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  • नवरात्रि व्रत में नहीं होगी थकान: ये 4 सुपरफूड्स रखेंगे आपको दिनभर एनर्जेटिक

    नवरात्रि व्रत में नहीं होगी थकान: ये 4 सुपरफूड्स रखेंगे आपको दिनभर एनर्जेटिक


    नई दिल्ली । शक्ति की उपासना का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं कोई पहले और आखिरी दिन तो कोई पूरे नौ दिन उपवास करता है। हालांकि अक्सर गलत खान पान के कारण व्रत के दौरान कमजोरी थकान सिरदर्द और सुस्ती महसूस होने लगती है जिसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है।

    दरअसल व्रत का असली लाभ तभी मिलता है जब आपका आहार संतुलित सात्विक और पोषण से भरपूर हो। अगर सही चीजों का चुनाव किया जाए तो न केवल शरीर ऊर्जावान बना रहता है बल्कि मन भी शांत और एकाग्र रहता है। ऐसे में आइए जानते हैं 4 ऐसे सुपरफूड्स के बारे में जिन्हें व्रत की थाली में शामिल कर आप पूरे दिन एनर्जी से भरपूर रह सकते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं मखाना की जिसे व्रत का सबसे हेल्दी और गिल्ट फ्री स्नैक माना जाता है। इसमें कैलोरी कम और प्रोटीन अधिक होता है। साथ ही यह फाइबर मैग्नीशियम और पोटैशियम का अच्छा स्रोत है। मखाना खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती और यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। आप इसे हल्के घी में भूनकर या खीर बनाकर खा सकते हैं।

    दूसरा सुपरफूड है साबूदाना। जब शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है तब यह सबसे बेहतर विकल्प बन जाता है। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर और ग्लूटेन फ्री साबूदाना जल्दी पचता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। हालांकि इसमें प्रोटीन कम होता है इसलिए इसे दही या मूंगफली के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। साबूदाने की खिचड़ी या वड़ा स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संयोजन है।

    तीसरा महत्वपूर्ण आहार है कुट्टू का आटा । यह पोषण का खजाना माना जाता है जिसमें मैग्नीशियम आयरन जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके कॉम्प्लेक्स कार्ब्स शरीर को धीरे धीरे ऊर्जा देते हैं जिससे दिनभर कमजोरी महसूस नहीं होती। कुट्टू से बनी पूरी चीला या कढ़ी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।

    चौथा और सबसे जरूरी हिस्सा है फल। व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी होता है। सेब केला संतरा और अनार जैसे फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। केला तुरंत ऊर्जा देता है जबकि संतरा और अनार शरीर में पानी की कमी पूरी कर ठंडक प्रदान करते हैं। फलों का सेवन शरीर को डिटॉक्स करने और इम्युनिटी मजबूत बनाने में भी मदद करता है।

    नवरात्रि का व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं बल्कि यह अनुशासन और संतुलित जीवनशैली अपनाने का अवसर है। अगर आप सही और पौष्टिक आहार लेते हैं तो न केवल आपका शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि आपकी पूजा और साधना में भी मन एकाग्र रहेगा। इस नवरात्रि इन 4 सुपरफूड्स को अपनी व्रत की थाली में जरूर शामिल करें और भक्ति के साथ साथ अपनी सेहत का भी पूरा ध्यान रखें।

  • मिजोरम की खूबसूरती और सांस्कृतिक रंग, लुंगलेई ट्रैकिंग ट्रिप के लिए परफेक्ट

    मिजोरम की खूबसूरती और सांस्कृतिक रंग, लुंगलेई ट्रैकिंग ट्रिप के लिए परफेक्ट


    नई दिल्ली।  गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पर्यटकों में छुट्टियों की योजना बनाना आम हो जाता है। अगर आप प्रकृति, ट्रैकिंग और मिजोरम की संस्कृति का अनूठा अनुभव चाहते हैं, तो मिजोरम के लुंगलेई शहर की यात्रा आपके लिए बेस्ट विकल्प है।

    प्रकृति के अद्भुत नजारे

    लुंगलेई अपने नाम की तरह अनोखा है। इसका अर्थ है “चट्टानों का पुल”, और यह 1222 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। आइजोल से 169 किलोमीटर दूर यह शहर पहाड़ों, नदियों और हरे-भरे जंगलों के खूबसूरत संगम का प्रतीक है। यहां की नदियों का पानी इतना साफ होता है कि आप तल में बैठे कंकड़ों को आसानी से देख सकते हैं। गर्मियों में यह जगह विशेष रूप से पर्यटकों को आकर्षित करती है।

    खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्य

    प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्य सबसे पसंदीदा जगह है। यहां पर्यटक तेंदुआ, सांभर, बार्किंग डियर और हूलॉक गिब्बन जैसे वन्यजीवों को देख सकते हैं। अभयारण्य में सफारी का अनुभव भी लिया जा सकता है। मार्च से अक्टूबर का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

    फुननाउमा की चट्टान और ट्रैकिंग का रोमांच

    लुंगपुई शहर से 100 किलोमीटर दूर लुंगपुई त्लांग या फुननाउमा की चट्टान स्थित है। यह लुंगपुई की सबसे पुरानी और बड़ी चट्टान है। यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को कठिन ट्रैकिंग करनी पड़ती है, लेकिन ऊपर पहुंचकर शहर का दृश्य देखने का अनुभव अद्भुत होता है।

    फुननाउमा की चट्टान को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि यहां परियां शिकार के लिए आती थीं और इस जगह की खोज फुननाउमा नाम के शख्स ने की थी। यही कारण है कि यह चट्टान फुननाउमा की चट्टान के नाम से जानी जाती है।

    मिजोरम की संस्कृति का अनुभव

    लुंगलेई के हरे-भरे ऊंचे पहाड़ न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं, बल्कि यहां का मौसम भी सुहावना रहता है। इसके अलावा, लुंगलेई में मिजोरम की संस्कृति और कल्चर की झलक भी देखने को मिलती है। गांव के लोग आज भी अपनी पारंपरिक पहचान बनाए हुए हैं। यहां ऑथेंटिक मिजोरम व्यंजन का स्वाद लेना भी पर्यटकों के लिए खास अनुभव होता है।

    ट्रैकिंग और एडवेंचर के लिए उपयुक्त

    लुंगलेई न केवल प्रकृति प्रेमियों, बल्कि ट्रैकिंग और एडवेंचर के शौकीनों के लिए भी बेस्ट डेस्टिनेशन है। फुननाउमा की चट्टान और खावंगलुंग अभयारण्य जैसी जगहें इसे ट्रैवल लवर्स के लिए एक परफेक्ट हाइकिंग और फोटोग्राफी स्पॉट बनाती हैं।

  • गर्मियों में सूरज की तीखी धूप से जलती त्वचा? अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

    गर्मियों में सूरज की तीखी धूप से जलती त्वचा? अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली। गर्मी में महिलाओं को अक्सर कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है उसमें से एक है स्क्रीन। आप कितना भी स्क्रीन केयर कर लें लेकिन गर्मी में इसमें कई बदलाव देखने को मिलते हैं। कई लोगों को बाहर निकलते ही त्वचा में जलन, लालपन और टैनिंग की समस्या होने लगती है।तो चलिए इसके लिए कुछ उपाय जानते हैं।

    इस प्रकार गर्मी में स्क्रीन का ध्यान
    गर्मी शुरू होते ही स्क्रीन पर काफी प्रभाव पड़ता है जिसके कारण आपकी त्वचा से निखार दूर जाने लगता है। ऐसे में ये जरूरी है कि, गर्मियों में अपनी त्वचा की खास देखभाल की जाए। कुछ आसान और रोजाना अपनाए जाने वाले स्किन केयर टिप्स आपकी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं।

    सनस्क्रीन लगाना हमेशा रखें याद
    गर्मी में घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी होता है। तेज धूप में मौजूद यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए बाहर जाने से करीब 20 मिनट पहले एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

    त्वचा को रखें हाइड्रेटेड
    गर्मी में शरीर के साथ-साथ त्वचा को भी हाइड्रेशन की जरूरत होती है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और त्वचा भी फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। अगर यह आप बरकरार रखती हैं तो आपकी त्वचा में हमेशा निखार और ग्लो बना रहेगा।

    दिन में दो-तीन बार धोने फेस
    बाहर कई प्रकार की धूल,मिट्टी गर्म हवाएं और पसीना आपके चेहरे को खराब कर देती है।इसलिए सुबह और रात को चेहरे को अच्छे फेसवॉश से साफ करना चाहिए। इससे स्किन साफ रहती है और पिंपल्स की समस्या भी कम होती है।

    धूप से बचाव करें
    तेज धूप में बाहर निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे त्वचा सीधे धूप के संपर्क में आने से बच जाती है और टैनिंग की समस्या भी कम होती है।

  • दिमाग तेज और नींद बेहतर, ब्राह्मी दूध के फायदे और सेवन का सही तरीका

    दिमाग तेज और नींद बेहतर, ब्राह्मी दूध के फायदे और सेवन का सही तरीका


    नई दिल्ली आयुर्वेद में ब्राह्मी को मस्तिष्क के लिए संजीवनी माना गया है। यह एक ऐसी स्वास्थ्यवर्धक औषधि है, जो मानसिक स्वास्थ्य, नींद और याददाश्त को बेहतर बनाने में बेहद प्रभावशाली है। अगर दूध इसके साथ लिया जाए तो इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं।

    ब्राह्मी दूध कैसे बनाये
    एक दूध के थैले को अच्छी तरह से गर्म करें और इसमें आधे हिस्से में ब्राह्मी केक शामिल हों। स्वाद और अतिरिक्त लाभ के लिए इसमें कालीमिर्च दाल भी बनाई जा सकती है। यह रात में सोने से लगभग एक घंटा पहले घटित होता है।

    नींद में सुधार और तनाव से राहत
    ब्राह्मी दूध का नियमित सेवन दिमाग को शांत करता है और तनाव को कम करता है। इससे (इन्सानानंद न आने की समस्या) राहत मिलती है और गहराई में, सार्वभौम भरी नींद आती है।

    याददाश्त और फोकस बढ़ाने में मदद
    ब्राह्मी मस्तिष्क की साबिरा का प्रदर्शन सबसे अच्छा है। यह याददाश्त तेज करने, ध्यान केंद्रित करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है–विशेषकर छात्रों और मानसिक काम करने वालों के लिए।

    तंत्रिका तंत्र और थकान पर असर
    यह तंत्रिका तंत्र को आराम देता है, जिससे चिंता कम होती है और शरीर की थकान दूर होती है। लगातार कमजोरी या मानसिक थकावट में भी यह उपयोगी है।

    त्वचा और शरीर पर भी पड़ता है असर
    ब्राह्मी रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है, जिससे त्वचा में निखार आता है और शरीर अंदर से स्वस्थ रहता है।

    सावधानी भी जरूरी
    हालाँकि ब्राह्मी दूध फायदेमंद है, लेकिन गर्भवती महिलाओं या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को इसका सेवन पहले डॉक्टर की सलाह से जरूर करना चाहिए। साथ ही, अधिक मात्रा में सेवन से परहेज।

  • फाइबर का पावरहाउस कटहल, गर्मियों में सेहत और दिल दोनों का रखे ख्याल

    फाइबर का पावरहाउस कटहल, गर्मियों में सेहत और दिल दोनों का रखे ख्याल


    नई दिल्ली  गर्मियों के मौसम में आसानी से मिलने वाला कटहल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का भी खजाना है। इसे ‘सब्जियों का सुपरफूड’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में वनस्पति, विटामिन और मसाले पाए जाते हैं। सही तरीके से बनाया जाए तो यह शरीर को पोषण देने के साथ कई आश्रय से मुक्ति में भी मदद करता है।

    कार्बोहाइड्रेट का सबसे अच्छा स्रोत, पाचन तंत्र
    कटहल में मौजूद उच्च कार्बोहाइड्रेट पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह शौचालय की सफाई में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्या से राहत दिलाता है। नियमित सेवन से पेट साफ रहता है और स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

    दिल के लिएउपयोगी

    कटहल में असिस्ट की अच्छी मात्रा होती है, जो ब्लड यूनिट को नियंत्रित करने में मदद करती है। इससे जुड़े दिल से जुड़े खतरे कम होते हैं और लेवल स्तर भी स्थिर रहते हैं।

    आवेदकों के लिए भी उपयोगी
    कम गैलेक्टेमिक वैज्ञानिकों के कारण कटहल ब्लड शुगर को तेजी से नहीं मिला। इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन जहर के रूप में भी हानिकारक माना जाता है।

    त्वचा और बालों को सुंदर बनाया जाता है
    इसमें मौजूद विटामिन ए और सी त्वचा को निखारने और बालों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। यह शरीर को पोषण से लेकर चमक बढ़ाने में सहायक होता है।

    सेवन में सावधानी बरतें
    हालाँकि कटहल मछली है, लेकिन यह भारी और पतली होती है। जिन लोगों को गैस, पेट या पाचन संबंधी समस्या होती है, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। यह आसानी से पचता है।

  • Eid Ul Fitr 2026 डेट कन्फर्म चांद दिखने के बाद भारत में इस दिन मनाई जाएगी ईद

    Eid Ul Fitr 2026 डेट कन्फर्म चांद दिखने के बाद भारत में इस दिन मनाई जाएगी ईद

    नई दिल्ली:  Eid ul-Fitr 2026 को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है, खासकर चांद दिखने के समय और तारीख को लेकर। रमजान के पावन महीने के समापन के बाद मनाया जाने वाला यह त्योहार खुशियों, मिठास और भाईचारे का प्रतीक होता है।

    इस साल सऊदी अरब में आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई है कि ईद 20 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। वहां शव्वाल का चांद 18 मार्च को नजर नहीं आया, जिसके बाद रमजान के रोजे 30 पूरे किए गए। इसके बाद 19 मार्च की शाम चांद दिखने की संभावना जताई गई और उसी के आधार पर 20 मार्च को ईद मनाने का फैसला लिया गया। यूएई और अन्य खाड़ी देशों में भी इसी तारीख को ईद मनाई जाएगी।

    भारत समेत दक्षिण एशिया के देशों में ईद आमतौर पर सऊदी अरब के एक दिन बाद मनाई जाती है। ऐसे में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में 20 मार्च की शाम को चांद देखने की कोशिश की जाएगी। अगर उस दिन चांद दिखाई देता है, तो भारत में 21 मार्च 2026 को ईद मनाई जाएगी।

    चांद देखने का सही समय सूर्यास्त के बाद का होता है। भारत में आमतौर पर शाम लगभग 6:30 बजे से 7:30 बजे के बीच चांद दिखने की संभावना रहती है, हालांकि यह समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है। इसके लिए स्थानीय मस्जिदों और चांद देखने वाली समितियों की घोषणा को अंतिम माना जाता है।

    ईद उल फितर को रोजा खोलने का त्योहार भी कहा जाता है, क्योंकि यह रमजान के खत्म होने के अगले दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग नमाज अदा करते हैं, एक दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं और मिठाइयों के साथ खुशियां बांटते हैं।

    ईद की तैयारी कैसे करें
    ईद से पहले घरों की साफ सफाई की जाती है और नए कपड़े खरीदे जाते हैं। लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए खास पकवान तैयार करते हैं। सेवइयां और अन्य मीठे व्यंजन इस त्योहार की खास पहचान होते हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों को जकात और फितरा देना भी इस दिन का अहम हिस्सा होता है, ताकि हर कोई इस खुशी में शामिल हो सके।

    ईद उल फितर 2026 को लेकर तारीख लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन अंतिम निर्णय चांद दिखने पर ही निर्भर करेगा। ऐसे में लोगों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय घोषणाओं पर नजर बनाए रखें और उसी के अनुसार त्योहार की तैयारी करें

  • बढ़ा हुआ पित्त बिगाड़ सकता है सेहत, संतुलन के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 ठंडी तासीर वाली चीजें

    बढ़ा हुआ पित्त बिगाड़ सकता है सेहत, संतुलन के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 ठंडी तासीर वाली चीजें


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और अत्यधिक मसालेदार भोजन ने शरीर में पित्त बढ़ने की समस्या को आम बना दिया है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों वात, पित्त और कफ पर आधारित होता है, जिनमें पित्त अग्नि और जल का मिश्रण है। जब यह असंतुलित हो जाता है, तो पाचन खराब होना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में समय रहते खानपान और जीवनशैली में बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पित्त को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले आहार को अपनाना चाहिए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण हैं हल्के और सुपाच्य अनाज जैसे जौ, चावल और गेहूं। ये न केवल पाचन को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी कम करने में मदद करते हैं। इसके विपरीत उड़द दाल और कुलथी जैसी गरम तासीर वाली चीजों से दूरी बनाना ही बेहतर होता है, क्योंकि ये पित्त को और बढ़ा सकती हैं।

    फलों में मीठे और रसीले विकल्प पित्त संतुलन के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। सेब, नाशपाती, अंजीर और किशमिश जैसे फल शरीर को ठंडक देते हैं और पाचन को सुधारते हैं। हालांकि आमतौर पर खट्टे फलों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन आंवला और अनार सीमित मात्रा में लिए जा सकते हैं क्योंकि ये शरीर को पोषण देने के साथ पित्त को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं।

    सब्जियों की बात करें तो खीरा, करेला, मटर और परवल जैसी ठंडी या कड़वी तासीर वाली सब्जियां पित्त को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। वहीं बैंगन, कच्चा प्याज, लहसुन और पालक जैसी गरम प्रकृति वाली सब्जियों का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर की गर्मी को बढ़ा सकती हैं।

    किचन में मौजूद कुछ मसाले भी पित्त नियंत्रण में सहायक होते हैं। सौंफ, धनिया, इलायची और केसर जैसे मसाले शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। इसके उलट हींग और काली मिर्च का अधिक सेवन जलन और एसिडिटी को बढ़ा सकता है, इसलिए इनका उपयोग सीमित मात्रा में करना ही बेहतर है।

    डेयरी उत्पादों में ठंडा दूध, शुद्ध देसी घी और ताजी छाछ पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं बल्कि पाचन को भी मजबूत बनाते हैं।

    हालांकि केवल डाइट ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। पित्त बढ़ने पर तेज धूप से बचना चाहिए और ठंडे वातावरण में समय बिताना लाभकारी होता है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए हल्का संगीत सुनना और पानी के पास समय बिताना भी फायदेमंद होता है।

    कुल मिलाकर, अगर आप अपने शरीर के पित्त को संतुलित रखना चाहते हैं, तो सही खानपान और संतुलित दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है। इससे न केवल आपका पाचन तंत्र मजबूत होगा, बल्कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे।

  • अब आप घर पर ही बना सकते हैं हेयर कलर, अपनाएं ये ट्रिक

    अब आप घर पर ही बना सकते हैं हेयर कलर, अपनाएं ये ट्रिक


    नई दिल्ली। आज के समय में लोगों के बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं। यह बाहरी खान-पान और पॉल्युशन के कारण से हो सकता है। हालांकि इसे ठीक करने के लिए लोग बाहर से बालों को कलर करवा लेते हैं। लेकिन कई बार यह कलर आपके बालों को भी डैमेज कर सकते हैं बार-बार अगर अधिकतर मात्रा में से उगाया जाए तो। इसके साथ ही आपको इन कलर में कई ज़्यादा पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि कुछ ऐसा हाथ लग जाए जो नेचरली हो और बाल भी कलर हो जाए। तो हम आपके लिए ऐसा ही कुछ लेकर आए हैं।

    घर पर बना सकते हैं हेयर कलर
    अब आप घर पर ही हेयर कलर बन सकते हैं और उसका इस्तेमाल घर पर ही कर सकते हैं। आप इस रंग को घर पर बनाकर बालों में अप्लाई कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके बाल भी घुंघराले रहेंगे। इसके साथ ही आपके बाल अमोनिया और ब्लीच के इस्तेमाल से बच जाएंगे। आइए आपको बताते हैं कि कैसे घर पर ही अपने बालों का कलर करें।

    रंग बनाने के लिए सामग्री
    चुकंदर का रस- 3 से 4 चम्मच
    मेहंदी- 4 चम्मच
    कॉफी पाउडर – 1 चम्मच

    इस प्रकार बनाए हेयर कलर
    सबसे पहले आप फ्रेश चुकंदर लें। अब इसका रस निकालना है और इसे एक कटोरी में रख दें। इसके बाद एक कटोरी में मेहंदी को डालें। इसमें चुकंदर का रस और कॉफी पाउडर को पानी में घोलकर डालें। फिर इस मिश्रण अच्छे से घोल लें। जरूरतों के हिसाब से इसमें पानी को मिक्स करें। जब घोल तैयार हो जाए, तो इसे 10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें।

    लगाने का सही तरीका
    सबसे पहले बालों में कंघी कर लें। इस बात का ध्यान रखें कि आपके बाल उलझे नहीं। अब इसे ब्रश की मदद से सिर पर लगाएं। पूरे बालों के कवर करने के बाद वाले कैप पहन लें। इसको आप कम से कम 3 से 4 घंटे तक लगा रहने दें। इसके बाद बालों को सिर्फ उपजाऊ पानी से लगाएं, उस दिन कोमल का इस्तेमाल करें। इसलिए कलर को सेट होने के लिए 24 से 48 घंटे का समय दें, उसके बाद ही हल्के कोमल से बाल लगाएं।

  • Yoga Tips: रोज सिर्फ 5 मिनट करें वृक्षासन, हड्डियां होंगी मजबूत और दिमाग रहेगा शांत

    Yoga Tips: रोज सिर्फ 5 मिनट करें वृक्षासन, हड्डियां होंगी मजबूत और दिमाग रहेगा शांत


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार और तनाव से भरी जिंदगी में शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में योग एक ऐसा प्रभावी उपाय है, जो न केवल शरीर को मजबूत बनाता है बल्कि मन को भी शांत और स्थिर करता है। खासतौर पर वृक्षासन एक ऐसा आसान लेकिन बेहद असरदार योगासन है, जिसे रोजाना सिर्फ 5 मिनट करने से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।

    वृक्षासन का अर्थ ही है पेड़ की तरह स्थिर और मजबूत खड़े रहना। यह आसन हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी कैसे संतुलन बनाए रखा जाए। जब आप एक पैर पर खड़े होकर शरीर को संतुलित करते हैं, तो यह न केवल आपकी शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि मानसिक एकाग्रता को भी मजबूत करता है। नियमित अभ्यास से दिमाग और मांसपेशियों के बीच तालमेल बेहतर होता है, जिससे शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है।

    इस योगासन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही पैरों की मांसपेशियां टोन होती हैं और शरीर का संतुलन सुधरता है। जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद है। एक पैर पर संतुलन बनाने की प्रक्रिया फोकस और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देती है, जिससे काम में एकाग्रता भी बेहतर होती है।

    मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी वृक्षासन बेहद लाभकारी माना जाता है। यह शरीर के वात दोष को संतुलित करता है, जिससे तनाव, घबराहट और मानसिक अस्थिरता में कमी आती है। नियमित अभ्यास से मन शांत रहता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है।

    इस आसन को करने का सबसे सही समय सुबह का होता है, जब पेट खाली हो। अगर आप इसे शाम के समय करना चाहते हैं, तो भोजन और योग के बीच कम से कम 4 से 6 घंटे का अंतर रखना जरूरी है। अभ्यास शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करने के लिए हल्के वार्म-अप जैसे स्ट्रेचिंग या अन्य योगासन करना फायदेमंद रहता है।

    हालांकि, इस आसन को करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। जिन लोगों को घुटनों में दर्द, किसी प्रकार की गंभीर चोट या माइग्रेन की समस्या है, उन्हें इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। बिना मार्गदर्शन के अभ्यास करने से बचना बेहतर होता है।

    कुल मिलाकर, वृक्षासन केवल एक योगासन नहीं, बल्कि शरीर और मन को संतुलित करने का एक सरल विज्ञान है। अगर आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर फोकस, मजबूत हड्डियां और मानसिक शांति चाहते हैं, तो इस आसान आसन को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें।

  • माइग्रेन का आसान टेस्ट घर पर, समझें 5-4-3-2-1 फॉर्मूला और बचाव..

    माइग्रेन का आसान टेस्ट घर पर, समझें 5-4-3-2-1 फॉर्मूला और बचाव..


    नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में सिरदर्द एक आम समस्या बन चुकी है लेकिन हर सिरदर्द को नजरअंदाज करना सही नहीं होता क्योंकि यह माइग्रेन भी हो सकता है यह एक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसकी समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है

    विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन को पहचानने के लिए 5-4-3-2-1 का एक आसान फॉर्मूला अपनाया जाता है जिसे आम व्यक्ति भी समझ सकता है इस फॉर्मूले के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को जीवन में कम से कम 5 बार तेज सिरदर्द का अटैक आया हो और यह दर्द 4 घंटे से लेकर 3 दिन तक बना रहता हो तो यह एक संकेत हो सकता है

    इसके अलावा दर्द की 4 खासियतों में से कम से कम 2 मौजूद हों जैसे सिर के एक तरफ दर्द होना धड़कन जैसा दर्द होना दर्द बहुत तेज होना या रोजमर्रा के काम में बाधा आना तो माइग्रेन की संभावना बढ़ जाती है साथ ही 2 में से 1 लक्षण जैसे मतली उल्टी या तेज रोशनी और आवाज से परेशानी भी इसका अहम संकेत माना जाता है

    माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारण भी काफी अहम होते हैं तेज धूप चमकदार रोशनी और शोर इस समस्या को बढ़ा सकते हैं वहीं कुछ खाने की चीजें जैसे चीज चॉकलेट कॉफी और चाइनीज फूड भी इसे ट्रिगर कर सकते हैं तेज परफ्यूम या गंध भी कई लोगों में माइग्रेन का कारण बनती है महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है खासकर हार्मोनल बदलाव के दौरान

    डॉक्टरों का मानना है कि माइग्रेन को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसका असर याददाश्त और ध्यान क्षमता पर पड़ सकता है लंबे समय में यह स्ट्रेस और डिप्रेशन का कारण बन सकता है और गंभीर मामलों में ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ा सकता है

    इससे बचाव के लिए कुछ आसान आदतें अपनाना जरूरी है रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें स्क्रीन टाइम कम करें और उन फूड्स से दूरी बनाए रखें जो माइग्रेन को बढ़ाते हैं नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद कर सकती है

    अगर सिरदर्द बार बार हो रहा है या ऊपर बताए गए लक्षण दिख रहे हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है क्योंकि सही समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है