Category: Lifestyle

  • स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम

    स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम


    नई दिल्ली । आयुर्वेद बताता है कि भारतीय रसोई घर में ऐसे कई मसाले हैं जिनके सेवन से कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को मात दी जा सकती है। ऐसे ही एक मसाले का नाम जायफल है जो न केवल व्यंजनों में स्वाद और खुशबू जोड़ता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है।रसोई घर में रखा जायफल स्वाद बढ़ाने में कारगर है। औषधीय गुणों से भरपूर जायफल के बारे में आयुर्वेद विस्तार से जानकारी देता है। इसे दाल करी सब्जियां और मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
    इसकी अनोखी सुगंध और हल्की मिठास किसी भी डिश को चार चांद लगा देती है।भारतीय व्यंजनों में जायफल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। इसे अक्सर धनिया हल्दी मिर्च और अन्य मसालों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है जो डिश को ताजगी और मसालेदार स्वाद देता है। गरम मसाला में भी जायफल शामिल होता है। मिठाइयों जैसे हलवा खीर या लड्डू में इसका पाउडर डालने से स्वाद दोगुना हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जायफल सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला नहीं बल्कि सेहत का साथी भी है। जायफल का सबसे बड़ा फायदा नींद की समस्या में है। यह प्राकृतिक रूप से मानसिक शांति प्रदान करता है और अनिद्रा से राहत दिलाता है। रात को दूध में थोड़ा सा पीसा जायफल मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है। इसके अलावा जायफल पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह गैस अपच पेट फूलना और कब्ज जैसी आम समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।

    जायफल में मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं जिससे भोजन आसानी से पचता है। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सीमित मात्रा में जायफल का सेवन शरीर के लिए लाभकारी है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो इम्यूनिटी बढ़ाता है और सूजन कम करता है। हालांकि ज्यादा मात्रा में जायफल हानिकारक हो सकता है इसलिए रोजाना थोड़ी मात्रा ही इस्तेमाल करें। गर्भवती महिलाएं या कोई दवा ले रहे लोग डॉक्टर से सलाह लें।

  • रक्त संचार बेहतर कर भरपूर एनर्जी देता है वृश्चिकासन अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ

    रक्त संचार बेहतर कर भरपूर एनर्जी देता है वृश्चिकासन अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ


    नई दिल्ली । व्यस्त दिनचर्या और कार्य का बढ़ता तनाव शरीर के साथ-साथ मन को भी शीघ्र बीमारियों की चपेट में ले लेता है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने का सबसे प्रभावी तरीका है योगासनों को दिनचर्या में शामिल करना। ऐसा ही एक बेहतरीन आसन है वृश्चिकासनजिसे स्कॉर्पियन पोज भी कहा जाता है। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर बिच्छू की आकृति जैसा बन जाता है। इसके अभ्यास से शारीरिक मजबूतीलचीलापन और मानसिक शांति मिलती है।
    मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसारवृश्चिकासन के रोजाना अभ्यास से शरीर को एक-दो नहींकई लाभ मिलते हैं। वृश्चिकासन या स्कॉर्पियन पोज एक इनवर्टेड बैकबेंड आसन हैजिसमें कोहनियों पर संतुलन बनाते हुए पैरों को सिर की ओर झुकाया जाता है। यह आसन कंधोंबाजुओंपीठ और कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। योग एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ता हैजिससे कमर दर्द और पीठ की समस्याओं में राहत मिलती है। साथ हीयह पेट की मांसपेशियों को खींचता हैपाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। वृश्चिकासन एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है।

    यह मस्तिष्क में रक्त संचार सुधारता हैजिससे स्मरण शक्ति और फोकस बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह आसन हृदय के लिए भी लाभकारी हैक्योंकि इनवर्टेड पोजिशन में रक्त प्रवाह संतुलित होता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इस आसन को करने के लिए सबसे पहले मयूरासन की स्थिति में आएं। कोहनियों को कंधों के नीचे रखें और हथेलियों से जमीन को पकड़ें। शरीर को ऊपर उठाते हुए पैरों को सीधा रखें। अब धीरे-धीरे रीढ़ को झुकाते हुए पैरों को सिर की ओर लाएंताकि पैरों की उंगलियां सिर को छूने की कोशिश करें।

    संतुलन बनाए रखें और गहरी सांस लें। शुरुआत में 10-20 सेकंड तक रुकेंफिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। अभ्यास के बाद शवासन या बालासन में विश्राम करें। वृश्चिकासन उन्नत आसन हैइसलिए शुरुआती लोग योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें। एक्सपर्ट बताते हैं कि कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। जैसे हाई ब्लड प्रेशरहृदय रोगचक्कर आने की समस्यागर्भावस्था या पीठ-कमर में चोट वाले लोग इसे न करें। वार्म-अप जरूर करेंजैसे डॉल्फिन पोज या प्लैंक। अगर गर्दन या कंधों में दर्द हो तो न करें। गलत तरीके से करने पर चोट लग सकती है।

  • बिना काम के पूरे दिन थकान अनदेखा न करें हो सकती है इस विटामिन की कमी

    बिना काम के पूरे दिन थकान अनदेखा न करें हो सकती है इस विटामिन की कमी


    नई दिल्ली । काम के बाद थकान होना स्वाभाविक होता है लेकिन अगर इसका अहसास पूरे दिन बना रहता है तो इसे नजरअंदाज न करें। थकान के पीछे कई कारण हो सकते हैं लेकिन बार-बार होने वाली थकान कमजोरी की निशानी है जो पूरे शरीर को बेजान बना देती है। शरीर की कमजोरी विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की कमी का संकेत देती है।

    विटामिन बी कॉम्प्लेक्स बाकी विटामिन की तरह ही हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। विटामिन बी कॉम्प्लेक्स में एक नहीं बल्कि आठ अलग-अलग तरह के विटामिन होते हैं जिनमें विटामिन बी-1 बी-2 बी-3 बी-5 बी-6 बी-7 बी-9 और बी-12 होते हैं जो पूरे शरीर का ऊर्जा हाउस है। हर विटामिन शरीर के अलग-अलग हिस्सों को ऊर्जा देने का काम करता है।

    अगर इसमें से किसी भी विटामिन की कमी शरीर में होती है तो थकान बाल झड़ना चक्कर आना मस्तिष्क की नसों का कमजोर होना याददाश्त की समस्या स्किन से जुड़ी परेशानी हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन एनीमिया आंखों की रोशनी कमजोर होना डिप्रेशन रक्त वाहिकाओं में अत्याधिक जोर पड़ना और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होते हैं।

    विटामिन बी कॉम्प्लेक्स हमारे भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करता है। ये पानी में घुलनशील विटामिन हैं जो शरीर को तेजी से ऊर्जा देने का काम करते हैं। अगर भोजन ऊर्जा में नहीं बदल पाता तो शरीर में बाकी पोषक तत्वों की कमी होती है। ऐसे में मन और तन दोनों की थकान महसूस होती है।

    अब सवाल आता है कि विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की कमी को कैसे पूरा किया जा सकता है। आहार में बहुत कम ही विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है। शाकाहारी भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां साबुत अनाज दूध दही और कुछ फलों में ही विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है जबकि मांसाहारी भोजन में मांस मछली चिकन और अंडे में पाया जाता है।

    शरीर में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स का अवशोषण सही तरीके से हो सकता है। इसके लिए चाय और कॉफी का सेवन कम करें। डिब्बा बंद उत्पादों का सेवन भी करने से बचें और अगर फिर भी विटामिन की पूर्ति नहीं होती है तो डॉक्टर की सलाह के बाद सप्लीमेंट भी ले सकते हैं।

  • दोस्तों के साथ नए साल की शुरुआत को बनाएं यादगार भारत की इन 5 जगहों पर करें न्यू ईयर ट्रिप प्लान

    दोस्तों के साथ नए साल की शुरुआत को बनाएं यादगार भारत की इन 5 जगहों पर करें न्यू ईयर ट्रिप प्लान


    नई दिल्ली । नया साल आने में अब गिनती के ही दिन बचे हैं और ऐसे में घूमने-फिरने की प्लानिंग जोरों पर है. ज्यादातर लोग चाहते हैं कि साल की शुरुआत किसी ऐसी जगह से हो जहां मस्ती सुकून और नए अनुभव एक साथ मिलें

    मनाली कसोल

    बर्फ से ढकी वादियां बोनफायर और पहाड़ी कैफे मनाली और कसोल नए साल के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन हैं. यहां दिन में स्नो एक्टिविटीज और रात में म्यूजिक व पार्टी का माहौल मिलता है.

    उदयपुर

    राजस्थान का रॉयल अंदाज न्यू ईयर को यादगार बना देता है. महलों में खास डिनर लोक कलाकारों की प्रस्तुति और आतिशबाजी सेलिब्रेशन को अलग रंग देती है.

    पुडुचेरी

    यहां नया साल शोर से नहीं बल्कि सुकून और खूबसूरती से मनाया जाता है. बीच के किनारे जश्न और व्हाइट टाउन की गलियां अलग ही अनुभव देती हैं.
    ग्रेट रण ऑफ कच्छ
    अगर कुछ हटकर करना चाहते हैं तो रण उत्सव बेहतरीन विकल्प है. सफेद रेगिस्तान लोक संगीत और टेंट स्टे न्यू ईयर को खास बनाते हैं.

    गोकर्ण


    कम भीड़ और शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए गोकर्ण सही जगह है. यहां बीच पर म्यूजिक बोनफायर और दोस्तों के साथ लंबी बातचीत का मजा लिया जा सकता है. चाहे पहाड़ हों समंदर या रेगिस्तान ये डेस्टिनेशन नए साल की शुरुआत को यादगार बना सकती हैं.

  • स्विट्जरलैंड भी लगेगा फीका! भारत के इन 5 रेलवे रूट्स पर दिखती है 'जन्नत' खिड़की से दिखेंगी बर्फीली वादियों का नजारा

    स्विट्जरलैंड भी लगेगा फीका! भारत के इन 5 रेलवे रूट्स पर दिखती है 'जन्नत' खिड़की से दिखेंगी बर्फीली वादियों का नजारा


    नई दिल्ली । भारत में ट्रेन यात्राओं का अपना ही एक जादू हैपहियों की लयबद्ध खड़खड़ाहट खिड़की के बाहर लगातार बदलते नज़ारे और हर मील के साथ रोमांच का बढ़ता एहसास. विस्टाडोम कोच इस अनुभव को एक नए लेवल पर ले जाते हैं. घूमने वाली रिक्लाइनिंग सीटों कांच की छतों और बड़ी पैनोरमिक खिड़कियों के साथ ये कोच यात्रियों को प्रकृति की भव्यता में डूबने का मौका देते हैं. बर्फ से ढके पहाड़ों से लेकर हरी-भरी घाटियों और झरनों तक यहां भारत भर के कुछ सबसे खूबसूरत विस्टाडोम ट्रेन रूट दिए गए हैं. आइए जानते इन 5 रेलवे रूट्स के बारे में विस्तार से
    .
    जम्मू और कश्मीर विस्टाडोम स्पेशल कोच बडगाम से बनिहाल तक की यह 90 किलोमीटर की यात्रा यात्रियों को कश्मीर घाटी की लुभावनी सुंदरता में डुबो देती है. श्रीनगर अवंतीपोरा अनंतनाग और काजीगुंड से गुज़रते हुए ट्रेन बर्फ से ढकी चोटियों चमकती धाराओं और हरे-भरे घास के मैदानों के मनोरम दृश्य दिखाती है. 2023 में लॉन्च किया गया यह कांच की छत वाला कोच यात्रियों को प्रकृति का एक अभिन्न हिस्सा होने का एहसास कराता है जिससे यात्रा उतनी ही मनमोहक हो जाती है जितनी कि मंज़िल 
    डूअर्स न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस ​​यह ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी से अलीपुरद्वार जंक्शन तक 169 किलोमीटर की दूरी तय करती है और पश्चिम बंगाल के डूअर्स इलाके से गुज़रती है. खिड़कियों के बाहर घने जंगल फैले हुए चाय के बागान और पूर्वी हिमालय की खूबसूरत पहाड़ियाँ दिखाई देती हैं. वन्यजीवों को देखने से अनुभव और भी बेहतर हो जाता है और यह यात्रा भूटान का रास्ता जैसी लगती है. विस्टाडोम कोच हर मोड़ पर एक नया मनमोहक नज़ारा दिखाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं
    हिमाचल प्रदेश कालका-शिमला NG एक्सप्रेस ​​यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट कालका-शिमला लाइन इंजीनियरिंग और प्राकृतिक सुंदरता का एक शानदार उदाहरण है. 90 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी में ट्रेन 103 सुरंगों 800 पुलों और लगभग हज़ार मोड़ों से गुज़रती है. चीड़ के जंगल गहरी घाटियाँ और शानदार पहाड़ों के नज़ारे पूरे रास्ते की शोभा बढ़ाते हैं. विस्टाडोम कोच की चौड़ी कांच की छत और खिड़कियाँ इस ऐतिहासिक यात्रा को हिमाचली पहाड़ियों का एक शानदार पैनोरमिक अनुभव बना देती हैं
    गुजरात अहमदाबाद-केवडिया जन शताब्दी एक्सप्रेस ​​यह रूट अहमदाबाद को एकता नगर से जोड़ता है जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का गेटवे है. यात्री नर्मदा नदी और आसपास के नज़ारों का शानदार व्यू देख सकते हैं. विस्टाडोम कोच इस अनुभव को और भी खास बनाते हैं जिससे एक आम ट्रेन यात्रा एक खूबसूरत एडवेंचर में बदल जाती है. भारत की सबसे ऊंची मूर्ति देखने जाने वालों के लिए यह यात्रा अपने आप में एक बड़ा आकर्षण बन जाती है
    असम न्यू हाफलोंग स्पेशल टूरिस्ट ट्रेन गुवाहाटी से न्यू हाफलोंग तक की यह 269 किलोमीटर की यात्रा असम की प्राकृतिक सुंदरता के शानदार नज़ारे दिखाती है. पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों को घुमावदार पहाड़ियाँ हरी-भरी घाटियाँ और शांत नदियाँ देखने को मिलती हैं. माइबोंग में रुकने से यात्रा में सांस्कृतिक अनुभव जुड़ जाता है जबकि विस्टाडोम कोच की बड़ी खिड़कियाँ इस क्षेत्र की अनछुई सुंदरता को दिखाती हैं. यह सिर्फ़ यात्रा का एक ज़रिया नहीं है; यह नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के नज़ारों का एक चलता-फिरता कैनवस है

  • सर्दियों में आलस्य और पेट की समस्याओं से राहत देगा धनुरासन, जानें इसके अद्भुत फायदे

    सर्दियों में आलस्य और पेट की समस्याओं से राहत देगा धनुरासन, जानें इसके अद्भुत फायदे

    नई दिल्ली, 25 दिसंबर (आईएएनएस)। सर्दियों के आते ही शरीर में सुस्ती छा जाती है और तले-भुने भोजन की वजह से पेट संबंधी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में योग अभ्यास आपको ऊर्जावान और तंदुरुस्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कड़ी में धनुरासन एक ऐसा योगासन है, जो शरीर को ऊर्जावान बनाने के साथ फिट भी रखता है।

    ‘धनुरासन’ एक संस्कृत शब्द है, ‘धनुर’ का अर्थ ‘धनुष’ और ‘आसन’ का अर्थ ‘मुद्रा’ है। इस आसन को करने के दौरान शरीर धनुष की तरह झुकता है। यह आसन शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने, लचीलापन बढ़ाने और कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है।

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, धनुरासन एक प्रभावी योगासन है, जिससे पेट और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। साथ ही, यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज और अपच दूर करता है, रक्त संचार बढ़ाता है, वजन घटाने में मदद करता है, और मानसिक शांति प्रदान करता है, जिसके लिए पेट के बल लेटकर घुटनों को मोड़कर टखनों को हाथों से पकड़ते हुए छाती और जांघों को ऊपर उठाया जाता है।

    इसके अलावा, यह फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है। इसके नियमित अभ्यास से कमर दर्द, मधुमेह नियंत्रण और यहां तक कि हृदय स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है। महिलाओं के लिए यह मासिक धर्म की अनियमितता दूर करने में भी उपयोगी है।

    इसको विधिवत करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं, पैरों को एक साथ और हाथों को शरीर के बगल में रखें। अब सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें और एड़ियों को हाथों से पकड़ें। सांस लेते हुए जांघों, सिर और छाती को पेट के निचले हिस्से पर केंद्रित करते हुए जितना संभव हो ऊपर उठाएं। इस स्थिति को 10-20 सेकंड तक बनाए रखना चाहिए। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाना चाहिए।

    इसके नियमित अभ्यास से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं, लेकिन किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर इसे करने से परहेज करें या फिर किसी योग विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें।

  • सर्दियों में चमकेगा बेजान पड़ा चेहरा! नेचुरल ग्लो के लिए अपनाएं ये देसी स्किनकेयर रूटीन

    सर्दियों में चमकेगा बेजान पड़ा चेहरा! नेचुरल ग्लो के लिए अपनाएं ये देसी स्किनकेयर रूटीन


    नई दिल्ली । सर्दियों में डल और ड्राई स्किन के साथ फटे होंठों से सभी परेशान रहते हैं. ऐसे में सर्दियों में स्किन केयर करने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. मगर खूबसूरत चेहरे और ग्लोइंग स्किन के लिए क्रीम की जरूरत नहीं होती है बल्कि इंटरनल बैलेंस और बाहरी पोषण जरूरी होता है. अगर आप सर्दियों में इन देसी स्किन केयर रूटीन को फॉलो करते हैं तो पूरी ठंड आपकी स्किन दमकती रहेगी.

    देसी घी का पानी पिएं

    सबसे पहले हर रोज एक चम्मच देसी घी को गर्म पानी और दूध के साथ पिएं. यह स्किन के टिशूज को गहराई से पोषण देता है और रूखेपन को रोकने में मदद करता है. इससे स्किन ड्राई कम होती है और सॉफ्ट रहती है. देसी घी सिर्फ हमारे खाने को टेस्टी नहीं बनाता है बल्कि हमारी स्किन को भी सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है.
    रोज खाएं 1 आंवला
    सर्दियों में रोजाना 1 आंवला खाने से कोलेजन और इम्युनिटी बढ़ती है और चेहरे को नेचुरल ग्लो भी मिलता है. यह विटामिन सी का सबसे बेहतरीन सोर्स माना जाता है और इसे आप कई तरीके से अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं इसका अचार या आंवला शॉट भी आपकी मदद कर सकता है.

    खजूर किशमिश और फल खाएं
    खजूर किशमिश और सीजनल फलों को सर्दियों में जरूर खाएं इनसे आपकी स्किन को काफी फायदा मिलता है. इन सबको खाने से स्किन हाइड्रेटेड रहती है. खजूर और किशमिश को दूध में मिलाकर आप रात को सोने से पहले ले सकते हैं.
    तेल से मालिश
    ठंड में अगर आप नहाने से पहले अपनी बॉडी की तिल या बादाम के तेल से मालिश करते हैं तो यह आपके शरीर में मॉइस्चराइज को लॉक करता है. इसके अलावा ब्लड सर्कुलेशन भी सही होता है. वैसे शरीर की तेल से मसाज करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है.
    गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए
    सर्दियों में लोग गर्म पानी से नहाना शुरू कर देते हैं लेकिन यह आपकी स्किन के लिए सही नहीं होता है. इसलिए ठंड के मौसम में हमेशा हल्का गुनगुना पानी से ही नहाना चाहिए. गुनगुना पानी आपकी स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाता है और स्किन ड्राई नहीं होती है.
    घरेलू फेस पैक लगाएं
    सर्दियों में आप अपने चेहरे की चमक को बनाए रखने के लिए मुलेठी एलोवेरा चावल का आटा दूध और शहद से बना घरेलू फेस पैक लगाएं. चावल का आटा और एलोवेरा दोनों ही स्किन के लिए सबसे बेहतरीन फेस पैक माने जाते हैं और इनके साथ दूध और शहद भी स्किन के लिए शानदार काम करते हैं
    .
    दूध-उबटन से चेहरा साफ करें
    चेहरे पर साबुन लगाने से अक्सर ही एक्सपर्ट मना करते हैं और खासतौर पर सर्दियों में तो साबुन नहीं लगाना चाहिए. इसकी जगह आप अपने चेहरे को रॉ मिल्क या घरेलू उबटन से साफ करें. इससे चेहरे की नेचुरल क्लींजिंग होती है और पोषण भी मिलता है. इससे स्किन की नमी बनी रहती है और चेहरा रूखा नहीं लगता है.

  • Natural Skin Care Habits: अगर महंगी क्रीम और स्किन केयर प्रोडक्ट्स भी आपके चेहरे पर असर नहीं दिखा पा रहे हैं,

    Natural Skin Care Habits: अगर महंगी क्रीम और स्किन केयर प्रोडक्ट्स भी आपके चेहरे पर असर नहीं दिखा पा रहे हैं,


    नई दिल्‍ली । कई बार ऐसा होता है कि हम महंगी से महंगी क्रीम, सीरम और फेस पैक इस्तेमाल करते हैं, फिर भी चेहरे पर वो निखार नहीं आता जिसकी उम्मीद होती है। तब मन में सवाल उठता है कि आखिर कमी कहां रह गई। असल में स्किन की सेहत सिर्फ बाहर से लगाए गए प्रोडक्ट्स पर नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतों पर टिकी होती है। सही दिनचर्या अपनाकर, बिना ज्यादा खर्च किए भी चेहरे पर नैचुरल पिंक ग्लो लाया जा सकता है।अगर नींद पूरी नहीं होती, तो उसका असर सबसे पहले चेहरे पर दिखता है। डलनेस, डार्क सर्कल और पिंपल्स की बड़ी वजह खराब स्लीप साइकल मानी जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोज 7-8 घंटे की गहरी नींद स्किन सेल्स को रिपेयर करने में मदद करती है। अच्छी नींद से चेहरा फ्रेश दिखता है और नेचुरल ग्लो अपने आप नजर आने लगता है।

    पानी की कमी छीन लेती है चेहरे की चमक

    दिनभर कम पानी पीने से शरीर ही नहीं, स्किन भी डिहाइड्रेट हो जाती है। जब स्किन में नमी की कमी होती है, तो चेहरा बेजान और रूखा लगने लगता है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और स्किन अंदर से हाइड्रेट रहती है। यही आदत चेहरे पर पिंक और हेल्दी ग्लो लाने में मदद करती है।
    संतुलित डाइट है नेचुरल ब्यूटी का राज
    स्किन की सेहत का सीधा कनेक्शन हमारे खाने से होता है। ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड स्किन प्रॉब्लम्स बढ़ा सकता है। वहीं फल, सब्जियां, नट्स और प्रोटीन से भरपूर डाइट स्किन को जरूरी पोषण देती है। विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाना स्किन को अंदर से मजबूत बनाता है।

    चेहरे की सही सफाई भी है जरूरी

    दिनभर धूल-मिट्टी और पॉल्यूशन चेहरे पर जम जाता है। अगर स्किन को ठीक से साफ न किया जाए, तो पोर्स बंद हो सकते हैं और पिंपल्स की समस्या बढ़ सकती है। दिन में दो बार हल्के क्लींजर से फेस वॉश करना स्किन को साफ रखता है और नेचुरल ग्लो बनाए रखने में मदद करता है।

    धूप से बचाव भी है स्किन के लिए जरूरी

    बिना धूप से बचाव के बाहर निकलना स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है। सूरज की तेज किरणें स्किन एजिंग और पिगमेंटेशन बढ़ा सकती हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बाहर जाते समय सन प्रोटेक्शन अपनाना स्किन को लंबे समय तक हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखता है।

    तनाव कम करेंगे तो चेहरा खुद बोलेगा
    ज्यादा तनाव सिर्फ दिमाग ही नहीं, स्किन को भी प्रभावित करता है। स्ट्रेस हार्मोनल बदलाव लाकर स्किन प्रॉब्लम्स बढ़ा सकता है। रोज थोड़ा वक्त खुद के लिए निकालना, रिलैक्स करना और पॉजिटिव रहना चेहरे पर साफ नजर आता है।

  • ठंड में घूम आओ दक्षिण भारत के 5 खूबसूरत हिल स्टेशन सर्दियों में ट्रैवल का मजा हो जाता है डबल

    ठंड में घूम आओ दक्षिण भारत के 5 खूबसूरत हिल स्टेशन सर्दियों में ट्रैवल का मजा हो जाता है डबल

    नई दिल्ली । दक्षिण भारत के 5 खूबसूरत हिल स्टेशन सर्दियों का मौसम आते ही मन करता है कहीं ठंडी और सुकून भरी जगह पर घूमने निकल जाएं। अक्सर लोग उत्तर भारत के हिल स्टेशनों की तरफ रुख करते हैं लेकिन दक्षिण भारत के हिल स्टेशन भी इस मौसम में किसी जन्नत से कम नहीं लगते। यहां न ज्यादा कड़ाके की ठंड होती है और न ही भीड़-भाड़ का दबाव। हरियाली बादलों से ढके पहाड़ कॉफी-चाय के बागान और शांत माहौल सर्दियों में ट्रैवल का मजा दोगुना कर देते हैं। आइए जानते हैं दक्षिण भारत के ऐसे ही 5 हिल स्टेशनों के बारे में जो सर्दियों में और भी खूबसूरत हो जाते हैं।

    सर्दियों में और भी निखर जाती है ‘क्वीन ऑफ हिल्स
    तमिलनाडु की ऊटी को यूं ही पहाड़ों की रानी नहीं कहा जाता। सर्दियों में यहां की ठंडी हवा हरे-भरे गार्डन और चाय के बागान अलग ही सुकून देते हैं। सुबह की हल्की धुंध और शाम की ठंडक घूमने का मजा बढ़ा देती है। बोटैनिकल गार्डन और ऊटी लेक इस मौसम में खास तौर पर आकर्षक लगते हैं।
    चाय के बागानों के बीच सर्दियों का सुकून
    केरल का मुन्नार सर्दियों में और भी खूबसूरत नजर आता है। चारों तरफ फैले चाय के बागान ठंडी हवाएं और बादलों से ढकी पहाड़ियां मन को शांति देती हैं। यहां का मौसम सर्दियों में घूमने के लिए बिल्कुल परफेक्ट रहता है। नेचर लवर्स और कपल्स के लिए यह जगह किसी सपने से कम नहीं।
    बादलों और झीलों का रोमांटिक संगम
    तमिलनाडु का कोडाइकनाल सर्दियों में बेहद शांत और रोमांटिक हो जाता है। यहां की झीलें झरने और घुमावदार सड़कें सफर को यादगार बना देती हैं। ठंडी हवा और हल्की धूप के बीच टहलना यहां का खास अनुभव है। यही वजह है कि सर्दियों में यहां पर्यटकों की पसंद और बढ़ जाती है।
    कॉफी की खुशबू और सर्दियों की ठंडक
    कर्नाटक का कूर्ग सर्दियों में हरियाली और ठंडी फिजा के लिए जाना जाता है। कॉफी के बागान पहाड़ों से गिरते झरने और शांत वातावरण यहां की पहचान हैं। सर्दियों में मौसम इतना सुहावना होता है कि घूमने के साथ-साथ आराम करने का भी भरपूर मौका मिलता है।
    भीड़ से दूर सुकून भरी जगह
    अगर आप सर्दियों में भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत जगह पर जाना चाहते हैं तो यरकौड एक अच्छा विकल्प है। तमिलनाडु का यह हिल स्टेशन सर्दियों में ठंडी हवा और हरियाली से भर जाता है। यहां का शांत माहौल और प्राकृतिक खूबसूरती ट्रैवल को खास बना देती है।
    अब सर्दियों में घूम आओ
    दक्षिण भारत के ये हिल स्टेशन सर्दियों में न सिर्फ खूबसूरत लगते हैं बल्कि यहां का मौसम भी घूमने के लिए बेहद आरामदायक होता है। अगर आप इस सर्दी कुछ अलग और सुकून भरा ट्रैवल अनुभव चाहते हैं तो इन जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें। यहां आकर सच में ट्रैवल का मजा डबल हो जाता है।

  • प्रिंस एंड्रयू का रॉयल लॉज 30 कमरे शाही स्विमिंग पूल और 200 साल पुराना इतिहास जानें इसकी खासियत

    प्रिंस एंड्रयू का रॉयल लॉज 30 कमरे शाही स्विमिंग पूल और 200 साल पुराना इतिहास जानें इसकी खासियत


    नई दिल्ली । ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने हाल ही में अपने भाई प्रिंस एंड्रयू से उनके प्रिंस टाइटल को वापस लेने और रॉयल लॉज को खाली करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद रॉयल लॉज एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जेफ्री एपस्टीन विवाद के कारण यह संपत्ति अब एक नई दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है। आइए जानते हैं इस भव्य रॉयल लॉज के बारे में जो 200 साल पुरानी ऐतिहासिकता और शाही ठाठ-बाट का प्रतीक है।

    रॉयल लॉज की विशेषताएँ

    विंडसर ग्रेट पार्क के भीतर स्थित रॉयल लॉज एक विशाल संपत्ति है जिसमें 30 कमरे और कई शानदार सुविधाएं हैं। यह भव्य मैंसन 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और आधिकारिक रूप से Crown Estate के स्वामित्व में है। यहां शाही स्विमिंग पूल एवियरी पक्षी घर छह लॉज कॉटेज माली का घर और शाही सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए अलग आवास मौजूद हैं। रॉयल लॉज की सुरक्षा उच्च स्तर की है क्योंकि यह विंडसर कासल और अन्य शाही निवासों के बेहद करीब स्थित है।

    प्रिंस एंड्रयू को कैसे मिला रॉयल लॉज

    प्रिंस एंड्रयू को यह शानदार रॉयल लॉज दिवंगत महारानी एलिजाबेथ-II ने दिया था। 2003 में प्रिंस एंड्रयू ने रॉयल लॉज के लिए 1 मिलियन पाउंड का भुगतान किया और 75 साल की लीज ली जो 2078 तक वैध थी। इस लीज की शर्तों के अनुसार उन्हें लॉज के मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी। एंड्रयू ने इस संपत्ति पर लगभग 7.5 मिलियन पाउंड की राशि खर्च की और इसे 2005 तक रेनोवेट किया।यह लीज में दिलचस्प बात यह है कि सालाना किराया अगर मांगा जाए के रूप में एक  तुलसी के बीज निर्धारित किया गया था। इसका मतलब यह था कि यदि Crown Estate ने किराया मांगा तो उसे नाममात्र की राशि ही चुकानी पड़ती थी।

    रॉयल लॉज का ऐतिहासिक महत्व

    रॉयल लॉज का इतिहास 1660 के दशक से जुड़ा हुआ है। यह संपत्ति शिकार लॉज के रूप में शुरू हुई थी और 19वीं सदी की शुरुआत में जॉर्ज IV ने इसे एक निजी रिट्रीट और शिकार लॉज के रूप में बदल दिया था। तब से इसे रॉयल लॉज नाम मिला। इस रॉयल लॉज में 1930 के दशक में फिर से निर्माण किया गया और यहां ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ-II ने अपने बचपन के कुछ साल बिताए थे जब वे अपने माता-पिता ड्यूक और डचेस ऑफ यॉर्क के साथ यहां रहते थे। यहां तक कि क्वीन मदर ने भी इसे 2002 तक अपनी मृत्यु तक अपना विंडसर निवास बनाए रखा था। इसलिए रॉयल लॉज शाही परिवार के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका ऐतिहासिक और भावनात्मक मूल्य भी है।

    प्रिंस एंड्रयू द्वारा किए गए बदलाव

    प्रिंस एंड्रयू ने रॉयल लॉज में कई संरचनात्मक बदलाव किए थे। इन बदलावों में मुख्य रूप से अंदरूनी छत में सुधार बाहरी पेंटिंग और गेट एंट्रेंस पर नई टारमैकिन्ग शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने सुरक्षा के उपायों को मजबूत करने के लिए लाइटिंग और सिक्योरिटी कैमरे भी लगाए। रॉयल लॉज में पुलिस आवास और कंजर्वेटरी के निर्माण की अनुमति पहले से दी जा चुकी थी जो सुरक्षा बढ़ाने में मदद करती है।

    किंग चार्ल्स का फैसला

    हालांकि किंग चार्ल्स के आदेश के बाद प्रिंस एंड्रयू को रॉयल लॉज खाली करना पड़ा है लेकिन यह संपत्ति अब भी शाही परिवार के इतिहास का अहम हिस्सा है। इसके भविष्य को लेकर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है लेकिन इसे लेकर चर्चा और योजनाएं लगातार चल रही हैं।
    रॉयल लॉज की शाही धरोहर और प्रिंस एंड्रयू के साथ जुड़ी इस संपत्ति की कहानी ब्रिटिश शाही परिवार के इतिहास और संस्कृति को दर्शाती है।