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  • क्या रोजमेरी तेल सच में बढ़ाता है बालों की ग्रोथ? डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया सच!

    क्या रोजमेरी तेल सच में बढ़ाता है बालों की ग्रोथ? डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताया सच!


    नई दिल्ली। बाल झड़ना और पतले होना आजकल आम समस्या बन गई है। लोग तरह-तरह के प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, जिनमें रोजमेरी तेल सबसे लोकप्रिय माना जाता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या रोजमेरी तेल सच में बालों को मजबूती देता है या यह सिर्फ एक देसी नुस्खा है। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. चांदनी जैन गुप्ता ने इस पर अपने अनुभव और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर रोशनी डाली।

    रोजमेरी तेल के कथित फायदे

    आम धारणा के अनुसार, रोजमेरी तेल के ये फायदे माने जाते हैं:

    डैंड्रफ कम करना
    बालों की ग्रोथ बढ़ाना
    हेयर फॉल कम करना
    सफेद बालों में कमी लाना

    लेकिन क्या ये सब सच में असर करते हैं?

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण

    सेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन की एक रिसर्च में रोजमेरी तेल और 2% मिनोक्सिडिल के प्रभाव की तुलना की गई। तीन महीने तक अलग-अलग ग्रुप्स में इस्तेमाल के बाद पाया गया कि दोनों के बीच बालों के झड़ने में कोई खास अंतर नहीं दिखा।

    डॉ. चांदनी बताती हैं कि रोजमेरी तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज़ स्कैल्प को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। कुछ स्टडीज में यह भी पाया गया कि रोजमेरी तेल स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है, जिससे हेयर फॉलिकल्स को पोषण मिलता है और बालों की ग्रोथ में मदद मिल सकती है। खासकर एंड्रोजेनिक एलोपेसिया (पैटर्न हेयर लॉस) के मामलों में यह लाभकारी हो सकता है। लेकिन ध्यान रहे, यह कोई जादुई उपाय नहीं है। असर दिखाने में कम से कम 3 से 6 महीने का समय लगता है और इसे रोजाना इस्तेमाल करना जरूरी होता है।

    रोजमेरी तेल का सही इस्तेमाल

    रोजमेरी तेल को सीधे स्कैल्प पर लगाने से बचें। इसे किसी कैरियर ऑयल जैसे नारियल या बादाम तेल में मिलाकर इस्तेमाल करें। सीधे लगाने से जलन या एलर्जी हो सकती है।
    सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    हेयर फॉल कम करने के लिए विशेषज्ञ की सलाह

    अगर बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हों, स्कैल्प में खुजली, लालिमा या पपड़ी हो रही हो, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें। ऐसे में अनुभवी डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है। सही और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट से ही बाल लंबे समय तक हेल्दी, स्ट्रॉन्ग और शाइनी बने रह सकते हैं।

  • पतले शरीर को मोटा बनाने का तरीका, सुपरफूड्स से बढ़ाएं मसल्स और वजन!

    पतले शरीर को मोटा बनाने का तरीका, सुपरफूड्स से बढ़ाएं मसल्स और वजन!


    नई दिल्ली। आजकल मोटापा जितना आम है, उतना ही पतलापन भी लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है। पतले लोग वजन बढ़ाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन अक्सर उनका फायदा नहीं होता। अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली की सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. दिव्या मलिक के अनुसार, वजन बढ़ाने के लिए हाई कैलोरी और न्यूट्रिशन से भरपूर सुपरफूड्स डाइट में शामिल करना जरूरी है।

    वजन बढ़ाने में मददगार सुपरफूड्स

    1. केला: नेचुरल वेट गेनर

    केला वजन बढ़ाने के लिए सबसे आसान और फायदेमंद सुपरफूड माना जाता है। इसमें नेचुरल शुगर, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर होते हैं, जो वजन तेजी से बढ़ाने में मदद करते हैं। केला इंस्टेंट एनर्जी देता है और शरीर को मजबूत बनाता है।

    उपयोग: रोज सुबह 1-2 केले खाएं या दूध/दही के साथ मिलाकर शेक बनाकर पिएं।

    2. ड्राई फ्रूट्स और नट्स: हेल्दी फैट्स और प्रोटीन का पावरहाउस

    बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश और अंजीर वजन बढ़ाने में कारगर हैं। इनमें हेल्दी फैट्स, प्रोटीन और कैलोरी पर्याप्त मात्रा में होती है। यह मसल्स बिल्डिंग में मदद करता है और शरीर को एनर्जी देता है।

    उपयोग: रात में भिगोकर सुबह खाएं या ड्राई फ्रूट्स मिल्कशेक बनाकर पिएं। इससे कई बीमारियों से भी बचाव होता है।

    3. आलू: हेल्दी कार्बोहाइड्रेट का स्रोत

    आलू और चावल में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो तेजी से वजन बढ़ाते हैं। यह शरीर को एक्टिव रखता है और एनर्जी स्तर बढ़ाता है।

    ध्यान दें: ज्यादा तला-भुना आलू स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसे उबालकर या हल्का फ्राई करके खाना अधिक सुरक्षित रहता है।

    स्वस्थ वजन बढ़ाने के लिए अन्य सुझाव
    डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही और पनीर कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं।

    नियमित भोजन: दिन में 5-6 मात्रा भोजन करें, जिससे शरीर को लगातार पोषण मिले।
    व्यायाम: वेट ट्रेनिंग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज मसल्स बिल्डिंग में मदद करती हैं।
    हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, यह मेटाबोलिज्म और पोषण अवशोषण को बेहतर बनाता है।

  • गर्मी में चुस्त-तंदुरुस्त रहने के लिए ये आटे की रोटियां खाएं

    गर्मी में चुस्त-तंदुरुस्त रहने के लिए ये आटे की रोटियां खाएं


    नई दिल्ली । गर्मी के दिनों में खान-पान का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इस मौसम में ऐसे भोजन की जरूरत होती है जो न केवल आसानी से पच जाए बल्कि शरीर को ठंडक भी पहुंचाए और ऊर्जा बनाए रखे। भारतीय रसोई में रोटी हर भोजन का अहम हिस्सा है। लंच डिनर या नाश्ते में इसे दाल सब्जी और करी के साथ खाया जाता है। लेकिन गर्मियों में रोटी बनाने के लिए सही आटे का चुनाव करना स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी है।

    ज्वार का आटा गर्मियों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं कि ज्वार की तासीर ठंडी होती है और यह ग्लूटेन-फ्री होने के कारण आसानी से पच जाता है। यह पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज से राहत दिलाता है। इसलिए गर्मियों में इसे लंच में शामिल करना फायदेमंद होता है।

    रागी का आटा अक्सर सर्दियों में खाने के लिए सुझाया जाता है लेकिन यदि इसे सीमित मात्रा में या अन्य ठंडे आटों के साथ मिलाकर लिया जाए तो यह कब्ज के लिए रामबाण साबित होता है। रागी में कैल्शियम और फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत करते हैं।

    चावल के आटे की रोटी भी गर्मियों में शरीर को ठंडक देने वाली मानी जाती है। इसकी तासीर ठंडी होने के कारण यह आसानी से पचती है और पेट को लंबे समय तक भरा रखती है। इसके अलावा यह हल्की और स्वादिष्ट होती है जिससे लंच या डिनर में इसे शामिल करना आरामदायक होता है।

    चने का आटा जिसे सत्तू के नाम से भी जाना जाता है प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। साथ ही यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और बाउल मूवमेंट को नियमित करता है जिससे पेट हल्का रहता है।

    ओट्स का आटा गर्मियों में नाश्ते के लिए बेहतरीन विकल्प है। इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकन नामक फाइबर पाचन तंत्र को साफ रखता है और शरीर से गंदगी बाहर निकालने में मदद करता है। ओट्स की रोटी खाने से ऊर्जा लंबे समय तक बनी रहती है और शरीर हल्का महसूस होता है।

    सिंघाड़े का आटा भी गर्मियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। सिंघाड़ा पानी में उगता है इसलिए इसकी तासीर ठंडी होती है। इसमें कम कैलोरी और उच्च फाइबर होता है जिससे यह पेट को हल्का रखता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। यह रोटियां खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो गर्मियों में हल्का और ताजगी भरा भोजन चाहते हैं।

    संक्षेप में गर्मियों में ज्वार रागी चावल चने और सिंघाड़े के आटे की रोटियां शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन ऊर्जा और हाइड्रेशन में मदद करती हैं। इन रोटियों को नियमित रूप से शामिल करने से आप पूरे दिन चुस्त-तंदुरुस्त और स्वस्थ महसूस करेंगे।

  • सफेद बालों से छुटकारा, इस नेचुरल जूस से पाएं खूबसूरत बाल!

    सफेद बालों से छुटकारा, इस नेचुरल जूस से पाएं खूबसूरत बाल!


    नई दिल्ली। अगर इस समय आप अपने बाल से काफी परेशान हो गई हैं बाल टूट रहे हैं और सफेद होते जा रहे हैं। कई लोग महंगे शैंपू और हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन फिर भी बालों की समस्या दूर नहीं होती। तब भी परेशानी की कोई बात नहीं है हम आज आपके लिए ऐसा ड्रिंक लेकर आए हैं जो आपके बालों को काफी मजबूत बनाएगा। इस जूस को पीने के बाद आपके बाल काफी चमकदार बन जाएंगे। तो चलिए इसके बारे में जानते हैं और समझते हैं कि यह कैसे यह काम करता है।

    बालों से जुड़ी है खास बातें
    आपको बता दें कि, बालों की असली सेहत सिर्फ बाहरी देखभाल पर नहीं, बल्कि शरीर को मिलने वाले पोषण पर निर्भर करती है। अगर शरीर के अंदर जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी है, तो इसका असर सीधे बालों पर दिखाई देता है। इसलिए आपको अपने बालों के साथ शरीर का भी ध्यान रखना चाहिए ताकि बाल ऑटोमेटिक अंदर से मजबूत और घने हो जाए।

    आंवला जूस
    अगर आप लगातार बाल झड़ने से परेशान हैं, तो आंवला जूस आपके लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। इसे बनाने के लिए एक गिलास पानी में एक आंवला, 8-10 करी पत्ते, आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिलाएं। आंवला विटामिन C से भरपूर होता है, जो कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाता है और बालों को मजबूत बनाता है। करी पत्ते बालों की जड़ों को पोषण देते हैं, जबकि नींबू स्कैल्प को साफ रखने में मदद करता है।

    गाजर और चुकंदर का जूस
    गाजर चुकंदर का जूस भी एक बेहतरीन ऑप्शन है जिसे आप रोजाना ले सकते हैं ताकि आपके बालों को अच्छी पोषण मिल सके। बालों की तेजी से बढ़त और प्राकृतिक चमक के लिए गाजर और चुकंदर का जूस एक बेहतरीन विकल्प है। इसे बनाने के लिए एक गाजर, एक छोटा चुकंदर, आधा सेब और थोड़ा अदरक मिलाकर जूस तैयार करें। गाजर में मौजूद विटामिन A बालों को चमकदार बनाता है, जबकि चुकंदर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाकर बालों की जड़ों को पोषण देता है।

    एलोवेरा और नारियल पानी
    गर्मी और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए नारियल पानी और एलोवेरा का मिश्रण बेहद असरदार होता है। एक कप नारियल पानी में 2 चम्मच एलोवेरा जेल, कुछ पुदीने की पत्तियां और थोड़ा खीरा मिलाकर पीएं। यह शरीर को ठंडक देता है और स्कैल्प की खुजली व जलन को कम करता है।

  • प्रकृति का साथ, सेहत का विश्वास: बिना दवा के स्वस्थ रहने के आसान तरीके

    प्रकृति का साथ, सेहत का विश्वास: बिना दवा के स्वस्थ रहने के आसान तरीके


    नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई निरोगी काया चाहता है, लेकिन सवाल है कि कैसे निरोगी काया को पाया जा सकता है।

    इस सवाल का एक ही जवाब है अपने शरीर को समझना। हमारे शरीर में इतनी क्षमता होती है कि वह हर बीमारी से लड़ सकता है और बिना दवा के अच्छा जीवन जी सकता है। बिना दवा के जीवन जीना सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि अच्छी जीवनशैली का संकेत है।

    आयुर्वेद के मुताबिक, आज के समय में आधुनिक जीवनशैली और खान-पान ही बीमारियों की जड़ है, और यही कारण है कि अब प्रकृति के पास वापस लौटने का समय आ गया है। जितना आप प्रकृति के पास जाएंगे, बीमारी उतना ही दूर हो जाएगी। बिना दवा के स्वस्थ जीवनशैली जीने के लिए कुछ चीजों को जीवन में वापस लाना होगा।

    पहला स्टेप है स्व निदान, यानी पहले खुद की बीमारी की पहचान करें। हमारा शरीर कभी झूठ नहीं बोलता है, और जब भी शरीर में किसी तरह की कोई परेशानी होती है तो कुछ न कुछ संकेत जरूर मिलता है। इसके लिए शरीर के कुछ मुख्य लक्षण जानने की जरूरत है, जैसे जोड़ों का दर्द, कमजोरी, घटता हुआ वजन, अचानक धुंधला दिखना, बुखार, और कब्ज होना। यह कारण शरीर की आंतरिक गड़बड़ी को दर्शाते हैं।

    दूसरा स्टेप है प्राकृतिक दवाओं का इस्तेमाल। हमारा मतलब किसी दवा से नहीं, बल्कि प्रकृति से करीब रहना और समय ही है। इसके लिए समय पर आहार लेना जरूरी है और जीवनशैली में प्रकृति से मिले ताजे फलों का सेवन करना भी जरूरी है। यही ताजे फल हैं, जो दवा के इस्तेमाल को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, रोज कम से कम आधे घंटे प्रकृति से जुड़ना भी जरूरी है। नंगे पांव घास पर चले और पेड़ों को गले लगाएं। इससे तनाव कम होता है और शरीर मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करता है।

    तीसरा स्टेप है सुधार का चरण। इस समय आप खुद शरीर में बदलाव महसूस करेंगे। जैसे जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा और फल खाने से पेट से संबंधित रोगों में भी आराम मिलेगा। शरीर धीरे-धीरे खुद को हील करना शुरू कर देगा। अगर इसके बाद कभी-कभार बुखार की समस्या होती है तो दवा लेने की बजाय गर्म पानी में पैरों को भिगोकर बैठ जाए, इससे भले ही शरीर का तापमान बढ़ेगा, लेकिन बुखार ठीक होने में मदद मिलेगी। हमारा शरीर का तापमान तभी गर्म होता है, जब शरीर में बैक्टीरिया का हमला होता है। संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर तापमान को बढ़ा देते हैं और एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देते हैं।

    इसके साथ ही कोशिश करें कि रोजाना कुछ पत्ते नीम के जरूर चबाए। यह शरीर के आधे से ज्यादा रोगों को समाप्त कर देगा।

  • घबराहट और बेचैनी का असली कनेक्शन, दिल और पेट के बीच संबंध

    घबराहट और बेचैनी का असली कनेक्शन, दिल और पेट के बीच संबंध


    नई दिल्ली।आजकल कई लोग अचानक बेचैनी, घबराहट और दिल की तेज़ धड़कन जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। आम धारणा यह है कि यह सब सिर्फ मानसिक तनाव या हृदय रोगों की वजह से होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। असल में, पेट और पाचन संबंधी गड़बड़ियां इस तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं। अगर पाचन ठीक नहीं है, तो गैस बनना, पेट में भारीपन महसूस होना या कब्ज जैसी समस्याएं सीधे दिल और मानसिक स्थिति पर असर डाल सकती हैं।

    पाचन की गड़बड़ी और हृदय की प्रतिक्रिया

    जब पेट में अपच या गैस बनती है, तो इसका दबाव सीने और हृदय पर पड़ता है। कई बार लोग इसे हार्ट अटैक का संकेत मानकर घबरा जाते हैं। आयुर्वेद में भी माना गया है कि मन और पेट का गहरा संबंध है। अगर पेट स्वस्थ नहीं है, तो मन अशांत रहता है और दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज़ हो सकती है। साथ ही, बार-बार घबराहट, अपच, पेट फूलना और खट्टी डकार जैसी समस्याएं शरीर में टॉक्सिन बनने का संकेत देती हैं।

    टॉक्सिन और कब्ज: स्वास्थ्य पर गहरा असर

    शरीर में टॉक्सिन बढ़ने से पाचन विकार तेजी से सामने आते हैं। इससे कब्ज, गैस और पेट फूलने की समस्या बार-बार होती रहती है। लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार यह समस्या रहने पर बेचैनी, चिंता और दिल की तेज़ धड़कन जैसी लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में शुद्धिकरण और पाचन सुधार बेहद जरूरी है।

    गलत जीवनशैली और पाचन समस्या

    आम तौर पर यह समस्या उन लोगों में ज्यादा दिखाई देती है, जो:

    देर रात भारी भोजन करते हैं।
    खाने के तुरंत बाद टहलने के बजाय बैठ जाते हैं।
    ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी भोजन पसंद करते हैं।
    अधिक मानसिक तनाव या व्यस्त जीवनशैली अपनाते हैं।
    नियमित रूप से अपने पेट की सफाई पर ध्यान नहीं देते।

    ये सभी आदतें पाचन क्रिया को मंद करती हैं और शरीर में टॉक्सिन बढ़ाकर बेचैनी और घबराहट की समस्या को जन्म देती हैं।

    सरल उपाय: पेट स्वस्थ, मन शांत

    इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:

    समय पर खाना खाएं – नियमित भोजन से पाचन सही रहता है।
    खाने के बाद हल्की टहल – गैस और अपच कम होती है।
    देर रात भारी भोजन से बचें – रात का हल्का भोजन पाचन को आसान बनाता है।
    रात को सौंफ और मिश्री – पेट साफ रखने और कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।
    पर्याप्त पानी पिएं – शरीर हाइड्रेट रहता है और टॉक्सिन बाहर निकलते हैं।
    हल्का और संतुलित भोजन – ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाने से बचें।
    इन उपायों से न केवल पेट स्वस्थ रहेगा, बल्कि घबराहट, बेचैनी और दिल की असामान्य धड़कन जैसी समस्याएं भी दूर होंगी।

    पेट और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। बार-बार बेचैनी और घबराहट महसूस होने पर सिर्फ तनाव या हृदय की समस्या मानना गलत है। पाचन की सही देखभाल और नियमित जीवनशैली अपनाकर आप इन लक्षणों को कम कर सकते हैं। याद रखें, स्वस्थ पेट = स्वस्थ मन = स्वस्थ दिल।

  • कुर्सी योग: बढ़ती उम्र में जोड़ों के दर्द और कमजोरी दूर करने का आसान तरीका

    कुर्सी योग: बढ़ती उम्र में जोड़ों के दर्द और कमजोरी दूर करने का आसान तरीका

    नई दिल्ली।बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक गतिशीलता और संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। कई बुजुर्ग फर्श पर बैठने-उठने में असमर्थ हो जाते हैं और पारंपरिक योगासन करना चुनौतीपूर्ण लगता है। ऐसे में कुर्सी योग बुजुर्गों और जोड़ों में कमजोरी या दर्द से पीड़ित लोगों के लिए एक आसान, सुरक्षित और प्रभावी तरीका साबित हो रहा है।

    कुर्सी योग क्या है और क्यों जरूरी

    कुर्सी योग में योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कुर्सी पर बैठकर या कुर्सी का सहारा लेकर किया जाता है। इसके लिए सिर्फ एक मजबूत और स्थिर कुर्सी की जरूरत पड़ती है। इसे घर पर, पार्क में या किसी सुरक्षित जगह पर आसानी से किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन लोगों के लिए सुलभ और जोखिम-मुक्त विकल्प है, जिन्हें पारंपरिक योग करना मुश्किल लगता है। नियमित अभ्यास से बुजुर्ग अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ा सकते हैं और मानसिक रूप से भी स्वस्थ और प्रसन्न रह सकते हैं।

    कुर्सी योग के लाभ

    कुर्सी योग में कंधे और गर्दन की स्ट्रेचिंग, पैरों की गतिविधियां और सहारे के साथ खड़े होकर किए जाने वाले आसन शामिल होते हैं। ये आसान अभ्यास पारंपरिक योग के जोखिम को कम करते हैं।

    नियमित अभ्यास के फायदे:

    जोड़ों की जकड़न कम होती है और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
    शरीर में लचीलापन बढ़ता है।
    प्राणायाम की तकनीक से तनाव और चिंता कम होती है, मानसिक शांति मिलती है।
    हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
    नींद की गुणवत्ता बढ़ती है। इस प्रकार बुजुर्ग डर या चोट की चिंता किए बिना अपनी शारीरिक क्षमता और संतुलन बनाए रख सकते हैं।

    अभ्यास की शुरुआत और समय

    आयुष मंत्रालय के अनुसार कुर्सी योग की शुरुआत सरल आसनों से करनी चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में इसे शुरू करना बेहतर रहता है। सप्ताह में दो-तीन बार, 20 से 30 मिनट का अभ्यास भी काफी फायदेमंद साबित होता है। अभ्यास धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है और शरीर की क्षमता के अनुसार चुनिंदा आसनों पर ध्यान दिया जा सकता है।

    कुर्सी योग करते समय सावधानियां

    कुर्सी योग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

    बिना पहियों वाली मजबूत कुर्सी चुनें।
    कुर्सी की सीट ज्यादा गद्देदार न हो और पीठ सीधी हो।
    कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि पैर पूरी तरह जमीन पर टिके रहें।
    सुरक्षित स्थान और स्थिर सतह पर ही अभ्यास करें।
    ये सावधानियां चोट और असंतुलन से बचाव के लिए जरूरी हैं।

    कुर्सी योग बढ़ती उम्र में जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और संतुलन की समस्याओं को दूर करने का सरल, सुरक्षित और असरदार तरीका है। नियमित अभ्यास से शारीरिक क्षमता बढ़ती है, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और बुजुर्ग स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्न जीवन जी सकते हैं।

  • गर्मी में बाहर निकलते ही जलती है त्वचा? अपनाएं ये आसान उपाय

    गर्मी में बाहर निकलते ही जलती है त्वचा? अपनाएं ये आसान उपाय


    नई दिल्ली। इन आसान उपायों को अपनाकर गर्मियों में भी त्वचा को स्वस्थ, हाइड्रेटेड और ग्लोइंग रखा जा सकता है। नई दिल्ली।गर्मी में बाहर निकलते ही त्वचा में जलन, लालपन और सनबर्न होना आम समस्या है। इसे रोकने और त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
    1. सनस्क्रीन का इस्तेमाल ज़रूरी

    बाहर जाने से 20 मिनट पहले SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं। यह त्वचा को हानिकारक UV किरणों से बचाता है और सनबर्न व टैनिंग को रोकता है।
    2. त्वचा को हाइड्रेटेड रखें

    गर्मियों में शरीर और त्वचा दोनों को पानी की आवश्यकता होती है। पर्याप्त पानी पीने से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और त्वचा फ्रेश और ग्लोइंग बनी रहती है।

    3. फेस वॉश से दिन में दो-तीन बार सफाई

    धूल, गर्म हवा और पसीने से त्वचा प्रभावित होती है।
    सुबह, दिन और रात में माइल्ड फेसवॉश से चेहरा धोएं।
    इससे त्वचा साफ रहती है और पिंपल्स की समस्या कम होती है।

    4. धूप से बचाव

    बाहर निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करें।
    यह सीधे सूर्य के संपर्क से त्वचा को बचाता है।
    टैनिंग और जलन की समस्या घटती है।
    अतिरिक्त टिप्स:
    हल्के और ढीले कपड़े पहनें, जिससे त्वचा को सांस लेने का मौका मिले। त्वचा को शांत करने के लिए ठंडे पानी से फेस टोनर या कूलिंग जेल इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर त्वचा में बहुत जलन या लालपन हो, तो एलोवेरा जेल या कच्चे दही का उपयोग करें।
  • सुबह का दमदार नाश्ता, देसी प्रोटीन डाइट से पाएं एनर्जी और फिटनेस दोनों

    सुबह का दमदार नाश्ता, देसी प्रोटीन डाइट से पाएं एनर्जी और फिटनेस दोनों


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट और एनर्जेटिक बने रहना हर किसी की प्राथमिकता बन गई है और इसकी शुरुआत होती है सुबह के नाश्ते से। हेल्दी और संतुलित नाश्ता न केवल शरीर को जरूरी पोषण देता है बल्कि पूरे दिन की ऊर्जा का आधार भी बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि सुबह के भोजन में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा शामिल की जाए तो यह शरीर को लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होता है।

    प्रोटीन हमारे शरीर की मूलभूत जरूरतों में से एक है। यह मांसपेशियों के निर्माण और उनकी मजबूती के लिए जरूरी होता है साथ ही यह भूख को नियंत्रित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। सुबह प्रोटीन से भरपूर नाश्ता करने से दिनभर बार बार भूख लगने की समस्या कम हो जाती है और अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव होता है। इसके अलावा यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है।

    अगर बात करें देसी और स्वादिष्ट विकल्पों की तो भारतीय रसोई में ऐसे कई नाश्ते मौजूद हैं जो प्रोटीन से भरपूर होने के साथ साथ स्वाद में भी लाजवाब होते हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय विकल्प है पनीर पराठा जो न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को भरपूर प्रोटीन भी देता है। इसी तरह पनीर भुर्जी भी एक बेहतरीन विकल्प है जिसे जल्दी तैयार किया जा सकता है।

    इसके अलावा मूंग दाल चीला और बेसन चीला जैसे व्यंजन भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। ये हल्के होते हैं और पाचन में भी आसान होते हैं जिससे सुबह के समय शरीर को सही ऊर्जा मिलती है।

    डेयरी प्रोडक्ट्स भी नाश्ते में शामिल किए जा सकते हैं। दही के साथ ताजे फल और मूंगफली का सेवन शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है। वहीं ओट्स या दलिया को दूध के साथ लेना एक संतुलित और सुपाच्य विकल्प माना जाता है खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं।

    स्प्राउट्स और छाछ का संयोजन भी काफी फायदेमंद होता है। यह न केवल पाचन को दुरुस्त रखता है बल्कि शरीर को हल्का और ऊर्जावान बनाए रखता है। खासतौर पर जो लोग जिम जाते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं उनके लिए यह नाश्ता काफी लाभकारी होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह का नाश्ता छोड़ना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कई लोग समय की कमी के कारण नाश्ता नहीं करते लेकिन यह आदत शरीर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में यदि विस्तृत नाश्ता संभव न हो तो भी एक गिलास दूध या दही के साथ थोड़ी मूंगफली या ड्राई फ्रूट्स का सेवन जरूर करना चाहिए।

    कुल मिलाकर यदि दिन की शुरुआत सही खानपान से की जाए तो न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि मानसिक रूप से भी आप अधिक सक्रिय और सकारात्मक महसूस करते हैं। प्रोटीन से भरपूर देसी नाश्ता एक आसान और प्रभावी तरीका है खुद को दिनभर फिट और ऊर्जावान बनाए रखने का।

  • कोलेस्ट्रॉल 2026: नई गाइडलाइन, LDL टारगेट और जरूरी लाइफस्टाइल बदलाव

    कोलेस्ट्रॉल 2026: नई गाइडलाइन, LDL टारगेट और जरूरी लाइफस्टाइल बदलाव


    नई दिल्ली । अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने कोलेस्ट्रॉल पर नई गाइडलाइन जारी की है यह अपडेट इसलिए बेहद अहम है क्योंकि इसने पिछले आठ साल के पुराने पैरामीटर्स को पूरी तरह बदल दिया है वर्ल्ड हेल्थ फेडरेशन (WHF) के मुताबिक दुनियाभर में हर साल सबसे ज्यादा मौतें कार्डियोवस्कुलर डिजीज (CVD) के कारण होती हैं और 2 करोड़ से ज्यादा लोग हर साल इसी वजह से जीवन गंवा देते हैं

    कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का फैट यानी लिपिड है जो ब्लड में पाया जाता है यह दो तरह का होता है LDL जिसे बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है और HDL जिसे गुड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है यह शरीर के लिए जरूरी है क्योंकि यह बॉडी सेल्स की वॉल्स बनाने में मदद करता है कुछ हॉर्मोन्स बनाने और विटामिन D उत्पादन में सहायक होता है साथ ही बाइल जूस बनाने में भी मदद करता है HDL हार्ट को हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभाता है

    नई गाइडलाइन में स्क्रीनिंग, रिस्क एसेसमेंट और लाइफस्टाइल पर जोर दिया गया है पुरानी गाइडलाइन में LDL 130 mg/dL से कम रखने की सलाह दी जाती थी लेकिन अब इसे पर्सनलाइज्ड करके तीन कैटेगरी में बांट दिया गया है जिनको हार्ट डिजीज का हाई रिस्क है उनके लिए LDL 55 mg/dL से कम, मीडियम रिस्क वालों के लिए 70 mg/dL से कम और जो लोग हार्ट डिजीज से प्रभावित नहीं हैं उनके लिए 100 mg/dL से कम रखने की सलाह दी गई है इसका मतलब है कि अब ‘नॉर्मल’ की कोई तय सीमा नहीं है बल्कि यह व्यक्ति के रिस्क लेवल पर निर्भर करता है

    नई गाइडलाइन में रिस्क कैलकुलेशन भी व्यापक बना दिया गया है क्योंकि अब कम उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ रहा है इसके पीछे फैमिली हिस्ट्री और खराब लाइफस्टाइल मुख्य कारण हैं फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया जैसी जेनेटिक कंडीशन के कारण बचपन से LDL बढ़ सकता है वहीं जंकफूड, कम एक्सरसाइज और मोटापा भी इसे बढ़ाते हैं इसलिए अब बच्चों की स्क्रीनिंग 9 साल की उम्र से करने की सलाह दी गई है

    हाई कोलेस्ट्रॉल हार्ट, ब्रेन और किडनी पर गंभीर असर डालता है यह आर्टरीज में प्लाक बनाकर ब्लड फ्लो कम करता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है ब्लड क्लॉट्स ब्रेन में स्ट्रोक और मेमोरी इम्पेयरमेंट का कारण बन सकते हैं वहीं किडनी की ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाकर क्रॉनिक किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ाते हैं

    लाइफस्टाइल फैक्टर्स में अनहेल्दी डाइट, ट्रांस और सैचुरेटेड फैट, सिडेंटरी लाइफ, मोटापा, स्मोकिंग, पर्याप्त नींद न लेना, देर रात खाने की आदत और स्ट्रेस शामिल हैं ये सभी LDL बढ़ाने में मदद करते हैं

    अगर कोलेस्ट्रॉल ज्यादा आए तो सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें LDL लेवल के हिसाब से टारगेट तय करें और हार्ट-हेल्दी डाइट, नियमित कार्डियो एक्सरसाइज, वेट कंट्रोल, शराब-सिगरेट से परहेज, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट अपनाएं जरूरत पड़ने पर स्टेटिन जैसी दवाइयां लें और फॉलो-अप टेस्ट समय-समय पर करवाएं

    नई गाइडलाइन के अनुसार बैलेंस्ड डाइट, एक्टिव लाइफ और अच्छी आदतें HDL और LDL को संतुलित करके हृदय, ब्रेन और किडनी की सुरक्षा करती हैं इसलिए कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान रखना अब हर उम्र में जरूरी हो गया है