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  • आयुर्वेदिक रहस्य: सुबह जीरा पानी पीने से क्या बदलती है सेहत? जानें सही तरीका

    आयुर्वेदिक रहस्य: सुबह जीरा पानी पीने से क्या बदलती है सेहत? जानें सही तरीका


    नई दिल्ली। आयुर्वेद में जीरे को केवल मसाला नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक औषधि माना गया है। जीरा पानी को “डाइजेस्टिव टॉनिक” कहा जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पेट की अग्नि (मेटाबॉलिज्म) को सक्रिय करता है और शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है।

    आज के समय में फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए लोग जीरा पानी, मेथी पानी, अजवाइन पानी और सौंफ पानी जैसी घरेलू औषधियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। खासतौर पर जीरा पानी को वजन घटाने और पेट की समस्याओं में बेहद असरदार माना जा रहा है।

    जीरा पानी बनाने का सही तरीका क्या है?

    जीरा पानी बनाने के लिए सबसे पहले एक चम्मच जीरा रातभर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को हल्का उबाल लें, ताकि जीरे के पोषक तत्व पानी में अच्छे से मिल जाएं। उबालने के बाद जब पानी हल्का गुनगुना रह जाए, तभी इसका सेवन करना चाहिए। ध्यान रखें कि पानी न बहुत ज्यादा गर्म हो और न ठंडा, क्योंकि गुनगुना पानी शरीर द्वारा जल्दी अवशोषित किया जाता है और इसका प्रभाव बेहतर होता है।

    कब और कैसे करें सेवन?

    आयुर्वेद के अनुसार जीरा पानी का सबसे सही समय सुबह खाली पेट माना गया है। सुबह उठकर सबसे पहले इसे पीने से पाचन तंत्र सक्रिय हो जाता है और दिनभर पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं।

    यदि कोई व्यक्ति खाली पेट नहीं पी सकता, तो इसे भोजन के बाद भी लिया जा सकता है। लेकिन इसे धीरे-धीरे, घूंट-घूंट कर पीना चाहिए ताकि यह शरीर में सही तरीके से अवशोषित हो सके।

    जीरा पानी के प्रमुख फायदे

    जीरा पानी नियमित रूप से पीने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं-

    पाचन तंत्र मजबूत होता है
    पेट फूलना और गैस की समस्या में राहत मिलती है
    मेटाबॉलिज्म तेज होता है
    शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं
    वजन घटाने में मदद मिलती है
    गर्मियों में पेट की जलन और एसिडिटी कम होती है

    आयुर्वेद में इसे एक प्राकृतिक डिटॉक्स ड्रिंक माना गया है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है।

    गलत तरीके से सेवन से हो सकता है नुकसान

    विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग जल्दी परिणाम पाने के चक्कर में दिनभर जीरा पानी पीते रहते हैं या बहुत अधिक मात्रा में इसका सेवन कर लेते हैं। यह तरीका सही नहीं है। अत्यधिक सेवन से शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ सकता है और अपेक्षित लाभ भी नहीं मिलते।

    जीरा पानी एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी घरेलू उपाय है, जिसे सही तरीके से अपनाकर पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। सुबह की यह छोटी सी आदत लंबे समय में शरीर को मजबूत और ऊर्जावान बनाने में मदद कर सकती है।

  • पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 की तैयारी शुरू: जानिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, यात्रा मार्ग और जरूरी नियम

    पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 की तैयारी शुरू: जानिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, यात्रा मार्ग और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। 2026 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। इस साल यह पवित्र यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। यानी कुल 57 दिनों तक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे। खास बात यह है कि यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है, जिसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पूरा किया जा सकता है।

    हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन आस्था से भरी यात्रा में शामिल होते हैं। प्रशासन ने इस बार भी सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से पूरी हो सके।

    Amarnath Yatra 2026 के रजिस्ट्रेशन और पात्रता नियम
    अमरनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। श्रद्धालु अधिकृत बैंक शाखाओं या ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए Compulsory Health Certificate (CHC) जरूरी होता है, जो यह साबित करता है कि यात्री उच्च पर्वतीय क्षेत्र की यात्रा के लिए फिट है।

    आयु सीमा भी तय की गई है। आमतौर पर 13 से 70 वर्ष के बीच के लोग ही यात्रा के लिए पात्र होते हैं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यात्रा के दौरान RFID कार्ड रखना भी अनिवार्य किया गया है, जिससे सुरक्षा और ट्रैकिंग आसान हो सके।

    दो मुख्य रूट और जरूरी गाइडलाइन
    अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए दो प्रमुख मार्ग हैं—पहलगाम और बालटाल। पहलगाम रूट लंबा लेकिन अपेक्षाकृत आसान है, जबकि बालटाल रूट छोटा लेकिन ज्यादा कठिन माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी रूट का चयन कर सकते हैं।

    यात्रा के दौरान मौसम बेहद अनिश्चित रहता है, इसलिए गर्म कपड़े, रेनकोट और जरूरी दवाइयां साथ रखना जरूरी है। प्रशासन ने यात्रियों को ऊंचाई वाले इलाकों में सावधानी बरतने, समूह में चलने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

    कुल मिलाकर, अमरनाथ यात्रा 2026 आस्था और रोमांच का संगम होने वाली है, लेकिन इसमें शामिल होने से पहले पूरी तैयारी और नियमों की जानकारी बेहद जरूरी है।

  • बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय

    बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय

    नई दिल्ली। अप्रैल का महीना जहां मौसम को सुहावना बनाता है, वहीं बच्चों की सेहत के लिए यह चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है। कभी तेज धूप तो कभी अचानक बारिश के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिससे बच्चों का शरीर जल्दी तालमेल नहीं बिठा पाता।

    दिन में गर्मी और रात में ठंड के कारण सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा हवा में बढ़ती नमी और धूल से एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। ऐसे में बच्चों की देखभाल के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    मौसम के अनुसार पहनाएं कपड़े
    इस समय बच्चों को न ज्यादा भारी और न ही बहुत हल्के कपड़े पहनाने चाहिए। बेहतर होगा कि उन्हें लेयरिंग में कपड़े पहनाएं, ताकि जरूरत के अनुसार कपड़े कम या ज्यादा किए जा सकें। घर से बाहर निकलते समय शॉल या हल्की जैकेट साथ रखना खासकर शाम के समय फायदेमंद रहता है।

    पौष्टिक आहार से बढ़ाएं इम्युनिटी
    बदलते मौसम में बच्चों का खानपान बेहद अहम भूमिका निभाता है। उनके आहार में ताजे फल और हरी सब्जियां शामिल करें, जो विटामिन्स से भरपूर हों। ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करना बेहतर होता है। साथ ही बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

    सफाई और दिनचर्या पर दें ध्यान
    इस मौसम में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए बच्चों को साफ-सफाई की आदत सिखाना जरूरी है। बाहर से आने के बाद हाथ-पैर धोना, नियमित नहाना और साफ कपड़े पहनना उनकी सेहत के लिए लाभदायक होता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद भी जरूरी है। समय पर सोने से बच्चों की इम्युनिटी बेहतर होती है और वे बीमारियों से दूर रहते हैं।

    लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
    अगर सभी सावधानियों के बावजूद बच्चे में सर्दी, खांसी या किसी भी तरह की परेशानी नजर आए, तो उसे नजरअंदाज न करें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि बीमारी बढ़ने से पहले ही उसका इलाज हो सके।

  • भारतीय ‘राजमा-चावल’ का वैश्विक जलवा: दुनिया की टॉप बीन्स डिशेज में बनाई जगह

    भारतीय ‘राजमा-चावल’ का वैश्विक जलवा: दुनिया की टॉप बीन्स डिशेज में बनाई जगह

    नई दिल्ली। भारतीय खानपान के लिए गर्व की बात है कि घर-घर में पसंद किया जाने वाला साधारण लेकिन स्वादिष्ट ‘राजमा-चावल’ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। अपने गाढ़े स्वाद और घरेलू अंदाज के लिए मशहूर यह नॉर्थ इंडियन व्यंजन दुनिया की बेहतरीन बीन्स डिशेज में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि अब भारतीय घरेलू व्यंजन भी वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं और लोगों के दिलों में अपनी जगह बना रहे हैं।

    ग्लोबल रैंकिंग में मिली जगह
    हाल ही में फूड रेटिंग प्लेटफॉर्म TasteAtlas द्वारा जारी सूची में राजमा और राजमा-चावल को दुनिया के टॉप 100 बीन्स डिशेज में स्थान दिया गया है। यह रैंकिंग दुनियाभर के हजारों यूजर्स की पसंद के आधार पर तैयार की गई है, जो भारतीय स्वाद की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।

    रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन

    इस सूची में राजमा को 14वां स्थान मिला है, जबकि राजमा-चावल की जोड़ी 25वें पायदान पर रही। खास बात यह है कि इस लिस्ट में ब्राजील, पुर्तगाल, मैक्सिको और तुर्की जैसे देशों के पारंपरिक व्यंजन भी शामिल हैं, जिनके बीच भारतीय डिश का यह स्थान काफी अहम माना जा रहा है।

    सिर्फ खाना नहीं, एक एहसास
    राजमा-चावल एक सरल लेकिन बेहद लोकप्रिय डिश है, जिसमें मसालों में पके लाल राजमा को चावल के साथ परोसा जाता है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में यह केवल भोजन नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा स्वाद है, जो लोगों को घर और बचपन की याद दिलाता है।

    सादगी में छिपा है असली स्वाद

    इस डिश की खासियत इसकी पारंपरिक तैयारी में है। राजमा को रातभर भिगोकर प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन और मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू गहराई तक विकसित होती है। चावल के साथ परोसे जाने पर यह स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल बन जाता है।

    टॉप पर रही पुर्तगाल की डिश
    जहां भारतीय राजमा-चावल ने सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं पहला स्थान पुर्तगाल की मशहूर डिश Sopa da pedra को मिला। इसके अलावा टॉप 10 में ब्राजील की फेजोआदा, मैक्सिको की सोपा तारास्का और मिस्र की फुल मेडामेस जैसी डिशेज भी शामिल हैं।

  • घर पर बनाएं बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी, जानिए आसान टिप्स और सही तरीका..

    घर पर बनाएं बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी, जानिए आसान टिप्स और सही तरीका..

    नई दिल्ली। गर्मियों में ठंडे पेय की चाह बढ़ जाती है, लेकिन बाजार में मिलने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद केमिकल्स सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में देसी पेय ‘लस्सी’ एक बेहतरीन और हेल्दी विकल्प है, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है बल्कि पोषण भी प्रदान करती है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी घर पर बनाना मुश्किल है, लेकिन सही तरीके और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।

    अच्छी लस्सी के लिए दही का सही चयन जरूरी

    लस्सी बनाने के लिए ताजा और हल्का खट्टा दही सबसे उपयुक्त माना जाता है। बहुत ज्यादा खट्टा दही स्वाद को बिगाड़ सकता है। दही जितना फ्रेश होगा, लस्सी उतनी ही स्वादिष्ट बनेगी। लस्सी बनाने से पहले दही को अच्छी तरह फेंट लें, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे और टेक्सचर स्मूद बने।

    मीठी और नमकीन लस्सी का सही संतुलन
    लस्सी को अपनी पसंद के अनुसार मीठा या नमकीन बनाया जा सकता है।
    – मीठी लस्सी के लिए चीनी, इलायची पाउडर और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाएं।
    – नमकीन लस्सी के लिए काला नमक, भुना जीरा पाउडर और पुदीना डालने से स्वाद और बढ़ जाता है।
    लस्सी को मथते समय ध्यान रखें कि इसे ज्यादा देर तक ब्लेंड न करें, वरना इसका गाढ़ापन कम हो सकता है।

    ठंडक और परोसने का सही तरीका

    लस्सी को ठंडा बनाने के लिए बर्फ डाली जा सकती है, लेकिन अधिक बर्फ डालने से स्वाद हल्का हो जाता है। बेहतर है कि पहले से ठंडा दही इस्तेमाल करें। परोसते समय ऊपर से मलाई या ड्राय फ्रूट्स डालकर इसे और भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। अगर देसी अंदाज में लस्सी का मजा लेना चाहते हैं, तो इसे मिट्टी के कुल्हड़ में सर्व करना एक अच्छा विकल्प है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इस तरह कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप घर पर ही बाजार जैसी गाढ़ी, ठंडी और स्वादिष्ट लस्सी तैयार कर सकते हैं।

  • आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक 8 पोषक खाद्य पदार्थ, गाजर के अलावा भी मिलते हैं कई प्राकृतिक विकल्प

    आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक 8 पोषक खाद्य पदार्थ, गाजर के अलावा भी मिलते हैं कई प्राकृतिक विकल्प


    नई दिल्ली:
    आज की जीवनशैली में आंखों पर पड़ने वाला दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन के अधिक उपयोग के कारण आंखों में थकान, सूखापन, जलन और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में आंखों की सेहत को बनाए रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। आमतौर पर यह धारणा रही है कि आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए गाजर सबसे प्रभावी विकल्प है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि कई अन्य खाद्य पदार्थ भी आंखों को मजबूत बनाने और उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    शकरकंद को आंखों के लिए एक बेहद उपयोगी खाद्य पदार्थ माना जाता है क्योंकि इसमें विटामिन ए की प्रचुर मात्रा होती है। यह तत्व आंखों की सतह यानी कॉर्निया को स्वस्थ रखने में मदद करता है और दृष्टि क्षमता को बेहतर बनाए रखता है। इसके नियमित सेवन से आंखों की कार्यक्षमता लंबे समय तक संतुलित रह सकती है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और अन्य हरी सब्जियां आंखों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं। इनमें मौजूद ल्यूटिन और ज़ीएक्सैंथिन जैसे पोषक तत्व रेटिना की सुरक्षा करते हैं और तेज रोशनी या स्क्रीन के हानिकारक प्रभाव से आंखों को बचाते हैं। ये तत्व उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दृष्टि संबंधी समस्याओं को भी कम करने में सहायक होते हैं।

    अंडे आंखों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माने जाते हैं। इनमें मौजूद तत्व आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और दृष्टि को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में अंडे का सेवन आंखों की सेहत को सपोर्ट कर सकता है।

    जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे दालें, बीन्स और नट्स आंखों की कोशिकाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पोषक तत्व आंखों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने और उन्हें आंतरिक रूप से मजबूत करने में मदद करता है। इसी तरह बादाम भी विटामिन ई का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो आंखों को ऑक्सीडेटिव तनाव और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है।

    ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर मछली आंखों के सूखेपन को कम करने में सहायक होती है और उन्हें प्राकृतिक रूप से नमी प्रदान करती है। यह आंखों की सतह को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली समस्याओं को कम कर सकती है। पपीता विटामिन सी का अच्छा स्रोत माना जाता है, जो आंखों के ऊतकों को मजबूती प्रदान करता है और उम्र के प्रभाव को धीमा करने में मदद करता है।

    इसके अलावा बीन्स और साबुत अनाज भी आंखों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। ये शरीर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ आंखों की समग्र सेहत को समर्थन देते हैं। संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली आंखों की रोशनी को लंबे समय तक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्याप्त नींद, स्क्रीन टाइम में नियंत्रण और नियमित अंतराल पर आंखों को आराम देना भी आंखों की सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है।

  • सुबह से शाम तक Aloe Vera का सही इस्तेमाल, गर्मियों में स्किन रहेगी फ्रेश और ग्लोइंग

    सुबह से शाम तक Aloe Vera का सही इस्तेमाल, गर्मियों में स्किन रहेगी फ्रेश और ग्लोइंग


    नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं जैसे टैनिंग, पसीना, ऑयली स्किन और रैशेज बढ़ने लगते हैं। ऐसे में नेचुरल और असरदार उपाय की बात करें तो एलोवेरा सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक माना जाता है। यह न सिर्फ त्वचा को ठंडक देता है बल्कि उसे अंदर से हाइड्रेट और हेल्दी भी बनाता है। अगर आप दिनभर सही तरीके से एलोवेरा का इस्तेमाल करें, तो आपकी स्किन गर्मी में भी ग्लोइंग और सॉफ्ट बनी रह सकती है।

    सुबह की शुरुआत एलोवेरा फेस वॉश से करें

    दिन की शुरुआत चेहरे को साफ करने से करें। इसके लिए एलोवेरा जेल को हल्के फेस वॉश की तरह इस्तेमाल करें। यह स्किन से अतिरिक्त ऑयल हटाता है और त्वचा को फ्रेश बनाता है।

    तरीका:
    ताजा एलोवेरा जेल लें और चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें, फिर ठंडे पानी से धो लें।

    धूप से बचाव के लिए एलोवेरा सन प्रोटेक्टर

    गर्मी में धूप से स्किन को बचाना बेहद जरूरी है। एलोवेरा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को सन डैमेज से बचाते हैं।

    तरीका:
    बाहर निकलने से पहले एलोवेरा जेल में थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर चेहरे और हाथों पर लगाएं। इससे स्किन हाइड्रेट भी रहेगी और टैनिंग कम होगी।

    दोपहर में स्किन को दें कूलिंग टच

    दोपहर के समय पसीना और धूप स्किन को थका देती है। ऐसे में एलोवेरा एक कूलिंग एजेंट की तरह काम करता है।

    तरीका:
    फ्रिज में रखा हुआ एलोवेरा जेल चेहरे पर लगाएं। यह इंस्टेंट फ्रेशनेस देता है और स्किन को रिलैक्स करता है।

    शाम को एलोवेरा फेस पैक का करें इस्तेमाल

    दिनभर की धूल और पसीने से स्किन डल हो जाती है। इसे साफ और निखारने के लिए एलोवेरा फेस पैक बहुत फायदेमंद है।

    तरीका:
    एलोवेरा जेल में हल्दी या मुल्तानी मिट्टी मिलाकर फेस पैक बनाएं और 10-15 मिनट लगाकर धो लें। इससे स्किन क्लीन और ग्लोइंग बनेगी।

    रात में एलोवेरा जेल से करें स्किन रिपेयर

    रात का समय स्किन रिपेयर के लिए सबसे अच्छा होता है। एलोवेरा जेल नाइट क्रीम की तरह काम करता है।

    सोने से पहले चेहरे पर एलोवेरा जेल की हल्की परत लगाएं और छोड़ दें। सुबह स्किन सॉफ्ट और हेल्दी लगेगी।

  • Travel Tips: हनीमून का बना रहे हैं प्लान, तब इन जगहों पर करें विजिट

    Travel Tips: हनीमून का बना रहे हैं प्लान, तब इन जगहों पर करें विजिट


    नई दिल्ली। इस समय का मौसम अभी ठीक-ठाक है ना तो ज्यादा गर्मी लग रही है ना ही ठंडा है। इस मौसम में इस मौसम में अगर आप घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आराम से घूम सकते हैं या फिर अगर आप हनीमून जा रहे हैं तब आप बिना कुछ सोच भारत की कुछ जगहों पर जा सकते हैं जहां आपको काफी अच्छा अनुभव होगा। अगर आपको उन जगहों के बारे में नहीं पता है तो चलिए आपको इस खबर में उन जगहों के बारे में बताते हैं जहां जाकर आप अपनी अच्छी यादें बना सकते हैं।

    हिमाचल प्रदेश जाना रहेगा बेस्ट
    हिमाचल प्रदेश में अगर आप हनीमून ट्रिप प्लान करने की सोच रहे हैं। तो आपको एक बार डलहौजी की खूबसूरती को देखने आना चाहिए। बता दें कि डलहौजी में ही ‘मिनी स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया’ के नाम से फेमस खजियार मौजूद है। यहां पर आप अच्छा पल बिता सकते हैं। यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली पहाड़ देखने को मिल जाएंगे यहां पर आप अपने कमरे में भी काफी अच्छी-अच्छी तस्वीर कैप्चर कर सकते हैं इसके साथ ही अपने पार्टनर के साथ यहां घूमने के लिए काफी कुछ है।

    इस मौसम में शिमला भी रहेगा बेस्ट
    अप्रैल के महीने में शिमला जाना भी काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। शिमला में आपको काफी कुछ घूमने को मिल जाएगा। शिमला से कुछ ही दूर पर मौजूद मसूरी भी घूमने के लिए काफी अच्छी जगह मानी जाती है हनीमून के लिए यह जगह परफेक्ट हो सकती है। यह जगह काफी अच्छी मानी जाती है यहां पर काफी ज्यादा पर्यटक आते हैं।

    इस मौसम में शिमला भी रहेगा बेस्ट
    अप्रैल के महीने में शिमला जाना भी काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। शिमला में आपको काफी कुछ घूमने को मिल जाएगा। शिमला से कुछ ही दूर पर मौजूद मसूरी भी घूमने के लिए काफी अच्छी जगह मानी जाती है हनीमून के लिए यह जगह परफेक्ट हो सकती है। यह जगह काफी अच्छी मानी जाती है यहां पर काफी ज्यादा पर्यटक आते हैं।

  • गर्मी में ये फूल है काफी खास, आपको सेहतमंद रखने में करता है मदद

    गर्मी में ये फूल है काफी खास, आपको सेहतमंद रखने में करता है मदद


    नई दिल्ली। बड़े बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि, पेड़-पौधे में ऐसी शक्ति होती है जिससे वह आपको सेहतमंद बनाए रखने में काफी मददगार हो सकते हैं। आयुर्वेद में कई शक्तिशाली और गुणकारी पौधों और फूलों के बारे में बताया गया है, जिनके उपयोग से कई बीमारियों का इलाज होता आया है। सदाबहार का फूल भी इसमें शामिल है। सदाबहार एक ऐसा पौधा है, जिसके पत्ते और फूल औषधीय गुणों से भरे हैं।

    सेहत के लिए कैसे जरूरी है ये फूल
    बिल्कुल साधारण और सुंदर सा दिखने वाला फूल सदाबहार काफी कारगर साबित हो सकता है आपकी सेहत के लिए। आयुर्वेद में इसे खून, त्वचा और चयापचय से जुड़ा एक महत्वपूर्ण द्रव्य माना गया है। आयुर्वेद यह स्पष्ट करता है कि हर वनौषधि तभी औषधि बनती है, जब उसे सही द्रव्य, सही मात्रा और सही विधि के साथ अपनाया जाए।इसका स्वाद कड़वा होता है और इसे खून शुद्धि का सबसे आसान तरीका माना गया है।

    गर्मी में नाक से खून आने पर
    गर्मियों में अक्सर नाक से खून आने की समस्या देखी जाती है। कई बार तो यह समस्या काफी बढ़ जाती है दिन में कई बार ऐसी घटना हो जाती है। गर्मी में अधिक ताप की वजह से नाक से खून बहना शुरू हो जाता है। ऐसे में सदाबहार के फूल और अनार के फूलों का रस नाक में डालने से आराम मिलेगा।इन दोनों फूलों के रस की तासीर ठंडी होती है और रक्त को बहने से रोकती है। इसके साथ ही ऐसा करने से खून नहीं आता है और वह समस्या ठीक हो जाती है।

    डायबिटीज नियंत्रण रखने के लिए
    अगर आपको डायबिटीज है तब यह पौधा आपकी काफी मदद करता है इसे ठीक करने में या फिर नियंत्रण में रखने में आप सुबह दो या तीन पत्ती इसकी जरुर खा सकते हैं।इसकी पत्तियों में मौजूद ‘अल्कलॉइड्स’ नामक तत्व शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाकर ब्लड शुगर को कम करने में मददगार साबित होते हैं।

    घाव भरने में मदद
    अगर आपको चोट लग गई है वह ठीक नहीं हो रहा है तब यह पौधा उसमें भी आपकी मदद कर सकता है। इसके पत्ते का चूर्ण और हल्दी की सहायता से घाव को जल्दी भरा जा सकता है।घाव को जल्दी ठीक करने, सूजन को कम करने और घाव की लालिमा को कम करने के लिए सहाबहार के पत्तों को पीसकर और हल्दी मिलाकर सीधा घाव पर लगाया जा सकता है। लेकिन अगर आपको ज्यादा चोट लगी है तब आपको जल्दी हॉस्पिटल जाना चाहिए क्योंकि यह बस छोटी-मोटे घाव के लिए ही काम कर सकता है।

  • Weekend Getaways: कम पैसों में घूमने के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन, छुट्टी को बनाएं खास

    Weekend Getaways: कम पैसों में घूमने के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन, छुट्टी को बनाएं खास


    नई दिल्ली।रविवार का दिन अक्सर आराम और घर पर बिताने के लिए माना जाता है, लेकिन अगर आप इस दिन को थोड़ा खास बनाना चाहते हैं तो पास की किसी खूबसूरत जगह पर एक छोटी ट्रिप का प्लान कर सकते हैं। मौसम में हल्की ठंडक के बीच एक दिन की यात्रा न सिर्फ आपको तरोताजा करती है बल्कि तनाव और रोजमर्रा की थकान को भी दूर करती है। आजकल एक दिन की ट्रिप के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि हर शहर के आसपास ऐसी कई जगहें मौजूद होती हैं जहां कम पैसे में भी बेहतरीन अनुभव लिया जा सकता है।

     1. नजदीकी हिल स्टेशन बनाएं पहला विकल्प

    अगर आपके शहर से 3 से 5 घंटे की दूरी पर कोई हिल स्टेशन है, तो यह रविवार बिताने का बेहतरीन विकल्प हो सकता है। आप शनिवार रात यात्रा शुरू करके रविवार सुबह वहां पहुंच सकते हैं और पूरे दिन प्राकृतिक नजारों का आनंद ले सकते हैं। पहाड़ों की ठंडी हवा, हरियाली और शांत वातावरण मन को सुकून देता है। शाम तक वापस लौटकर सोमवार की दिनचर्या भी आसानी से संभाली जा सकती है।

    2. ऐतिहासिक स्थलों की सैर करें

    भारत के हर राज्य में कई ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं, जो एक दिन की ट्रिप के लिए परफेक्ट हैं। चाहे वह किले हों, स्मारक हों या पुराने मंदिर—इन जगहों पर जाकर इतिहास को करीब से महसूस किया जा सकता है। दिल्ली का कुतुब मीनार, आगरा का ताजमहल या जयपुर का आमेर किला जैसे स्थल घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। ये जगहें न सिर्फ ज्ञान बढ़ाती हैं बल्कि शानदार फोटोग्राफी का मौका भी देती हैं।

    3. प्रकृति के बीच बिताएं सुकून भरा दिन

    अगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं तो अपने शहर के आसपास मौजूद झीलों, नेचर पार्क या वॉटरफॉल्स का रुख कर सकते हैं। परिवार या दोस्तों के साथ पिकनिक का प्लान बनाकर पूरा दिन प्राकृतिक वातावरण में बिताया जा सकता है। हरे-भरे पेड़, पानी की कलकल और ताजी हवा मन को शांत कर देती है और नई ऊर्जा का एहसास कराती है।

    4. एडवेंचर स्पॉट्स पर लें रोमांच का मजा

    अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं तो ट्रेकिंग, बोटिंग या साइक्लिंग जैसी गतिविधियों वाले स्थान चुन सकते हैं। कई ऐसे डेस्टिनेशन हैं जहां एक ही दिन में एडवेंचर एक्टिविटीज कराकर शाम तक वापसी संभव होती है। हल्की ठंड में एडवेंचर करना अनुभव को और भी यादगार बना देता है।

    एक दिन की ट्रिप के फायदे

    कम खर्च में घूमने का मौका
    मानसिक तनाव से राहत
    परिवार और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम
    नई जगहों को एक्सप्लोर करने का अवसर
    काम के लिए नई ऊर्जा मिलती है

    अगर आप हर रविवार घर पर बोर हो जाते हैं, तो पास की जगहों पर एक दिन की यात्रा आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। चाहे हिल स्टेशन हो, ऐतिहासिक स्थल हो या नेचर स्पॉट—थोड़ी सी प्लानिंग से आप अपने वीकेंड को यादगार बना सकते हैं और नई ऊर्जा के साथ हफ्ते की शुरुआत कर सकते हैं।