Category: Lifestyle

  • सावधान! बाजार में मिलने वाले ये ‘हेल्दी’ फूड लंबे समय में कर सकते हैं नुकसान

    सावधान! बाजार में मिलने वाले ये ‘हेल्दी’ फूड लंबे समय में कर सकते हैं नुकसान


    नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास घर का ताजा और पुराना खाना बनाने का समय कम हो रहा है। यही वजह है कि लोग मार्केट में मीटिंग वाले स्ट्रैटेजी और रेडी-टू-ईट फूड पर भारी प्रतिबंध हो गए हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को ‘हल्दी’ में शामिल किया जाता है।

    हर ‘हेल्दी’ चीज़ सच में स्वस्थ नहीं है
    बाजार में ऐसे कई खाद्य उत्पाद मौजूद हैं, जिनमें कम चीनी, ज्यादा पोषण और फिटनेस के नाम शामिल हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। इनमें से कुछ चीनी, केमिकल और सर्जिकल शरीर को धीरे-धीरे नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 ‘हेल्डी’ फ़ार्म, जो असल में आपकी सेहत बना सकते हैं।

    1. साबुत अनाज: साबुत अनाज की कमी, शुगर अधिक
    पैक्ड सामान में स्टेक-इलेक्ट्रिक उत्पाद शामिल हैं, लेकिन इनमें अक्सर अतिरिक्त चीनी, प्रिजर्वेटिव और कलात्मक रंग मिलाए जाते हैं। वहीं, साबुत अनाज की दुकानों पर मिलने वाले सामुहिक फलों में भी सब्जी की कमी होती है, जो फल का सबसे जरूरी हिस्सा होता है। ऐसे में पूरा फल खाना बड़ा खतरनाक होता है।

    2. इंस्टिटेंट ओट्स: अधिकांश व्यापारियों का नुकसान
    इन्टेंट ओट्स को अर्ली बनने वाला वैलिडिटी विकल्प माना जाता है, लेकिन काफी आकर्षक बनाया जाता है। इसमें स्वाद, नमक और कई बार चीनी भी मिलाई जाती है। इसके बजाय कम आकर्षक वाले स्टील-कैट ओट्स बड़े पैमाने पर उद्यम और राक्षसी होते हैं।

    3. ब्राउन बेडर: नाम ‘हेल्दी’, अंदर से मेडा
    बाजार में मिलने वाली ज्यादातर ब्राउन ब्रेडेड को मल्टीग्रेन या आटा ब्रेडेड बेरोजगारों द्वारा बेची जाती है, लेकिन हकीकत में इनमें मैदा की मात्रा अधिक होती है। रंग देने के लिए कैरमल या अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं, जिससे यह भूरा दिखता है। ऐसे में ब्राउन बेडर को आंख बंद करके स्टेक मैन लेना गलत हो सकता है।

    4. फ्लेवर्ड दही या लस्सी: स्वाद में मीठा, सेहत में नुकसान
    पैक्ड फ्लेवर्ड दही या लस्सी का स्वाद अच्छा ही लगता है, लेकिन इनमें फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव और मात्रा में शुगर मिलाई होती है। इसके नियमित सेवन से वजन बढ़ सकता है और रक्त शर्करा में कमी हो सकती है। सादा दही या घर की बनी लस्सी मुख्य रूप से सुरक्षित विकल्प है।

    5. शुगर मुक्त उत्पाद: शुगर मुक्त उत्पाद
    यहां ‘शुगर-फ्री’ के नाम पर कई उत्पाद खत्म किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर या रिफाइंड तत्व मौजूद हैं। लंबे समय तक इसका सेवन शरीर के लिए लाभकारी हो सकता है। प्राकृतिक मिश्रण जैसे गुड़ या शहद को भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।

    सही चुनाव से ही संभव सही स्वास्थ्य
    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि संभवतः संभव हो, प्राकृतिक और कमोडिटी भोजन को ही शामिल करना चाहिए। ट्रैक्टर और विज्ञापन के झांसे में गाइन ‘हल्दी’ टैग वाले प्रोडक्ट्स पर नजर बंद करके पक्का नुकसान हो सकता है।

  • गर्मी में राहत का आसान उपाय, शीतली प्राणायाम का सही तरीका जानें

    गर्मी में राहत का आसान उपाय, शीतली प्राणायाम का सही तरीका जानें


    नई दिल्ली मूल में हल्दी गर्मी, चिलचिलाती धूप और लू के थेपेडर्स ने लोगों की समस्याओं को प्रभावित किया है। ऐसे मौसम में शरीर को ठंडा और दिमाग को शांत रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। इस स्थिति में शीतली प्राणायाम एक आसान और प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आता है, जो बिना किसी औषधि के शरीर और मन को ठंडक प्रदान करता है।

    आयुष मंत्रालय भी आधिकारिक तौर पर कार्य करता है
    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी इस प्राणायाम के निषेध की सलाह देता है। यह योगिक श्वसन तकनीक समरलैण्ड में बेहद ही मजबूत मैनी बनाती है और शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है। ‘शीतली’ शब्द का अर्थ ही शीतलता प्रदान करना है, और यह अभ्यास गुण के लिए जाना जाता है।

    शीतली प्राणायाम कैसे काम करता है
    शीतली प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें जीभ को नलिका (ट्यूब) की तरह घुमाकर मुंह से अंदर हवा ली जाती है। यह अदृश्य हवा सीधे गले और शरीर में प्रवेश करती है, जिससे तुरंत ठंड लग जाती है। नियमित अभ्यास से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मन शांत होता है।

    गर्मी में मिलने वाले जबरदस्त फायदे
    विशेषज्ञ के अनुसार, शीतली प्राणायाम कई स्वास्थ्य लाभ देता है। यह लू और हीट स्ट्रोक से बचाव में मदद करता है। साथ ही तनाव, चिंता और निराशा को कम कर मानसिक शांति प्रदान करता है।

    यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहद हानिकारक है। पेट की गर्मी को कम करके एसिडिटी, कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। हाई ब्लड वाले लोगों के लिए भी ऐसा माना जाता है, क्योंकि यह डांस को बनाए रखने में सहायक होता है। इसके अलावा इससे त्वचा को भी फायदा मिलता है। गर्मी से होने वाले रैशेज, जलन और त्वचा संबंधी चिंताओं से राहत मिलती है। रात को सोने से पहले इसका अभ्यास करने से नींद अच्छी और गहरी आती है।

    सही सूत्र जानना जरूरी है
    शांत वातावरण में सुबह के समय शीतली प्राणायाम करना सबसे अच्छा माना जाता है। सुखासन या पद्मासन में लम्बी जीभ को बाहर की ओर झुकाएं और उसे नलिका के आकार में घुमाएं (यदि संभव न हो तो शरीर को गोल घुमाने का भी प्रयास किया जा सकता है)। इसके बाद मुंह से धीरे-धीरे सांस अंदर लें और कुछ सेकंड तक रोकें। फिर नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराना चाहिए। प्रतिदिन 5 से 10 मिनट का अभ्यास साम्य होता है।

    इन लोगों को कलाकारों से सावधान रहना चाहिए
    वैसे तो शीतली प्राणायाम बहुत अच्छा है, लेकिन ठंड-जुकाम, सांस या गले से जुड़ी समस्या वाले लोगों को इसे पहले योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह से जरूर लेना चाहिए।

  • गर्मियों में इन 5 पत्तियों का सेवन, शरीर रहेगा स्वस्थ और बीमारियां रहेंगी दूर

    गर्मियों में इन 5 पत्तियों का सेवन, शरीर रहेगा स्वस्थ और बीमारियां रहेंगी दूर


    नई दिल्ली। भारत में प्राचीन समय से ही जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद के ज़रिए रोगों का उपचार किया जाता रहा है। आज भले ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने इलाज को आसान बना दिया हो, लेकिन आयुर्वेद न सिर्फ़ बीमारियों को जड़ से खत्म करने की बात करता है, बल्कि शरीर को रोगों से दूर रखने के उपाय भी बताता है।

    गर्मी में बढ़ती समस्याएं और प्राकृतिक समाधान
    गर्मी के मौसम में अक्सर ब्लड प्रेशर, मुंहासे, फोड़े-फुंसी और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में लोग दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद में कुछ ऐसे प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। खासकर कुछ पत्तियां ऐसी हैं, जिनका सेवन करने से कई समस्याओं से राहत मिल सकती है।

    नीम के पत्ते: प्राकृतिक एंटीबायोटिक
    नीम की पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। इनमें प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो खून को साफ करने में मदद करते हैं। शुगर, बुखार, मुंहासे और फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं में नीम बहुत लाभकारी माना जाता है। गर्मियों में नीम की कोमल सब्जियों को चबाना या उनका जूस पीना शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।

    सहजन के पत्ते: पोषण का भंडार
    मोरिंगा यानी सहजन के पत्ते आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। ये शरीर में खून की कमी दूर करने, कमजोरी कम करने और पाचन क्रिया सुधारने में मदद करते हैं। इसके अलावा ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहजन फायदेमंद है। सहजन के पत्तों का सूप या जूस गर्मियों में शरीर को ऊर्जा देता है।

    शीशम के पत्ते: महिलाओं के लिए लाभकारी
    शीशम के पत्ते विशेष रूप से महिलाओं के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं, मासिक धर्म की अनियमितता और सफेद पानी जैसी परेशानियों में इनका उपयोग किया जाता है। शीशम के पत्तों को मिश्री के साथ पीसकर सुबह खाली पेट सेवन करने से लाभ मिल सकता है।

    बरगद के पत्ते: त्वचा के लिए बाध्य
    बरगद के पेड़ के पत्ते त्वचा रोगों में बेहद असरदार होते हैं। फंगल इंफेक्शन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में बरगद के पत्तों को उगलकर उसका सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

    पीपल के पत्ते: आयुर्वेदिक औषधि
    पीपल के पेड़ के पत्तों को आयुर्वेद में विशेष औषधि माना गया है। पथरी, सिस्ट और अन्य आंतरिक समस्याओं में इसके रस का सेवन लाभकारी माना जाता है। यह शरीर के अंदरूनी अंगों को मजबूत करने में सहायक होता है।

    सेवन से पहले बरतें सावधानी
    हालांकि ये सभी पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर हैं, लेकिन इनके सेवन करने से पहले किसी चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए सही मात्रा और तरीका जानना जरूरी है।

  • व्रत में कुछ नया ट्राई करें समा चावल अप्पे देंगे स्वाद और सेहत का परफेक्ट कॉम्बिनेशन

    व्रत में कुछ नया ट्राई करें समा चावल अप्पे देंगे स्वाद और सेहत का परफेक्ट कॉम्बिनेशन


    नई दिल्ली:
    चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर व्रत रखने वाले लोग ऐसे भोजन की तलाश में रहते हैं जो हल्का भी हो और शरीर को पर्याप्त ऊर्जा भी दे ऐसे में समा चावल के अप्पे एक बेहतरीन और स्वादिष्ट विकल्प बनकर सामने आते हैं यह डिश न केवल बनाने में आसान है बल्कि पोषण से भी भरपूर है और पूरे दिन आपको एक्टिव बनाए रखने में मदद करती है

    सामा चावल जिसे वरई या मोरधन भी कहा जाता है व्रत के दौरान सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले अनाजों में शामिल है इसकी खासियत यह है कि यह जल्दी पचता है और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखता है जब इसे दही मूंगफली और हल्के मसालों के साथ मिलाया जाता है तो यह एक संतुलित और हेल्दी स्नैक बन जाता है खास बात यह है कि अप्पे पैन में बनने के कारण इसमें बहुत कम तेल का इस्तेमाल होता है जिससे यह और भी हेल्दी हो जाता है

    इस स्वादिष्ट रेसिपी को बनाने के लिए सबसे पहले एक कप समा चावल को अच्छी तरह धोकर दो से तीन घंटे के लिए भिगो लें इसके बाद इसे पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें अब इस पेस्ट में आधा कप दही मिलाएं और एक उबला हुआ मैश किया आलू डालें इसके साथ बारीक कटी हरी मिर्च कद्दूकस अदरक मूंगफली पाउडर सेंधा नमक जीरा और हरा धनिया डालकर सभी सामग्री को अच्छे से मिक्स कर लें

    अब अप्पे पैन को मध्यम आंच पर गर्म करें और हर खांचे में थोड़ा सा घी या तेल डालें तैयार बैटर को इसमें डालें और धीमी से मध्यम आंच पर पकाएं जब अप्पे एक तरफ से सुनहरे और कुरकुरे हो जाएं तो उन्हें पलटकर दूसरी तरफ भी अच्छी तरह सेक लें कुछ ही मिनटों में आपके गर्मागर्म क्रिस्पी अप्पे तैयार हो जाएंगे

    अगर आप इन्हें और ज्यादा कुरकुरा बनाना चाहते हैं तो बैटर में थोड़ा सा सिंघाड़े का आटा मिला सकते हैं स्वाद को और बढ़ाने के लिए ऊपर से हल्का नींबू रस डालें और कोशिश करें कि तेल का उपयोग कम से कम हो ताकि यह डिश पूरी तरह हेल्दी बनी रहे

    सामा चावल के अप्पे व्रत के दौरान एक परफेक्ट स्नैक हैं जो स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संतुलन प्रदान करते हैं यह न केवल आपकी भूख को शांत करते हैं बल्कि शरीर को जरूरी पोषण और ऊर्जा भी देते हैं जिससे आप पूरे दिन तरोताजा और सक्रिय महसूस करते हैं

  • खुशहाल रिलेशनशिप के लिए जरूरी टिप्स छोटी आदतें लाएंगी बड़ा बदलाव

    खुशहाल रिलेशनशिप के लिए जरूरी टिप्स छोटी आदतें लाएंगी बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली:  आज की तेज रफ्तार जिंदगी में रिश्तों को संभालना पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है काम का दबाव बदलती प्राथमिकताएं और डिजिटल दुनिया में बढ़ती दूरी अक्सर लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को कमजोर कर देती है ऐसे में एक मजबूत और खुशहाल रिश्ता बनाए रखने के लिए कुछ बुनियादी बातों को अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है

    किसी भी रिश्ते की नींव मजबूत कम्युनिकेशन पर टिकी होती है जब दो लोग खुलकर अपने विचार भावनाएं और परेशानियां एक दूसरे के साथ साझा करते हैं तो गलतफहमियों की गुंजाइश काफी कम हो जाती है अक्सर लोग छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं या मन में दबाकर रखते हैं जो बाद में बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं इसलिए सही समय पर खुलकर बातचीत करना रिश्ते को स्वस्थ बनाए रखने का पहला कदम है

    भरोसा हर रिश्ते की सबसे अहम कड़ी होती है यह एक ऐसा धागा है जो दो लोगों को गहराई से जोड़ता है एक बार अगर विश्वास टूट जाए तो उसे दोबारा बनाना आसान नहीं होता इसलिए ईमानदारी और पारदर्शिता को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए छोटे छोटे झूठ भी लंबे समय में रिश्ते को कमजोर कर सकते हैं

    व्यस्त दिनचर्या के बावजूद एक दूसरे के लिए समय निकालना बेहद जरूरी है साथ बिताए गए पल चाहे कितने ही छोटे क्यों न हों वे रिश्ते में नजदीकियां बढ़ाते हैं कभी साथ बैठकर बातचीत करना या एक साथ समय बिताना भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है

    हर व्यक्ति की सोच और स्वभाव अलग होता है इसलिए एक दूसरे का सम्मान करना और उनकी भावनाओं को समझना रिश्ते को संतुलित बनाए रखता है असहमति होना स्वाभाविक है लेकिन उसे संभालने का तरीका ही रिश्ते की दिशा तय करता है धैर्य और समझदारी से बात करने पर बड़े से बड़ा विवाद भी आसानी से सुलझाया जा सकता है

    रिश्तों में छोटी छोटी खुशियों का भी बड़ा महत्व होता है एक प्यारी सी तारीफ एक छोटा सा सरप्राइज या एक स्नेहभरा संदेश भी दिन को खास बना सकता है ऐसे छोटे प्रयास रिश्ते में ताजगी बनाए रखते हैं और अपनापन बढ़ाते हैं

    किसी भी रिश्ते में झगड़े होना सामान्य बात है लेकिन जरूरी यह है कि उन्हें सही तरीके से सुलझाया जाए गुस्से में प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत रहकर समाधान पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि भावनाओं में बहकर लिया गया फैसला अक्सर रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकता है

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खुद का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है जब व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक रूप से संतुलित होता है तभी वह किसी रिश्ते को बेहतर तरीके से निभा सकता है आत्मसम्मान और अपनी खुशी को बनाए रखना एक स्वस्थ और लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते की पहचान है

    मजबूत रिश्ते का आधार प्यार विश्वास समय और समझदारी पर टिका होता है यदि इन बातों को जीवन में अपनाया जाए तो कोई भी रिश्ता न केवल टिकाऊ बन सकता है बल्कि उसमें हमेशा खुशियां और संतुलन बना रह सकता है

  • Mint के फायदे: गर्मियों में शरीर को ठंडक और सेहत को सुधारने वाला सुपरहर्ब

    Mint के फायदे: गर्मियों में शरीर को ठंडक और सेहत को सुधारने वाला सुपरहर्ब


    नई दिल्ली। नई दिल्लीगर्मियों के मौसम में ही शरीर को ठंडक और ताजगी की ज़रूरत महसूस होने लगती है। इस समय फल आसानी से मिलते हैं, लेकिन प्याले और हरी पत्तेदार भूख-सब्जी में ताजगी कम होती है। ऐसे में पुदीना (पुदीना) आपके लिए एक प्राकृतिक शीतलता और स्वास्थ्यवर्धक उपाय बन जाता है।

    शरीर को शीतलता मिलती है

    आयुर्वेद के अनुसार पुदीना कफ और पित्त की मात्रा निर्धारित होती है। इसके सेवन से पेट की गर्मी कम होती है और शरीर में ठंडक का एहसास होता है। पुदीने में मौजूद मेन्थॉल मस्तिष्क तक संदेश भेजा जाता है कि शरीर में ठंडक आ रही है, जिससे सिरदर्द और बेचैनी गर्मी से जुड़ी लत कम होती है।

    पाचन तंत्र के लिए बाध्य

    गर्मियों में अक्सर तल-भुना और भारी भोजन खाने से पेट में गैस, भारीपन और खट्टी डकारें होती हैं। पुदीना पाचन तंत्र को शांत करता है, अम्लता को कम करता है और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) में राहत देता है। इसे आप चिप्स, रायते या ठंडे पानी में आसानी से ले सकते हैं।

    लू से बचाव और ऊर्जा को बढ़ाता है

    पुदीना लू से बचने में भी मदद करता है। यह ठंडा करने वाला असर शरीर को ताजगी देता है और गर्मी में होने वाली थकान को कम करता है। गर्मियों की धूप में पुदीने का सेवन शरीर को वर्गीकृत संग्रह में भी रखा जाता है।

    बाहरी इस्तेमाल से भी लाभ

    पुदीना केवल खाने के लिए ही नहीं, बल्कि इस्तेमाल पर भी जादुई है:
    फेसबुक पर लेप: मुंहासे और टैनिंग कम करने में मदद करता है।
    सिर दर्द में राहत: पुदीने की चाय या ताज़ा पत्ते का सेवन सिरदर्द और तनाव को कम करता है।
    तनाव कम करना: पुदीने की चाय मन को शांत और ताजगी से भर देती है।

    इस्तेमाल करने के तरीके
    नारियल, रायता या कीक में पुदीने की बनी चीजें।
    दिन में 1-2 बार पुदीने की चाय छोड़ें।
    चेहरे पर ताजा पुदीने का लेप मुंहासे और तैलीय त्वचा के लिए करें।
    गर्मियों में ठंडा पानी या नींबू पानी में पुदीने की धुलाई डालें।

  • गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने का मंत्र ताजे जूस से शरीर को रखें ठंडा और एक्टिव

    गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने का मंत्र ताजे जूस से शरीर को रखें ठंडा और एक्टिव


    नई दिल्ली: भारत में गर्मियों का असर तेज होते ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को खानपान में सावधानी बरतने और शरीर को हाइड्रेट रखने पर जोर दिया है तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी तेजी से होने लगती है जिससे थकान चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं ऐसे में ताजे और ठंडे प्राकृतिक जूस शरीर को राहत देने का सबसे आसान और प्रभावी उपाय बनकर सामने आए हैं

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में ऐसे पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाने के साथ साथ ऊर्जा भी दें इस लिहाज से तरबूज का रस सबसे लोकप्रिय विकल्प माना जाता है इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है जो शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है और गर्मी से राहत दिलाता है

    इसी तरह नारियल पानी को प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक कहा जाता है इसमें मौजूद पोटेशियम और मिनरल्स शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं और थकान को दूर करते हैं गर्मियों में नियमित रूप से इसका सेवन शरीर को तरोताजा बनाए रखता है

    नींबू और पुदीना से बना जूस भी बेहद फायदेमंद माना जाता है यह न केवल शरीर का तापमान नियंत्रित करता है बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है खीरे का जूस शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और पेट को ठंडक पहुंचाता है जिससे गर्मी में होने वाली जलन और एसिडिटी से राहत मिलती है

    पारंपरिक भारतीय पेय जैसे आम पन्ना और कोकम शर्बत भी लू से बचाने में काफी कारगर हैं ये शरीर को ठंडा रखने के साथ साथ ऊर्जा प्रदान करते हैं और हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करते हैं वहीं अनानास और संतरे का जूस विटामिन सी से भरपूर होता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दिन के किसी भी समय इन जूसों का सेवन किया जा सकता है चाहे सुबह की शुरुआत करनी हो दोपहर की गर्मी से राहत चाहिए या शाम को थकान दूर करनी हो ये सभी विकल्प हर समय लाभकारी हैं खास बात यह है कि इन्हें घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और इसमें किसी प्रकार के प्रिजर्वेटिव या अतिरिक्त चीनी की जरूरत नहीं होती

    विशेषज्ञ पैकेज्ड और डिब्बाबंद जूस से बचने की सलाह देते हैं क्योंकि इनमें अक्सर अतिरिक्त शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं इसके मुकाबले ताजे फल और सब्जियों से बने जूस अधिक पोषक और सुरक्षित होते हैं

    गर्मियों में स्वस्थ रहने का सबसे सरल तरीका यही है कि शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ मिलते रहें और इसके लिए प्राकृतिक जूस एक बेहतरीन विकल्प हैं जो न केवल हाइड्रेशन बनाए रखते हैं बल्कि शरीर को ठंडा और ऊर्जावान भी रखते हैं

  • रोमांटिक ट्रिप के लिए परफेक्ट जगहें, पार्टनर के साथ यादगार सफर का प्लान करें

    रोमांटिक ट्रिप के लिए परफेक्ट जगहें, पार्टनर के साथ यादगार सफर का प्लान करें


    नई दिल्ली। भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर आप अपने राजभवन के साथ कुछ पवित्र और स्मारक महल में जगह बनाना चाहते हैं, तो बेहतर से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। एक रोमांटिक यात्रा केवल आपके विविधताओं में नई ऊर्जा भारती है, बल्कि सामंजस्यपूर्ण समझ और रिश्तों को भी मजबूत आधार देती है। भारत में कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं, जहां आप अपनी राजधानी के साथ प्रकृति, रोमांच और दिव्यता का शानदार अनुभव ले सकते हैं। अगर आप भी किसी खास यात्रा की योजना बना रहे हैं तो ये डेस्टिनेशन आपके लिए अचूक साबित हो सकता है।

    मनाली: हर कपल का ड्रीम डेस्टिनेशन

    रोमांटिक ट्रिप की जब भी बात होती है तो सबसे पहले मनाली का नाम सामने आता है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, जंगली हवाएं और रिहायशी नदियां इस जगह की बेहद खस्ता संरचना हैं। यहां होता है कपल्स को ऐसा अहसास, जैसे वे किसी फिल्मी दुनिया का हिस्सा हों। आप अपने महानगर के साथ तिब्बती मठों की सैर कर सकते हैं, नदी तट पर कैंपिंग का मजा ले सकते हैं या फिर भृगु झील तक ट्रैकिंग कर सकते हैं। ओरिजिनल में इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ाया गया है, जिससे आपकी यात्रा और भी रोमांटिक बन जाती है।

    लैंडौर: सार्वभौम और शांति की तलाश करने वालों के लिए

    यदि आप भीड़-भाड़ वाली जगह से दूर शांत और सार्वभौम पुरामहानगर चाहते हैं, तो आपके लिए ज़मीन का विकल्प सबसे अच्छा विकल्प है। हिमालय के भगवान बसा में यह छोटा सा हिल स्टेशन अपनी प्राकृतिक प्रकृति और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। कोहरे से बूढ़ी पहाड़ियाँ, देवदार के जंगल और बदशं के फूल यहाँ के माहौल को बेहद रोमांटिक बनाते हैं। लाल टिब्बा, सेंट पॉल चर्च, फोर शॉप और केलॉग मेमोरियल चर्च जैसे आकर्षण इस जगह की खास पहचान हैं। यहां का सीजन भी ज्यादातर समय सुहावना रहता है, जहां कपल्स के लिए यह एक आदर्श गेटवे बन जाता है।

    रोमांस और रोमांच का शानदार मेल

    लंबे समय से कपल्स की पहली पसंद बनी है। यहां की अनोखी हवाएं, हरियाली से भरपूर पहाड़ और मॉल रोड की सड़कें हर किसी को आकर्षित करती हैं। आप अपने बालाजी के साथ रिज मैदान में सैर कर सकते हैं, कुफरी में साहसिक गतिविधियों का मजा ले सकते हैं या चैल की खूबसूरत हस्तियों में सार्वभौम के महल की सैर कर सकते हैं। इसके अलावा, यहां की दुकानें और स्थानीय व्यंजन भी आपकी यात्रा को खास बनाते हैं।

    रागरावा के स्टोर में क्यों है खास?

    बेंगलुरु के साथ घूमना सिर्फ एक ट्रिप नहीं, बल्कि घूमने को और मजबूत बनाने का जरिया है। यह आपको एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम रहने, नई जगहों को एक्सप्लोर करने और मेमोरियल लम्हे बनाने का मौका देता है। प्रकृति के बीच के अवशेष ये पल लंबे समय तक आपके दिल में बस जाते हैं।

    अगर आप अपने आर्किटेक्चर में नई ताजगी और रोमांस की चाहत रखते हैं, तो इन खूबसूरत जगहों की यात्रा जरूर करें। सही प्रशिक्षकों और सही गंतव्य के साथ आपकी यात्रा जीवन भर की याद बन सकती है।

  • एप्पल से बनाएं 4 आसान और स्वादिष्ट रेसिपी जो झटपट तैयार हों और हर उम्र के लोगों को पसंद आएं

    एप्पल से बनाएं 4 आसान और स्वादिष्ट रेसिपी जो झटपट तैयार हों और हर उम्र के लोगों को पसंद आएं


    नई दिल्ली: अगर घर में सेब पड़े-पड़े बोर हो रहे हैं और समझ नहीं आ रहा कि उनसे क्या बनाया जाए तो अब टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। सेब सिर्फ काटकर खाने या जूस बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई स्वादिष्ट और आसान रेसिपी तैयार की जा सकती हैं। खास बात यह है कि ये रेसिपी कम समय में बनती हैं और हर किसी को पसंद आती हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं एप्पल चटनी की। अगर आप कुछ मीठा और तीखा एक साथ खाना पसंद करते हैं तो यह रेसिपी आपके लिए परफेक्ट है। इसके लिए सेब को छोटे क्यूब्स में काट लें और कड़ाही में डालें। अब इसमें चीनी, लाल मिर्च पाउडर, अदरक पेस्ट और थोड़ा सा सिरका मिलाकर मध्यम आंच पर पकाएं। जब यह मिश्रण गाढ़ा और हल्का चमकदार हो जाए तो गैस बंद कर दें। यह चटनी पराठे या स्नैक्स के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है।

    दूसरी रेसिपी है एप्पल शेक, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। इसे बनाने के लिए सेब को छीलकर टुकड़ों में काट लें और मिक्सर में डालें। फिर इसमें दूध, शहद और बर्फ के टुकड़े डालकर स्मूद ब्लेंड करें। तैयार शेक को गिलास में निकालें और ऊपर से दालचीनी पाउडर डालकर सर्व करें। यह हेल्दी और रिफ्रेशिंग ड्रिंक है।

    अगर आप ब्रेड के साथ कुछ खास ट्राई करना चाहते हैं तो एप्पल जैम एक बढ़िया विकल्प है। इसके लिए सेब को छोटे टुकड़ों में काटकर कड़ाही में डालें और उसमें चीनी मिलाएं। इसे तब तक पकाएं जब तक यह गाढ़ा न हो जाए। अंत में थोड़ा सा नींबू का रस डालकर मिलाएं। ठंडा होने के बाद इसे जार में स्टोर करें और जब मन करे इस्तेमाल करें।

    चौथी और सबसे झटपट बनने वाली रेसिपी है एप्पल चाट। जब कुछ चटपटा खाने का मन हो तो यह एकदम परफेक्ट स्नैक है। इसके लिए सेब के छोटे टुकड़े करें और उसमें चाट मसाला, काला नमक, भुना जीरा पाउडर और नींबू का रस मिलाएं। चाहें तो इसमें हरी मिर्च और पुदीना भी डाल सकते हैं। यह चाट स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है।

    इन आसान रेसिपीज की मदद से आप साधारण सेब को भी खास बना सकते हैं। अब अगली बार जब घर में सेब हों, तो इन्हें नए अंदाज में जरूर ट्राई करें।

  • आयुर्वेद का नियम तोड़ा तो बढ़ेंगी बीमारियां भोजन के साथ फल खाने से बचें

    आयुर्वेद का नियम तोड़ा तो बढ़ेंगी बीमारियां भोजन के साथ फल खाने से बचें

    नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। शादी समारोह, पार्टियों और होटलों में भोजन के साथ फल परोसना एक आम चलन बन चुका है। लोग इसे हेल्दी समझकर बिना सोचे-समझे खा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद इस आदत को सही नहीं मानता और इसे पाचन के लिए हानिकारक बता सकता है।

    आयुर्वेद के अनुसार हर खाद्य पदार्थ की अपनी तासीर और पाचन समय होता है। दाल, रोटी, चावल जैसे पके हुए भोजन को पचने में समय लगता है, जबकि फल हल्के होते हैं और जल्दी पच जाते हैं। जब इन दोनों को एक साथ खाया जाता है तो पाचन तंत्र भ्रमित हो जाता है। फल पहले पचने की कोशिश करते हैं, जबकि भारी भोजन को अधिक समय चाहिए होता है। इस असंतुलन के कारण भोजन पेट में रुककर सड़ने लगता है, जिससे गैस, कब्ज, एसिडिटी और भारीपन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

    इसके अलावा, होटलों या फंक्शन्स में परोसे जाने वाले फल अक्सर ठंडे या स्टोर किए हुए होते हैं। ऐसे फल पाचन अग्नि को कमजोर कर देते हैं, जिससे खाना ठीक से नहीं पच पाता। आयुर्वेद में पाचन अग्नि को शरीर का मूल आधार माना गया है और इसके कमजोर होने से कई रोग जन्म ले सकते हैं।

    आयुर्वेद यह भी कहता है कि भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें समय, मात्रा और संयोजन का विशेष महत्व होता है। गलत संयोजन को विरुद्ध आहार कहा जाता है, जो लंबे समय में शरीर में विषैले तत्वों के जमाव का कारण बन सकता है।

    फल खाने का सही समय सुबह या शाम माना गया है। सुबह खाली पेट फल खाना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है, क्योंकि उस समय पाचन तंत्र साफ और सक्रिय होता है। हालांकि सुबह खट्टे फलों से बचना चाहिए, क्योंकि ये गैस और जलन बढ़ा सकते हैं। शाम को भी सूरज ढलने से पहले फल खाए जा सकते हैं, लेकिन भोजन और फल के बीच कम से कम एक घंटे का अंतर रखना जरूरी है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि फल को दूध या दही के साथ नहीं खाना चाहिए। आयुर्वेद इसे विरुद्ध आहार मानता है और इससे पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

    यदि आप फल और भोजन दोनों का पूरा पोषण लेना चाहते हैं तो इन्हें अलग-अलग समय पर खाना ही बेहतर है। छोटी-सी यह आदत आपके पाचन को बेहतर बना सकती है और कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती है।