंगे।”

    गौरतलब है कि बीते 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों को बेरहमी से मार दिया था। इस दौरान आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर गोलियां बरसाई थीं। इसके बाद भारत ने पाक और पाक अधिकृत कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस कार्रवाई के दौरान करीब 150 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया।

  • सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव, बीच में आया पाकिस्तान?

    सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव, बीच में आया पाकिस्तान?


    इस्लामाबाद । यमन में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के संबंधों में आई दरार ने पूरे मध्य पूर्व को हिला दिया है। सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमले किए, जिसमें यूएई से आई हथियारों की खेप को निशाना बनाया गया। रियाद का आरोप है कि ये हथियार यूएई समर्थित अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के लिए थे, जो सऊदी की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान भी खुलकर सामने आ गया है।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत कर यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर हालिया सऊदी हवाई हमले के बाद सऊदी अरब के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त की। यह जानकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में दी गई।

    बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चले आ रहे भाईचारे वाले संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया कि हाल के महीनों में द्विपक्षीय रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने फोन कॉल के लिए शहबाज़ शरीफ का आभार जताया और पाकिस्तान के साथ आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की सऊदी अरब की इच्छा दोहराई। उन्होंने अगले वर्ष पाकिस्तान की आधिकारिक यात्रा करने का भी इरादा व्यक्त किया।

    यमन में बढ़ता तनाव

    गौरतलब है कि सऊदी अरब ने मंगलवार को मुकल्ला पर हवाई हमला किया था। यह हमला संयुक्त अरब अमीरात से कथित रूप से हथियारों की एक खेप के पहुंचने के बाद किया गया, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह यमन के अलगाववादी बलों के लिए थी। यह घटनाक्रम यूएई समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल की प्रगति से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस टकराव से यमन के एक दशक से जारी संघर्ष में एक नया मोर्चा खुलने की आशंका पैदा हो गई है, जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाली ताकतें आपस में भी भिड़ सकती हैं। यमन पहले ही अरब दुनिया का सबसे गरीब देश माना जाता है और वहां मानवीय संकट बेहद गंभीर है।
    पाकिस्तान के लिए कठिन कूटनीतिक चुनौती

    पाकिस्तान के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि उसके संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब- दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इस सप्ताह रियाद और अबू धाबी के बीच बढ़े तनाव ने इस्लामाबाद के सामने कठिन संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    इसी क्रम में शहबाज शरीफ ने क्राउन प्रिंस से बात करने से एक दिन पहले यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान से मुलाकात की थी। यह बैठक पंजाब के रहीम यार ख़ान में हुई, जहां यूएई राष्ट्रपति इस्लामाबाद की आधिकारिक यात्रा के बाद ठहरे हुए थे। अधिकारियों के अनुसार, इस मुलाकात का मकसद क्षेत्रीय तनाव को कम करना था।
    रक्षा, निवेश और तेल आपूर्ति

    गौरतलब है कि इस्लामाबाद और रियाद ने सितंबर में एक आपसी रक्षा समझौता किया था, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। सऊदी अरब लंबे समय से पाकिस्तान का प्रमुख आर्थिक और सुरक्षा साझेदार रहा है। हाल के वर्षों में उसने पाकिस्तान को अरबों डॉलर के ऋण दिए हैं, जिससे देश को विदेशी कर्ज के संकट और संभावित डिफॉल्ट से बचाने में मदद मिली। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने भी पाकिस्तान को वित्तीय सहायता दी है। वर्ष 2024 में पाकिस्तान ने कहा था कि यूएई ने देश में 10 अरब डॉलर तक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
    विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

    इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी बुधवार को एक बयान जारी कर यमन में दोबारा भड़की हिंसा पर चिंता जताई। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यमन के किसी भी पक्ष द्वारा उठाए गए एकतरफा कदम संघर्ष को और भड़का सकते हैं तथा पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकते हैं। बयान में पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा, यमन की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति समर्थन दोहराया और संकट को कम करने तथा देश में शांति व स्थिरता बहाल करने के लिए किए जा रहे क्षेत्रीय प्रयासों का स्वागत किया। तेल आपूर्ति के लिहाज से भी सऊदी अरब पाकिस्तान का एक प्रमुख साझेदार है। ऊर्जा जरूरतों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग के चलते रियाद और इस्लामाबाद के रिश्ते रणनीतिक रूप से बेहद अहम बने हुए हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन

    ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन


    नई दिल्‍ली। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

    ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह दुनिया का पहला देश है जिसने ऐसा कदम उठाया। अब खबर है कि फ्रांस भी इसी तरह का कानून लाने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
    बताया जा रहा है कि इस पहल को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि संसद को जनवरी में इस प्रस्ताव पर बहस शुरू कर देनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने विश्व में पहली बार 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया है।

    फ्रांसीसी मसौदे में कहा गया है कि कई अध्ययन और रिपोर्टें अब किशोरों द्वारा डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले विभिन्न जोखिमों की पुष्टि करती हैं। सरकार ने कहा कि जिन बच्चों को ऑनलाइन सेवाओं तक बेरोकटोक पहुंच मिली हुई है, वे ‘अनुचित सामग्री’ के संपर्क में आ रहे हैं, साइबर उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं या उनकी नींद के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मसौदा कानून में दो मुख्य अनुच्छेद हैं। पहला अनुच्छेद 15 वर्ष से कम आयु के नाबालिग को ऑनलाइन सोशल मीडिया सेवा प्रदान करने को गैरकानूनी बनाता है। दूसरा अनुच्छेद माध्यमिक विद्यालयों में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है।

  • नास्त्रेदमस ने कौन-कौन सी की हैं भविष्यवाणियां, साल 2026 डराने वाला होगा !

    नास्त्रेदमस ने कौन-कौन सी की हैं भविष्यवाणियां, साल 2026 डराने वाला होगा !


    नई दिल्‍ली। नया साल 2026 दस्तक दे चुका है। साल 2025 खत्म हो गया और नया साल आ चुका है । हर साल की तरह इस बार भी अगले साल की भविष्यवाणियों को लेकर काफी हलचल है। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां काफी सटीक रही हैं और लोग उन्हें जानना चाहते हैं। अगले साल 2026 के लिए नास्त्रेदमस ने कई डराने व हैरान करने वाली भविष्यवाणियां की हैं। इसमें युद्ध, बिजली गिरने से महान व्यक्ति की मौत समेत अन्य बातें शामिल हैं।

    सात महीने बड़ा युद्ध
    नास्त्रेदमस ने अगले साल के लिए जो भविष्यवाणी की है, उसमें सात महीने तक चलने वाले युद्ध की भी आशंका जताई है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों की मौत होगी। इस भविष्यवाणी को यूरोप और उसके बाहर चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव से जोड़ा जा रहा है। हालांकि मूल टेक्स्ट में आधुनिक दुनिया या किसी खास टाइमलाइन का कोई सीधा जिक्र नहीं है।
    पर्यावरण और सामाजिक उथल-पुथल

    नास्त्रेदमस ने अगले साल के लिए पर्यावरण और सामाजिक उथल-पुथल का भी जिक्र किया है। दावा किया जा रहा है कि भीषण सूखा और मौसम की अन्य चरम घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि, भाषा सामान्य है, लेकिन 21वीं सदी के व्याख्याकारों ने इसे 2026 और उसके बाद पर्यावरण में बढ़ती अस्थिरता के लिए एक संभावित चेतावनी के रूप में फिर से पेश किया है।
    तकनीकी और सांस्कृतिक बदलाव

    संघर्ष और जलवायु के अलावा, कुछ आधुनिक व्याख्याएं नास्त्रेदमस की अस्पष्ट पंक्तियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय और सामाजिक विखंडन से जोड़ने की भी कोशिश करती हैं। हालांकि, ये कनेक्शन पाठ्य के बजाय रचनात्मक हैं।
    ‘बिजली गिरने से मारा जाएगा महान आदमी’

    ब्रिटेन की इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स के अनुसार, नास्त्रेदमस ने एक डराने वाली भविष्यवाणी की है, उसमें आसमान से अचानक बिजली के हमले में एक महान व्यक्ति के मारे जाने को लेकर है। सेंचुरी I के 26वें छंद में कहा गया है कि ‘एक महान आदमी दिन में बिजली गिरने से मारा जाएगा’। आज के समय में यह महान आदमी दुनिया का बड़ा नेता या ग्लोबल सेलिब्रिटी तक कोई भी हो सकता है।

  • कुरान पर शपथ लेकर आज न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे भारतीय मूल के ममदानी… रचेंगे इतिहास

    कुरान पर शपथ लेकर आज न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे भारतीय मूल के ममदानी… रचेंगे इतिहास


    न्यूयॉर्क।
    भारतीय मूल (Indian origin) के जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) गुरुवार को इतिहास रचने जा रहे हैं। आधी रात को शपथ लेते ही वह अमेरिका के सबसे बड़े शहर (Largest city America), न्यूयॉर्क (New York) के पहले मुस्लिम मेयर (First Muslim mayor) बन जाएंगे। इस दिन को खास बनाने के लिए ममदानी एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहे हैं। वे मेयर पद के लिए कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने जा रहे हैं। यह पहली बार होगा जब न्यूयॉर्क शहर का कोई मेयर शपथ लेने के लिए इस्लाम के पवित्र ग्रंथ का इस्तेमाल करेगा।

    34 साल के डेमोक्रेट जोहरान ममदानी सिटी हॉल के नीचे एक लंबे समय से बंद सबवे स्टेशन में मेयर की शपथ लेने जा रहे हैं। शपथ लेते ही वह इस पद को संभालने वाले पहले मुस्लिम, पहले दक्षिण एशियाई और अफ्रीका में जन्मे पहले व्यक्ति बन जाएंगे।

    जानकारी के मुताबिक ममदानी की पत्नी, रमा दुवाजी ने इस पवित्र ग्रंथ को चुनने में उनकी मदद की। इसे अमेरिका के सबसे अधिक आबादी वाले शहर के मुस्लिम निवासियों को एक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। जहां एक तरफ उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में एफोर्डिबिलिटी को मुद्दा बनाया था, वहीं वे अपने मुस्लिम धर्म के बारे में भी खुलकर बात करते थे। वह अक्सर मस्जिदों में दिखाई देते थे और उन्होंने इससे अपने समर्थकों का बेस तैयार किया। जोहरान ममदानी को वोट देने वालों में कई पहली बार वोट देने वाले दक्षिण एशियाई और मुस्लिम मतदाता थे।


    तीन कुरान का इस्तेमाल करेंगे ममदानी

    ममदानी सबवे समारोह के दौरान दो कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेंगे। इनमें से एक उनके दादा का कुरान है। वहीं वे एक दूसरे पॉकेट साइज के संस्करण पर भी हाथ रखेंगे, जो 18वीं या 19वीं सदी का है। यह न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के शॉम्बर्ग सेंटर फॉर रिसर्च इन ब्लैक कल्चर के कलेक्शन का हिस्सा है। लाइब्रेरी की क्यूरेटर हिबा आबिद ने बताया है कि कुरान की यह कॉपी शहर के मुसलमानों की विविधता और पहुंच का प्रतीक है। वहीं साल के पहले दिन सिटी हॉल में होने वाल शपथ ग्रहण समारोह के लिए, ममदानी अपने दादा और दादी दोनों के कुरान का इस्तेमाल करेंगे।


    रचा था इतिहास

    इससे पहले बीते नवंबर में भारतीय मूल के जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर चुनाव में निर्णायक और ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। उन्होंने अपने विजय भाषण के दौरान पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को जिक्र करते हुए कहा था कि शहर नए युग की ओर बढ़ रहा है। ममदानी प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर महमूद ममदानी के पुत्र हैं। ममदानी का जन्म युगांडा में हुआ था। इस जीत के साथ ही वह अमेरिका के सबसे बड़े शहर में मेयर बनने वाले पहले दक्षिण एशियाई और मुस्लिम व्यक्ति बन गए हैं।