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  • चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम

    चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम


    नई दिल्ली । घुटनों में दर्द चलने में तकलीफ सुबह उठते समय अकड़न या चलते समय कट कट की आवाज आना आजकल केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली बढ़ता वजन लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र के लोग भी जोड़ों की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यदि आपको भी लंबे समय से घुटनों में दर्द या जकड़न महसूस हो रही है तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि यह जोड़ों की चिकनाई कम होने का संकेत हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हमारे शरीर के प्रत्येक जोड़ के बीच एक विशेष प्रकार का द्रव मौजूद होता है जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह द्रव जोड़ों को आसानी से हिलने डुलने में मदद करता है और हड्डियों को आपस में रगड़ खाने से बचाता है। जब किसी कारण से इस द्रव की मात्रा कम होने लगती है या जोड़ों की कार्टिलेज घिसने लगती है तब घुटनों में दर्द अकड़न और सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यही स्थिति आम भाषा में घुटनों की ग्रीस कम होना कहलाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बढ़ती उम्र मोटापा ऑस्टियोआर्थराइटिस पुरानी चोट शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक भारी वजन उठाने की आदत इस समस्या के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण भी जोड़ों की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज विटामिन डी की कमी और गठिया जैसी बीमारियां भी घुटनों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।

    यदि सुबह उठते समय घुटनों में जकड़न महसूस हो बैठने के बाद उठने में दर्द हो सीढ़ियां चढ़ने उतरने में कठिनाई आए या चलते समय घुटनों से आवाज आने लगे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से समस्या बढ़ सकती है और चलने फिरने में भी परेशानी होने लगती है।

    जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। ओमेगा थ्री फैटी एसिड से भरपूर अखरोट अलसी के बीज और फैटी फिश का सेवन लाभदायक माना जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां दूध दही और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। विटामिन डी और कैल्शियम भी जोड़ों और हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। ऑलिव ऑयल का सीमित उपयोग शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके साथ ही कुछ आदतों में बदलाव भी जरूरी है। तला भुना भोजन जंक फूड और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं इसलिए इनका सेवन कम करना चाहिए। यदि वजन अधिक है तो उसे नियंत्रित करना जरूरी है क्योंकि अतिरिक्त वजन का सीधा दबाव घुटनों पर पड़ता है। रोजाना तेज चाल से चलना तैराकी साइकिल चलाना और योग जैसी लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज जोड़ों को सक्रिय और मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घुटनों की ग्रीस कम होने की समस्या का समय रहते पता चल जाए तो दवाओं फिजियोथेरेपी सही खानपान और नियमित व्यायाम की मदद से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए यदि लंबे समय से घुटनों में दर्द या अकड़न बनी हुई है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर सही जांच और उपचार जरूर कराएं।

  • डायबिटीज चुपचाप छीन सकती है आंखों की रोशनी जानिए किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी

    डायबिटीज चुपचाप छीन सकती है आंखों की रोशनी जानिए किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी


    नई दिल्ली । डायबिटीज आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल है। अधिकांश लोग इसे केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित मानते हैं लेकिन इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। इनमें आंखें सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं। लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित रहने पर आंखों की बेहद महीन रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं जिससे धीरे धीरे नजर कमजोर होने लगती है और समय पर इलाज न मिलने पर अंधेपन तक का खतरा पैदा हो सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज के कारण होने वाली आंखों की बीमारी को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। यह स्थिति तब विकसित होती है जब लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआत में इस बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते इसलिए अधिकांश मरीज तब तक अनजान रहते हैं जब तक आंखों की रोशनी प्रभावित नहीं होने लगती। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए नियमित आंखों की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

    यदि आपको धुंधला दिखाई देने लगा है आंखों के सामने काले धब्बे या फ्लोटर्स नजर आते हैं रात में देखने में परेशानी होती है या रंगों की पहचान करने में दिक्कत महसूस होती है तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण डायबिटिक रेटिनोपैथी या आंखों से जुड़ी किसी अन्य गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। समय रहते नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराने पर इन समस्याओं का उपचार संभव है और आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज केवल रेटिना तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि इससे मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी आंखों की बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए केवल ब्लड शुगर की दवा लेना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी है। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना आंखों की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव को कम करता है और जटिलताओं का जोखिम घटाता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार आंखों की विस्तृत जांच जरूर करानी चाहिए। साथ ही नियमित रूप से HbA1c जांच कराकर ब्लड शुगर की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। संतुलित आहार नियमित व्यायाम पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी आंखों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    धूम्रपान करने वाले लोगों में डायबिटीज के कारण आंखों की जटिलताओं का खतरा और अधिक बढ़ जाता है इसलिए धूम्रपान छोड़ना भी बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का नियमित सेवन करना और किसी भी तरह की दृष्टि संबंधी समस्या होने पर तुरंत जांच कराना भविष्य में गंभीर नुकसान से बचा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डायबिटिक रेटिनोपैथी का समय रहते पता चल जाए और सही उपचार शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश मामलों में आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपनी आंखों की नियमित जांच को उतनी ही प्राथमिकता देनी चाहिए जितनी वे ब्लड शुगर की जांच को देते हैं।

  • Hair Fall Control Diet: बाल झड़ने से हैं परेशान तो डाइट में शामिल करें ये 7 सुपरफूड्स जड़ों से होंगे मजबूत

    Hair Fall Control Diet: बाल झड़ने से हैं परेशान तो डाइट में शामिल करें ये 7 सुपरफूड्स जड़ों से होंगे मजबूत


    नई दिल्ली । आज के समय में बाल झड़ने की समस्या केवल बढ़ती उम्र तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि युवा भी बड़ी संख्या में इससे परेशान हैं। बदलती जीवनशैली बढ़ता तनाव प्रदूषण अनियमित खानपान हार्मोनल बदलाव और शरीर में पोषक तत्वों की कमी बालों को कमजोर बनाकर उनके झड़ने का कारण बन रही है। ऐसे में अधिकांश लोग महंगे शैंपू सीरम और हेयर ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं लेकिन यदि शरीर को अंदर से पर्याप्त पोषण नहीं मिलेगा तो बाहरी उपाय भी लंबे समय तक असरदार साबित नहीं होते। स्वस्थ और मजबूत बालों के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाल मुख्य रूप से प्रोटीन से बने होते हैं इसलिए शरीर में पर्याप्त प्रोटीन का होना जरूरी है। अंडा प्रोटीन और बायोटिन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से अंडे का सेवन बालों की जड़ों को मजबूती देने और उनकी ग्रोथ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। वहीं शाकाहारी लोगों के लिए दालें और बीन्स भी प्रोटीन आयरन और जिंक का अच्छा विकल्प हैं जो बालों को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं।

    हरी पत्तेदार सब्जियों में शामिल पालक भी बालों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसमें आयरन फोलेट विटामिन ए और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। आयरन की कमी कई लोगों में हेयर फॉल की प्रमुख वजह होती है इसलिए नियमित रूप से पालक और अन्य हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करना लाभदायक हो सकता है।

    मेवे और बीज भी बालों के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं हैं। बादाम अखरोट अलसी के बीज चिया सीड्स और कद्दू के बीज में ओमेगा थ्री फैटी एसिड विटामिन ई जिंक और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ये स्कैल्प को स्वस्थ रखने के साथ बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं। रोजाना सीमित मात्रा में इनका सेवन करने से बालों की गुणवत्ता में सुधार देखा जा सकता है।

    दही भी हेयर हेल्थ के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें प्रोटीन कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं। जब शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित करता है तो उसका सकारात्मक असर बालों और त्वचा दोनों पर दिखाई देता है।

    इसके अलावा संतरा मौसंबी अमरूद और कीवी जैसे विटामिन सी से भरपूर फल शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाते हैं और कोलेजन बनाने में मदद करते हैं। कोलेजन बालों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आप मांसाहारी हैं तो सैल्मन सार्डिन जैसी फैटी मछलियों का सेवन भी लाभदायक हो सकता है क्योंकि इनमें प्रोटीन और ओमेगा थ्री फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो स्कैल्प को पोषण देकर बालों की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद करता है।

    ध्यान रखें कि केवल अच्छी डाइट ही नहीं बल्कि पर्याप्त नींद नियमित व्यायाम तनाव से दूरी और पर्याप्त पानी पीना भी बालों की सेहत के लिए उतना ही जरूरी है। यदि लंबे समय तक अत्यधिक बाल झड़ रहे हों या अचानक हेयर फॉल बढ़ जाए तो किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें ताकि सही कारण का पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सके।

  • बारिश के मौसम में सर्दी जुकाम से कैसे बचें जानिए मजबूत इम्यूनिटी और स्वस्थ रहने के आसान उपाय

    बारिश के मौसम में सर्दी जुकाम से कैसे बचें जानिए मजबूत इम्यूनिटी और स्वस्थ रहने के आसान उपाय


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं अपने साथ कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इस मौसम में सर्दी जुकाम वायरल संक्रमण गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं तेजी से फैलती हैं। तापमान में अचानक बदलाव हवा में बढ़ी नमी और गंदे पानी के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में यदि कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए तो मानसून का आनंद भी लिया जा सकता है और स्वास्थ्य भी बेहतर रखा जा सकता है।

    बरसात के दिनों में सबसे जरूरी है कि शरीर को भीगने से बचाया जाए। यदि किसी कारण बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से शरीर का तापमान कम हो जाता है जिससे सर्दी जुकाम का खतरा बढ़ जाता है।

    इस मौसम में गर्म और ताजा भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है। बासी या खुले में रखा भोजन खाने से बचें क्योंकि नमी के कारण भोजन जल्दी खराब हो सकता है। अपने भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दाल और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें ताकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

    पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बेहद जरूरी है। कई लोग बारिश के मौसम में प्यास कम लगने के कारण पानी कम पीते हैं लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक है। हमेशा साफ और उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।

    अदरक तुलसी काली मिर्च और हल्दी जैसे प्राकृतिक तत्वों का सेवन भी फायदेमंद माना जाता है। इनसे बनी गर्म चाय या काढ़ा गले को राहत देने और शरीर को गर्म रखने में मदद कर सकता है। हालांकि यदि किसी को पहले से कोई बीमारी है तो ऐसे घरेलू उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है।

    भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख नाक या मुंह को छूने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना सर्दी जुकाम से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

    पर्याप्त नींद लेना और नियमित व्यायाम करना भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। रोजाना हल्की एक्सरसाइज योग या प्राणायाम करने से शरीर सक्रिय रहता है और संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

    यदि लगातार तेज बुखार सांस लेने में तकलीफ तीन से चार दिन तक जुकाम बना रहे या शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर उपचार लेने से बीमारी गंभीर होने से बच सकती है।

    बरसात का मौसम आनंद और ताजगी का मौसम है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। संतुलित भोजन साफ सफाई पर्याप्त आराम और सही जीवनशैली अपनाकर आप इस मौसम में सर्दी जुकाम और वायरल संक्रमण से काफी हद तक बच सकते हैं और पूरे परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं।

  • बारिश के मौसम में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो भारत की इन खूबसूरत जगहों को करें एक्सप्लोर

    बारिश के मौसम में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो भारत की इन खूबसूरत जगहों को करें एक्सप्लोर


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम आते ही पहाड़ हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं झरने पूरे वेग से बहने लगते हैं और नदियों का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि मानसून को घूमने फिरने का सबसे खूबसूरत मौसम माना जाता है। अगर आप भी इस बारिश में परिवार दोस्तों या जीवनसाथी के साथ कहीं घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो भारत में कई ऐसी शानदार जगहें हैं जहां प्राकृतिक सुंदरता आपका मन मोह लेगी।

    मध्य प्रदेश का पचमढ़ी मानसून के दौरान सबसे खूबसूरत दिखाई देता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा यह हिल स्टेशन हरियाली झरनों और बादलों से घिरा रहता है। बी फॉल्स अप्सरा विहार और धूपगढ़ का नजारा इस मौसम में बेहद आकर्षक होता है।

    अगर आप मध्य प्रदेश के बाहर जाना चाहते हैं तो राजस्थान का माउंट आबू भी शानदार विकल्प है। यहां की ठंडी हवा हरी पहाड़ियां और नक्की झील का मनमोहक दृश्य मानसून में और भी सुंदर हो जाता है।

    महाराष्ट्र का लोनावला और खंडाला बारिश के मौसम में पर्यटकों की पहली पसंद बन जाते हैं। बादलों से ढकी घाटियां ऊंचे झरने और हरियाली से भरे पहाड़ यहां आने वाले हर पर्यटक को यादगार अनुभव देते हैं। सप्ताहांत की छोटी यात्रा के लिए यह बेहतरीन स्थान माना जाता है।

    केरल का मुन्नार भी मानसून में किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। चाय के बागान बादलों से ढकी पहाड़ियां और हल्की बारिश यहां के वातावरण को बेहद रोमांटिक बना देती है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह खास मानी जाती है।

    हिमाचल प्रदेश का शिमला और उत्तराखंड का नैनीताल भी बारिश में अलग ही आकर्षण बिखेरते हैं। हालांकि इन इलाकों में यात्रा से पहले मौसम की जानकारी जरूर लेनी चाहिए क्योंकि लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं।

    यदि आप झरनों का आनंद लेना चाहते हैं तो छत्तीसगढ़ का चित्रकोट जलप्रपात और मध्य प्रदेश का भेड़ाघाट भी मानसून में बेहद आकर्षक दिखाई देते हैं। पानी का बढ़ा हुआ बहाव इन जगहों की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है।

    बारिश के मौसम में यात्रा करते समय कुछ सावधानियां जरूर अपनाएं। मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। रेनकोट छाता वाटरप्रूफ बैग और जरूरी दवाइयां साथ रखें। फिसलन वाली जगहों पर सावधानी से चलें और तेज बहाव वाले नदी नालों के पास जाने से बचें। स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें और किसी भी जोखिम वाली जगह पर सेल्फी लेने से बचें।

    मानसून प्रकृति को सबसे सुंदर रूप में देखने का मौसम है। यदि सही योजना और जरूरी सावधानियों के साथ यात्रा की जाए तो बारिश की हर बूंद आपकी यात्रा को यादगार बना सकती है। हरियाली झरनों और ठंडी हवाओं के बीच बिताया गया समय लंबे समय तक आपकी खूबसूरत यादों का हिस्सा बन जाएगा।

  • Beetroot For Skin: चुकंदर से पाएं गुलाबी निखार, जानें त्वचा की देखभाल के आसान और असरदार तरीके

    Beetroot For Skin: चुकंदर से पाएं गुलाबी निखार, जानें त्वचा की देखभाल के आसान और असरदार तरीके

    नई दिल्ली । अगर आप बिना महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स के अपनी त्वचा को प्राकृतिक निखार देना चाहते हैं तो चुकंदर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। विटामिन सी फोलेट आयरन पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चुकंदर शरीर के साथ साथ त्वचा के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। नियमित रूप से इसका सेवन और सही तरीके से त्वचा पर उपयोग करने से चेहरे की चमक बढ़ सकती है और त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ बनी रह सकती है।

    चुकंदर में मौजूद विटामिन सी त्वचा में कोलेजन बनने में मदद करता है जिससे त्वचा की कसावट बनी रहती है और समय से पहले झुर्रियां आने का खतरा कम हो सकता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करते हैं जिससे त्वचा अधिक स्वस्थ और चमकदार दिखाई देती है।

    यदि त्वचा बेजान और रूखी हो गई है तो चुकंदर का रस उपयोगी हो सकता है। चुकंदर के ताजे रस में थोड़ा शहद मिलाकर चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाएं और फिर साफ पानी से धो लें। इससे त्वचा को नमी मिल सकती है और चेहरा ताजा महसूस होता है।

    दाग धब्बों और टैनिंग को कम करने के लिए चुकंदर के रस में दही या एलोवेरा जेल मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। इसे सप्ताह में एक या दो बार लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार आने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति की त्वचा के अनुसार अलग हो सकता है।

    फटे और रूखे होंठों के लिए भी चुकंदर एक लोकप्रिय घरेलू उपाय माना जाता है। रात में चुकंदर का थोड़ा सा रस होंठों पर लगाने से होंठ मुलायम दिखाई दे सकते हैं और उनमें हल्का प्राकृतिक गुलाबीपन भी आ सकता है।

    त्वचा की खूबसूरती केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि अंदरूनी पोषण से भी जुड़ी होती है। चुकंदर का जूस या सलाद नियमित रूप से संतुलित मात्रा में लेने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं जिससे त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है।

    ध्यान रखें कि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें। यदि जलन खुजली या एलर्जी जैसी समस्या महसूस हो तो उसका उपयोग बंद कर दें। किसी गंभीर त्वचा समस्या में त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

    सही खानपान नियमित देखभाल और चुकंदर जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को दिनचर्या में शामिल करके आप त्वचा को स्वस्थ चमकदार और तरोताजा बनाए रखने की दिशा में अच्छा कदम उठा सकते हैं।

  • मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून हेल्थ गाइड बरसात में संक्रमण और वायरल बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान हवा में नमी बढ़ने गंदा पानी जमा होने और मच्छरों के तेजी से पनपने के कारण डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया टाइफाइड वायरल बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी आपकी और पूरे परिवार की सेहत को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में सबसे पहले साफ और सुरक्षित पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए। हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं क्योंकि दूषित पानी से टाइफाइड हेपेटाइटिस ए और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बाहर खुले में मिलने वाले पेय पदार्थों और बर्फ का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

    बारिश के मौसम में ताजा और गर्म भोजन खाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। लंबे समय तक रखा हुआ भोजन या खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का कारण बन सकते हैं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें तथा भोजन बनाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करें।

    मच्छरों से बचाव भी मानसून में बेहद जरूरी है। घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें क्योंकि यही डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का सबसे बड़ा प्रजनन स्थल होता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी फायदेमंद रहता है।

    बारिश में भीगने के बाद देर तक गीले कपड़े पहनकर नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक नमी रहने से सर्दी जुकाम फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि गीले जूते और मोजे संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

    रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। मौसमी फल हरी सब्जियां दालें और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और नियमित व्यायाम या योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पर्याप्त नींद भी शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देती है।

    यदि तेज बुखार लगातार सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचें और समय रहते चिकित्सकीय जांच कराएं। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में शुरुआती इलाज गंभीर स्थिति से बचा सकता है।

    बरसात का मौसम आनंद और राहत लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वच्छता संतुलित खानपान और समय पर सावधानी अपनाकर आप मानसून का भरपूर आनंद ले सकते हैं और खुद को कई मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं।

  • बारिश के मौसम में यूं रखें अपनी त्वचा का खास ख्याल इन आसान स्किन केयर टिप्स से मिलेगी प्राकृतिक चमक

    बारिश के मौसम में यूं रखें अपनी त्वचा का खास ख्याल इन आसान स्किन केयर टिप्स से मिलेगी प्राकृतिक चमक


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह त्वचा के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी पसीना धूल मिट्टी और बैक्टीरिया त्वचा पर जमा होकर कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इस मौसम में ऑयली स्किन वाले लोगों को मुंहासों की परेशानी बढ़ सकती है जबकि संवेदनशील त्वचा वालों को एलर्जी खुजली और फंगल संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में मानसून के दौरान नियमित और सही स्किन केयर रूटीन अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में सबसे पहले चेहरे की सफाई पर ध्यान देना चाहिए। दिन में दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करने से त्वचा पर जमा गंदगी अतिरिक्त तेल और बैक्टीरिया हट जाते हैं। बार बार चेहरा धोने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी भी कम हो सकती है।

    कई लोग मानसून में मॉइस्चराइजर लगाना छोड़ देते हैं लेकिन यह सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बारिश के मौसम में भी त्वचा को नमी की जरूरत होती है। इसलिए हल्का और नॉन ऑयली मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करना चाहिए ताकि त्वचा हाइड्रेट रहे और चिपचिपाहट भी महसूस न हो।

    बारिश के दिनों में धूप कम दिखाई देती है लेकिन अल्ट्रावॉयलेट किरणें बादलों के बीच से भी त्वचा तक पहुंचती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना नहीं भूलना चाहिए। कम से कम एसपीएफ तीस वाला सनस्क्रीन त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद करता है।

    मानसून में पसीना अधिक आने से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं जिससे मुंहासे और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ जाती है। सप्ताह में एक या दो बार हल्के स्क्रब से त्वचा की सफाई करना लाभदायक माना जाता है। हालांकि अधिक स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान भी पहुंच सकता है इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि खानपान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना मौसमी फल हरी सब्जियां और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन त्वचा को अंदर से पोषण देता है। तली भुनी और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन कम करने से मुंहासों की समस्या भी कम हो सकती है।

    यदि बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही साफ पानी से चेहरा और हाथ पैर धो लें तथा सूखे तौलिए से अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है इसलिए जल्द से जल्द सूखे और साफ कपड़े पहनना बेहतर होता है।

    मेकअप का इस्तेमाल करने वालों को मानसून में हल्के और वाटरप्रूफ उत्पाद चुनने चाहिए। रात को सोने से पहले मेकअप पूरी तरह हटाकर त्वचा की सफाई करना जरूरी है ताकि रोमछिद्र बंद न हों और त्वचा स्वस्थ बनी रहे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल से बारिश के मौसम में भी त्वचा को स्वस्थ चमकदार और संक्रमण मुक्त रखा जा सकता है। यदि लगातार खुजली लालपन दाने या फंगल संक्रमण जैसी समस्या बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

  • आमरस बनाम मैंगो शेक: दोनों में किसमें ज्यादा पोषण, कम कैलोरी और बेहतर फायदे? जानिए पूरी तुलना

    आमरस बनाम मैंगो शेक: दोनों में किसमें ज्यादा पोषण, कम कैलोरी और बेहतर फायदे? जानिए पूरी तुलना

    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही आम से बने व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इनमें मैंगो शेक और आमरस सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले विकल्प हैं। दोनों का स्वाद लाजवाब होता है और दोनों ही पके हुए आम से तैयार किए जाते हैं, लेकिन इन्हें बनाने की विधि, पोषण मूल्य और स्वास्थ्य पर प्रभाव एक-दूसरे से काफी अलग होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों में से कौन-सा विकल्प आपके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।

    मैंगो शेक एक ठंडा और क्रीमी पेय है, जिसे आम के गूदे में दूध मिलाकर तैयार किया जाता है। कई लोग इसमें स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी, ड्राई फ्रूट्स, आइसक्रीम या क्रीम भी मिलाते हैं। इसकी वजह से यह अधिक गाढ़ा, स्वादिष्ट और ऊर्जा से भरपूर बन जाता है। गर्मी के दिनों में यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने वाला पेय माना जाता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है।

    दूसरी ओर, आमरस पारंपरिक भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे केवल पके हुए आम के गूदे को अच्छी तरह मसलकर तैयार किया जाता है। कई जगहों पर इसमें इलायची या केसर जैसी प्राकृतिक खुशबू वाली सामग्री मिलाई जाती है, लेकिन इसका मूल स्वाद आम की प्राकृतिक मिठास पर ही आधारित रहता है। आमरस को अक्सर पूरी या अन्य पारंपरिक व्यंजनों के साथ परोसा जाता है।

    पोषण की दृष्टि से देखें तो दोनों में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, क्योंकि दोनों का मुख्य आधार आम ही है। हालांकि मैंगो शेक में दूध और अतिरिक्त चीनी मिलाने से इसकी कैलोरी, फैट और शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। यही कारण है कि यह अधिक ऊर्जा प्रदान करता है, लेकिन वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए सीमित मात्रा में ही उपयुक्त माना जाता है।

    वहीं बिना अतिरिक्त चीनी या अन्य सामग्री के तैयार किया गया आमरस अपेक्षाकृत हल्का विकल्प माना जाता है। इसमें प्राकृतिक मिठास बनी रहती है और अतिरिक्त फैट नहीं होता। हालांकि इसमें भी आम के कारण प्राकृतिक शर्करा पर्याप्त मात्रा में होती है, इसलिए इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना बेहतर रहता है।

    दोनों विकल्पों का उपयोग अलग-अलग जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है। यदि किसी को अधिक ऊर्जा और लंबे समय तक पेट भरा रखने वाला पेय चाहिए तो मैंगो शेक बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं यदि कोई व्यक्ति आम के प्राकृतिक स्वाद का आनंद लेना चाहता है और अतिरिक्त फैट से बचना चाहता है तो आमरस अधिक उपयुक्त माना जा सकता है।

    खानपान की परंपरा में भी दोनों की अलग पहचान है। आमरस लंबे समय से पारंपरिक भारतीय भोजन का हिस्सा रहा है, जबकि मैंगो शेक आधुनिक जीवनशैली के साथ घरों, कैफे और रेस्तरां में समान रूप से लोकप्रिय हो चुका है। दोनों का स्वाद और उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में पसंद किया जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही विकल्प पौष्टिक हो सकते हैं, बशर्ते इनका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए। अतिरिक्त चीनी, क्रीम या आइसक्रीम से बचकर तैयार किए गए मैंगो शेक और बिना अतिरिक्त मिठास वाला आमरस, दोनों ही गर्मियों में स्वाद और पोषण का अच्छा संतुलन प्रदान कर सकते हैं।

  • दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं पाकिस्तान की ये मनमोहक जगहें, प्रकृति, इतिहास और एडवेंचर का मिलता है अनूठा अनुभव

    दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं पाकिस्तान की ये मनमोहक जगहें, प्रकृति, इतिहास और एडवेंचर का मिलता है अनूठा अनुभव

    नई दिल्ली । दक्षिण एशिया का पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी प्राकृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां ऊंचे बर्फीले पर्वत, हरी-भरी घाटियां, शांत झीलें, विस्तृत समुद्री तट और ऐतिहासिक स्मारक देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। प्रकृति, रोमांच और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम इस देश के कई पर्यटन स्थलों को विशेष पहचान दिलाता है।

    उत्तरी पाकिस्तान में स्थित हुंजा घाटी सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है। ऊंचे पर्वतों, स्वच्छ वातावरण और हरियाली से घिरी यह घाटी प्राकृतिक सौंदर्य का शानदार उदाहरण मानी जाती है। यहां ट्रैकिंग, राफ्टिंग, कयाकिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों का भी आनंद लिया जा सकता है। शांत वातावरण और पर्वतीय दृश्य इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।

    नीलम घाटी भी अपनी मनमोहक प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध है। ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं, बहती नदियां, घने जंगल और शांत वातावरण इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। यहां मौजूद ऐतिहासिक स्थल और प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय माना जाता है।

    समुद्री पर्यटन पसंद करने वालों के लिए चूर्णा आइलैंड प्रमुख आकर्षण है। अरब सागर में स्थित यह द्वीप अपने साफ पानी और समुद्री जीवन के लिए जाना जाता है। यहां स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और क्लिफ डाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। समुद्र के भीतर की रंग-बिरंगी दुनिया देखने के इच्छुक लोगों के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है।

    सिंध क्षेत्र का गोरख हिल भी पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। ऊंचाई पर स्थित यह इलाका अपने चट्टानी परिदृश्य, ठंडे मौसम और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं और एडवेंचर पसंद करने वाले यात्रियों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

    उत्तर पाकिस्तान के शोगरान और सिरी पाये क्षेत्र भी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां तक पहुंचने का सफर भी रोमांच से भरपूर माना जाता है। हरे-भरे घास के मैदान, रंग-बिरंगे फूल और बादलों से घिरी पहाड़ियां इस क्षेत्र को बेहद आकर्षक बनाती हैं। गर्मियों के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां घूमने पहुंचते हैं।

    कराची के समुद्र तट भी देश के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल हैं। समुद्र किनारे सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य, समुद्री हवाएं और मनोरंजक गतिविधियां पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। यहां परिवारों और युवा यात्रियों के लिए अवकाश बिताने के कई विकल्प उपलब्ध हैं।

    इसके अलावा खानपुर डैम साहसिक खेलों के लिए प्रसिद्ध है, जहां जेट स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। वहीं हिंगोल नेशनल पार्क अपनी अनूठी भौगोलिक संरचना, वन्यजीवों और प्राकृतिक दृश्यों के कारण प्रकृति प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाले पर्यटक सुक्कुर जैसे शहरों का भी रुख करते हैं, जहां प्राचीन स्थापत्य और ऐतिहासिक धरोहरें क्षेत्र की समृद्ध विरासत की झलक प्रस्तुत करती हैं।