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  • सुबह खाली पेट पिएं ये 5 देसी ड्रिंक्स तेजी से घटेगा वजन

    सुबह खाली पेट पिएं ये 5 देसी ड्रिंक्स तेजी से घटेगा वजन


    नई दिल्ली । वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद रिजल्ट नहीं मिल रहा? तो आपकी सुबह की शुरुआत को बदलने का वक्त आ गया है। कई बार हम अपनी दिनचर्या पर ज्यादा ध्यान नहीं देते लेकिन सही तरीके से शुरुआत करना वजन घटाने में अहम भूमिका निभाता है। सुबह खाली पेट कुछ विशेष ड्रिंक्स से न केवल आपका मेटाबॉलिज्म तेज हो सकता है बल्कि ये शरीर को अंदर से साफ और स्वस्थ भी बनाए रखती हैं। आइए जानते हैं उन 5 देसी ड्रिंक्स के बारे में जिन्हें सुबह खाली पेट पीने से वजन घटाने में मदद मिल सकती है।
    गुनगुना नींबू पानी
    सुबह उठते ही गुनगुना नींबू पानी पीना वजन घटाने का एक बेहद आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है। नींबू में मौजूद विटामिन C मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इसके अलावा नींबू पानी शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। आप चाहें तो इसमें एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं जो इसकी प्रभावशीलता को और बढ़ा सकता है।
    नारियल पानी
    नारियल पानी कम कैलोरी और भरपूर पोषक तत्वों से भरपूर होता है। सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है जिससे ओवरईटिंग से बचाव होता है। यह शरीर को ठंडा रखता है और शरीर की इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है।
    ग्रीन टी
    ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और कैटेचिन्स शरीर में फैट बर्न करने में मदद करते हैं। सुबह खाली पेट ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वजन घटाने की प्रक्रिया को सपोर्ट मिलता है। अगर आप वजन घटाने में रुचि रखते हैं तो ग्रीन टी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
    जीरा पानी
    रातभर पानी में भिगोकर रखे हुए जीरे को सुबह उबालकर पीने से पाचन बेहतर होता है। जीरा पानी शरीर में जमा चर्बी को कम करने और गैस ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पेट को हल्का और साफ रखता है जिससे वजन कम करने में सहारा मिलता है।
    सेब का सिरका एप्पल साइडर विनेगर
    एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर पीने से फैट बर्निंग तेज होती है। यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने और भूख को कम करने में भी मदद करता है। एप्पल साइडर विनेगर शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया तेज होती है।

    ध्यान रखें ये बातें
    इन ड्रिंक्स को पीने के बाद कम से कम 20-30 मिनट तक कुछ न खाएं। यदि आपको एसिडिटी लो ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो इन ड्रिंक्स को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है। इन ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप वजन घटाने की दिशा में एक कदम और बढ़ा सकते हैं। याद रखें ये ड्रिंक्स न केवल फैट बर्न करने में मदद करती हैं बल्कि आपके शरीर को अंदर से भी स्वस्थ बनाती हैं।

  • हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    नई दिल्ली।आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में स्वस्थ रहना एक चुनौती जरूर है, लेकिन 2026 के हेल्दी ईटिंग और फूड ट्रेंड्स इसे पहले से कहीं आसान बना रहे हैं। अब हेल्दी खाना सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इम्यूनिटी बढ़ाने, दिनभर ऊर्जा बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने का अहम जरिया बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल के साथ लोग अब ऐसे फूड ऑप्शन्स की तलाश में हैं जो नैचुरल हों, कम प्रोसेस्ड हों और शरीर को संपूर्ण पोषण दें।2026 के फूड ट्रेंड्स में नैचुरल इंग्रीडिएंट्स, लो-कार्ब डाइट और प्लांट-बेस्ड फूड्स का दबदबा साफ नजर आ रहा है। लोग पैकेज्ड और जंक फूड से दूरी बनाकर घर के बने, ताज़े और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्विनोआ, ओट्स, मिलेट्स, मील शेक्स और वेजिटेबल-फ्रूट स्मूदीज़ तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये पचाने में आसान होने के साथ लंबे समय तक एनर्जी भी देते हैं।

    रेसिपी ट्रेंड्स की बात करें तो इस साल स्वाद और सेहत के बीच बेहतरीन संतुलन देखने को मिल रहा है। हल्दी, ग्रीन टी, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स जैसे सुपरफूड्स को रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करना अब आम हो गया है। ये न सिर्फ इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं, बल्कि हार्ट हेल्थ और पाचन के लिए भी फायदेमंद माने जा रहे हैं। डिनर में लो-कार्ब वेजिटेबल प्लेट्स और प्रोटीन रिच स्नैक्स का चलन भी बढ़ रहा है। बेक्ड स्वीट पोटैटो फ्राइज, पैन-ग्रिल्ड सब्जियां या हर्ब-ग्रिल्ड चिकन जैसे विकल्प स्वादिष्ट होने के साथ वजन कंट्रोल और मसल स्ट्रेंथ में मदद करते हैं।हेल्दी लाइफस्टाइल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर भोजन करना और छोटे-छोटे पोर्शन लेना भी उतना ही जरूरी है। दिन की शुरुआत गुनगुने पानी या नींबू पानी से करने, दिनभर पर्याप्त पानी पीने और हर 3-4 घंटे में हल्का व पौष्टिक स्नैक लेने से शरीर एक्टिव बना रहता है और थकान महसूस नहीं होती।

    फिट रहने के लिए अब लोग भारी-भरकम एक्सरसाइज की बजाय हल्की व नियमित गतिविधियों को अपनाने लगे हैं। योग, मॉर्निंग स्ट्रेचिंग और वर्क फ्रॉम होम के दौरान छोटे-छोटे वॉक ब्रेक्स शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही विटामिन और मिनरल्स के लिए सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है। धूप से विटामिन डी, खट्टे फलों से विटामिन सी और हरी सब्जियों व बीन्स से आयरन लेना अब लोगों की डेली रूटीन का हिस्सा बनता जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्दी रूटीन की सफलता किसी एक बड़े बदलाव में नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे-छोटे सुधारों में छिपी होती है। अचानक डाइट बदलना या एक्सट्रीम फास्टिंग करने की बजाय धीरे-धीरे हेल्दी आदतें अपनाना लंबे समय तक बेहतर परिणाम देता है। 2026 के ये हेल्दी ईटिंग ट्रेंड्स यही संदेश देते हैं कि सेहतमंद जीवन कोई मुश्किल लक्ष्य नहीं, बल्कि सही चुनावों से बना एक आसान सफर है।

  • Delhi Winter Picnic Spots: सर्दियों में दिल्ली के वो पिकनिक स्पॉट्स जो शोर से दूर सुकून देते हैं

    Delhi Winter Picnic Spots: सर्दियों में दिल्ली के वो पिकनिक स्पॉट्स जो शोर से दूर सुकून देते हैं


    नई दिल्ली। सर्दी का मौसम है। इस मौसम में हवा और माहौल ठंडा होता है लेकिन दोपहर की हल्की सुनहरी धूप अच्छी लगती है। जो लोग नए साल पर कहीं घूमने या ट्रिप पर नहीं जा पाए, वह एक दिन का समय निकालकर इस मौसम में दिल्ली में पिकनिक मनाने जा सकते हैं। पिकनिक के लिए न तो बहुत अधिक समय की जरूरत है और ना ही बहुत ज्यादा खर्च करने की। दोस्तों, परिवार, पार्टनर या बच्चों के साथ पिकनिक पर जाना मजेदार एक्टिविटी हो सकती है। सर्दियों में दिल्ली के कुछ अंडररेटेड पिकनिक स्पाॅट्स पर्यटकों के लिए खुल जाते हैं, जो इंस्टाग्राम से दूर लेकिन दिल के बेहतर करीब हो सकते हैं।

    इन स्पाॅट पर शोर नहीं, सुकून मिलता है। इस सर्दी में दिल्ली के क्लब और कैफ़े तक भूलकर पार्क की ओर रुख करें। जहां आपको पास या टिकट नहीं, सिर्फ एक चादर, घर का बने व्यंजजन और एक दिन का समय चाहिए।

    हौज खास डिस्ट्रिक्ट पार्क, अफ्रीका एवेन्यू
    सर्दियों में हौज खास डिस्ट्रिक्ट पार्क में जाना मजेदार हो सकता है। चौड़े लॉन, पुराने पेड़ों से छनती सर्दियों की धूप और इतना सन्नाटा कि यकीन ही न हो कि आप साउथ दिल्ली में हैं। यह जगह लंच, किताब पढ़ने और गोल्डन आवर वॉक के लिए बनी है। यहां समय तेज नहीं चलता, ठहरकर बहता है।

    मिलेनियम पार्क, सराय काले खा
    खुले आसमान के नीचे फैले लॉन और सामने चमकता शांति स्तूप आपकी छुट्टी को यादगार बना देगा। सराय काले खां में स्थिति मिलेनियम पार्क यह पार्क सर्द शामों को शांत बना देता है। परिवार के साथ पिकनिक, बच्चों की हंसी और सनसेट स्प्रेड्स के लिए यह जगह परफेक्ट है।

    गार्डन ऑफ फाइव सेंसस, साकेत
    साकेत के गार्डन आफ फाइन सेंसस में पिकनिक के लिए जा सकते हैं। ठंडी हवा, फूलों से सजी पगडंडियां और ऐसे शांत कोने, जहां लंबी बातचीत अपने आप गहरी हो जाती है। चिल डेट्स, फोटोग्राफी वॉक और बिना जल्दबाज़ी वाली मुलाक़ातों के लिए आदर्श है।

    डियर पार्क, हौज खास विलेज
    डियर पार्क में खुले वॉकिंग ट्रैक्स, ऊंचे पेड़ और बिना भीड़ के पिकनिक मैट बिछाने की आजादी है। फैमिली पिकनिक, पेट वॉक और सर्द सुबह की सैर के लिए एक भरोसेमंद ठिकाना है।

    नेहरू पार्क, चाणक्यपुरी
    नेहरू पार्क में बड़ा गार्डन है जहां डिप्लोमैटिक इलाके की शांति और सर्दियों की धूप अच्छी मिलती है। आलसी दोपहरों के लिए बनी जगह बेस्ट है। बड़े पिकनिक ग्रुप्स और लेज़ी संडे के लिए क्लासिक चॉइस है।

    अहिंसा स्थल, किला राय पिथौरा, सैनीक फार्म
    शहर के दृश्य दिखाती एक शांत पहाड़ी जगह पर सर्द हवा अपने आप रफ्तार कम कर देती है। शांत सुबह, ध्यान और साइलेंट पिकनिक के लिए यह जगह बोलती नहीं, महसूस कराती है।

    महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क, अनुव्रत मार्ग
    महरौली आर्कियोलाॅजिकल पार्क में पत्थर के स्मारक, जंगलनुमा रास्ते और यहां की खामोशी सुकून भरा दिन बिताने के लिए बेस्ट है। हिस्ट्री लवर्स, लंबे वॉक और सोलो विंटर पिकनिक के लिए यह जगह किसी कविता से कम नहीं है।

    बांसरेरा पार्क, गंगा विहार, सराय काले खां
    सराय काले खां के बांससरेरा पार्क में पिकनिक मनाने जा सकते हैं। यहां बांस से घिरे रास्ते, ठंडी हवा और छायादार जगहें आपको खुश कर देंगी। मॉर्निंग पिकनिक और स्लो नेचर वॉक के लिए यह एक सॉफ्ट, हराभरा अनुभव देगा।

  • सर्दी में लोशन लगाने के बाद भी रूखे दिखते हैं हाथ? तो ये 5 टिप्स अपनाकर स्किन बनाएं सॉफ्ट

    सर्दी में लोशन लगाने के बाद भी रूखे दिखते हैं हाथ? तो ये 5 टिप्स अपनाकर स्किन बनाएं सॉफ्ट

    नई दिल्ली। सर्दी के मौसम में स्किन का बुरा हाल हो जाता है। ठंडक के कारण त्वचा खुश्क और रूखी दिखने लगती है, कई बार लोशन लगाने के बाद भी स्किन ड्राई बनी रहती है। सर्दी के मौसम में ज्यादातर लोग चेहरे की देखभाल करते हैं लेकिन हाथ पर ध्यान नहीं देते। हाथ के स्किन की सही केयर न की जाए, तो त्वचा रूखी और सिकुड़ी हो जाती है। ऐसे में आपके हाथ गंदे दिखने लगेंगे। अगर आप क्रीम लगाती है और इसके बाद भी हाथ रूखे दिखते हैं, तो कुछ टिप्स अपनाकर जरूर देखें। ये तरीके काफी पुराने हैं और इनसे त्वचा मुलायम हो जाती है।
    कैसे बनाएं हाथों को मुलायम
    1- गुनगुना पानी
    हाथों को धोने के लिए हमेशा गुनगुना पानी ही इस्तेमाल करें। ज्यादा गर्म पानी आपकी त्वचा को खुश्क बना सकता है और इससे स्किन की नमी भी खत्म हो जाती है। इसी कारण से लोशन लगाने के बाद भी हाथ बेजान दिखते हैं। गुनगुना या फिर हल्का ठंडा पानी ही यूज करें।

    2- सही क्रीम चुनें
    हाथों पर लगाने के लिए हमेशा अच्छी और सही क्रीम चुनें। क्रीम लगाती हैं, तो शिया बटर या हायलूरोनिक एसिड वाली क्रीम ही चुनें। इससे हाथ मुलामय बने रहेंगे और इसे सुबह-रात को सोने से पहले लगाएं। इसके अलावा आप रात को सोने से पहले हाथों पर हल्का सा ग्लिसरीन लगाएं। ग्लिसरीन भी हाथों की त्वचा पर नमी बनाए रखेगा और ड्राईनेस नहीं होगी।

    3- सनस्क्रीन
    धूप में जाने से पहले हाथों पर सनस्क्रीन लगाएं। कई लोगों को लगता है कि जाड़े में सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं होती। ऐसा बिल्कुल नहीं है, जाड़े की धूप से भी हाथों-फेस की त्वचा ड्राई और सिकुड़ सकती है। इसलिए भले ही आप स्वेटर पहनते हो, लेकिन सनस्क्रीन लगाना न भूलें।

    4- दस्ताने पहनें
    अगर किचन में काम करते हुए पानी में हाथ ज्यादा रहते हैं, तो ग्लव्स पहनकर काम करें। लगातार ठंडे पानी में काम करने से भी हाथ ड्राई रहते हैं। ऐसे में हाथों पर कई बार सफेद पपड़ी बनने लगती है। पानी वाला काम खत्म कर आप हाथों को गैस पर सेंक लें और सरसों का तेल लगाएं।

    5- नाइट केयर
    सर्दी में शरीर को सबसे ज्यादा आराम रात में मिलता है। ऐसे में आप सोने से पहले नाइट केयर जरूर करें। हाथ पर क्रीम या ग्लिसरीन लगाएं या किसी तेल से मसाज कर फिर सोएं। ऐसे में हाथों की स्किन ड्राई नहीं होगी और सॉफ्ट बनी रहेगी।

  • Lohri 2026: 13 जनवरी को मनाई जाएगी लोहड़ी, पढ़ें इस दिन का महत्व और खास बातें

    Lohri 2026: 13 जनवरी को मनाई जाएगी लोहड़ी, पढ़ें इस दिन का महत्व और खास बातें

    नई दिल्ली। कई स्थानों पर लोहड़ी (Lohri 2026) को लाल लोई भी कहा जाता है, जो मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन अलाव जलाकर उसमें नए गेहूं और जौ की बालियां अर्पित की जाती है। साथ ही पारंपरिक गीत गाए जाते हैं व नृत्य किया जाता है। लोग एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाई देते हैं और ईश्वर को अच्छी फसल के लिए आभार प्रकट करते हैं।

    लोहड़ी संक्रांति का क्षण (Lohri Sankranti Moment)
    लोहड़ी (Lohri 2026) पर संक्रांति का क्षण बुधवार 14 जनवरी प्रातः 3 बजकर 13 मिनट तक रहने वाला है। ऐसे में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी।

    लोहड़ी पर्व का महत्व (Lohri Significance)
    लोहड़ी का त्योहार पर्व केवल फसलों से संबंधित नहीं है, बल्कि यह दिन लंबे होने की शुरुआत का भी प्रतीक होता है। यह वह समय है, जब किसान अपनी अच्छी फसल के लिए प्रकृति को धन्यवाद देते हैं और जश्न मनाते हैं। इस पर्व के साथ ही आने वाले साल में खुशहाली के लिए प्रार्थना भी की जाती है।
    लोहड़ी के विशेष अवसर पर लोग आंगन या खुले चौक में पारंपरिक रूप से अलाव जलाते हैं और भांगड़ा व गिद्दा जैसे पारंपरिक नृत्य करते हैं। आभार के प्रतीक के रूप में आग में अनाज, मिठाइयां, मूंगफली, पॉपकॉर्न जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं। इस दिन सरसों का साग, मक्के के आटे की रोटी, गजक और रेवड़ी जैसे पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया जाता है।
    लोहड़ी से जुड़ी कहानी
    लोहड़ी को लेकर अपनी बहादुरी के लिए मशहूर लोक नायक दुल्ला भट्टी (Dulla Bhatti) की कहानी प्रसिद्ध है। लोहड़ी के पारम्परिक गीतों दुल्ला भट्टी का जिक्र भी आता है। इस कहानी के अनुसार, एक समय में मुगल राजा अकबर के काल में दुल्ला भट्टी नामक एक लुटेरा पंजाब में रहता था। वह धनी लोगों को लूटकर उसने मिले सभी धन को गरीब की मदद में लगा देता था। दुल्ला भट्टी पंजाब के रॉबिन हुड नाम से भी प्रसिद्ध है।

  • महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के बावजूद निखार क्यों नहीं आता? जानें 7 गलतियां जो आपके ग्लो को छीन रही हैं

    महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के बावजूद निखार क्यों नहीं आता? जानें 7 गलतियां जो आपके ग्लो को छीन रही हैं


    नई दिल्ली । हर महिला चाहती है कि उसकी स्किन खूबसूरत और जवां बनी रहेलेकिन कभी-कभी हम अनजाने में ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैंजो हमारे स्किनकेयर रूटीन को नुकसान पहुंचाती हैं। ये छोटी सी दिखने वाली गलतियां हमारी त्वचा को समय से पहले बेजान और थकी-थकी बना देती हैं। आइएजानते हैं कि कौन सी वो 7 आम गलतियां हैंजो आपकी स्किन की चमक को खत्म कर रही हैं और इनसे कैसे बच सकते हैं।

    सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना

    बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि केवल धूप में बाहर जाने पर ही सनस्क्रीन लगानी चाहिए। जबकियूवी किरणें सिर्फ बाहर से ही नहींबल्कि घर के अंदर भी हमें नुकसान पहुंचा सकती हैं। घर या ऑफिस में भी दिनभर की यूवी एक्सपोजर से झुर्रियां और पिगमेंटेशन बढ़ सकते हैं।इसलिएसनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल बेहद जरूरी है। स्किन टाइप के हिसाब से प्रोडक्ट्स का चुनाव न करनकई बार महिलाएं अपनी स्किन टाइप को समझे बिना ही प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगती हैं। यह गलत चुनाव स्किन को और भी ज्यादा ड्राईऑयली या एक्ने-प्रोन बना सकता है। जब हम सही स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का चुनाव करते हैंतो स्किन की हेल्थ बेहतर रहती है और एजिंग के निशान भी देर से नजर आते हैं।

    चेहरे को ज्यादा रगड़ना या हार्श क्लेंजर का इस्तेमाल करना

    चेहरे को सही तरीके से साफ करना जरूरी हैलेकिन इसे ज्यादा रगड़ने से हमारी स्किन की नेचुरल नमी छीन जाती है। इसके अलावाहार्श क्लींजर स्किन के लिए हानिकारक हो सकते हैंजिससे ड्राईनेस और फाइन लाइन्स जल्दी दिखने लगती हैं। हमेशा हलके और सॉफ्ट क्लींजर का ही इस्तेमाल करें।

    हाइड्रेशन की अनदेखी करना

    त्वचा को हाइड्रेटेड रखना सबसे जरूरी है। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीतीं और मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल नहीं करतींतो स्किन डल और बेजान हो सकती है। हाइड्रेशन न होने से त्वचा में जल्दी झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगती हैं। सही मात्रा में पानी पीना और अच्छा मॉइस्चराइज़र लगाना स्किन को हेल्दी बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
    स्लीप रूटीन को नजरअंदाज करना नींद का सही रूटीन न होना स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है। नींद के दौरान स्किन खुद को रिपेयर करती हैऔर अगर आपको पर्याप्त नींद नहीं मिलती तो इससे डार्क सर्कल्सपफी आईज़ और एजिंग की समस्या हो सकती है। एक अच्छा स्लीप रूटीन स्किन के लिए बेहद फायदेमंद है।

    स्ट्रेस और अनहेल्दी डाइट

    स्ट्रेस और अनहेल्दी डाइट स्किन को नुकसान पहुंचाने में महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं। जरूरत से ज्यादा स्ट्रेस से कोलेजन का उत्पादन कम हो सकता हैजिससे स्किन की इलास्टिसिटी घटने लगती है। इसके अलावाजंक फूडमीठा और तैलीय खाद्य पदार्थ स्किन की हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं। हेल्दी डाइट और मानसिक शांति रखना त्वचा के लिए फायदेमंद है।

    नाइट केयर रूटीन स्किप करना

    रात के समय स्किन को रिपेयर करने का सबसे अच्छा मौका मिलता है। लेकिन जब महिलाएं दिनभर की थकान के बाद बिना चेहरे को ठीक से साफ किए सो जाती हैंतो स्किन का नेचुरल रीजेनरेशन प्रोसेस प्रभावित होता है। नाइट क्रीम और सीरम का नियमित इस्तेमाल त्वचा के लिए बेहद लाभकारी है। इन सात सामान्य स्किनकेयर गलतियों से बचकर आप अपनी त्वचा को स्वस्थचमकदार और जवां रख सकती हैं। सही प्रोडक्ट्सहाइड्रेशनपर्याप्त नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल स्किन को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तोअगली बार जब आप स्किनकेयर रूटीन अपनाएंगीतो इन बातों का ध्यान रखें और अपनी त्वचा को पूरी तरह से पोषण दें!

  • विशाल रिसर्च में खुलासा: टाइप-2 डायबिटीज़ की दवा बीटा सेल्स पर करती असर, बीमारी बिगाड़ सकती है!

    विशाल रिसर्च में खुलासा: टाइप-2 डायबिटीज़ की दवा बीटा सेल्स पर करती असर, बीमारी बिगाड़ सकती है!

    नई दिल्ली। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए जो दवाएं सालों से दी जा रही हैं, वही बीमारी को धीरे-धीरे और गंभीर बना सकती हैं। स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना की एक नई स्टडी में टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सल्फोनिल्यूरिया कैटेगरी की दवाओं को लेकर चौंकाने वाली चेतावनी दी गई है। रिसर्च के मुताबिक, ये दवाएं शुरुआत में ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं, लेकिन लंबे समय में उल्टा असर डाल सकती हैं।

    डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। खासतौर पर टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिन अग्न्याशय की बीटा कोशिकाएं बनाती हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन हालिया रिसर्च बताती है कि इन्हीं बीटा कोशिकाओं पर कुछ दवाओं का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    क्या कहती है रिसर्च?
    जर्नल Diabetes, Obesity and Metabolism में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, सल्फोनिल्यूरिया दवाएं जैसे ग्लिबेनक्लामाइड बीटा कोशिकाओं को ज्यादा इंसुलिन रिलीज करने के लिए मजबूर करती हैं। स्टडी के लीड प्रोफेसर एडुआर्ड मोंटान्या ने बताया कि ये दवाएं कई दशकों से टाइप 2 डायबिटीज में दी जा रही हैं और कई देशों में जेनरिक रूप में आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से बीटा कोशिकाओं की सेहत और उनकी पहचान पर बुरा असर पड़ सकता है।

    बीटा कोशिकाएं क्यों हो रही हैं कमजोर?
    रिसर्च में सामने आया कि ये कोशिकाएं मरती नहीं हैं, बल्कि अपनी पहचान खोने लगती हैं। लंबे समय तक ग्लिबेनक्लामाइड लेने से उन जीन की एक्टिविटी कम हो जाती है जो इंसुलिन बनाने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा, दवाएं कोशिकाओं के अंदर मौजूद एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम में तनाव पैदा करती हैं, जिससे बीटा कोशिकाएं सही तरह से काम नहीं कर पातीं।

    दवा क्यों हो जाती है बेअसर?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मरीजों में देखा गया है कि जो दवाएं शुरुआत में असरदार होती हैं, वही कुछ साल बाद कम प्रभावी हो जाती हैं। इसकी वजह बीटा कोशिकाओं की पहचान का धीरे-धीरे खत्म होना है। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल कमजोर पड़ने लगता है और शुगर लेवल फिर बढ़ने लगता है। अच्छी बात यह है कि यह स्थिति स्थायी नहीं होती और सही इलाज से कोशिकाओं की क्षमता दोबारा लौट सकती है।

    मरीजों के लिए क्या है चेतावनी?
    डॉक्टरों का कहना है कि मरीज बिना सलाह के दवा बंद न करें। हालांकि यह स्टडी बताती है कि लंबे समय तक सल्फोनिल्यूरिया दवाओं के इस्तेमाल से समय के साथ डोज बढ़ाने या नई दवाएं जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ती है। इसलिए डायबिटीज के इलाज में नियमित जांच और सही मेडिकल गाइडेंस बेहद जरूरी है।

  • सर्दियों में छाती में दर्द की समस्या आयुर्वेदिक उपायों से पाएं राहत

    सर्दियों में छाती में दर्द की समस्या आयुर्वेदिक उपायों से पाएं राहत


    नई दिल्ली । सर्दियों में वातावरण में बदलाव होने पर लोग अक्सर छाती में हल्का दर्दभारीपन या जकड़न की शिकायत करते हैं। यह केवल दिल से जुड़ी बीमारियों का संकेत नहीं होताबल्कि सर्दियों में होने वाली ठंडक और जकड़न का परिणाम है। ठंडी हवाओं से फेफड़ों में संकुचन बढ़ता हैजिससे छाती में कफ की अधिकता हो जाती है और सांस लेने में परेशानी होती है। इस समस्या से निपटने के लिए आयुर्वेद में कुछ प्रभावी उपाय बताए गए हैं।

    सीने में जकड़न का कारण

    सर्दियों में ठंडी हवा और वातावरण के बदलाव से शरीर की नसों में संकुचन आता है। यही वजह है कि सर्दी में छाती में भारीपन और दर्द की समस्या होती है। जब फेफड़ों में संकुचन बढ़ता हैतो कफ का निर्माण अधिक होने लगता हैजो सांस लेने और बोलने में कठिनाई उत्पन्न करता है। यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा होती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

    आयुर्वेदिक उपाय
    आयुर्वेद में इस समस्या से राहत पाने के लिए कई सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं।
    गुनगुने पानी में शहद
    गुनगुने पानी में शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से कफ ढीला होता है और गला नरम रहता है। यह उपाय छाती में जकड़न को कम करने में सहायक होता है।

    छाती की मालिश

    सरसों के तेल में लहसुनअजवाइन और लौंग को पका कर इस मिश्रण से छाती और कंधे की हल्की मालिश करें। रात को सोने से पहले यह मालिश करने से शरीर गर्म रहता है और दर्द में आराम मिलता है।

    भाप लेना

    दिन में दो बार भाप लें। भाप को मुंह से अंदर खींचने से कफ ढीला होता है और फेफड़ों की मांसपेशियों को आराम मिलता है। यह छाती की जकड़न से राहत दिलाने में मदद करता है।

    चूर्ण का सेवन

    आयुर्वेदिक चूर्ण जैसे सितोपलादि चूर्णतालीसागी चूर्ण या त्रिकुट चूर्ण का सेवन करने से शरीर गर्म रहता है और पाचन शक्ति मजबूत होती है। ये चूर्ण कफ को कम करने में सहायक होते हैं। सर्दी में छाती में जकड़न और दर्द की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिएक्योंकि यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आयुर्वेद के प्राकृतिक उपायों को अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। अगर समस्या बढ़ जाए तो डॉक्टर से संपर्क करना भी जरूरी है।

  • सर्दियों में कर रहे हैं नेपाल घूमने की प्लानिंग? ये 5 जगहें करे लें नोट नजारें देख वहीं बस जाने का करेगा मन

    सर्दियों में कर रहे हैं नेपाल घूमने की प्लानिंग? ये 5 जगहें करे लें नोट नजारें देख वहीं बस जाने का करेगा मन


    नई दिल्ली ।हर किसी की चाह होती है कि वह सर्दियों में सफेद चादर से ढकी वादियों में घूमने जाए. अगर आप भी ऐसी ही कुछ प्लानिंग कर रहे हैं तो नेपाल एक बेहतरीन और किफायती ऑप्शन हो सकता है. बता दें कि सर्दियों में नेपाल का नजारा बिल्कुल बदल जाता है यहां का साफ आसमान और बर्फ से ढके पहाड़ आपकी आंखों को सुकून देंगे और मन मोह लेंगे. इसी कड़ी में आज हम आपके लिए नेपाल की 5 खूबसूरत जगहों की लिस्ट लेकर आए हैं जहां आप सर्दियों में घूम सकते हैं और प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का आनंद उठा सकते हैं.  किस हिल स्टेशन को भारत का इटली कहा जाता है? जानिए सस्ते में कैसे घूमकर आएं ये खूबसूरत जगह
    1. पोखरा नेपाल
    अगर आप नेपाल घूमने जा रहे हैं तो पोखरा भी जरूर घूमकर आएं. यहां अन्नपूर्णा पर्वतों की श्रृंखलाएं की खूबसूरती आपका दिल ही जीत लेगी. इसके अलावा सर्दियों में यहां का साफ आसमान पूरे नजारे में चार-चांद लगा देते हैं. यहां आप बस और फ्लाइट दोनों से पहुंच सकते हैं.

    2. चितवन नेपाल

    आपको अगर जंगल सफारी का मजा लेना है तो नेपाल में स्थित चितवन नेशनल पार्क जरूर जाएं. यह पार्क अपनी हरियाली शांत नदियों और वन्यजीवों के लिए फेमस है. यहां आपको बाघ गैंडा हाथी हिरण जैसे जानवर देखने को मिल सकते हैं. सर्दियों में यहां का मौसम बेहद सुखद होता है जो सफारी को और भी रोमांचक बना देता है.

    3. पून हिल्स नेपाल

    अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हैं तो नेपाल में पून हिल्स जाना बिल्कुल न भूलें. यह जगह ट्रेकिंग लवर्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है जो आपको मंत्रमुग्ध कर देगा. पून हिल्स का ट्रेक आसान माना जाता है इसलिए शुरुआती ट्रेकर्स के लिए भी यह परफेक्ट है.

  • भारत का इटली’ कहलाती है ये खूबसूरत जगह, नज़ारे देख लौटने का मन नहीं करेगा

    भारत का इटली’ कहलाती है ये खूबसूरत जगह, नज़ारे देख लौटने का मन नहीं करेगा


    भारत में कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं, जो विदेशी लोकेशन्स को कड़ी टक्कर देती हैं। इन्हीं में से एक है महाराष्ट्र का आकर्षक हिल स्टेशन लवासा, जिसे लोग प्यार से “भारत का इटली” कहते हैं। रंग-बिरंगी इमारतें, पहाड़ियों के बीच बसा सुनियोजित शहर, झील के किनारे बने कैफे और साफ-सुथरी सड़कें लवासा को किसी यूरोपियन टाउन जैसा लुक देती हैं। यहां पहुंचते ही ऐसा महसूस होता है मानो आप भारत नहीं, बल्कि इटली की किसी शांत और खूबसूरत जगह पर आ गए हों।
    सह्याद्रि की पहाड़ियों में बसी प्लान्ड हिल सिटी
    लवासा महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक प्लान्ड हिल सिटी है, जो सह्याद्रि की पहाड़ियों के बीच बसी हुई है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत झील इसे बेहद खास बनाते हैं। लवासा की सबसे बड़ी खासियत इसकी इटालियन स्टाइल आर्किटेक्चर है। खुले चौक, वॉटरफ्रंट प्रोमेनेड, रंगीन इमारतें और झील के किनारे बने कैफे इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। सुबह झील के किनारे टहलना और शाम को सनसेट देखना यहां का सबसे सुकून भरा अनुभव माना जाता है।
    घूमने के साथ एडवेंचर का भी भरपूर मजा
    लवासा सिर्फ देखने में ही खूबसूरत नहीं है, बल्कि यहां करने के लिए भी बहुत कुछ है। यहां बोटिंग, कयाकिंग, साइकलिंग और ट्रेकिंग जैसी कई एक्टिविटीज का आनंद लिया जा सकता है। एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए जिप लाइनिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। वहीं, शांति पसंद करने वाले लोग झील किनारे किसी कैफे में बैठकर कॉफी या इटालियन फूड का लुत्फ उठा सकते हैं। यही वजह है कि लवासा कपल्स, फैमिली ट्रैवलर्स और दोस्तों के ग्रुप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन माना जाता है।
    कब जाएं लवासा, जानिए सही समय
    लवासा घूमने के लिए मानसून और सर्दियों का मौसम सबसे बेहतर माना जाता है। बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और झील का नजारा और भी मनमोहक हो जाता है, हालांकि इस दौरान फिसलन से सावधान रहना जरूरी होता है। वहीं सर्दियों में मौसम ठंडा और सुहावना रहता है, जिससे घूमना काफी आरामदायक हो जाता है।
    कम बजट में प्लान करें शानदार ट्रिप
    लवासा की सबसे अच्छी बात यह है कि यहां घूमने का खर्च ज्यादा नहीं आता। पुणे से लवासा की दूरी करीब 60 किलोमीटर है और मुंबई से भी सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। पेट्रोल और टोल मिलाकर आने-जाने का खर्च लगभग 2,000 से 3,000 रुपये तक आ सकता है। यहां होटल और रिसॉर्ट्स बजट के अनुसार उपलब्ध हैं। सामान्य होटल में एक रात का किराया करीब 2,500 से 4,000 रुपये तक होता है, जबकि लग्जरी रिसॉर्ट्स में यह खर्च 6,000 रुपये या उससे अधिक हो सकता है।
    कम खर्च में विदेश जैसा अनुभव
    अगर आप कम बजट में विदेश जैसा ट्रैवल अनुभव लेना चाहते हैं, तो लवासा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। प्राकृतिक खूबसूरती, शानदार आर्किटेक्चर और सुकून भरा माहौल इसे वीकेंड ट्रिप के लिए परफेक्ट बनाता है।