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  • समर स्किन केयर: जड़ी-बूटियों से चमकता चेहरा और दाग-धब्बों से राहत

    समर स्किन केयर: जड़ी-बूटियों से चमकता चेहरा और दाग-धब्बों से राहत


    नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरा बेजान नजर आने लगता है। ऐसे में त्वचा की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां बताई गई हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप बिना किसी केमिकल के अपने चेहरे को निखार सकते हैं और दाग-धब्बों से छुटकारा पा सकते हैं।

    नीम: पिंपल्स और एक्ने का दुश्मन

    आयुर्वेद में नीम को बेहद गुणकारी माना जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। गर्मियों में अगर पिंपल्स या एक्ने की समस्या हो रही है, तो नीम के पत्तों को पीसकर मुल्तानी मिट्टी के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में लगाया जा सकता है। इससे त्वचा साफ होती है और निखार बढ़ता है।

    मंजिष्ठा: स्किन टोन को बनाए संतुलित

    मंजिष्ठा को आयुर्वेद में रक्त शुद्ध करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। यह त्वचा की रंगत को सुधारने में मदद करती है। मंजिष्ठा का सेवन करने के साथ-साथ इसका फेस पैक बनाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे स्किन टोन में निखार आता है।

    हल्दी: दाग-धब्बों से छुटकारा

    हर घर में मौजूद हल्दी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं। मुल्तानी मिट्टी और चंदन के साथ चुटकी भर हल्दी मिलाकर फेस पैक लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और ग्लो बढ़ता है।

    चंदन: ठंडक और पोषण का खजाना

    गर्मियों में चंदन का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद होता है। इसमें शीतलता के गुण होते हैं, जो त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसे पोषण भी देते हैं। यह धूप के कारण होने वाले नुकसान को कम करता है और त्वचा को तरोताजा बनाए रखता है।

    मुलेठी: टैनिंग और डार्क स्पॉट से राहत

    मुलेठी का इस्तेमाल सिर्फ खांसी-जुकाम के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा के लिए भी किया जाता है।
    इसके लेप से डार्क स्पॉट और टैनिंग कम होती है, जिससे चेहरा साफ और चमकदार नजर आता है।

    नियमित इस्तेमाल से मिलेगा बेहतर रिजल्ट

    इन सभी जड़ी-बूटियों का नियमित और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा से जुड़ी समस्याओं में काफी हद तक राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी भी नई चीज को इस्तेमाल करने से पहले स्किन टेस्ट जरूर करें, ताकि किसी तरह की एलर्जी से बचा जा सके।

    गर्मियों में नीम, मंजिष्ठा, हल्दी, चंदन और मुलेठी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां त्वचा को निखारने, दाग-धब्बे कम करने और नैचुरल ग्लो पाने में बेहद असरदार साबित होती हैं।

  • सुबह खाली पेट ये 5 मिनट का योग, पाचन से जुड़ी परेशानियों को देगा अलविदा

    सुबह खाली पेट ये 5 मिनट का योग, पाचन से जुड़ी परेशानियों को देगा अलविदा


    नई दिल्ली । आज की तेज़-तर्रार लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान ने पेट की समस्याओं को आम बना दिया है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम “Stand with Science” के अनुसार पवनमुक्तासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी योगासन माना जा रहा है।

    संस्कृत में पवन का अर्थ है वायु और मुक्त का अर्थ है छोड़ना। इस आसन का उद्देश्य शरीर में फंसी हानिकारक गैस और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना है। जब आप घुटनों को धीरे-धीरे छाती की ओर दबाते हैं, तो यह पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालता है जिससे पाचन अग्नि तेज होती है और भोजन का अवशोषण बेहतर होता है।

    पवनमुक्तासन के लाभ

    गैस, कब्ज और ब्लोटिंग से राहत – यह वात विकारों को कम करता है, पुरानी कब्ज और एसिडिटी को दूर करता है और आंतों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।

    वेट लॉस में मदद – पेट, जांघों और कमर के आसपास की जिद्दी चर्बी कम करने में सहायक।

    पेल्विक और प्रजनन अंगों के लिए लाभकारी – महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता कम करने में मदद करता है।

    पीठ और रीढ़ की हड्डी के लिए लाभकारी – लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए रीढ़ की लचीलापन बढ़ाता है और निचले हिस्से के दर्द को कम करता है।

    कैसे करें पवनमुक्तासन

    योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।

    गहरी सांस लेते हुए दाएं घुटने को मोड़कर छाती के पास लाएं।

    हाथों की उंगलियों को जोड़कर घुटने को पकड़ें।

    सांस छोड़ते हुए सिर उठाकर नाक को घुटने से छूने की कोशिश करें।

    इसी प्रक्रिया को बाएं पैर और फिर दोनों पैरों के साथ दोहराएं।

    इसे सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है।

    सावधानियाँ

    उच्च रक्तचाप, हर्निया, स्लिप डिस्क या हाल ही में पेट की सर्जरी कराए लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

    गर्भवती महिलाएं इसे न करें।

    केवल 5 मिनट का यह योगासन रोजाना करने से न केवल पाचन सुधारता है बल्कि पेट, कमर और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाकर महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करता है।

  • वजन घटाना हो या हार्मोन बैलेंस, सुबह खाली पेट पिएं ये 5 सुपर ड्रिंक्स

    वजन घटाना हो या हार्मोन बैलेंस, सुबह खाली पेट पिएं ये 5 सुपर ड्रिंक्स


    नई दिल्ली । महिलाओं के लिए दिन की शुरुआत सही खानपान से करना बेहद जरूरी होता है क्योंकि सुबह का पहला आहार शरीर के मेटाबॉलिज्म और पूरे दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है खासतौर पर आयरन की कमी, पीसीओएस और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के लिए कुछ खास ड्रिंक्स बहुत लाभकारी साबित हो सकती हैं

    सबसे पहले चिया सीड्स और नींबू पानी की बात करें तो यह ड्रिंक ओमेगा 3 फैटी एसिड और फाइबर से भरपूर होती है एक गिलास पानी में चिया सीड्स भिगोकर उसमें नींबू मिलाकर पीने से वजन घटाने में मदद मिलती है और त्वचा में भी प्राकृतिक निखार आता है

    दूसरा है मेथी दाना पानी जिसे रातभर भिगोकर सुबह खाली पेट पीना चाहिए यह ड्रिंक इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने और पीरियड्स की अनियमितता को सुधारने में काफी प्रभावी मानी जाती है
    एलोवेरा जूस भी महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होता है इसे पानी में मिलाकर पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर की सूजन कम होती है साथ ही यह जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है

    धनिया पानी एक और उपयोगी ड्रिंक है जिसे उबालकर पीया जाता है यह शरीर में पानी रुकने की समस्या को कम करता है और थायराइड के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है इसके अलावा यह यूरिन इंफेक्शन के खतरे को भी कम करता है अंत में दालचीनी और शहद की चाय का सेवन करने से मीठा खाने की इच्छा कम होती है और शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है यह ड्रिंक वजन नियंत्रण के लिए बहुत अच्छा विकल्प माना जाता है

    इन सभी ड्रिंक्स को नियमित रूप से सुबह खाली पेट लेने से शरीर डिटॉक्स होता है हार्मोन संतुलित रहते हैं और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है हालांकि किसी भी नई चीज को दिनचर्या में शामिल करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना भी जरूरी है इस तरह छोटी सी सुबह की आदत महिलाओं के लिए बड़ी हेल्थ बेनिफिट साबित हो सकती है और उन्हें लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रख सकती है

  • अदरक और सेंधा नमक से बने तेल से कान के दर्द में राहत, जानें इस्तेमाल से पहले की सावधानी

    अदरक और सेंधा नमक से बने तेल से कान के दर्द में राहत, जानें इस्तेमाल से पहले की सावधानी


    नई दिल्ली। आज के समय में कान का दर्द आम समस्या बन गई है। लंबे समय तक हेडफोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल कानों को नुकसान पहुंचा सकता है। सुनने के लिए इस्तेमाल होने वाले ये उपकरण केवल सुनने की क्षमता को प्रभावित नहीं करते, बल्कि कानों में जकड़न, सूखापन और दर्द भी बढ़ाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, कान दर्द का मुख्य कारण वात दोष का असंतुलन होता है। हल्के और शुरुआती दर्द में राहत पाने के लिए अदरक और सेंधा नमक से बना तेल प्रभावी माना जाता है।

    तेल बनाने की विधि
    सामग्री:
    अदरक का रस – 1 छोटी चम्मच
    सेंधा नमक – 1 चुटकी
    नींबू – 2 बूंद
    सरसों का तेल – 2 बड़े चम्मच
    विधि:
    सभी सामग्री को सरसों के तेल में मिलाकर हल्का गर्म करें।
    अच्छे से पक जाने पर तेल को छानकर अलग कर लें।
    ठंडा होने पर प्रभावित कान में 2-3 बूंद डालें।

    इस तेल में अदरक को दर्द निवारक और वात शांत करने वाला माना जाता है। सेंधा नमक भी दर्द को कम करने और वात को संतुलित करने में मदद करता है।

    इस्तेमाल करने से पहले सावधानियां
    कान को अच्छी तरह से साफ कर लें। गंदगी होने पर संक्रमण और दर्द बढ़ सकता है।
    यदि कान में घाव या बहाव है, तो इस तेल का इस्तेमाल न करें। ऐसे मामलों में चिकित्सक की सलाह लें।
    नहाते समय ध्यान दें कि साबुन या पानी कान में न जाए, क्योंकि इससे शुष्कता बढ़ती है और संक्रमण का खतरा रहता है। हर दो दिन में कान की सफाई करें, ताकि तेल और गंदगी का मिश्रण संक्रमण न पैदा करे।

    आयुर्वेदिक लाभ
    अदरक की गर्म तासीर और वात शांत करने वाले गुण दर्द को कम करते हैं।
    सेंधा नमक सूजन और जकड़न को दूर करने में मदद करता है।
    नियमित इस्तेमाल से कान में हल्कापन और आराम मिलता है।

    अदरक और सेंधा नमक से बना यह तेल हल्के कान दर्द और जकड़न में राहत देता है। इसे इस्तेमाल करने से पहले कान की सफाई और किसी घाव की स्थिति जांचना जरूरी है। नहाते समय पानी के कान में जाने से बचें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक से सलाह लें। यह प्राकृतिक और सरल उपाय वात दोष को संतुलित करके कान दर्द कम करने में मदद करता है।

  • Travel Tips: अप्रैल में केरल घूमने का है अपना अलग मजा, जानिए इन जगहों के बारे में

    Travel Tips: अप्रैल में केरल घूमने का है अपना अलग मजा, जानिए इन जगहों के बारे में


    नई दिल्ली। अप्रैल का महीना शुरुआती गर्मी लेकर आता है जिसके कारण लोग पहले ही कहीं-कहीं घूमने का मन बना लेते हैं। अप्रैल के महीने में लोग बाहर निकल जाते हैं। क्योंकि इस समय गर्मी उतनी ज्यादा नहीं होती है जितनी आने वाले और महीना में आ जाती है। अप्रैल के महीने में केरल घूमने काफी अच्छा माना जाता है क्योंकि वहां काफी हरियाली देखने को मिलती है। केरल में आपका ही जगह पर बड़े ही आसानी से घूम सकते हैं तो चलिए उनके बारे में बताते हैं।

    केरल घूमने के लिए है खास
    अप्रैल का मौसम बहुत खास होता है क्योंकि गर्मी काम होती है। ऐसे में आप केरल जाकर वहां पर कई सारी जगह का आनंद उठा सकते हैं।अगर आप भी अपने परिवार और दोस्तों के साथ केरला घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप इन सभी जगह को नोट कर लें।

    नेचर लवर्स के लिए है बेस्ट
    केरल के जंगल और पहाड़ हरे रंग की चादर की तरह नजर आते हैं, जो फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं हैं।केरल का प्लान बनाते समय मुन्नार को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें।ये जगह नेचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है।

    अलेप्पी भी है परफेक्ट
    वेनिस नाम से मशहूर अलेप्पी ऐसी शानदार जगह है, जहां आकर आप केरल के सबसे खूबसूरत नजारे का दीदार कर सकते हैं।यहां आने के बाद आपका मन बिल्कुल भी नहीं करेगा कि आप वापस जाएं। यहां की सुंदरता आपका मन को मोह लेगा और फोटोग्राफी के लिए भी यह जगह काफी फेमस है। अलेप्पी वैसे तो हनीमून कपल्स के बीच ज्यादा पॉपुलर है, लेकिन आप यहां फैमिली, दोस्तों के साथ भी जाने की प्लानिंग कर सकते हैं।

    केरल का वायनाड
    केरल में वायनाड भी घूमने वाली अच्छी जगह है। जो अपने झरनों के लिए खासतौर से मशहूर है। इस समय यहां घूमने के लिए यहां पर काफी अच्छी-अच्छी जगह है मिल जाएगी। यहां आपको काफी कुछ देखने को मिलेगा जिसे देखने के बाद आपका मन यहां से लौटने का बिल्कुल भी नहीं करेगा।

  • DIY पैर की देखभाल: घर बैठे करें Pedicure और दें पैरों को नई जान

    DIY पैर की देखभाल: घर बैठे करें Pedicure और दें पैरों को नई जान


    नई दिल्ली। आज के समय में पार्लर जाना सबसे बड़ा खर्च समझ में आता है। पार्लर जाने का मतलब आप घर से बाहर निकलो फिर धूप हो या ठंड। फिर पार्लर में बैठकर काफी टाइम बिताओ और ऊपर से पार्लर के इतने सारे खर्चे होते हैं कि आपको काफी ज्यादा सेविंग करना पड़ता है तब जाकर वह सारी चीजें हो पाती है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने पैरों को खूबसूरत बनाना चाहती हैं और टैनिंग को दूर करना चाहती हैं। तो किसी भी वीकेंड पर आप घर पर पार्लर जैसा पेडिक्योर कर सकती हैं।

    बस करें ये काम
    महिलाएं अपने पैरों को खूबसूरत बनाने के लिए पार्लर में जाकर पेडिक्योर करवाती हैं। इसका जेब खर्च पर भी असर दिखने लगता है। अगर आप भी घर पर पेडिक्योर करने की सोच रही हैं। तो चलिए इसके बारे में सारी जानकारी आपको देते हैं।

    इस प्रकार पैरों को बनाए खूबसूरत
    घर पर पेडिक्योर करने के लिए एक टब में हल्का गर्म पानी लें।जब तक पानी गर्म हो, तब तक अगर आपके पैरों में नेलपेंट लगी है, तो इसको रिमूव कर दें।फिर हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा, शैंपू, आधा चम्मच नमक और थोड़ा सा नींबू का रस मिक्स करें।इसमें एप्पल साइडर विनेगर भी मिला लें।फिर पैरों को 30 मिनट तक पानी में रखें।अब हल्के हाथों से पैरों की मसाज करें।स्क्रब का इस्तेमाल करके पैरों की मसाज कर सकती हैं। मसाज के दौरान नाखून, एड़ी और तलवों की सफाई करें।अच्छे से सफाई के बाद अपने पैरों को दूसरे टब में रखें औऱ साफ पानी से पैरों को धो लें।

    पैरों को साफ पानी से धो लें और इनको साफ कपड़े से पोंछकर सुखा लें।आप चाहें तो किसी खास तेल की मदद से पैरों की मसाज भी कर सकती हैं।इसके बाद नाखूनों को शेप में काटकर नेलपेंट लगाएं।नेलपेंट लगने के बाद आप पैरों पर अच्छी फुट क्रीम या लोशन लगा सकती हैं।

  • भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी

    भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी


    नई दिल्ली। देशभर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई जगहों पर पारा 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है। ऐसे में चिलचिलाती धूप, उमस और लू से बचाव के लिए सही कपड़ों का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस मौसम में अगर आप राहत चाहते हैं, तो सूती कपड़े यानी Cotton Fabric सबसे बेहतर विकल्प हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि पूरे दिन आपको आरामदायक महसूस कराते हैं।

    क्यों खास है सूती कपड़ा? जानिए इसके फायदे

    सूती कपड़ा पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें किसी तरह के सिंथेटिक फाइबर नहीं होते। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘सांस लेने योग्य’ यानी ब्रीदेबल फैब्रिक होता है। इससे हवा आसानी से आर-पार हो सकती है, जिससे त्वचा ठंडी बनी रहती है। साथ ही, यह पसीने को जल्दी सोख लेता है और उसे हवा के संपर्क में लाकर जल्दी सुखा देता है। इससे शरीर में चिपचिपाहट नहीं होती और आप तरोताजा महसूस करते हैं।

    इसके विपरीत, Polyester और नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़े पसीना सोख नहीं पाते। इससे पसीना त्वचा पर जमा रहता है, जिससे घमौरियां, खुजली और बदबू जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्मियों में प्राकृतिक फैब्रिक का चुनाव ही समझदारी है।

    आराम के साथ स्टाइल भी, हर मौके के लिए परफेक्ट

    सूती कपड़े न सिर्फ आरामदायक होते हैं, बल्कि स्टाइलिश भी होते हैं। आजकल कॉटन में कई तरह के डिजाइन जैसे स्ट्राइप्स, चेक्स और सॉलिड पैटर्न मिलते हैं, जिन्हें आप कैजुअल और फॉर्मल दोनों लुक में आसानी से कैरी कर सकते हैं। यह फैब्रिक हल्का, मुलायम और त्वचा के अनुकूल होता है, जिससे दिनभर पहनने पर भी कोई परेशानी नहीं होती।

    रंगों का चुनाव भी है उतना ही जरूरी

    गर्मी में सिर्फ कपड़ा ही नहीं, बल्कि उसके रंग का चुनाव भी अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम, हल्का गुलाबी, आसमानी और पीला सूरज की किरणों को परावर्तित (रिफ्लेक्ट) करते हैं, जिससे शरीर कम गर्म होता है। वहीं, काला, नेवी ब्लू या गहरा लाल जैसे रंग गर्मी को ज्यादा सोखते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में हल्के रंगों के सूती कपड़े पहनना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।

    मन और शरीर दोनों को दे सुकून

    सही कपड़े न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी सुकून देते हैं। जब शरीर ठंडा और सूखा रहता है, तो चिड़चिड़ापन कम होता है और मन शांत रहता है। यही कारण है कि पुराने समय से दादी-नानी गर्मियों में सूती कपड़े पहनने की सलाह देती आई हैं।

    गर्मी से बचाव का आसान फॉर्मूला

    अगर आप भीषण गर्मी में खुद को कूल और कंफर्टेबल रखना चाहते हैं, तो सूती कपड़े और हल्के रंगों का चुनाव जरूर करें। यह न केवल आपको गर्मी से राहत देंगे, बल्कि आपकी सेहत और स्टाइल दोनों को बेहतर बनाएंगे।

  • ‘ॐ’ के उच्चारण का असर: आध्यात्म के साथ जानें इसके पीछे छिपा साइंस

    ‘ॐ’ के उच्चारण का असर: आध्यात्म के साथ जानें इसके पीछे छिपा साइंस


    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ‘ओम’ को केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि सृष्टि की मूल ऊर्जा माना गया है। हर मंत्र और ध्यान की शुरुआत इसी से होती है, लेकिन अब यह केवल आध्यात्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा। आधुनिक विज्ञान भी मानने लगा है कि ‘ओम’ का उच्चारण शरीर और मन दोनों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ध्वनि कंपन (वाइब्रेशन) शरीर के सातों चक्रों को सक्रिय करने के साथ-साथ मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी जागृत करता है, जिससे मानसिक शांति और संतुलन बढ़ता है।

    ‘ओम’ की ध्वनि में छिपा है कंपन का विज्ञान

    ‘ओम’ दरअसल ‘अ+उ+म’ का संयोग है, जिसे Om (mantra) या प्रणव भी कहा जाता है। जब इसका लंबा और गहरा उच्चारण किया जाता है, तो शरीर में सूक्ष्म कंपन उत्पन्न होते हैं। ये कंपन सीधे Nervous System पर असर डालते हैं। इससे दिमाग शांत होता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यही कारण है कि ध्यान और योग में ‘ओम’ को विशेष महत्व दिया गया है।

    सात चक्रों पर पड़ता है गहरा प्रभाव

    मानव शरीर में सात प्रमुख ऊर्जा केंद्र यानी चक्र माने जाते हैं—मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार। ‘ओम’ के उच्चारण से उत्पन्न कंपन इन चक्रों को सक्रिय करने में मदद करते हैं। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है और व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से स्थिर महसूस करता है। नियमित अभ्यास से यह संतुलन लंबे समय तक बना रहता है।

    वैज्ञानिक शोध भी करते हैं पुष्टि

    National Library of Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ‘ओम’ का जाप ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस शोध में पाया गया कि सिर्फ 5 मिनट के जाप से ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार हुआ और तनाव के स्तर में कमी आई। यह तंत्र शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे दिल की धड़कन और सांस को नियंत्रित करता है, इसलिए इसका संतुलन बेहद जरूरी है।

    वेगस नर्व को करता है मजबूत

    विशेषज्ञों के अनुसार, ‘ओम’ का उच्चारण Vagus Nerve को सक्रिय करता है। यह नर्व दिल, फेफड़ों और पाचन तंत्र को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब ‘ओम’ का जाप गहरी सांस के साथ किया जाता है, तो यह नर्व उत्तेजित होती है, जिससे तनाव कम होता है, सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और शरीर में शांति का अनुभव होता है।

    मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त में सुधार

    ‘ओम’ की ध्वनि न केवल चक्रों को सक्रिय करती है, बल्कि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी उत्तेजित करती है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। नियमित अभ्यास से चिंता, तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं भी कम हो सकती हैं। यही वजह है कि आजकल मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए भी इसे एक आसान और प्रभावी तकनीक माना जा रहा है।

    कैसे करें सही तरीके से ‘ओम’ का जाप?

    ‘ओम’ का सही लाभ पाने के लिए इसे सुबह खाली पेट या ध्यान के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके लिए आराम से बैठकर गहरी सांस लें और धीरे-धीरे लंबा ‘ओम’ उच्चारित करें। फिर सांस को धीरे-धीरे छोड़ें। ध्यान रखें कि उच्चारण जितना लंबा और गहरा होगा, उतना ही अधिक कंपन पैदा होगा और लाभ भी बढ़ेगा।

    आध्यात्म और विज्ञान का अनोखा संगम

    ‘ओम’ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी शरीर और मन को संतुलित करने का प्रभावी माध्यम है। नियमित अभ्यास से न केवल चक्र सक्रिय होते हैं, बल्कि न्यूरॉन्स भी जागृत होते हैं, जिससे जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मकता आती है।

  • वात प्रकृति में चावल खाना सही या गलत? एक्सपर्ट्स की मानें तो जान लें ये जरूरी बातें

    वात प्रकृति में चावल खाना सही या गलत? एक्सपर्ट्स की मानें तो जान लें ये जरूरी बातें


    नई दिल्ली। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति का शरीर उसकी प्रकृति यानी वात, पित्त और कफ पर आधारित होता है। अगर आहार और जीवनशैली इसी प्रकृति के अनुसार अपनाई जाए, तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। आज के समय में अनियमित खान-पान और लाइफस्टाइल के कारण खासकर Vata Dosha असंतुलन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वात प्रकृति वाले लोगों को चावल खाना चाहिए या इससे परहेज करना चाहिए?

    वात प्रकृति और चावल का संबंध समझें

    आयुर्वेद बताता है कि वात दोष का स्वभाव ठंडा, हल्का और रूखा होता है। वहीं चावल का स्वाद मीठा, प्रकृति ठंडी और पचने में हल्का होता है। ऐसे में सही तरीके से चावल का सेवन किया जाए तो यह वात को बढ़ाने की बजाय संतुलित करने में मदद कर सकता है। यानी चावल पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, बल्कि सही नियमों के साथ यह वात प्रकृति वालों के लिए फायदेमंद भी बन सकता है।

    कैसे करें चावल का सही सेवन?

    वात प्रकृति वाले लोगों को चावल खाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, हमेशा पुराना यानी कम से कम एक साल पुराना चावल ही खाएं। आयुर्वेद के अनुसार पुराना चावल ज्यादा सुपाच्य और गुणकारी होता है। इसके अलावा चावल हमेशा ताजा और गर्म ही खाना चाहिए। फ्रिज में रखा ठंडा या बासी चावल वात को बढ़ा सकता है और गैस, अपच जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

    घी के साथ चावल बढ़ेगा फायदा

    चावल के साथ घी का सेवन करना बेहद जरूरी माना गया है। घी में चिकनाई होती है, जो शरीर के रूखेपन को कम करती है और वात दोष को शांत करने में मदद करती है। खासतौर पर Ghee के साथ चावल खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है।

    दोपहर में ही करें सेवन, रात में करें परहेज

    आयुर्वेद के मुताबिक चावल खाने का सबसे सही समय दोपहर का होता है, जब पाचन अग्नि सबसे मजबूत होती है। इस समय चावल आसानी से पच जाता है और शरीर को ऊर्जा देता है। वहीं रात के समय चावल खाने से कफ और वात दोनों असंतुलित हो सकते हैं, जिससे गैस, भारीपन और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

    इन चीजों के साथ खाने से मिलेगा ज्यादा लाभ

    वात प्रकृति वाले लोगों को चावल के साथ दही खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह वात को बढ़ा सकता है। इसके बजाय चावल को मूंग दाल और घी के साथ खाना बेहतर विकल्प है। यह संयोजन पाचन को आसान बनाता है और शरीर में संतुलन बनाए रखता है।

    सही तरीके से खाएं, तभी मिलेगा लाभ

    कुल मिलाकर, चावल वात प्रकृति वालों के लिए न तो पूरी तरह नुकसानदायक है और न ही हमेशा फायदेमंद। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे, कब और किसके साथ खाते हैं। सही नियमों का पालन कर चावल को अपनी डाइट में शामिल किया जाए तो यह सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है।

  • अनार के छिलके के चमत्कारी फायदे! दस्त से लेकर कब्ज तक देगा राहत

    अनार के छिलके के चमत्कारी फायदे! दस्त से लेकर कब्ज तक देगा राहत


    नई दिल्ली। अनार एक ऐसा फल है जिसे सेहत का खजाना कहा जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका छिलका भी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में अनार को ‘दाडिम’ कहा गया है और इसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने वाला माना जाता है। आधुनिक समय में भले ही अनार सालभर उपलब्ध हो, लेकिन इसके पारंपरिक उपयोग आज भी उतने ही प्रभावी हैं। यह न केवल शरीर में रक्त बढ़ाता है, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत कर शरीर को अंदर से ऊर्जा भी प्रदान करता है। खास बात यह है कि अनार का छिलका, जिसे अक्सर फेंक दिया जाता है, कई बीमारियों में घरेलू उपचार के रूप में बेहद कारगर साबित हो सकता है।

    त्वचा समस्याओं में असरदार, मुहांसों से दिलाए राहत

    अगर आप मुहांसे, दाग-धब्बों या एक्ने से परेशान हैं, तो अनार के छिलके का उपयोग एक नेचुरल फेसपैक के रूप में किया जा सकता है। इसके लिए सूखे छिलकों का चूर्ण बनाकर उसमें गुलाबजल मिलाएं और पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को हफ्ते में दो बार चेहरे पर लगाने से त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया कम होते हैं और स्किन साफ व निखरी नजर आती है। यह उपाय केमिकल प्रोडक्ट्स के मुकाबले सुरक्षित और किफायती भी है।

    अतिसार और पाचन समस्याओं में रामबाण

    गर्मियों में अक्सर खानपान की गड़बड़ी से अतिसार (डायरिया) की समस्या हो जाती है। ऐसे में अनार के छिलके का पाउडर बेहद लाभकारी माना गया है। इसे छाछ में मिलाकर थोड़ा जीरा डालकर सेवन करने से आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया कम होते हैं और सूजन से राहत मिलती है। यही नहीं, यह मिश्रण पाचन शक्ति को भी बेहतर बनाता है, जिससे बार-बार होने वाली पेट की समस्याओं से बचाव होता है।

    कब्ज और बवासीर में भी फायदेमंद

    अनार का छिलका सिर्फ अतिसार ही नहीं, बल्कि कब्ज और बवासीर जैसी समस्याओं में भी राहत देता है। आयुर्वेद के अनुसार, इसके पाउडर को छाछ के साथ लेने से पाचन तंत्र संतुलित रहता है और मल त्याग सुचारु होता है। इससे बवासीर में होने वाली तकलीफ भी कम हो सकती है। नियमित और सही मात्रा में इसका सेवन करने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं धीरे-धीरे नियंत्रित हो सकती हैं।

    बच्चों के पेट के कीड़े और कमजोरी में उपयोगी

    बच्चों में पेट के कीड़े होना एक आम समस्या है, खासकर जब वे बिना हाथ धोए खाना खाते हैं। ऐसे में रोजाना खाली पेट अनार के दाने खिलाना फायदेमंद होता है। इससे आंतों में मौजूद कीड़ों का नाश होता है और पेट दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा, अगर शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो, तो रोज एक अनार खाना फायदेमंद माना जाता है। ध्यान रखें कि जूस की बजाय सीधे दाने खाना बेहतर होता है, क्योंकि इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद रहता है।